मध्यप्रदेश के लोकप्रिय सीएम डॉ. मोहन यादव अपने जीवन काल के 61वें वर्ष में आज प्रवेश करने जा रहे हैं। 25 मार्च 1965 को उज्जैन में जन्मे डॉ. यादव न केवल एक शिक्षाविद् और राजनेता हैं, बल्कि एक ऐसे दूरदर्शी नेता भी हैं जिनके नेतृत्व में पिछले ढाई वर्षों में मध्य प्रदेश ने विकास की नई ऊँचाइयाँ छुई हैं। 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से उन्होंने “विकास और सेवा” के मंत्र को मध्यप्रदेश में पहनाया है।
निवेश क्रांति में एमपी के सफल मॉडल की ग्लोबल धूम
2025 को “उद्योग वर्ष” घोषित कर डॉ. यादव ने प्रदेश को निवेश का हब बनाया। भोपाल में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों करोड़ के प्रस्ताव आए। छह क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और विदेशी रोड शो (यूके, जर्मनी) से 4 लाख करोड़ रु से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे 3 लाख से ज्यादा रोजगार सृजित होने की संभावना है। इंदौर में एमपी तक ग्रोथ कॉन्क्लेव और स्टार्टअप समिट 2026 ने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में मध्यप्रदेश को नई उड़ान दी है। एआई-आधारित शासन और सौर ऊर्जा पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने दावोस में भी मध्यप्रदेश की वैश्विक पटल पर ब्रांडिंग की जिससे एमपी के प्रति निवेशकों का भरोसा तेजी से बढ़ता जा रहा है।
नक्सलवाद को जड़ से मिटाया
डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित समय-सीमा से पहले ही प्रदेश को नक्सलवाद से मुक्त कर दिया है। बालाघाट समेत प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस अधिकारियों ने सघनता से इस अभियान को सफल बनाया है। यह उपलब्धि न केवल कानून-व्यवस्था की मजबूती दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शांति और समृद्धि का आधार भी तैयार कर रही है।
किसान कल्याण और कृषि क्रांति पर जोर
मोहन के विजनरी नेतृत्व में आज किसानों को न केवल ऊर्जादाता बनाया जा रहा है बल्कि भावान्तर योजना, दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन, कोदो-कुटकी की खरीदी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। दुग्ध उत्पादन के लिए गौ-वंश आहार राशि दोगुनी कर दी गई है जिससे पशुपालन के प्रति लोग आकर्षित हो रहे हैं। डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनू योजना और मध्यप्रदेश कृषक कल्याण मिशन ने एमपी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का काम किया है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल उत्पादन के साथ गौपालन, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी एवं कृषि आधारित उद्योगों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मोहन के कार्यकाल में केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ परियोजनाओं की नींव रखी गई है जिससे बुंदेलखंड समेत सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सूखा ख़त्म होगा। वहीँ प्रदेश में नदी जोड़ो अभियान एवं नई सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से कार्य हो रहा है।
महिला सशक्तिकरण में आदर्श प्रस्तुत करता एमपी
डॉ.मोहन यादव का नेतृत्व महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक आदर्श बनकर उभरा है। महिलाओं के सशक्तिकरण में लाड़ली बहना योजना और महिला स्वावलंबन मिशन जैसी योजनाएँ आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। मोहन के कार्यकाल में लाड़ली बहना योजना में मासिक सहायता 1250 रु से बढ़ाकर 1500 रु हो गई है। सरकारी भर्ती में महिलाओं को 35 फीसदी आरक्षण, लखपति दीदी मिशन ने महिलाओं को आज समाज की मुख्यधारा में लाने का कार्य किया है। डॉ. मोहन यादव ने महिला सशक्तिकरण को राष्ट्रीय मॉडल बनाने की ठानी है। उनकी महिला केंद्रित तमाम योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा रहा है। मध्यप्रदेश आज विकास की नई उड़ान भर रहा है। यह उड़ान केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि महिलाओं की आकांक्षाओं को नए पंख दे रही है।
स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे का हुआ विस्तार
मोहन युग में आज का मध्यप्रदेश विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है। प्रदेश में विकास के सभी क्षेत्रों में हर दिन नवाचार हो रहे हैं। राज्य ने बुनियादी ढाँचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। सड़क, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार ने न केवल उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है, बल्कि गाँव-गाँव तक विकास की रोशनी पहुँचाई है। स्मार्ट सिटीज़ मिशन के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहर आधुनिक शहरी प्रबंधन और स्वच्छता के मॉडल बनकर उभरे हैं वहीं नर्मदा घाटी विकास परियोजनाओं ने सिंचाई और जल संरक्षण में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं।
शिक्षा में सांदीपनि विद्यालयों और पीएम एक्सीलेंस कॉलेज ने शैक्षिक परिदृश्य को बदल दिया है। इंदौर, भोपाल में मेट्रो शुरू होने से भोपाल-इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र भी विकसित हो रहा है। पीएम आवास योजना 2.0 के तहत 10 लाख घर बन रहे हैं। अस्पतालों में जन औषधि केंद्र और आयुष आरोग्य मंदिर शुरू होने से बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हुई हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर विस्तार, शिक्षा में नवाचार से मध्यप्रदेश का चहुंमुखी विकास हो रहा है।
हवाई सेवाओं का हुआ विस्तार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में राज्य सरकार ने धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए हवाई सेवाओं का व्यापक विस्तार शुरू किया है। मार्च 2024 में प्रधानमंत्री (पीएमश्री) पर्यटन वायु सेवा और पीएमश्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा का शुभारंभ हुआ जो लोक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर आधारित है। यह योजना भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, रीवा, सिंगरौली और खजुराहो जैसे आठ प्रमुख शहरों को जोड़ती है। यह विस्तार न केवल तीर्थयात्रियों की सुविधा बढ़ा रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दे रहा है। मोहन के दौर का मध्यप्रदेश अब 'आकाशमार्ग से तीर्थयात्रा' का नया अध्याय लिख रहा है जो आस्था और आधुनिकता का अनूठा संगम है।
सांस्कृतिक अभ्युदय से निकली नई राह
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में देश में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के तौर पर उभर रहा है। डॉ. मोहन यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक अभ्युदय के संकल्प को मध्यप्रदेश में पूरा करने की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रही है। प्रदेश में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये मोहन सरकार राम गमन पथ विकसित कर रही है वहीँ चित्रकूट को भी अयोध्या की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। राम वन पथ गमन मार्ग के सभी प्रमुख स्थलों को विकसित करने के लिये पूरी कार्य-योजना बनाकर उसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। राम वन पथ गमन के लिये तैयार की गई कार्य-योजना में 23 प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल हैं जिनमें सतना, पन्ना, कटनी, अमरकंटक, शहडोल, उमरिया आदि जिलों को भी शामिल किया गया है।
कृष्ण पाथेय दिशा में बढ़े मोहन के कदम
मध्यप्रदेश में भगवान कृष्ण की लीलाओं से जुड़े अनेक पवित्र स्थल यहां बिखरे हुए हैं जो वैष्णव भक्ति और आध्यात्मिकता के प्रतीक हैं। डॉ. मोहन यादव ने भगवान कृष्ण से जुड़े इन स्थलों को विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है जिसे 'कृष्ण पाथेय' के रूप में जाना जा रहा है। इस योजना के तहत, राज्य में कृष्ण से जुड़े प्रमुख स्थलों का चयन किया गया है। अमझेरा में प्राचीन शैव-वैष्णव मंदिर, सीधी जिले का नारायण धाम, बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जैसे जनजातीय क्षेत्रों में कृष्ण की लोककथाएं प्रचलित हैं जहां गोप-गोपी नृत्य और भजन परंपराएं जीवित हैं। मोहन सरकार इन स्थलों के विकास हेतु वृहत कार्ययोजना पर कार्य कर रही है।
जल गंगा संवर्धन से खींची नई लकीर
जल गंगा संवर्धन अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भावी पीढ़ियों के लिए जल, जीवन और प्रकृति की इस अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखने का संकल्प है। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल संरक्षण के संकल्पों से प्रेरित है। इस अभियान का पहला चरण वर्ष 2024 से शुरू हुआ जिसमें कुएं, बावड़ी, तालाब, चेक डैम आदि का निर्माण, पुनर्जीवन और संरक्षण किया गया। पहले वर्ष में ही सफलता मिलने के बाद 2025 में अभियान का दूसरा चरण 30 मार्च से 30 जून तक चला जिसमें यह विशाल जनआंदोलन के रूप में विकसित हुआ। जल गंगा संवर्धन अभियान के तीसरे चरण का 19 मार्च 2026 गुड़ी पड़वा, को उज्जैन के क्षिप्रा नदी तट से शुरू हुआ जो 30 जून गंगा दशहरा तक चलेगा। यह अभियान केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बहाल करने पर भी इसका विशेष फोकस है। इस अभियान का उद्देश्य न केवल नदी, तालाब, कुएं और पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरोद्धार है बल्कि प्रदूषित जल स्रोतों की सफाई को गति देने की दिशा में भी यह मजबूती के साथ पिछले दो चरणों में आगे बढ़ चुका है। खास बात यह है कि इसमें सामुदायिक भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है, जिससे यह पर्यावरण के साथ-साथ सामाजिक सशक्तिकरण का भी प्रेरक उदाहरण बन गया है। पिछले चरणों में हुए कार्यों से जहाँ लाखों जल संरचनाओं का संरक्षण और निर्माण हुआ है, वहीँ कई भू जल स्त्रोतों ,नदियों को पुनर्जीवन मिला है जिससे मध्यप्रदेश को जल संरक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।
सिंहस्थ 2028 की तैयारी में जुटी मोहन सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंहस्थ कुंभ 2028 को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए कमर कस चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन को देश की पहली स्थायी कुंभ नगरी के रूप में विकसित करने की घोषणा कर चुके हैं। इसके लिए 2372 हेक्टेयर भूमि पर 5000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है जिसमें अत्याधुनिक सुविधाएं जैसे 60 से 200 फीट चौड़ी सड़कें, घाट और बैराज शामिल हैं। प्रयागराज महाकुंभ 2025 और हरिद्वार कुंभ 2021 के मॉडल का अध्ययन कर सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाया जा रहा है। यात्रा सुगम बनाने के लिए हेलीपेड, एयरपोर्ट विस्तार और सैटेलाइट रेलवे स्टेशन बनाए जा रहे हैं। शिप्रा नदी को साफ़ किया जा रहा है और 29 किलोमीटर लंबा घाट 779 करोड़ से निर्मित हो रहा है जहां श्रद्धालु नौका विहार का भी आनंद ले सकेंगे। साधु-संतों के ठहरने, कथा-भागवत आयोजनों के लिए विशेष व्यवस्था हो रही है।
अपने कार्यकाल के सफल दो वर्ष पूर्ण करने के बाद ही सीएम डॉ. यादव ने अगले तीन वर्ष का रोडमैप बना लिया था। 2026 में युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार देना, स्वास्थ्य, शिक्षा, टूरिज्म और नदी जोड़ परियोजनाओं में तेजी लाना, ड्रग्स पर अंकुश उनकी प्रमुख प्राथमिकता बनी है। डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से मध्यप्रदेश आज हर क्षेत्र में संवर रहा है। आने वाले वर्षों में एमपी देश का 'मॉडल स्टेट' बनेगा और डॉ. यादव का विजनरी संकल्प 'विकसित मध्यप्रदेश से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विकसित भारत' को भी मूर्त रूप देगा।