Thursday, 19 February 2026

GYANII (ज्ञानी ) मिशन से सजा मोहन सरकार का बजट...

युवा, महिला, किसान , इंडस्ट्री ,इंफ्रा सबके लिए कुछ खास, जनता के विश्वास पर खरी उतरी मोहन  सरकार 

मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने 2026 -27  के लिए 4.38 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का  राज्य का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया है। इसमें सभी वर्गों - युवा, महिला, किसान और गरीब के लिए विशेष योजनाएं शामिल हैं। बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया और ना ही पुराने टैक्स में कोई बढ़ोतरी की गई है। 

GYAN मॉडल  से आगे अब GYANII मिशन पर फोकस
 
 देश के प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी  GYAN मॉडल पर  जोर देते रहे हैं  जिसमें गरीब कल्याण (G), युवा सशक्तिकरण (Y), आधुनिक कृषि (A) और नारी सम्मान (N) शामिल हैं लेकिन मध्यप्रदेश सरकार  द्वारा आज प्रस्तुत किये बजट में  GYAN मॉडल के साथ इंडस्ट्रीलाइजेशन और इंफ्रास्टक्चर पर भी विशेष जोर दिया गया है।  युवाओं के लिए रोजगार के अवसर,  गरीब कल्याण , युवा सशक्तिकरण,  कृषि  और महिला सशक्तिकरण  जैसे कदम इसकी मिसाल हैं।  

पहली बार एमपी  में पेश हुआ रोलिंग बजट 

रोलिंग बजट पारंपरिक वार्षिक बजट से अलग होता है। दरअसल इसमें सिर्फ वित्तीय वर्ष का लेखा-जोखा नहीं होता, बल्कि आने वाले 2 से 3 साल का अनुमान और लक्ष्य भी शामिल होते हैं। हर साल पुराने अनुमानों को अपडेट करते हुए नया वर्ष जोड़ दिया जाता है। यानी बजट एक स्थिर दस्तावेज नहीं, बल्कि गतिशील योजना बन जाता है। एमपी बजट 2026 में योजनाओं को बहुवर्षीय यानी 3 साल के लक्ष्य से जोड़ा गया है। 2026 से 2029 तक की कार्य योजनाएं शामिल की गई हैं।  

टैक्स नहीं बढ़ा, जनता को मिली राहत 

वित्त मंत्री ने कोई नया टैक्स नहीं लगाया, न ही पुराने टैक्स बढ़ाए। यह आम आदमी के लिए बड़ी राहत की बात है।  मोहन सरकार  बजट में साफ संकेत दिया गया कि सरकार का पूरा फोकस ग्रामीण, गरीब, किसान, महिलाएं और ,इंफ्रा पर रहा है । निवेश और स्वास्थ्य तक, यह बजट कई मायनों में दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। सरकार ने अपने खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा- लगभग 27%- सिर्फ दो चीजों पर केंद्रित किया है: शहरी-ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य। कुल बजट में 'शहरी एवं ग्रामीण विकास' को सर्वाधिक 14% और 'स्वास्थ्य' को 13% आवंटन मिला है।

 इंफ्रा से लेकर निवेश, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता पर जोर
 
सरकार ने अपने खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा- लगभग 27 प्रतिशत शहरी-ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य पर खर्च किया है । कुल बजट में 'शहरी एवं ग्रामीण विकास' को सर्वाधिक 14% और 'स्वास्थ्य' को 13% आवंटन मिला है। किसानों को 3000 करोड़ रुपए की लागत से किसानों को 1 लाख सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे। भावांतर योजना की सफलता से प्रभावित होकर अन्य राज्यों ने भी इसमें रुचि दिखाई है। कृषक उन्नति योजना की घोषणा की गई है, जिसके अंतर्गत किसानों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। वहीं, जैविक एवं प्राकृतिक खेती के लिए 21 लाख 42 हजार हेक्टेयर क्षेत्र पंजीकृत किया गया है।

बजट में 50,000 सरकारी पदों पर भर्ती का ऐलान हुआ है।कौशल विकास, रोजगार सृजन और "हर हाथ को काम" पर जोर दिया गया है । युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने की दिशा में सरकार अपने कदम तेजी से बढ़ा रही है।  यह युवाओं के कौशल विकास की दिशा में नए रास्ते खोलेगा ।इंडस्ट्री को मजबूत करने के लिए सरकार ने विशेष प्रावधान किये हैं । GIS-2025 के तहत कई लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स प्रदेश में लगाए जा चुके हैं । MSME, स्टार्टअप, सेमीकंडक्टर, ड्रोन जैसी नई पॉलिसी से रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया है।सड़क, आवास (10 लाख पीएम आवास), मेट्रो/शहरी विकास और बुनियादी ढांचे पर  निवेश पर जोर दिया गया है ।पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी से कनेक्टिविटी और विकास को गति मिलेगी जो विकसित मध्य प्रदेश @2047 की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। 

प्रदेश में औद्योगिक और आईटी पार्क विकसित करने के लिए 19,300 एकड़ जमीन आरक्षित की गई है। बीते 2 वर्षों राज्य को 33 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जो रोजगार सृजन में मील का पत्थर साबित होंगे।  8वीं क्लास तक के   बच्चों के पोषण के लिए  सरकारी स्कूलों में टेट्रा पैक में दूध उपलब्ध कराने का एलान इस बजट में किया गया है।  मख्यमंत्री लाडली बहना योजना' के लिए 23,883 करोड़ रुपये का विशाल प्रावधान महिलाओं की दैनिक जरूरतों को पूरा करने  का काम करेगा। जनजातीय विकास के लिए 11,277 गांवों के लिए 793 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यही नहीं सरकार ने गुणवत्ता सुधार के लिए सरकारी प्राथमिक शालाओं की स्थापना और उन्नयन के लिए 11,444 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। 

औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और इंफ्रा प्रोजेक्ट्स (रोड, मेट्रो जैसी मेट्रोपॉलिटन सिटी तैयारी) पर सरकार द्वारा  मजबूत फोकस किया गया है ।मोहन सरकार ने बीते 2-3 वर्षों  में नारी सशक्तिकरण (2024), उद्योग-रोजगार (2025) और अब किसान कल्याण (2026) को समर्पित कर विकसित भारत की दिशा में मजबूती के साथ अपने कदम बढ़ाये हैं।   

जनता के विश्वास पर खरा उतरने वाला बजट : मोहन 
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह बजट ''समृद्ध मध्‍यप्रदेश, सम्‍पन्‍न मध्‍यप्रदेश, सुखद मध्‍यप्रदेश, सांस्‍कृतिक मध्‍यप्रदेश'' के सपने को साकार करने वाला है।  सुशासन और सुप्रबंधन के लिए निरंतर नवाचार और विकास के सभी पैमानों को पूरा करता यह बजट अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय है।मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे प्रदेश के भविष्य का रोडमैप बताया है।

प्रदेश की "मोहन सरकार  ने वाकई युवा, महिला, किसान, इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करके जनता के विश्वास को साबित किया है। आज पेश हुए बजट को G (गरीब), Y (युवा), A (अन्नदाता/किसान), N (नारी शक्ति), और अब I (इंडस्ट्री) + I (इंफ्रास्ट्रक्चर) जोड़कर GYANII बजट कहा जा रहा है।  मोहन सरकार का यह बजट "समृद्ध मध्यप्रदेश" की दिशा में रोलिंग बजट के रूप में देखा जा रहा है, जो जनता के हर वर्ग—खासकर युवा, महिला और किसान के साथ इंडस्ट्री-इंफ्रा के विकास को जोड़कर विश्वास जीतने की कोशिश में कामयाब दिख रहा है। यह बजट संतुलित दिखता है। 'किसान कल्याण वर्ष' की घोषणा, महिला सशक्तिकरण और आधारभूत ढांचे को मजबूत कर विकास पर फोकस सरकार की मजबूत इच्छा शक्ति को दर्शाते हैं। 

मोहन सरकार का मनमोहनी बजट महिला, किसान, युवा से लेकर गरीब के कल्याण का वादा, सशक्तिकरण का संकल्प

मध्यप्रदेश में मोहन यादव का मनमोहक बजट आज विधानसभा में पेश किया गया है। यह बजट न केवल राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट है, बल्कि यह मोहन सरकार का मनमोहनी बजट इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसमें महिलाओं, किसानों, युवाओं और गरीब वर्गों के लिए आकर्षक घोषणाएँ  हुई हैं। इसमें विकास, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और कृषि पर विशेष फोकस दिखता है।

 
बजट का कुल आकार लगभग 4.38 लाख करोड़ से 4.65 लाख करोड़ रुपये के बीच है, जो 2025-26 के करीब 4.21 लाख करोड़ से काफी बड़ा है। यह राज्य का पहला पेपरलेस बजट भी है, जो डिजिटल और पारदर्शी शासन की दिशा में एक मजबूत कदम है। बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया और मौजूदा टैक्स में भी कोई वृद्धि नहीं की गई है।

 किसानों को विशेष प्रोत्साहन,  1 लाख सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे
 
3000 करोड़ रुपए की लागत से किसानों को 1 लाख सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे। कृषक उन्नति योजना की घोषणा की गई है, जिसके अंतर्गत किसानों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है वहीं पीएम फसल बीमा योजना के लिए 1,299 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सीएम कृषक उन्नति योजना के लिए 5,500 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। किसानों को 337 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया साथ ही कृषि क्षेत्र में भारी निवेश का प्रावधान किया गया है। कृषक उन्नति योजना की घोषणा की गई है, जिसके अंतर्गत किसानों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। भावांतर योजना की सफलता से प्रभावित होकर अन्य राज्यों ने भी इसमें रुचि दिखाई है।
 
श्रम विभाग के लिए 1 हजार 335 करोड़ का प्रावधान
 
वित्त मंत्री देवड़ा ने कहा- सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए श्रम विभाग के लिए 1335 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान प्रस्तावित किया है। इस बजट का उद्देश्य मजदूरों, असंगठित क्षेत्र के कामगारों और गरीब वर्ग को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत अब तक राज्य में 4 करोड़ 61 लाख से ज्यादा खाते खोले जा चुके हैं।इससे बड़ी संख्या में लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है। वहीं, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में अब तक 3 करोड़ 64 लाख लोगों का पंजीयन हो चुका है। इस योजना के तहत दुर्घटना की स्थिति में बीमा सुरक्षा दी जाती है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से भी बड़ी संख्या में लोग जुड़े हैं। इस योजना में अब तक 1 करोड़ 54 लाख से ज्यादा लोगों ने पंजीयन कराया है, जिससे उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है।

 
खेल के लिए 815 करोड़ रूपए का प्रावधान

बजट पेश करते हुए प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि युवाओं की खेल योजनाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्टेडियम निर्माण का कार्य शुरू किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में चार स्टेडियमों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके साथ ही खेल गतिविधियों के लिए 815 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।शिक्षा और खेल क्षेत्र में नए प्रावधान और निवेश बढ़ाने की बात खेल से जुड़ी योजनाएँ युवाओं को प्रोत्साहित करेंगी।
 
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत 50 करोड़  का प्रावधान 
 
धार्मिक और सामाजिक योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, ताकि वरिष्ठ नागरिकों और जरूरतमंद लोगों को धार्मिक स्थलों की यात्रा का लाभ मिल सके। वहीं, धर्म और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए सरकार ने 2 हजार 55 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया है।
 
सिंहस्थ निर्माण कार्यों को स्वीकृति, 3 हजार 60 करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान 
 
राज्य सरकार ने आगामी सिंहस्थ आयोजन की तैयारियों के लिए अब तक 13 हजार 851 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास और निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी है। इसके साथ ही वर्ष 2026-27 के बजट में सिंहस्थ के लिए 3 हजार 60 करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान प्रस्तावित किया गया है, जिससे अधोसंरचना, यातायात, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा।

पुलिस विभाग में 22 हजार 500 पदों पर भर्ती

वित्त मंत्री देवड़ा ने कहा कि पुलिस विभाग में 22 हजार 500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। पुलिसकर्मियों के लिए 11000 नए आवास बनाए गए हैं। 1 अप्रैल 2026 से परिवार पेंशन के अंतर्गत तलाक शुदा पुत्री को भी परिवार पेंशन देने का फैसला लिया गया है।
 
2 साल में 33 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले
 
बजट पेश करते हुए प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि 2 साल में 33 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। 19300 एकड़ जमीन पर इंडस्ट्रियल और आईटी पार्क विकसित किए जा रहे हैं। 7 लाख 95 हजार स्टूडेंट्स को आर्थिक सहायता राशि का प्रावधान किए जा रहे हैं। उद्यम क्रांति योजना में 16,451 युवाओं को लोन दिया गया है।
 
पीएम आवास के लिए 6 हजार 850 करोड़ का प्रावधान
 
बजट पेश करते हुए प्रदेश के वित्त मंत्री ने कहा- 6 हजार 850 करोड़ पीएम आवास के लिए प्रावधान है। पीएम जनमन के लिए 900 करोड़, जी रामजी के लिए 10428 करोड़ के प्रावधान किए गए हैं। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के लिए 40062 करोड रुपए का प्रावधान किया गया है।

 केंद्र में  महिला सशक्तिकरण
 
इस बजट में महिला सशक्तिकरण और नारी कल्याण को केंद्र में रखा गया है। बजट में महिलाओं और बालिकाओं से जुड़ी योजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर प्रावधान किए गए हैं। सरकार ने लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए 8,801 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। वहीं लाड़ली बहना योजना के लिए 23,882 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिससे प्रदेश की करोड़ों महिलाओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण अभियान को मजबूत करने के लिए 80 लाख दूध पैकेट वितरित किए जाएंगे। इस योजना के लिए 6,700 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। कामकाजी महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई जिलों में ‘सखी भवन’ का निर्माण किया जा रहा है, ताकि बाहर से आने वाली महिलाओं को सुरक्षित और किफायती आवास मिल सके। सरकार ने नारी कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के लिए कुल 1,27,555 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। सरकार का कहना है कि यह बजट महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
 
लोक निर्माण से लोक कल्याण  की राह
 
बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री देवड़ा ने कहा कि "लोक निर्माण से लोक कल्याण" की दिशा में प्रदेश निरंतर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में लगभग 1,500 किलोमीटर सड़क निर्माण और 7,000 किलोमीटर सड़क नवीनीकरण का लक्ष्य पूरा होगा।
                                                                                                         
सड़क और पुल निर्माण के लिए बजट प्रावधान
 
सड़कों और पुलों के निर्माण और संधारण के लिए वर्ष 2026-27 में कुल 12,690 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। यह राशि प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों को मुख्य सड़क मार्ग से जोड़ने, सुरक्षा और ग्रामीण कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए खर्च की जाएगी। वहीं, मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना के तहत मुख्य सड़क मार्ग से जुड़ी न होने वाली बसाहटों के लिए 30,900 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए स्वीकृति दी गई है। क्षतिग्रस्त पुलों के पुनर्निर्माण के तहत 1,766 पुल और पुलियों का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 4,572 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गई है, और वर्ष 2026-27 में 900 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास पर जोर
 
स्वास्थ्य क्षेत्र को 23,747 करोड़,ग्रामीण विकास के लिए 40,062 करोड़,जनजातीय क्षेत्रों के 11,277 गांवों के लिए 793 करोड़ का प्रावधान इस बजट में किया गया है। शिक्षा में छात्रवृत्ति और नए स्कूलकॉलेजों पर भी सरकार का फोकस नजर आता है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 1 लाख सोलर पंप, श्रम विभाग के लिए 1335 करोड़, 11,277 जनजातीय गांवों के विकास, ग्रामीण कनेक्टिविटी, छात्रवृत्ति योजनाओं और महिला कल्याण के लिए 1.27 लाख करोड़ से अधिक के प्रावधान की घोषणा की।
 
देश की मिल्क कैपिटल बनेगा एमपी
 
मध्यप्रदेश देश का तीसरा सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादन वाला प्रदेश है और सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 707 ग्राम है जो राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम से लगभग 46 प्रतिशत अधिक है।प्रदेश में संचालित 3 हजार गौशालाओं में 4 लाख 75 हजार गौवंश का पालन हो रहा है। प्रदेश में स्वावलम्बी गौशालाएं स्थापित करने के लिए बेहतर नीति तैयार की गई है जिसके अंतर्गत गौशालाएं आधुनिक पद्यति से संचालित होंगी जिनमें जैविक खाद, पंचगव्य तथा बायोगैस का उत्पादन होगा। पशुपालन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए रु 2 हजार 364 करोड़ का प्रावधान बजट में प्रस्तावित है। इसमें गौ संवर्धन एवं पशुओं का संवर्धन योजना के लिए रु 620 करोड़ 50 लाख एवं मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के लिए रु 250 करोड़ के प्रावधान शामिल हैं।

पर्यावरण क्षेत्र के लिए 6 हजार 151 करोड़ का प्रावधान

देवड़ा ने कहा कि कृषि वानिकी योजना शुरू की जाएगी इससे सरकार आमदनी बढ़ाने का काम करेगी। वन पर्यावरण क्षेत्र के लिए 6 हजार 151 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
 
पीएम मोदी के 'विकसित भारत' और आत्मनिर्भर भारत के सपनों को साकार करने वाला  ऐतिहासिक बजट : डॉ. यादव

 
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2026-27 के राज्य बजट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' और आत्मनिर्भर भारत के सपनों को साकार करने वाला एक दूरदर्शी और ऐतिहासिक बजट बताया है। यह बजट किसान, युवा, महिला और गरीबों के सशक्तीकरण तथा औद्योगिक विकास को समर्पित है, जो मध्यप्रदेश को एक नई ऊँचाई पर ले जाएगा। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह बजट समावेशी विकास पर आधारित है, जो समाज के हर वर्ग, विशेषकर महिलाओं, युवाओं और किसानों की आकांक्षाओं को पूरा करता है। यह बजट 2047 तक भारत को एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के पीएम मोदी के विजन की नींव को और मजबूत करता है।
 
कुल मिलाकर, डॉ. मोहन यादव का यह बजट मनमोहक इसलिए है क्योंकि  बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया  है। यह बजट किसान-महिला-युवा-गरीब केंद्रित है, जिसमें अधोसंरचना और रोजगार सृजन पर बल दिया गया है। यह महिला, किसान, युवा से लेकर गरीब के जीवन में बदलाव लाने का वादा करता है। बजट मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति और समाज के हर वर्ग को नई शक्ति देने वाला है।

Thursday, 12 February 2026

दीनदयाल उपाध्याय: राष्ट्रवादी चिंतक और सजग पत्रकार


  11 फरवरी पुण्यतिथि पर विशेष 

पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक भारतीय विचारक, अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री,लेखक, पत्रकार, संपादक थे। भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष भी एक दौर में रहे। ब्रिटिश शासन के दौरान इन्होंने भारत द्वारा पश्चिमी धर्म निरपेक्षता का विरोध किया। उन्होनें लोकतंत्र की अवधारणा को सरलता से स्वीकार किया लेकिन पश्चिमी कुलीनतंत्र, शोषण और पूंजीवादी मानने से साफ़ इंकार कर दिया। पंडित जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन जनता की सेवा में लगा दिया।  भारतीय पत्रकारिता ने सदैव राष्ट्रवाद को पल्लवित करने का निर्वहन किया है। पत्रकारिता में राष्ट्रवादी स्वर को गति देने वाले पत्रकारों में पं. दीनदयाल उपाध्याय का नाम आदर के साथ  लिया जाता है। स्वाधीनता आंदोलन के दौरान अनेक नेताओं ने पत्रकारिता के प्रभावों का उपयोग अपने देश को स्वतंत्रता दिलाकर राष्ट्र के पुनर्निमाण के लिए किया। विशेषकर हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषायी पत्रकारों में खोजने पर भी ऐसा सम्पादक शायद ही मिले जिसने अर्थोपार्जन के लिए पत्रकारिता का अवलम्बन किया हो।

दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर, 1916, नगला चन्द्रभान, मथुरा, उत्तर प्रदेश में एक मध्यम वर्गीय प्रतिष्ठित हिंदू परिवार में हुआ था। उनके परदादा का नाम पंडित हरिराम उपाध्याय था, जो एक प्रख्यात ज्योतिषी थे। उनके पिता का नाम श्री भगवती प्रसाद उपाध्याय तथा मां का नाम रामप्यारी था। उनके पिता जलेसर में सहायक स्टेशन मास्टर के रूप में कार्यरत थे। दीनदयाल ने कम उम्र में ही अनेक उतार-चढ़ाव देखा, परंतु अपने दृढ़ निश्चय से जिन्दगी में आगे बढ़े। उन्होंने सीकर से हाईस्कूल की परीक्षा पास की जन्म से बुद्धिमान और उज्ज्वल प्रतिभा के धनी दीनदयाल को स्कूल और कालेज में अध्ययन के दौरान कई स्वर्ण पदक और प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए। दीनदयाल इण्टरमीडिएट की पढ़ाई के लिए 1935 में पिलानी चले गए। 1937 में इण्टरमीडिएट बोर्ड के परीक्षा में बैठे और न केवल समस्त बोर्ड में सर्वप्रथम रहे वरन सब विषयों में विशेष योग्यता के अंक प्राप्त किए। बिडला कॉलेज का यह प्रथम छात्र था, जिसने इतने सम्मानजनक अंको से परीक्षा पास की थी। सीकर महाराजा के समान ही घनश्याम दास बिड़ला ने एक स्वर्ण पदक, 10रू मासिक छात्रवृत्ति तथा पुस्तकों आदि के खर्च के लिए 250 रू प्रदान किए। सन 1939 में सनातन धर्म कॉलेज, कानपुर से प्रथम श्रेणी में बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की। एम.ए. अंग्रेजी साहित्य में करने के लिए सेंट जॉन्स कॉलेज आगरा में प्रवेश लिया। इसके पश्चात उन्होंने सिविल सेवा की परीक्षा पास की लेकिन आम जनता की सेवा की खातिर उन्होंने इसका परित्याग कर दिया। 

 दीनदयाल उपाध्याय की पत्रकारिता में भी अग्रणी भूमिका रही है। अपने राष्ट्रवाद के विचारों को जनमानस तक प्रेषित करने के लिए दीनदयाल उपाध्याय ने पत्रकारिता को माध्यम बनाया था। पत्रकारिता किस प्रकार से जनमत निर्माण करने में सहायक होती है, यह दीनदयाल जी ने बखूबी समझा था। एकात्म मानववाद के प्रणेता दीनदयाल उपाध्याय ने गांधी के विचार को पुनःव्याख्यायित करते हुए अंत्योदय की बात की। दीनदयाल जी ने राष्ट्रहित व चिंतन के विचारों को पत्रकारिता के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया था। पंडित  दीनदयाल उपाध्याय एक कुशल पत्रकार और बेहतर संचारक थे। अपनी विचारधारा को पुष्ट करने के लिए पत्रों का संपादन, प्रकाशन, स्तंभ लेखन, पुस्तक लेखन उनकी रुचि का विषय था। उन्होंने लिखने के साथ-साथ बोलकर भी एक प्रभावी संचारक की भूमिका का निर्वहन किया है। पंडित  दीनदयाल उपाध्याय ने लोक कल्याण को ही पत्रकारिता का प्रमुख आधार माना। दीनदयाल के पास समाचारों का न्यायवादी एवं समन्वयवादी दृष्टिकोण था। उनके लेखों, उपन्यासों व नियमित कॉलमों में निष्पक्ष आलोचना, उचित शब्दों का प्रयोग और सत्यपरक खबरों को ही मानवता के अनुकूल मिलता है।  राष्ट्र भक्ति को पल्लवित करने की भावना को साकार स्वरूप देने का श्रेय उंनकी पत्रकारिता को भी जाता है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय को साहित्य से एक अलग ही लगाव था शायद इसलिए दीनदयाल उपाध्याय अपनी तमाम ज़िन्दगी साहित्य से जुड़े रहे। उनके हिंदी और अंग्रेजी के लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते थे। साहित्य से लगाव इतना की उन्होंने केवल एक बैठक में ही 'चंद्रगुप्त' नाटक लिख डाला था। भारत विभाजन के दौर में भयानक रक्तपात हुआ। देश, भारत को एक राष्ट्र मानने तथा भारत को द्विराष्ट्र मानने वाले में बंट गया। इसी हिंसाचार ने महात्मा गांधी को भी लील लिया। उनकी जघन्य हत्या हुई। देश के विभाजन की विभीषिका ने दीनदयाल जी को बहुत आहत किया। उन्होनें इस पर प्रखरतापूर्वक अपना पक्ष रखा। पंडित दीनदयाल के अनुसार अखण्ड भारत देश की भौगोलिक एकता का ही परिचायक नहीं अपितु जीवन के  भारतीय दृष्टिकोण का परिचायक  है जो अनेकता में एकता का दर्शन करता है। अतः हमारे लिए अखण्ड भारत राजनैतिक नारा नहीं है, बल्कि यह तो हमारे संपूर्ण जीवनदर्शन का मूलाधार है।  

अखंड भारत की अवधारणा से संबंधित ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का विश्लेषणार्थ उपाध्याय ने अखण्ड भारत क्यों? नाम की पुस्तिका लिखी, जिसमें उन्होंने प्राचीन भारत साहित्य के संदर्भित करते हुए भारत में युगों से चली आयी उस सांस्कृतिक एवं राजनैतिक परम्परा का उल्लेख किया है जो भौगोलिक भारत को एक एकात्म राष्ट्र के रूप में विकसित करने में समर्थ हुई थी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का स्पष्ट मत था कि भारत माता को खण्डित किये बिना भी भारत की आजादी प्राप्त की जा सकती थी और भारत माता को परम वैभव तक पहुँचाने में हम अधिक तीव्रगति से सफल हो सकते थे किंतु पंडित नेहरू और जिन्ना के सत्ता  के लालच  और अंग्रेजों  की चाल में आ जाने से भारतवासियों का यह सपना पूर्ण नहीं हुआ और खण्डित भारत को आजादी मिली। दीनदयाल उपाध्याय के अनुसार व्यक्तिवाद अधर्म है। राष्ट्र के लिए काम करना धर्म है। दीनदयाल उपाध्याय बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। उनमें एक कुशल शिक्षाविद, अर्थचिंतक, संगठनकर्ता, राजनीतिज्ञ, लेखक व पत्रकार सहित अनेक गुण थे। यह बात अलग है कि उन्हें लोग एकात्म मानववाद के प्रणेता के रूप और एक संगठन के कुशल सेवी के रूप में ज्यादा जाना जाता है। उनमें लेखन और संपादन का अद्भुत कौशल विद्यमान था। उनकी गणना उस दौर के प्रतिष्ठित पत्रकारों में भी जाती थी। उनके पत्रकारीय व्यक्तित्व में पत्रकारिता का आदर्शवाद समाहित था। आजादी के समय में अनेक नेताओं ने पत्रकारिता के प्रभावों का उपयोग अपने देश को आजादी दिलाकर राष्ट्र के पुनर्निर्माण और जनजागरण के लिए समर्पित किया। दीनदयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व में एक संपादक के सभी पत्रकारीय गुण  दिखाई पड़ते थे। दीनदयाल उपाध्याय मानते थे कि पत्रकारिता एक मिशनरी संकल्प है जिसे पूरी लगन एवं तल्लीनता से करनी चाहिए। समाजहित की पत्रकारिता में व्यावसायिक पत्रकार का कोई स्थान नहीं होता है।  पंडित दीनदयाल उपाध्याय अपने व्यस्त राजनीतिक जीवन से अनेक वर्षों तक आरगेनाइजर, राष्ट्रधर्म, पांचजन्य में ‘‘पॉलिटिकल डायरी’’ नामक स्तम्भ के अंतर्गत तत्कालीन राजनीतिक-आर्थिक घटनाक्रम पर गम्भीर विवेचनात्मक टिप्पणियां लिखते रहे।  दीनदयाल जी की टिप्पणी सामयिक और बहुत पते की होती थी। सन 1947 में पंडित  दीनदयाल ने राष्ट्रधर्म प्रकाशन लिमिटेड की स्थापना की जिसके अंतर्गत स्वदेश, राष्ट्रधर्म एवं पांचजन्य नामक पत्र प्रकाशित होते थे। दीनदयाल ने ‘पांचजन्य’, ‘राष्ट्रधर्म’ एवं ‘स्वदेश’ के माध्यम से राष्ट्रवादी जनमत निर्माण करने का महत्वपूर्ण कार्य किया था।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा एकात्म मानववाद का विकल्प एवं अंत्योदय का विचार उस कालखंड में दिया गया जब देश में समाजवाद, साम्यवाद जैसी आयातित विचारधाराओं का बोलबाला था। भारत में भारतीयता को पुनर्जीवित करने वाली विचारधारा की बजाय समाजवाद एवं साम्यवाद जैसी आयातित विचारधाराओं का बोलबाला होना भारतीयता के लिए अनुकूल नहीं था। पंडित जी ने भारत की समस्या को भारत के सन्दर्भों में समझकर उसका भारतीयता के अनुकूल समाधान देने की दिशा में एक युगानुकुल प्रयास किया। दीनदयाल जी ने अपने चिन्तन में आम मानव से जुड़ी जिन चिंताओं और समाधानों को समझाने का प्रयास आज से दशकों पहले किया था।  सही मायनों में पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने  पत्रकारिता को भी इसी दृष्टि से एक नई दिशा दी। वे स्वयं कभी संपादक या औपचारिक संवादाता नहीं रहे। उन्होंने संपादकों और संवाददाताओं का सुखद सानिध्य प्राप्त किया। तभी संपादक व पत्रकार उन्हें सहज ही अपना मित्र एवं मार्गदर्शक मानते थे। पत्रकार के नाते पंडित जी का योगदान अनुकरणीय था। दीनदयाल जी उस युग की पत्रकारिता का प्रतिनिधित्व करते थे जब पत्रकारिता एक मिशन होने के कारण आदर्श थी व्यवसाय नहीं थी। स्वाधीनता आंदोलन के दौरान अनेक नेताओं ने पत्रकारिता के प्रभावों का उपयोग अपने देश को स्वतंत्रता दिलाकर राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए किया। ऐसा सम्पादक शायद ही मिले जिसने अर्थोपार्जन के लिए पत्रकारिता का अवलंबन किया हो। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का मानना था कि पत्रकारिता करते समय राष्ट्र हित को सर्वोपरि मानना चाहिए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और स्वदेश के माध्यम से पत्रकारिता के क्षेत्र में जो मूल्य और मानदंड स्थापित किया उसकी दूसरी मिसाल देखने को नहीं मिलती। दीनदयाल उपाध्याय का पत्रकारीय चिंतन राष्ट्रवादी और भारतीय जीवन मूल्यों की विचारधारा से जुड़ता है। पत्रकारिता के आधार पर उन्होंने  राष्ट्र को समझने तथा भारतीय अस्मिता को लोगों तक पहुंचाने का गंभीर प्रयास किया है।


Tuesday, 20 January 2026

दावोस के मंच पर गूँज रहा है सीएम मोहन का निवेश अभियान, एमपी को मिलेगा ग्लोबल प्लेटफार्म

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने दावोस दौरे के माध्यम से एमपी को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक डेस्टिनेशन बनाने का प्रयास कर रहे हैं। निवेश, उद्योग और रोजगार सृजन को एमपी की डेवेलपमेंट नीति का मुख्य केंद्र बनाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीते दो वर्ष में देश-विदेश में निरंतर निवेश के अवसरों को तराशने की कोशिश की है। अब वह दावोस में विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक में अपनी भागीदारी दर्ज कर मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों को बढ़ाने की दिशा में मजबूती के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

नीति निर्धारकों के लिए महत्वपूर्ण दावोस का वैश्विक मंच

दावोस के मंच पर होने वाली चर्चाओं का सीधा प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापारिक नीतियों पर पड़ता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस मंच का उपयोग मध्यप्रदेश के लिए अधिक से अधिक निवेश जुटाने के उद्देश्य से करने जा रहे हैं। एमपी सरकार का प्रतिनिधिमंडल दावोस के वैश्विक मंच पर ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस, त्वरित निर्णय प्रणाली और भूमि-आवंटन की सरल प्रक्रिया को वैश्विक निवेशकों के समक्ष प्रमुखता से रख रहा है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की थीम “ ए स्परिट हाफ डायलॉग "


इस वर्ष वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की थीम “ ए स्परिट हाफ डायलॉग ” रखी गई है, जो सहयोग और साझेदारी पर आधारित विकास मॉडल पर आधारित है। दावोस में मध्यप्रदेश निवेश-केंद्रित संवाद, नीति प्रस्तुतिकरण और रणनीतिक साझेदारियों पर फोकस कर रहा है। मध्यप्रदेश विशेष रूप से कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग, बायोटेक-फार्मा-हेल्थकेयर, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, रसायन उद्योग, टेक्सटाइल एवं गारमेंट, रियल एस्टेट, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स, होल्डिंग कंपनियों, शिक्षा और खेल अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में निवेश संवाद करेगा। दावोस दौरे के माध्यम से मध्यप्रदेश मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, टेक्सटाइल, रसायन उद्योग और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में वैश्विक उद्योग जगत से संवाद होगा और सभी को एमपी आमंत्रित किया जायेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मुख्य उद्देश्य "इन्वेस्ट इन एमपी " को वैश्विक स्तर पर मजबूती से स्थापित करना है। राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में निवेश नीतियों को सरल, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल बनाया है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में तेजी, त्वरित निर्णय प्रक्रिया, भूमि आवंटन की आसान व्यवस्था और निवेशकों के लिए एकल खिड़की प्रणाली जैसी पहलें दावोस में प्रमुखता से प्रस्तुत की जा रही हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव 21 जनवरी से विभिन्न सत्रों, वन-टू-वन मीटिंग्स, सेक्टोरल राउंडटेबल्स और कॉर्पोरेट डायलॉग में भाग लेंगे, जहां वे वैश्विक सीईओ, नीति-निर्माताओं और बहुराष्ट्रीय कंपनियों से अपना सीधा संवाद स्थापित करेंगे।

सरल, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल नीतियों से एमपी में निवेश के भरपूर अवसर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने निवेश नीतियों को सरल, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल बनाया है। एमपी एक जमाने में बीमारू राज्य के रूप में जाना जाता था, अब रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के माध्यम से निवेश की भरपूर क्षमताओं से एमपी निवेशकों के दिल जीत रहा है। राज्य सरकार की निवेशकों के अनुकूल नीतियां और अनेक प्रोत्साहन राज्य में व्यापार और उद्योग की नई संभावनाएं के द्वार खोल रही हैं जिससे निवेशक मध्यप्रदेश की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव दावोस पहुंचने के बाद कई प्रमुख कंपनियों और उद्योगपतियों से मुलाकात करेंगे।

रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया माइलस्टोन

एक माह पूर्व ग्वालियर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव को विकास का महत्वपूर्ण माइलस्टोन करार दिया था। उन्होंने कहा कि इन कॉन्क्लेव के जरिए निवेश को रोजगार से जोड़ने का सफल प्रयास मोहन के कार्यकाल में हुआ है। मोहन सरकार ने विभिन्न संभागों में इन कॉन्क्लेव का आयोजन कर निवेश आकर्षित किया, जिससे औद्योगिक ईकाइयां स्थापित हो रही हैं और लाखों युवाओं को रोजगार मिल रहा है। शाह ने इसे प्रदेश की आर्थिक मजबूती का आधार बताया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर हुए इस मेगा समिट में 2 लाख करोड़ से अधिक के निवेश वाले प्रोजेक्ट्स की नींव रखी गई, जिससे करीब 2 लाख नौकरियां पैदा होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

निवेश मंथन की रणनीति

मध्यप्रदेश अपनी कई विशिष्ट पहचानों के कारण पूरे देश में अपनी विशेष पहचान बनाने में कामयाब हुआ है। प्रदेश में 18 नई उद्योग-अनुकूल नीतियां, विस्तृत लैंड बैंक, भरपूर जल उपलब्धता, स्किल्ड मानव संसाधन, उत्कृष्ट लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी और पारदर्शी प्रशासन निवेशकों को बेहतर वातावरण प्रदान कर रहे हैं। डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में अब तक 8.5 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं।

सीएम डॉ .मोहन यादव ने अपने कार्यकाल में औद्योगिक विकास को एक नई दिशा प्रदान की है। एमपी में इलेक्ट्रिक वाहन, स्मार्ट सिटी, सूचना प्रौद्योगिकी, रिन्यूएबल एनर्जी, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, फार्मा, आईटी और पेट्रोकेमिकल्स जैसे प्रमुख सेक्टरों में निवेश के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। राज्य का उद्देश्य केवल निवेश प्रस्ताव प्राप्त करना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी विकसित करना है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव का दावोस का दौरा देश के ह्रदयप्रदेश एमपी को निवेश के भरोसेमंद गंतव्य के रूप में स्थापित करेगा।

एमपी को मिलेगी नई दिशा

दावोस में होने वाली चर्चाओं और संभावित निवेश समझौतों से राज्य को नई दिशा मिल सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार निवेशकों के लिए सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। राज्य में व्यापारिक वातावरण को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, त्वरित निर्णय प्रणाली और भूमि-आवंटन की सरल प्रक्रिया को दावोस में वैश्विक निवेशकों के समक्ष प्रमुखता से रखा जाएगा।

विभिन्न सत्रों में होगी एमपी की भागीदारी

दावोस के दौरान विभिन्न सत्रों, बैठकों और वन टू वन संवादों के माध्यम से निवेश, औद्योगिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े ठोस अवसर सामने आएंगे। उद्योग और विनिर्माण से जुड़े सत्रों में रक्षा उत्पादन, उन्नत मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों पर फोकस रहेगा। वैश्विक उद्योग प्रतिनिधियों के साथ होने वाले संवादों में राज्य की औद्योगिक नीति, निवेश-अनुकूल वातावरण और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की क्षमता को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। डिजिटल तकनीक और नवाचार से जुड़े सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल गवर्नेंस और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन सॉल्यूशंस पर चर्चा होगी। इन विमर्शों में प्रशासन, उद्योग और सेवाओं में तकनीक के प्रभावी उपयोग को लेकर मध्यप्रदेश का व्यावहारिक और परिणाम-केंद्रित नजरिया सामने आएगा।

निवेश, तकनीक और ऊर्जा में नई साझेदारियां

दावोस में पहले दिन हुई राज्य प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में मध्यप्रदेश ने खुद को भविष्य की तकनीक और सतत विकास का केन्द्र बनाने की दिशा में अपने कदम बढ़ाये हैं। राज्य के प्रतिनिधियों की वैश्विक शीर्ष कंपनियों के साथ हुई बैठकों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एमपी अब टियर टू तकनीकी हब , एआई और नवीनीकरण ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। एचसीएल टेक, ग्रीन एनर्जी 3000, पीस इन्वेस्ट से ऊर्जा जल परियोजनाओं पर हुई चर्चा और अमारा राजा समूह से ऊर्जा भण्डारण ,भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं पर मंथन इस दिशा में नई साझेदारी की नींव रखने जा रहा है।

दावोस का वैश्विक मंच मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश मानचित्र पर स्थायी रूप से स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। डॉ.मोहन यादव के विजनरी नेतृत्व में एमपी अब केवल भारत का दिल नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक उभरता हुआ निवेश केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दावोस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवेश अभियान को वैश्विक स्तर पर गति देगा। यह दौरा एमपी को देश के प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में निश्चित रूप से मदद करेगा।

Tuesday, 13 January 2026

मकर संक्रांति : 12 संक्रांतियों में सबसे शुभ

हमारे हिन्दू पंचांग में एक वर्ष में कुल बारह संक्रांतियां होती हैं। मकर संक्रांति और कर्क संक्रांति दो अयनी संक्रांति हैं जिन्हें क्रमशः उत्तरायण संक्रांति और दक्षिणायन संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। इन्हें पंचांग में शीतकालीन संक्रांति और ग्रीष्म संक्रांति के रूप में भी माना जाता है। जब सूर्य उत्तरी गोलार्ध में जाता है, तो छह महीने की समय अवधि को उत्तरायण कहते हैं और जब सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में जाता है, तो शेष छह महीने की समय अवधि को दक्षिणायन कहते हैं। मेष और तुला संक्रांति दो विषुव संक्रांति हैं जिन्हें क्रमशः वसंत संपत और शरद संपत के नाम से भी जाना जाता है। इन दोनों संक्रांतियों के लिए, संक्रांति से पहले और बाद की पंद्रह घटी के क्षणों को कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। सिंह , कुंभ, वृषभ और वृश्चिक संक्रांति, चार विष्णुपदी संक्रांति हैं। इन सभी चार संक्रांतियों के लिए संक्रांति से पहले के सोलह घटी क्षणों को कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। मीन, कन्या, मिथुन और धनु संक्रांति, चार षडशीत-मुखी संक्रांति हैं। इन सभी चार संक्रांतियों के लिए, संक्रांति के बाद के सोलह घटी क्षणों को कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।

मकर संक्रांति का उत्सव भगवान सूर्य की पूजा के लिए विशेष रूप से समर्पित है। भक्त इस दिन भगवान सूर्य की पूजा कर आशीर्वाद मांगते हैं। इस दिन से वसंत ऋतु की शुरुआत और नई फसलों की कटाई शुरू होती है। मकर संक्रांति पर भक्त यमुना, गोदावरी, सरयू और सिंधु नदी में पवित्र स्नान करते हैं और भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस दिन यमुना स्नान और जरूरतमंद लोगों को भोजन दालें, अनाज, गेहूं का आटा और ऊनी कपड़े दान करना शुभ माना जाता है। भगवान सूर्य जब धनु राशि को छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे उत्तरायण काल कहा जाता है। इस अवसर पर प्राणी जगत में एक नये परिवर्तन की शुरूआत होती है जिसे जीवंत बनाने के लिए त्यौहार एवं उत्सव आयोजित किये जाते हैं।  मकर संक्रांति में वसुधैव कुटुम्बकम की पावन भावना सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार की तरह रहने का संदेश देती है। उत्तरायण काल से सूर्य की उत्तरायण गति प्रारंभ होती है इसलिए इसको उत्तरायणी भी कहते हैं। उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति, तमिलनाडु में पोंगल, कर्नाटक, केरल। आंध्र प्रदेश में इसे केवल ‘संक्रांति कहते हैं। हरियाणा और पंजाब में इसे लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन, भगवान विष्णु ने राक्षसों के सिर काटकर और उन्हें एक पहाड़ के नीचे गाड़ दिया था और इस प्रकार उनके आतंक को हराया था जो नकारात्मकता के अंत का प्रतीक था। इसलिए यह दिन साधना, आध्यात्मिक अभ्यास या ध्यान के लिए बहुत अनुकूल है क्योंकि इस दिन वातावरण को 'चैतन्य', अर्थात 'ब्रह्मांडीय तेज़' से भरा हुआ माना जाता है। इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव के प्रति एक विशेष पूजा भी अर्पित की जाती है जो अंधेरे पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। भक्त कृतज्ञता व्यक्त करने और समृद्ध फसल और उत्तरी गोलार्ध में सूर्य के प्रवेश के साथ सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए, आशीर्वाद मांगने हेतु अनेक अनुष्ठान करते हैं। मकर संक्रांति को भारत के विभिन्न हिस्सों में उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है।

देवभूमि उत्तराखण्ड में मकर संकांति की पहली रात्रि को जागरण की परम्परा है। इस दिन सात्विक भोजन के उपरान्त रात्रि काल में लोग आग जलाकर उसके चारों ओर बैठ जाते हैं और अपनी प्राचीन परम्परा एवं मर्यादाओं पर आधारित कथा-कहानियां तथा आदर्शों को याद करते हैं। प्रातःकाल नदियों, तालाबों, जल बााराओं पर जाकर सूर्योदय से पूर्व स्नान करते हैं और अपने पूर्वजों की पूजा करते हुए बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया जाता है। कूर्मांचल  क्षेत्र में इसे महारानी जिया की जयन्ती के रूप में तथा घुघुतिया त्यौहार के रूप में भी मनाया जाता है। भगवान भास्कर के मकर में प्रवेश करने पर  उत्तराखंड के कुमाऊं में घुघुतिया त्यार मनाया जाता है। मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान करने के साथ दान व पुण्य का महत्व तो है। कुमाऊं में मीठे पानी में से गूंथे आटे से विशेष पकवान बनाने का भी चलन है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल आदि क्षेत्रों में इस दिन गोधूलि  के बाद आग जलाकर अग्नि पूजा करते हुए तिल, गुड़, चावल और भुने हुए मक्के की आहुति दी जाती है। इस सामग्री को तिलचौली कहा जाता है। इस अवसर पर लोग मूंगफली, तिल की गजक, रेवड़ियां आपस में बांटकर खुशियां मनाते हैं। बहुएं घर-घर जाकर लोकगीत गाते हुए मंगल गीत  गाती हैं। नई बहू और नवजात बच्चे के लिए लोहड़ी का विशेष महत्व होता है। इसके साथ पारंपरिक मक्के की रोटी और सरसों के साग का भी लुत्फ उठाया जाता है। उत्तर प्रदेश में यह पर्व माघ मेले के नाम से जाना जाता है। 14 जनवरी से प्रयागराज में हर साल माघ मेले की शुरूआत होती है। 14 दिसम्बर से 14 जनवरी का समय खर मास के नाम से जाना जाता है। 14 जनवरी यानी मकर संकांति से अच्छे दिनों की शुरूआत होती है। माघ मेला पहला स्नान मकर संतंति से शुरू होकर शिवरात्रि तक चलता है। संक्रांति  के दिन स्नान के बाद दान करने का चलन है। मकर संक्रांति के अवसर पर उत्तराखण्ड के सभी तीर्थों में बड़ा मेले लगते हैं जिसमें बागेश्वर का उत्तरायणी मेला, गौचर मेला, देव प्रयाग मेला आदि प्रसिद्ध  हैं। गंगा, यमुना, सरयू, गोमती, रामगंगा, कौशिकी गंगा, अलकनंदा, भागीरथी आदि सभी नदियों के पवित्र तटों पर स्नान, बयान, साधना व अनुष्ठान करने की परम्परा है। अनेक नदी तटों पर मेले भी लगते हैं। पुण्य स्नान रामेश्वर, चित्रशिला व अन्य स्थानों में भी होते हैं। इस दिन गंगा स्नान करके तिल के मिष्ठान आदि को ब्राह्मणों व पूज्य व्यक्तियों को दान दिया जाता है। उत्तर भारत के अनेक भागों में इस दिन खिचड़ी सेवन एवं खिचड़ी दान का अत्यधिक महत्व होता है। महाराष्ट्र में इस दिन सभी विवाहित महिलाएं अपनी पहली संकांति पर कपास, तेल, नमक आदि चीजें अन्य सुहागिन महिलाओं को दान करती हैं। तिल, गुड़ के  हलवे के बांटने की प्रथा भी है। लोग एक दूसरे को तिल और गुड़ देते हैं और देते समय बोलते हैं- ‘‘तिल गूल बया आणि गोड़ गोड़ बोला’ अर्थात तिल गुड़ लो और मीठा मीठा बोलो। इस दिन महिलाएं आपस में तिल, गुड़, रोली और हल्दी बांटती हैं। असम में मकर संकांति को माघ-बिहू अथवा भोगाली-बिहू के नाम से मनाते हैं। राजस्थान में इस पर्व पर सुहागन महिलाएं अपनी सास का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। साथ ही महिलाएं किसी भी सौभाग्यसूचक वस्तु का चौदह की संख्या में पूजन एवं संकल्प कर  दान देती हैं। अतः मकर संकांति के माध्यम से भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की झलक विविध रूपों में दिखती है। बंगाल में इस पर्व पर स्नान पश्चात तिल दान करने की प्रथा है। यहां गंगासागर में प्रति वर्ष विशाल मेला लगता है। मकर संक्रांति  के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी। मान्यता यह भी है कि इस दिन यशोदा जी ने श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए व्रत किया था। इस दिन गंगासागर में स्नान-दान के लिए लाखों लोगों की भीड़ लगी होती है। लोग कष्ट उठाकर गंगा सागर की यात्रा करते हैं। वर्ष में केवल एक दिन मकर संक्रांति  को यहां लोगों की अपार भीड़ होती है इसीलिए कहा जाता है- ‘सारे तीरथ बार-बार गंगा सागर एक बार।’

तमिलनाडु में इस त्यौहार को पोंगल के रूप में चार दिन तक मनाते हैं। प्रथम दिन भोगी-पोंगल, द्वितीय दिन सूर्य-पोंगल, तृतीय दिन मट्टू-पोंगल अथवा केनू-पोंगल, चौथे दिन कन्या-पोंगल। इस प्रकार पहले दिन कूड़ा करकट इकट्ठा कर जलाया जाता है दूसरे दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है और तीसरे दिन  पूजा की जाती है। पोंगल मनाने के लिए स्नान करके खुले आंगन में मिट्टी के बर्तन में खीर बनायी जाती है, जिसे पोंगल कहते हैं। इसके बाद सूर्यदेव को प्रसाद भी  चढ़ाया जाता है। उसके बाद खीर को प्रसाद के रूप में सभी ग्रहण करते हैं। इस दिन बेटी और जमाईं राजा का विशेष रूप से स्वागत किया जाता है।

मकर संक्रांति का त्यौहार कृषि से जुड़ा है।यह कटाई के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है। यह दिन, भारत में किसानों के लिए बहुत महत्व रखता है। इस त्यौहार को तमिलनाडु में पोंगल, असम में बिहू, पंजाब में लोहड़ी, उत्तरी राज्यों में माघ बिहू और केरल में मकर विलाक्कू के रूप में मनाया जाता है। किसान  मानते हैं कि जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो यह सर्दियों के मौसम के अंत का प्रतीक होता है। यह आने वाले गर्म और लंबे दिनों की शुरुआत का भी प्रतीक है। यह खेतों में शीतकालीन फ़सलों के पकने के लिए भी अनुकूल समय होता है। इस त्यौहार से जुड़ी मुख्य फ़सल गन्ना है। इस त्यौहार के दौरान, तैयार किए जाने वाले कई पारंपरिक व्यंजनों में गुड़ का मुख्य रूप से उपयोग किया जाता है जो गन्ने से बनाया जाता है।  इस फ़सल उत्सव को मनाने के लिए, भक्त, पवित्र नदियों, मुख्य रूप से गंगा में डुबकी लगाते हैं और इसके किनारे बैठकर तप, ध्यान और अनेक अनुष्ठान भी करते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। चूंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं अतः इस दिन को मकर संतंति के नाम से जाना जाता है। महाभारतकाल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति  का ही चयन किया था। मकर संक्रांति के दिन ही गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी।

शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि अर्थात नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है इसलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद् तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति के अवसर पर गंगा स्नान एवं दान को अत्यंत शुभ माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग और गंगा सागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गयी है। सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं लेकिन कर्क व मकर राशियों के जातकों  में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायक है। भारत उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है। मकर संक्रांति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में होता है अर्थात भारत से दूर होता है। इसी कारण यहां रातें बड़ी एवं दिन छोटे होते हैं। मकर संक्रांति के बाद  से सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर आना शुरू हो जाता है। अतः इस दिन से रातें छोटी एवं दिन बड़े  होने लगते हैं और गर्मी का मौसम शुरू हो जाता है।

लोहड़ी : सर्दी में उल्लास का महापर्व

लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध त्योहार है। पंजाब एवं जम्मू-कश्मीर में लोहड़ी नाम से मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है। एक प्रचलित लोककथा के अनुसार मकर संक्रांति के दिन कंस ने कृष्ण को मारने के लिए लोहिता नामक राक्षसी को गोकुल में भेजा था जिसे कृष्ण ने खेल-खेल में ही मार डाला था। उसी घटना की स्मृति में लोहिता का पावन पर्व मनाया जाता है। सिंधी समाज में भी मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व ‘लाल लाही’ के रूप में इस पर्व को मनाया जाता है। माघ मास का आगमन इसी दिन लोहड़ी के ठीक बाद होता है। हिंदू परंपराओं के अनुसार इस शुभ दिन नदी में पवित्र स्नान कर दान दिया जाता है। मिष्ठानों, प्राय: गन्ने के रस की खीर का प्रयोग किया जाता है।


लोहड़ी से संबद्ध परंपराओं एवं रीति-रिवाजों से ज्ञात होता है कि प्रागैतिहासिक गाथाएं भी इससे जुड़ गई हैं। दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के योगाग्नि-दहन की याद में ही यह अग्नि जलाई जाती है। लोहड़ी को दुल्ला भट्टी की एक कहानी से भी जोड़ा जाता है। दुल्ला भट्टी मुगल शासक अकबर के समय में पंजाब में रहता था। उसे पंजाब के नायक की उपाधि से सम्मानित किया गया था। उस समय संदल बार की जगह पर लड़कियों को गुलामी के लिए बलपूर्वक अमीर लोगों को बेच जाता था जिसे दुल्ला भट्टी ने एक योजना के तहत लड़कियों को न केवल मुक्त ही करवाया, बल्कि उनकी शादी भी हिंदू लडक़ों से करवाई और उनकी शादी की सभी व्यवस्था भी करवाई। दुल्ला भट्टी एक विद्रोही था जिसकी वंशावली भट्टी राजपूत थे। उसके पूर्वज पिंडी भट्टियों के शासक थे जो कि संदल बार में था। अब संदल बार पाकिस्तान में स्थित है। वह सभी पंजाबियों का नायक था।

मकर संक्रांति और लोहड़ी का बड़ा महत्व रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार लोहड़ी जनवरी मास में संक्रांति के एक दिन पहले मनाई जाती है। इस समय धरती सूर्य से अपने सुदूर बिंदु से फिर दोबारा सूर्य की ओर मुख करना प्रारंभ कर देती है। यह अवसर वर्ष के सर्वाधिक शीतमय मास जनवरी में होता है। इस प्रकार शीत प्रकोप का यह अंतिम मास होता है। पौष मास समाप्त होता है तथा माघ महीने के शुभारंभ उत्तरायण काल (14 जनवरी से 14 जुलाई) का संकेत देता है। श्रीमद्भगवदगीता के अनुसार श्रीकृष्ण ने अपना विराट व अत्यंत ओजस्वी स्वरूप इसी काल में प्रकट किया था। हिंदू इस अवसर पर गंगा में स्नान कर अपने सभी पाप त्यागते हैं। गंगासागर में इन दिनों स्नानार्थियों की अपार भीड़ उमड़ती है। उत्तरायणकाल की महत्ता का वर्णन हमारे शास्त्रकारों ने अनेक ग्रंथों में किया है।

अलाव जलाने का कार्य हमारे यहां बहुत शुभ माना जाता रहा है । सूर्य ढलते ही खेतों में बड़े-बड़े अलाव जलाए जाते हैं। घरों के सामने भी इसी प्रकार का दृश्य होता है। लोग ऊंची उठती अग्नि शिखाओं के चारों ओर एकत्रित होकर अलाव की परिक्रमा करते हैं तथा अग्नि को पके हुए चावल, मक्का के दाने तथा अन्य चबाने वाले भोज्य पदार्थ अर्पित करते हैं। ‘आदर आए, दलिदर जाए’-इस प्रकार के गीत व लोकगीत इस पर्व पर गाए जाते हैं। यह एक प्रकार से अग्नि को समर्पित प्रार्थना है जिसमें अग्नि भगवान से प्रचुरता व समृद्धि की कामना की जाती है। परिक्रमा के बाद लोग मित्रों व संबंधियों से मिलते हैं। शुभकामनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है तथा आपस में भेंट बांटी जाती है और प्रसाद वितरण भी होता है। प्रसाद में पांच मुख्य वस्तुएं होती हैं- तिल, गजक, गुड़, मूंगफली तथा मक्का के दाने। शीत ऋतु के विशेष भोज्य पदार्थ अलाव के चारों ओर बैठकर खाए जाते हैं। इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण व्यंजन है, मक्के की रोटी और सरसों का हरा साग।

अग्नि का पूजन का इस दिन विशेष महत्व है। जैसे होली जलाते हैं, उसी तरह लोहड़ी की संध्या पर होली की तरह लकडिय़ां एकत्रित करके जलाई जाती हैं और तिलों से अग्नि का पूजन किया जाता है। इस त्योहार पर बच्चों के द्वारा घर-घर जाकर लकडिय़ां एकत्र करने का ढंग बड़ा ही रोचक है। बच्चों की टोलियां लोहड़ी गाती हैं और घर-घर से लकडिय़ां मांगी जाती हैं। वे एक गीत गाते हैं जो कि बहुत प्रसिद्ध है सुंदर मुंदरिये!हो तेरा कौन बेचार। हो दुल्ला भट्टी वाला। हो दुल्ले धी व्याही हो।  सेर शक्कर आई हो।  कुड़ी दे बाझे पाई हो। कुड़ी दा लाल पटारा हो। यह गीत गाकर दुल्ला भट्टी की याद करते हैं। इस दिन सुबह से ही बच्चे घर-घर जाकर गीत गाते हैं तथा प्रत्येक घर से लोहड़ी मांगते हैं। यह कई रूपों में उन्हें प्रदान की जाती है। जैसे तिल, मूंगफली, गुड़, रेवड़ी व गजक। पंजाबी रॉबिन हुड दुल्ला भट्टी की प्रशंसा में गीत गाते हैं। दुल्ला भट्टी अमीरों को लूटकर निर्धनों में धन बांट देता था। एक बार उसने एक गांव की निर्धन कन्या का विवाह स्वयं अपनी बहन के रूप में करवाया था। शीत ऋतु और अलाव का अलग आनंद रहा है। इस दिन शीत ऋतु अपनी चरम सीमा पर होती है। तापमान शून्य से पांच डिग्री सेल्सियस तक होता है तथा घने कोहरे के बीच सब कुछ ठहरा-सा प्रतीत होता है लेकिन इस शीतग्रस्त सतह के नीचे जोश की लहर महसूस की जा सकती है। 
 
 दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व हिमाचल प्रदेश में लोग लोहड़ी की तैयारी बहुत ही खास तरीके से करते हैं। आग के बड़े-बड़े अलाव कठिन परिश्रम के बाद बनते हैं। इन अलावों में जीवन की गर्मजोशी छिपी रहती है। विश्राम व हर्ष की भावना को लोग रोक नहीं पाते हैं। लोहड़ी पौष मास की आखिरी रात को मनाई जाती है। कहते हैं कि हमारे बुजुर्गों ने ठंड से बचने के लिए मंत्र भी पढ़ा था। इस मंत्र में सूर्यदेव से प्रार्थना की गई थी कि वह इस महीने में अपनी किरणों से पृथ्वी को इतना गर्म कर दें कि लोगों को पौष की ठंड से कोई भी नुकसान न पहुंच सके। वे लोग इस मंत्र को पौष माह की आखिरी रात को आग के सामने बैठकर बोलते थे कि सूरज ने उन्हें ठंड से बचा लिया
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Monday, 5 January 2026

अंकिता भंडारी केस : पहाड़ से लेकर मैदान तक उत्तराखंड की सियासत में उबाल

तीन बरस पहले उत्तराखंड को झकझोर देने वाले अंकिता भंडारी हत्याकांड के अनसुलझे राज अब परत दर परत खुलते जा रहे हैं। इस मामले को उत्तराखंड की राजनीती की एप्सटीन फाइल्स माना जा रहा है जहाँ नेताओं पर यौन शोषण करने के सीधे आरोप लग रहे हैं।  हाल ही में भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री  उर्मिला सनावर के बीच सोशल मीडिया पर हुई बहस ने इस केस को एक बार फिर से नया मोड़ दे दिया है।  खुद को सुरेश की पत्नी बताने वाली उर्मिला ने दावा दिया है कि अंकिता पर स्पेशल सर्विस के लिए दबाव डालने वाला वीआईपी कोई और नहीं बल्कि भाजपा के ही नेता थे। उन्होंने भाजपा के केंद्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम समेत कई पदाधिकारियों पर भी घिनौने कृत्य के आरोप लगाए हैं। हालाँकि सुरेश राठौर और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम उर्फ़ गट्टू ने इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया है।  इस खुलासे के बाद उत्तराखंड की राजनीती में भूचाल आ गया है और धामी सरकार पर सीधे सवाल उठ रहे हैं आखिर क्यों उसने इस प्रकरण पर ख़ामोशी की चादर ओड़ ली है और इन सब आरोपों के बीच भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम ने राज्य सरकार से अपील की है उन पर सोशल मीडिया पर चल रहे ऑडियो और वीडियो हटाए जाएँ। गौतम का साफ़ कहना है इससे उनकी छवि खराब हो रही है और उनके खिलाफ साजिश की जा रही है। उन्होनें उत्तराखंड के गृह सचिव शैलेश बगौली  को बाकायदा इस बारे में एक पत्र भी लिखा है।  

अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के एक छोटे से गाँव डोभ-श्रीकोट की 19 बरस की बेटी थी। घर की गरीबी का सपना लेकर वह 2022 में पहाड़ों से निकलकर सीधे मैदान में आई और ऋषिकेश के यमकेश्वर ब्लाक के वनंतारा रिसॉर्ट के रिसेप्शनिस्ट की 10 हजार रु. की नौकरी करने लगी। नौकरी शुरू किये अभी 15 दिन भी नहीं हुए थे कि रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य ने अंकिता पर दबाव डाला कि वह एक वीआईपी गेस्ट स्पेशल सर्विस दे। अंकिता ने इससे साफ़ इंकार कर दिया। उसने अपने दोस्त पुष्पदीप को व्हाट्सएप पर और रिसॉर्ट के साथी विवेक आर्य को बताया कि उसे जान का खतरा है। पुलकित आर्य भाजपा के पूर्व में मंत्री विनोद आर्य के बेटे हैं। 18 सितम्बर 2022 को अंकिता का फ़ोन बंद हो गया और वह लापता हो गई। 6 दिन बाद 24 सितम्बर को पास की चिल्ला नहर से उसकी गली हुई लाश मिली। जांच में पता चला पुलकित आर्य ने अपने दो साथियों रिसॉर्ट मैनेजर सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के साथ मिलकर अंकिता पर हमला किया और उसे नहर में फेंक दिया, जहाँ डूबने से उसकी मौत हो गई। इसके बाद जो हुआ वह न्याय के बजाय पूरी तरह से सबूत मिटाने की कोशिश लगता है।  रिसॉर्ट के उस हिस्से को आधी रात में यमकेश्वर की भाजपा विधायक रेनू बिष्ट ने बुलडोजर से तोड़ दिया गया जहाँ अंकिता रहती थी। मुख्यमंत्री धामी और तत्कालीन पुलिस प्रमुख ने एक्स हैंडल पर कहा था कि उन्होनें त्वरित न्याय कर दिया है लेकिन सवाल यह है अंकिता प्रकरण पर अगर सबूत मिटाए गए तो असली न्याय कैसे होगा ? इस प्रकरण में पहले मामला पुलिस को सौंपा गया लेकिन जनता के गुस्से के बाद धामी सरकार ने एसआईटी बैठाई। दिसंबर 2022 में 500 पेज की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल हुई जिसमें वीआईपी का जिक्र तो कई जगह आया लेकिन उसका नाम पता करने की कोशिश कहीं भी नहीं की गई। अंकिता की मां ने वीआईपी का नाम तक बताया था लेकिन सरकार के हाथों खेल रही राज्य की पुलिस ने उनसे पूछताछ तक नहीं की। 30 मई 2025 को कोटद्वार की अदालत ने पुलकित आर्य,सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराया और तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपियों ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में अपील की लेकिन वीआईपी से पर्दा आज तक नहीं हटा। तमाम सामाजिक संगठनों ने मांग की कि वीआईपी को सामने लाओ और सजा दो। सुप्रीम कोर्ट के वकील कॉलिन गोंसाल्विस ने भी इस मसले पर अपनी आवाज उठायी।

एक हफ्ते पहले सोशल मीडिया पर भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के बीच झगड़ा हुआ। उर्मिला ने एक वीडियो में खुलासा किया कि वह वीआईपी दुष्यंत गौतम है जो भाजपा का बड़ा नेता है। उन्होनें यह भी कहा अकेले गौतम ही नहीं इस मामले में भाजपा के अन्य पदाधिकारियों की भी गहरी संलिप्तता है। उर्मिला ने यह भी कहा अंकिता के कमरे में बुलडोजर चलवाने वाली महिला का नाम भी उन्हें पता है साथ में उन्होंने भाजपा के कई नेताओं पर यौन दुराचार करने के आरोप भी लगाए जिससे ठण्ड में उत्तराखंड की राजनीती गर्म हो गई। विपक्षी दल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पीसीसी दफ्तर दिल्ली में इस पर बड़ी प्रेस कांफ्रेंस उर्मिला के वीडियो के साथ कर दी और साफ कहा अंकिता प्रकरण की सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो। गोदियाल ने इस पर धामी सरकार को अल्टीमेटम देने के साथ ही राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।     

अंकिता प्रकरण में धामी सरकार पर लगातार दबाव बनता जा रहा है। जनता सरकार से पूछ रही है वीआईपी कौन है और सरकार मौन क्यों है?  अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की चुप्पी भी इस प्रकरण के रहस्य को उजागर कर रही है। सरकार में शामिल भाजपा के तमाम मंत्रियों की जुबां पर ताले लग गए हैं। अंकिता भंडारी मामले में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने बीते दिनों एक कॉन्फ्रेंस की जिसमें वह भी पत्रकारों के सवालों से बचते नजर आए। घटना के तोड़े गए रिसॉर्ट को लेकर पूछे गए सवाल पर सुबोध उनियाल कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। आम जनमानस में यह धारणा तेजी से बनी है धामी सरकार इस मामले में लीपापोती कर रही है। अंकिता प्रकरण में सबूतों से बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई है। भारतीय दंड संहिता के मुताबिक सबूतों को मिटाना भी खड़ एक बड़े अपराध की श्रेणी में आता है। अगर अपराधी निर्दोष थे तो सबूतों से कैसा डर? और सबसे बड़ा सवाल वह जमीन जो आयुर्वेदिक दवाइयों के लिए ली गई थी, उस पर रिसॉर्ट कैसे बना गया?

अंकिता केस सिर्फ हत्या का का नहीं, यौन शोषण और सत्ता के दुरूपयोग से भी जुड़ा है।  अंकिता ने अपनी इज्जत बचाने की कोशिश की लेकिन उसे जान देकर कीमत चुकानी पड़ी। उर्मिला के आरोप बताते हैं सत्ता के सिंहासन पर बैठे बड़े- बड़े सूरमा इसमें शामिल हो सकते हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली भाजपा सरकार ने अपने राज्य की बेटी की अस्मिता बचाने के लिए क्या किया? इस घटना से धामी सरकार पूरी तरह से बैकफुट पर है। आगे जांच होगी या नहीं यह देखना अभी बाकी है?

उत्तराखंड में महिलाओं से जुड़े अधिकांश मामलों में भाजपा नेताओं के नाम सामने आए हैं। कई में जांच चल रही है या कोर्ट में सबूतों के आधार पर फैसला हुआ है। चाहे अल्मोड़ा में भाजपा ब्लॉक प्रमुख पर 14 साल की नाबालिग से रेप का मामला हो या  नैनीताल में भाजपा नेता मुकेश बोरा पर रेप का मामला, हरिद्वार में भाजपा नेता आदित्य राज सैनी पर नाबालिग की गैंगरेप और हत्या का मामला हो या एक पूर्व भाजपा महिला नेता पर अपनी नाबालिग बेटी के साथ गैंगरेप कराने का मामला इन सब मामलों के तार भाजपा से ही जुड़े हैं जिसके बाद पार्टी ने इन सभी नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाकर खुद को बरी कर लिया जिसके बाद ये मामले कांग्रेस द्वारा भाजपा सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा में नाकामी के आरोप लगाने का मुख्य आधार बने। अंकिता प्रकरण में भी उर्मिला के खुलासे भाजपा की परेशानी बढ़ाने का काम कर रहे हैं। 

अंकिता भंडारी केस में जब से कथित ऑडियो-वीडियो वायरल हुए हैं, तब से ही भाजपा बुरी तरह फंस गई है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार से सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सीबीआई जांच की मांग की है। यमकेश्वर की पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग करते हुए भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। पूर्व भाजपा जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ ने सीएम धामी को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की है। वह सरकार से इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों को सज़ा की मांग कर रही थी और उनकी मांग पूरी न होने पर उन्होंने पार्टी छोड़ दी । उनके अलावा भाजपा नेता विजया बर्थवाल ने भी इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और उत्तराखंड महिला आयोग की अध्यक्ष विजया बर्थवाल ने भी मांग की है कि इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए ताकि सच सामने आ सके। उन्होंने कहा जनता को यह भरोसा होना चाहिए कि न्याय और सच्चाई की कोई आवाज दबाई नहीं जाएगी। इसके बाद भाजपा के एक और नेता अजेंद्र अजय ने भी सीबीआई जांच की मांग कर डाली है। ऋषिकेश के बीजेपी युवा मोर्चा के जिला मंत्री अंकित बहुखंडी ने  भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में हुए नए खुलासों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। विपक्षी कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मामले में कथित वीआईपी की संलिप्तता छिपाई जा रही है और सीबीआई जांच से सरकार भाग रही है। अंकिता की लड़ाई अब केवल अंकिता के परिवार की नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की लड़ाई बनती जा रही है। पूर्व सीएम हरीश रावत और पार्टी नेताओं ने धामी सरकार से कैबिनेट बैठक बुलाकर सीबीआई को जांच सौंपने की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि सबूत मिटाने की कोशिश की गई और वीआईपी को बचाया जा रहा है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह  धामी ने इस नए विवाद पर अभी सार्वजनिक बयान नहीं दिया है जिसे विपक्ष उनकी मुश्किलें बढ़ने का संकेत बता रहा है। सीबीआई जांच की मांग से उत्तराखंड में इन दिनों सियासी तनाव बढ़ा हुआ है जहां सभी की नजरें दिल्ली आलाकमान की तरफ लगी हुई हैं। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर हो रहा है और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। चुनावी साल से ठीक पहले उत्तराखंड की राजनीति में इस घटनाक्रम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और आने वाले दिनों में इसके  गहरे राजनीतिक असर  की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता।