मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सत्ता संभालने के बाद से किसानों को प्राथमिकता देते हुए राज्य में किसान हितैषी मुख्यमंत्री की एक नई छवि गढ़ रहे हैं। वे न केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित हैं, बल्कि खुद खेतों में उतरकर किसानों के साथ जुड़कर उनकी आय बढ़ाने के ठोस कदम उठाने के साथ ही किसान कल्याण वर्ष 2026 में और खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में सतत रूप से आगे बढ़ते दिखाई देते हैं। वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ घोषित कर उन्होंने अपने इस संकल्प को और मजबूती प्रदान की है।
मोहन सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बलराम कृषि महोत्सव 15 जुलाई 2026 को इंदौर से शुरु किया गया है जिसके तहत 13 नवंबर 2026 तक प्रदेश के सभी जिलों में बड़े आयोजन होंगे।
सीधी आर्थिक मदद और योजनाओं की निरंतरता
मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत किसानों के खातों में ब सीधे राशि पहुंचाना मध्यप्रदेश में मोहन सरकार की एक प्रमुख पहचान बन गया है। जुलाई 2026 में खंडवा के बलराम कृषि महोत्सव में उन्होंने सिंगल क्लिक से 82.70 लाख से अधिक किसानों के खातों में 3,300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की। किसानों को 2025-26 की तीसरी और 2026-27 की पहली किस्त के रूप में 4,000 रुपये मिले। इससे पहले भी पीएम-किसान और राज्य योजनाओं के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये किसानों तक पहुंचाए जा चुके हैं।
सरकार ने लगभग 10,500 करोड़ रुपये की पांच प्रमुख किसान हितैषी योजनाओं प्रधानमंत्री राष्ट्रीय किसान कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन समेत अन्य को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने का निर्णय लिया। पहली कृषि कैबिनेट में 27,000 करोड़ रुपये से अधिक के रोडमैप को मंजूरी दी गई, जिसमें सिंचाई, पशुपालन, डेयरी और सहकारिता पर विशेष ध्यान दिया गया।
भावांतर, बोनस और फसल सुरक्षा
सोयाबीन के बाद सरसों को भावांतर योजना में शामिल किया गया। उड़द पर न्यूनतम समर्थन मूल्य के अलावा 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का ऐलान हुआ। धान उत्पादकों के लिए भी भावांतर योजना लागू करने की घोषणा की गई। कोदो-कुटकी जैसी श्रीअन्न फसलों पर 1,000 रुपये प्रति क्विंटल बोनस और सरकारी खरीद अभियान शुरू किया गया। गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया। यह सभी बड़े कदम किसानों को बाजार की अनिश्चितता से बचाते हुए किसानों को एक सुनिश्चित आय का आधार प्रदान करेंगे।
सिंचाई, ऊर्जा और आधुनिक खेती पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री बनने के साथ ही डॉ. मोहन यादव ने किसानों के हितों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए किसान कल्याण को अपना बड़ा विजन बनाया। डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की सिंचाई क्षमता को 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने और आगे 100 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा है। केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंध जैसी बड़ी परियोजनाओं से लाखों किसानों को लाभ प्रदान करने की दिशा में अपने कार्यकाल में उन्होनें एक नई लकीर खींचने का काम किया है। अगले तीन वर्षों में 30 लाख सोलर पंप लगाने का लक्ष्य बनाया है जिससे प्रदेश के किसान ऊर्जा आत्मनिर्भर बनेंगे। आज प्रदेश में उनके कार्यकाल में कृषक मित्र योजना के तहत 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर सिंचाई पंप दिए जा रहे हैं। इसी तरह माइक्रो इरिगेशन, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम पर अनुदान जारी रखा गया है।
प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावामध्य प्रदेश जैविक खेती के मामले में देश में अग्रणी राज्य है जहाँ 16 लाख हेक्टेयर से अधिक प्रमाणित जैविक कृषि क्षेत्र है और सरकार राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 50 प्रतिशत तक अनुदान देती है। सरकार द्वारा प्रदेश में प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि यंत्रीकरण के लिए 2,868 करोड़ रुपये का प्रावधान और देश में सर्वाधिक कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं।
किसानों की आय दुगनी करने का संकल्प
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों के साथ खेत में उतरकर खुद धान की रोपाई करने में भी पीछे नहीं रहे। बलराम कृषि महोत्सव जैसे कार्यक्रमों में वह किसानों से सीधा संवाद करते देखे जा सकते हैं। उनके दूरदर्शी विजन में 17 विभागों को मिलाकर खेती, डेयरी, फूड प्रोसेसिंग और ग्रामीण पर्यटन पर मास्टर प्लान तैयार किया गया है। भूमि अधिग्रहण पर बाजार दर का चार गुना मुआवजा, उर्वरक की उपलब्धता पर एसएमएस अलर्ट, ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल जैसी सुविधाओं ने आज मध्यप्रदेश के लाखों किसानों को लाभ पहुंचाने का काम किया है।
किसानों के बड़े आंदोलन को बातचीत से सुलझाया
मध्यप्रदेश में मूंग की खरीद को लेकर पिछले दो दिनों से किसानों का बड़ा आंदोलन चल रहा था जिससे आम जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ। किसानों ने एमएसपी पर खरीद, ई-टोकन सिस्टम खत्म करने और खाद की उपलब्धता जैसी मांगों पर भोपाल कूच किया। 19 संगठनों के तहत संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नर्मदापुरम से मार्च करते हुए बैरिकेड तोड़ते हुए सीएम आवास के से करीब 1 किलोमीटर दूर पहुंच गए थे। इससे सड़कों पर जाम और तनाव की स्थिति बन गई थी।
मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने किसानों के बड़े आंदोलन को देखते हुए तत्काल मंत्रियों की एक समिति गठित की। कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना समेत अन्य मंत्रियों ने किसानों से बात की और मंत्रालय में मोर्चा संभाला। मंत्रालय से लेकर पुलिस और प्रशासन को सक्रिय किया। सरकार ने मूंग खरीद की सीमा 25% से बढ़ाकर 60% करने का बड़ा एलान कर किसानों का दिल जीत लिया। खरीद समय-सीमा बढ़ाने के बड़े एलान के साथ ही खाद वितरण का ई-टोकन सिस्टम स्थगित कर समीक्षा के लिए समिति बनाई गई। इसके बाद अधिकांश किसान संगठनों ने आंदोलन वापस ले लिया और सड़कें खुल गई।
मूंग उपज का 60 प्रतिशत उपार्जन किया जाएगा
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अवधि भी 10 दिन बढ़ाने का निर्णय लिया। अब किसान 30 जुलाई के स्थान पर 10 अगस्त तक स्लॉट बुकिंग कर सकेंगे। इसी प्रकार उपार्जन की अंतिम तिथि भी 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त की जा रही है। सरकार द्वारा यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू किया जिससे अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिले।
ई-टोकन व्यवस्था में सुधार के लिये समिति गठित होगी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया। यह समिति ई-टोकन व्यवस्था से जुड़ी सभी समस्याओं का परीक्षण कर राज्य सरकार को अपनी अनुशंसाएं प्रस्तुत करेगी। समिति की अनुशंसाओं के आधार पर आवश्यक सुधार तत्काल किए जाएंगे। सुझाव प्राप्त होकर सुधार होने तक ई-टोकन से खाद वितरण की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से स्थगित की जा रही है।
मिशन मोड में लागू कर रहे योजनाएँ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने ठोस निर्णयों के लिए जाने जाते हैं। वह केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहते। वह अपनी सभी योजनाओं को मिशन मोड में लागू कर रहे हैं और किसानों से सीधा जुड़ाव बना रहे हैं। यही नहीं केंद्र की सभी योजनाओं को प्रदेश स्तर पर मजबूती से लागू कर रहे हैं।
आज दलहन, तिलहन, मक्का और टमाटर उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्य बना गया है। सोलर ऊर्जा, मूल्य समर्थन, सिंचाई की बेहतर सुविधाओं और आधुनिक तकनीक के संयोजन से वे किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में दिन रात काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि राज्य सरकार कृषक कल्याण वर्ष में सभी अन्नदाता बंधुओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उनकी सरकार किसानों की बेहतरी के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी।
किसान हितैषी मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव की यह नई छवि भविष्य में मध्य प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई पर ले जाएगी। आज उनके सफल प्रयासों से न केवल प्रदेश के किसानों की आय बढ़ रही है, बल्कि खेती को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालने का नया कार्य भी हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने बेहतर संवाद से किसान संगठनों की मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाकर सही मायनों में अपनी बेहतर राजनीतिक परिपक्वता को दिखाने का कार्य किया है। भले ही प्रदेश का विपक्ष इसे किसानों के पक्ष में एक अधूरी मांग बता रहा है लेकिन मध्यप्रदेश में एक बड़े किसान आंदोलन का जल्द समाप्त होना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लिए एक बड़ा सकारात्मक संदेश माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसान आंदोलन के शुरू होते ही सीधा हस्तक्षेप कर संवाद के रास्ते खोलकर एक बड़ा मास्टर स्ट्रोक खेला और स्थिति को बेहतर ढंग से संभाला जिससे विपक्ष चारों खाने चित्त हुआ है और किसानों के बीच उनकी मजबूत छवि बनी है। अपने कार्यों और ठोस निर्णयों से अब वह प्रदेश की राजनीति में स्थापित होते नजर आ रहे हैं।