देश के ह्रदयप्रदेश मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शासन को जनता के और करीब लाने का एक सशक्त माध्यम ‘मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान’ के रूप में चुना है। 7 अगस्त 2026 को छिंदवाड़ा से शुरू हुए इस अभियान ने महज तीन हफ़्तों के भीतर ही प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही, पारदर्शिता और संवेदनशीलता का नया अध्याय लिखना शुरू कर दिया है। अब हर शुक्रवार को मंत्री, विधायक, कलेक्टर, अधिकारी और कर्मचारी अपने ऐसी कमरों से निकलकर सीधे गावों और शहरों में अपनी दस्तक दे रहे हैं। वे न केवल जनता की समस्याएं सुन रहे हैं बल्कि सरकारी योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन जांच रहे हैं और जहां लापरवाही दिखती है, वहां कार्रवाई करने में भी पीछे नहीं रह रहे हैं।
बड़ा बदलाव : सादगी और मितव्ययिता पर ज़ोर
जुलाई 2026 के अंत में कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फैसला लिया कि हर शुक्रवार को मंत्रालय, जिला और संभाग स्तर पर नियमित बड़ी बैठकें नहीं होंगी। पूरा प्रशासन फील्ड में रहेगा। 7 अगस्त से शुरू हुआ यह अभियान जनवरी 2027 तक चलेगा।
संवाद, समाधान, संवेदनशीलता और सादगी इस अभियान के अभियान के चार मूल स्तंभ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का का स्पष्ट संदेश है कि उनकी सरकार अब सिर्फ राजधानी या कार्यालयों से नहीं चलेगी। वह गांव-गांव, वार्ड-वार्ड पहुंचकर लोगों की शिकायतें सुनेगी, योजनाओं का लाभ पात्रों तक पहुंचाएगी और प्रशासनिक व्यवस्था को जनता के प्रति जवाबदेह बनाएगी। अभियान के दौरान जमीनी भ्रमण के दौरान सादगी और मितव्ययिता पर सरकार विशेष ध्यान रख रही है।
शुरुआत से दिखा एक्शन मोड
छिंदवाड़ा से इस अभियान का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने खुद जनसुनवाई की। शिकायतों के आधार पर उन्होंने तत्काल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), एक तहसीलदार और एक पटवारी को निलंबित करने के निर्देश दिए। यह प्रदेश में बड़े एक्शन की सिर्फ शुरुआत थी।फिर अगले हफ्ते बाद बड़वानी में ‘मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान’ के दौरान उन्होंने डिप्टी कलेक्टर समेत सात अधिकारियों-कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया। इनमें दो पटवारी, दो मुख्य नगरपालिका अधिकारी, एक सहायक अभियंता और एक जनपद पंचायत सीईओ शामिल थे।
यह कार्रवाई लोगों के मन में यह विश्वास पैदा कर रही है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद अब मध्यप्रदेश में सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि लापरवाह अधिकारियों पर अब तुरंत गाज गिरेगी। अब प्रदेश मे हर शुक्रवार को जिलों में अधिकारियों की टीमें न केवल गांवों और शहरी इलाकों में न केवल पहुँच रही बल्कि लंबित शिकायतों का निराकरण भी कर रही हैं। एमपी का जन-विश्वास अभियान’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली में पारदर्शिता और नए बदलाव का प्रतीक है।
अब हर शुक्रवार ‘नो-मीटिंग डे’
अब हर शुक्रवार को प्रदेश में जिला मुख्यालय से लेकर तहसील स्तर तक जनता दरबार लगाते देखे जा रहे हैं। मंत्री, विधायक, कलेक्टर, कमिश्नर और विभाग के अधिकारी फील्ड में मौजूद रहकर सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों, लोक सेवा गारंटी के लंबित मामलों और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा कर रहे हैं। जनता की समस्याओं का मौके पर समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और उनकी समस्याएँ मौके पर ही सुलझ जाएँ।
खास बात यह है कि मुख्यमंत्री खुद भी विभिन्न जिलों में पहुंचकर सुनवाई कर रहे हैं। वे न सिर्फ शिकायतों की गहन समीक्षा कर रहे हैं , बल्कि प्रगतिशील किसानों, निवेशकों, क्षेत्र की महत्वपूर्ण हस्तियों, व्यापारियों, किसानों, युवाओं से भी संवाद भी कर रहे हैं। यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि अभियान सिर्फ शिकायत निवारण तक सीमित नहीं, बल्कि विकास कार्यों को गति देने और जनसहभागिता बढ़ाने का सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। ‘नो-मीटिंग डे’ सरीखे आयोजनों के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं, जनता का विश्वास जीतने वाले नेता की छवि बनाते जा रहे हैं।
जनता का मन मोह रहे ‘मोहन’
जन-विश्वास अभियान की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह शासन को आम आदमी के द्वार तक ले जा रहा है। गांव की महिलाएं, किसान, युवा और छोटे व्यापारी अब सीधे अधिकारी से बात कर पा रहे हैं। कई जगहों पर पुरानी शिकायतें हल हो रही हैं और सरकार कि तमाम योजनाओं का उनको लाभ मिल रहा है और प्रशासनिक उदासीनता पर अंकुश लग रहा है।
बीते 21 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने टीकमगढ़ का दौरा किया और यहाँ आम जनता की समस्याएं सुनी। जन विश्वास अभियान अंतर्गत टीकमगढ़ में सीएम हेल्पलाइन में नागरिकों की समस्याओं को सुना और मौके पर ही उनका निराकरण किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्य में लापरवाही बरतने पर जिला पंजीयक सहकारिता को निलंबित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभागीय अधिकारी सतत रूप से ग्राउंड पर उतरकर विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन का जायजा लें। स्थानीय स्तर पर जनता की शिकायतों का समय सीमा में प्रभावी निराकरण किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि इस अभियान से मिले सुझावों और अनुभवों के आधार पर भविष्य की नीतियां और योजनाएं बनाई जाएंगी। यानी यह सिर्फ अस्थायी कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रदेश शासन की कार्यशैली में स्थायी बदलाव लाने का बड़ा प्रयास है।
‘मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान’,‘नो-मीटिंग डे’ सरीखे आयोजनों ने मध्यप्रदेश में ‘सरकार जनता के द्वार’ की अवधारणा को सही मायनों में व्यवहारिक रूप प्रदान करने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के एक्शन में होने के चलते प्रशासन को भी अब पहली बार को मैदान में उतरने को मजबूर होना पड़ रहा है। जब प्रशासन और अधिकारी खुद लोगों के बीच जाकर उनकी पीड़ा सुनते हैं और तुरंत कार्रवाई करते हैं, तो सरकार के प्रति जन-विश्वास निरंतर मजबूत होता है। बीते दिनों केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर जिले के शाहगंज में आयोजित मध्यप्रदेश सरकार द्वारा चलाये जा रहे जन-विश्वास अभियान की मुक्त कंठ से सराहना कर चुके हैं और इसे जनता की सेवा और शासन के प्रति विश्वास को मजबूत करने वाला एक बेहतरीन कदम बताया है। आज मध्य प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान’ सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह अभियान एक तरफ सरकार को जनता के करीब लाकर पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ा रहा है, वहीं यह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जनोन्मुखी छवि का बड़ा प्रतीक भी बनता जा रहा है।जनता दिल जीतने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका समस्याओं को सुनना, समाधान करना और जवाबदेही तय करना है। ‘मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान’ अब इसी राह पर मध्यप्रदेश में तेजी से आगे बढ़ रहा है।