<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104</id><updated>2012-02-16T03:06:08.885-08:00</updated><title type='text'>कलम बोलती है..</title><subtitle type='html'>इंसान बोलता है । तस्वीरें बोलती है । अब कोशिश है कि मेरी कलम भी बोले । आप के लिए । सिर्फ़ सच और सही ......सिर्फ़</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><link rel='next' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default?start-index=101&amp;max-results=100'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>135</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-4320687863151363509</id><published>2012-02-13T04:58:00.001-08:00</published><updated>2012-02-13T05:07:53.754-08:00</updated><title type='text'>बसंत के मौसम में प्रेम के फूल...............</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-gzl3FBYSzhY/TzkLDcW9CvI/AAAAAAAAA4M/C7VgNiT6TYU/s1600/1.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 271px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5708606156448795378" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-gzl3FBYSzhY/TzkLDcW9CvI/AAAAAAAAA4M/C7VgNiT6TYU/s400/1.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;बाजार आज के दौर में प्रेम से गुलजार हो गया है........हर तरफ प्रेम की महक नजर आती है....... गिफ्ट सेन्टरों में युवक युवतियों का सैलाब देखा जा सकता है जो प्रेम दिवस से पहले खरीदारी करनेका कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता .....भारत में भी पश्चिमी देशोकी तर्ज पर १४ फरवरी को १०० करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हर साल होता है जहाँ लोग अपने प्रेमी को खुश करने के लिए उपहार देने से लेकर मौज मस्ती करने में जेब गर्म करने में आगे रहते है............ &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;फरवरी को मनाया जाने वाला वैलेंटाइन डे अब महानगरो के साथ कस्बो में भी मनाया जाने लगा है... यह आज की एक हकीकत है... देश के कोने कोने में कमोवेश यही माहौल होगा... चाहे आप दिल्ली की चाँदनी चौक में हो या कनाट पैलेस में, या फिर इनके जैसे किसी भी महानगर या कसबे में ... हर जगह आप ऐसे दृश्यों को देख सकते है आज का युग बदल गया है... संस्कृति गई भाड में.... तभी तो हर जगह विदेशी संस्कृति पूत की भांति पाव पसारती जा रही है ..... हमारे युवाओ को लगा वैलेंटाइन का चस्का भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है... विदेशी संस्कृति की गिरफ्त में आज हम पूरी तरह से नजर आते है ... तभी तो शहरों से लेकर कस्बो तक वैलेंटाइन का जलवा देखते ही बनता है...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;आज आलम यह है यह त्यौहार भारतीयों में तेजी से अपनी पकड़ बना रहा है... वैलेंटाइन के चकाचौंध पर अगर दृष्टी डाले तो इस सम्बन्ध में कई किस्से प्रचलित है... रोमन कैथोलिक चर्च की माने तो यह "वैलेंटाइन "अथवा "वलेंतिनस " नाम के तीन लोगो को मान्यता देता है ....जिसमे से दो के सम्बन्ध वैलेंटाइन डे से जोड़े जाते है....लेकिन बताया जाता है इन दो में से भी संत " वैलेंटाइन " खास चर्चा में रहे ...कहा जाता है संत वैलेंटाइन प्राचीन रोम में एक धर्म गुरू थे .... उन दिनों वहाँपर "कलाउ डीयस" दो का शासन था .... उसका मानना था अविवाहित युवक बेहतर सेनिक हो सकते है क्युकियुद्ध के मैदान में उन्हें अपनी पत्नी या बच्चों की चिंता नही सताती ...अपनी इस मान्यता के कारण उसने तत्कालीन रोम में युवको के विवाह पर प्रतिबंध लगा दिया... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;किन्दवंतियो की माने तो संत वैलेंटाइन के क्लाऊ दियस के इस फेसले का विरोध करने का फेसला किया ... बताया जाता है वैलेंटाइन ने इस दौरान कई युवक युवतियों का प्रेम विवाह करा दिया... यह बात जब राजा को पता चली तो उसने संत वैलेंटाइन को १४ फरवरी को फासी की सजा दे दी....कहा जाता है की संत के इस त्याग के कारण हर साल १४ फरवरी को उनकी याद में युवा "वैलेंटाइन डे " मनाते है... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कैथोलिक चर्च की एक अन्य मान्यता के अनुसार एक दूसरे संत वैलेंटाइन की मौत प्राचीन रोम में ईसाईयों पर हो रहे अत्याचारों से उन्हें बचाने के दरमियान हो गई ....यहाँ इस पर नई मान्यता यह है की ईसाईयों के प्रेम का प्रतीक माने जाने वाले इस संत की याद में ही वैलेंटाइन डे मनाया जाता है...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;एक अन्य किंदवंती के अनुसार वैलेंटाइन नाम के एक शख्स ने अपनी मौत से पहले अपनी प्रेमिका को पहला वैलेंटाइन संदेश भेजा जो एक प्रेम पत्र था .... उसकी प्रेमिका उसी जेल के जेलर की पुत्री थी जहाँ उसको बंद किया गया था...उस वैलेंटाइन नाम के शख्स ने प्रेम पत्र के अन्त में लिखा" फ्रॉम युअर वैलेंटाइन" .... आज भी यह वैलेंटाइन पर लिखे जाने वाले हर पत्र के नीचे लिखा रहता है ... यही नही वैलेंटाइन के बारे में कुछ अन्य किन्दवंतिया भी है ... इसके अनुसार तर्क यह दिए जाते है प्राचीन रोम के प्रसिद्व पर्व "ल्युपर केलिया " के ईसाईकरण की याद में मनाया जाता है ....यह पर्व रोमन साम्राज्य के संस्थापक रोम्योलुयास और रीमस की याद में मनाया जाता है ... इस आयोजन पर रोमन धर्मगुरु उस गुफा में एकत्रित होते थे जहाँ एक मादा भेडिये ने रोम्योलुयास और रीमस को पाला था इस भेडिये को ल्युपा कहते थे... और इसी के नाम पर उस त्यौहार का नाम ल्युपर केलिया पड़ गया...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इस अवसर पर वहां बड़ा आयोजन होता था ॥ लोग अपने घरो की सफाई करते थे साथ ही अच्छी फसल की कामना के लिए बकरी की बलि देते थे.... कहा जाता है प्राचीन समय में यह परम्परा खासी लोक प्रिय हो गई... एक अन्य किंदवंती यह कहती है १४ फरवरी को फ्रांस में चिडियों के प्रजनन की शुरूवात मानी जाती थी.... जिस कारण खुशी में यह त्यौहार वहा प्रेम पर्व के रूप में मनाया जाने लगा ....&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;प्रेम के तार रोम से सीधे जुड़े नजर आते है ... वहा पर क्यूपिड को प्रेम की देवी के रूप में पूजा जाने लगा ...जबकि यूनान में इसको इरोशके नाम से जाना जाता था... प्राचीन वैलेंटाइन संदेश के बारे में भी एक नजर नही आता ॥ कुछ ने माना है की यह इंग्लैंड के राजा ड्यूक के लिखा जो आज भी वहां के म्यूजियम में रखा हुआ है.... ब्रिटेन की यह आग आज भारत में भी लग चुकी है... अपने दर्शन शास्त्र में भी कहा गया है " जहाँ जहाँ धुआ होगा वहा आग तो होगी ही " सो अपना भारत भी इससे अछूता कैसे रह सकता है...? युवाओ में वैलेंटाइन की खुमारी सर चदकर बोल रही है... १४ का सभी को बेसब्री से इंतजार है... इस दिन के लिए सभी पलके बिछाये बैठे है... प्रेम का इजहार जो करना है ?.......वैलेन्टाइन प्रेमी १४ फरवरी को एक बड़े त्यौहार से कम नही समझते है.... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;अभी का समय ऐसा है जहाँ युवक युवतिया प्यार की सही परिभाषा नही जान पाये है... वह इस बात को नही समझ पा रहे है कि प्यार को आप एक दिन के लिए नही बाध सकते... वह प्यार को हसी मजाक का खेल समझ रहे है.... सच्चे प्रेमी के लिए तो पूरा साल प्रेम का प्रतीक बना रहता है ... लेकिन आज के समय में प्यार की परिभाषा बदल चुकी है ... इसका प्रभाव यह है आज १४ फरवरी को प्रेम दिवस का रूप दे दिया गया है... इस कारण संसार भर के "कपल "प्यार का इजहार करने को उत्सुक रहते है... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;१४ फरवरी का कितना महत्व बढ गया है इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है इस अवसर पर बाजारों में खासी रोनक छा जाती है .... गिफ्ट सेंटर में उमड़ने वाला सैलाब , चहल पहल इस बात को बताने के लिए काफी है यह किस प्रकार आम आदमी के दिलो में एक बड़े पर्व की भांति अपनी पहचान बनने में कामयाब हुआ है... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इस अवसर पर प्रेमी होटलों , रेस्ताराओ में देखे जा सकते है... प्रेम मनाने का यह चलन भारतीय संस्कृति को चोट पहुचाने का काम कर रहा है... यूं तो हमारी संस्कृति में प्रेम को परमात्मा का दूसरा रूप बताया गया है ॥ अतः प्रेम करना गुनाह और प्रेम का विरोधी होना सही नही होगा लेकिन वैलेंटाइन के नाम पर जिस तरह का भोड़ापन , पश्चिमी परस्त विस्तार हो रहा है वह विरोध करने लायक ही है ....वैसे भी यह प्रेम की स्टाइल भारतीय जीवन मूल्यों से किसी तरह मेल नही खाती..... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;आज का वैलेंटाइन डे भारतीय काव्य शास्त्र में बताये गए मदनोत्सव का पश्चिमी संस्करण प्रतीत होता है... लेकिन बड़ा सवाल जेहन में हमारे यह आ रहा है क्या आप प्रेम जैसे चीज को एक दिन के लिए बाध सकते है? शायद नही... पर हमारे अपने देश में वैलेंटाइन के नाम का दुरूपयोग किया जा रहा है ... वैलेंटाइन के फेर में आने वाले प्रेमी भटकाव की राह में अग्रसर हो रहे है.... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;एक समय ऐसा था जब राधा कृष्ण , मीरा वाला प्रेम हुआ करता था जो आज के वैलेंटाइन प्रेमियों का जैसा नही होता था... आज लोग प्यार के चक्कर में बरबाद हो रहे है... हीर_रांझा, लैला_ मजनू के प्रसंगों का हवाला देने वाले हमारे आज के प्रेमी यह भूल जाते है मीरा वाला प्रेम सच्ची आत्मा से सम्बन्ध रखता था ... आज प्यार बाहरी आकर्षण की चीज बनती जा रही है.... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;प्यार को गिफ्ट में तोला जाने लगा है... वैलेंटाइन के प्रेम में फसने वाले कुछ युवा सफल तो कुछ असफल साबित होते है .... जो असफल हो गए तो समझ लो बरबाद हो गए... क्युकि यह प्रेम रुपी "बग" बड़ा खतरनाक है .... एक बार अगर इसकी जकड में आप आ गए तो यह फिर भविष्य में भी पीछा नही छोडेगा.... असफल लोगो के तबाह होने के कारण यह वैलेंटाइन डे घातक बन जाता है... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;वैलेंटाइन के नाम पर जिस तरह की उद्दंडता हो रही है वह चिंतनीय ही है... अश्लील हरकते भी कई बार होती देखी जा सकती है...संपन्न तबके साथ आज का मध्यम वर्ग और अब निम्न तबका भी इसके मकड़ जाल में फसकर अपना पैसा और समय दोनों ख़राब करते जा रहे है... वैलेंटाइन की स्टाइल बदल गई है ... गुलाब गिफ्ट दिए ,पार्टी में थिरके बिना काम नही चलता .... यह मनाने के लिए आपकी जेब गर्म होनी चाहिए... यह भी कोई बात हुई क्या जहाँ प्यार को अभिव्यक्त करने के लिए जेब की बोली लगानी पड़ती है....? &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कभी कभार तो अपने साथी के साथ घर से दूर जाकर इसको मनाने की नौबत आ जाती है... डी जे की थाप पर थिरकते रात बीत जाती है... प्यार की खुमारी में शाम ढलने का पता भी नही चलता ....आज के समय में वैलेंटाइन प्रेमियों की तादात बढ रही है .... साल दर साल ... इस बार भी प्रेम का सेंसेक्स पहले से ही कुलाचे मार रहा है.... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;वैलेंटाइन ने एक बड़े उत्सव का रूप ले लिया है... मॉल , गिफ्ट, आर्चीस , डिस्को थेक, मेक डोनाल्ड आज इससे चोली दामन का साथ बन गया है... अगर आप में यह सब कर सकने की सामर्थ्य नही है तो आपका प्रेमी नाराज .... बस बेटा ....प्रेम का तो दी एंड समझ लो.... वैलेंटाइन मनाना सबकी नियति बन चुका है.... आज प्यार की परिभाषा बदल गई है .... वैलेंटाइन का चस्का हमारे युवाओ में तो सर चदकर बोल रहा है , लेकिन उनका प्रेम आज आत्मिक नही होकर छणिक बन गया है... उनका प्यार पैसो में तोला जाने लगा है .... आज की युवा पीड़ी को न तो प्रेम की गहराई का अहसास है न ही वह सच्चे प्रेम को परिभाषित कर सकते है... उनके लिए प्यार मौज मस्ती का खेल बन गया है ....... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-4320687863151363509?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/4320687863151363509/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=4320687863151363509' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/4320687863151363509'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/4320687863151363509'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2012/02/blog-post_13.html' title='बसंत के मौसम में प्रेम के फूल...............'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-gzl3FBYSzhY/TzkLDcW9CvI/AAAAAAAAA4M/C7VgNiT6TYU/s72-c/1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-4082398762300518108</id><published>2012-02-09T03:32:00.000-08:00</published><updated>2012-02-09T03:54:36.344-08:00</updated><title type='text'>उमा में चमत्कार का अक्स देखता भाजपा हाईकमान.......</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-DTjj5W4JaJw/TzOvUpMFLlI/AAAAAAAAA4A/GloOo2z_Xyc/s1600/1275.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 267px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5707097921997319762" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-DTjj5W4JaJw/TzOvUpMFLlI/AAAAAAAAA4A/GloOo2z_Xyc/s400/1275.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;"जैसे उडी जहाज को पंछी पुनि जहाज पर आवे"..... कुछ समय पहले भारतीय जनता पार्टी में साध्वी ने कुछ इन्ही पंक्तियों में अपनी वापसी को मीडिया के खचाखच भरे समारोह में बयां किया ......पार्टी के आला नेताओं के तमाम विरोधो के बावजूद भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी उमा को पार्टी में लाने में कामयाब हो गए..... इस विरोध का असर उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी देखने को मिला जिसमे पार्टी के जेटली, स्वराज, जैसे कई बड़े नेता शामिल तक नही थे .......इन सभी की गिनती उमा के धुर विरोधियो के रूप में की जाती थी.....पन्ने टटोले तो याद कीजिये उस समय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पार्टी के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अध्यक्ष प्रभात झा तक को इसकी भनक तक नही लगी... प्रभात झा का तो यह हाल था कि उमा की पार्टी में वापसी से २ घंटे पहले जब उनसे पार्टी में उमा की वापसी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा इस पर कुछ नही कहना है ॥ परन्तु २ घंटे बाद प्रभात झा और मुख्यमंत्री ने इस विषय पर गेंद केन्द्रीय नेताओं के पाले में फेकते हुए कहा जब भी कोई नेता पार्टी में आता है तो उसका स्वागत होता है...... उमा का हम स्वागत करते है ........&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;ठीक इसी तर्ज पर उमा भारती को टिकट देने की घोषणा जब नितिन गडकरी ने पिछले महीने की तो उन्होंने यू पी चुनाव से ठीक पहले चरखारी से उमा को टिकट देकर भाजपा में खलबली मचा दी......... खासतौर से यू पी में खुद को बड़ा नेता मानने वाले कई नेताओ का सिंहासन इस खबर के बाद खतरे में नजर आने लगा............. घर वापसी के बाद उमा को लेकर माहौल उत्तर प्रदेश भाजपा में लम्बे समय से बन रहा था लेकिन भाजपा के अन्दर एक तबका ऐसा था जो उमा को टिकट देने का विरोध कर रहा था ........दरअसल उमा की वापसी का माहौल जसवंत सिंह की भाजपा में वापसी के बाद बनना शुरू हो गया था... उस समय उमा भारती भैरो सिंह शेखावत के निधन पर जसवंत के साथ राजस्थान गई थी.....संघ ने दोनों की साथ वापसी की भूमिका तय कर ली थी लेकिन उमा विरोधी खेमा उनकी वापसी की राह में रोड़े अटकाते रहा .......मध्य प्रदेश में तो उमा को सबसे ज्यादा विरोध का सामना करना पड़ता था.....यहाँ उमा विरोधी कई नेता उन्हें टिकट तो क्या पार्टी में दुबारा लेने के हिमायती नहीं दिखाई देते थे .... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;जब उमा भारती पिछले साल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के मुख्यमंत्री के पिता की तेरहवी में आडवानी और राजनाथ सिंह के साथ नजर आई तो फिर उमा की पार्टी में वापसी को बल मिलने लगा ......इसके बाद पार्टी में गडकरी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनका मोहन भागवत के साथ मुलाकातों का सिलसिला चला ॥ खुद भागवत ने भी पार्टी से बाहर गए नेताओं की वापसी का बयान दिया तो इसके बाद उमा की वापसी को लेकर रस्साकशी शुरू हो गई ...... लेकिन मध्य प्रदेश के भाजपा नेता खुले तौर पर उनकी वापसी पर सहमति नही देते थे क्युकि उनको मालूम था अगर उमा पार्टी में वापसी आ गई तो वह मध्य प्रदेश सरकार के लिए खतरा बन जाएँगी......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कुछ यही बात भाजपा के यू पी में बड़े नेताओ के जेहन में बनी थी ......उनकी यू पी में वापसी का सीधा मतलब प्रदेश के भाजपा नेताओ के लिए एक खतरा था ........ उमा ने राम रोटी के मुद्दे पर भाजपा से किनारा कर लिया था ...कौन भूल सकता है जब उन्होंने आज से ६ साल पहले भरे मीडिया के सामने आडवानी जैसे नेताओं को खरी खोटी सुनाई थी और पार्टी को मूल मुद्दों से भटका हुआ बताया था .....लेकिन इस दौर में उन्होंने संघ परिवार से किसी भी तरह से दूरी नही बढाई .....शायद इसी के चलते संघ लम्बे समय से उनकी पार्टी में वापसी के साथ ही टिकट देने का हिमायती था ...यही नहीं यू पी सरीखे बड़े राज्य में अगर पार्टी का आलाकमान उनको वापस लाना चाहता था तो इसका बड़ा कारण उमा का करिश्माई नेतृत्व था... साथ ही वह कल्याण सिंह के बाद भाजपा का सबसे पुराना पिछडो का चेहरा थी...........&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;वैसे भी उमा भारती पार्टी में कट्टर हिंदुत्व के चेहरे की रूप में जानी जाती रही है ......कौन भूल सकता है अयोध्या के दौर को जब साध्वी के भाषणों ने पार्टी में नए जोश का संचार किया था .....उमा की इसी काबिलियत को देखकर पार्टी हाई कमान ने उनको २००३ में मध्य प्रदेश में उतारा जहाँ उन्होंने दिग्विजय सिंह के १० साल के शासन का खात्मा किया ..... इसके बाद २००४ में हुबली में तिरंगा लहराने और सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुचाने के कारण उनके खिलाफ वारेंट जारी हुआ और उन्होंने मध्य प्रदेश में सी ऍम पद से इस्तीफ़ा दे दिया.... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;वह भी एक उतार चदाव का दौर रहा जब भरी सभा में भाजपा के नेताओं को कैमरे के सामने खरी खोटी सुनाने के बाद उमा ने मध्य प्रदेश में अपनी अलग भारतीय जनशक्ति पार्टी बना ली..... २००८ के चुनावो में इसने ५ सीटे प्रदेश में जीती ..... उम्मीद की जा रही थी कि उमा की पार्टी बनने के बाद भाजपा को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा परन्तु ऐसा नही हुआ .... इसके बाद से उमा के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे ... हर बार उन्होंने मीडिया के सामने भाजपा को खूब खरी खोटी सुनाई परन्तु कभी भी संघ को आड़े हाथो नही लिया....शायद इसी के चलते संघ में उनकी वापसी को लेकर खूब चर्चाये लम्बे समय से होती रही ......... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिव राज सिंह चौहान और उमा भारती में शुरू से छत्तीस का आकडा रहा है ......उमा की वापसी का विरोध करने वालो में उनके समर्थको का नाम भी प्रमुखता के साथ लिया जाता रहा है.... शिव के समर्थक उनकी वापसी के कतई पक्ष में नही थे इसी के चलते उनकी वापसी बार बार टलती रही... यू पी में वापसी के बाद भी शिवराज अपने बयानों में कहा करते रहे वो मध्य प्रदेश से दूर रहेंगी..... लेकिन केन्द्रीय नेतृत्व के आगे शिव के समर्थको की इस बार एक नही चली......इसी के चलते पार्टी के आलाकमान के बुलावे पर शिवराज को उमा के साथ चरखारी समेत बुंदेलखंड में चुनावी सभाओ में जाना पड़ा .... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;उमा की यू पी में वापसी के बाद अब सबसे ज्यादा चिंता मध्य प्रदेश में होने लगी है ..... राजनीतिक विश्लेषको का मानना है अगर उमा यू पी चुनावो के बाद मध्य प्रदेश में वापस आ गई तो शिवराज का सिंहासन खतरे में पढ़ जायेगा .....वैसे भी प्रदेश में विधान सभा चुनाव की उलटी गिनतिया शुरू होनी ही है........खुद शिवराज सिंह को बाबूलाल गौर के समय जब सिंहासन सौपा गया था तो उमा ने केन्द्रीय नेताओं के इस फैसले का खुलकर विरोध किया था.......अब उमा की यू पी में वापसी से शिवराज के समर्थको की चिंता अब बढ़ रही है ... उमा के यू पी के अखाड़े में कूदने के बाद बैखोफ होकर शासन चला रहे मुख्यमंत्री शिवराज के लिए आगे की डगर आसान नही दिख रही..... क्युकि प्रदेश में शिव के असंतुष्टो का एक बड़ा खेमा मौजूद है जो किसी भी समय उमा के पाले में जाकर शिवराज सिंह के लिए खतरा उत्पन्न कर सकता है.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मध्य प्रदेश में आज भी उमा के समर्थको की कमी नही है .....पार्टी हाई कमान भले ही उनको उत्तर प्रदेश के चुनावो में आगे कर रहा है लेकिन साध्वी अपने को मध्य प्रदेश से कैसे अलग रख पायेगी अब यह बड़ा सवाल बनता जा रहा है ...... उमा को यू पी में टिकट दिलाने में इस बार नितिन गडकरी और संघ की खासी अहम भूमिका रही है.... पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश के मिशन २०१२ की कमान सौपी है ...यहाँ भाजपा का पूरी तरह सफाया हो चुका है...कभी उत्तर प्रदेश की पीठ पर सवार होकर पार्टी ने केंद्र की सत्ता का स्वाद चखा था... आज आलम ये है कि यहाँ पर पार्टी चौथे स्थान पर जा चुकी है ..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;१६ वी लोक सभा में दिल्ली के तख़्त पर बैठने के सपने देख रही भाजपा ने उमा को "ट्रम्प कार्ड" के तौर पर इस्तेमाल करने का मन बनाया है ताकि पिछड़ी जातियों के एक बड़े वर्ग को वह अपने पाले में ले सके.... खासतौर से मध्य प्रदेश से सटे वह इलाके जो बुंदेलखंड का प्रतिनिधित्व करते है जहाँ पर अभी "बहिन जी" का पलड़ा भारी बताया जा रहा है वहां उमा को स्टार प्रचारक बनाकर भाजपा मायावती के वोट बैंक को साधने का काम कर रही है.......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;उत्तर प्रदेश में अब उमा भारती राहुल गाँधी को सीधे चुनौती देते नजर आ रही है...........अपनी ललकार के दवारा उमा यू पी में मुलायम, माया, राहुल , दिग्गी राजा के सामने हुंकार भर रही है ..... अगर उत्तर प्रदेश के कुछ नेताओं का साथ उमा को मिलता तो वह पार्टी की सीटो में इस बार इजाफा कर सकती है ... लेकिन उत्तर प्रदेश में भी भाजपा गुटबाजी की बीमारी से ग्रसित है......पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही की राह अन्य नेताओं से जुदा है ......कलराज मिश्र के हाथ चुनाव समिति की कमान आने को राज्य में पार्टी के कई नेता नही पचा पा रहे है.....मुरलीमनोहर जोशी, राजनाथ सिंह जैसे नेता केंद्र की राजनीती में रमे है........... योगी आदित्यनाथ , विनय कटियार जैसे नेताओ को पार्टी भाव नहीं दे रही है... ऐसे में उमा को मुश्किलों का सामना करना होगा..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;सबको साथ लेकर चलने की एक बड़ी चुनौती उनके सामने है......उत्तर प्रदेश की जंग में उमा के लिए विनय कटियार , वरुण गाँधी और योगी आदित्यनाथ जैसे नेता निर्णायक साबित हो सकते है ..... आज भी इनका प्रदेश में अच्छा खासा जनाधार है॥ हिंदुत्व के पोस्टर बॉय के रूप में ये चेहरे अपनी छाप छोड़ने में अहम् साबित हो सकते है....लेकिन अब तक इन नेताओ ने अपने को पार्टी के चुनाव प्रचार से दूर कर रखा है.....साथ में इस समय भाजपा अध्यक्ष गडकरी लम्बे समय से पार्टी का झंडा उठाये स्वयंसेवकों के बजाय जीतने वाले नए नवेले उम्मीदवारों पर दाव खेलने से नहीं चूक रहे.......ऐसे में पार्टी से नाराज चल रहे लोगो का साथ मिलना जब मुश्किल हो चला है तो उमा का करिश्मा क्या चलेगा यह कहना दूर की गोटी है....... पार्टी में इस समय सबसे बुरा हाल अगर किसी नेता का है तो वह है वरुण गाँधी ..... पार्टी ने उनकी पसंद को अनदेखा कर पीलीभीत से लगे कई इलाको में प्रत्याशियों को टिकट बांटे है........ऐसे में उमा कैसे चमत्कार कर पाएंगी यह अपने में पहेली बनता जा रहा है..............&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;भले ही प्रेक्षक यह कहे कि भाजपा छोड़कर चले गए नेता जब दुबारा पार्टी में आते है... चुनाव लड़ते है तो उनकी कोई पूछ परख नही होती ... साथ ही वे जनाधार पर कोई असर नही छोड़ पाते लेकिन उमा के मामले में ऐसा नही है.... वह जमीन से जुडी हुई नेता है.... अपने ओजस्वी भाषणों से वह भीड़ खींच सकती है.....कल्याण सिंह के जाने के बाद वह पार्टी में पिछडो के एक बड़े वोट बैंक को अपने साथ साध सकती है.....साथ ही उत्तर प्रदेश में बेजान लग रही भाजपा संजय जोशी और उमा के जरिये अपनी खोयी हुई जमीन बचाने का काम कर सकती है.......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;उमा की वापसी के बाद अब गोविन्दाचार्य की भाजपा में वापसी की संभावनाओ को बल मिलने लगा है.... उमा के आने के बाद अब संघ गोविन्दाचार्य को पार्टी में वापस लेने की कोशिशो में लग गया है.... गडकरी कई बार उनकी वापसी को लेकर बयान देते रहे है परन्तु उमा की वापसी न हो पाने के चलते आज तक उनकी भी पार्टी में वापसी नही हो पायी....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;गोविन्दाचार्य को साथ लेकर पार्टी कई काम साध सकती है ... वह अभी रामदेव के काले धन से जुड़े मसले पर वह केंद्र सरकार से लम्बी लडाई लड़ रहे है.....इस समय केंद्र सरकार के खिलाफ व्यापक असंतोष है .... एक के बाद एक घोटालो में केंद्र सरकार घिरती जा रही है.......... भाजपा आम जनमानस का साथ इस समय लेना चाहती है... इसी के चलते संघ में रामदेव का पीछे से साथ देने को लेकर सहमति बन रही है......साथ ही अन्ना और रामदेव को अब केंद्र सरकार के खिलाफ लम्बी लड़ाई लड़ने के लिए आगे लाया जा रहा है जिसमे संघ को गोविन्दाचार्य सहयोग कर रहे है .... क्युकि उसे लगता है भ्रष्टाचार का मुद्दा उसे केंद्र की सवारी करा सकता है... ऐसे में संघ परिवार अपने पुराने साथियों को पार्टी में वापस लेना चाहता है ....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;उमा की वापसी के बाद अब संघ परिवार गोविन्दाचार्य को अपने साथ लाने की कोशिसो में जुट गया है.....गोविन्दाचार्य को भाजपा पार्टी के "थिंक टेंक " की रीड माना जाता है......हरिद्वार के एक महंत की माने तो उमा के यू पी के अखाड़े में आने के बाद अब भाजपा में गोविन्दाचार्य की जल्द वापसी हो सकती है.....खुद संघ उमा को इसके लिए मना रहा है ..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा और पांच राज्यों के चुनाव परिणाम भाजपा के अनुकूल आये तो गोविन्दाचार्य की भी भाजपा में वापसी होगी ..... उमा को चरखारी से यू पी के अखाड़े में उतारकर भाजपा ने अपने इरादे एक बार फिर जता दिए है ... उत्तर प्रदेश पर गडकरी की खास नजरे है ...पार्टी हिंदुत्व की सवारी कर पिछड़ी जातियों की पीठ पर सवार होकर यू पी में अपना प्रदर्शन सुधारने की कोशिशो में लगी है...... देखना होगा उमा में चमत्कार का अक्स देख रहे भाजपा हाई कमान की उम्मीदों में वह इस बार कितना खरा उतरती है ? &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-4082398762300518108?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/4082398762300518108/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=4082398762300518108' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/4082398762300518108'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/4082398762300518108'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2012/02/blog-post.html' title='उमा में चमत्कार का अक्स देखता भाजपा हाईकमान.......'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-DTjj5W4JaJw/TzOvUpMFLlI/AAAAAAAAA4A/GloOo2z_Xyc/s72-c/1275.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-4752943826279278012</id><published>2012-01-31T04:29:00.000-08:00</published><updated>2012-01-31T05:11:27.020-08:00</updated><title type='text'>"जिन लाहौर नही देख्या " पर जल्द आ रही है राजकुमार संतोषी की फिल्म --- असगर वजाहत</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-0wTXEV3UOqs/TyfnZqj7VZI/AAAAAAAAA3c/MDa9zw1IbSs/s1600/1.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 267px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5703781881195746706" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-0wTXEV3UOqs/TyfnZqj7VZI/AAAAAAAAA3c/MDa9zw1IbSs/s400/1.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-X4hHs8An_ec/TyfnRIhXxBI/AAAAAAAAA3Q/IeqYpmagVHw/s1600/2.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 351px; DISPLAY: block; HEIGHT: 249px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5703781734619268114" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-X4hHs8An_ec/TyfnRIhXxBI/AAAAAAAAA3Q/IeqYpmagVHw/s400/2.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;असगर वजाहत हिन्दी के प्रतिष्ठित लेखक और प्रोफेसर रहे है.....वह ऐ जे किदवई जनसंचार केन्द्र जामिया मिल्लिया इस्लामिया नई दिल्ली के कार्यकारी निदेशक के तौर पर कार्य कर चुके है ..... उन्होंने यूरोप के कई विश्व विद्यालयो में विस्तार से जनसंचार सम्बन्धी व्याख्यान भी दिए है .........साथ ही वह लम्बे समय से लेखन , शिक्षण कार्य से भी जुड़े हुए है ....उनके ६ उपन्यास, ७ कहानी , ५ पूर्णकालिक नाटक, एक नुक्कड़ नाटक , एक यात्रा वृतान्त प्रकाशित हो चुका है....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आउटलुक नाम की चर्चित पत्रिका ने २००७ में उन्हें हिन्दी के दस सर्वश्रेष्ठ लेखको की सूची में शुमार किया..... उनकी रचनाओ के अनुवाद अनेक यूरोपीय और एशियाई भाषा में हो चुके है.... साथ ही उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;७० के दशक से वह हिन्दी फिल्मो की पटकथा भी लिख रहे है..... उन्होंने सुभाष घई ,विनय शुक्ला , मुजफ्फर अली सरीखी नामचीन हस्तियों के लिए भी अपना लेखन किया है......१९७९ में उन्होंने गजल की कहानी वृत्त चित्र बनाया था और उसके बाद १९८२ -८३ में "बूँद बूँद " धारावाहिक के लिए कहानी, पटकथा और संवाद लिखे ..... वर्तमान में वह उनके नाटक " जिन लाहौर नही देख्या "के कारण चर्चा में है ..... विभाजन की त्रासदी बयाँ करने और दिल को झकझोर देने वाले इस नाटक पर राजकुमार संतोषी फिल्म बनाने जा रहे है जो इस साल के अंत तक आने की सम्भावना है ......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;३० सालो से भी अधिक समय से वह देश भर में होने वाले सेमिनारो में पटकथा लेखन के गुर सिखाते आ रहे है........ बीते दिनों वजाहत से मेरी एक मुलाकात हुई...... इस बातचीत के मुख्य अंश ----&lt;/strong&gt; &lt;/em&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;"जिन लाहौर नही देख्या " की हर जगह चर्चा होती रहती है....... जब मै भोपाल में था तब भारत भवन में आपके इस नाटक का जादू लोगो पर सर चढ़कर बोलता था.... आज भी लोग इसे बहुत पसंद करते है..... इसको बनाने की प्रेरणा कहाँ से मिली आपको यह जानना चाहता हूँ .....?&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मैंने लाहौर के ऊपर एक संस्मरण पढ़ा था ... उसमे यह प्रसंग था .... वहीँ से इसे बनाने की प्रेरणा मिली.... सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश के साथ विभाजन की पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए यह नाटक बना ......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इस नाटक को देखने के लिए आज भी लोगो का भारी हुजूम उमड़ आता है ..... मैं तो खुद इसका गवाह भोपाल में रहा हूँ जिसे सांस्कृतिक गतिविधियों का केन्द्र कहा जाता है... क्या आपको इस बात की उम्मीद थी यह नाटक सफलता की ऊँची बुलंदियों को छूएगा ?&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;यह नाटक विभाजन की सच्ची घटना पर आधारित है.... जब भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजन हुआ था तो एक उम्रदराज महिला को पाकिस्तान में काफी संघर्ष करना पड़ा ॥ वही महिला मेरे इस नाटक की प्रेरणा बनी...... इस नाटक से इतनी ज्यादा उम्मीद तो नही थी लेकीन लोगो ने इसको खूब पसंद किया ..... मैंने शुरुवात में इतना जरुर सोचा था यह नाटक अच्छा है लेकिन इतनी बड़ी सफलता की उम्मीद नही थी मुझको ........&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;वर्तमान में आपका नया ताजा क्या चल रहा है ? कौन कौन से प्रोजेक्ट पर फिलहाल आप काम कर रहे है ?&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;नया नाटक "गाँधी और गोडसे" पूरा कर चुका हूँ..... इसके बारे में ज्ञानोदय में भी पढने को मिला होगा आपको.... दूसरा नाटक" तुलसी दास और मुगल शासक अकबर" के संबंधो पर आधारित है....&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;लेखन के अलावा आपके कौन कौन से शौक हैं ?&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;चित्रकारी के साथ साथ मुझे घूमना फिरना बहुत अच्छा लगता है .....साथ ही पेंटिंग मेरे मन को खूब भाती है.......&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;देखा जा रहा है आज के दौर में अच्छे पटकथा लेखक नही मिले पा रहे है ? इसके पीछे क्या कारण मानते है आप ?&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;आज की नई पीड़ी का पढने से कोई सरोकार नही है.......अगर आप अच्छा पढेंगे नही तो लिखेंगे कैसे ? इसलिए ज्यादा से ज्यादा पढने की आदत हमें डालनी चाहिए तभी अच्छी पटकथा हमारे सामने आएँगी.......&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;अच्छी पटकथा लेखन की बुनियादी शर्त क्या मानते है आप ? साथ ही जो नए लोग इस फील्ड में आना चाहते है उनके लिए किन चीजो का होना जरूरी है ?&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;तकनीकी लेखन में सृजनात्मकता बहुत जरुरी है .... लेकिन गौर करने लायक बात यह है कि पटकथा लेखक बनने के लिए कवि, उपन्यासकार होना जरुरी नही है....यह माना जाता है रचनात्मक प्रतिभा से सम्पन्न व्यक्ति पटकथा के फील्ड में अधिक सफल होता है.... दरअसल सच्चाई यह है कि रचनात्मक और सृजनात्मक प्रतिभा किसी भी व्यक्ति के अन्दर किसी भी रूप में हो सकती है.....हिन्दी सिनेमा में बड़ी तेजी के साथ परिवर्तन आ रहे है....यह बदलावों का नई तकनीको का दौर है..... इसका प्रभाव पटकथा लेखन पर साफ़ तौर पर पड़ता दिख रहा है.... भारतीय सिनेमा के साथ विश्व सिनेमा की जानकारी होना भी पटकथा लेखक के लिए आज के दौर में जरुरी बनती जा रही है......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-4752943826279278012?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/4752943826279278012/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=4752943826279278012' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/4752943826279278012'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/4752943826279278012'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2012/01/blog-post_31.html' title='&quot;जिन लाहौर नही देख्या &quot; पर जल्द आ रही है राजकुमार संतोषी की फिल्म --- असगर वजाहत'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-0wTXEV3UOqs/TyfnZqj7VZI/AAAAAAAAA3c/MDa9zw1IbSs/s72-c/1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-5822442881983307857</id><published>2012-01-19T01:37:00.000-08:00</published><updated>2012-01-31T00:55:10.824-08:00</updated><title type='text'>यू पी के डूबते जहाज को बचाने में जुटी भाजपा.......</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-eh68g6L6KGk/Tx03AFeeqYI/AAAAAAAAA2g/K7mQCOk_FBI/s1600/1.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 396px; DISPLAY: block; HEIGHT: 362px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5700773177930459522" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-eh68g6L6KGk/Tx03AFeeqYI/AAAAAAAAA2g/K7mQCOk_FBI/s400/1.jpg" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 376px; DISPLAY: block; HEIGHT: 303px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5700773004669499506" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-7GZiNaOuVAs/Tx022AB2OHI/AAAAAAAAA2U/WWT4b-DYMek/s400/5.jpg" /&gt; दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरताहै। " यह कथन भारतीय राजनीती के सम्बन्ध में परोक्ष रूप से सही मालूम पड़ता है ....एक दौर वह था जब आजाद भारत के लगभग सभी राज्यों में मुख्यमंत्रियों का ताज ब्राहमण जाति के उम्मीदवार को मिलता था । ब्राहमण जाति के सत्ता के सर्वोच्च उतुंग शिखर पर चढ़ने के कारण सचिवालय से लेकर मंत्रीमंडल तक में उस दौर में ब्राह्मण बिरादरी का सेंसेक्स अपने उच्तम स्तर तक बना रहता था लेकिन धीरे धीरे समय बदला और यह ब्राह्मण समाज सत्ता से दूर चला गया। आज बसपा सरीखी पार्टी की "सोशल इंजीनियरिंग " की बिसात पर यही ब्राह्मण समाज दलितों के साथ हाथ मिलाकर निचले स्तर पर बैठकर राजनीती की सवारी करता नजर आ रहा है.......ऊपर की जा रही ये बातें आपको थोडी अटपटी लग रहीं हो परन्तु हम इस फंडे को बेहतर ढंग से समझ सकते है ।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;यदि हम बात भारत के 80 सांसदों वाले सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के सम्बन्ध में करे तो चीजे समझ में आ जाती है। आज उत्तर प्रदेश में यही हो रहा है। हालाँकि कुछ समय पहले तक बहुजन समाज के हितों की बात करने वाली बसपा ब्राह्मणों को "बेक फ़ुट" पर धकेल दिया करती थी उसके संस्थापक नेता कांशी राम कहा करते थे "तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार".....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इन परिस्थितियों को समझने से पहले कांशी राम द्वारा उस समय कही गई बात को समझना पड़ेगा..... उस दौर में उन्होंने कहा था "मै ब्राह्मणों से कह रहा हूँ जात तोड़ो और समाज जोडो लेकिन यह तबका मेरी बात नही समझ पा रहा है एक समय आयेगा जब मै इन्ही के मुह से कहलाऊंगा जात और बंधन छोड़ो और समाज को जोड़ो "....... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;आज उत्तर प्रदेश में यही हो रहा है .... किसी समय "चल गुंडन की छाती पर मुहर लगेगी हाथी पर" जैसे नारों को देने वाली बहिन जी ने बीते ५ सालो में नए नारे " हाथी नही गणेश है ब्रह्मा विष्णु महेश है" के आसरे अगर उत्तर प्रदेश में अपनी सियासी बिसात को बिछाने में सफलता पायी है तो इसका कारण देश के भीतर मौजूद विभिन्न समुदायों से जुड़े करोडो लोग है जिनके जरिये विभिन्न राजनीतिक दलों ने धर्म के नाम पर वोटरों को बांटकर अपनी सत्ता को मजबूत किया...... अब आज के विकास वाले दौर में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मजहब और जात की सियासत का ग्राफ नीचे चला गया जिसके मर्म को अच्छे से पकड़कर बसपा सरीखी पार्टियों ने सोशल इंजीनियरिंग के जरिये ध्वस्त कर डाला ......वह भी एक दौर था जब अपने को शिखर पर चढ़ा हुआ देखने पर ब्राह्मणों को यह नही सुहाता था कि कोई दलित उसके आस पास फटके ......आज हालत एकदम उलट हैं ..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;उत्तर प्रदेश का ब्राहमण समाज उस नेत्री की छाया मे काम कर रहा है जिसने फ़ोर्ब्स पत्रिका की महिलाओ की सूची मे अपना स्थान हाल के वर्षो में ना केवल बनाया है बल्कि माया ने त्याग की मूरत कही जाने वाली कांग्रेस की "सोनिया " को भी पीछे छोड़ दिया....."एक समय आयेगा जब पत्थर भी गाना गायेगा मेरे बाग़ का मुरझाया फूल फिर से खिल खिला जाएगा" .....किसी कवि द्वारा कही गयी इस कविता मे गहरा भाव छिपा है समय बदलने के साथ सभी दल अपने को ढाल लेते है सो बसपा के साथ भी यही हुआ है उसमे नया सोशल बदलाव आ गया है.... हाल के समय में उसकी नीतिया बदल गयी है... सभी को साथ लेने का नया चलन शुरू हुआ हैजिसे सोशल इंजीनियरिंग नाम दिया गया है ....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इस फोर्मुले को लगाने मे सतीश चंद्र मिश्रा का बड़ा योगदान रहा जिनको यह अच्छी से पता था किस प्रकार "हाथी "सभी पार्टियों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है ......आज यह हाथी सभी के लिए बड़ा सर दर्द बन गया है ...इससे भी बड़ा संकट यह है उत्तर प्रदेश का ब्राहमण समाज बहिन माया की कप्तानी मे "इंडियन पोल लीग" का हर गेम खेलने को तैयार दिखता है..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;यह सवाल सबसे अधिक जिसको कचोट रहा है वह है उत्तर प्रदेश की भाजपा..... प्रदेश मे पार्टी की सेहत सही नही चल रही है..... यू पी की इस बीमारी का तोड़ निकालने मे किसी डॉक्टर को सफलता नही मिल पा रही है..... डॉक्टर के कई दल सेहत को चेक करने वहां जा चुके है लेकिन फिर भी तबियत में अपेक्षित सुधार नही आ पा रहा है ....शायद इसी के चलते डॉक्टरो के दल को भी बेरंग वापस लौटना पड़ रहा है...... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;बीजेपी की उत्तर प्रदेश मे डगमग हालत के चलते उसका हाई कमान भी चिंतित है.... चिंता लाजमी भी है क्युकि ५ राज्यों के विधान सभा के चुनाव होने जा रहे है ....ऐसे में बीजेपी के अध्यक्ष नितिन गडकरी अभी से हाथ पैर मारने में लग गए है .....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;बीते महीने प्रदेश में चुनाव प्रचार की कमान पूरी तरह नितिन गडकरी के हाथ सौपे जाने को विश्लेषक एक नई कड़ी का हिस्सा मान रहे है..... सूत्र बताते है कि संघ माया द्वारा जीते गए पिछले विधान सभा के चुनावो से कुछ सबक लेना चाह रहा है....लेकिन गडकरी की इस साल बिछाई गई बिसात में संघ की एक भी नहीं चल रही ... इसी के चलते इस बार के चुनाव में उत्तर प्रदेश में कद्दावर नेताओ की एक नहीं चल पा रही है ..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;गडकरी की बिसात " जिताऊ " उम्मीदवारों के रास्ते जहाँ गुजरती है वही , संघ का रास्ता उसके स्वयंसेवको और पार्टी का झंडा लम्बे समय से उठाये नेताओ के आसरे गुजरता है ....... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;दिल्ली मे पार्टी के एक नेता की माने तो इस बार अपने हाई टेक फोर्मुले के सहारे गडकरी माया के साथ जा मिले ब्राहमण वोट बैंक को वापस अपनी तरफ लेने की कोशिशे तेज कर रहे हैं.... पार्टी के नेताओ का मानना है कि यह ब्राहमण वोट बैंक शुरू से उसके साथ रहा है लेकिन बीते कुछ चुनावो मे यह माया मैडम के साथ जा मिला इसको फिर से अपनी ओर लाकर उत्तर प्रदेश में पार्टी की ख़राब हालत सुधर सकती है......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;शायद इसी के मद्देनजर गडकरी की बिसात में जहाँ पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के अध्यक्ष रहे राजनाथ एक तरफ है तो दूसरी तरफ कलराज मिश्र सरीखे "ब्राहमण " कार्ड को खेलकर उसने ब्राहमण और ठाकुर वोट को अपने पाले में लाने का नया फ़ॉर्मूला बिछाया है.....यह बताने की जरुरत किसी को नहीं कि राजनाथ और कलराज के समर्थक उत्तर प्रदेश में शुरू से एक दूसरे के आमने सामने खड़े रहते थे ....... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;पहली बार दोनों को साथ लेकर गडकरी ने नई व्यूह रचना इस प्रकार की है जिसके जरिये हिन्दू वोट बैंक को पार्टी अपने पाले में ला सकती है...... यही नहीं इस बार गडकरी ने जहाँ एक और प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही खेमे को भी चुनावी चौसर बिछाने में साथ लिया है तो वहीँ कल्याण सिंह की काट के तौर पर उमा भारती को "स्टार प्रचारक " बनाकर और महोबा के चरखारी से पार्टी का टिकट देकर पिछड़ी जातियों के एक बड़े वोट बैंक को अपने पाले में लाने की गोल बंदी कर डाली है.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इतना जरुर है इन चारो कार्ड के जरिये पहली बार गडकरी ने संघ की हिंदुत्व प्रयोगशाला के सबसे बड़े झंडाबरदार योगी आदित्यनाथ और विनय कटियार सरीखे नेता को अगर टिकट चयन से दूर रखा है तो समझा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश के चुनावो में किस तरह संघ ने अपने को भाजपा से दूर रखा है..... यही नहीं इस बार टिकट गडकरी ने जीतने वाले उम्मीदवारों को देकर अपने इरादे जता दिए है जिससे लम्बे समय से पार्टी का झंडा उठाये हुए नेताओ की दाल नहीं गल पा रही है........ । &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;पार्टी की कार्यकारिणी की बैटक मे कुछ महीने पहले हिंदुत्व के मुद्दे पर चर्चा की गयी..... उत्तर प्रदेश भाजपा की हिंदुत्व प्रयोगशाला का पहला पड़ाव रहा है जहाँ राम लहर की धुन बजाकर भाजपा ने कभी राज्य में अपनी सरकार बनाई थी...... पार्टी के नेता मानते है हिंदुत्व की आधी मे वह केन्द्र मे सत्ता मे आयी लेकिन अपने कार्यकाल मे उसने कई मुद्दों को ठंडे बस्ते मे डाल दिया जिस कारण केन्द्र में यू पी ऐ की सरकार आ गयी और बीजेपी अवसान की ओर चली गयी ......इस बार पार्टी फिर हिन्दुत्व पर वापस लोटने का मन बना रही है हालाँकि गडकरी ने इस पर सीधे कुछ भी कहने से परहेज किया है लेकिन पार्टी की चाल देखकर ऐसा लगता है कि वह अपनी हिंदुत्व की आत्मा को अलग कर नही चल सकती..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;बड़ा सवाल यह है कि वह सबको साथ लेने के किस फोर्मुले पर चलेगी ? इतिहास गवाह है केंद्र में सत्ता हथियाने के बाद पार्टी मे पिछडे नेताओ को उपेक्षित बीते कुछ समय रख दिया जाता है....जब पार्टी मे यह तय हो चुका है वह आगामी चुनाव मे अपने ओल्ड एजेंडे पर चल रही है तो ऐसे मे पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश सबसे बड़ी रन भूमि बन गया है....यही वह प्रदेश है जहाँ की सांसद संख्या दिल्ली का ताज तय करती है ......यहाँ पर पास या फेल होने पर मिलने वाले नम्बर बोर्ड एक्जाम की तरह से रिजल्ट को प्रभावित करने की कैपेसिटी रखते है तभी तो माया जी यहाँ से अपने सर्वाधिक सांसद जितवाकर दिल्ली मे प्रधानमंत्री बन्ने के सपने अभी से देख रही है जिसके बारे में उन्होंने अपनी किताब "बहनजी " मे भी बताया है..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;वैसे भी पूत के पाव पालने मे ही दिखाए देते है बीजेपी भी इसको अच्छी तरह से जानती है... तभी वह आजकल बसपा की सोशल इंजीनियरिंग का तोड़ निकालने मे जुटी है.......बीजेपी के अन्दर के सूत्र बताते है कि ब्राह्मणों को लुभाने की मंशा से पार्टी ने अपने चार ट्रंप कार्ड फैक दिए है जो पार्टी का जहाज उत्तर प्रदेश में बचाने की पूरी कोशिश करेंगे........ &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;पहला कार्ड राजनाथ सिंह का है जो चुनाव प्रभारी है.... वह ख़ुद ठाकुर है ....दूसरा कार्ड राज्य मे मौजूद पार्टी प्रेजिडेंट सूर्य प्रताप शाही का है जो खुद भूमिहार जाति से है....... तीसरा कार्ड जो फेंका गया है वह है कलराज मिश्रा वह उत्तर प्रदेश में ब्राहमण बिरादरी का झंडा लम्बे उठाये है.....भाजपा का उत्तर प्रदेश में सबसे पुराना चेहरा ........ चौथा कार्ड हाल ही मे उमा भारती के रूप में फेंका गया है जिसके जरिये पार्टी पिछडो के एक बड़े वोट बैंक को अपने पाले में लाने की जुगत में है ....... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;अब चारो लोगो के एक साथ चुनाव प्रचार अभियान में आने से जिनके बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा छोटे नजर आ रहे है.... पार्टी का मानना है राज्य मे ब्राहमणों की बड़ी संख्या १६ वी लोक सभा चुनाव मे उसका गणित सुधार सकती है साथ मे हिंदुत्व का मुखोटा फिर से पहनने से उसका खोया जनाधार वापस आ सकता है.......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;वैसे भी ९० के दशक मे राम मन्दिर की लहर ने हिंदू वोट को उसकी ओर खीचा था जिसके बूते सेण्टर मे न केवल उसकी सीटें बढ़ी बल्कि केंद्र मे वाजपेयी की सरकार भी सही से चली थी .............. &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;गडकरी अपनी पार्टी की केंद्र में सत्ता में वापसी के लिए उत्तर प्रदेश पर टकटकी लगाये हुए है..... वह इस बात को जानते है पार्टी की उत्तर प्रदेश में इस बार पतली हालत होने पर उनका सपना पूरा नही हो पायेगा...... वैसे भी विन्ध्य मे भगवा लहराने से बात नही होगी...... उत्तर प्रदेश फतह के बिना दिल्ली मे सरकार की कल्पना करना मुंगेरी लाल के हसीन सपने देखने जैसा है.... अतः पार्टी पहले इस यू पी की चुनोती से पार पाना चाहती है.... सोलहवी लोक सभा के लिए बीजेपी अभी से कमर कस चुकी है ....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;पार्टी द्वारा पिछले चुनाव मे अपने एजेंडे से भटकने के कारण संघ भी इस बार अपने को यू पी के चुनावो से दूर कर रहा है...... संघ मानता है बसपा के हाथी की बदती धमक कमल के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है.... दलित और मुस्लिम वोट शुरू से कांग्रेस के साथ रहा है लेकिन पिछले कुछ चुनाव मे यह बसपा के साथ जा मिला.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;प्रदेश के ब्राहमण मतदाताओ के माया के साथ जाने से पार्टी की हालत ख़राब हो गयी है.... अतः गडकरी का रास्ता ब्राहमणों के वोट बैंक को बीजेपी के साथ लेने की कोशिशो मे जुटा है....... बीजेपी बीते चुनावो से इस बार सबक ले रही है..... समय समय पर उत्तर प्रदेश को लेकर मीटिंग हो रही है..... उत्तराखंड और पंजाब के चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश को लेकर गंभीर मंथन हो रहा है .... यू पी की पीठ पर जमकर नेट अभ्यास किया जा रहा है.......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब बात बीजेपी के राजनाथ सिंह की करते है....... उनके के पास विरोधियो को राजनीती की पिच पर मौत देने का तोड़ है....... चेस के मैच पर अगर गोटी हो तो राजनाथ विरोधियो की हर चाल को पहले ही जान जाते है .......अपनी छमताओ को वह बीते कुछ वर्षो मे कर्नाटक , बिहार, हिमांचल, उत्तराखंड , गुजरात मे साबित कर चुके है ...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;अब बारी उनके खुद के प्रदेश उत्तर प्रदेश की है जहाँ के वह मुख्य मंत्री भी रह चुके है ..... यह बड़ा प्रदेश है.... हालात अन्य प्रदेश से अलग है..... यहाँ पर खेलने के लिए बड़ा दिल रखना पड़ता है....... मैच टेस्ट क्रिकेट की तरह है जहाँ नेट पर जमकर पसीना बहाना पड़ता है साथ मे लंबे समय तक मैदान में टिकने की कला भी होनी चाहिए.... गेदबाज के एक्शन से पहले बोल परख ने की कला होनी चाहिए.... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;पार्टी की उप में हालत सही करने का जिम्मा अब राजनाथ और कलराज के कंधो मे है .....उनको अच्छा तभी कहा जा सकता है जब वह पार्टी को प्रदेश मे अच्छी सीट दिलाने में मदद करें..... २००२ के चुनाव में बीजेपी को विधान सभा मे ४०२ सीट् मे ५१ सीट ही मिल पाई..... १४६ मे उसके जमानत जब्त हो गयी इसके बाद वहां के चुनाव मे पार्टी ४ नम्बर पर आ गयी ...... उस चुनाव में बसपा को ३०.४३% वोट मिले..... समाजवादी पार्टी को ९७ सीट हासिल हुई ... वोट २५% रहा ....वही बीजेपी का १६% रहा ....इसके बाद तो पार्टी का २००७ मे ऐसा जनाजा निकला पार्टी की माली हालत खस्ता हो गयी...... ऐसे मे अपने राजनाथ , कलराज. शाही और उमा के सामने उत्तर प्रदेश की पुरानी खोयी हुई जमीन को बचाने की बड़ी चुनौती है....... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;देखना होगा गडकरी की इस नयी बिसात में ये चारो कहा फिट बैठते है? वह भी ऐसे समय में जब राज्य में पार्टी के पुराने सिपहसालार संजय जोशी, विनय कटियार, योगी सरीखे चेहरे हाशिये पर है.......... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;अब बात उत्तर प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही की करते है.......वह लोक सभा और विधान सभा के चुनाव मे पार्टी की नैया पार नही लगा सके..... उनको प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी इसलिए सौपी गई थी कि वह बसपा के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के सामने चुनोती पेश कर सकते है लेकिन अब तक वह यह सब कर पाने मे विफल साबित हुए है......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;पार्टी में इस समय उनके खिलाफ विरोध के स्वर आज भी कायम होते रहते है...... बताया जाता है कि वह पार्टी में नया जोश नही भर पाए है जिस कारण से निचले स्तर पर कार्यकर्ता अपने को असहज महसूस करते है..... कम समय मे अपने साथ ब्राहमणों का बड़ा वोट जोड़कर माया ने शाही एंड कंपनी को दिखा दिया है " यू पी हुई हमारी है अब दिल्ली की बारी है............."&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;अब बात हाल मे चुनाव प्रचार अभियान की कमान सौपे जाने वाले नेता राजनाथ की करते है ... वह पार्टी का पुराना चेहरा है......... उनको कलराज की तरह यू पी की गहरी समझ है .... साथ में उमा और शाही की जोड़ी उत्तर प्रदेश में भाजपा की साख को बचाने का काम कर सकती है........... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इन चारो को आगे कर भाजपा उत्तर प्रदेश में समाज के हर वर्ग में अपनी उपस्थिति सामाजिक समीकरणों के जरिये बिछा रही है ........ ब्राहमण से लेकर ठाकुर , राजपूत से लेकर पिछड़ी जातियों पर डोरे डालकर माया के भावी सी ऍम बनने के सपने को धूल धूसरित करने की पूरी कोशिशो में लगी है...... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;गडकरी की इस बार की बिसात में अगर कलराज ,राजनाथ उमा ,शाही की चौसर बिछी है तो वही असंतुष्ट नेताओ से पार पाना भी भाजपा की बड़ी मुश्किल बनती जा रही है ....क्युकि इस चुनाव में योगी, कटियार , संजय जोशी सरीखे कई कद्दावर नेताओ की अगर एक भी नहीं चल रही है ओर उनके जैसे कई कार्यकर्ता जो पार्टी का झंडा वर्षो से उठाये है वह भी अगर इस दौर हाशिये में चले गए हो तो ऐसे में कीचड में कमल खिलने में परेशानी हो सकती है......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;वैसे भी पिछले दिनों बाबू सिंह कुशवाहा के मुद्दे पर पार्टी की खासी किरकिरी हो चुकी है..... ऐसे में चुनावी डगर मुश्किल दिख रही है..... फिर भी संघ की गोद से निकले गडकरी अगर संघ से दूरी बनाकर कलराज, उमा, राजनाथ ओर शाही के जरिये पूरे उत्तर प्रदेश को साधने की कोशिश कर रहे है तो उसे उत्तर प्रदेश में भाजपा के डूबते जहाज को बचाने की अंतिम कोशिशो के तौर पर देखा जाना चाहिए.......... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-5822442881983307857?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/5822442881983307857/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=5822442881983307857' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/5822442881983307857'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/5822442881983307857'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2012/01/blog-post_19.html' title='यू पी के डूबते जहाज को बचाने में जुटी भाजपा.......'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-eh68g6L6KGk/Tx03AFeeqYI/AAAAAAAAA2g/K7mQCOk_FBI/s72-c/1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-474371207520788326</id><published>2012-01-16T00:43:00.000-08:00</published><updated>2012-01-16T02:03:12.540-08:00</updated><title type='text'>घुघुतिया................</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-U_6HTQ9nkxI/TxPmCQYUUQI/AAAAAAAAA1A/_LwU26SOOsg/s1600/crow%255B1%255D.gif"&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 295px; DISPLAY: block; HEIGHT: 291px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5698150879984898306" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-U_6HTQ9nkxI/TxPmCQYUUQI/AAAAAAAAA1A/_LwU26SOOsg/s400/crow%255B1%255D.gif" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:85%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;विविधता में एकता भारतीय संस्कृति की विशेषता है.... उत्तराखंड अपने प्राकृतिक सौन्दर्य और नैसर्गिक सुषमा के कारण जाना जाता है ... परन्तु यहाँ के त्योहारो में भी बड़ी विविधता के दर्शन होते है ... आज भी यहाँ पर कई त्यौहार उल्लास के साथ मनाये जाते है.... इन्ही में से एक त्यौहार "घुघुतिया का है.... इसे उत्तरायणी पर्व के नाम से भी जाना जाता है...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;घुघुतिया पर्व उत्तराखंड के कुमाऊ अंचल में धूम धाम के साथ मनाया जाता है.... यह पर्व "मकर संक्रांत " का ही एक रूप है... वैसे यह पर्व पूरे देश में अलग अलग नामो से मनाया जाता है परन्तु उत्तराखंड के कुमाऊ अंचल में यह घुघुतिया नाम से जाना जाता है... मकर संक्रांति मुख्य रूप से सूर्य की उपासना का पर्व है परन्तु कुमाऊ अंचल में मनाये जाने वाले घुघुतिया पर्व का अपना विशेष महत्व है....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते है ... वह दक्षिणायन से उत्तरायण में जाते है ....यह दिखाता है कि अब ठण्ड का प्रभाव कम हो रहा है ... कुमाऊ में मनाये जाने वाला घुघुतिया त्यौहार भी इसी ऋतु परिवर्तन का अहसास कराता है....कुमाऊ में इस पर्व के अवसर पर कौवो को विशेष भोग लगाया जाता है.... बच्चो में यह त्यौहार खासा लोकप्रिय है..... शहर से लेकर गावो में आज भी इसको हर्ष के साथ मनाया जाता है....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जिस दिन पंजाबी लोहड़ी मनाते है.... उस दिन कुमाऊ निवासी तत्वानी मनाते है ... यह पूस माह का आखरी दिन होता है....फिर अगला दिन "माघ " माह का पहला कार्य दिवस होता है... इस दिन सुबह उठकर नहा धोकर तिलक लगाते है और छोटे बच्चे कौवो को भोग लगाते है.... इस अवसर पर वह पकवानों की माला भी पहनते है .... यह माला संक्रांति के एक दिन पहले से तैयार की जाती है , जो अनाज और गुड से तैयार की जाती है...इसमें पूड़ी , दाड़िम फल , खजूर , डमरू ,बड़ो को गूथा जाता है.... साथ में संतरों को भी गूथा जाता है ...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बच्चे सुबह सुबह सूरज निकलने से पहले कौवो को जोर जोर से आवाज निकालकर पुकारते है... वह कहते है "काले कौवा काले बड़े पूए खाले"...पिछले ४ वर्षो से अपने घर से मैं दूर हूँ ... घुघुतिया त्यौहार को बहुत मिस कर रहा हूँ.... कल जब मकर संक्रांति की खबर देख रहा था तो अनायास ही अपने उत्तराखंड की याद सता गयी.... मन नही लग रहा था तो सुबह अपने घर संपर्क कर माता जी को फ़ोन कर डाला...उनसे विस्तार से इस पर्व के बारे मैं अपन की बात हुई...दरअसल हर त्यौहार के साथ एक ख़ुशी छिपी रहती है ..... फिर अपने परिवार के साथ किसी भी त्यौहार को मनाने का अपना अलग मजा है.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;परिवार वालो से बात करते करते मैं अपने बचपन में कही खो सा गया.... तब मैं भी सुबह जल्दी से नहा धोकर कौवो को बुलाया करता था... लेकिन इस बार उत्तराखंड में भारी बर्फ़बारी के चलते घुघुतिया के त्यौहार को अपने परिवार के साथ नही मना पाया .... दरअसल कौवो को भी भोग लगाने के पीछे कुमाऊ अंचल में कुछ खास वजह है ... इसको घुघुतिया नाम से भी विशेष कारणों से जाना जाता है... इसके तार कुमाऊ के चंद राजाओ से जुड़े बताये जाते है....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्राचीन समय की किंदवंती के अनुसार एक बार कुमाऊ के किसी चंद राजा की कोई संतान नही हुई....वह राजा बहुत दुखी रहता था॥ पर राजा के मंत्री इस बात से बहुत खुश थे क्युकि राजा के बाद कोई उत्तराधिकारी ना होने से उनका रास्ता साफ़ था॥मंदिर में मनोती के बाद उस राजा को अचानक एक संतान प्राप्त हो गयी जिसका नाम उसने "घूघुत " रखा ... यह सब देखकर मंत्रियो की नाराजगी बद गयी क्युकि अब उनकी राह में वह काँटा बन गया...पुत्र होने के कारन वह अब राजा का भविष्य का उत्तराधिकारी हो गया॥ राजा की आँखों का वह तारा बन गया॥&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;घुघूत पर्वतीय इलाके के एक पक्षी को कहा जाता है... राजा का यह पुत्र भी एक पक्षी की तरह उसकी आँखों का तारा था जिसकी सेवा में सभी दिन रात लगा करते थे॥उस बच्चे के साथ कौवो का विशेष लगाव रहता था... बच्चे को जब खाना दिया जाता था तो वह कौवे उसके आस पास रहते थे और उसको दिए जाने वाले भोजन से अपनी प्यास बुझाया करते थे....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक बार मंत्रियो ने राजा के बच्चे का अपहरण कर दिया॥वह उस मासूम बच्चे को जंगलो में फैक आये ... पर वह भी कौवे उस बच्चे की मदद करते रहे... राजा के मंत्री यह सोच रहे थे की जंगल में छोड़ आने के कारन अब उस बच्चे को कोई नही बचा पायेगा... पर वह शायद यह भूल गए कौवे हर समय बच्चे के साथ रहते थे....इधर राजमहल से बच्चे का अपहरण होने से राजा खासा परेशान हुआ ... कोई गुप्तचर यह पता नही लगा सका आखिर"घुघूत" कहाँ चला गया?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तभी राजा कि नौकरानी की निगाह एक कौवे पर पड़ी ॥ वह बार बार कही उड़ रहा था और वापस राजमहल में आकर बात रहा था... नौकरानी ने यह बात राजा को बताई वह उस कौवे का पीछा करने लगी....आखिर नौकरानी का कौवे का पीछा करना सही निकला ॥ राजा के पुत्र का पता चला गया॥वह जंगल में मिला जहाँ पर उसके चारो और कौवे बैठे थे...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राजा को जब यह बात पाताल चली कि कौवो ने उसके पुत्र की जान बचाई है तो उसने प्रति वर्ष एक उत्सव मनाने का फैसला किया जिसमे कौवो को विशेष भोग लगाने की व्यवस्था की गयी॥ इस अवसर पर विशेष पकवान बनाने कि परंपरा शुरू हुई.... साथ में गुड दिया जाने लगा.... गुड रिश्तो में मिठास घोलने का काम करता था.... तभी से यह त्यौहार कुमाऊ में घुघुतिया नाम से मनाया जाता है.... आज भी कुमाऊ अंचल में हमारी प्राचीन परम्पराए जीवित है इससे सुखद बात और क्या हो सकती है.........................................&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-474371207520788326?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/474371207520788326/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=474371207520788326' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/474371207520788326'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/474371207520788326'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2012/01/blog-post_16.html' title='घुघुतिया................'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-U_6HTQ9nkxI/TxPmCQYUUQI/AAAAAAAAA1A/_LwU26SOOsg/s72-c/crow%255B1%255D.gif' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-3647912281617085644</id><published>2011-12-30T02:33:00.000-08:00</published><updated>2012-01-24T23:28:45.656-08:00</updated><title type='text'>नूतन वर्ष मंगलमय हो.....</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-KiqWcX8r6is/Tv2XRa2taZI/AAAAAAAAA00/LcswWGg6f8E/s1600/happy_new_year_2012-t2.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 270px; DISPLAY: block; HEIGHT: 241px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5691871829588535698" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-KiqWcX8r6is/Tv2XRa2taZI/AAAAAAAAA00/LcswWGg6f8E/s400/happy_new_year_2012-t2.jpg" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt; आप सभी को नए साल की बधाइयाँ और शुभकामनाएं देनी हैं .......नए साल की कई योजनाओं में एक खास योजना है कि अब नियमित रूप से ब्लॉग पर लिखना है...साल की शुरुआत नए संकल्पों का वर्ष होता है ........ इस बार अटल प्रतिज्ञा कर ली है.....लिखने की इच्छा बहुत है लेकिन व्यस्तताओ के बावजूद समय नही निकाल पाता हूँ .... देखें, इस बार मेरी अटल प्रतिज्ञा का क्या होता है? वैसे इरादे मजबूत है ......मैं खुद बहुत दिनों से सोच रहा था कि मुझे ब्लॉग पर नियमित रूप से लिखना चाहिए.....लेकिन कुछ व्यस्तताओ और अपने रिसर्च वर्क के चलते ब्लॉग पर लिखना नहीं हो पाया ......लेकिन अब कोशिश रहेगी कि ब्लॉग पर नियमित रूप से कुछ लिखूं । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;२०१२&lt;/span&gt; में आप हर्ष का नया रूप पाएंगे और बोलती कलम की धार में और पैनापन ..... छमा प्रार्थी हू कि व्यस्तताओ के चलते २०११ में कम पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिख पाया ...... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;आपको एक बार फिर नूतन वर्ष २०१२ की शुभकामनाये...........आप सभी की राय की मुझे बेसब्री से प्रतीक्षा रहेगी.... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-3647912281617085644?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/3647912281617085644/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=3647912281617085644' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/3647912281617085644'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/3647912281617085644'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/12/blog-post.html' title='नूतन वर्ष मंगलमय हो.....'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-KiqWcX8r6is/Tv2XRa2taZI/AAAAAAAAA00/LcswWGg6f8E/s72-c/happy_new_year_2012-t2.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-1710282983670392566</id><published>2011-11-02T21:40:00.001-07:00</published><updated>2011-11-08T23:35:48.832-08:00</updated><title type='text'>उफ... यू पी ए से होता मोहभंग</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-eCoXIttcTiM/TrNrLview_I/AAAAAAAAA0Q/1V50dM9y2D0/s1600/congress-government.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 267px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5670994205273408498" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-eCoXIttcTiM/TrNrLview_I/AAAAAAAAA0Q/1V50dM9y2D0/s400/congress-government.jpg" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;विदर्भ की रामकली बाई इन दिनों मायूस है.... .....यह रामकली वह है जिसका एक बच्चा अभी एक साल पहले कुपोषण के चलते मर गया..... इस बच्चे की बात करने पर आज भी वह सिहर उठती है.... पिछले कुछ वर्षो में जैसी त्रासदी विदर्भ ने देखी होगी शायद भारत के किसी कोने ने देखी होगी......सरकार आये दिन गरीबो को अनाज के नाम पर कई घोषणा कर रही है लेकिन सच्चाई यह है कि गरीबो की झोपड़ी तक कोई अनाज नहीं पहुच पा रहा है जिसके चलते आज रामकली के बच्चे कुपोषण के चलते मारे जा रहे है......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;महंगाई को कम करने के सरकार दावे तो जोर शोर से करती रही है लेकिन सच्चाई यह है कि देश में आम आदमी की थाली दिनों दिन महंगी होती जा रही है.....प्रधानमंत्री जहाँ ऊँची विकास दर और कॉरपोरेट नीतियों का हवाला देते नहीं थकते वही देश के वित्त मंत्री यह कहते है हमारे पास महंगाई रोकने के लिये कोई जादू की छड़ी नहीं है तो इस सरकार का असली चेहरा जनता के सामने बेनकाब हो जाता है......हद तो तब हो जाती है जब रिज़र्व बैंक १४ वी बार अपनी ब्याज दर बढाता है ताकि मार्केट में लिक्विडिटी बनी रहे ...इसके बाद भी आलम ये है महंगाई देश को निगलते जाती है और गरीब परिवारों की रोटी का एक बड़ा संकट पैदा हो जाता है ..... आज यह जानकर हैरत होती है कि हमारे देश में भुखमरी की समस्या लगातार बढती जा रही है ...... यूं ऍन ओ की हालिया रिपोर्ट को अगर आधार बनाये तो कुपोषण ने हमारे देश में सारे रिकार्डो को ध्वस्त कर दिया है.....आपको यह जानकर हैरत होगी कि हर रोज तकरीबन ७००० मौते अकेले कुपोषण से हमारे देश में हो रही है.....सरकार खाद्य सुरक्षा कानून लाने की बात लम्बे समय से कर रही है लेकिन इसको पेश करने की राह भी आसान नहीं है......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मनमोहन और सोनिया की अगुवाई वाली सलाहकार परिषद् में इसे लेकर अलग अलग सुर है..... राजनेताओ को आम आदमी से कुछ लेना देना नही है ... अगर ऐसा होता तो आज हमारे ऊपर कुपोषण का कलंक नहीं लगता..... बढती जनसँख्या ने देश में खाद्य संकट को हमारे सामने बड़ा दिया है.....ऐसा नहीं है देश में पर्याप्त मात्रा में खाद्यान उत्पादन नहीं हो रहा ॥ उत्पादन तो हो रहा है लेकिन फसल के रख रखाव के लिये हमारे पास पर्याप्त मात्रा में गोदाम नहीं है ...... इसी के चलते करोडो का अनाज हर साल गोदामों में सड़ता जा रहा है.... अभी इस बार मध्य प्रदेश में चावल का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ .... वहां के मुख्यमंत्री शिवराज परेशान हो गए है .... सी ऍम होने के नाते उन्होंने केंद्र को चिट्टी लिख दी ... उन्होंने कहा मध्य प्रदेश में रख रखाव के लिये पर्याप्त गोदाम नहीं है लिहाजा केंद्र सरकार इस अनाज के रख रखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करे लेकिन देखिये केंद्र ने इस पर कोई कार्यवाही नहीं की ..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कभी कभी सोचता हूँ हमारे देश में केंद्र ओर राज्यों में अलग अलग सरकारे होने के कारन कई बार सही तालमेल नहीं बन सकता .... यही हाल अभी मध्य प्रदेश में हो रहा है....कमोवेश यही हालात आज देश के अन्य राज्यों में है जहाँ पर कांग्रेस सत्ता में नहीं है ......खेती को लाभ का सौदा बनाने की दिशा में आज तक कोई पहल नहीं हुई है जिसके चलते खेती हमारे देश में उजड़ रही है.....यूनेस्को का कहना है भारत की गिनती दुनिया के सबसे कुपोषित देशो में हो रही है....लेकिन इन सबके बाद मनमोहनी इकोनोमिक्स ऊँची विकास दर और "भारत निर्माण " की अगर दुहाई दे तो यह कुछ हास्यास्पद मालूम पड़ता है .......हद तो तब हो जाती है जब इस देश में घोटालो के बाद एक घोटाले होते रहते है और हमारे प्रधानमंत्री अपनी नेकनीयती का सबूत देते नहीं थकते......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;देश की जनसँख्या तेजी से बढ़ रही है ... हाल ही में हमने १२१ करोड़ के आकडे को छुआ है अगर यही सिलसिला जारी रहा तो यकीन जानिए हम चीन को पीछे छोड़ देंगे... ऐसे में बड़ी आबादी के लिये भोजन जुटाने की एक बड़ी चुनौती हमारे सामने आ सकती है....पिछले दो दशको में हमारा खाद्यान उत्पादन १.५ फीसदी तक जा गिरा है.... मनमोहन के दौर में हमारे देश में दो भारत बस रहे है... एक तबका ऐसा है जो संपन्न है ...वही एक तबका ऐसा है जो अपनी रोजी रोटी जुटाने के लिये हाड मांस एक कर रहा है.... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;याद कीजिये १९९० का दौर उस समय हमारा देश आर्थिक सुधारो की दहलीज पर खड़ा था.... नरसिम्हा राव की सरकार उस समय थी...उस दौर में हमारे देश में प्रति व्यक्ति खाद्यान की खपत ४६८ ग्राम हुआ करती थी... उदारीकरण के आज २० सालो बाद भी भारत में प्रति व्यक्ति खाद्यान उपलब्धता ४०० ग्राम हो गई है ....यही नहीं आप यह जानकार चौंक जायेंगे १९९० में प्रति व्यक्ति ४२ ग्राम दाल उपलब्ध थी वही २०११ में यह आकडा भी लुढ़क गया और यह २५ ग्राम तक पहुच गया .... यह आंकड़ा औसत है जिसमे मनमोहनी इकोनोमिक्स का संपन्न तबका भी शामिल है साथ ही वह क्लास भी जो रात को दो रोटी भी सही से नहीं खाता होगा... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;अर्जुन सेन गुप्ता की रिपोर्ट कहती है देश की ७० फीसदी आबादी आज भी २० रूपया प्रति दिन पर गुजर बसर करती है.....ऐसे में यह सवाल खड़ा होता है इस दौर में कैसे यह गरीब तबका दो समय का भोजन अपने लिये बनाता होगा ? ऊपर से यह सरकार २६ और ३२ की बहस चलाकर गरीबो क मुह पर तमाचा मारने पे तुली रहती है ...........&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;देश में आज थाली दिन प्रति दिन महंगी होती जा रही है.....घरेलू गैस के दामो में भी सरकार ने इजाफा कर दिया है... यही नहीं तेल के दाम भी बड़ा दिए है इसके चलते लोगो करता जीना दुश्वार होता जा रहा है.....सरकार को तेल कंपनियों का घाटा पूरा करना है ... आम आदमी से कुछ भी लेना देना नहीं है ..... अगर आम आदमी से कुछ लेना देना होता तो उसकी तरफ सरकार ध्यान तो जरुर देती...... शायद तभी आम आदमी का अब यु पी ऐ से मोहभंग होता जा रहा है.....तेल और घरेलू गैस के दामो को बढाने का फैसला इस सरकार ने एक बार फिर कर दिया है.... कल ही मुद्रा स्फीति रिकॉर्ड १२.२५ % पार कर गई है जो अब तक की सबसे बड़ी दर है.... ऊपर से रिजर्व बैंक ने बैंक लोन की दर बढाने का फैसला कर माध्यम वर्गीय परिवारों को निराश किया है ........&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मनमोहन के दौर में समाज में अमीर और गरीबी की जो खाई चौड़ी हुई है उसके पीछे बहुत हद तक हमारी खाद्यान प्रणाली जिम्मेदार है .....जबसे मनमोहन ने देश में उदारीकरण की शुरुवात की तबसे हर सरकार का ध्यान ऊँची विकास दर बरकरार रखने और सेंसेक्स बढाने पर जा टिका है .....आकड़ो की बाजीगरी आज के दौर में कैसे की जाती है ये हर किसी को मालूम है ....वैसे भी यह बात समझ से परे लगती है आम आदमी करता सेंसेक्स से क्या लेना देना ? बीते २० सालो में एक खास बात यह देखने में आई है सरकार की विकास दर और गरीबी के आकडे दोनों तेजी के साथ बढे है .... सरकारी आंकड़ो में विकास ने "हाईवे " की तरह छलांग लगाई है लेकिन इस रफ़्तार ने कुपोषण , गरीबी, भुखमरी जैसी समस्याओ को बढाया है ....इस दौर में कृषि जैसे सेक्टर की हालत सबसे खस्ता हो गई......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;शहरों में चकाचौंध तो तेजी से बढ़ी लेकिन गावो से लोगो का पलायन बदस्तूर जारी रहा .....आज आलम यह है कृषि में हमारी विकास दर दो फीसदी से भी कम है जो हमारे फिसड्डी होने को बखूबी बया कर रही है..... ..... किसानो को सरकार ने इस दौर में पैकेज भी प्रदान किया है .... इस दौर में बैंक भी किसानो की मदद के लिये आगे आये है लेकिन इन सब चीजो के बाद भी किसान परंपरागत खेती को छोड़ने पर आमादा है......साहूकार के दौर में किसानो पर जो कर्ज के कष्ट थे अब वह लोन के बाद भी ज्यादा बढ़ गए है.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;आकडे इस बात की गवाही देने के लिये काफी है किसान आत्महत्या का एक बड़ा कारण कर्ज रहा है... किसान पर कर्ज को चुकाने का बोझ इतना ज्यादा है वह समय से इसे नहीं चुका सकता .... वैसे भी भारत की कृषि को "मानसून का जुआ " कहा जाता है जो "इन्द्र देव " की कृपा पर ज्यादा टिकी हुई है......उस पर तुर्रा यह है हमारे प्रधान मंत्री इसे लाभ का सौदा बनाने के बजाय विदेशी निवेश बढाने पर आमादा है जिसकी वकालत शुरू से मनमोहनी अर्थशास्त्र शुरू से करता रहा है......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;ऐसे में अपने किसान की खुशहाली दूर की कौड़ी लगती है ...... अपने घर खुशहाली नहीं रहेगी तो दूसरे से मदद मांगने से क्या फायदा.....? लेकिन मनमोहन शायद अमेरिकी अमेरिकी कंपनियों के ज्यादा निकट चले गए है ..... शायद तभी उन्हें अपने देश के पूर्व प्रधानमंत्री शास्त्री के नारे "जय जवान जय किसान " का एहसास इस दौर में नहीं होता......अगर ऐसा होता तो बीते सात सालो में ढाई लाख किसान आत्महत्याए अपने देश में नहीं होती......और ना ही कुपोषण का यूनेस्को का कलंक हमारे माथे पर लगता...................&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-1710282983670392566?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/1710282983670392566/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=1710282983670392566' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/1710282983670392566'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/1710282983670392566'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/11/blog-post.html' title='उफ... यू पी ए से होता मोहभंग'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-eCoXIttcTiM/TrNrLview_I/AAAAAAAAA0Q/1V50dM9y2D0/s72-c/congress-government.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-2724911063655132009</id><published>2011-10-24T07:26:00.000-07:00</published><updated>2011-10-29T05:56:56.757-07:00</updated><title type='text'>ठाकरे की सेना में बेगाने मनोहर ...........</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-VvzQiu-x6xU/TqWERUGQLVI/AAAAAAAAAzo/_VMk99yT3Tg/s1600/joshi.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5667081139103214930" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 317px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-VvzQiu-x6xU/TqWERUGQLVI/AAAAAAAAAzo/_VMk99yT3Tg/s400/joshi.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;महाराष्ट्र की राजनीती को अगर करीब से समझने का कभी मौका आपको मिला होगा तो कांग्रेस के बाद शिवसेना का गढ़ यहाँ की राजनीती एक दौर में हुआ करती थी....इसे राम लहर में सवार होने की धुन कहे या सियासी बिसात के आसरे "आमची मुम्बई" के नारे देकर वोट लेने का नायाबफ़ॉर्मूला ....शिवसेना ने उस दौर में लोगो के बीच जाकर अपनी पैठ को जिस तरीके से मजबूत किया इसने कांग्रेस के सामने पहली बार चुनौती पेश की और महाराष्ट्र की राजनीती में सीधे दखल देकर भाजपा के साथ पहली बार गठबंधन सरकार बनाकर कांग्रेसियों के होश फाख्ता कर दिए थे....... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मराठी मानुष के जिस मुद्दे के आसरे शिव सेना ने उस दौर में बिसात बिछाई थी बहुत कम लोग शायद ये बातें जानते है उस दौर में बाला साहब ठाकरे के साथ मिलकर मनोहर जोशी ने शिवसेना का राज्य में मजबूत आधार तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ..... परन्तु आज वही मनोहर जोशी पार्टी में हाशिये में है...... मनोहर जोशी ने अपने समय में ना केवल महाराष्ट्र की राजनीती में अपना एक ऊँचा मुकाम बनाया बल्कि शिवसेना का वोट बैंक बढाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी.......पार्टी की भलाई के लिये उन्होंने कभी किसी पद की चाह नहीं रखी ... हाँ, ये अलग बात है पार्टी ने उन्हें जो भी काम सौपा उसे उन्होंने वफादारी के साथ पूरा किया......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;२ दिसम्बर १९३७ को महाराष्ट्र के एक मध्यम वर्गीय ब्रह्मण परिवार में जन्मे जोशी के राजनीतिक कैरियर की शुरुवात आपातकाल के दौर में हुई॥ उस दौर में मुंबई के मेयर की कमान उनके हाथो में रही......१९९० में शिवसेना के टिकट पर उन्होंने पहली बार विधान सभा का चुनाव जीता ...९० के दशक में ही भाजपा के साथ मिलकर जब शिव सेना ने राज्य में पहली बार गठबंधन सरकार बनाई तो मनोहर गजानन जोशी को राज्य के १५ वे मुख्यमंत्री की कमान मिली......इसी दौर में छगन भुजबल ने शिव सेना को अलविदा कहा था और यही से जोशी का नया सफ़र शुरू हो गया ...... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;1999 में बाला साहब ठाकरे ने उन्हें मध्य मुंबई से चुनाव लड़ाया जहाँ से वह भारी मतों से विजयी हुए ....... इसके बाद उन्होंने शिव सेना के कद को राष्ट्रीय राजनीती में बढाया......यही वह दौर था जब जोशी को लोक सभा अध्यक्ष के पद पर बैठाया गया ..... उस दौर की यादें आज भी जेहन में बनी है ...... मनोहर के इस कार्यकाल ने लोकसभा के इतिहास में एक नयी इबादत लिख दी...... अपनी समझ बूझ से उन्होंने जिस अंदाज में लोक सभा चलायी उसकी आज भी सभी पार्टियों के नेता तारीफ किया करते थे ...... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;२००४ में मनोहर को पार्टी ने केंद्र में भारी ओद्योगिक मंत्री की जिम्मेदारी से नवाजा जिसे उन्होंने बड़ी शालीनता के साथ निभाया ....... लेकिन इसके बाद मनोहर के सितारे गर्दिश में चले गए... २००४ में मनोहर को कांग्रेस के एकनाथ गायकवाड के हाथो मुह की खानी पड़ी ..... इसके बाद पार्टी ने २००६ में उनको राज्य सभा में बेक डोर से संसद में इंट्री दिलवा दी..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;बाला साहब ठाकरे के राजनीती से रिटायरमेंट के बाद मनोहर जोशी का राजनीतिक सिंहासन डोलने लगा...... आज हालत ये है मनोहर अपनी पार्टी में बेगाने हो चले है... पार्टी में उनकी कोई पूछ परख नहीं हो रही है...... दरअसल जब तक शिव सेना की कमान बाला साहब ठाकरे के हाथो में थी तब तक शिवसेना में मनोहर जोशी के चर्चे जोर शोर के साथ हुआ करते थे..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;शिवसेना के कई कार्यकर्ता जो इस समय मनोहर के समर्थक है वो बताते है उस दौर में अगर कोई काम निकालना होता था तो कार्यकर्ता सीधे मनोहर को रिपोर्ट करते थे ... मनोहर को रिपोर्ट करने का सीधा मतलब उस दौर में ये होता था आपका काम किसी भी तरह हो जायेगा ... राज्य की राजनीती से केंद्र की राजनीती में पटके जाने के बाद भी उन्होंने जिस शालीनता के साथ केन्द्रीय मंत्री का दायित्व निभाया उसने सभी को उनका कायल कर दिया ... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;आज हालत एक दम अलग हो गए है......शिवसेना की राजनीती पहले "मातोश्री" से तय हुआ करती थी..... बाला साहब ठाकरे के वीटो के कारन कोई उनके द्वारा लिये गए फैसले को चुनोती नहीं दे सकता था... आज आलम ये है शिव सेना दो गुटों में बट चुकी है॥ एक मनसे है जिसकी कमान राज ठाकरे के हाथो में है जो कभी शिवसेना के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के प्रमुख हुआ करते थे.....बाला साहब की शिव सेना की कमान उद्धव ठाकरे के हाथो में है जो पार्टी को अपने इशारो पर चला रहे है॥ ऐसे विषम हालातो में कार्यकर्ता अपने को उपेक्षित महसूस कर रहा है... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;बाला साहब के समय में पार्टी के महत्वपूर्ण फैसलों पर मनोहर की राय को कभी अनदेखा नहीं किया जाता था लेकिन आज मनोहर को उद्धव भाव तक देना पसंद नहीं करते॥ पार्टी में उन्होंने अपना नियंत्रण इस कदर स्थापित कर लिया है वह महत्वपूर्ण फैसलों पर अपनी मित्र मंडली से सलाह लेना ज्यादा पसंद करते है.....ऐसे में मनोहर जोशी के भावी भविष्य को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाये अभी से शुरू होने लगी है..... विषम हालातो के मद्देनजर अभी मनोहर कोई बड़ा फैसला लेने से परहेज कर रहे है...... लेकिन समय आने पर मनोहर अपने पत्ते जरुर खोल सकते है ....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;वैसे बताते चले शिव सेना से इतर उनकी अन्य दलों के नेताओ से भी काफी मधुर संबध रहे है ... राकपा में शरद पवार, विलास राव देशमुख ओर प्रफुल्ल पटेल जैसे नेता भी उनके बेहद करीबियों में शामिल है.... इसके मद्देनजर अगर वह शिव सेना से इतर किसी अन्य पार्टी में जाने की सोचे तो उनके पास सभी जगहों से बेहतर विकल्प मौजूद है......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;वैसे भी २४ साल मराठी अस्मिता के आसरे वोटर को लुभाने की कला में माहिर इस "ब्राह्मण कार्ड " को कोई भी पार्टी आगे करने से नहीं डरेगी........ वैसे भी राजनीती संभावनाओ का खेल है ..... जो भी हो फिलहाल शिव सेना में मनोहर के सितारे बुलंदियों पर नहीं है .....लेकिन भावी राजनीती का रास्ता जोशी को अब खुद तय करना है..... अगर अपनी पार्टी में उनकी पूछ परख कम हो रही हैतो इसका असर उनकी भावी राजनीती में पड़ना तय है..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;महाराष्ट्र के पिछले विधान सभा में भी देखने में आया था उद्धव ने उनको वो सम्मान नहीं दिया जो सम्मान बाला साहब ठाकरे दिया करते थे.....ऐसे में वो उद्धव से दूरी बनाये रखे थे लेकिन ये दूरिया कब तक बनी रहेगी यह अब बड़ा सवाल बन गया है.... दूरियों को पाटना भी जरुरी है ... आमतौर पर बेहद शांत, शालीन , ईमानदार रहने वाले मनोहर जोशी को अब आगे का रास्ता खुद तय करना है..... वैसे यकीन जानिये फिलहाल महाराष्ट्र में शिवसेना में उनकी राह में कई कटीले शूल है जिनसे पार पाने की एक बड़ी चुनोती इस समय जोशी के पास है.........देखना होगा २४ साल पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरे जोशी इस बार की परीक्षा में कैसा प्रदर्शन करते है? &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-2724911063655132009?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/2724911063655132009/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=2724911063655132009' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/2724911063655132009'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/2724911063655132009'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/10/blog-post_24.html' title='ठाकरे की सेना में बेगाने मनोहर ...........'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-VvzQiu-x6xU/TqWERUGQLVI/AAAAAAAAAzo/_VMk99yT3Tg/s72-c/joshi.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-5353237894075174340</id><published>2011-10-18T02:23:00.000-07:00</published><updated>2012-01-23T02:01:01.937-08:00</updated><title type='text'>मैं फिल्म निर्देशक कम थियेटर निर्देशक ज्यादा हूँ.....</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-hr5TedAoTzw/Tp1iySz810I/AAAAAAAAAzc/YjwoRiKjq9s/s1600/2.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 266px; DISPLAY: block; HEIGHT: 400px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5664792522484668226" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-hr5TedAoTzw/Tp1iySz810I/AAAAAAAAAzc/YjwoRiKjq9s/s400/2.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 300px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5664792425201771282" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-A38QQHSTK38/Tp1isoZ5oxI/AAAAAAAAAzQ/J52dfDOyedY/s400/1.jpg" /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;"गाँधी माई फादर " जैसी फिल्म बनाकर फिरोज अब्बास खान ने खुद को बालीवुड में फिल्म निर्देशक के तौर पर स्थापित किया है... वैसे बताते चले फिरोज साहब की गिनती थियेटर मंझे खिलाडियों में होती है.... जिन्होंने "सालगिरह" , "तुम्हारी अमृता", "विक्रेता रामलाल और गाँधी विरुद्ध " जैसे नाटको का कुशल निर्देशन किया ... २००७ में उनके द्वारा बनाई गई फिल्म "गाँधी माईफादर " ने कई राष्ट्रीय पुरस्कार जीते जिसमे "दर्शन जरीवाला " ने गाँधी किरदार के रोल के लिए खासी लोकप्रियता बटोरी..... यही नही इस मूवी ने विशेष जूरी को "बेस्ट स्क्रीन प्ले एशिया प्रशांत पुरस्कार" समेत कई अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीते जिससे फिरोज को काफी लोकप्रियता मिली.... फिरोज आज भी अपने को थियेटर निर्देशक मानते है... बीते दिनों मेरी और मेरे साथी ललित की उनसे मुलाकात के मुख्य अंश ---- &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;गाँधी माई फादर आखिरकार आपने बना ही ली.....गाँधी जैसे विराट व्यक्कित्व के किरदार को तीन घंटो के कैनवास पर उकेरना कितना मुश्किल काम था .....? साथ ही आपसे जानना चाहेंगे किस विचार ने इस किरदार के बारे में मूवी बनाने की प्रेरणा आपको दी...?&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;लम्बे अरसे से थियेटर से जुड़ा रहा....अभी भी पूरी तन्मयता के साथ काम कर रहा हू ..... थियेटर करते वक्त मेरे मन में फिल्म बनाने को लेकर उत्सुकता पैदा हुई....कई लोगो ने उस समय कहा आपको ऐसी फिल्म बनानी चाहिए जो थियेटर से एक दम अलग हटकर हो.... तभी मैंने तय कर लिया था मुझे अलग हटकर फिल्म बनानी है... फिर गाँधी जी जैसे विराट व्यक्तित्व पर फिल्म बनाने का आईडिया यही से जेनेरेट हुआ.....इसके लिए मैंने गाँधी जी पर नए तरीके से रिसर्च की और नयी सोच को लेकर लोगो के बीच गया.......&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/em&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;गाँधी माई फादर आपकी मूवी मैंने देखी ... बापू के हर एस्पेक्ट को छूने की कोशिश आपने की है....गाँधी जी पर रिसर्च के दौरान आपको क्या क्या दिक्कते आई?&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;फिल्म बनाने का आईडिया आने के बाद जेहन में कई तरह के सवाल उभरे ...मन में ख्याल आया इतने बड़े व्यक्तित्व के हर पहलू को उजागर करने की कोशिश के दौरान किसी भी तरह की गलती ना होने पाये ....गाँधी जी की कहानी को लेकर जो काम किया है उसमे सबसे जरुरी था जिस व्यक्तित्व को हम महात्मा कह रहे है आखिर क्यों कह रहे है ? मुझे एक पल लगा एक ऐसा आदमी जिसके पीछे सारा देश खड़ा है सारा समाज खड़ा है वही महात्मा है .... इस पर रिसर्च के लिए मैं कई बार दक्षिण अफ्रीका गया .... वहां पर गाँधी जी ने काफी लम्बा समय बिताया था.....वहां कई इतिहासकारों ने मुझसे बात की जिससे गाँधी जी को गहराई से समझ पाया .....&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;"गाँधी माई फादर "के लिए आपने किन किन श्रोतो और सन्दर्भ का सहारा लिया जिससे आपको गाँधी जी पर फिल्म बनाने में सरलता हुई ?&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मेरा सबसे बड़ा श्रोत चंडी लाल दलाल थे जो महात्मा गाँधी जी के लेखाकार थे....उनकी किताबो ने फिल्म निर्माण में मेरी मदद की ....इसके अलावा लीलम बंसाली, हेमंत कुलकर्णी की किताबो ने भी मुझे नयी राह दिखलाई....महाराष्ट्र के इतिहासकार अजीज फडके से भी समय समय पर मेरी मुलाकात होती रही... रोबर्ट सेन की बायोग्राफी ने भी मुझे काफी लाभ पहुचाया.....&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;br /&gt;उदारीकरण&lt;/span&gt; के बाद मल्टीप्लेक्स का युग आया है ....तकनीकी विकास के साथ इस दौर में फिल्म बनाने की तकनीक भी बदली है....इस समय लोगो की डिमांड भी फिल्म को लेकर अलग तरह की है...ऐसे में आप दर्शको से क्या अपेक्षा रखते है? &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;दर्शको से आज के दौर में मैं क्या अपेक्षा करू ? कौन सी फिल्म अच्छी है कौन सी फिल्म बुरी है यह तय करना तो दर्शको का काम है देखिये कहा भी जाता है "लाइफ ब्लो डा बेल्ट बेल्ट इस ब्लो" यह तो आपको तय करना है जो आज के दौर में संभव नही हो रहा है ....गाँधी माई फादर की बात करू तो इसे बनाने में पांच साल तो मेरे रिसर्च में ही चले गए ....&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;आज का दौर अब्बास साहब एक अलग तरह का दौर है.... अजब गजब कहानियो की फिल्मे हुआ करती है .... साथ ही कम बजट और कम समय में फिल्मे पूरी भी हो जा रही है&lt;/strong&gt; ?&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;हाँ , आपकी बात सही है... आज सभी को फिल्म निर्माण की जल्दी है....पुराना दौर एक अलग तरह का दौर होता था... संगीत , गीत के साथ कहानी भी उस दौर में अलग प्रभाव छोडती थी.... लेकिन आज रिसर्च नाम की कोई चीज ही नही बची है सिनेमा में .... मैंने गाँधी माई फादर बनाने में पांच साल तो रिसर्च में ही बिता दिए... दूसरा कोई निर्देशक होता तो पांच साल में पचास फिल्मे बना देता .....&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;पिछले दिनों हमारे समाज में " डेल्ही बेली" जैसी फिल्मे आई ... क्या आप उसे फिल्म मानते है? उसमे अशिष्ट भाषा का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हुआ ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;देखिये मेरा मानना है थोडा बहुत तो चल जाता है लेकिन डेल्ही बेली ने तो हद ही कर दी.... ज्यादा अशिष्ट भाषा की फिल्मो को आप परिवार क साथ बैठकर नही देख सकते.... दूसरा आज के लोगो में फिल्म देखने का नजरिया भी बिलकुल बदल गया है.... जिसके चलते निर्देशक भी ये तय करने लगे है आपको क्या चाहिए?&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;आप थियेटर के मंझे खिलाडी है.... "गाँधी माई फादर " बना ली तो क्या हुआ ? मैं तो आज भी आपको थियेटर के कलाकार के रूप में देखता हू.....थियेटर की वर्तमान सूरते हाल पर आपका क्या कहना है ?&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;em&gt;मैंने तो आपको पहले ही कह दिया मैं फिल्म निर्देशक कम थियेटर निर्देशक ज्यादा हू.... बालीवुड में आज कई थियेटर के कलाकार काम कर रहे है.....मुझे नही लगता आज भी कोई अच्छी कलाकारी में उनसे ज्यादा निपुण है......थियेटर के साथ खास बात यह है इसमें दर्शक आपके प्ले को तुरंत फीडबैक दे देता है जबकि फिल्म में ऐसा नही है......&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;हबीब तनवीर साहब को आज आप कैसे याद करते है? आखिरी दिनों में क्या आपकी उनसे कोई मुलाकात हुई ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;तनवीर साहब से मेरे बहुत ही मधुर सम्बन्ध रहे है.....आखिरी बार जब वह नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा आये तो उन्हें पता चला मेरा प्ले है... उन्होंने उसको देखा उसमे मैंने रामलाल की भूमिका निभाई ....तनवीर जी ने नाटक के बाद खुद मुझे शाबासी दी थी..... मै समझता हू उनके जैसा अब तक ना तो कोई थियेटरकार था ना कभी होगा ...... &lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-5353237894075174340?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/5353237894075174340/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=5353237894075174340' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/5353237894075174340'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/5353237894075174340'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/10/blog-post_18.html' title='मैं फिल्म निर्देशक कम थियेटर निर्देशक ज्यादा हूँ.....'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-hr5TedAoTzw/Tp1iySz810I/AAAAAAAAAzc/YjwoRiKjq9s/s72-c/2.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-3477286471714937338</id><published>2011-10-10T00:35:00.000-07:00</published><updated>2012-01-31T01:04:12.127-08:00</updated><title type='text'>आतंरिक सुरक्षा के लिए खतरा बनता  नक्सलवाद  ........</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-mO8Am_uHOFA/TpKgu8Y_kRI/AAAAAAAAAyk/ti_VnlmD5qg/s1600/maoists-warrior1.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 358px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5661764409903517970" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-mO8Am_uHOFA/TpKgu8Y_kRI/AAAAAAAAAyk/ti_VnlmD5qg/s400/maoists-warrior1.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;"हमारे बाप दादा ने जिस समय हमारा घर बनाया था उस समय घर पर सब कुछ ठीक ठाक था ... संयुक्त परिवार की परंपरा थी ... सांझ ढलने के बाद सभी लोग एक छत के नीचे बैठते थे और सुबह होते ही अपने खेत खलिहान की तरफ निकल पड़ते थे ॥ अब हमारे पास रोजी रोटी का साधन नहीं है... जल ,जमीन,जंगल हमसे छीने जा रहे है और दो जून की रोटी जुटा पाना भी मुश्किल होता जा रहा है ... हमारी वन सम्पदा कारपोरेटघराने लूट रहे है और "मनमोहनी इकोनोमिक्स " के इस दौर में अमीरों और गरीबो की खाई दिन पर दिन चौड़ी होती जा रही है..."&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;६८ साल के रामकिशन नक्सल प्रभावित महाराष्ट्र के गडचिरोली सरीखे अति संवेदनशील इलाके से आते है जिनकी कई एकड़ जमीने उदारीकरण के दौर के आने के बाद कारपोरेटी बिसात के चलते हाथ से चली गई ... पिछले दिनों रामकिशन ने ट्रेन में जब अपनी आप बीती सुनाईतो मुझे भारत के विकास की असली परिभाषा मालूम हुई.... "शाईनिंग इंडिया" के नाम पर विश्व विकास मंच पर भारत की बुलंद आर्थिक विकास का हवाला देने वाले हमारे देश के नेताओ को शायद उस तबके की हालत का अंदेशा नहीं है जिसकी हजारो एकड़ जमीने इस देश में कॉरपोरेट घरानों के द्वारा या तो छिनी गई है या यह सभी छीनने की तैयारी में है...दरअसल इस दौर में विकास एक खास तबके के लोगो के पाले में गया है वही दूसरा तबका दिन पर दिन गरीब होता जा रहा है जिसके विस्थापन की दिशा में कारवाही तो दूर सरकारे चिंतन तक नहीं कर पाई है ..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;फिर अगर नक्सलवाद सरीखी पेट की लड़ाई को सरकार अलग चश्मे से देखती है तो समझना यह भी जरुरी होगा उदारीकरण के आने के बाद किस तरह नक्सल प्रभावित इलाको में सरकार ने अपनी उदासीनता दिखाई है.... जिसके चलते लोग उस बन्दूक के जरिये "सत्ता " को चुनोती दे रहे है जिसके सरोकार इस दौर में आम आदमी के बजाय " कोर्पोरेट " का हित साध रहे है.........प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नक्सलवादी लड़ाई को अगर देश की आतंरिक सुरक्षा के लिये एक बड़ा खतरा बताते है तो समझना यह भी जरुरी हो जाता है आखिर कौन से ऐसे कारण है जिसके चलते बन्दूक सत्ता की नली के जरिये "चेक एंड बेलेंस" करता खेल खेलना चाहती है? &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कार्ल मार्क्स के वर्ग संघर्ष के सिद्धांत के रूप में नक्सलवाद की व्यवस्था पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से १९६७ में कानू सान्याल, चारू मजूमदार, जंगल संथाल की अगुवाई में शुरू हुई .... सामाजिक , आर्थिक , राजनीतिक समानता स्थापित करने के उद्देश्य से इस तिकड़ी ने उस दौर में बेरोजगार युवको , किसानो को साथ लेकर गाव के भू स्वामियों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया था ......उस दौर में " आमारबाडी, तुम्हारबाडी, नक्सलबाडी" के नारों ने भू स्वामियों की चूले हिला दी.... इसके बाद चीन में कम्युनिस्ट राजनीती के प्रभाव से इस आन्दोलन को व्यापक बल भी मिला ..........केन्द्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट को अगर आधार बनाये तो इस समय आन्ध्र, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, झारखण्ड, बिहार , महाराष्ट्र समेत १४ राज्य नक्सली हिंसा से बुरी तरह प्रभावित है..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;नक्सलवाद के उदय का कारण सामाजिक, आर्थिक , राजनीतिक असमानता और शोषण है.... बेरोजगारी, असंतुलित विकास ये कारण ऐसे है जो नक्सली हिंसा को लगातार बढ़ा रहे है......नक्सलवादी राज्य का अंग होने के बाद भी राज्य से संघर्ष कर रहे है.... चूँकि इस समूचे दौर में उसके सरोकार एक तरह से हाशिये पर चले गए है .....और सत्ता ओर कॉर्पोरेट का कॉकटेल जल , जमीन, जंगल के लिये खतरा बन गया है अतः इनका दूरगामी लक्ष्य सत्ता में आमूल चूल परिवर्तन लाना बन गया है ......इसी कारण सत्ता की कुर्सी सँभालने वाले नेताओ और नौकरशाहों को ये सत्ता के दलाल के रूप में चिन्हित करते है ......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;नक्सलवाद के बड़े पैमाने के रूप में फैलने का एक कारण भूमि सुधार कानूनों का सही ढंग से लागू ना हो पाना भी है....जिस कारण अपने प्रभाव के इस्तेमाल के माध्यम से कई ऊँची रसूख वाले जमीदारो ने गरीबो की जमीन पर कब्ज़ा कर दिया जिसके एवज में उनमे काम करने वाले मजदूरों का न्यूनतम मजदूरी देकर शोषण शुरू हुआ ॥ इसी का फायदा नक्सलियों ने उठाया और मासूमो को रोजगार और न्याय दिलाने का झांसा देकर अपने संगठन में शामिल कर दिया... यही से नक्सलवाद की असल में शुरुवात हो गई ओर आज कमोवेश हर अशांत इलाके में नक्सलियों के बड़े संगठन बन गए है .....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;आज आलम ये है हमारा पुलिसिया तंत्र इनके आगे बेबस हो गया है इसी के चलते कई राज्यों में नक्सली समानांतर सरकारे चला रहे है .....देश की सबसे बड़ी नक्सली कार्यवाही १३ नवम्बर २००५ को घटी जहाँ जहानाबाद जिले में मओवादियो ने किले की तर्ज पर घेराबंदी कर स्थानीय प्रशासन को अपने कब्जे में ले लिया जिसमे तकरीबन ३०० से ज्यादा कैदी शामिल थे .."ओपरेशन जेल ब्रेक" नाम की इस घटना ने केंद्र और राज्य सरकारों के सामने मुश्किलें बढ़ा दी...तब से लगातार नक्सली एक के बाद एक घटनाये कर राज्य सरकारों की नाक में दम किये है॥ चाहे मामला बस्तर का हो या दंतेवाडा का हर जगह एक जैसे हालात है....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;आज तकरीबन देश के एक चौथाई जिले नक्सलियों के कब्जे में है.... वर्तमान में नक्सलवादी विचारधारा हिंसक रूप धारण कर चुकी है .... सर्वहारा शासन प्रणाली की स्थापना हेतु ये हिंसक साधनों के जरिये सत्ता परिवर्तन के जरिये अपने लक्ष्य प्राप्ति की चाह लिये है ....सरकारों की "सेज" सरीखी नीतियों ने भी आग में घी डालने का काम किया है....सेज की आड़ में सभी कोर्पोरेट घराने अपने उद्योगों की स्थापना के लिये जहाँ जमीनों की मांग कर रहे है वही सरकारों का नजरिया निवेश को बढ़ाना है जिसके चलते औद्योगिक नीति को बढावा दिया जा रहा है ॥"&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कृषि " योग्य भूमि जो भारतीय अर्थव्यवस्था की रीड है उसे ओद्योगिक कम्पनियों को विकास के नाम पर उपहारस्वरूप दिया जा रहा है जिससे किसानो की माली हालत इस दौर में सबसे ख़राब हो चली है.... यहाँ बड़ा सवाल ये भी है "सेज" को देश के बंजर इलाको में भी स्थापित किया जा सकता है लेकिन कंपनियों पर " मनमोहनी इकोनोमिक्स " ज्यादा दरियादिली दिखाता नजर आता है....जहाँ तक किसानो के विस्थापन का सवाल है तो उसे बेदखल की हुई जमीन का विकल्प नहीं मिल पा रहा है ॥ मुआवजे का आलम यह है सत्ता में बैठे हमारे नेताओ का कोई करीबी रिश्तेदार अथवा उसी बिरादरी का कोई कृषक यदि मुआवजे की मांग करता है तो उसको अधिक धन प्रदान किया जा रहा है .... मंत्री महोदय का यही फरमान ओर फ़ॉर्मूला किसानो के बीच की खायी को और चौड़ा कर रहा है ....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;सरकार से हारे हुए मासूमो की जमीनों की बेदखली के बाद एक फूटी कौड़ी भी नहीं बचती जिस कारन समाज में बदती असमानता उन्हें नक्सलवाद के गर्त में धकेल रही है ..."सलवा जुडूम" में आदिवासियों को हथियार देकर अपनी बिरादरी के "नक्सलियों" के खिलाफ लड़ाया जा रहा है जिस पर सुप्रीम कोर्ट तक सवाल उठा चुका है...हाल के वर्षो में नक्सलियों ने जगह जगह अपनी पैठ बना ली है और आज हालात ये है बारूदी सुरंग बिछाने से लेकर ट्रेन की पटरियों को निशाना बनाने में ये नक्सली पीछे नहीं है... अब तो ऐसी भी खबरे है हिंसा और आराजकता का माहौल बनाने में जहाँ चीन इनको हथियारों की सप्लाई कर रहा है वही हमारे देश के कुछ सफेदपोश नेता धन देकर इनको हिंसक गतिविधियों के लिये उकसा रहे है....अगर ये बात सच है तो यकीन जान लीजिये यह सब हमारी आतंरिक सुरक्षा के लिये खतरे की घंटी है.... केंद्र सरकार के पास इससे लड़ने के लिये इच्छा शक्ति का अभाव है वही राज्य सरकारे केंद्र सरकार के जिम्मे इसे डालकर अपना उल्लू सीधा करती है... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;असलियत ये है कानून व्यवस्था शुरू से राज्यों का विषय रही है ....हमारा पुलिसिया तंत्र भी नक्सलियों के आगे बेबस नजर आता है.... राज्य सरकारों में तालमेल में कमी का सीधा फायदा ये नक्सली उठा रहे है.... पुलिस थानों में हमला बोलकर हथियार लूट कर वह जंगलो के माध्यम से एक राज्य की सीमा लांघ कर दुसरे राज्य में चले जा रहे है ...ऐसे में राज्य सरकारे एक दुसरे पर दोषारोपण कर अपने कर्तव्य की इति श्री कर लेती है... इसी आरोप प्रत्यारोप की उधेड़बुन में हम आज तक नक्सली हिंसा समाधान नहीं कर पाए है... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;गृह मंत्रालय की " स्पेशल टास्क फ़ोर्स " रामभरोसे है ॥ इसे अमली जामा पहनाने में कितना समय लगेगा कुछ कहा नहीं जा सकता.....? केंद्र के द्वारा दी जाने वाली मदद का सही इस्तेमाल कर पाने में भी अभी तक पुलिसिया तंत्र असफल साबित हुआ है ....भ्रष्टाचार रुपी भस्मासुर का घुन ऊपर से लेकर नीचे तक लगे रहने के चलते आज तक कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आ पाए है...साथ ही नक्सल प्रभावित राज्यों में आबादी के अनुरूप पुलिस कर्मियों की तैनाती नहीं हो पा रही है....कॉन्स्टेबल से लेकर अफसरों के कई पद जहाँ खली पड़े है वही ऐसे नक्सल प्रभावित संवेदनशील इलाको में कोई चाहकर भी काम नहीं करना चाहता.... इसके बाद भी सरकारों का गाँव गाँव थाना खोलने का फैसला समझ से परे लगता है....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;नक्सल प्रभावित राज्यों पर केंद्र को सही ढंग से समाधान करने की दिशा में गंभीरता से विचार करने की जरुरत है.... चूँकि इन इलाको में रोटी, कपड़ा, मकान जैसी बुनियादी समस्याओ का अभाव है जिसके चलते बेरोजगारी के अभाव में इन इलाको में भुखमरी की एक बड़ी समस्या बनी हुई है.... सरकारों की असंतुलित विकास की नीतियों ने इन इलाके के लोगो को हिंसक साधन पकड़ने के लिये मजबूर कर दिया है ... इस दिशा में सरकारों को अभी से विचार करना होगा तभी बात बनेगी.... अन्यथा आने वाले वर्षो में ये नक्सलवाद "सुरसा के मुख" की तरह अन्य राज्यों को निगल सकता है....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कुल मिलकर आज की बदलती परिस्थितियों में नक्सलवाद भयावह रूप लेता नजर आ रहा है... बुद्ध, गाँधी की धरती के लोग आज अहिंसा का मार्ग छोड़कर हिंसा पर उतारू हो गए है... विदेशी वस्तुओ का बहिष्कार करने वाले आज पूर्णतः विदेशी विचारधारा को अपना आदर्श बनाने लगे है... नक्सल प्रभावित राज्यों में पुलिस कर्मियों की हत्या , हथियार लूटने की घटना बताती है नक्सली अब "लक्ष्मण रेखा" लांघ चुके है....नक्सल प्रभावित राज्यों में जनसँख्या के अनुपात में पुलिस कर्मियों की संख्या कम है... पुलिस जहाँ संसाधनों का रोना रोती है ....वही हमारे नेताओ में इससे लड़ने के लिये इच्छा शक्ति नहीं है ....ख़ुफ़िया विभाग की नाकामी भी इसके पाँव पसारने का एक बड़ा कारन है ....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;एक हालिया प्रकाशित रिपोर्ट को अगर आधार बनाये तो इन नक्सलियों को जंगलो में "माईन्स" से करोडो की आमदनी होती है.... कई परियोजनाए इनके दखल के चलते लंबित पड़ी हुई है.... नक्सलियों के वर्चस्व को जानने समझने करता सबसे बेहतर उदाहरण झारखण्ड का "चतरा " और छत्तीसगढ़ करता "बस्तर" ओर "दंतेवाडा " जिला है जहाँ बिना केंद्रीय पुलिस कर्मियों की मदद के बिना किसी का पत्ता तक नहीं हिलता.... यह काफी चिंताजनक है... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;नक्सल प्रभावित राज्यों में आम आदमी अपनी शिकायत दर्ज नहीं करवाना चाहता ॥ वहां पुलिसिया तंत्र में भ्रष्टाचार पसरगया है .... साथ ही पुलिस का एक आम आदमी के साथ कैसा व्यवहार है यह बताने की जरुरत नहीं है.... अतः सरकारों को चाहिए वह नक्सली इलाको में जाकर वहां बुनियादी समस्याए दुरुस्त करे... आर्थिक विषमता के चले ही वह लोग आज बन्दूक उठाने को मजबूर हुए है... ऊपर की कहानी केवल रामकिशन की नहीं , कहानी घर घर के रामकिशन की बन चुकी है........&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-3477286471714937338?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/3477286471714937338/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=3477286471714937338' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/3477286471714937338'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/3477286471714937338'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/10/blog-post_10.html' title='आतंरिक सुरक्षा के लिए खतरा बनता  नक्सलवाद  ........'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-mO8Am_uHOFA/TpKgu8Y_kRI/AAAAAAAAAyk/ti_VnlmD5qg/s72-c/maoists-warrior1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-3751228431542101532</id><published>2011-10-02T20:37:00.000-07:00</published><updated>2011-10-02T20:45:29.283-07:00</updated><title type='text'>भारतीय राजनीती में गहरा रहा है परिवारवाद ............</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-2GB19ditpZ0/TokurvV8GQI/AAAAAAAAAyc/lR_NyNroLM0/s1600/carcat.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5659105735745476866" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 307px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-2GB19ditpZ0/TokurvV8GQI/AAAAAAAAAyc/lR_NyNroLM0/s400/carcat.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;हमारे देश की राजनीती में परिवारवाद तेजी से गहराता जा रहा है.....जिस तेजी से परिवारवाद यहाँ पैर पसार रहा है उसके हिसाब से वह दिन दूर नहीं जब देश में कोई भी ऐसा नेता मिलना मुश्किल हो जायेगा जिसका कोई करीबी रिश्तेदार राजनीती में नहीं हो ..... राजनीतिक परिवारों के लिये भारतीय राजनीती से ज्यादा उर्वरक जमीन पूरे विश्व में कही नहीं है.....आज का समय ऐसा हो गया है राजनीती का कारोबार सभी को पसंद आने लगा है ॥ तभी सभी अपने नाते रिश्तेदारों को राजनीती में लाने लगे है....ऐसे हालातो में वो लोग" साइड लाइन" होने लगे है जिन्होंने किसी दौर में पार्टी के लिये पूरे मनोयोग से काम किया था...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;आज के समय में नेताओ का पुत्र होने लाभ का सौदा है .... अगर आप किसी नेता के पुत्र है तो सारा प्रशासनिक अमला आपके साथ रहेगा ........यहाँ तक की मीडिया भी आपकी ही चरण वंदना करेगा ....अगर खुशकिस्मती से आप अपने रिश्तेदारों की वजह से टिकट पा गए तो समझ लीजिये आपको कुछ करने की जरुरत नही है ..... चूँकि आपके रिश्तेदार किसी पार्टी से जुड़े है इसलिए उनके साथ कार्यकर्ताओ की जो फ़ौज खड़ी है वो खुद आपके साथ चली आएगी...... इन सब बातो के मद्देनजर वो कार्यकर्ता अपने को ठगा महसूस करता है जिसने अपना पूरा जीवन पार्टी की सेवा में लगा दिया...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;धीरे धीरे भारतीय राजनीती अब इसी दिशा में आगे बढ़ रही है ..... राजनीती में गहराते जा रहे इस वंशवाद को अगर नहीं रोका गया तो वो दिन दूर नहीं जब हमारे लोकतंत्र का जनाजा ये परिवारवाद निकाल देगा .......भारतीय राजनीती आज जिस मुकाम पर है अगर उस पर नजर डाले तो हम पाएंगे आज राष्ट्रीय दल से लेकर प्रादेशिक दल भी इसे अपने आगोश में ले चुके है..... कांग्रेस पर राजनीतिक परिवारवादी के बीजो को रोपने का आरोप शुरू से लगता रहा है लेकिन आज आलम यह है कल तक परिवारवाद को कोसने वाले नेता भी आज अपने बच्चो को परिवारवाद के गर्त में धकेलते जा रहे है..... देश की विपक्षी पार्टी भाजपा में भी आज यही हाल है ... उसके अधिकांश नेता आज परिवारवाद की वकालत कर रहे है....."हमाम में सभी नंगे है" कमोवेश यही हालात देश के अन्य राजनीतिक दलों में भी है........ &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;भारतीय राजनीती में इस वंशवाद को बढाने में हमारा भी एक बढ़ा योगदान है.....संसदीय लोकतंत्र में सत्ता की चाबी वैसे तो जनता के हाथ रहती है लेकिन हमारी सोच भी परिवारवाद के इर्द गिर्द ही घुमा करती है .... वह सम्बन्धित व्यक्ति के नाते रिश्तेदार को देखकर वोट दिया करती है....जबकि सच्चाई ये है , चुनाव में राजनीतिक परिवारवाद से कदम बढ़ने वाले अधिकाश लोगो के पास देश दुनिया और आम आदमी की समस्याओ से कोई वास्ता ओर सरोकार नहीं होता ......वो तो शुक्र है ये लोग अपने पारिवारिक बैक ग्राउंड के चलते राजनीती में अपनी साख जमा लेते है ...... ऐसे लोगो ने भारतीय राजनीती को पुश्तैनी व्यवसाय बना दिया है .......जहाँ पर उनकी नजरे केवल मुनाफे पर आ टिकी है.....इसी के चलते आज वे किसी भी आम आदमी को आगे बढ़ता हुआ नहीं देखना चाहते......&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;वंशवाद अगर इसी तरह से अगर आगे बढ़ता रहा तो आम आदमी का राजनीती में प्रवेश करने का सपना सपना बनकर रह जायेगा ........परिवारवाद को बढाने वाले कुछ लोगो ने राजनीती को अपनी बपोती बना कर रख दिया है......यही लोग है जिनके चलते आज "जन लोकपाल " बिल पारित नहीं हो पा रहा है.... अन्ना सरीखे लोगो ने आज इन्ही की बादशाहत को खुली चुनोती दे दी है ......जिसके चलते खुद को सत्ता का मठाधीश समझने वाले इन नेताओ को आज उनका सिंहासन खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है.........&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-3751228431542101532?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/3751228431542101532/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=3751228431542101532' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/3751228431542101532'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/3751228431542101532'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/10/blog-post_02.html' title='भारतीय राजनीती में गहरा रहा है परिवारवाद ............'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-2GB19ditpZ0/TokurvV8GQI/AAAAAAAAAyc/lR_NyNroLM0/s72-c/carcat.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-5070262168406923041</id><published>2011-10-02T20:27:00.000-07:00</published><updated>2011-10-13T03:10:21.295-07:00</updated><title type='text'>तेरा जाना दिल के अरमानो  का लुट जाना........</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-xgBVE7ghb44/Tokss4CACmI/AAAAAAAAAyU/J4tkQLFJbgU/s1600/vasant-sathe.png"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 264px; DISPLAY: block; HEIGHT: 350px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5659103556234381922" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-xgBVE7ghb44/Tokss4CACmI/AAAAAAAAAyU/J4tkQLFJbgU/s400/vasant-sathe.png" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;br /&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;तेरा जाना दिल के अरमानो का लुट जाना" .....विदर्भ की जनता पर आज हिंदी फिल्म का यह पुराना गाना सौ फीसदी सच साबित हो रहा है.... अपने किसी जन नेता के खोने का गम किसी को कैसा सताता है यह इस गाने से बखूबी साबित हो जाता है... बीते दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बाबू साहब उर्फ बसंत राव साठे की मौत की खबर से पूरे विदर्भ वासी शोकमग्न है... साठे का गुडगाव में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया .... ८६ वर्षीय साठे इंदिरा , राजीव, नरसिंह राव की तीनो सरकार में वरिष्ठ मंत्री और अन्य पदों पर रहे थे ......उनके निधन से महाराष्ट्र के विदर्भ ने एक बड़े जन नेता को खो दिया .......... साठे से जुडी कुछ बातें ......... ........&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;विदर्भ के कट्टर समर्थक&lt;/strong&gt; ---- सार्वजनिक जीवन में रहते हुए २००३ में साठे ने अपने सहयोगी एन के पी साल्वे के संघ कांग्रेस का त्याग किया था ... यह कदम उन्होंने स्वतन्त्र विदर्भ की मांग के समर्थन में उठाया था .....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;मिलिटरी स्कूल में शिक्षा&lt;/strong&gt; --- साठे ने अपनी आरंभिक पदाई नासिक के भोंसले मिलिटरी स्कूल से की .... नागपुर विश्व विद्यालय से उन्होंने अर्थशास्त्र राजनीतिक विज्ञान में स्नातक की डिग्री ली ... साथ ही उन्होंने अपनी वकालत भी की.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;बाक्सिंग चैम्पियन&lt;/strong&gt;---- विचारो से गाँधीवादी , आत्मा से समाजवादी पड़ी के दरमियान खेलो में भी आगे रहे.... मौरिस स्कूल से वह बाक्सिंग चैम्पियन भी रहे....समाजवादी से कांग्रेसी ---- साठे मशहूर वक्ता होने के साथ ही सामाजिक जीवन से समाजवादी नजर आये... १९४८ में उन्होंने लोहियावाद से प्रेरित होकर समाजवादी पार्टी में प्रवेश लिया ... १९६४ में अशोक मेहता से प्रेरित होकर उन्होंने कांग्रेस पार्टी में राजनीती को करियर के रूप में चुना......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;अकोला से सांसद&lt;/strong&gt; -----साठे ने अपना पहला लोक सभा चुनाव १९७२ में अकोला से लड़ा था .... १९७० में वह य़ू एन ओ में भारतीय प्रतिनिधित्व भी कर चुके थे.....इंदिरा के साथी---- आपातकाल और उसके बाद विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने इंदिरा गाँधी का साथ दिया.... १९७७ में इसके फलस्वरूप उनको कांग्रेस संसदीय दल का उपनेता बनने का मौका मिला...... १९७९ तक वह पार्टी के प्रवक्ता भी रहे......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;कलर टी वी योगदान&lt;/strong&gt; --- १९८० में साठे कांग्रेस सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री बनाये गए.....इस दौर में उन्होंने भारत में टी वी के युग की शुरुवात की.....हम लोग, बुनियाद जैसे सेरियालो की नीव डालने और १९८३ के एशियन गेम को टी वी में दिखाकर उन्होंने सबसे सामने खुद का लोहा मनवाया था.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;८० में वर्धा से निर्वाचित&lt;/strong&gt;---- १९७२ में अकोला संसदीय इलाके से चुनाव जीतने के बाद साठे १९८० में महात्मा गाँधी की कर्म स्थली वर्धा से चुनाव जीतकर केंद्र में मंत्री बने ....... ७२ में योजना आयोग के सलाहकार नियुक्त हुए .... ८० से ९० तक लगतार वर्धा का प्रतिनिधित्व भी किया... इस दरमियान वह इस्पात, रसायन, उर्वरक कोयला मंत्री भी रहे ....... विदर्भ में उद्योग को गति भी सही मायनों में साठे ने ही दी......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;लेखक भी रहे&lt;/strong&gt;--- बसंतराव लेखन से भी जुड़े रहे.... २००५ में अपना ८१ वा जन्म दिन मनाते समय उन्होंने अपनी आत्मकथा " मेमोरीज ऑफ़ ऐ रेशेंलिस्ट " लिखी...उन्होंने नए भारत नयी चुनौतिया , भारत में आर्थिक लोकतंत्र समेत तकरीबन आठ किताबे लिखी......इन आठो किताबो में उनकी काले धन पर लिखी गई एक किताब खासी महत्वपूर्ण है....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;उतारा था यूनियन जेक&lt;/strong&gt;----- बसंतराव में बचपन से देश प्रेम की भावना कूट कूट कर भरी हुई थी.... १९४२ में नागपुर की जिला अदालत की ईमारत पर चदकर उन्होंने अंग्रेजी शासन के प्रतीक यूनियन जेक को नीचे उतारकर तिरंगा फहराया था....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;विदर्भ से नाता गहरा&lt;/strong&gt; --- उनका विदर्भ से गहरा नाता था ॥ दिल्ली की राजनीती में रमे रहने के बाद भी वह समय निकालकर वर्धा आते थे ... यहाँ आकर काम करवाया करते थे.... जिस दिन उनकी मौत करता समाचार लोगो ने सुना तो आखें नम हो गई.... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;लोग कह रहे थे अगर वो ९१ में वर्धा से नहीं हारते तो शायद नर सिंह राव की जगह प्रधानमंत्री होते.....राजीव की हत्या के बाद वह लगातार हाशिये में चले गए... ९१ की हार के बाद पार्टी ने उन्हें १९९६ में दुबारा वर्धा से टिकट दिया लेकिन वह अपनी सीट नहीं बचा पाए....इसके बाद से उन्होंने कभी इस संसदीय इलाके में कदम नहीं रखा .....उनकी मौत के बाद भी आज विदर्भ में उनके प्रशंसको की कमी नहीं है... शायद यही कारन है आज भी लोग उनकी गिनती इस इलाके में "विकास पुरुष"के रूप में करते है.........&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-5070262168406923041?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/5070262168406923041/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=5070262168406923041' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/5070262168406923041'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/5070262168406923041'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/10/blog-post.html' title='तेरा जाना दिल के अरमानो  का लुट जाना........'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-xgBVE7ghb44/Tokss4CACmI/AAAAAAAAAyU/J4tkQLFJbgU/s72-c/vasant-sathe.png' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-2800695453585802152</id><published>2011-09-13T10:22:00.000-07:00</published><updated>2011-09-13T10:54:45.020-07:00</updated><title type='text'>हिलजात्रा  ..............</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-ihB-j4MxITk/Tm-Xshq7lVI/AAAAAAAAAxk/7V0czjioBfg/s1600/lakhiya%2Bbhoot.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 200px; DISPLAY: block; HEIGHT: 270px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5651902848581735762" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-ihB-j4MxITk/Tm-Xshq7lVI/AAAAAAAAAxk/7V0czjioBfg/s400/lakhiya%2Bbhoot.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;लोकसंस्कृति का सीधा जुडाव मानव जीवन से होता है..... उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुषमा और सौन्दर्य का धनी रहा है ..... यहाँ पर मनाये जाने वाले कई त्योहारों में अपनी संस्कृति की झलक दिखाई देती है... राज्य के सीमान्त जनपद पिथौरागढ़ में मनाये जाने वाले उत्सव हिलजात्रा में भी हमारे स्थानीय परिवेश की एक झलक दिखाई देती है...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;हिलजात्रा एक तरह का मुखौटा नृत्य है .... यह ग्रामीण जीवन की पूरी झलक हमको दिखलाता है... भारत की एक बड़ी आबादी जो गावों में रहती है उसकी एक झलक इस मुखौटा नृत्य में देखी जा सकती है... हिलजात्रा का यह उत्सव खरीफ की फसल की बुवाई की खुशी मनाने से सम्बन्धित है... इस उत्सव में जनपद के लोग अपनी भागीदारी करते है...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;"हिल " शब्द का शाब्दिक अर्थ दलदल अर्थात कीचड वाली भूमि से और "जात्रा" शब्द का अर्थ यात्रा से लगाया जाता है ... कहा जाता है मुखौटा नृत्य के इस पर्व को तिब्बत ,नेपाल , चीन में भी मनाया जाता है... उत्तराखंड का सीमान्त जनपद पिथौरागढ़ सोर घाटी के नाम से भी जाना जाता है ...यहाँ पर वर्षा के मौसम की समाप्ति पर "भादों" माह के आगमन पर मनाये जाने वाला यह उत्सव इस बार भी बीते दिनों कुमौड़ गाव में धूम धाम के साथ मनाया गया...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इस उत्सव में ग्रामीण लोग बड़े बड़े मुखौटे पहनकर पात्रो के अनुरूप अभिनय करते है.....कृषि परिवेश से जुड़े इस उत्सव में ग्रामीण परिवेश का सुंदर चित्रण होता है......इस उत्सव में मुख्य पात्र नंदी बैल , ढेला फोड़ने वाली महिलाए, हिरन, चीतल, हुक्का चीलम पीते लोग, धान की बुवाई करने वाली महिलाए है .... कुमौड़ गाव की हिलजात्रा का मुख्य आकर्षण "लखिया भूत " होता है... इस भूत को "लटेश्वर महादेव" के नाम से भी जानते है॥ मान्यता है यह लखिया भूत भगवान् भोलेनाथ का १२वा गण है ... कहा जाता है इसको प्रसन्न करने से गाव में सुख समृधि आती है... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;हिलजात्रा का मुख्य आकर्षण लखिया भूत होता है जो सबके सामने उत्सव के समापन में लाया जाता है... जिसको दो गण रस्सी से खीचते है...यह बहुत देर तक मैदान में घूमता है ..... माना जाता है यह लखिया भूत क्रोध का प्रतिरूप है...... जब यह मैदान में आता है तो सभी लोग इसका फूलो और अक्षत की बौछारों से अभिनन्दन करते है...इस दौरान सभी शिव जी के १२ वे गण से आर्शीवाद लेते है...कहते है इस भूत के प्रसन्न रहने से गाव में फसल का उत्पादन अधिक होता है ...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कुमौड़ वार्ड के पूर्व सभासद गोविन्द सिंह महर कहते है यह हिलजात्रा पर्व मुख्य रूप से नेपाल की देन है... जनश्रुतियों के अनुसार कुमौड़ गाव की "महर जातियों की बहादुरी के चर्चे प्राचीन काल में पड़ोसी नेपाल के दरबार में सर चदकर बोला करते थे ... इन वीरो की वीरता को सलाम करते हुए गाव वालो को यह उत्सव उपहार स्वरूप दिया गया..... तभी से इसको मनाने की परम्परा चली आ रही है ..... आज भी यह उत्सव पूरे उल्लास के साथ मनाया जाता है......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-2800695453585802152?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/2800695453585802152/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=2800695453585802152' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/2800695453585802152'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/2800695453585802152'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/09/blog-post.html' title='हिलजात्रा  ..............'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-ihB-j4MxITk/Tm-Xshq7lVI/AAAAAAAAAxk/7V0czjioBfg/s72-c/lakhiya%2Bbhoot.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-1012474057723260917</id><published>2011-08-29T02:51:00.000-07:00</published><updated>2011-09-01T05:01:01.621-07:00</updated><title type='text'>१० जनपथ का पॉवर हाउस : अहमद पटेल</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-7v0YI13dBwo/Tltu1a1r_nI/AAAAAAAAAxc/DlTT6UX8zP0/s1600/Ahmed_Patel%2528small_size%2529.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 317px; DISPLAY: block; HEIGHT: 521px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5646228421855673970" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-7v0YI13dBwo/Tltu1a1r_nI/AAAAAAAAAxc/DlTT6UX8zP0/s400/Ahmed_Patel%2528small_size%2529.jpg" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;संसदीय&lt;/span&gt; राजनीती के मायने भले ही इस दौर में बदल गए हो और उसमे सत्ता का केन्द्रीयकरण देखकर अब उसे विकेंद्रीकृत किये जाने की बात की जा रही हो लेकिन देश की पुरानी पार्टी कांग्रेस में परिवारवाद साथ ही सत्ता के केन्द्रीकरण का दौर नही थम रहा है .....दरअसल आज़ादी के बाद से ही कांग्रेस में सत्ता का मतलब एक परिवार के बीच सत्ता का केन्द्रीकरण रहा है....फिर चाहे वो दौर पंडित जवाहरलाल नेहरु का हो या इंदिरा गाँधी या फिर राजीव गाँधी का ... राजीव गाँधी के दौर के खत्म होने के बाद एक दौर ऐसा भी आया जब कांग्रेस पार्टी की सत्ता लडखडाती नजर आई..... उस समय पार्टी के अध्यक्ष पद की कमान सीता राम केसरी के हाथो में थी..... यही वह दौर था जिस समय कांग्रेस पार्टी सबसे बुरे दौर से गुजरी..... यही वह दौर था जब भाजपा ने पहली बार गठबंधन सरकार का युग शुरू किया और अपने बूते केन्द्र की सत्ता पायी थी.... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;उस&lt;/span&gt; दौर में किसी ने शायद कल्पना नही की थी कि एक दिन फिर यही कांग्रेस पार्टी भाजपा को सत्ता से बेदखल कर केन्द्र में सरकार बना पाने में सफल हो जाएगी.... यही नही वामपंथियों की बैसाखियों के आसरे अपने पहले कार्यकाल में टिकी रहने वाली कांग्रेस अन्य पार्टियों से जोड़ तोड़ कर सत्ता पर काबिज हो जाएगी और "मनमोहन" शतरंज की बिसात पर सभी को पछाड़कर दुबारा "किंग" बन जायेंगे ऐसी कल्पना भी शायद किसी ने नही की होगी ...... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;दरअसल इस समूचे दौर में कांग्रेस पार्टी की परिभाषा के मायने बदल चुके है ....उसमे अब परिवारवाद की थोड़ी महक है और कही ना कहीं भरोसेमंद "ट्रबल शूटरो" का भी समन्वय.....इसी के आसरे उसने यू पी ऐ १ से यू पी ऐ २ की छलांग लगाई है ....सोनिया गाँधी ने जब से हिचकोले खाती कांग्रेस की नैय्या पार लगाने की कमान खुद संभाली है तब से सही मायनों में कांग्रेस की सत्ता का संचालन १० जनपथ से हो रहा है ..... यहाँ पर सोनिया के भरोसेमंद कांग्रेस की कमान को ना केवल संभाले हुए है बल्कि पी ऍम ओ तक को इनके आगे नतमस्तक होना पड़ता है ..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इस दौर में कांग्रेस की सियासत १० जनपथ से तय हो रही है जहा पर कांग्रेस के सिपहसलार समूची व्यवस्था को इस तरह संभाल रहे है कि उनके हर निर्णय पर सोनिया की सहमती जरुरी बन जाती है.... दस जनपथ की कमान पूरी तरह से इस समय अहमद पटेल के जिम्मे है....जिनके निर्देशों पर इस समय पूरी पार्टी चल रही है....."अहमद भाई" के नाम से मशहूर इस शख्स के हर निर्णय के पीछे सोनिया गाँधी की सहमती रहती है.... सोनिया के "फ्री हैण्ड " मिलने के चलते कम से कम कांग्रेस में तो आज कोई भी अहमद पटेल को नजरअंदाज नही कर सकता है...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कांग्रेस में अहमद पटेल की हैसियत देखिये बिना उनकी हरी झंडी के बिना कांग्रेस में पत्ता तक नही हिला करता ....कांग्रेस में "अहमद भाई" की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी के किसी भी छोटे या बड़े नेता या कार्यकर्ता को सोनिया से मिलने के लिए सीधे अहमद पटेल से अनुमति लेनी पड़ती है.....अहमद की इसी रसूख के आगे पार्टी के कई कार्यकर्ता अपने को उपेक्षित महसूस करते है लेकिन सोनिया मैडम के आगे कोई भी अपनी जुबान खोलने को तैयार नही होता है ....मेरे राज्य से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस नेता के एक बेहद करीबी व्यक्ति ने मुझे बीते दिनों बताया कि कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्य मंत्री अहमद पटेल से अनुमति लेकर सोनिया से मिलते है .... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;अहमद भाई को समझने के लिए हमें ७० के दशक की ओर रुख करना होगा.....यही वह दौर था जब अहमद गुजरात की गलियों में अपनी पहचान बना रहे थे.....उस दौर में अहमद पटेल "बाबू भाई" के नाम से जाने जाते थे और १९७७ से १९८२ तक उन्होंने गुजरात यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष पद की कमान संभाली .....७७ के ही दौर में वो भरूच कोपरेटिव बैंक के निदेशक भी रहे.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इसी समय उनकी निकटता राजीव के पिता फिरोज गाँधी से भी बढ़ गई क्युकि राजीव के पिता फिरोज का सम्बन्ध अहमद पटेल के गृह नगर से पुराना था..... इसी भरूच से अहमद पटेल तीन बार लोक सभा भी पहुचे ... १९८४ में अहमद पटेल ने कांग्रेस में बड़ी पारी खेली और वह "जोइंट सेकेटरी" तक पहुच गए लेकिन पार्टी ने उस दौर में उन्हें सीधे राजीव गाँधी का संसदीय सचिव नियुक्त कर दिया था ......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इसके बाद कांग्रेस का गुजरात में जनाधार बढाने के लिए पटेल को १९८६ में गुजरात भी भेजा गया .... गुजरात में पटेल को करीब से जाने वाले बताते है पूत के पाँव पालने में ही दिखाई देते है... शायद तभी अहमद पटेल ने राजनीती में बचपन से ही पैर जमा लिए थे......पटेल के टीचर ऍम एच सैयद ने उन्हें ८ वी क्लास का मोनिटर बना दिया था.....यही नही जोड़ तोड़ की कला में पटेल कितने माहिर थे इसकी मिसाल उनके टीचर यह कहते हुए देते है कि अहमद पटेल ने उस दौर में उनको उस विद्यालय का प्रिंसिपल बना दिया था.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;शायद बहुत कम लोगो को ये मालूम है कि गुजरात के पीरमण में अहमद पटेल का जीवन क्रिकेट खेलने में भी बीता था उस दौर में पीरमण की क्रिकेट टीम की कमान खुद वो सँभालते थे .....टीम में उनकी गिनती एक अच्छे आल राउनडर के तौर पर होती थी.....अहमद पटेल की इन्ही विशेषताओ के कारण शायद उन्हें उस पार्टी में एक बड़ी जिम्मेदारी दी गई जो देश की सबसे बड़ी पार्टी है .....यहाँ अहमद पटेल सोनिया गाँधी के राजनीतिक सलाहकार है ..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;अहमद की इसी ताकत का लोहा आज उनके विपक्षी भी मानते है.....यकीन जान लीजिये पार्टी को हाल के समय में बुरे दौर से उबारकर सत्ता में लाने में अहमद पटेल की भूमिका को किसी तरह से नजर अंदाज नही किया जा सकता....हाँ ये अलग बात है भरूच में कांग्रेस लगातार ४ लोक सभा चुनाव हारती जा रही है फिर भी हर गुजरात में होने वाले हर छोटे बड़े चुनाव में टिकटों कर बटवारा अहमद पटेल की सहमती से होता आया है जो यह बतलाने के लिए काफी है कि आज पार्टी में उनका सिक्का कितनी मजबूती के साथ जमा हुआ है ....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;अहमद पटेल की ताकत की एक मिसाल २००४ में देखने को मिली जब पहली बार कांग्रेस यू पी ऐ १ में सरकार बनाने में कामयाब हुई थी .... इस कार्यकाल में सोनिया के "यसबॉस " मनमोहन बने ओर वह अपनी पसंद के मंत्री को विदेश मंत्रालय सौपना चाहते थे लेकिन दस जनपद गाँधी पीड़ी के तीसरे सेवक कुवर नटवर सिंह को यह जिम्मा देना चाहता था लेकिन मनमोहन नटवर को भाव देने के कतई मूड में नही थे.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;हुआ भी यू ही.... जहाँ इस नियुक्ति में मनमोहन सिंह की एक ना चली वही नटवर के हाथ विदेश मंत्रालय आ गया ....मनमोहन का झुकाव शुरू से उस समय अमेरिका की ओर कुछ ज्यादा ही था.... लेकिन अपने कुंवर साहब ईरान और ईराक के पक्षधर दिखाई दिए.... कुंवर साहब अमेरिका की चरण वंदना पसंद नही करते थे और परमाणु करार करने के बजाए ईरान के साथ अफगानिस्तान , पकिस्तान के रास्ते भारत गैस पाइप लाइन लाना चाहते थे ... इस योजना में कुंवर साहब को गाँधी परिवार के पुराने सिपाही मणिशंकर अय्यर का समर्थन था ......वही मणिशंकर जो आज कांग्रेस पार्टी को सर्कस कहने और उसके कार्यकर्ताओ को जोकर कहने से परहेज नही करते ......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कुंवर , मणिशंकर मनमोहन को १० जनपथ का दास मानते थे.....लेकिन समय ने करवट ली और "वोल्कर" के चलते नटवर ना केवल विदेश मंत्री का पद गवा बैठे बल्कि पार्टी से भी बड़े बेआबरू होकर निकल गए..... लेकिन इसके बाद भी मनमोहन अपनी पसंद के आदमी को विदेश मंत्री बनाना चाहते थे लेकिन १० जनपथ के आगे उनकी एक ना चली ....और प्रणव मुखर्जी को विदेश मंत्री की जिम्मेदारी मिली......प्रणव की नियुक्ति से परमाणु करार तो संपन्न हो गया लेकिन देश की विदेश नीति वैसे नही चल पाई जैसा मनमोहन चाहते थे.....लेकिन २००९ में जब अपने दम पर मनमोहन ने अपने को "मजबूत प्रधानमंत्री के तौर पर स्थापित किया तो दस जनपद के आगे उनकी चलने लगी.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इसी के चलते मनमोहन ने अपनी दूसरी पारी में एस ऍम कृष्णा, शशि थरूर , कपिल सिब्बल को अपने हिसाब से केबिनेट पद की कमान सौपी......आई पी एल में थरूर के फसने के बाद जब १० जनपथ ने उनसे इस्तीफ़ा माँगा तब अकेले मनमोहन उनका बीच बचाव करते नजर आये......इस समय १० जनपथ की और से प्रधानमंत्री मनमोहन को जबरदस्त घुड़की पिलाई गई थी .....तब १० जनपथ की ओर से मनमोहन को साफ़ संदेश देते हुए कहा गया था आपको ओर आपके मंत्रियो को १० जनपथ के दायरे में रखकर काम करना होगा ..... यही नही अहमद पटेल ने तो उस समय शशि थरूर को लताड़ते हुए यहाँ तक कह डाला था वे यह ना भूले वह किसकी कृपा से यू पी ऐ में मंत्री बने है......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;दरअसल यह पूरा वाकया दस जनपथ में अहमद पटेल की ताकत का अहसास कराने के लिए काफी है....दस जनपथ शुरुवात से नही चाहता कि मनमोहन को हर निर्णय लेने के लिए "फ्री हेंड" दिया जाए....अगर ऐसा हो गया तो मनमोहन अपनी कोर्पोरेट की बिसात पर सरकार चलाएंगे....ऐसी सूरत में आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी क भावी "युवराज " के सर सेहरा बाधने में दिक्कतें पेश आ सकती है .....इसलिए कांग्रेस के सामने यह दौर ऐसा है जब उसके हर मंत्री की स्वामीभक्ति मनमोहन के बजाए १० जनपथ में सोनिया के सबसे विश्वासपात्र अहमद पटेल पर आ टिकी है...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;एक दौर ऐसा भी था जब अहमद पटेल की पार्टी में उतनी पूछ परख नही थी......लेकिन जोड़ तोड़ की कला में बचपन से माहिर रहे अहमद पटेल ने समय बीतने के साथ गाँधी परिवार के प्रति अपनी निष्ठा बढ़ा ली और सोनिया के करीबियों में शामिल हो गए.....राजनीतिक प्रेक्षक बताते है कि पार्टी में अहमद पटेल के इस दखल को पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता पसंद तक नही करते लेकिन सोनिया के आगे इस पर कोई अपनी चुप्पी नही तोड़ता.... बताया जाता है अहमद पटेल की आंध्र के पूर्व दिवंगत सी ऍम राजशेखर रेड्डी से कम बनती थी..... दोनों के बीच ३६ का आकडा जगजाहिर था ...कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्य मंत्रियो में वह अकेले ऐसे थे जो अहमद पटेल के ज्यादा दखल का खुलकर विरोध करते थे......अब राजशेखर इस दुनिया में नही रहे इसका असर यह हुआ है अहमद पटेल ने पूरी पार्टी "हाईजेक" कर ली है.... यही वजह है उन्होंने दिवंगत राजशेखर के बेटे जगन मोहन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला बनाकर उन्होंने इसमें सोनिया की सहमती ली है और अब मामले की सी बी आई जांच कराने में जुटे है .... आखिर बड़ा सवाल यह है इतने सालो से आन्ध्र की राजनीती में राजशेखर का जब वर्चस्व था तब कांग्रेस पार्टी को यह ध्यान क्यों नही आया कि रेड्डी के पास इतनी ज्यादा अकूत धन सम्पदा कैसे आई.....? कही कर नही यह कांग्रेस को कठघरे में खड़ा कर रहा है......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कुलमिलाकर आज कांग्रेस में अहमद पटेल होने के मायने गंभीर हो चले है ....किसको मंत्री बनाना है ... किस नेता को अपने पाले में लाना है ... जोड़ तोड़ कैसे होगा ? यह सब अहमद पटेल की आज सबसे बड़ी ताकत बन गई है .....अहमद की इसी काबिलियत के आगे जहाँ कांग्रेस हाईकमान नतमस्तक होता है वही बेचारे मनमोहन अपने मन की बेबसी के गीत गाते नजर आते है..... फिर अगर आज के दौर में कांग्रेस के कार्यकर्ता अगर यह सवाल पूछते है कि २४ अकबर रोड नाम मात्र का दफ्तर बनकर रह गया है तो जेहन में उमड़ घुमड़ कर कई सवाल पैदा होते है ..... कही न कही इसी के चलते पार्टी को आने वाले दिनों में मुश्किलों का सामना ना करना पड़ जाए....वैसे भी इस समय कांग्रेस के सितारे इस समय गर्दिश में है......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-1012474057723260917?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/1012474057723260917/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=1012474057723260917' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/1012474057723260917'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/1012474057723260917'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/08/blog-post_29.html' title='१० जनपथ का पॉवर हाउस : अहमद पटेल'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-7v0YI13dBwo/Tltu1a1r_nI/AAAAAAAAAxc/DlTT6UX8zP0/s72-c/Ahmed_Patel%2528small_size%2529.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-6979896377676153638</id><published>2011-08-25T07:02:00.000-07:00</published><updated>2011-08-25T07:52:38.338-07:00</updated><title type='text'>तुष्टीकरण की शिकार रही है तस्लीमा............</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-hgrCI3VpB2k/TlZdDti6r6I/AAAAAAAAAwc/sRrBTPt5Ywo/s1600/taslima_nasreen_hyderabad_asault_3_070809.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5644801501302534050" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 478px; CURSOR: hand; HEIGHT: 318px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-hgrCI3VpB2k/TlZdDti6r6I/AAAAAAAAAwc/sRrBTPt5Ywo/s400/taslima_nasreen_hyderabad_asault_3_070809.jpg" border="0" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;तस्लीमा नसरीन...... एक जाना पहचाना नाम है.... आज खास तौर पर इनका जिक्र ब्लॉग में कर रहा हू क्युकि आज तस्लीमा का जन्म दिन है .......शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो इनके नाम से परिचित नहीं होगा......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;नसरीन का जन्म २५ अगस्त १९६२ को एक मुस्लिम परिवार में हुआ था....प्रसिद्द लेखिका नसरीन ने अपने जीवन की शुरुवात चिकित्सा के पेशे से की......१९८४ में चिकित्सा की पारी पूरी करने के बाद उन्होंने ८ वर्ष तक बंगलादेश के अस्पताल में काम किया .... सामाजिक गतिविधियों से जुड़े होने के बाद भी उन्होंने अपने को साहित्यिक गतिविधियों से दूर नहीं किया...... मात्र १५ वर्ष की आयु में कविता लिखकर अपनी लेखनकला की ओर सभी का ध्यान खींचा.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;तस्लीमा की पहली पुस्तक १९८६ में प्रकाशित हुई.....१९८९ में वह अपनी दूसरी पुस्तक को प्रकाशित करवा पाने में सफल रही.... इसके बाद तस्लीमा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा .......इस दूसरी पुस्तक को लिखने के बाद उनको दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों के संपादको की ओर से नियमित कॉलम लिखने के आमंत्रण आने लगे.... इस अवधि में "सैंट ज्योति" पाक्षिक पत्रिका का संपादन भी उनके द्वारा किया गया...तस्लीमा हमेशा बंगाली भाषा में लिखती रही है..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;नसरीन को धर्म, संस्कृति, परम्परा की आलोचना करने में कोई भय नहीं रहता ... ..... इसी कारन उनकी ६ मुख्य पुस्तके प्रतिबंधित श्रेणी में आती है जो क्रमश "लज्जा" (१९९३), अमर मेबले( १९९९), उताल हवा(२००२), को(२००३), द्विखंडितो( २००३), सी सब अंधकार (२००४) शामिल है......तस्लीमा की पुस्तकों पर उनके गृह देश बंगलादेश में भी विरोध के स्वर मुखरित होते रहे है.... जहाँ शेख हसीना ने इन पुस्तकों को अश्लील करार दिया ... वही भारत की पश्चिम बंगाल की वामपंथी सरकार ने मुस्लिम कौम की भर्त्सना करने के चलते इन पुस्तकों पर प्रतिबन्ध लगाया..... १९९२ में तस्लीमा बंगलादेश का प्रतिष्टित साहित्यिक अवार्ड "आनंदा " पाने में सफल रही॥&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;निडर होकर धर्म के विरोध में लिखने के कारन "सोल्जर ऑफ़ इस्लामी ओर्गनाइजेशन " ने इनके खिलाफ मौत का फ़तवा जारी कर दिया.... जिसके बाद से कभी उन्होंने जनता के सामने आना पसंद नहीं किया........वहां की सरकार ने उनके खिलाफ उग्र प्रदर्शनों से बचाव हेतु उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया और देश से निर्वासित होने का फरमान जारी कर दिया .......२००४ में उनके खिलाफ विरोध जताने के एक मुद्दे के तौर पर यह कहा गया अगर किसी ने उनका मुह काला कर दिया तो उसको अवार्ड दिया जायेगा...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;बंगलादेश के धार्मिक नेता सैयद नूर रहमान तो तस्लीमा के लेखन से इतना आहत हुए उन्होंने इनको आतंकवादी संगठन जीबी का जासूस तक करार दे डाला......२००५ में अमेरिका पर लिखी गई एक कविता पर फिर से उन्हें मुस्लिम समाज पर आपत्तिजनक टिप्पणिया करने के चलते खासी फजीहतें झेलनी पड़ी.......मार्च २००५ में उत्तर प्रदेश के कुछ मुस्लिम संगठनो ने इनका सर कलम करने के लिये ६ लाख के इनाम की घोषणा की....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इसके बाद ९ अगस्त २००७ को हैदराबाद प्रेस क्लब में उनके तेलगु संस्करण शोध के विमोचन के मौके पर "मुतेह्दा मजलिस ऐ अमल" के १०० लोगो ने ३ विधान सभा सदस्यों के साथ इन पर हमला बोल दिया.......इस घटना पर उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा हम इस्लाम के खिलाफ लिखने ओर बोलने वाले का विरोध करते रहेंगे.... सितम्बर २००७ में तस्लीमा पर कुछ कट्टरपंथियों ने हमला बोल दिया ...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;भारत में इसी दौरान "आल इंडिया माइनोरिटी " फोरम ने इनके भारत रहने पर सवाल उठाये और इन्हें भारत से निकालने की मांग की.... स्थिति को बिगड़ता हुआ देख पश्चिम बंगाल की तत्कालीन वामपंथी सरकार ने इनकी हिफाजत के लिये पुलिस नियुक्त की......परन्तु स्थिति नहीं संभल पायी......२१ नवम्बर २००७ को इन्हें जयपुर ले जाया गया और रातो रात दिल्ली लाया गया.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;३० नवम्बर २००७ को कट्टरपंथियों के विरोध को शांत करने के लिये तस्लीमा अपनी विवादित पुस्तक "द्विखंडितो" से ३ पन्ने हटाने को तैयार हो गई....इसके बाद तस्लीमा को उम्मीद थी तमाम विवाद उनका पीछा छोड़ देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ.... ९ जनवरी २००७ को फ्रांस सरकार ने उन्हें" सियोमन दी वियोवर" सम्मान महिला अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिये दिया॥&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कुछ साल पहले तक भारत सरकार ने उन्हें जयपुर में एक गुप्त स्थान में रखा जहाँ पर उन्हें किसी से मिलने की अनुमति नहीं दी गई......भले ही नसरीन को भारत छोड़े हुए लम्बा समय हो गया हो लेकिन आज भी वह कोलकाता को अपना घर मानती है.....तसलीमा तो भारत से चली गई लेकिन उनके जाने के बाद भारत की धर्म निरपेक्ष छवि को करार तमाचा लगा है .....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;हमारे साथ सबसे बड़ी दिक्कत यही है हम इतिहास की घटनाओ से सबक नहीं सीखते .... "सैटेनिक वर्सेज" जिस दौर में रुश्दी ने लिखा तो पूरे इस्लाम जगत में हलचल मच गई ऐसे समय में ब्रिटेन ने रुश्दी को व्यापक सुरक्षा मुहैया करवाई लेकिन एक हम है जो अतिथि देवो भवः का दंभ भरते है ओर किसी शरणार्थी को ठीक से सुरक्षा भी नहीं दे सकते...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;पश्चिम बंगाल में साहित्य से जुड़े कई विद्वानों ने तस्लीमा का बचाव करते हुए हाल के कुछ वर्षो में कहा कि उनको राज्य में रहने की अनुमति दी &lt;span class=""&gt;जानी &lt;/span&gt;चाहिए .... हिंदी की चर्चित और प्रतिष्ठित साहित्यकार महाश्वेता देवी ने तो तस्लीमा की वकालत करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार से कुछ साल पहले कहा था तस्लीमा &lt;span class=""&gt;कोलकाता &lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;को अपना घर मानती रही है लिहाजा उनको राज्य में रहने की अनुमति मिलनी चाहिए ... लेकिन तत्कालीन वामपंथी सरकार ने उनकी मांग को ठुकरा दिया ... यही नही यू पी ऐ सरकार ने भी अपनी वोट बैंक की राजनीती के चलते तस्लीमा को भारत में रहने की इजाजत ही नही दी...एकतरफ हम दलाई लामा को अपने देश में रहने की अनुमति लम्बे समय से दिए हुए है &lt;span class=""&gt;लेकिन &lt;/span&gt;आज तक हम तस्लीमा जैसी लेखिकाओ को भारत में रहने की इजाजत नही दे पाते..... कही न कही यह हमारी धर्म निरपेक्ष छवि के ऊपर करार तमाचा है....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-6979896377676153638?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/6979896377676153638/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=6979896377676153638' title='5 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/6979896377676153638'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/6979896377676153638'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/08/blog-post_25.html' title='तुष्टीकरण की शिकार रही है तस्लीमा............'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-hgrCI3VpB2k/TlZdDti6r6I/AAAAAAAAAwc/sRrBTPt5Ywo/s72-c/taslima_nasreen_hyderabad_asault_3_070809.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-1815962926316033036</id><published>2011-08-19T00:44:00.000-07:00</published><updated>2011-08-22T01:14:17.421-07:00</updated><title type='text'>किन्नरों का कजलिया...........</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-nv8qr1auXIc/TlIPgOC0L6I/AAAAAAAAAwU/h7xIwsFyaEc/s1600/kinnar%5B1%5D.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5643590329248788386" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 323px; CURSOR: hand; HEIGHT: 213px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-nv8qr1auXIc/TlIPgOC0L6I/AAAAAAAAAwU/h7xIwsFyaEc/s400/kinnar%255B1%255D.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;भोपाल अपनी गंगा जमुना तहजीब और झीलों की खूबसूरती के लिए जाना जाता है .....कला संस्कृति के गढ़ के रूप में भोपाल का कोई सानी नही &lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;है.... साथ ही यहाँ की कई परम्पराए लोगो को सीधे उनकी संस्कृति से जोड़ने का काम करती है.... वैसे भी लोक संस्कृति का सीधा सम्बन्ध मानव जीवन से जुड़ा है....&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;भोपाल में राखी के त्यौहार के बाद किन्नरों का "कजलिया" भी इस बात का बखूबी अहसास कराता है......हर साल राखी के बाद होने वाले किन्नरों के इस आयोजन पर पूरे शहरवासियो की नजरे लगी रहती है.....इस आयोजन की लोकप्रियता का अहसास मुझे तब हुआ जब इस बार किन्नरों को देखने के लिए भोपाल में रहने वाले लोगो का पूरा हुजूम सड़को पर निकल आया.... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कजलिया को मनाने की परम्परा भोपाल में नवाबी दौर से चली आ रही है....इस बारे में किन्नरों से जब मैंने बात की तो उन्होंने बताया अच्छी बारिश को लेकर यह आयोजन भोपाल में हर साल होता है जिसमे निकाले जाने वाले जुलूस में सभी किन्नर बढ़ चढ़कर अपनी भागीदारी करते है....माना जाता है एक बार भयंकर अकाल पड़ने पर भोपाल के नवाब को किन्नरों की शरण में जाना पड़ा था...बताया जाता है किन्नरों द्वारा छेड़े गए राग मल्हार के फलस्वरूप इन्द्र देव खासे प्रसन्न हो गए और शहर में मूसलाधार बारिश हो गई....उसके बाद से इस आयोजन की परम्परा चल निकली ..... इठलाते हुए जब ये किन्नर जुलूस में शामिल होने सडको पर निकलते है तो मानो पूरा शहर उन्हें देखने सड़को पर उमड़ आता है .... सड़के जाम तक हो जाती है लेकिन &lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;ना तो शहरवासी परेशान होते है ना ही किन्नर....इस दौरान लोग सड़को पर निकले किन्नरों को छेड़ते भी है परन्तु बुरा मानने के बजाय किन्नर अपना नया राग मल्हार छेड़ देते है..... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;भोपाल में किन्नरों के जुलूस के दौरान किन्नरों का मानवीय चेहरा भी मुझे देखने को मिला ........ समझ से अलग थलग रहने वाले इस वर्ग ने इंसानियत की जो मिसाल पेश की है वह सराहनीय होने के साथ ही अनुकरणीय है .....भोपाल में किन्नरों के कजलिया के दौरान कुछ बच्चो को साथ देखकर मै चौंक गया ... बढती जिज्ञासा को शांत करने के लिए किन्नरों के बीच बैठा .... दरअसल किन्नर समाज का अंग होते हुए भी समाज से कटे रहते है.... इस कारण इस समाज के प्रति जिज्ञासा औरभय साथ साथ रहता है....जिसके चलते इस समाज की गतिविधियों का सही से ज्ञान लोगो को नही हो पाता.... इन किन्नरों ने कई मासूम लडकियों को भी गोद ले रखा है....जो अनाथ बच्चो को पढ़ाने लिखाने से लेकर उन्हें खान पान भी उपलब्ध करा रहे है.... राजधानी भोपाल &lt;span class=""&gt;के मंगलवारे और इतवारे &lt;/span&gt;में रहने वाले कुछ किन्नरों की ये पहल निश्चित ही समाज के लिए अनुकरणीय है... काश समाज की मुख्य धारा से जुड़े लोग भी अगर इस दिशा में ध्यान दे तो कई लोगो की जिन्दगी रोशन हो सकती है ....&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;"कजलिया " के दौरान निकलने वाला किन्नरों का जुलूस मंगलवारे से शुरू होता है और यह शहर के मुख्य मार्गो से होता हुआ गुफा मंदिर तक पहुचता है....पहले इस मंदिर के पास की पहाड़ी पर एक तालाब था ॥ दुधिया तालाब नामक इस तालाब का अस्तित्व वक्त के साथ खत्म हो गया...परन्तु किन्नरों की ये परम्पराए आज भी जारी है .... शायद ये हमारे देश में ही संभव है जहाँ किन्नर उत्साहपूर्वक आज भी कजलिया मनाते , अनाथ बच्चो को गोद लेते है और बढ़ चढ़कर अपनी भागीदारी इस आयोजन में करते है........&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-1815962926316033036?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/1815962926316033036/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=1815962926316033036' title='9 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/1815962926316033036'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/1815962926316033036'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/08/blog-post_19.html' title='किन्नरों का कजलिया...........'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-nv8qr1auXIc/TlIPgOC0L6I/AAAAAAAAAwU/h7xIwsFyaEc/s72-c/kinnar%255B1%255D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>9</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-3221808694581080019</id><published>2011-08-11T11:51:00.000-07:00</published><updated>2011-08-12T02:16:39.370-07:00</updated><title type='text'>देवीधुरा का बग्वाल परमाणु युग में पाषाण युद्ध का चमत्कार ......</title><content type='html'>&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-igGCKQyKIlg/TkQ-lDwyHqI/AAAAAAAAAwM/_ntmkkE4wzA/s1600/yudh.jpg"&gt;&lt;img style="text-align: center; margin: 0px auto 10px; width: 400px; display: block; height: 300px;" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5639701439760703138" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-igGCKQyKIlg/TkQ-lDwyHqI/AAAAAAAAAwM/_ntmkkE4wzA/s400/yudh.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-9pTaa9PZYKs/TkQmiNxQ7TI/AAAAAAAAAwE/vXkfMYJN4RQ/s1600/champawat-mela.jpg"&gt;&lt;img style="text-align: center; margin: 0px auto 10px; width: 457px; display: block; height: 341px;" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5639675002628402482" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-9pTaa9PZYKs/TkQmiNxQ7TI/AAAAAAAAAwE/vXkfMYJN4RQ/s400/champawat-mela.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt; उत्तराखंड अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुषमा और नैसर्गिक सौन्दर्य के लिए देश विदेश में खासा जाना जाता है साथ ही इस देवभूमि की अनेक परम्पराए यहाँ की धर्म ,संस्कृति से जुडी हुई है......ऐसी ही अनूठी परम्परा को अपने में संजोये देवीधुरा मेला है जिसे देश विदेश में पाषाण युद्ध "बग्वाल" के नाम से जाना जाता है....... प्रतिवर्ष रक्षाबंधन के पावन पर्व पर लगने वाले इस मेले में एक दूसरे को पत्थर मारने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है ....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कुमाऊ अंचल के जनपदों नैनीताल,अल्मोड़ा, उधम सिंह नगर को चम्पावत का देवीधुरा क़स्बा एक दूसरे  से जोड़ता है.....कहा जाता है कि देवीधुरा पूर्णागिरी माता का एक पीठ है जहाँ पर चंपा और कालिका को प्राचीन काल में प्रतिष्टित किया गया था ...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;यहाँ का सर्वाधिक महान आश्चर्य यह है कि देवीधुरा में माता बाराही का तेज इतना है कि आज तक कोई प्राणी इन्हें खुली आँखों से नही देख पाया.... जिसने भी ऐसा दुस्साहस किया वह अँधा हो गया....बग्वाल की पृष्ठभूमि चार राजपूती ख़ामो के पुश्तेनी खेल से जुडी हुई है जिसमे गहरवाल , वल्किया, लमगडिया , चम्याल मुख्य है.....श्रावण शुक्ल के दिन सभी गाववासी एकत्रित होते है और एक दूसरे को निमंत्रण भेजकर बग्वाल में भाग लेते है.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;रक्षाबंधन के समय सभी खामे एक दूसरे को निमंत्रण देती है और बग्वाल में भागीदार बनती जाती है ....बग्वाल के समय वल्किया और लमगडिया खाम एक छोर पश्चिम से प्रवेश करती है तो चम्याल और गहरवाल पूर्वी छोर से रणभूमि में आते है .....मंदिर के पुजारी द्वारा आशीर्वाद मिलने के बाद सभी एक स्थान पर इकट्टा होते है ...आम तौर पर गहरवाल खाम सबसे अंत में आती है जिस पर गहरवाल खाम का व्यक्ति पत्थर फैक कर प्रहार करता है..... गहरवाल के पत्थर फैकने के साथ ही "बग्वाली कौतिक" शुरू हो जाता है.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इस पत्थरो के युद्ध में भाग लेने वाली चारो खामे वैसे तो आपस में मित्र होती है लेकिन पत्थरो के युद्ध के समय वह सारे रिश्ते नाते भूल कर एक दूजे पर पूरी ताकत के साथ वार करते है......चार दलों के द्वारा लाठियों और फर्रो को सटाकर एक सुरक्षा कवच बना लिया जाता है जो घायल की सुरक्षा करने का काम करता है......बग्वाल के दौरान पत्थरो की वर्षा द्वारा शरीर के विभिन्न अंग लहुलुहान हो जाते है लेकिन रक्त की बूंदे गिरने के बाद भी कोई चीत्कार नही सुनाई देती है.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुख्य पुजारी एक व्यक्ति के शरीर के बराबर रक्त गिरने के बाद बग्वाल को रोकने का आदेश दे देता है......तकरीबन बीस से पच्चीस मिनट तक चलने वाले इस पाषाण युद्ध की समाप्ति के बाद बग्वाल खेलने वाली खामे एक दूसरे के गले मिलती है... इस दौरान पत्थरो से घायल हुए लोगो को गंभीर चोट नही आती...ऐसा माना जाता है कुछ वर्ष पूर्व तक लोग बग्वाल खेले जाने वाले मैदान की बिच्छु घास अपने शरीर में लगा लिया करते थे जिससे वह कुछ समय बाद खुद ही ठीक हो जाया करते थे ....आज बिच्छु घास तो नही लगाई जाती है लेकिन पत्थरो के घाव अपने आप बाराही माता की कृपा से स्वतः ठीक हो जाते है..... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;उत्तराखंड के देवीधुरा का" बग्वाल" मेला आधुनिक परमाणु युग में भी पाषाण युद्ध की परंपरा को संजोये हुए है.....यह मेला आपसी सदभाव की जीती जागती मिसाल है.....यहाँ खेले जाने वाले बग्वाल को देखने दूर दूर से लोग पहुचते है और एक अलग छाप लेकर जाते है.... तीर्थाटन के मद्देनजर ऐसे स्थान राज्य के आर्थिक विकास में खासे उपयोगी है ... यह अलग बात है सरकारी उपेक्षा के चलते देवीधुरा के विकास का कोई खाका अलग राज्य बनने के बाद भी नही बन सका है जिसके चलते उत्तराखंड में सांस्कृतिक परम्पराए दम तोड़ रही है ....वैश्वीकरण के इस दौर में यदि आज "बग्वाल" सरीखी हमारी सांस्कृतिक परम्पराए जीवित है तो इसका श्रेयः निसंदेह इन मान्यताओ का वैज्ञानिक स्वरूप है........&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-3221808694581080019?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/3221808694581080019/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=3221808694581080019' title='5 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/3221808694581080019'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/3221808694581080019'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/08/blog-post.html' title='देवीधुरा का बग्वाल परमाणु युग में पाषाण युद्ध का चमत्कार ......'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-igGCKQyKIlg/TkQ-lDwyHqI/AAAAAAAAAwM/_ntmkkE4wzA/s72-c/yudh.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-4579227238021099394</id><published>2011-07-27T01:02:00.000-07:00</published><updated>2011-09-10T21:44:25.102-07:00</updated><title type='text'>उत्तराखंड में फिर से खूंटा गाड़ने की तैयारी में है खंडूरी......</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-q6HcjIwT0ZE/TjUSw7IbhZI/AAAAAAAAAv8/kFwAPptgm7E/s1600/dun1.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 477px; DISPLAY: block; HEIGHT: 316px" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5635431140440114578" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-q6HcjIwT0ZE/TjUSw7IbhZI/AAAAAAAAAv8/kFwAPptgm7E/s400/dun1.jpg" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;span style="font-size:130%;"&gt;उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमत्री भुवन चन्द्र खंडूरी की राज्य में सक्रियता एक बार फिर बढ गई है.....उत्तराखण्ड में आगामी विधान सभा चुनावो से ठीक पहले खंडूरी की इस सक्रियता से एक बार फिर इस बात के कयास लगने शुरू हो गए है कि पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व के साथ उनके सम्बन्ध ठीकठाक नही चल रहे है ..... राज्य में विधान सभा चुनावो से ठीक पहले अगर जनरल ने अपने राजनीतिक जीवन का कोई बड़ा फैसला ले लिया तो भाजपा को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दरअसल इस समय राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री निशंक के साथ उनकी पटरी नही बैठ रही है ..... निशंक अपने को पार्टी में बड़ा सर्वेसर्वा मानते है.... पार्टी के कई दिग्गज नेता उनकी इसी कार्य शैली की वजह से खासे नाराज है .... यह नाराजगी केवल हाल के दिनों में ही नही बड़ी है... निशंक के साथ पार्टी के आम कार्यकर्ताओ के संबंधो में कटुता उनकी ताजपोशी के बाद से ही बढ़नी शुरू हो गई थी.... अब विधान सभा चुनाव पास आने से ठीक पहले निशंक के खिलाफ ये नाराजगी भाजपा के लिए राज्य में नुकसान देहक साबित हो सकती है.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भाजपा में इस समय निशंक को हटाने की मुहिम परवान पर है... और इस समय दो पूर्व मुख्यमत्री खुले तौर पर निशंक को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाने की कोशिसो में लगे है....यह कोई और नही राज्य के पूर्व मुख्य मंत्री खंडूरी और भगत सिंह कोशियारी है.... दोनों खुले तौर पर पार्टी के आला नेतृत्व से निशंक को हटाने के लिए लॉबिंग करने में जुटे है.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बीते दिनों हरिद्वार में राजनाथ सिंह के महिला मोर्चे के कार्यक्रम में इनदिनों महारथियों की अनुपस्थिति से यह सन्देश गया है कि उत्तराखण्ड भाजपा की साढ़े साती अभी दूर नही हुई है.... अगर ये दूर नही हुई तो पार्टी के आगामी चुनावो में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है.........निशंक को मुख्यंमंत्री बनाने में खंडूरी की अहम् भूमिका रही थी..... लेकिन मुख्यमंत्री बनाये जाने के बाद निशंक ने खंडूरी को भाव देने बंद कर दिए... यही नही कल तक जो भगत सिंह कोशियारी खंडूरी को राज्य के मुख्यमत्री पद से हटाने की मुहिम छेड़े थे आज वे भी खुलकर खंडूरी का साथ दे रहे है.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दरअसल इसके गहरे निहितार्थ है ... मुख्यमत्री बनाये जाने के बाद निशंक ने अपने कार्यकाल में कोई विशेष छाप नही छोड़ी है .... उनके कुर्सी सँभालने के बाद राज्य में भ्रष्टाचार का ग्राफ तेजी से बड़ा है....जहाँ कर्नाटक में भाजपा येदियुरप्पा पर करोडो के वारे न्यारे करने के आरोप झेल रही है इसी तरह के हालत उत्तराखण्ड में भी है परन्तु वहां का मीडिया इस बात पर खामोश है... यह सब निशंक की बाजीगरी का नतीजा है कि कोई भी निशंक के खिलाफ राज्य में लिखने का साहस नही कर पा रहा है.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सूचना विभाग की कमान निशंक ने मुख्यमंत्री पद सँभालने के बाद से खुद अपने पास रखी है ... मीडिया को खुश करने के लिए निशंक ने इन दिनों सभी को थोक के भाव से विज्ञापन देने शुरू कर दिए है ... मजेदार बात तो ये है कि कई ऐसे समाचार पत्रों , पत्रिकाओ को इस अवधि में विज्ञापन दे दिए गए है जिनका राज्य में कोई वजूद नही है......चुनावी वर्ष में निशंक कोई रिस्क मोल नही लेना चाहते ..... इसलिए विज्ञापनों पर वह पानी की तरह पैसा बहा रहे है ......जाहिर है वह भी नीतीश, शिवराज और मोदी, रमन वाली राह पर चलना चाहते है........ परन्तु निशंक को शायद यह मालूम नही इन लोगो के सपनो की राह देखना आसान है जमीनी हकीकत को समझना अलग बात है... फिर उत्तराखण्ड में आम आदमी उनके कार्यकाल से इतना खुश भी नही है कि शिवराज और मोदी की तरह दुबारा उनको राजगद्दी पर बैठा ही देगा .....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;निशंक पर भ्रष्टाचार के कोई मामूली आरोप नही है......कैग की रिपोर्टो में उनके खिलाफ लगाये गए आरोपों में वाकई दम नजर आता है ...बीते साल महाकुम्भ के नाम पर निशंक ने केंद्र के द्वारा दी गई मदद का जमकर दुरुपयोग किया ... इस मामले में नौकरशाहों के साथ मिलकर निशंक के कुछ मंत्रियो ने भी जमकर मलाई खायी ......यही नही कुम्भ मेले के दौरान हुए निर्माण कार्यो में भी भारी अनियमितता पायी गई.........देहरादून के एक न्यूज़ चैनल में काम करने वाले मेरे एक मित्र की बातें माने तो हरिद्वार में जिस जिस जगहों पर महाकुम्भ के दौरान निर्माण कार्य किये गए वह आज पूरी तरह जवाब दे चुके है ...बरसात के मौसम में निशंक के निर्माण कार्यो की पोल अच्छे ढंग से खुल गई है .....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऋषिकेश में भूमि आवंटन से लेकर कई जल विद्युत परियोजनाओ को निरस्त करने के मामले निशंक सरकार की साख के लिए संकट बनते जा रहे है..... यही नही निशंक के राज में भ्रष्टाचार की गंगा जमकर बह रही है .... रामदेव केंद्र सरकार के खिलाफ सत्याग्रह की बातें कर रहे है ॥बेहतर होता वह अगर देवभूमि से निशंक के खिलाफ सत्याग्रह की बातें करे तो यह माना जाए वह भी भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ने के लिए एकजुट है..... पार्टी चाहे कोई भी हो भ्रष्टाचार का दोषी अगर कोई तो उसके खिलाफ कड़े फैसले लेने में भय कैसा ....?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कांग्रेस आदर्श सोसाइटी पर अशोक चौहान इस्तीफ़ा ले लेती है .... राजा , कनिमोझी और कलमाड़ी को तिहाड़ भेज देती है लेकिन येदियुरप्पा और निशंक पर कोई कार्यवाही करने से डरती है? क्यों? क्या ऐसा करने से भाजपा अपने को कमजोर नही कर रही है....? भाजपा मनमोहन और चिदंबरम से एक ओर इस्तीफे की मांग करती है परन्तु वह येदियुरप्पा और निशंक को अभयदान दे देती है ?क्या इससे उसकी भ्रष्टाचार की लड़ाई कमजोर नही हो जाती?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री इन सब बातो के मद्देनजर खासे आहत है... वह अपनी पार्टी में बेगाने हो गए है.... खंडूरी निशंक सरकार के साथ ही पार्टी आलाकमान से भी नाराज हो गए है .... बार बार निशंक को हटाने के लिए दबाव देने के बाद भी पार्टी के आला नेता उनको घास डालने के मूड में नही है..... खंडूरी राज्य भर में भ्रमण करके जनता की नब्ज टटोल चुके है.... जनता में निशंक सरकार के खिलाफ गहरी नाराजगी है....इस नाराजगी की बड़ी वजह निशंक की ख़राब कार्यशेली है जिसको खंडूरी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने रखा .... बीते दिनों हुई मुलाकात में सुषमा स्वराज के वीटो के चलते निशंक को हटाने की मुहिम ठंडी हो गई ...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस बार उनके धुर विरोधी कोशियारी भी निशंक को हटाने की खंडूरी की मुहिम में साथ थे.... पिछले महीने लखनऊ में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में खंडूरी की अनुपस्थिति ने कई सवालों को जन्म दे दिया .... निशंक को न हटाने के पीछे पार्टी का तर्क है कि चुनावी वर्ष में मुख्यमंत्री बदलने का फैसला सही नही होगा लिहाजा उसने एकजुटता के मद्देनजर यह बयान दे दिया कि पार्टी उत्तराखंड का आगामी चुनाव निशंक, कोशियारी और खंडूरी तीनो के नेतृत्व में लड़ेगी.....भाजपा में खंडूरी और कोशियारी इस फैसले को नही पचा पा रहे है ....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कहा तो यहाँ तक जा रहा है पार्टी आलाकमान राज्य में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल के काम काज से भी संतुष्ट नही है....वह राज्य में पार्टी कार्यकर्ताओ में नया जोश नही फूंक पा रहे है .... आलाकमान ने कोशियारी से चुफाल की जगह प्रदेश अध्यक्ष का पद स्वीकार करने को कहा ... कोशियारी ने साफ़ साफ़ कह दिया कि वह निशंक के सी ऍम रहते तो इस जिम्मेदारी को नही स्वीकार सकते... साथ ही इस बार उन्होंने खंडूरी को मुख्यमंत्री बनाने की बातें कही परन्तु आलाकमान ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया .....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लिहाजा अब खंडूरी निशंक के खिलाफ मोर्चा खोलने में लगे है.... कोशियारी अपने को पार्टी कर समर्पित सिपाही बताते है ॥ जब तक खंडूरी मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने उन्हें हटाने के लिए राज्य सभा सदस्यता से इस्तीफे की धमकी तक दे डाली थी..... इस बार चुनावी वर्ष में वह निशंक को हटाने के लिए भाजपा छोड़ने का साहस शायद ही कर पाये.....उनसे पहले खंडूरी भाजपा को गच्चा देने के मूड में नजर आ रहे है .....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अगर सब कुछ ठीक रहा तो चुनावो से ठीक पहले खंडूरी उत्तराखंड में एक अलग पार्टी खड़ी कर सकते है..... बीते दिनों उत्तराखंड क्रांति दल के शीर्ष नेता ऐरी से उनकी मुलाकातों को इसी रूप में देखा जा रहा है .... ऐरी ने खंडूरी की साफगोई के मद्देनजर उत्तराखंड क्रांति दल से जुड़कर पहाड़ की अस्मिता बचाने की अपील की है .... जिस मुद्दों को लेकर राज्य की लड़ाई लड़ी गई थी वह सपने आज पूरे नही हुए है॥ उत्तराखंड में कोई तीसरा मोर्चा भी नही है जो भाजपा और कांग्रेस का विकल्प जनता के सामने बन सके..... लिहाजा ऐरी ने खंडूरी को राज्य के हित में भाजपा छोड़ने की बात कही....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भाजपा से नाराज चल रहे खंडूरी अगर अलग राह चुनते है तो भाजपा के भी कई नेता उनका साथ दे सकते है..... यही नही खंडूरी के करीबियों की माने तो वह इन दिनों अपने समर्थको के साथ गुपचुप ढंग से रणनीति बना रहे है ... बताया जाता है कि राज्य में कई पूर्व सैनिक जनरल के साथ राज्य बचाने की इस मुहिम में साथ है॥ इसमें उन्हें कुछ नौकरशाहों का भी साथ मिल रहा है.....भाजपा के नेता इस मसले पर कुछ बोलने की स्थिति में नही है.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हाँ, यह अलग बात है निशंक के काम काज से नाराज चल रहे कई विधायक और मंत्री समय आने पर जनरल का खुलकर साथ दे सकते है.....खंडूरी का गढ़वाल में खासा जनाधार है.... कुमाऊ में भी उनकी साफगोई के सभी लोग कायल है....भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरे देश में जब माहौल बन रहा हो ऐसे में निशंक और येदियुरप्पा जैसे लोगो को फ्री हैण्ड दिए जाने का भाजपा आलाकमान का फैसला आम जन मानस के गले नही उतर रहा है.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऐसे में जब उत्तराखंड में विधान सभा चुनाव ज्यादा दूर नही हो , भाजपा को खंडूरी सरीखे इमानदार नेता की जरुरत बन रही है ,पार्टी उनके बजाय निशंक को आगे कर चुनाव लड़ने कर मूड बना रही है....पार्टी के आला नेताओ की माने तो गडकरी द्वारा उत्तराखंड में हाल में करवाए गए एक सर्वे में निशंक के नेतृत्व में पार्टी की हालत पतली होने का अंदेशा बना है....अगर यही सब रहा तो आगामी चुनावो में निशंक पार्टी की राज्य में लुटिया पूरी तरह डुबो देंगे.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सब बातो के मद्देनजर अब भाजपा में तीरथ सिंह रावत , टी पी एस रावत , मोहन सिंह गाववासी , मनोहरकांत ध्यानी, बच्ची सिंह रावत जैसे कई दिग्गज नेता खंडूरी के साथ खड़े हो रहे है....खंडूरी की राजनाथ से शुरू से पटरी नही बैठ रही थी....क्युकि राजनाथ के अध्यक्ष रहते खंडूरी को सी ऍम की कुर्सी ५ लोक सभा हारने के बाद गवानी पड़ी थी ... अब उन्ही राजनाथ सिंह को राज्य में पार्टी का चुनाव प्रभारी बनाया गया है जिसे खंडूरी नही पचा पा रहे है .... वैसे बताते चले भाजपा के समर्पित सिपाही रहे खंडूरी भाजपा को अलविदा कहने से पहले&lt;br /&gt;निशंक को हटाने कर एक दाव ओर खेलने की कोशिश करेंगे............&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस दरमियान खंडूरी की कोशिश निशंक की जगह खुद मुख्यमंत्री पद की कमान लेने की भी बन सकती है ....अगर पार्टी उनको निशंक की जगह पर सी ऍम की कुर्सी सौप दे तो शायद वो बगावत कर झंडा बुलंद करना छोड़ देंगे ..........&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अपनी बेदाग़ छवि के मद्देनजर अब खंडूरी के सामने एक ही विकल्प बच रहा है या तो वह भाजपा को "गुड बाय" कहे और अपनी खुद की पार्टी बनाये या उत्तराखंड क्रांति दल जैसे दल के साथ जुड़कर राज्य में भाजपा और कांग्रेस का विकल्प जनता के बीच बने... देखना होगा जनरल को इसमें कितनी सफलता आने वाले दिनों में मिलती है ?&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;बहरहाल जो भी हो खंडूरी आने वाले दिनों में भाजपा की बढ़ी मुसीबत बने रहेंगे.....भाजपा हाई कमान से अब इस बात की उम्मीद बिलकुल भी नही है वह निशंक को चुनावों से पहले हटाने का "रिस्क" मोल लेगी...... ऐसे में अब सबकी निगाहे खंडूरी की तरफ है ॥ कोई बड़ा फैसला उन्ही को लेना है.....&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-4579227238021099394?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/4579227238021099394/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=4579227238021099394' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/4579227238021099394'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/4579227238021099394'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/07/blog-post.html' title='उत्तराखंड में फिर से खूंटा गाड़ने की तैयारी में है खंडूरी......'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-q6HcjIwT0ZE/TjUSw7IbhZI/AAAAAAAAAv8/kFwAPptgm7E/s72-c/dun1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-8018980052908447732</id><published>2011-06-19T02:22:00.000-07:00</published><updated>2011-06-20T04:40:26.921-07:00</updated><title type='text'>भाजपा को "अलविदा "कहने के मूड में  मुंडे...............</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-mfzdR7A1gvQ/Tf3DAo2rxQI/AAAAAAAAAu8/QglgG3RA8Iw/s1600/070309102011Gopinath-Munde.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 371px; DISPLAY: block; HEIGHT: 588px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5619862325762442498" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-mfzdR7A1gvQ/Tf3DAo2rxQI/AAAAAAAAAu8/QglgG3RA8Iw/s400/070309102011Gopinath-Munde.jpg" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt; पूरे देश में इस समय जनलोकपाल बिल को लेकर शोर गुल हो रहा है वही राम देव की काला धन वापस मागने की खबरे सुर्खिया बटोर रही है ..... पिछले कुछ समय पहले देश में राम देव के अनशन को लेकर पुलिसिया अत्याचार और सुषमा स्वराज के ठुमको, जनार्दन दिवेदी पर जूता फैके जाने की घटना को मीडिया ने बड़े तडके के साथ पेश किया .....इन सब के बीच भाजपा सोच रही है मानो उसे अन्ना और रामदेव ने बहुत बड़े मुद्दे दे दिए है ... उसको उम्मीद है इस बार वह कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करके ही दम लेगी....&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इस समय भाजपा पूरी तरह विपक्ष की भूमिका में है.... सभी का ध्यान केंद्र की राजनीती पर लगा हुआ है ......हर कोई नेता यू पी ऐ के खिलाफ अनशन करने में लगा हुआ है.....कभी कभी तो ऐसा लगता है भाजपा को अन्ना और रामदेव के रूप में नायक मिल गए है जो कांग्रेस की नाक में दम कर रहे है....शायद इसीलिए कांग्रेस आलाकमान दोनों को सख्ती से निपटाने के मूड में है.......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जाहिर है भाजपा भी सारे घटनाक्रम पर नजर लगाये हुई है....उत्तर प्रदेश की खोयी जमीन को फिर से पाने की जुगत में लगी भाजपा ने पिछले दिनों उमा को पार्टी में दुबारा शामिल कर लिया लेकिन इन सबके बीच नितिन गडकरी के गृह राज्य महाराष्ट्र में भाजपा आलकमान का ध्यान नही गया ..... यहाँ पर उसके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गोपीनाथ मुंडे ने बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिए है........ मुंडे भाजपा को जल्द ही गुड बाय कहने के मूड में दिखाई दे रहे है ....... गोपीनाथ महाराष्ट्र में भाजपा का एक बड़ा चेहरा है .....उनकी राजनीति को समझने के लिए हमें महाजन के दौर में जाना होगा....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुंडे महाजन का बहनोई का रिश्ता है इसी के चलते जब महाजन मुंडे को भाजपा में लाये तो उनका पार्टी के कई दिग्गज नेता सम्मान करते थे लेकिन महाजन के अवसान के बाद मुंडे राज्य की राजनीती में पूरी तरह से हाशिये पर धकेल दिए गए .....आज आलम यह है अपने राज्य में मुंडे खुद अपनी पार्टी में बेगाने हो चले है.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नितिन गडकरी के अध्यक्ष बनाये जाने के बाद गोपीनाथ मुंडे राज्य की राजनीती में पूरी तरह से उपेक्षित कर दिए गए है..... उनके समर्थक भी गडकरी ने एक एक करके किनारे लगा दिए है... ऐसे में मुंडे की चिंता जायज है ... वह आलाकमान से न्याय की मांग कर रहे है....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;महाजन के जाने के बाद उनके साथ कुछ भी अच्छा नही चल रहा ... जब तक पार्टी में महाजन थे तो उनके चर्चे महाराष्ट्र में जोर शोर के साथ होते थे.... समर्थको का एक बड़ा तबका उनसे उनके अटके नाम निकाला करता था....अगर भाजपा में महाजन का दौर करीब से आपने देखा होगा तो याद कीजिये महाजन की मैनेजरी जिसने पूरी भाजपा को कायल कर दिया था... भाजपा का हनुमान भी उस दौर में महाजन को कहा जाता था .......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;महाजन के समय मुंडे की खूब चला करती थी.... मुंडे को महाराष्ट्र में स्थापित करने में महाजन की भूमिका को नजर अंदाज नही किया जा सकता॥ यही वह दौर था जब मुंडे ने राज्य में अपने को एक बड़े नेता के तौर पर स्थापित किया .....महाजन के जाने के बाद पार्टी में कुछ भी सही नही चल रहा.... आज भाजपा को महाजन की कमी सबसे ज्यादा खल रही है....महाजन होते तो शायद भाजपा में आज अन्दर से इतनी ज्यादा गुटबाजी और कलह देखने को नही मिलता... . महाराष्ट्र की राजनीती में शिव सेना के साथ गठजोड़ बनाने और भाजपा को स्थापित करने में महाजन की दूरदर्शिता का लोहा आज भी पार्टी से जुड़े लोग मानते है ....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुंडे ने महाजन के साथ मिलकर राज्य में भाजपा का बदा जनाधार बनाया... आज आलम ये है जबसे गडकरी अध्यक्ष बने है तब से मुंडे के समर्थको की एक नही चल पा रही है॥ इससे मुंडे खासे आहत है.....अपनी इस पीड़ा का इजहार वह पार्टी आलाकमान के सामने कई बार कर चुके है पर उनकी एक नही सुनी जा रही है जिसके चलते उन्होंने अब पार्टी से अलविदा कहने का मन बनाया है.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पार्टी में हर नेता की आकांशा आगे जाने की होती है .... मुंडे भी यही सोच रहे है....वर्तमान में स्वराज के बाद वह लोक सभा में उपनेता है.... वह चाहते है लोक लेखा समिति का अध्यक्ष पद उनको मिल जाए .....इसके लिए वह पिछले कुछ समय से पार्टी के नेताओ के साथ बातचीत करने में लगे हुए थे... सूत्र बताते है कि अपनी ताजपोशी के लिए उन्होंने आडवानी को राजी कर लिया था .... खुद आडवानी लोक लेखा समिति से मुरली मनोहर जोशी की विदाई चाहते थे ...&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;दरअसल आडवानी और मुरली मनोहर में शुरू से ३६ का आकडा जगजाहिर रहा है ....अटल के समय आडवानी की गिनती नम्बर २ और मुरली मनोहर की गिनती नम्बर ३ में हुआ करती थी.... लेकिन अटल जी के जाने के बाद भाजपा में हर नेता अपने को नम्बर १ मानने लगा है.....अटल जी के समय आडवानी ने अपने को उपप्रधानमंत्री घोषित कर परोक्ष रूप से मुरली मनोहर को चुनोती दे डाली थी .....&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इसके बाद आडवानी के आगे मुरली दौड़ में पीछे चले गए....वो तो शुक्र है इस समय पूरी भाजपा संघ चला रहा है जिसके चलते मुरली मनोहर जैसे नेताओ को लोक लेखा समिति की कमान मिली हुई है ..... आडवानी को सही समय की दरकार थी लिहाजा उन्होंने मुरली के पर कतरने की सोची....पर दाव सही नही पड़ा .......&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;बताया जाता है संघ मुरली मनोहर को लोक लेखा समिति के पद से हटाने का पक्षधर नही था जिसके चलते मुंडे का लोक लेखा समिति के अध्यक्ष बन्ने का सपना पूरा नही हो सका ......संघ तो शुरू से इलाहाबाद के संगम में विलीन होते जा रहे मुरली मनोहर को आगे लाने का हिमायती रहा है.... जोशी के हिंदुत्व के कट्टर चेहरे के मद्देनजर वह १५ वी लोक सभा में उनको लोक सभा में विपक्ष का नेता बनाना चाहता था लेकिन ये कुर्सी सुषमा के हाथ में चली गई..... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;संघ के फोर्मुले पर गडकरी ने भी अपनी सहमती जता दी......और ऐसे में मुंडे के हाथ निराशा ही लगी ... बताया जाता है लोक लेखा समिति का अध्यक्ष खुद को बनाये जाने की मंशा को उन्होंने गडकरी के सामने भी रखा था और अपने को अब केन्द्रीय राजनीती में सक्रिय करने की मंशा से उन्हें अवगत करवा दिया था... गडकरी भी संघ के आगे किसी की नही सुन सकते थे... उन्होंने मुंडे से बातचीत कर मुद्दे सुलझाने की बात कही थी...... वह भी बीच में बिना बातचीत किये सपरिवार उत्तराखंड चार धाम के दर्शन करने चले गए.... ऐसे में मुंडे का मुद्दा लटका रह गया.....&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इससे पहले भी मुंडे ने अपने बगावती तेवर दिखाए थे.... याद करिये कुछ अरसा पहले उन्होंने मुंबई शहर में भाजपा अध्यक्ष पद पर मधु चौहान की नियुक्ति का सबके सामने विरोध कर दिया था जिसके बाद आलाकमान को "डेमेज कंट्रोल" करने में पसीने आ गए थे....इस बार भी कुछ ऐसा ही है॥ मुंडे अब और दिन पार्टी में अपनी उपेक्षा नही सह सकते.... वह महाराष्ट्र भाजपा में पार्टी का एकमात्र ओबीसी चेहरा है... महाराष्ट्र में उनके होने से पिछड़ी जातियों कर एक बड़ा वोट भाजपा के पाले में आया करता था ॥ अब अगर वह पार्टी को अलविदा कहते है तो नुकसान भाजपा को ही उठाना होगा.....&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मुंडे की नाराजगी का एक बड़ा कारन अजित पवार का गद रहा पुणे था जहाँ पर गडकरी ने अपने खासमखास विकास मठकरी को भाजपा जिला अध्यक्ष बना दिया ॥ जबकि मुंडे अपने चहेते योगेश गोगावाले को यह पद देना चाहते थे.....लेकिन आडवानी का भारी दबाव होने के बाद भी गडकरी ने अपनी चलायी .... मुंडे की चिंता यह भी है जबसे गडकरी पार्टी के अध्यक्ष बने है तब से महाराष्ट्र में उनका दखल अनावश्यक रूप से बढ़ रहा है ... &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;बड़ा सवाल यह भी है अगर गडकरी के चार धाम के प्रवास से लौटने के बाद मुंडे की मांगो पर गौर नही किया गया तो क्या वो महाराष्ट्र में भाजपा के लिए चुनोती बन जायेंगे......? साथ ही वह कौन सी पार्टी होगी जिसमे मुंडे शामिल होंगे या सवाल अभी से सबके जेहन में आ रहा है...?वैसे भाजपा को अलविदा कहने वाले सभी नेताओ का हश्र लोग देख चुके है .... फिर चाहे वो मदन लाल खुराना हो या उमा भारती.....या बाबूलाल मरांडी हो या कल्याण सिंह.... पार्टी से इतर किसी का कोई खास वजूद नही रहा है॥ ऐसे में मुंडे को कोई फैसला सोच समझ कर लेने की जरुरत होगी......&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;वैसे इस बात को मुंडे बखूबी समझते है ....शायद तभी अभी से उन्होंने भाजपा से इतर अन्य दलों में सम्भावनाये तलाशनी शुरू कर दी है.....बीते दिनों शिव सेना के कुछ नेताओ के साथ उनकी मुलाकातों को इससे जोड़कर देखा जा रहा है...कहा जा रहा है शिव सेना उनको अपने पाले में लाने की पूरी कोशिशो में जुटी हुई है ... बताया जाता है मुंडे ने ही हाल में शिवसेना और राम दास अठावले की रिपब्लिक पार्टी को एक मंच पर लाने में बड़ा योगदान दिया....शायद इसी के मद्देनजर शिव सेना भी मौजूदा घटनाक्रम पर नजर बनाये हुए है.....यही नही ऍन सी पी के नेताओ के साथ उनके मधुर संबंधो के मद्देनजर वह उनकी तरफ भी जा सकते है........&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मुंडे का भविष्य बहुत हद तक गडकरी के साथ होने वाली बैठक पर टिका है.....अगर इसमें कोई नतीजा नही निकला तो इस बार मुंडे भाजपा को अलविदा कहने में देर नही लगायेंगे.....&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-8018980052908447732?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/8018980052908447732/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=8018980052908447732' title='5 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/8018980052908447732'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/8018980052908447732'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/06/blog-post_19.html' title='भाजपा को &quot;अलविदा &quot;कहने के मूड में  मुंडे...............'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-mfzdR7A1gvQ/Tf3DAo2rxQI/AAAAAAAAAu8/QglgG3RA8Iw/s72-c/070309102011Gopinath-Munde.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-8732223854605237776</id><published>2011-06-16T01:46:00.000-07:00</published><updated>2011-06-16T10:44:31.047-07:00</updated><title type='text'>माम्मू का अधूरा सपना  ..........................</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-ZQ6x45ovh1Q/TfnMKN-izeI/AAAAAAAAAuk/jtNNa3UnSLQ/s1600/mammu.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 220px; DISPLAY: block; HEIGHT: 267px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5618746486044151266" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-ZQ6x45ovh1Q/TfnMKN-izeI/AAAAAAAAAuk/jtNNa3UnSLQ/s400/mammu.jpg" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-GbCeQcgsTGk/TfnLzjXS_rI/AAAAAAAAAuc/Q8cRayt8diE/s1600/21-jallad-300.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 300px; DISPLAY: block; HEIGHT: 225px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5618746096648126130" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-GbCeQcgsTGk/TfnLzjXS_rI/AAAAAAAAAuc/Q8cRayt8diE/s400/21-jallad-300.jpg" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;वह कसाब को फासी पर चढाने की राह लम्बे समय से देखता रहा लेकिन हमारे देश के नेताओ की वोट बैंक की राजनीती के कारण मुंबई पर हमला करने वाले आतंकी अजमल आमिर कसाब को फासी पर नही चढ़ाया जा सका ......कसाब को फासी पर चदाये जाने की कसक माम्मू के दिल में व्याप्त थी लेकिन माम्मू की तमन्ना अधूरी रह गई..... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;आज जिस माम्मू नाम के शख्स की बात आपसे कर रहा हू ,वह कोई मामूली आदमी नही है...वह देश का एकमात्र जल्लाद था जो उन लोगो को फासी पर लटकाया करता था जिनकी मृत्युदंड की याचिका राष्ट्रपति के द्वारा ख़ारिज कर दी जाती थी...मीरत के टी पी नगर में रहने वाला माम्मू जल्लाद उत्तर प्रदेश जेल का कर्मचारी था जिसने कई दर्जन लोगो को फासी पर लटकाया था......&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;माम्मू को करीब से जानने वालो का कहना है कि माम्मू हर दिन कसाब को फासी पर चढाने की राह देखता रहा लेकिन उसका सपना पूरा नही हो सका ....माम्मू का पूरा खानदान अरसे से जल्लाद का काम करता आ रहा था ... माम्मू देवेन्द्र पाल सिंह भुल्लर की दया याचिका खारिज होने के बाद सुर्खियों में आया .......अगर भुल्लर की सजा पर कोई फैसला नही आता तो शायद माम्मू भी सुर्खिया नही बटोरता ..... बहुत कम लोग ये जानते होंगे माम्मू देश का आखरी जल्लाद था और अब उसकी मौत के बाद देश में जल्लादों का संकट पैदा हो गया है .... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;अपनी मौत से पहले उसने जेल के अधिकारियो से कई बार यह विनती की कसाब को जल्दी फासी पर लटकाया जाए जिससे उसकी तमन्ना पूरी हो सके लेकिन हमारे देश की घिनोनी राजनीती के चलते उसकी मुराद पूरी नही हो सकी और वह खुदा को प्यारा हो गया.....६६ साल का माम्मू पिछले कुछ समय से बीमार चल रहा था जिसका पता जेल प्रशासन को भी था पर कसाब को फासी पर लटकाने का फैसला जेल वालो को नही बल्कि राष्ट्रपति को करना था ...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;माम्मू का पूरा खानदान जल्लादी के काम से था....उसके पिता और दादा भी इस काम को कर चुके थे.... उसके पिता कालू ने तो इंदिरा गाँधी के हथियारे कहर सिंह और बलवंत सिंह को फासी पर लटकाया था .... पिता की मौत के बाद माम्मू ने कई लोगो को अपने हाथो से फासी पर लटकाया ...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;माम्मू के दादा राम अंग्रेजो के दौर में जल्लाद का काम किया करते थे ... आज़ादी के दौर में कई क्रांतिकारी भी हस्ते हस्ते फासी के तख़्त पर चढ़ गए जिन्हें माम्मू के दादा ने ठिकाने लगाया ... इनमे भगत सिंह , सुखदेव, राजगुरु जैसे क्रांति कारी भी शामिल थे ......&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;आज़ादी के महानायकों को फासी पर चढाने का जो काम माम्मू के दादा ने किया था उससे वह बहुत शर्मिंदा था क्युकि माम्मू के दादा ने यह सब काम फिरंगियों के दबाव में किया था और अंग्रेजी हुकूमत काली चमड़ी वालो से किस तरह बर्ताव करती थी इसकी मिसाल इतिहास में आज भी पढने को मिल जाती है.... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;माम्मू बार बार कसाब को फासी पर जल्द चदाये जाने की बातें इसलिए करता था क्युकि उसे लगता था अगर उसने इस आतंकी को फासी पर चढ़ा दिया तो उसके पुरखो के सारे पाप मिट जायेंगे और उसको प्रायश्चित करने का एक सुनहरा मौका मिल जाता .....लेकिन माम्मू की ख्वाइश अधूरी ही रह गई...... &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-8732223854605237776?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/8732223854605237776/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=8732223854605237776' title='7 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/8732223854605237776'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/8732223854605237776'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/06/blog-post_16.html' title='माम्मू का अधूरा सपना  ..........................'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-ZQ6x45ovh1Q/TfnMKN-izeI/AAAAAAAAAuk/jtNNa3UnSLQ/s72-c/mammu.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>7</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-1972259378295615452</id><published>2011-06-09T20:49:00.000-07:00</published><updated>2011-06-10T04:57:23.079-07:00</updated><title type='text'>उमा की वापसी के बाद अब कतार में गोविन्दाचार्य.....</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-BkesW2JN1BU/TfGX7geNdRI/AAAAAAAAAuU/-PYN-VWx4aM/s1600/uma_bharti_652210f%255B1%255D.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;img style="text-align: center; margin: 0px auto 10px; width: 531px; display: block; height: 402px;" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5616437258892440850" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-BkesW2JN1BU/TfGX7geNdRI/AAAAAAAAAuU/-PYN-VWx4aM/s400/uma_bharti_652210f%255B1%255D.jpg" border="0" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;"जैसे उडी जहाज को पंछी पुनि जहाज पर आवे"..... २ दिन पहले भारतीय जनता पार्टी में अपनी वापसी पर इस साध्वी ने कुछ इन्ही पंक्तियों में अपनी वापसी को मीडिया के खचाखच भरे समारोह में बयां किया ......पार्टी के आला नेताओं के तमाम विरोधो के बावजूद भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी उमा को पार्टी में लाने में कामयाब हो गए..... इस विरोध का असर   उनकी प्रेस  कॉन्फ्रेंस में भी देखने को मिला जिसमे पार्टी के जेटली, स्वराज, जैसे कई बड़े नेता शामिल तक नही थे .......इन सभी की गिनती उमा के धुर विरोधियो के रूप में की जाती थी.....&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पार्टी के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अध्यक्ष प्रभात झा तक को इसकी जानकारी  नही लगी... प्रभात झा का तो यह हाल था कि  उमा की वापसी से २ घंटे पहले जब उनसे पार्टी में उनकी वापसी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा इस पर कुछ नही कहना है ॥ परन्तु २ घंटे बाद वही झा और मुख्यमंत्री ने इस विषय पर गेंद केन्द्रीय नेताओं के पाले में फेकते हुए कहा जब भी कोई नेता पार्टी में आता है तो उसका स्वागत होता है...... घर वापसी को लेकर उमा के पक्ष में माहौल लम्बे समय से बन रहा था लेकिन भाजपा के अन्दर एक तबका ऐसा था जो उमा की पार्टी में वापसी का विरोध कर रहा था ॥&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;दरअसल उमा की वापसी का माहौल जसवंत सिंह की भाजपा में वापसी के बाद बनना शुरू हो गया था... उस समय उमा भारती भैरो सिंह शेखावत के निधन पर जसवंत के साथ राजस्थान गई थी.....संघ ने दोनों की साथ वापसी की भूमिका तय कर ली थी लेकिन उमा विरोधी खेमा उनकी वापसी की राह में रोड़े अटकाते रहा .......&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt; पिछले साल उमा भारती छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के मुख्यमंत्री के पिता की तेरहवी में आडवानी और राजनाथ सिंह के साथ नजर आई तो फिर उमा की  पार्टी  में वापसी को बल मिलने लगा ......इसके बाद पार्टी में गडकरी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनका मोहन भागवत के साथ मुलाकातों का सिलसिला चला ॥ खुद भागवत ने भी पार्टी से बाहर गए नेताओं की वापसी का बयान दिया तो इसके बाद उमा की वापसी की संभावनाओ को एक बार फिर बल मिलना शुरू हुआ ...... लेकिन मध्य प्रदेश के भाजपा नेता खुले तौर पर उनकी वापसी पर सहमति नही देते थे क्युकि उनको मालूम था अगर उमा पार्टी में वापसी आ गई तो वह मध्य प्रदेश सरकार के लिए खतरा बन जाएँगी......&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उमा ने राम रोटी के मुद्दे पर भाजपा से किनारा कर लिया था ...कौन भूल सकता है जब उन्होंने आज से ६ साल पहले भरे मीडिया के सामने आडवानी जैसे नेताओं को खरी खोटी सुनाई थी और पार्टी को मूल मुद्दों से भटका हुआ बताया था .....लेकिन इस दौर में उन्होंने संघ परिवार से किसी भी तरह से दूरी नही बड़ाई .....शायद इसी के चलते संघ लम्बे समय से उनकी पार्टी में वापसी का हिमायती था ...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;वैसे भी उमा भारती पार्टी में कट्टर हिंदुत्व के चेहरे की रूप में जानी जाती रही है ......कौन भूल सकता है अयोध्या के दौर को जब साध्वी के भाषणों ने  पार्टी में नए जोश का संचार किया था .....उमा की इसी काबिलियत को देखकर पार्टी हाई कमान ने उनको २००३ में मध्य प्रदेश में उतारा जहाँ उन्होंने दिग्विजय सिंह के १० साल के शासन का खात्मा किया ..... इसके बाद २००४ में हुबली में तिरंगा लहराने और सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुचाने के कारण उनके खिलाफ वारेंट जारी हुआ और उन्होंने सी ऍम पद से इस्तीफ़ा दे दिया....&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भरी सभा में भाजपा के नेताओं को कैमरे के सामने खरी खोटी सुनाने के बाद उमा ने मध्य प्रदेश में अपनी अलग  भारतीय जनशक्ति पार्टी बना ली..... २००८ के चुनावो में इसने ५ सीटे प्रदेश में जीती ..... उम्मीद की जा रही थी कि उमा की पार्टी बनने के बाद भाजपा को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा परन्तु ऐसा नही हुआ .... इसके बाद से उमा के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे ... हर बार उन्होंने मीडिया के सामने भाजपा को खूब खरी खोटी सुनाई परन्तु कभी भी संघ को आड़े हाथो नही लिया....शायद इसी के चलते संघ में उनकी वापसी को लेकर खूब चर्चाये  लमसे समय से होती  रही .........&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रदेश के मुख्यमंत्री शिव राज सिंह चौहान और उमा भारती  में शुरू से छत्तीस का आकडा रहा है ......उमा की वापसी का विरोध करने वालो में उनके समर्थको का नाम भी प्रमुखता के साथ लिया जाता रहा है.... शिव के समर्थक उनकी वापसी के कतई पक्ष में नही थे इसी के चलते उनकी वापसी बार बार टलती रही... लेकिन केन्द्रीय नेतृत्व के आगे शिव के समर्थको की इस बार एक नही चली......इसी के चलते पार्टी के किसी नेता ने खुलकर उनकी वापसी पर ख़ुशी का इजहार नही किया.....&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;उमा की वापसी पर सबसे ज्यादा चिंता मध्य प्रदेश में थी..... राजनीतिक विश्लेषको का मानना था अगर उमा भाजपा में वापस  आ गई तो शिवराज का सिंहासन खतरे में पढ़ जायेगा .....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;खुद शिवराज को गौर के समय जब सिंहासन सौपा गया था तो उमा ने केन्द्रीय नेताओं के इस फैसले का खुलकर विरोध किया था.......अब उमा की वापसी से शिवराज के समर्थको की चिंता बढ़ गई है ... उनके पार्टी में आने के बाद बैखोफ होकर शासन चला रहे मुख्यमंत्री शिवराज के लिए आगे की डगर आसान नही दिख रही..... क्युकि प्रदेश में शिव के असंतुष्टो का एक बड़ा खेमा मौजूद है ....जो किसी भी समय उमा के पाले में जाकर शिवराज के लिए खतरा उत्पन्न कर सकता है.....मध्य प्रदेश में आज भी उमा के समर्थको की कमी नही है .....पार्टी हाई कमान भले ही उनको उत्तर प्रदेश के चुनावो में आगे कर रहा है लेकिन साध्वी अपने को मध्य प्रदेश से कैसे अलग रख पायेगी यह बड़ा सवाल बन गया है ...... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;उमा की वापसी में इस बार नितिन गडकरी और संघ की खासी अहम भूमिका रही है.... पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश के मिशन २०१२ की कमान सौपी है ...यहाँ भाजपा का पूरी तरह सफाया हो चुका है...कभी उत्तर प्रदेश की पीठ पर सवार होकर पार्टी ने केंद्र की सत्ता का स्वाद चखा था... आज आलम ये है कि यहाँ पर पार्टी चौथे स्थान पर जा चुकी है ..... १६ वी लोक सभा में दिल्ली के तख़्त पर बैठने के सपने देख रही भाजपा ने उमा को "ट्रम्प कार्ड" के तौर पर इस्तेमाल करने का मन बनाया है......&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;उत्तर प्रदेश में अब उमा भारती राहुल गाँधी को सीधे चुनौती देंगी.......अपनी ललकार के दवारा  वह मुलायम और माया के सामने हुंकार भरेंगी..... अगर उत्तर प्रदेश  के कुछ नेताओं का साथ उमा को मिला तो वह पार्टी की सीटो में  इस बार इजाफा कर सकती है ... लेकिन उत्तर प्रदेश में भी भाजपा गुटबाजी की बीमारी से ग्रसित है......पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप साही की राह अन्य नेताओं से जुदा है ......कलराज मिश्र के हाथ चुनाव समिति की कमान आने को राज्य के पार्टी के कई नेता नही पचा पा रहे है.....मुरलीमनोहर जोशी, राजनाथ सिंह जैसे नेता केंद्र की राजनीती में रमे है ऐसे में उमा को मुश्किलों का सामना करना होगा..... सबको साथ लेकर चलने की एक बड़ी चुनौती  उनके सामने है......उत्तर प्रदेश की जंग में उमा के लिए विनय कटियार और वरुण गाँधी और योगी आदित्यनाथ  जैसे नेता निर्णायक साबित होंगे..... आज भी इनका प्रदेश में अच्छा खासा जनाधार है॥ हिंदुत्व के पोस्टर बॉय  के रूप में यह अपनी छाप छोड़ने में अहम् साबित हो सकते है....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;भले ही प्रेक्षक यह कहे कि भाजपा छोड़कर चले गए नेता जब दुबारा पार्टी में आते  है  तो उनकी कोई पूछ परख नही  होती ... साथ ही  वे  जनाधार पर कोई असर नही छोड़  पाते लेकिन उमा के मामले में ऐसा नही है.... वह जमीन से जुडी हुई नेता है.... अपने ओजस्वी भाषणों से वह भीड़ खींच सकती है.....कल्याण सिंह के जाने के बाद वह पार्टी में पिछडो के एक बड़े वोट बैंक को अपने साथ साध सकती है.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;उमा की वापसी के बाद अब गोविन्दाचार्य की भाजपा में वापसी की संभावनाओ को बल मिलने लगा है.... उमा के आने के बाद अब संघ गोविन्दाचार्य को पार्टी में वापस लेने की कोशिशो में लग गया है.... गडकरी कई बार उनकी वापसी को लेकर बयान देते रहे है परन्तु उमा की वापसी न हो पाने के चलते आज तक उनकी भी पार्टी में वापसी नही हो पायी.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;गोविन्दाचार्य को साथ लेकर पार्टी कई काम साध सकती है ... वह अभी रामदेव के काले धन से जुड़े मसले पर उनके साथ केंद्र सरकार से लम्बी लडाई लड़ रहे है.....इस समय केंद्र सरकार के खिलाफ व्यापक असंतोष है .... भाजपा आम जनमानस का साथ इस समय लेना चाहती है... इसी के चलते संघ रामदेव का पीछे से साथ दे रहा है... क्युकि उसे लगता है भ्रष्टाचार का मुद्दा उसे केंद्र की सवारी करा सकता है... ऐसे में संघ परिवार  अपने पुराने साथियों को पार्टी में वापस लेना चाहता  है ....उमा की वापसी के बाद अब संघ परिवार गोविन्दाचार्य को अपने साथ लाने की कोशिसो में जुट गया है.....हरिद्वार के एक महंत की माने तो उमा के आने के बाद अब भाजपा में गोविन्दाचार्य की जल्द वापसी हो सकती है.....खुद उमा को  इसके लिए संघ मना रहा है ..... अगर सब कुछ ठीक ठाक  रहा तो  गोविन्दाचार्य भी भाजपा  में होंगे.....      &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;उमा को गंगा प्रकोष्ठ का संयोजक बनाकर भाजपा ने अपने इरादे एक बार फिर जता दिए है ... उत्तर प्रदेश पर गडकरी की खास नजरे है ...पार्टी हिंदुत्व की सवारी कर पिछड़ी जातियों की पीठ पर सवार होकर यू पी में अपना प्रदर्शन सुधारने की कोशिशो में लग गई है...... देखना होगा उमा में चमत्कार का अक्स देख रहे भाजपा हाई कमान की उम्मीदों में वह  इस बार कितना खरा उतरती है?&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-1972259378295615452?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/1972259378295615452/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=1972259378295615452' title='9 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/1972259378295615452'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/1972259378295615452'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/06/blog-post_09.html' title='उमा की वापसी के बाद अब कतार में गोविन्दाचार्य.....'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-BkesW2JN1BU/TfGX7geNdRI/AAAAAAAAAuU/-PYN-VWx4aM/s72-c/uma_bharti_652210f%255B1%255D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>9</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-9170989436989614189</id><published>2011-06-04T06:18:00.000-07:00</published><updated>2011-06-05T05:33:48.916-07:00</updated><title type='text'>छत्तीसगढ़ में बेटे के लिए राजनीतिक जमीन खोजते जोगी.... ..</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-ZqsYr-8lSPY/TeoyFow4zdI/AAAAAAAAAuE/sdJE99B7Jz8/s1600/ajit_jogi_%255B1%255D.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 437px; DISPLAY: block; HEIGHT: 313px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5614354957893946834" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-ZqsYr-8lSPY/TeoyFow4zdI/AAAAAAAAAuE/sdJE99B7Jz8/s400/ajit_jogi_%255B1%255D.jpg" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;एक समय था जब मध्य प्रदेश से अलग हुए आदिवासी बाहुल्य छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी के नाम का डंका बड़े जोर शोर के साथ बजा करता था साथ ही उनकी गिनती दस जनपद के खासमखास लोगो में होती थी जहाँ पर उनका सिक्का बड़ी बेबाकी से चला करता था......यही नही अविभाजित मध्य प्रदेश में रायपुर में अपनी प्रशासनिक दक्षता का जोगी ने लोहा भी मनवाया था .....इसी के चलते पार्टी आलाकमान ने जोगी को छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री रुपी कांटो का ताज सौपा .....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;१ नवम्बर २००० की सुबह जोगी के लिए सुकून भरी साबित हुई... अविभाजित मध्य प्रदेश में कांग्रेस के विधायको की संख्या ज्यादा थी लिहाजा वहां की अंतरिम सरकार कांग्रेस की बनी....... इस दौर में तकरीबन तीन साल जोगी को राजपाट सँभालने का मौका मिल गया ........&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;2003 के चुनावो ने करवट बदली और जोगी के हाथ से सत्ता फिसल गई......यही वह दौर था जब अजित के बेटे अमित जोगी की दिलीप सिंह जूदेव प्रकरण के कारण खासी किरकिरी हुई .... जूदेव के समय आरोप लगे , जूदेव प्रकरण को हवा देने में अमित जोगी की खासी अहम् भूमिका है ..इसके बाद एक मर्डर के सिलसिले में अमित जोगी को जेल की हवा भी खानी पड़ी.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राजनीती संभावनाओ का खेल है॥ यहाँ चीजे हमेशा एक जैसी नही रहती..... उतार चदाव आते रहते है.... बेटे का नाम मर्डर केस में आने के बाद छत्तीसगढ़ में २००३ के आम चुनाव में पार्टी ने जोगी को आगे किया परन्तु उसके हाथ से सत्ता फिसल गई ..... मजबूर होकर जोगी को विपक्ष में बैठना पड़ा ....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसके बाद से लगातार राज्य में कांग्रेस का ग्राफ घटता जा रहा है.... खुद अजित जोगी की राजनीती पर अब संकट पैदा हो गया है...उनको करीब से जाने वाले कहते है वर्तमान दौर में उनकी राजनीती के दिन ढलने लगे है....खुद राज्य में जोगी अपने विरोधियो से पार नही पा रहे है.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसी के चलते अब कई लोग और कांग्रेस के जानकार यह मानने लगे है अगर समय रहते राज्य में जोगी का विकल्प नही खोजा गया तो राज्य में रमन सिंह तीसरी बार अपनी सरकार बना लेंगे.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;२००४ में अजित जोगी एक कार दुर्घटना में घायल हो गए जिसके चलते आज तक वह व्हील चेयर में है परन्तु लचर स्वास्थ्य के बाद भी अभी जोगी का राजनीती से मोह नही छूट रहा है ... जानकार बताते है कि जोगी एक दौर में आदिवासियों के बीच खासे लोकप्रिय थे , आज आलम यह है कि छत्तीसगढ़ में " चावल वाले बाबा जी " के मुकाबले जोगी की कोई पूछ परख तक नही होती .....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह बात धीरे धीरे अब जोगी भी समझ रहे है शायद तभी वो राज्य में वंशवाद को बढाने में लगे है ....पिछले चुनाव में जोगी ने राज्य के कोने कोने में पार्टी के लिए वोट मांगे थे जनता ने उनके नेतृत्व को नकार दिया ....२००८ के चुनावो में आदिवासी बाहुल्य इलाको में कांग्रेस को केवल ११ सीट मिल सकी .....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह घटना ये बताने के लिए काफी है कि किस तरह जोगी अपने राज्य के आदिवासियों के बीच ठुकराए जा रहे है..... जबकि जोगी खुद को आदिवासियों का बड़ा हिमायती बताया करते थे ......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारतीय राजनीती में वंशवाद से कोई अछूता नही है ......फिर जोगी उस पार्टी की उपज है जहाँ सबसे ज्यादा वंशवाद की अमर बेल फैली है.... इसकी परछाई जोगी पर स्वाभाविक पढनी थी ... शायद इसी के चलते उन्होंने १५ वी लोक सभा के चुनावो में अपनी पत्नी डॉक्टर रेनू जोगी को लोक सभा का चुनाव लड़ाया लेकिन वहां पर भी जोगी की नाक कट गई .....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसके बाद भी उनकी राजनीती के प्रति उनका मोह कम नही हुआ .....राज्य सभा के जरिये केंद्र वाली सियासत करने में रूचि दिखाई लेकिन असफलता ही हाथ लगी......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब जोगी यह बात भली भांति शायद जान गए है मौजूदा समय में उनका राज्य में बड़े पैमाने पर सक्रिय हो पाना असंभव लगता है ॥ साथ ही पार्टी आलाकमान ने उन पर घास डालनी बंद कर दी है... प्रदेश राजनीती में उनके विरोधियो ने उनको हाशिये पर धकेल दिया है इस लिहाज से वह अपना खुद का वजूद बचाने में लगे &lt;strong&gt;हुए &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;है&lt;/strong&gt;......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राजनीती पर पैनी नजर रखने वाले जानकार अब इस बात को स्वीकारने लगे है .... हाँ , यह अलग बात है जोगी अब भी अपने को आदिवासियों का हिमायती मानने से परहेज नही करते है........&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसी बात को जानते और वक़्त की नजाकत को भापते हुए अब उन्होंने आदिवासी इलाको में अपने बेटे अमित के लिए सम्भावना तलाशनी शुरू कर दी है.....आदिवासी कार्ड खेलकर वह राज्य में अपने बेटे अमित को जनता के सामने लाकर उनके राज्य की राजनीती में अपनी विरासत सौपने की दिशा में जल्द ही कदम बढ़ाकर फैसला ले सकते है......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"जग्गी " हत्या कांड में जेल की यात्रा कर चुके अमित भी अब पिता के पग चिन्हों पर चलकर अपनी छवि बदलने की तैयारियों में जुट गए है .... वह इस बात को जानते है चाहे राज्य के कांग्रेसी नेता उनके पिता को आने वाले दिनों में किनारे करने के मूड में है लेकिन पिता आदिवासी इलाके में उनको स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अजित जोगी भी इस बात को बखूबी जान रहे है॥शायद तभी उनकी नजर आदिवासियों के एक बड़े वोट बैंक पर आज भी लगी हुई है..... ये अलग बात है हाल में बस्तर में लोक सभा के चुनाव में वह पार्टी के लिए खास करिश्मा नही कर पाये .....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस चुनाव में बलिराम कश्यप के निधन से रिक्त हुई सीट भाजपा के पाले में चली गई.....लेकिन आदिवासियों की सभा में आज भी जोगी की एहमियत कम नही हुई है .... उनकी सभाओ में लोगो की भारी भीड़ उमड़ आती है....अब जोगी की कोशिश है कि इस भीड़ को अमित के पक्ष में किसी भी तरह किया जाए.....और आने वाले विधान सभा चुनाव में किसी भी तरह अमित को कांग्रेस पार्टी टिकट दे जिससे राज्य में वह उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा सके.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देखना होगा अजित जोगी का ये दाव छत्तीसगढ़ में कितना कारगर साबित होता है...... इस बहाने अजित जोगी जहाँ अपने बेटे को आगे कर अपनी विरासत को आगे बदाएगे वही आदिवासियों के बीच अपनी लोकप्रियता के मद्देनजर अपने बेटे अमित जोगी की राजनीतिक राह आसान कर देंगे..... देखना होगा उनका यह कदम आने वाले समय में कितना कारगर साबित होता है?&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-9170989436989614189?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/9170989436989614189/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=9170989436989614189' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/9170989436989614189'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/9170989436989614189'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/06/blog-post.html' title='छत्तीसगढ़ में बेटे के लिए राजनीतिक जमीन खोजते जोगी.... ..'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-ZqsYr-8lSPY/TeoyFow4zdI/AAAAAAAAAuE/sdJE99B7Jz8/s72-c/ajit_jogi_%255B1%255D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-1009489622376613352</id><published>2011-05-08T04:14:00.000-07:00</published><updated>2011-05-10T04:02:06.829-07:00</updated><title type='text'>शर्मा जी, क्रिकेट और उनके बर्फ के  गोले.......</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-zZMSp8z4Flc/TcamWa8hwRI/AAAAAAAAAt4/79MI1_8nvzg/s1600/Image0235.jpg"&gt;&lt;img style="text-align: center; margin: 0px auto 10px; width: 400px; display: block; height: 300px;" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5604349690429686034" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-zZMSp8z4Flc/TcamWa8hwRI/AAAAAAAAAt4/79MI1_8nvzg/s400/Image0235.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;शर्मा जी और उनके बर्फ के गोलों को भूल नही सकता .... कम से कम जब तक मैं भोपाल में हूँ तब तक तो नही.... दरअसल जिन शर्मा जी की बात मैं अपने ब्लॉग में कर रहा हू....उनसे अपनी मुलाकात एक कवरेज के दौरान भोपाल के बोट क्लब में हुई..... उसके पास शर्मा जी अपना ठेला हर दिन लगाया करते है .......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शर्मा जी क्रिकेट का बड़ा शौक रखते है..... उनसे मेरी पहली मुलाकात वर्ल्ड कप के मैचो के दौरान हुई....उन दिनों देश वासी भारत की जीत के लिए जहाँ कामना किये जा रहे थे वही शर्मा जी ने टीम इंडिया के वर्ल्ड कप जीतने पर अपनी दुकान का सारा सामान तक फ्री कर दिया था.... मुकेश शर्मा वर्षो से भोपाल में आइस क्रीम बेचने का काम किया करते आ रहे है.... शादियों के मौसम में आप शर्मा जी की इस आइस क्रीम का लुफ्त उठाये बिना नही रह सकते॥ हमारे बोट हाउस वाले शर्मा जी भी अपनी आइस क्रीम की सेवा शादियों के सदाबहार मौसम में दिया करते है.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शर्मा जी की क्रिकेट की दीवानगी को देखकर मैं भी चौक गया .... बचपन में कभी मैं क्रिकेट का कीड़ा हुआ करता था..... लेकिन मैच फिक्सिंग के बाद मेरा खेल को लेकर लगाव ख़त्म सा हो गया .... लेकिन वर्ल्ड कप के मैचो को लेकर मेरा दीवानापन फिक्सिंग के बाद भी कम नही हुआ क्युकि पिता जी से लड़ झगड़कर एक कलर टीवी की व्यवस्था उस दौर में घर में करवा ली....शायद ये ८ साल पहले की बात होगी.... टी वी देखने पर घर वाले डांट दिया करते थे.....कहते थे पदाई लिखाई नही करनी है क्या? हर समय क्रिकेट क्रिकेट करते हो.... टी वी से चिपके रहते हो या हर समय पेपर पड़ते रहते हो .... दरअसल हमारे पूरे परिवार में पत्रकारिता को लेकर किसी के मन में उतना लगाव नही था... क्युकि उत्तराखंड जैसे राज्य में सेना के अलावा किसी फील्ड में बेहतर सम्भावना नही दिखती थी..... ...उस समय उम्र कच्ची थी इसी कारन अक्ल का कमजोर था... समझ नही पाया मेरे जैसे कई लोग है इस देश में जो क्रिकेट को लेकर उत्सुकता रखते है.... आज बड़ा होने पर जब शर्मा जी का शौक देखा तो अपने बचपन की यादो में कही खो सा गया........&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शर्मा जी ने भारत की टीम के वर्ल्ड कप जीतने पर भोपाल वासियों को निशुल्क आईस क्रीम की सौगात देने की बात कही .....जिसे उन्होंने पूरा भी किया.... बोट क्लब में फ्री में खाने वालो की लाइन लग गई....मुकेश से जब मैंने बात की तो उसने बताया उसे बचपन से क्रिकेट का शौक है ....सचिन की टीम में खेलने की तमन्ना थी वह तमन्ना तो पूरी नही हो पायी अब क्रिकेट के नाम पर आईस क्रीम का कारोबार कर गुजर बरस कर रहा है ..... आई पी एल जैसी स्पर्धाओ में भी शर्मा जैसे क्रिकेट के शौकीनों का खवाब पूरा नही हो पाया....भले ही टीम इंडिया के लिए खेल नही पाये लेकीन आई पी एल के मैचो में अपना स्टाल लगाकर अपना शौक पूरा कर लेते.... 20- २० के दौर में जहाँ तमाशा क्रिकेट खेली जा रही हो वहां खिलाडियों की तो मंडियों में बोली लग रही है शर्मा जी की कोई पूछ होगी क्या ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शर्मा १९८३ में भारत की टीम के जीत के नज़ारे को नही देख पाये लेकिन इस बार २८ साल के जीत को उन्होंने अपनी आखो के सामने देखा तो ख़ुशी के आंसू छलक आये.....जब युवराज सचिन अपने को नही रोक पाये तो भला शर्मा जी जैसे लोगो की क्या बिसात जिन्होंने अपने रोल मॉडल नायक के लिए आईस क्रीम के सेण्टर तक खोल डाले और उनके वर्ल्ड कप जीतने की ख़ुशी में सबको आईस क्रीम खिलवाये जा रहे थे.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुझे भी शर्मा जी ने अपनी दुकान से उस दिन आईस क्रीम खिलवायी.....इस आईस क्रीम की याद और क्रिकेट के प्रति ऐसे जूनून को कभी नही भूल पाऊंगा .....कम से कम जब तक भोपाल में हूँ और झील की छठा का आनंद लूँगा तब तक शर्मा जी की याद मेरे जेहन में बसी रहेगी .... ये अलग बात है ललित के साथ देहरादून की गलियों में शर्मा जी की मिठास वाली आईस क्रीम अपन को नसीब नही हो सकेगी ......साथ ही शब्बन चौराहे और लिली टाकीज के पास मिलने वाले केले और पपीते मुझे नसीब नही हो पाएंगे .....हाँ हरिद्वार में गंगा के घाट पर आध्यात्मिक शांति जरुर मिलेगी.......&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:0pt;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;वर्ल्ड कप जीतने के बाद जब भी शर्मा जी के ढाबे में जाता हूँ तो वह बड़ी आत्मीयता से आज भी मुझे आईस क्रीम और कोल्ड ड्रिंक पिलाते है .....बदले में जब रुपये देता हू तो लेने से इनकार कर देते है.... शर्मा जी की इस कहानी तो मैंने सभी समाचार चैनलों और पेपरों  में पहुचाने की कोशिश की .... एक आध चैनलों को छोड़कर किसी ने उनकी खबर नही चलायी......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दरअसल हमारा मीडिया भी बिकाऊ हो गया है..... अपना विवेक ठीक कहता है पेड़ न्यूज़ का जमाना है......जनसरोकारो वाली पत्रकारिता नही हो रही है......राखी सावंत की चुम्मा चाटी और हसी के रसगुल्लों वाली पत्रकारिता आज हो रही है .....ऐसे में शर्मा जी की खबर को सुर्खिया नही मिल पाती है ..... लेकिन इन सब के बाद भी शर्मा जी के मन में किसी तरह की निराशा नही है... कुछ लोग होते है जिन्हें प्रचार की जरुरत होती है परन्तु कुछ ऐसे होते है जो प्रचार प्रसार माध्यमो के मोहताज नही होते ... वह अपना काम बेरोकटोक करते रहते है.... शर्मा जी की इसी अदा का मै कायल हो गया हूँ ..........मीडिया को कवरेज के लिए प्रलोभन देने वाले लोगो को शर्मा जी से आज प्रेरणा लेने की जरुरत है........&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-1009489622376613352?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/1009489622376613352/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=1009489622376613352' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/1009489622376613352'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/1009489622376613352'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/05/blog-post.html' title='शर्मा जी, क्रिकेट और उनके बर्फ के  गोले.......'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-zZMSp8z4Flc/TcamWa8hwRI/AAAAAAAAAt4/79MI1_8nvzg/s72-c/Image0235.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-3212808203131962903</id><published>2011-04-09T22:24:00.000-07:00</published><updated>2011-04-12T07:00:01.136-07:00</updated><title type='text'>भोपाल नगर निगम से रूठे शनि देव ......</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-PBKpn4nptwo/TaL8uu8kTGI/AAAAAAAAAtw/sIq7lW-39mM/s1600/Image0062.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5594311566953827426" style="display: block; margin: 0px auto 10px; width: 400px; height: 300px; text-align: center;" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-PBKpn4nptwo/TaL8uu8kTGI/AAAAAAAAAtw/sIq7lW-39mM/s400/Image0062.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-widalH_BMbw/TaL8MuL0_pI/AAAAAAAAAto/mgn3i40-fiM/s1600/Image0061.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5594310982633848466" style="display: block; margin: 0px auto 10px; width: 400px; height: 300px; text-align: center;" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-widalH_BMbw/TaL8MuL0_pI/AAAAAAAAAto/mgn3i40-fiM/s400/Image0061.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-jYizGOMenzo/TaL8CH8n-lI/AAAAAAAAAtg/LcvEbQXHuCM/s1600/Image0059.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5594310800570841682" style="display: block; margin: 0px auto 10px; width: 400px; height: 300px; text-align: center;" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-jYizGOMenzo/TaL8CH8n-lI/AAAAAAAAAtg/LcvEbQXHuCM/s400/Image0059.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;शनि देव इस समय पूरे देश में "ग्लोबल" हो गए है.... साईं के बाद अगर कोई देव हाल के वर्षो में "ग्लोबल " हुआ है तो बेशक वह देव शनि देव ही है...देश में हर जगह उनको पूजने वाले भक्तो की संख्या में इजाफा होता जा रहा है.....लेकिन भोपाल के शनि देव इनदिनों नगर निगम से रूठ गए है....भोपाल के शनि देव की परेशानी को नगर निगम के एक फैसले ने बदा दिया है.....&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;शनि देव ने कभी सपने में भी नही सोचा होगा कि भोपाल नगर निगम को उनकी नजरे इतनी नागवार गुजरेंगी कि उनकी आँखों के ठीक सामने एक काला सा बोर्ड लगा दिया जायेगा....चौकिये नही भोपाल के बड़े तालाब को सूखे के प्रकोप से बचाने के लिए नगर निगम ने एक तुगलकी फरमान इनदिनों जारी किया है.... आलम ये है कि नगर निगम स्थानीय लोगो और मंदिर कमेटी के विरोध के बावजूद इस बोर्ड को ना हटा पाने की अपनी जिद पर कायम है ......&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;शनि देव से भले ही पूरी दुनिया खौफ खाती हो लेकिन भोपाल के कमला पार्क के शनि मदिर इनदिनों नगर निगम भोपाल से खौफजादा है .... दरअसल शनि देव की दृष्टी तालाब में ना पड़े इसलिए नगर निगम ने उनकी आँखों के सामने एक काला सा बोर्ड लगा दिया है.... नगर निगम का तर्क है कि पिछले साल बड़ा तालाब सूख गया था जिसके पीछे शनि देव की कोप दृष्टी जिम्मेदार है ...&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;बीते दिनों एक खबर के सिलसिले में शनि महाराज के दर्शन करने की इच्छा हुई .... मंदिर के दर्शन कर प्रसाद लिया और वहाँ पर मौजूद कुंजबिहारी नाम के पुजारी से मेरी मुलाक़ात हुई...... पहला सवाल यही पूछ डाला महाराज शनि देव भोपाल के बड़े तालाब को क्यों सुखा रहे है.?.. ऐसा पूछते ही पुजारी हस पड़े ...उनको देखकर मै भी अपनी हसी नही रोक सका ....उन्होंने कहा यह तर्क बिलकुल गलत है.... शनि महाराज इस बड़े तालाब को क्यों सुखायेंगे ?&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;भोपाल नगर निगम से पूरी मंदिर कमेटी परेशान हो चुकी है.... लिहाजा वह शनि देव को कमरे में कैद करने की योजना बना रही है....स्थानीय लोगो में नगर निगम के पार्टी आक्रोश है....उनका भी यही कहना है यह आस्था के साथ खिलवाड़ है......&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;भले ही नगर निगम अपने फैसले पर कायम हो लेकिन ये वाकया यह बताने के लिए काफी है आज भी हम २१ वी सदी में अंधविश्वास के सहारे जी रहे है जहाँ हम ऐसी बातो पर यकीन कर रहे है जो आज के वैज्ञानिक युग में कही से कही तक संभव ही नही हो सकती...... इस बारे में बातचीत के लिए मैं नगर निगम भी गया लेकिन नगर निगम के आला अधिकारियो ने कुछ भी कहने से साफ़ इंकार कर दिया......मामले से ही कन्नी काट ली...................&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-3212808203131962903?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/3212808203131962903/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=3212808203131962903' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/3212808203131962903'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/3212808203131962903'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/04/blog-post_09.html' title='भोपाल नगर निगम से रूठे शनि देव ......'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-PBKpn4nptwo/TaL8uu8kTGI/AAAAAAAAAtw/sIq7lW-39mM/s72-c/Image0062.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-6694743733445446666</id><published>2011-04-02T21:46:00.000-07:00</published><updated>2011-04-02T22:01:16.948-07:00</updated><title type='text'>क्लिक----क्लिक.......</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-wYWRTjW28q8/TZf-6sGnWuI/AAAAAAAAAtQ/oFmR0KLzMEw/s1600/Image0155.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 300px; DISPLAY: block; HEIGHT: 400px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5591217746628532962" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-wYWRTjW28q8/TZf-6sGnWuI/AAAAAAAAAtQ/oFmR0KLzMEw/s400/Image0155.jpg" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-btjW5-kRRYg/TZf-CsfmKKI/AAAAAAAAAtI/SfPCVSOFSEY/s1600/Image0141.jpg"&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-btjW5-kRRYg/TZf-CsfmKKI/AAAAAAAAAtI/SfPCVSOFSEY/s1600/Image0141.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 300px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5591216784660637858" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-btjW5-kRRYg/TZf-CsfmKKI/AAAAAAAAAtI/SfPCVSOFSEY/s400/Image0141.jpg" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-9dXMDhPImDc/TZf84cIQBbI/AAAAAAAAAtA/RcKb9QH3jFY/s1600/Image0099.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 300px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5591215508957431218" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-9dXMDhPImDc/TZf84cIQBbI/AAAAAAAAAtA/RcKb9QH3jFY/s400/Image0099.jpg" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-uQxP9E_4Q2I/TZf8mG1iQWI/AAAAAAAAAs4/am4-VzZ5tTE/s1600/Image0093.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 300px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5591215194004144482" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-uQxP9E_4Q2I/TZf8mG1iQWI/AAAAAAAAAs4/am4-VzZ5tTE/s400/Image0093.jpg" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-YyORjJV8xe0/TZf8QQLfrQI/AAAAAAAAAsw/0GMTNkmbq44/s1600/Image0092.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 300px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5591214818555047170" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/-YyORjJV8xe0/TZf8QQLfrQI/AAAAAAAAAsw/0GMTNkmbq44/s400/Image0092.jpg" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-6694743733445446666?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/6694743733445446666/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=6694743733445446666' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/6694743733445446666'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/6694743733445446666'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/04/blog-post.html' title='क्लिक----क्लिक.......'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-wYWRTjW28q8/TZf-6sGnWuI/AAAAAAAAAtQ/oFmR0KLzMEw/s72-c/Image0155.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-5938712589520239197</id><published>2011-03-12T08:13:00.000-08:00</published><updated>2011-03-13T01:29:25.243-08:00</updated><title type='text'>सूखे की चपेट में भोपाल का बड़ा  तालाब.........</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-mweqfIsrxSA/TXucObjVccI/AAAAAAAAAso/YDt-fthrnSk/s1600/bada+talab%27.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5583227934783926722" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 300px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-mweqfIsrxSA/TXucObjVccI/AAAAAAAAAso/YDt-fthrnSk/s400/bada%2Btalab%2527.jpg" border="0" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;भोपाल की पहचान झीलों के शहर के रूप में रही है ... इसकी खूबसूरती में भोपाल की बड़ी झील चार चाँद तो लगाती ही है साथ ही इस झील को शहर की लाइफ लाइन भी कहा जाता है ... परन्तु पिछले कुछ समय से बड़ी झील में पानी का स्तर तेजी से गिरने लगा है जिस के चलते गर्मी के मौसम में यहाँ के लोगो को पानी की समस्या से जूझना पढ़ सकता है......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;"तालो में भोपाल की ताल बाकी सब तलैया ".... भोपाल की पहचान इस बड़े तालाब ने झीलों के शहर के रूप में बनायीं है .... यहाँ के लोगो को पानी की सप्लाई इसी बड़ी झील से होती रही है.... परन्तु पिछले कुछ समय से इसका जल स्तर तेजी से घटने लगा है ... यदि पेयजल के लिए यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में जल स्तर में कमी आने की सम्भावना है .......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;बड़ी झील में पानी का स्तर नीचे चले जाने से जहाँ भोपाल के लोगो को पानी की सप्लाई प्रभावित हो सकती है वही झील में मछली पकड़कर रोजी रोटी कमाने वाले मछुवारो के सामने अभी से रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है .....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;अमित जहांगीराबाद के इलाके में ही रहते है... पिछले दिनों रिपोर्टिंग के दौरान उनसे मुलाकात का मौका मिला....पहले तो उन्होंने बोलने से मना किया .... आख़िरकार मैंने कैमरे के सामने बाईट के लिए उन्हें मना ही लिया ... अमित ने कहा पिछले साल इसी झील से पानी लोगो को मिला था वह भी एक एक दिन छोड़कर... इस बार ऐसे हालत ऐसे नजर नही आते .....इसका एक बढ़ा कारन झील बचाव अभियान भी थे .... इस बार तो झील का बढ़ा हिस्सा सूख चूका है...अभियान भी नही चल रहे है...... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कल्लू नाम के मछवारे से मिला तो वह भी खासा परेशान दिखा ....आप बीती सुनाते हुए उसने कहा साहब नवाबी दौर से मछली पकड़ने के काम में लगा हुआ हूँ... पूरा परिवार इन्ही मछलियों के सहारे पलता है ... आज आलम ये है कि तालाब में मछलिया मुश्किल से मिल पाती है ... ऐसे में गुजर बसर कर पाना मुश्किल है.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;गर्मी ने अभी से अपने तेवर दिखने शुरू कर दिए है ....इस समय झील में पानी का स्तर न्यूनतम जल स्तर से मात्र 2 फीट ज्यादा है...जबकि अभी गर्मी की शुरुवात ही हुई है ....नगर निगम भोपाल की माने तो इस समय झील से २ ऍम जी दी पानी हर दिन निकाला जा रहा है... अगर यही सिलसिला जारी रहा तो जल्द ही यह झील सूख जायेगी....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इस बारे में जब मैंने उपनेता महापौर परिसद जल कार्य अशोक पांडे से बात की तो उन्होंने कहा मेरी चिंता जायज है...इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार बड़े तालाब के बजाए नगर निगम कोलार और केरवा डेम से पानी की ज्यादा सप्लाई करने की दिशा में विचार कर रहा है....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;पिछले साल भोपाल की बड़ी झील ने राजधानी भोपाल के लोगो की प्यास बुझाई थी परन्तु इस बार उम्मीद कम है ... बेहतर होगा नगर निगम जल्द से जल्द बड़ी झील के पानी को बचाने की दिशा में गंभीरता से विचार करे...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-5938712589520239197?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/5938712589520239197/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=5938712589520239197' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/5938712589520239197'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/5938712589520239197'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/03/blog-post_12.html' title='सूखे की चपेट में भोपाल का बड़ा  तालाब.........'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-mweqfIsrxSA/TXucObjVccI/AAAAAAAAAso/YDt-fthrnSk/s72-c/bada%2Btalab%2527.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-4418422916083060581</id><published>2011-03-01T08:59:00.000-08:00</published><updated>2011-03-01T21:45:58.478-08:00</updated><title type='text'>मजबूरी का नाम मनमोहन...............</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-3oto1Y7XG74/TW3X3d2uCoI/AAAAAAAAAsM/de9x8P3MfNk/s1600/11.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 304px; DISPLAY: block; HEIGHT: 400px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5579352861288827522" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-3oto1Y7XG74/TW3X3d2uCoI/AAAAAAAAAsM/de9x8P3MfNk/s400/11.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;दिल्ली से ताल्लुक रखने वाले मेरे एक करीबी मित्र देश के मौजूदा हालातो को लेकर खासे चिंतित है.... बीते दिनों फ़ोन पर बतियाते हुए उन्होंने अपने देश में बढ रहे भ्रष्टाचार की पीड़ा को मेरे सामने उजागर किया... उन्होंने इस बात को दोहराया कि आज हमारे देश को भी एक तहरीर चौक की आवश्यकता है... &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मौजूदा दौर में बढ़ते भ्रष्टाचार के प्रति मेरे मित्र की पीड़ा को बखूबी समझा जा सकता है... आज हमारे देश के आम जनमानस इसको लेकर खासा व्यथित है... इस पीड़ा का एहसास शायद हमारे प्रधान मंत्री मनमोहन को भी है ....तभी बीते दिनों अपने आवास पर मनमोहन ने पत्रकार वार्ता बुलाई और भ्रष्टाचार को लेकर हमेशा की तरह अपना दुखड़ा सुनाया......&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मनमोहन सिंह ने पत्रकारों से कहा वह गठबंधन धर्म के आगे लाचार है ..... इस दरमियाँ प्रधान मंत्री ने गठबंधन धर्म की तमाम मजबूरियां भी गिना डाली....साथ ही वह यह कहने से नही चुके कि वह इस बार का कार्यकाल भी सफलता पूर्वक पूरा कर लेंगे....... &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;राजनीती संभावनाओ का खेल है ... यहाँ समीकरण बन्ने और बिगड़ने में देरी नही लगती.... ऐसे में पूर्वानुमान लगा पाना मुश्किल है क्या यू पी ऐ २ अपना कार्यकाल सफलता पूर्वक पूरा कर पायेगी....? &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;यू पी ऐ १ से ज्यादा भ्रष्ट्र यू पी ऐ २ नजर आता है ....एक से बढकर एक मंत्रियो की टोली मनमोहन सिंह की कबिनेट को सुशोभित कर रही है.... यू पी ऐ २ ने तो भ्रष्ट्राचार के कई कीर्तिमानो को ध्वस्त कर दिया है.....&lt;/span&gt; &lt;span style="font-size:130%;"&gt;पी ऍम की छवि भी इससे ख़राब हो रही है....इसके अलावा सी वी सी पर थोमस की नियुक्ति से लेकर बोफोर्स में "क्वात्रोची " को क्लीन चित देने और महंगाई के डायन बन्ने तक की कहानी यू पीए २ की विफलता को उजागर कर रही है..... आदर्श सोसाइटी से लेकर कोमन वेल्थ , २ जी स्पेक्ट्रुम से लेकर इसरो में एस बैंड आवंटन तक के घोटाले केंद्र की सरकार की सेहत के लिए कतई अच्छे नही है ..... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;एक मछली पूरे तालाब को गन्दा कर देती है .... फिर भी हमारे देश के मुखिया मनमोहन अपनी लाचारी जताने में लगे हुए है...जबकि इस समय कोशिश इस बात की होनी चाहिए यू पी ऐ को कैसे मौजूदा चुनोती के दौर से बाहर निकाला जाए ....? &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मनमोहन भले ही अच्छे अर्थशास्त्री हो.....परन्तु वह एक कुशल राजनेता की केटेगरी में तो कतई नही रखे जा सकते ...... मैं तो उन्हें जननेता भी नही मानता .... ना ही वह भीड़ को खींचने वाले नेता है.....१५ वी लोक सभा चुनावो से पहले भाजपा के पी ऍम इन वेटिंग आडवानी ने मनमोहन के बारे में कहा था वह देश के सबसे कमजोर प्रधान मंत्री है.....उस समय कई लोगो ने आडवानी की बात को हलके में लिया था , आज मनमोहन सिंह पर यह बात सोलह आने सच साबित हो रही है ....&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मनमोहन सारे फैसले खुद से नही लेते है....सत्ता का केंद्र दस जनपद बना रहता है .... मनमोहन को अगर मैं सोनिया का "यस बॉस" कहू तो गलत कुछ भी नही होगा..... व्यक्तिगत तौर पर भले ही मनमोहन की छवि इमानदार रही है परन्तु दिन पर दिन ख़राब हो रहे हालातो पर प्रधान मंत्री की चुप्पी से जनता में सही सन्देश नही जा पाटा ... "इकोनोमिक्स की तमाम खूबियाँ भले ही मनमोहन सिंह में रही हो पर सरकार चलाने की खूबियाँ तो उनमे कतई नही है..... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कुछ समय पहले उन्होंने अपना मंत्री मंडल विस्तार भी कर डाला.... उम्मीद थी भ्रष्ट नेताओ के पर कतरे जायेंगे.... पर ऐसा कुछ भी नही हुआ.... कई मंत्रियो को भारी भरकम मंत्रालय दे दिए गए ....नयी बोतल में पुराणी शराब दिखाई दी....इस पर सोनिया गाँधी ने भी अपनी कोई प्रतिक्रिया नही दी..... &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इसी तरह काला धन एक बदा मुद्दा है.... सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद भी हमारे प्रधानमंत्री इसे वापस लाने की दिशा में कोई प्रयास करते दिखाई दे रहे है..... उल्टा नाम सार्वजनिक किये जाने की बात पर " प्रणव बाबू " खासे नाराज हो जाते है....... &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;यू पी ऐ २ पर इस समय पूरी तरह से दस जनपद का नियंत्रण बना है.... मनमोहन को भले &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;ही सोनिया का "फ्री हैण्ड" मिला हो पर उन्हें अपने हर फैसले पर सोनिया की सहमती लेनी जरुरी हो जाती है.... दस जनपद में भी सोनिया के सिपैहसलार पूरी व्यवस्था को चला रहे है.... मनमोहन की साफ़ छवि घोटालो से ख़राब हो रही है ... साथ ही कांग्रेस को भी इससे बड़ा नुकसान झेलना पद रहा है...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मनमोहन की साफ़ छवि घोटालो से ख़राब हो रही है.....साथ ही कांग्रेस को भी इससे नुकसान पहुच रहा है.....बेहतर होता अगर हमारे प्रधान मंत्री गठबंधन धर्म पालन के बजाए राजधर्म का पालन बखूबी से करते.... हमारे प्रधानमंत्री को अटल बिहारी की सरकार से सीख लेनी चाहिए जिन्होंने १९९८ से २००४ तक २४ दलों की गठबंधन सरकार का नेतृत्व कुशलता पूर्वक किया..... बल्कि कभी किसी के दवाब में काम नही किया.....&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मुझे याद है एक बार जयललिता ने उस दौर में अटल आडवानी से उस दौर में करूणानिधि सरकार को भंग करने का दवाब डाला था ... परन्तु वाजपेयी जयललिता की मांग के आगे बेबस नही हुए थे .... अटल की सरकार भले ही एक बोट से गिर गयी परन्तु अगले चुनाव में वह भारी सीट लेकर आये .....&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;यही नही तहलका जैसे प्रकरण के बाद उन्होंने जॉर्ज को कुछ समय रक्षा मंत्री के पद से मुक्त रखा था...परन्तु यहाँ तो मजबूरी का नाम मनमोहन बन गए है... वह न तो बदती कीमतों पर अंकुश ला सकते है और ना ही भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे मंत्रियो से इस्तीफ़ा दिलवा सकते है.... उनके सामने गठबंधन धरम पालन की सबसे बड़ी मजबूरी है .....और मनमोहन की इसी अदा का फायदा ऐ राजा जैसे लोग उठा जाते है.....और मनमोहन धृत राष्ट्र की भांति आँखों में पट्टी बांधे रह जाते है..... ऐसी सूरत में देश का आम आदमी निराश और हताश नही हो तो क्या करे........?&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;"दुष्यंत " के शब्दों में कहू तो --------------&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;"&lt;em&gt;कैसे कैसे मंजर सामने आने लगे है &lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;गाते गाते लोग अब चिल्लाने लगे है&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;br /&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;अब तो इस तालाब का पानी बदल दौ &lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;br /&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;यह कवल के फूल कुम्हलाने लगे है "&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-4418422916083060581?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/4418422916083060581/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=4418422916083060581' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/4418422916083060581'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/4418422916083060581'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/03/blog-post.html' title='मजबूरी का नाम मनमोहन...............'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-3oto1Y7XG74/TW3X3d2uCoI/AAAAAAAAAsM/de9x8P3MfNk/s72-c/11.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-4685951855314891444</id><published>2011-02-16T03:26:00.000-08:00</published><updated>2011-11-28T03:32:52.315-08:00</updated><title type='text'>वैलेंटाइन  डे के बहाने .................</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/-0CdjYxEk4CA/TVu2E-t0P1I/AAAAAAAAArc/qgFWHkAXKfo/s1600/1296205680_161610406_1-Pictures-of--send-valentine-day-flowers-cakes-chocolates-valentine-day-gift.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 330px; DISPLAY: block; HEIGHT: 370px; CURSOR: pointer" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5574249160472018770" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/-0CdjYxEk4CA/TVu2E-t0P1I/AAAAAAAAArc/qgFWHkAXKfo/s400/1296205680_161610406_1-Pictures-of--send-valentine-day-flowers-cakes-chocolates-valentine-day-gift.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span id="lbl_detail"&gt;&lt;span class="Apple-style-span"  style="font-size:130%;"&gt;हर जगह विदेशी संस्कृति पूत की भांति पाव पसारती जा रही है ..... हमारे युवाओ को लगा वैलेंटाइन का चस्का भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है... विदेशी संस्कृति की गिरफ्त में आज हम पूरी तरह से नजर आते है ... तभी तो शहरों से लेकर कस्बो तक वैलेंटाइन का जलवा देखते ही बनता है...आज आलम यह है यह त्यौहार भारतीयों में तेजी से अपनी पकड़ बना रहा है... वैलेंटाइन के चकाचौंध पर अगर दृष्टी डाले तो इस सम्बन्ध में कई किस्से प्रचलित है...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class="Apple-style-span"  style="font-size:130%;"&gt;रोमन कैथोलिक चर्च की माने तो यह "वैलेंटाइन "अथवा "वलेंतिनस " नाम के तीन लोगो को मान्यता देता है ....जिसमे से दो के सम्बन्ध वैलेंटाइन डे से जोड़े जाते है....लेकिन बताया जाता है इन दो में से भी संत " वैलेंटाइन " खास चर्चा में रहे ...कहा जाता है संत वैलेंटाइन प्राचीन रोम में एक धर्म गुरू थे .... उन दिनों वहाँपर "कलाउ डीयस" दो का शासन था .... उसका मानना था अविवाहित युवक बेहतर सेनिक हो सकते है क्युकियुद्ध के मैदान में उन्हें अपनी पत्नी या बच्चों की चिंता नही सताती ...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class="Apple-style-span"  style="font-size:130%;"&gt;अपनी इस मान्यता के कारण उसने तत्कालीन रोम में युवको के विवाह पर प्रतिबंध लगा दिया... किन्दवंतियो की माने तो संत वैलेंटाइन के क्लाऊ दियस के इस फेसले का विरोध करने का फेसला किया ... बताया जाता वैलेंटाइन ने इस दौरान कई युवक युवतियों का प्रेम विवाह करा दिया... यह बात जब राजा को पता चली तो उसने संत वैलेंटाइन को १४ फरवरी को फासी की सजा दे दी....कहा जाता है की संत के इस त्याग के कारण हर साल १४ फरवरी को उनकी याद में युवा "वैलेंटाइन डे " मनाते है... कैथोलिक चर्च की एक अन्य मान्यता के अनुसार एक दूसरे संत वैलेंटाइन की मौत प्राचीन रोम में ईसाईयों पर हो रहे अत्याचारों से उन्हें बचाने के दरमियान हो गई ....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class="Apple-style-span"  style="font-size:130%;"&gt;यहाँ इस पर नई मान्यता यह है की ईसाईयों के प्रेम का प्रतीक माने जाने वाले इस संत की याद में ही वैलेंटाइन डे मनाया जाता है...एक अन्य किंदवंती के अनुसार वैलेंटाइन नाम के एक शख्स ने अपनी मौत से पहले अपनी प्रेमिका को पहला वैलेंटाइन संदेश भेजा जो एक प्रेम पत्र था .... उसकी प्रेमिका उसी जेल के जेलर की पुत्री थी जहाँ उसको बंद किया गया था...उस वैलेंटाइन नाम के शख्स ने प्रेम पत्र के अन्त में लिखा" फ्रॉम युअर वैलेंटाइन" .... आज भी यह वैलेंटाइन पर लिखे जाने वाले हर पत्र के नीचे लिखा रहता है ...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class="Apple-style-span"  style="font-size:130%;"&gt;यही नही वैलेंटाइन के बारे में कुछ अन्य किन्दवंतिया भी है ... इसके अनुसार तर्क यह दिए जाते है प्राचीन रोम के प्रसिद्व पर्व "ल्युपर केलिया " के ईसाईकरण की याद में मनाया जाता है ....यह पर्व रोमन साम्राज्य के संस्थापक रोम्योलुयास और रीमस की याद में मनाया जाता है ... इस आयोजन पर रोमन धर्मगुरु उस गुफा में एकत्रित होते थे जहाँ एक मादा भेडिये ने रोम्योलुयास और रीमस को पाला था इस भेडिये को ल्युपा कहते थे... और इसी के नाम पर उस त्यौहार का नाम ल्युपर केलिया पड़ गया...&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class="Apple-style-span"  style="font-size:130%;"&gt;इस अवसर पर वहां बड़ा आयोजन होता था ॥ लोग अपने घरो की सफाई करते थे साथ ही अच्छी फसल की कामना के लिए बकरी की बलि देते थे.... कहा जाता है प्राचीन समय में यह परम्परा खासी लोक प्रिय हो गई... एक अन्य किंदवंती यह कहती है १४ फरवरी को फ्रांस में चिडियों के प्रजनन की शुरूवात मानी जाती थी.... जिस कारण खुशी में यह त्यौहार वहा प्रेम पर्व के रूप में मनाया जाने लगा ....प्रेम के तार रोम से सीधे जुड़े नजर आते है ... वहा पर क्यूपिड को प्रेम की देवी के रूप में पूजा जाने लगा ...&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class="Apple-style-span"  style="font-size:130%;"&gt;जबकि यूनान में इसको इरोशके नाम से जाना जाता था... प्राचीन वैलेंटाइन संदेश के बारे में भी एक नजर नही आता ॥ कुछ ने माना है यह इंग्लैंड के राजा ड्यूक के लिखा जो आज भी वहां के म्यूजियम में रखा हुआ है.... ब्रिटेन की यह आग आज भारत में भी लग चुकी है... प्रेमी इसको प्यार का इजहार करने का दिन बताते है... यूँ तो प्यार करना कोई गुनाह नही है लेकिन जब प्यार किया ही है तो इजहार करने मे देर नही होनी चाहिए... लेकिन अभी का समय ऐसा है जहाँ युवक युवतिया प्यार की सही परिभाषा नही जान पाये है... वह इस बात को नही समझ पा रहे है की प्यार को आप एक दिन के लिए नही बाध सकते... वह प्यार को हसी मजाक का खेल समझ रहे है....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class="Apple-style-span"  style="font-size:130%;"&gt;सच्चे प्रेमी के लिए तो पूरा साल प्रेम का प्रतीक बना रहता है ... लेकिन आज के समय में प्यार की परिभाषा बदल चुकी है ... इसका प्रभाव यह है आज १४ फरवरी को प्रेम दिवस का रूप दे दिया गया है... इस कारण संसार भर के "कपल "प्यार का इजहार करने को उत्सुक रहते है... आज १४ फरवरी का कितना महत्त्व बढ गया है इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है इस अवसर पर बाजारों में खासी रोनक छा जाती है .... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class="Apple-style-span"  style="font-size:130%;"&gt;गिफ्ट सेंटर में उमड़ने वाला सैलाब , चहल पहल इस बात को बताने के लिए काफी है यह किस प्रकार आम आदमी के दिलो में एक बड़े पर्व की भांति अपनी पहचान बनने में कामयाब हुआ है... इस अवसर पर प्रेमी होटलों , रेस्ताराओ में देखे जा सकते है... प्रेम मनाने का यह चलन भारतीय संस्कृति को चोट पहुचाने का काम कर रहा है... यूं तो हमारी संस्कृति में प्रेम को परमात्मा का दूसरा रूप बताया गया है ॥ अतः प्रेम करना गुनाह और प्रेम का विरोधी होना सही नही होगा लेकिन वैलेंटाइन के नाम पर जिस तरह का भोड़ापन , पश्चिमी परस्त विस्तार हो रहा है वह विरोध करने लायक ही है ....वैसे भी यह प्रेम की स्टाइल भारतीय जीवन मूल्यों से किसी तरह मेल नही खाती.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज का वैलेंटाइन डे भारतीय काव्य शास्र में बताये गए मदनोत्सव का पश्चिमी संस्करण प्रतीत होता है... लेकिन बड़ा सवाल जेहन में हमारे यह आ रहा है क्या आप प्रेम जैसे चीज को एक दिन के लिए बाध सकते है? शायद नही... पर हमारे अपने देश में वैलेंटाइन के नाम का दुरूपयोग किया जा रहा है ...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class="Apple-style-span"  style="font-size:130%;"&gt;वैलेंटाइन के फेर में आने वाले प्रेमी भटकाव की राह में अग्रसर हो रहे है.... एक समय ऐसा था जब राधा कृष्ण , मीरा वाला प्रेम हुआ करता था जो आज के वैलेंटाइन प्रेमियों का जैसा नही होता था... आज लोग प्यार के चक्कर में बरबाद हो रहे है... हीर_रांझा, लैला_ मजनू के प्रसंगों का हवाला देने वाले हमारे आज के प्रेमी यह भूल जाते है मीरा वाला प्रेम सच्ची आत्मा से सम्बन्ध रखता था ... आज प्यार बाहरी आकर्षण की चीज बनती जा रही है.... प्यार को गिफ्ट में तोला जाने लगा है... वैलेंटाइन के प्रेम में फसने वाले कुछ युवा सफल तो कुछ असफल साबित होते है .... जो असफल हो गए तो समझ लो बरबाद हो गए... क्युकि यह प्रेम रुपी "बग" बड़ा खतरनाक है .... एक बार अगर इसकी जकड में आप आ गए तो यह फिर भविष्य में भी पीछा नही छोडेगा.... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;span class="Apple-style-span"  style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:+0;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span"  style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class="Apple-style-span"  style="font-size:130%;"&gt;असफल लोगो के तबाह होने के कारण यह वैलेंटाइन डे घातक बन जाता है... वैलेंटाइन के नाम पर जिस तरह की उद्दंडता हो रही है वह चिंतनीय ही है... ..संपन्न तबके साथ आज का मध्यम वर्ग और अब निम्न तबका भी इसके मकड़ जाल में फसकर अपना पैसा और समय दोनों ख़राब करते जा रहे है... वैलेंटाइन की स्टाइल बदल गई है ... गुलाब गिफ्ट दिए ,पार्टी में थिरके बिना काम नही चलता .... यह मनाने के लिए आपकी जेब गर्म होनी चाहिए... यह भी कोई बात हुई क्या जहाँ प्यार को अभिव्यक्त करने के लिए जेब की बोली लगानी पड़ती है....? कभी कभार तो अपने साथी के साथ घर से दूर जाकर इसको मनाने की नौबत आ जाती है... डी जे की थाप पर थिरकते रात बीत जाती है... प्यार की खुमारी में शाम ढलने का पता भी नही चलता .... आज के समय में वैलेंटाइन प्रेमियों की तादात बढ रही है .... साल दर साल ... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class="Apple-style-span"  style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;इस बार भी प्रेम का सेंसेक्स पहले से ही कुलाचे मार रहा है.... वैलेंटाइन ने एक बड़े उत्सव का रूप ले लिया है... मॉल , गिफ्ट, आर्चीस , डिस्को थेक, मक डोनाल्ड का आज इससे चोली दामन का साथ बन गया है... अगर आप में यह सब कर सकने की सामर्थ्य नही है तो आपका प्रेमी ॥&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class="Apple-style-span"  style="font-size:130%;"&gt;वैलेंटाइन का चस्का हमारे युवाओ में तो सर चदकर बोल रहा है , लेकिन उनका प्रेम आज आत्मिक नही होकर छणिक बन गया है... उनका प्यार पैसो में तोला जाने लगा है .... आज की युवा पीड़ी को न तो प्रेम की गहराई का अहसास है न ही वह सच्चे प्रेम को परिभाषित कर सकती है... उनके लिए प्यार मौज मस्ती का खेल बन गया है ....... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class="Apple-style-span"  style="font-size:85%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-4685951855314891444?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/4685951855314891444/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=4685951855314891444' title='5 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/4685951855314891444'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/4685951855314891444'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post_16.html' title='वैलेंटाइन  डे के बहाने .................'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-0CdjYxEk4CA/TVu2E-t0P1I/AAAAAAAAArc/qgFWHkAXKfo/s72-c/1296205680_161610406_1-Pictures-of--send-valentine-day-flowers-cakes-chocolates-valentine-day-gift.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-4131528009303338279</id><published>2011-02-12T22:11:00.000-08:00</published><updated>2011-02-12T23:13:01.148-08:00</updated><title type='text'>क्लिक------क्लिक</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-pkaqH6whw6M/TVd65jbIVZI/AAAAAAAAArU/26CqdJSMpyM/s1600/Image0144.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 300px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5573058193074443666" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-pkaqH6whw6M/TVd65jbIVZI/AAAAAAAAArU/26CqdJSMpyM/s400/Image0144.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-BnXANYrwRAA/TVd6SMwiOQI/AAAAAAAAArM/_lJ4-xQ919k/s1600/Image0141.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 300px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5573057516975307010" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-BnXANYrwRAA/TVd6SMwiOQI/AAAAAAAAArM/_lJ4-xQ919k/s400/Image0141.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-IyOn6WL3U6U/TVd3l1M-owI/AAAAAAAAArE/BFbFZaMDEmk/s1600/Image0138.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 300px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5573054555714659074" border="0" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/-IyOn6WL3U6U/TVd3l1M-owI/AAAAAAAAArE/BFbFZaMDEmk/s400/Image0138.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-RgER2PkjUwc/TVd2oK3agmI/AAAAAAAAAq8/egrucX8_83Y/s1600/Image0115.jpg"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 419px; DISPLAY: block; HEIGHT: 286px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5573053496377901666" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/-RgER2PkjUwc/TVd2oK3agmI/AAAAAAAAAq8/egrucX8_83Y/s400/Image0115.jpg" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;सेना भी अब पर्यावरण बचाने में मदद करने लगी है ... मंदिरों में इसकी गूंज सुनाई दे रही है......शायद घंटियों की आवाजो से ऊपर वाले को संचार किया जा रहा हो..... पत्रकारिता की भाषा में कहू तो यह भी जनसंचार का ही एक रूप है.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;संस्कृत हमारी सबसे पुरानी भाषा है ......भले ही अंग्रेजी मैया हमारी हिंदी और अन्य भाषाओ को निगल रही हो परन्तु भोपाल में ऐसे नज़ारे देखे जा सकते है..... मामा जी लक्ष्मी कान्त जी के साथ "अपना मध्य प्रदेश" बनाने में लगे है ...............&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;हम भले ही कहते रहे हम सब आपस में भाई भाई है........परन्तु हकीकत में शायद ऐसा नही है... तभी मोटर वाले ने सर्व धरम का आईडिया ले लिया है ......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;अंग्रेजी मैया का नया अवतार हुआ है ...... अभी तक जेम्स कैमरून की अवतार देखी थी ......अब हावर्ड वालो ने सीधे भोपालियो को अपने मोह पाश में बाँध दिया है .................हावर्ड ग्लोबल हो गया है......&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-4131528009303338279?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/4131528009303338279/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=4131528009303338279' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/4131528009303338279'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/4131528009303338279'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post_12.html' title='क्लिक------क्लिक'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-pkaqH6whw6M/TVd65jbIVZI/AAAAAAAAArU/26CqdJSMpyM/s72-c/Image0144.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-4272137750360691784</id><published>2011-02-08T09:38:00.000-08:00</published><updated>2011-02-11T10:49:15.397-08:00</updated><title type='text'>उफ़ ... ये बढता भ्रष्टाचार .....................</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/TVGQsSZbPaI/AAAAAAAAAqs/lJiclLfBs2k/s1600/l01111%255B1%255D.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; DISPLAY: block; HEIGHT: 267px" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5571393304561139106" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/TVGQsSZbPaI/AAAAAAAAAqs/lJiclLfBs2k/s400/l01111%255B1%255D.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;आज भारतीय समाज अपनी संस्कृति से दूर हो चूका है.... प्रत्येक व्यक्ति के मनमें घोर निराशा का भाव है ....जहाँ एक ओर हमारा देश उभरती ताकत बनकर उभरा है वही हमारे देश में भ्रष्टाचार का ग्राफ भी तेजी के साथ बढता जा रहा है ...भारत में भ्रष्टाचार की जड़े कितनी गहरी हो गई है इसका पूर्वानुमान देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गाँधी ने लगाते हुए कहा था जब केंद्र से एक रूपया भेजा जाता है तो जनता के पास केवल पन्द्रह पैसे ही पहुचते है ... शेष पिचासी पैसे बिचौलियों के पास चले जाते है ......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बिचौलियों से उनका आशय नेता, नौकरशाहों , कॉरपोरेट के गठबंधन से था ..जब उस समय हालत ऐसे थे तो आज कैसे होंगे इसकी कल्पना स्वर्गीय राजीव गाँधी के इस कथन के आसरे बखूबी की जा सकती है.....बोफोर्स से लेकर हवाला ,हर्षद मेहता से लेकर चारा, तहलका से लेकर कॉमन वेल्थ , आदर्श सोसाईटी से लेकर 2 जी स्पेक्ट्रम यह कुछ चर्चित घोटाले रहे है ....इनके बीच हुए घोटालो की फेहिरस्त लम्बी है .... कई घोटालो की परते आज तक नही खुली ........&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अगर सभी को देख लिया जाए तो भ्रष्ट्राचार के विकराल रूप की लकीर खींची जा सकती है ......विडम्बना है हमारे राजनेता भी भ्रष्टाचार को समाप्त करने के बजाए उसकी गंगा में दुबकी लगाकर उसे सामान्य बात मानने लगे है .... वह भी परोक्ष रूप से किसी न किसी घोटालो में लिप्त है क्युकि घोटालो का सीधा सम्बन्ध सत्ता से होता है .... यहाँ लोकतंत्र है जिसकी लाठी उसकी भैस होती है .......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भ्रष्टाचार की व्यापकता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है आज गरीबो तक सरकारी इमदाद नही पहुच पा रही है ....विदेशो में भारत का ७० करोड़ रुपये से अधिक का काला धन जमा है ... अगर यह धन वापस आ जाये तो देश कि गरीबी मिट जाएगी... साथ ही चारो तरफ खुशहाली आ जाएगी .....परन्तु हमारे राजनेता इसे वापस लाने में कोई दिलचस्पी नही दिखा रहे है ......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;ऐसा हमारे देश में ही संभव है अनाज गोदामों में सड़ता है और हमारे कृषि मंत्री कहते है महंगाई कम करने के लिए मेरे पास कोई जादू की छड़ी नही है .....साथ ही वित्त मंत्री कहते है दिसम्बर तक सब ठीक हो जायेगा लेकिन महंगाई डायन विकराल रूप धारण करती जा रही है.....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;मुझे अपना देश कई मायनों में महान लगता है ....यहाँ पर इन्द्रा आवास , मनेरेगा जैसी योजनाओ में धांधली होना कोई नयी बात नही है...केंद्र सरकार जो पैसा गरीबो को दे रही है उसका बहुत कम भाग जरुरतमंदो को मिलता है ...हर विभाग में भ्रष्टाचार का खुला खेल चलता है बिना रिश्वत दिए आपका काम नही बनता ....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;सरकारी विभागों में तो आज आलम यह है यहाँ पर "बाबुओ" ने हर चीज में अपना कमीशन फिक्स कर लिया है... उनकी सैलरी से ज्यादा की कमाई कमीशन से होती है ...यही हाल ऊपर बैठे अधिकारियो का है... वह भी किसी काम को करने से पहले सामने वाले से यह जरुर पूछते है इस काम में मुझे कितना परसेंट मिलेगा ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;कुल मिलाकर तस्वीर सामने आ ही जाती है....एक स्थान्तरण करवाने से लेकर एक नल का कनेक्शन लगवाने के लिए आम आदमी को खासे पापड़ बेलने पड़ते है .... बिना रिश्वत दिए उसका काम नही बनता .....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;आज के दौर में हमारा पूरा सिस्टम रिश्वत पर निर्भर हो गया है .....बिना सेवा मेवा नही मिलता.... नेताओं के टाल मटोल रवैये के चलते इस बात की उम्मीद कम है क्या मौजूदा सिस्टम में सुधार आ पायेगा?&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;ऐसे में आम आदमी परेशान है क्युकि उसकी गाडी कमाई कॉमन वेल्थ , २ जी स्पेक्ट्रम जैसे घोटालो में लुटती जा रही है....घोटाले बाज जेल की सलाखों के बजाय खुले आम घूम रहे है ....भ्रष्टाचार को रोकने के लिए जो जांच एजेंसिया बनायी गई है वह भी सरकार के हाथ की कठपुतली बन गई है .....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;२ जी स्पेक्ट्रम जैसा घोटाला प्रधान मंत्री की नाक के नीचे होता है परन्तु हमारे पी ऍम साहब को इसकी भनक तक नही लगती....ऐ राजा की करतूतों से पी ऍम पी ऐ सी के सामने पेश होने को तो तैयार है परन्तु उनको जेपीसी किसी कीमत पर मंजूर नही है.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;शायद मनमोहन को इस बात की चिंता सता रही है अगर जेपीसी हुई तो उनकी पोल खुल जायेगी.....बेहतर होता अगर मनमोहन अपनी नेकनीयती का सबूत सबके सामने पेश कर देते............ &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;२०१० को घोटालो के साल के रूप में याद किया जायेगा ... मधु कोड़ा  जैसे  नेता का बस अगर इस देश में चले तो वह इसे बेच डाले.... भ्रष्टाचार के मुकाबले के लिए भाजपा और कांग्रेस की स्थिति एक जैसी है.... जहाँ कांग्रेस अपने लोगो को बचने का प्रयास कर रही है वही भाजपा बिहार की जीत से इतना गदगद है की वह येदियुरप्पा को हटाने के बजाए उन्हें अभयदान देने से परहेज नही करती ........&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;                                 उदारीकरण के बाद देश में घोटालो के ग्राफ में तेजी आई है ..... नेताओं में भ्रस्ताचार से लड़ने की इच्छा शक्ति  नही है.... वह इसे बड़ी  समस्या तो  मानते है  परन्तु   उन भ्रष्टाचारियो पर  नकेल कसने से डरते  है क्युकि वह भी सत्ता  की मलाई साथ  साथ चाटते है....यह हमारे सिस्टम का  एक दोष है यहाँ अपराधी को सबूत  मिटाने का पर्याप्त समय  मिल जाता  है.......कलमाड़ी के घर  छापा   पड़ने  से पहले उसके  घर से सबूत मिटने की कोशिसे होना आम बात है....... अब समय  आ गया है भ्रष्टाचार के उन्मूलन के लिए "लोक पल "जैसी स्वतन्त्र संस्था गठित की जाए.......जिसके काम में किसी का कोई दखल नही हो........साथ ही भ्रष्टाचारियो के लिए कठोर सजा का प्रावधान होना भी जरुरी  है ...........&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;                                    पिछले दिनों नीतीश कुमार  ने इस दिशा  में अच्छी पहल करते हुए  विधायक निधि को  समाप्त किया......साथ ही  उन्होंने भ्रष्टाचारियो की  संपत्ति जप्त करने  के आदेश  भी दे दिए.....बिहार का यह  फैसला ऐतिहासिक लगा.... राष्ट्रीय स्तर पर कुछ  ऐसी ही  पहल होनी  चाहिए..... सूरत बदलनी चाहिए......&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;           साल की विदाई में जिस खबर ने मुझको सबसे ज्यादा आहत   किया वह थी नेता, कोर्पोराते और मीडिया  का कोकटेल...... चौथे स्तम्भ से  लोगो को बहुत  उम्मीदे थी वह  नीरा  प्रकरण ने धूमिल  कर  दी .... किस  तरीके  से नीरा और पत्रकारों के गठजोड़ ने राजा को यू पी ऐ २ में संचार मंत्री बनाया यह सबके सामने उजागर हुआ ....&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;अभी तक मीडिया पैड न्यूज़ के बारे में बदनाम था ... अब नीरा के कारनामे ने पत्रकारों की साख गिरा दी है.... कारगिल रिपोर्टिंग से रातो रात शौहरत कमाने वाली " बरखा दत्त" को कई  लडकिया अपना  रोल मोडल  मानती है परन्तु  बरखा  के  कारनामे ने पत्रकारों को  शर्मसार  कर  दिया है .... आज अगर प्रभाष जोशी होते तो  वह बहुत  दुखी होते ...&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;             &lt;span&gt;  &lt;/span&gt;   &lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt;  &lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;p&gt; &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8407967071695439104-4272137750360691784?l=boltikalam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://boltikalam.blogspot.com/feeds/4272137750360691784/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8407967071695439104&amp;postID=4272137750360691784' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/4272137750360691784'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8407967071695439104/posts/default/4272137750360691784'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://boltikalam.blogspot.com/2011/02/blog-post.html' title='उफ़ ... ये बढता भ्रष्टाचार .....................'/><author><name>Harsh</name><uri>http://www.blogger.com/profile/03416011520058251827</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='32' src='http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/Sc9G3ZLLuDI/AAAAAAAAAHY/W-0Ave7AftY/S220/1.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/TVGQsSZbPaI/AAAAAAAAAqs/lJiclLfBs2k/s72-c/l01111%255B1%255D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8407967071695439104.post-1778939763173667210</id><published>2011-01-12T22:38:00.000-08:00</published><updated>2011-01-25T08:29:13.076-08:00</updated><title type='text'>"घुघुतिया" का  त्योहार</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/TS6ft9T-y1I/AAAAAAAAAqQ/oVUbYvedA-g/s1600/crow.gif"&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 295px; DISPLAY: block; HEIGHT: 291px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5561558201750440786" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_L7kEbDN5n1E/TS6ft9T-y1I/AAAAAAAAAqQ/oVUbYvedA-g/s400/crow.gif" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;विविधता में एकता भारतीय संस्कृति की विशेषता है.... उत्तराखंड अपने प्राकृतिक सौन्दर्य और नेसर्गिक सुषमा के कारण जाना जाता है ... परन्तु यहाँ के त्योहारो में भी बड़ी विविधता के दर्शन होते है ... आज भी यहाँ पर कई त्यौहार उल्लास के साथ मनाये जाते है.... इन्ही में से एक त्यौहार "घुघुतिया का है.... इसे उत्तरायणी पर्व के नाम से भी जाना जाता है... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;घुघुतिया पर्व उत्तराखंड के कुमाऊ अंचल में धूम धाम के साथ मनाया जाता है.... यह पर्व "मकर संक्रांत " का ही एक रूप है... वैसे यह पर्व पूरे देश में अलग अलग नामो से मनाया जाता है परन्तु उत्तराखंड के कुमाऊ अंचल में यह घुघुतिया नाम से जाना जाता है... मकर संक्रांति मुख्य रूप से सूर्य की उपासना का पर्व है परन्तु कुमाओं अंचल में मनाये जाने वाले घुघुतिया पर्व का अपना विशेष महत्त्व है.... &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते है ... वह दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करते है ....यह &lt;span style="font-size:+0;"&gt;दिखाता &lt;/span&gt;है कि अब ठण्ड का प्रभाव कम हो रहा है ... कुमाऊ में मनाये जाने वाला घुघुतिया त्यौहार भी इसी ऋतु परिवर्तन का एहसास कराता है....कुमाऊ में इस पर्व के अवसर पर कौवो को विशेष भोग लगाया जाता है.... बच्चो में यह त्यौहार खासा लोकप्रिय है..... शहर से लेकर गावो में आज भी इसको बड़े हर्ष के साथ मनाया जाता है....&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;जिस दिन पंजाबी लोहड़ी मनाते है.... उस दिन कुमाऊ निवासी तत्वानी मनाते है... यह पूस माह का आखरी दिन होता है....फिर अगला दिन "माघ " माह का पहला कार्य दिवस होता है... इस दिन सुबह उठकर नहा धोकर तिलक लगाते है और छोटे बच्चे कौवो को भ
