Friday, 13 May 2022

लाड़ली लक्ष्मी के जरिए बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने में जुटे मुख्यमंत्री शिवराज


 


मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदेश लगातार विकास के पथ पर अग्रसर हो रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने हर कार्यकाल में बेटियों के सशक्तीकरण के लिए कई कदम उठाये हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने बेटियों के जन्म के प्रति जनता में सकारात्मक सोच, लिंगानुपात में सुधार, बालिकाओं की शैक्षणिक स्थिति और स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार लाने तथा उनके अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने के उद्देश्य से 1 अप्रैल, 2007 को लाड़ली लक्ष्मी योजना को लागू किया । इसके साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने लाड़ली लक्ष्मी योजना 2.0 ‘आत्मनिर्भर लाड़ली ’ को बीते दिनों शुरू किया है जिससे प्रदेश की हर बेटी सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त हो सकेगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्राथमिकता के केंद्र में प्रदेश की बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य- सुविधा, स्वावलंबन, समृद्धि और उनका सम्मान है। मुख्यमंत्री लाड़लियों के आर्थिक सशक्तीकरण से लेकर उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण देने पर कार्य कर रहे हैं ।

मुख्यमंत्री चौहान द्वारा शुरू की गई लाड़ली लक्ष्मी योजना एक ऐसी योजना है जिसने पूरे देश में अपनी छाप छोड़ी है। यही वो योजना है जिसने शिवराज को बेटियों का मामा बना दिया और पूरे प्रदेश में शिवराज की लोकप्रियता बढ़ गई। आज प्रदेश में जहाँ 42.14 लाख लाड़लियों को इसके दायरे में लाया जा चुका  है वहीँ देश के 8 राज्यों ने भी मुख्यमंत्री शिवराज  की इस योजना को सराहा और इसे अपने राज्यों में लागू किया। 2007 से लेकर आज तक इस योजना को सार्थक बनाने के लिए सरकार द्वारा समय -समय पर कई बदलाव किये गए लेकिन इसके बाद भी बेटियां बड़ी संख्या में इस योजना में पंजीकृत हो होकर लाभान्वित हो रही हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने महिलाओं के सशक्तीकरण के क्षेत्र में नया इतिहास रचा है। आज बेटियों के प्रति समाज की सोच में जहाँ बदलाव आया है वहीँ लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनाओं के माध्यम से बेटियों की उम्मीदों को नए पंख लगे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज की योजनाओं का प्रतिफल है प्रदेश के लिंगानुपात के स्तर में भी तेजी से सुधार हो रहा है। आज प्रदेश में बेटियों का लिंगानुपात बढ़ हो गया है। प्रदेश में ये बड़ा बदलाव है। लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनाओं ने बेटियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया है वहीँ उनमें पठन -पाठन को लेकर एक नई ललक भी जगी है। प्रतिभाशाली बेटियों के लिए मुख्यमंत्री शिवराज की ये योजना नई उम्मीद बनकर आई हैं। अब मेडिकल , आईआईटी , आईआईएम या किसी भी संस्थान में प्रवेश का पूरा शुल्क सरकार वहन करेगी साथ ही जरुरत पड़ने से लाड़ली ई -संवाद के जरिये सीधे मुख्यमंत्री से कनेक्ट कर सकती हैं। बेटियों के सर्वांगीण विकास के लिए लाड़ली लक्ष्मी योजना को स्वास्थ्य और पोषण से भी जोड़ा गया है। लाड़ली लक्ष्मी के माता - पिता को बेटियों के कल्याण के लिए संचालित सुकन्या समृद्धि जैसी योजनाओं में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर उनमें प्रतिदिन बचत के संस्कार भी डाले जा रहे हैं । बेटियों के बेहतर लिंगानुपात को सुनिश्चित करने के लिए शहरी स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों को पुरस्कृत करने की योजना भी बनी है।

इस योजना में अब तक छठवीं , नवीं , 11 वीं , 12 वीं में प्रवेश लेने वाली 9. 05 लाख बेटियों को 231. 07 करोड़ की छात्रवृत्ति का वितरण किया गया है वहीँ समाज की सोच में बदलाव आने के चलते बाल विवाह में भी तेजी से कमी आई  है। 2011 की जनगणना के समय प्रदेश में बेटियों का लिंगानुपात 919 था जो आज 956 हो गया है। एक तरफ जहाँ चम्बल , बुंदेलखंड और ग्वालियर सरीखे इलाकों में भी लिंगानुपात का स्तर सुधरा है वहीँ प्रदेश में घरेलू हिंसा के मामलों में भी कमी देखी जा सकती है। इस योजना के माध्यम से स्कूलों में दाखिला लेने वाली बेटियों की संख्या में भी तेजी के साथ इजाफा हुआ है। यही नहीं प्रदेश में बेटियों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली बेटियों की संख्या भी बढ़ी है। लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ लेने के लिए भी आज लोग अपने बेटियों की पढ़ाई का जारी रखना चाहते हैं साथ ही 18 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद उसका विवाह करना चाहते हैं। यह प्रदेश में एक बड़ा बदलाव है जो मुख्यमंत्री शिवराज के रहते सम्भव हो पाया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लाड़लियों को सशक्त बनाने के प्रयासों में पूरी ऊर्जा के साथ जुटे हुए हैं । इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए कटनी जिले के ढीमरखेड़ा विकासखंड के कोठी गांव की लाड़ली लक्ष्मी योजना कोठी गांव की लाड़ली लक्ष्मी योजना के 92 हितग्राहियों के अब लाड़लियों के नाम से ही जाने जाएंगे। सभी बेटियों के घरों के बाहर नाम दर्ज किये जाने से लाड़लियों के साथ ही उनके परिजनों के चेहरों में जश्न है। इससे ज्यादा ख़ुशी क्या हो सकती है अब उनके घरों की पहचान उनकी बेटियों के नाम से होगी। इस पहल के पूरे प्रदेश में बेटियों को लेकर आने वाले दिनों में बदलाव आएंगे।लाल परेड मैदान पर लाड़ली लक्ष्मी उत्सव में मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा कि डॉक्टर बनने में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में 7-8 लाख रुपये फीस लगती है। अब मेडिकल, आईआईटी, आईआईएम या किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने पर लाड़ली लक्ष्मी की पूरी फीस राज्य सरकार भरेगी। 12वीं पास कर कॉलेज में प्रवेश लेने वाली लाड़ली लक्ष्मियों को 25 हजार रुपये दो किस्तों में अलग से दिए जाएंगे। साथ ही हर साल 2 मई से 12 मई तक लाड़ली लक्ष्मी उत्सव मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री चौहान ने बेटियों से सीधे संवाद करने के लिए लाड़ली ई-संवाद ऐप भी बनाया है जिससे बेटियों का बेटियों की जिंदगी संवारेगी। मुख्यमंत्री ने कहा जिस पंचायत में लाड़लियों का सम्मान होगा, जहां एक भी बाल विवाह नहीं होगा, शालाओंं में लाड़लियों का शत-प्रतिशत प्रवेश होगा, कोई लाड़ली कुपोषित नहीं होगी और कोई भी बालिका अपराध घटित नहीं होगा, ऐसी ग्राम पंचायतों को लाड़ली लक्ष्मी पंचायत घोषित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री शिवराज को प्रदेश भर की बेटियों ने पत्र लिखकर जिस अंदाज में अपना आभार व्यक्त किया है उसकी पूरे देश में चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा है कि, बेटियों, मेरे रहते हुए तुम्हारी पढ़ाई की राह में कोई बाधा नहीं आ पायेगी। तुम पढ़ो, आगे बढ़ो, मेरी शुभकामनाएं, आशीर्वाद तुम्हारे साथ है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री चौहान को मयरीन खान नाम की बेटी ने भी पत्र लिखा, जिससे चौहान ने फोन पर बात भी की। मायरीन ने अपने पत्र में बेटियों पर स्वलिखित कविता और योजना के बाद समाज में आये बदलाव की चर्चा की। मुख्यमंत्री चौहान ने मायरीन से दूरभाष पर बात की और उसका हालचाल भी जाना। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना में ऐसी बेटियां को शामिल किया जा रहा है जिन्हें कहीं कोई छोड़ गया या जिनका कोई नहीं है,उन्हें भी लाड़ली लक्ष्मी माना जाएगा और लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ दिया जाएगा।

विधानसभा चुनावों की उलटी गिनती शुरू होने के साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पूरी सक्रियता के साथ मैदान में जुट गए हैं। 2023 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार लाड़ली योजना के हितग्राहियों कप अपने पाले में लाकर अपनी चुनावी बिसात बिछाने जा रही है। 2007 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने जब ये योजना शुरू की थी तो इसी के जरिये उन्होंने चुनावों में सरकार के पक्ष में माहौल बनाया था। अब एक बार फिर लाड़ली लक्ष्मी योजना 2.0 के जरिये वह सरकार लाड़ली योजना के हितग्राहियों के साथ ही उनके परिवारों को भी रिझाने की कोशिशों में जुट गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नजरें पहली बार वोटर बनने वाली लाड़लियों पर भी है जिससे सरकार के संगठन के पक्ष में लामबंदी सुनिश्चित की जा सके। लाड़ली लक्ष्मी योजना में बेटियों का जिस तेजी से पंजीकरण हुआ है उससे मुख्यमंत्री शिवराज की बांछें खिली हुई हैं। यही लाड़ली लक्ष्मी योजना 2023 के चुनाव में गेम चेंजर साबित हो सकती हैं। विधान सभा चुनावों के ठीक बाद 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों में भी यह योजना अपना असर छोड़ सकती है शायद यही वजह है सरकार की पूरी कोशिश इस माहौल को अपने अनुकूल बनाने में जुट गई है।

बेटियों के सशक्तीकरण को लेकर प्रदेश सरकार बेहद संजीदा हैं और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में इस दिशा में लगातार सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं। एक समय था जब प्रदेश में बेटियों को बोझ समझा जाता था। समाज की इस मानसिकता को अपनी लाड़ली लक्ष्मी सरीखी योजनाओं के माध्यम से बदलने का काम मुख्यमंत्री शिवराज ने बखूबी किया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की सोच के कारण बेटियों का सम्मान बढ़ा हैं। यह साधारण बात नहीं है उनकी बनाई गई यह लाड़ली लक्ष्मी योजना आज देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल है।

Monday, 2 May 2022

पर्यावरण प्रेमी मुख्यमंत्री शिवराज !


 


उनकी आत्मा नर्मदा में बसती है ।  वृक्षारोपण के अपने कार्यों  के साथ ही वह  पूरे प्रदेश को हरियाली से आच्छादित कर देना चाहते हैं। जनसरोकारों के विचार पथ पर चलते हुए वह प्रकृति को भी  अपना अनुपम उपहार मानते हैं।  अपने पर्यावरण संरक्षण के नए मिशन पर  चलते  हुए वो  पर्यावरण को बचाने का संकल्प लिए  प्रतिदिन नई  ऊर्जा से सरोबार रहते हुए जन -जन को इस अभियान से जोड़ने का काम कुशलता के साथ करते नजर आते हैं । पेड़ों की जिस अंदाज में आज कटाई हो रही है और वनों की संख्या में  गिरावट आ रही है  उसने मनुष्य के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया है क्योंकि अगर पर्यावरण रहेगा तभी मनुष्य का अस्तित्व  बचा रहेगा इसे आज भी लोग नहीं समझ पा रहे हैं । जिस तेजी से आज के दौर में पेड़ काटे जा रहे हैं उसी अनुपात में लगाए नहीं जा रहे जो बड़ी चिंता का विषय बना हुआ  है। वृक्षारोपण  जैसे कार्यक्रमों पर आज के दौर में किसी भी सरकार की नजर नहीं गई  शायद आज  हम उन परम्पराओं को भी  भूल चुके हैं जिसमें नदी को प्रणाम करना सिखाया जाता है। सही मायनों में पर्यावरण को  बचाने के उपाय तो  इन्हीं रीति रिवाजों में छिपे  हुए हैं जिसके  सन्देश को भी हम अब तक समझ पाने में कामयाब नहीं हो पाए  हैं ।   

हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के  जनहितैषी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की, जिनकी जनसरोकारों की  साधारणता में असाधारणता छिपी हुई है। सुरक्षित  और स्वच्छ पर्यावरण को अपनी प्राथमिकता बताते हुए  जनता के बीच प्रदेश  के मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह  चौहान  ने अपना हर दिन पर्यावरण को समर्पित कर पूरे देश में नई  मिसाल कायम की है । उनका  पेड़ -पौंधे लगाने का प्रेम दिन -ब - दिन  बढ़ता  ही जा रहा है। असल में विकास का सपना दिखाकर जिस तरीके से प्राकृतिक संसाधनों का  अंधाधुंध  दोहन देश में  किया जा रहा  है  वो किसी भी  सरकार  के ऐजेंडे में नहीं है लेकिन  प्रदेश के  जनप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अपनी  अभिनव पहल  के माध्यम से  पूरे देश में  मध्य प्रदेश का नाम गर्व से ऊँचा किया है । बीते  बरस में  अमरकंटक  में  साल भर कम से कम एक पौधा प्रतिदिन रोकने के संकल्प के साथ ही  शिवराज सिंह चौहान के नाम के  साथ  पर्यावरण प्रेमी मुख्यमंत्री का तमगा भी जुड़ गया । 19  फरवरी 2021 को  नर्मदा जन्मोत्सव के शुभ अवसर   पर अमरकंटक में एक साल तक प्रतिदिन वृक्षारोपण करने का संकल्प अभियान चलाया  था जो आज भी अनरवत रूप से जारी है। नर्मदा जयंती के अवसर पर अमरकंटक के शंभुधारा क्षेत्र में रूदाक्ष और साल का पौधा लगाकर प्रतिदिन एक पौधा लगाने की शुरूआत  मुख्यमंत्री के कर कमलों से  शुरू हुई थी। उन्होंने  वृक्षरोपण को  उस समय पवित्र कार्य  बताया था और सभी नागरिकों  को पर्यावरण-संरक्षण के साथ  उनकी सुरक्षा करने का आह्वान भी किया था ।  जनभागीदारी  के माध्यम से  उन्होनें  आम आदमी से  भी पेड़ों की सुरक्षा करने की अपील की थी।  

पर्यावरण-संरक्षण के लिए समर्पित मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सवा साल की लम्बी अवधि  के दौरान कोई भी दिन अब तक ऐसा नहीं रहा है जब वे पेड़ लगाना भूल गए हों । अपने व्यस्त  कार्यक्रम  से समय निकालते हुए मुख्यमंत्री अपने इस अनूठे अभियान में  तमाम पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक  संस्थाओं और स्वयंसेवियों को भी मुहिम  में साधते हैं इसी बड़ी बात क्या हो सकती है। मुख्यमंत्री चौहान की पर्यावरण को लेकर की गयी इस अभिनव पहल से  प्रदेश की जनता में भी पर्यावरण को लेकर  एक  नई  जागरूकता  पैदा हुई है । खुद  मुख्यमंत्री शिवराज चौहान का मानना है हर नागरिक प्रतिदिन नहीं तो माह में एक और अपने मांगलिक कार्यक्रमों के अवसर पर एक पौधा अवश्य लगाये जिसके  माध्यम से हम  आने वाली पीढ़ी को एक बड़ी सौगात दे सकते हैं।  उनका  ये भी कहना रहा है कि पिछले वर्ष कोरोना काल में हमने जो परेशानियाँ झेली हैं, उसमें ऑक्सीजन की कमी भी एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है। पेड़-पौधे हमें न सिर्फ नि:शुल्क प्राकृतिक ऑक्सीजन देते हैं, बल्कि दुनिया को ग्लोबल वार्मिंग से भी बचाते हैं।

उल्लेखनीय है कि पर्यावरण के प्रति मुख्यमंत्री चौहान शुरू से ही संवेदनशील रहे हैं। मध्यप्रदेश की जीवनवाहिनी नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए नमामि देवी नर्मदे यात्रा कर उन्होंने न केवल नर्मदा जल को स्वच्छ बनाए रखने में अपना बड़ा योगदान दिया है  बल्कि नर्मदा मैया के दोनों तटों पर वृक्षारोपण कर प्रकृति  के लिए व्यापक जन-भागीदारी भी जुटाई।  उनकी नर्मदा यात्रा से विकास के साथ जलवायु परिवर्तन में समाज को सरकार के साथ खड़ा करने में सफलता मिली है। साथ ही कई जिलों में जन-भागीदारी से पौध-रोपण कर हरियाली को बढ़ाया गया है। मुख्यमंत्री की पहल पर पर्यावरण के क्षेत्र में जन-भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशव्यापी "अंकुर अभियान" का शुभारम्भ  भी किया गया है जिसके माध्यम से 4 लाख  से अधिक लोगों ने ऑनलाइन पंजीयन कराकर 67 हजार पौधे रोपे हैं।  कार्यक्रम में 10 लाख 19 हजार पौध-रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह अभियान जन-भागीदारी के साथ आज भी  सतत  रूप के  साथ जारी है। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में भी हरियाली को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने पौध-रोपण की योजना बनाई है जिसकी मिसाल अब तक देखने को नहीं मिली है । नगरीय निकाय द्वारा नये घरों के निर्माण की अनुमति  देते समय आवास परिसर में वृक्षारोपण की शर्त रखी गई है। इसी प्रकार ग्रामीणों को भी हर दिन वृक्षारोपण  के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहते  प्रदेश  आज एक  एक खास मुकाम पर  पहुँच गया  है। 2017 में एक दिन में करोड़ों पौधे रोकने का विश्व रिकॉर्ड भी शिवराज सिंह चौहान के नाम  दर्ज  है। शिवराज सिंह चौहान के प्रतिदिन अपने  वृक्षारोपण कार्यक्रम में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि ऐसे वृक्ष लगाए जाए  जिन्हें  अधिक पानी व देखरेख की आवश्यकता हो।  मध्य प्रदेश की सरकार  हर दिन आम लोगों को  वृक्षारोपण के लिए प्रेरित कर रही है। पंचायत और स्कूल भवनों में वृक्षारोपण सहित अपने पूर्वजों की स्मृति में वृक्ष लगाने का अभियान भी शिवराज सिंह चौहान की देन ही है। इस  वृक्षारोपण अभियान से प्रदेश  के हर नागरिक में  भी  प्रकृति  को लेकर प्रेम करने का भाव मन में जगा है। मध्य प्रदेश के मुखिया की प्रदेश की जनता से वृक्षारोपण के लिए की गयी  ये अपील  आमजन को इस अभियान से जुड़ने के लिए हर दिन प्रेरित कर रही है जिसके प्रदेश में  सकारात्मक  परिणाम  सामने आ रहे हैं । चिलचिलाती धूप और हीट वेव की तमाम आशंकाओं  के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  के माथे पर किसी तरह की कोई शिकन नहीं दिखती।  वह एक तरफ जहाँ लोगों से दो पेड़ लगाने की बात कहते हैं वहीँ खुद भी पेड़  लगाने से पीछे नहीं रहते हैं।  मुख्यमंत्री के  पर्यावरण के प्रति जज्बे को इस बात से समझ सकते हैं बीते सवा साल में 445 पेड़ वह खुद लगा चुके हैं।  उनकी ऐसी जिजीविषा को  देखकर हर किसी को उन पर रश्क ही हो जाये। मुख्यमंत्री शिवराज आज प्रदेश के अन्य नेताओं के बीच भी एक रोल  मॉडल के रूप में  लोकप्रिय हुए हैं जिनकी पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन की चेतना  आम जान में नई  स्फूर्ति का संचार कर रही है।  

आंचलिकता और क्षेत्रीयता की महक मध्य प्रदेश की माटी में महसूस की जा सकती है। यह कहने में कोई अतिश्योक्ति  नहीं मध्यप्रदेश को शिवराज सिंह चौहान ने एकता के सूत्र में पिरोने का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है । उन्होंने यहां के नागरिकों में एक ऐसा भाव पैदा किया जिसके चलते न उनमें अपनी माटी के प्रति प्रेम पैदा हुआ बल्कि उनमें इस जमीन पर वृक्षारोपण करने की अनूठी  ललक भी  जगी है। इस मामले  में शिवराज  एक आशावादी  विकासवादी और पर्यावरणप्रेमी  राजनेता के रूप में सामने आते हैं।  पर्यावरण को लेकर मुख्यमंत्री चौहान के संकल्पों  से प्रदेश में  एक नई चेतना  और स्फूर्ति  का संचार हुआ है । आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के  अपने नव संकल्पों  के साथ अब  मुख्यमंत्री शिवराज  सिंह  चौहान  मध्य प्रदेश को  हरियाली से भर देना  चाहते  हैं।  शिवराज की नर्मदा नदी की सेवा यात्रा की जितनी सराहना की जाए उतनी कम है।  इस यात्रा के माध्यम से जहाँ नदियों के संरक्षण की दिशा में कदम बढे हैं वहीँ आम आदमी  की भागीदारी से यह जनांदोलन का रूप ले सकता है। मुख्यमंत्री शिवराज जनता के बीच रहने वाले और जनता की भावनाओं से खुद को  सीधे कनेक्ट  करने  वाले जननेता  हैं।  सूबे का मुखिया अगर संवेदनशील है और जनता के बीच कार्य करने की ललक उसमें हर पल है तो वह जनता के हर दर्द में सहभागी हो सकता है। वह  इस बात को बखूबी समझते हैं कोई भी बड़ा अभियान जनता के सहयोग से सफल नहीं हो सकता। उनका यह भी कहना रहा है कि पिछले वर्ष कोरोना काल में हमने जो परेशानियाँ झेली हैं, उसमें ऑक्सीजन की कमी भी एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है। पेड़-पौधे हमें न सिर्फ नि:शुल्क प्राकृतिक ऑक्सीजन देते हैं, बल्कि दुनिया को ग्लोबल वार्मिंग से भी बचाते हैं। 

भारतीय संस्कृति में पेड़-पौधों की पूजा की परंपरा सदियों पुरानी रही है। हमारे प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में भी वृक्षों की महिमा का वर्णन मिलता है। वृक्षों की पूजा और प्रार्थना के नियम बनाए गए है। औषधय: शांति वनस्पतय: शांति: जैसे वैदिक मंत्रों से वृक्षों और वनस्पतियों की पूजा की जाती है।  प्राचीन आयुर्वेद विज्ञान प्रकृति की इसी देन पर आधारित है। हमारे ऋषियों द्वारा वन में रहते हुए धर्मग्रंथों की रचना करने का यही कारण है कि वहां का शांत और सुरम्य वातावरण उनके अनुकूल था, जो उनके मन को एकाग्र रखने में सहायक होता था। भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति है और यूँ ही  इस संस्कृति में पेड़ पौधों को विशेष महत्व देते हुए देवों  का दर्जा दिया गया है। भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति है और इस संस्कृति में पेड़ पौधों को विशेष महत्व देते हुए  उसे देवों  का दर्जा दिया गया है। इसीलिये पेड़ पौधों की पूजा भी भारतीयों द्वारा की जाती है। पौधों को जीवन रक्षक समझा जाता है क्योंकि ये ऑक्सीजन प्रदान करते हैं व कार्बन-डाइ-ऑक्साइड को सोखते हैं ।

नर्मदा परिक्रमा यात्रा के समापन के अवसर पर सीहोर में बीते दिनों मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा नर्मदा के डूब क्षेत्र में जहाँ यूकिलिप्टस के पेड़ लगे होंगे उन्हें हटाना होगा क्योंकि ये पानी को लगातार अवशोषित कर उसे बंजर बना देते हैं ।  मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा  साल के पेड़ अधिक से अधिक इस क्षेत्र में लगाए जायेंगे क्योंकि ये अपनी जड़ों से पानी छोड़ते हैं जो छोटी धाराओं के रूप में नर्मदा में मिलता है जो इसकी धार को अविरल बनाता है।  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  मानते हैं कोई भी सरकार अकेले  पर्यावरण और नदियों का संरक्षण नहीं कर सकती।  इसके लिए समाज को आगे आना होगा।  नर्मदा के संरक्षण के लिए उन्होनें मैकाल पर्वत पर नए निर्माण पर रोक लगाने की बात कहते हुए एक नई  लकीर खींचने  की कोशिश की है जिसके आने वाले समय में सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।  आज़ादी के अमृत महोत्सव के खास मौके पर शिवराज सरकार ने नर्मदा के किनारे अधिकाधिक जल सरोवर बनाने का फैसला किया है जिससे नदी के भू जल स्तर  को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।   मुख्यमंत्री शिवराज सिंह  चौहान  की एक खूबी ये भी है वे न सिर्फ  वृक्षारोपण कर रहे  हैं, बल्कि  पेड़ -पौंधों की  देख-रेख भी करते हैं। सूबे के मुखिया का इस प्रकार प्रतिदिन पौधा रोपने का संकल्प प्रदेशवासियों के लिए पर्यावरण-सरंक्षण  की दिशा में नवाचार  का एक संदेश है । ऐसे दृश्य भारतीय राजनीति में कम से कम  दुर्लभ हैं।