शनिवार, 13 दिसंबर 2008

.......पर सिकंदर होता है वही , जनता का मिले........... जिसको प्यार ...................

"मैदान ऐ ज़ंग में होती है जीत और हार
पर सिकंदर वही होता है जिसे मिले जनता का प्यार"

किसी शायर के द्वारा कही गई उपर की यह शायरी अनायास ही हमारे जेहन में आ रही है........ हालाँकि देश के राज्यू का चुनाव निपट चुका है लेकिन इन चुनावो के परिणाम ने दिखा दिया है की हार जीत तो चुनाव के साथ लगे ही रहते है , लेकिन असली सिकंदर वही बन पता है जिसको जनता का दुलार मिलता है..........

एक महीने से चल रहा चुनावी संग्राम थम चुका ... है .... दिल्ली , राजस्थान, मद्य प्रदेश , छत्तीसगढ़ मिजोरम के चुनावो के रिजल्ट सामने आ चुके है.... मप , छत्तीसगढ़ का पुराना किला जहाँ बीजेपी ने बचा लिया वही दूसरी और शीला "दीदी" की हेट्रिक दिल्ली में लगने के साथ ही राजस्थान और मिजोरम में कांग्रेस की सत्ता में वापसी हो गई है....८ दिसम्बर का लोग बड़ी जोर शोर से इंतजार किए हुए थे.....कारन था यह चुनाव २००९ के लोक सभा चुनावो की नब्ज टटोलने का जरिए बनेगा..... तभी अपने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वाले जोर शोर से चुनावो की कवरेज किए जा रहे थे.... और इसको संसद का सेमीफाइनल करार दे रहे थे.... मसला इतना रोचक बन गया की देश का दिल कही जाने वाली हमारी "दिल्ली" के बैरोमीटर से सभी दल लोक सभा चुनावो से पहले अपने सियासी सूरते हाल नापने में लगे थे...... लेकिन जब ८ दिसम्बर को वोटिंग मशीनो का पिटारा खुला तो राजनीती के अच्छे अच्छे पंडितो के होश उड़ गए....... मिजोरम को छोड़ दे तो चुनावो में बीजेपी बनाम कांग्रेस में मुकाबला बराबरी पर छूता .... इसके आधार पर यह अनुमान लगना मुस्किल है की लोक सभा में ऊट किस करवट बेतेह्गा?

इस बार की यह चुनाव कई मायनों में इतिहासिक है....... यह पहला अवसर है जब चुनावो में "सत्ता विरोधी" लहर की हवा निकल गई.... साथ ही इसका बहुत आंशिक असर देखने में आया ... दरअसल राज्य के चुनावो में जनता ने स्थानीय समस्याओ , विकास को तरजीह दी...... आतंकवाद , आतंरिक समस्या , सुरक्षा जैसे कई मुद्दे कही पीछे छूट गए.... इसको हम भारतीय राजनीती के संबंद में शुभ संकेत मान सकते है... यकीं मानिये जनाब नही तो " मेरा भारत तो ऐसा हुआ जो चुनावी लहर में भावनाओ में बहने वालू में से इक है.... शुक्र है हालिया विधान सभा के चुनावो में यह चलन अब बंद हो गया है अगर हमारे वित्त मंत्री को छींक आ जाए तो पूरे देश को जुकाम हो जाता था....

बीजेपी , कांग्रेस इन चुनाव परिणामो पर नज़र लगाये थी... जहाँ कांग्रेस को यह आस थी की वह अपने मनमोहन के "मनमोहक" कार्यक्रमों की बदोलत राज्यों के इक बड़े वोटरों के तबके तो लुभाने में कामयाब होगी वहीँ बीजेपी को अपने सासन वाले राज्यों में जीत आस तो थी ही, साथ में उसको दिल्ली में इस दफा कमल का फूल खिलने की आस थी .... इन सम्भावानाऊ को और बल उस समय मिल गया जब २६ नवम्बर को मुंबई में भीसन आतंकी हमला हो गया .... बीजेपी ने अपने पी ऍम इन वेटिंग " अडवानी" की कप्तानी में इसको बड़ा मुद्दा बनाने की ठान ली....और दिल्ली से लेकर छतीसगढ़ तक सभी जगह कांग्रेस की नाकाम नीतियों के खिलाफ जोर शोर से विज्ञापन चाप दिए..... उसको आस थी की कांग्रेस सरकार को आतंकवाद के मसले पर आसानी से घेरा जा सकता है... आतंरिक सुरक्षा के बड़ा मुद्दा बन्ने पर देश के एक बड़े तबके के वोटो का धुर्विकरण उसके पक्ष में हो सकता है...लेकिन चुनावी बैरोमीटर के दाब को परखने में उससे गलती हो गई.... यही हाल कांग्रेस का भी रहा ... शीला की दिल्ली तो बच गई पर राजस्थान में बहुमत के जादुई आंकडे से वह सीट पीछे चली गई... और तो और मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ भी हाथ से चिटक गया ....

राज्यों के विधान सभा चुनावो के परिणामो को प्रेक्षक अलग अलग नज़र से देख रहे है...लेकिन वह भी किसी रिजल्ट पर नही पहुच पा रहे है... कारन ... है ईस बार के मतदान का रुख पिछले बार से बिल्कुल अलग नज़र आता है... पिछली बार के चुनावो में यह देखा गया की सत्ता विरोधी लहर रिजल्ट को प्रभावित करती नज़र आती थी जो सत्तारुद दल का जहाज गंतव्य ईस्थान तक ले जाने में बड़ा रोड़ा खड़ा करती थी... लेकिन इस चुनाव में यह फैक्टर चारों खाने चीत हो गया है.... दिल्ली, मप, छतीसगढ़ में जीत का सेहरा शीला, शिव , रमन के सर आया है... जिसके लिए इनकी काम करने की शेली जिम्मेदार है.... जिनको लेकर वोटरों के मन में सफह तस्वीर नज़र आती थी॥ तीनो ने अपने विकास कार्यो के बूते अपनी अगली पारी की तैयारी कर ली ...... वैसे यह नया चलन हम गुजरात से देख रहे है ॥ सभी जानते है वह पर साबरमती एक्सप्रेस में आग लगने के बाद किस तरह से "गोधरा को भुनाने" की कोसिस विपक्षियों के द्वारा की गई..... लेकिन कोई भी मोदी का बाल बाका नही कर सका ... कुछ इससे तरह की कहानी शीला , शिव और रमन की भी है जिनके साफ़ छवि ने वोटरों का दिल जीत लिया... हाँ यह अलग बात है इसे तर्ज पर "राजस्थान की महारानी" को आगे कर उनकी रियासत बचाने काबीजेपी के द्वारा किया गया था पर वह इसमे सफल नही हो सकी.... भरी बगावत ... राजसी काम करने की संस्कृति के चलते रेगिस्तान में ईस बार कमल नही खिल पाया .... साथ में गुजर मीना का संघर्ष भी उनकी लुटिया को डुबो गया .....

इस चुनाव के बाद कांग्रेस का एक बड़ा वर्ग यह प्रचारित करने में लगा है की वोटरों का विश्वास उसकी नीतियों में बना हुआ है.... महंगाई, आतंकवाद जैसे मुद्दे उसकी गले की हड्डी बने थे लेकिन ईस बार वह चुनामें कोई असर नही छोड़ पाए....अब इसका मतलब यह नही हुआ की यह सारे मुध्हे फीके पड़ चुके है....यह सब आज भी रास्ट्रीय मुद्दे है .....संभवतः लोक सभा चुनावो में भी बनेंगे..... लेकिन राज्यों के चुनाव में अब स्थानीय मुद्दे जोर पकड़ने लगे है.... ऐसे में जीत के द्वार तक वही पहुच रहा है जो इनको जोर शोर से उठा रहा है॥ कम से कम राज्यों का वोटर अब यह समझ रहा है कौन सरकार अच्छी है... किस को वोट देना चाहिए...इसको देखते हुए मुजको लगता है आने वाले समय में कुछ इससे तरह के अगर चुनावी रिजल्ट आ जायें तो चौंकाने वाली बात कुछ भी नही होगी....

दिल्ली में तीसरी बार शीला जी का जलवा चल गया..... इस जीत ने बीजेपी का उत्साह ठंडा कर दिया....बीजेपी को दिल्लिसे ईस बार सबसे ज्यादा आस थी .... लेकिन शीला जी का जादू दिल्ली पर चल गया ....शीला ने वहां पर विकास कार्यो की जड़ी लगा दी थी... आज की दिल्ली और दस साल पहले की दिल्ली में जमीन आसमान का फर्क है... इस पर अपने मामा जी से भी बहस हुआ करती है .... ९० के दसक में जब वह मेरी दीदी की शादी खरीदारी के लिए यहाँ पर आए थे तो यहाँ पर बुनियादी सुविधाए बहाल नही हुआ करती थी.... आज दिल्ली का काया कलाप हो गया है .... जिसको देखकर किसी को यकीं नही होता ....२०१० तक तो दिल्ली के हर कोने तक मेट्रो पहुच जायेगी... नक्सा पूरी तरह से बदल जाएगा...इसके लिए दिल्ली वाले शीला के आभारी रहेंगे जिनकी बदौलत वहां का नक्सा पूरी तरह से बदल जाएगा...हालाँकि इन १० वर्षो में अपराधो का बदना, महिलाओ का असुरक्चित होना जैसे कई मुद्दे उनके विरोध में जाते है...लेकिन तीसरी पारी शुरू कर शीला की पार्टी के साथ विपक्षी भी चुप हो गए है... अब यह अलग बात है शीला की सफलता के लिए लोग क्रेडिट मनमोहन और सोनिया को दे रहे है जो सही नही है ... कांग्रेस को इन चुनावो से सबक लेने की जरुरत है... उसके साथ इक बड़ी बीमारी यह लगी है की वह स्थानीय नेताओ को पनपने नही देती ... शीला की सफलता से उसको सबक लेना चहिये और सभी राज्यू में लोकल लीडरों को आगे करना चाहिए... .... वही दिल्ली में बीजेपी की सबसे बड़ी भूल यह हो गई की विजय कुमार मल्होत्रा का नाम उसने सीएम के रूप में डिक्लेयर कर दिया ... मल्होत्रा शीला के आगे कही नही तिहरे...इक थके हारे मल्होत्रा शीला के मुकाबले कहीं नही तिहरे यह पहले से ही कहा जाने लगा .... साथ ही उनकी दिल्ली में पकड़ अब वैसे नही रही जैसी ६० के दसक में हुआ करती थी जब अह दिल्ली में कार्यकारी पार्षद हुआ करते थे... उस समय दिल्ली में "पंजाबी और वैश्य " बिरादरी का सेंसेक्स सातवे आस्मां पर चदा करता था... लेकिन आज इसमे ग्लोबल मेल्ट डाउन आ चुका है... दिल्ली का हाल आज ऐसा है यहाँ पर बिहारी, उप, उत्तराखंड के प्रवासियों की संख्या में इजाफा हो गया है... कांग्रेस इसको १९९८ में समझ गई जब उसने उप मूल की शीला को पटक दिया ... शीला ने कमान लेकर परंपरागत वोट बैंक पर तो मजबूत पकड़ बना ली साथ में इन सबको साथ भी ले लिया ... बेचारी बीजेपी इस बात को अब समझ रही है जब शीला की हेट्रिक बन चुकी है ..... मल्होत्रा का नाम सीएम के रूप में घोषित करने को विजय गोएल, हर्षवर्धन, जगदीश मुखी जैसे नेता नही पव्चा पाए.... पूरे चुनाव में मल्होत्रा शीला के सामने बेबस नज़र आ ये ...

मैंने अपने बड़े भइया दीपू दादा को जो यमुना विहार में रहते है , फ़ोन में पहले ही बता दिया था शीला का किला ढहना बहुत मुस्किल काम है ..... मेरी बात १६ आने सच साबित हुई..... बीजेपी हार गई शीला जीत गयी.... बीजेपी को मल्होत्रा जैसे उमीदवार की नही ओबामा जैसा उमीदवार शीला के सामने लाना चाहिए था... लेकिन क्या करें अपने जेटली, और सुषमा जी अग्री ही नही हुए॥ सीएम बन्नने के लिए .....यह तो होना ही था बीजेपी किए साथ ....अगर अभी भी हालत सुधारनी है तो "मदन लाल खुराना " सरीखे दिग्गी नेताओ को आगे लाना होगा जो अभी हासिये पर है...

अपना मप तो शिव लहर पर फिर से सवार हो गया .... १७३ के मुकाबले ईस बार ३३ सीट कम आई लेकिन कांग्रेस चारू खाने चीत हो गई... मोदी की तर्ज पर कई विधायको का टिकेट काटने का साहस उन्होंने दिखाया... जिसमे शिव पास हो गए..... तभी अपने अटल बिहारी ने भी कल दिल्ली में उनको मिटाई खिलाई ॥ शिव को उनके ३ साल के निक कामो का मेवा मिला ... कांग्रेस की हवा फुसाह हो गई .... ज्योतिरादित्य, दिग्गी राजा, कमलनाथ, पचुरी, अजय सिंह और सुभाष , बुआ जी की तो हवा फीस फीस हो गई... सरे दिग्गी 0 साबित ... गुटबाजी ले डूबे... अब अपने राहुल बाबा पोस्त्मर्तम कर रहे है... हार के कारणों पर....कांग्रेस वाले अपने घर में ही घिर कर रह गए .... शिव तो चुनावो की डेट आने से पहले २\३ मप घूम चुके थे... उमा और माया की भी टा या टा या फीस हो गई... माया की सीट तो बड़ी लेकिन उमा टीकमगढ़ से चुनाव हार गई... उमा को अब यह पता चल गया मॉस लीडर होने से कुछ नही होता जब तक आप पर जनता का भरोसा नही हो जाता... इसको वह शायद जान गई थी तभी रिजल्ट आने से पहले पार्टी में गोविंदा को पद्द दे दिया .... "अब तेरा क्या होगा रे उमा" यह मप में सभी कह रहे है?

छत्तीसगढ़ में " रमनबाबा जी ".... का जलवा फिर से चल गया है... जोगी की कांग्रेस हार गई है ज़ंग में... रमन के सलवा जुडूम को मुद्दा बनने निकली थी वह पर... रमन बाबा ने आदिवासी की १९सीट जीतकर कांग्रेस की हवा ख़राब कर दी... रमन की चव्वी का मत्दताऊ पर अच्छा असर हुआ.... कांग्रेस की वहां पर हार होने से अब विद्या चरण शुक्ला जैसे नेताओ का कद आगे हो जाएगा... अपने अजित जोगी बाबा का वनवास अब तय है....

वहीँ राजस्थान में महारानी की रियासत नही बच सकी..... मीना उनको ले डूबे..... महिला को टिकेट देना भी उन पर भरी पड़ा ... सब नही जीत सकी....... बागी ने भी खेल ख़राब कर दिया... उन पर अगर अंकुश लग जाता तो बीजेपी सही बहुमत ले आती... वैसे पार्टी की नाक बच गई .... करारी हार नही हुई महारानी की.... २८ सीट कम आई कांग्रेस से... कांग्रेस भी बहुमत से सीट पीछे चली गई... दोनों पार्टी की हालत न तो बहुत अच्छी न बहुत ख़राब .... लेकिन फिर भी अपने अडवानी........ साहब परेशां हो गए है .... सारा खेल दिल्ली राजस्थान ने ख़राब कर दिया है॥ वैसे ही बेचारे अपना लास्ट वर्ल्ड कप खेल रहे है.... अगर लोक सभा में बीजेपी की हालत नही सुधरती तो पी ऍम इन वेटिंग ही बनकर रह जयेंगे... राजस्थान में उनको २० लोक सभा सीटो की आस थी ही लेकिन अभी की हालत यह है बीजेपी को १० सीट ही मिल पाई है... तभी आनन फानन में वासु माथुर को आज दिल्ली तलब किया है॥ वसुंधरा को एस चुनाव ने बता दिया संगटन से दूरी कितने हानिकारक होती है... अगर चुनाव से पहले किए वादों को पूरा नही किया जाता है तो जनता जूते ... मार देती है या तो रिज़र्वेशन देने की बात ही नही करो या करो तो सरकार में होने पर उसको पूरा भी करो....

कांग्रेस में अशोक गहलोद का विरोध कम नही हुआ... सीएम की ताल के लिए शीश राम ओला, सोना राम।, एक वोट से हारे सीपी ने भी डाव टोक दिया बीते दिनों... ओला और गहलोत समर्थको में हतःपयी हो गई... एक बार तो दिल्ली में गिरजा व्यास का नाम भी चला सीएम के रूप में... लेकिन मुहर लगी अशोक के ही नाम पर॥ जात नेता सीएम नही बन पाए॥ मारामारी में का दिल्ली से बयां आ गया तोड़ने वालू पर होगी कार्यवाही... ओला बेक फ़ुट पर... यू तरन ले लिया... बोले अशोक पर सभी सहमत... है...

लेकिन अपने अशोक की आगे की राह आसान नही है...

मिजोरम में जोरमथंगा सत्ता विरोधी लहर की आंधी में उड़ गए...कांग्रेस ३१ सीट लायी... पूरा २\३ बहुमत.... १० साल बाद वापसी... रीजनल दल की भी हार... जनता ने नकार दिया सभी को... लाल्थान्हाल्वा के सामने इस समय बड़ी चुनोती जन आकांशा को पूरा करने की चुनोती..... देखते है क्या कर पते है वहां के विकास के लिए...

बहरहाल राज्यू के चुनावो के बाद लोक सभा का आंकलन करना बड़ी भारी भूल होगी...बीजेपी कांग्रेस का गेम बराबर ,,,राजनीती में कब क्या हो जाए इसका भरोसा करना सही नही है... ४- माह में हालत अलग हो जायेंगे... कोई नही कह सकता था की मुंबई में चुनावो से पहले आन्तंकी हमला हो जयेगा...॥ कल तक जो अडवानी आतंकवादी घटना होने पर बीजेपी की जीत की बात कहकर चुनावो से पहले फ्रंट फ़ुट पर नजर आ रहे थे... रिजल्ट के बाद अब मत्दताऊ की "रिवर्स स्विंग" ने उनको " बेक फ़ुट ड्राइव" में लाकर खड़ा कर दिया है...अब उनको नई रंन्नीति पर काम करना होगा ।

यही हाल कांग्रेस का भी है... महंगाई, आतंकवाद आज भी मुद्दा जरुर है...लेकिन यह भी इक सच है आने वाले दिनों में भारत पाक रिस्तो पर तल्खी अगर हो गयीऔर पाक के शिवेरो पर हवाई हमलो की नौबत आ गई तो कांग्रेस के हालत वैसे ही हो जायेंगे जैसे इंदिरा गाँधी, और वाजपेयी के समय कारगिल के बाद हो गए थे... लिहाजा आने वाले ३-४ महीनो में क्या होगा इसके हूँ भाविस्यवानी नही कर सकते...कीयुकी राजनीती में चीजे बहुत तेजी के साथ बदलती है... ऐसे में अपने अडवानी का पेम
का सपना एक सपना बनकर रह जाएगा.... खुदा न खस्ता अडवानी जी की राह दुस्कर बन जाए ...........

आज के लिए बहुत काफी है... दिसम्बर महीने की पहली पोस्ट है... कुछ समय से व्यस्त होने के कारन ब्लॉग पर नियमित नही लिख पा रहा था.... सो पिछला कोटा पूरा कर दिया है...इस पर आब आपके कमेन्ट का वेट कर रहा हूँ... आशा है अपने राय से आप मुजको जरूर अवगत करवाएंगे.................................