रविवार, 27 सितंबर 2009

रहस्य बनी रूसिया की मौत

















शान ऐ भोपाल कही जाने वाली भोपाल एक्सप्रेस ट्रेन में पिछले दिनों एक बड़ी घटना घटी ..... इसको कोई मामूली घटना नही कह सकते... ट्रेन में भोपाल विकास प्राधिकरण के सीईओ मदन गोपाल रूसिया गायब हो गए ... उनकी लाश १ दिन बाद आगरा में मिली ... १० सितम्बर की रात को रूसिया दिल्ली से भोपाल लौट रहे थे ॥इस दौरान उनके साथ विधायक डागा भी इसी ट्रेन में एसी कोच में साथ सवार थे..मामला चौकाने वाला है क्युकि पुलिस को दिए बयान में डागा ने इस बात को स्वीकार किया वह ट्रेन में पूरी रात सोये थे जिस कारण उनको रूसिया के लापता होने का पता नही चला ... रूसिया और डागा ट्रेन में साथ साथ आ रहे थे और अगली सुबह रूसिया की फ़िक्र छोड़कर डागा भोपाल पहुचकर उतरने की तैयारी कर रहे थे....
यहाँ यह बताते चले की रूसिया और डागा विद्या नगर की विकास योजना को अमली जामा पहनाने के लिए भूमि अधिग्रहण सम्बन्धी कुछ कागजातों के साथ दिल्ली रवाना हुए थे... यह जमीन जिसके अधिग्रहण की कार्यवाही चल रही है वह २६ एकड़ है जिसमे ८ एकड़ जमीन सरकारी है बाकी जमीन डागा की है...इसी सिलसिले में बात करने के लिए डागा अपने साथ रूसिया को सुप्रीम कोर्ट के वकील के घर ले गए थे॥ रूसिया के परिजनों का कहना है इस मौत के लिए डागा जिम्मेदार है ... बताया जाता है इस जमीन के नियम शिथिल करने के लिए डागा रूसिया पर दबाव बनाये हुए थे..वह इस जमीन का ज्यादा मुआवजा चाहते थे .....रूसिया नियमो को तोड़कर कोई काम नही करना चाहते थे जिस कारण डागा ने रूसिया को रास्ते से हटा दिया हो ऐसी आशंका से इनकार नही किया जा सकता .... जिस समय रूसिया ट्रेन से लापता हुए उस समय तकरीबन ११ बजकर ५५ मिनट का समय हुआ था... इस समय यह ट्रेन आगरा के पास पहुचती है ..ख़ुद डागा ने यह बयान दिया है.... विधायक जीतेन्द्र की माने तो आगरा में दोनों ने साथ साथ भोजन किया था भोजन के बाद उनकी आँख लग गई और उनकी नीद भोपाल में खुली ...भोपाल पहुचकर जब उनकी सीट पर नजर गई तो वह खाली थी उसमे रूसिया के जूते और सामान रखा था ...
यही पर से रहस्य गहरा गया है...बड़ा सवाल यह है रूसिया की आँखे सुबह ट्रेन के भोपाल पहुचने में ही क्यों खुली ? रूसिया के फ़ोन कॉल की डिटेल कह रही है सुबह ६ बजने के बाद उनके द्बारा सुनील नाम के किसी व्यक्ति से बात की गई है ... अगर डागा सो रहे थे तो सुनील से उनकी बात पहले ही कैसे हो गई जबकि यह ट्रेन आमतौर पर ७ बजे भोपाल पहुचती है ... अगर वह सो रहे थे फ़ोन पर कोई भी बात ७ बजे के बाद ही होनी चाहिए थी......साथ ही ऐसा भी कहा जा रहा है रूसिया जिस बर्थ में सवार थे वहां पर कोल ड्रिंक के साथ मदिरा पान भी किया गया था ऐसे में इस घटना को सोच समझकर अंजाम दिए जाने की बात कही जा सकती है...इस मामले में शक की सुइया रेलवे पर भी है ॥ रूसिया के सहायक ने उनके सीट के नीचे रखी शराब की बोतल को क्यों फैक दिया यह बात भी किसी को समझ नही आ रही है ... पता चला है की रेलवे की जांच में अभी कुछ दिनों बाद इस बात का खुलासा होना है की रूसिया की सीट के नीचे शराब की बोतल के सबूत को कोच के २ सहायको ने जान बुझकर मिटाने का प्रयास किया है... साथ ही इस मामले से एक बात और निकलकर सामने आ रही है ...ट्रेन के भोपाल पहुचने के ३ घंटे बाद रूसिया की गुमशुदगी की रिपोर्ट क्यों लिखाई गई ? कहा जा रहा है किसी ने कोच के सहायक को मोटी रकम देकर मामले को बड़ी सूझ बूझ से अंजाम दिया है




रूसिया की मौत के बाद भोपाल में बवंडर मच गया...रूसिया के परिजनों ने तो उनके लापता होने के बाद विधायक जितेन्द्र को ही अपने निशाने पर ले लिया... वही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रूसिया मसले पर बेक फ़ुट में आ गए ... विधायक उनकी भाजपा का जो है..यही नही विधायक की भाजपा की कद्दावर नेता सुषमा स्वराज से निकटता है.... भोपाल के हवाई अड्डे के पास खरीदे गए एक फार्म हाउस को जितेन्द्र ने सुषमा के नाम कर दिया था .. सुषमा के भोपाल आने पर वहां जाना अक्सर लगा रहता ....जितेन्द्र का भोपाल में प्रोपर्टी का बड़ा कारोबार है .. वह सुषमा सरीखी बड़ी नेता की आड़ में बेखोफ होकर अपने कारोबार को फैलाने में जुटे थे ....इसका पता अपन को एक बुजुर्ग सज्जन ने बताया ...उनकी माने तो विधान सभा का टिकेट जितेन्द्र को दिलवाने में सुषमा की खासी अहम् भूमिका रही है ... हाँ, यह अलग बात है रूसिया मामले में जितेन्द्र के नाम के सामने आने के बाद सुषमा उनसे पल्ला झाड़ रही है ..




रूसिया की मौत की गुत्थी सुलझाना ३ राज्यों की पुलिस के लिए भी मुश्किल होता जा रहा है ..उनकी मौत आगरा के आस पास ही हुई है यह तो तय है ॥ लाश का आगरा से ३० किलोमीटर दूर मिलना इस बात को प्रमाणित कर देता है... अब यह पता नही लग पा रहा है उनको ट्रेन से नीचे फैका गया या अगुवा कर मारा गया .... रूसिया से मध्य प्रदेश की सियासत गरमा गई है ....पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने तो दो टूक कहा है इस मामले की सी बी आई जांच होनी चाहिए॥ दिग्गी राजा के साथ विभिन्न लोगो की जांच की मांगो और प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ बनते माहौल को देखते हुए मुख्यमंत्री शिव राज सतर्क हो गए है .... उन्होंने रूसिया मामले की जांच सी बी आई से करवाने के लिए एक पत्र उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को लिखा है ...




इस रूसिया मामले में प्रदेश की शिवराज सरकार पर दवाब उस समय बन गया जब कई लोगो ने इसे हादसा मानने से इनकार कर दिया ... मामले पर भोपाल विकास प्राधिकरण के एक अधिकारी श्रीराम का मुह खुलने के बाद तो सरकार के कान ही खड़े हो गए..उन्होंने विधायक जितेन्द्र पर भोपाल विकास अथॉरिटी को धमकाने के आरोप लगा डाले.... साथ ही श्रीराम की माने तो रूसिया इस भूमि वाले मसले पर विधायक के दबाव के चलते पिछले कुछ समय से परेशान थे ..




विधायक जितेन्द्र इस मसले पर अपना नाम घसीटे जाने से आहत है॥ उनकी माने तो इस प्रकरण पर उनको जबरन फसाया जा रहा है ..लेकिन बड़ा सवाल यह है वह पुलिस को सही बयान क्यों नही दे रहे है॥ पता चला है मध्य प्रदेश की पुलिस और दिल्ली के साथ उप की पुलिस को दिए गए उनके बयानों में बड़ा विरोधाभास है॥ शिव राज ने समझ दिखाकर गेंद को "उप " की "बहिन जी " के पाले में फैक दिया है ..ऐसे में रूसिया के रहस्य का पर्दा कब हटेगा कह पाना मुश्किल है ?

सोमवार, 21 सितंबर 2009

तस्करों के निशाने पर यारसा गम्बू ............

उत्तराखंड गठन के बाद सामरिक दृष्टी से बेहद संवेदनशील पिथोरागढ़ जिले के उच्च हिमालयी इलाकों में जडी बूटी के तस्करों के गिरोह कुछ ज्यादा ही सक्रिय हो गए है ....... मादक पदार्थो और जीव जन्तुओ की तस्करी के लिए सबसे मुफीद माने जाने वाले इस छोटे से राज्य में अब तस्करों के निशाने पर दुर्लभ ओषधि कीडा जडी आ गई है......

बुग्यालों के बीच १३००० फीट की ऊँचाई पर पाई जाने वाली इस औषधि को स्थानीय भाषा में कीडा जडी नाम से जाना जाता है..... वैसे यह "यारसा गम्बू " नाम से लोकप्रिय है..... अन्तराष्ट्रीय बाज़ार में जडी की जबर्दस्त मांग के चलते जिस तरीके से तस्कर इसका अंधाधुन्द दोहन करने में लगे हुए है उसको देखते हुए इसके अस्तित्व के नाम पर सवाल उठ रहे है....... लेकिन राज्य सरकार और वन विभाग तस्करों के सामने नतमस्तक नजर आते है .....

उच्च हिमालयी इलाकों में पाई जाने वाली यह जडी एक ऐसा कवक है जो तितली की प्रजाति "माथ" के लार्वा में पलता है ....... दिलचस्प बात यह है बर्फ़बारी के साथ ही इसका विकास शुरू होता है और बर्फ पिघलने पर तस्कर इसका दोहन करने पहाडियों पर चल निकलते है...... यही वह समय होता है जब कीडा जडी के गुलाबी रंग का निचला हिस्सा भोजन के लिए हिलता डुलता है.....


तस्कर इसका दोहन कर इसको पीसते है और कैप्सूलों में भरकर इंटरनेशनल मार्केट में पहुचाते है...... यौन शक्ति वर्धक होने के साथ ही यह कीडा जडी बाँझपन , दमा , केन्सर, किडनी , हृदय और फेफडो के रोगों के लिए रामबाण समझी जाती है .....इसके अलावा इसमे कई तरह के विटामिन और खनिज पाए जाते है जो लाभकारी साबित होते है..........

९० के दशक में इसकी विशेषता तिब्बत के व्यापारियों ने भारतीय व्यापारियों को बताई .........तभी से इसके दोहन की शुरूवात हो गई...... इंटरनेशनल मार्केट में इसकी तस्करों को मुहमांगी कीमते मिल जाती है जिसके चलते इसके दोहन की रफ़्तार नही थम रही है...... एक मोटे अनुमान के अनुसार इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमत १.५० लाख से २ लाख रुपए तक है ....... दिल्ली में ५० से ७५ लाख तो चाइना में पूरे २ लाख तक की कमाई हो जाती है .......इसकी डिमांड बीजिंग, ताइवान, हांगकांग जैसे शहरों में ज्यादा है .......कई बार तो इन शहरों में मनचाही कीमते मिल जाती है .....

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बाज़ार में इसकी बड़ी मांग है और मांग के अनुरूप उतार चदाव आता रहता है .....वन विभाग के पास तस्करों को पकड़ने के लिए इंतजामों की कमी के चलते उत्तराखंड के बुग्यालों में कीडा जडी का अवेध कारोबार हर वर्ष साल के अंत में धड़ल्ले से चलता है ..... जनवरी के हिमपात के बाद तस्करों की सक्रियता इलाके में बढ जाती है...... तस्करों के रास्तो की खोज करना वन विभाग के लिए हमेशा टेडी खीर साबित होता है....

सीमान्त जनपद पिथोरागढ़ की चिप्लाकेदार की पहाडिया यारसा की तस्करी के लिए कोलार की खाने है...... एक किलो ग्राम यारसा गम्बू में १००० कीडे आते है...... एक कीडे की कीमत १०० से १५० रुपये तक होती है....... बाजार में इसके दामो में उतार चदाव आता रहता है....... धन के मोह में सीमान्त के उच्च हिमालयी इलाकों में प्रवास के लिए जाने वाले लोग इसको खोजने महीनो तक जुटे रहते है ...... प्रतिबन्ध की तलवार लटकने का डर ग्रामीणों को सताता रहता है जिस कारन वह इसको हिमालयी इलाकों में ही औने पौने दामो में तस्करों को बेचकर चले आते है .......फिर इसको तस्कर गुप्त मार्गो के द्वारा इंटरनेशनल मार्केट में पहुचाते है...............

जडी के अवेध दोहन से उत्तराखंड सरकार को वर्षो से करोडो के राजस्व का चूना लग रहा है.... इस बाबत पूछने पर वन विभाग के आला अधिकारियो का कहना है वर्षो से इसकी तस्करी को देखकर विभाग खासा मुस्तैद है..... जिसके चलते संभावित इलाकों में हथियारों से लेस टीम का गटन हर वर्ष किया जाता है ......

रक्षा अनुसन्धान केन्द्र पिथोरागढ़ के वैज्ञानिको का कहना है उच्च हिमालयी इलाको में पाई जाने वाली जिन जडी बूटियों का उनके द्वारा गहन अध्ययन किया गया उसमे यारसा गम्बू भी शामिल थी ..... वैज्ञानिको ने पाया इसको छोटे आकर के चलते ढूँढ पाना दुष्कर होता है .......यह छोटे आकर में मिलती है ....... उन्होंने इसको न केवल यौन बताया गया बल्कि कई बीमारियों की रामबाण दवा से भी नवाजा .....

वैज्ञानिको ने पाया अत्यंत शक्ति वर्धक होने के कारण इसके सेवन से तुंरत फुर्ती आ जाती है जिस कारन बड़े पैमाने पर एथलीट इसको लेते है .......दिलचस्प बात तो यह है इसको लेने के बाद डोपिंग में यह बात पता नही चलती एथलीट ने कीडा जडी युक्त कैप्सूल का सेवन किया है ......इस लिहाज से देखे तो कई असाध्य बीमारियों का तोड यारसा में है जिस कारन तस्कर चाहकर भी इसके दोहन से पीछे नही हट पाते......

सोमवार, 7 सितंबर 2009

वर्षा ऋतु का त्यौहार है हिलजात्रा............

लोकसंस्कृति का सीधा जुडाव मानव जीवन से होता है..... उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुषमा और सौन्दर्य का धनी रहा है ..... यहाँ पर मनाये जाने वाले कई त्योहारों में अपनी संस्कृति की झलक दिखाई देती है... राज्य के सीमान्त जनपद पिथौरागढ़ में मनाये जाने वाले उत्सव हिलजात्रा में भी हमारे स्थानीय परिवेश की एक झलक दिखाई देती है...
हिलजात्रा एक तरह का मुखोटा नृत्य है .... यह ग्रामीण जीवन की पूरी झलक हमको दिखलाता है... भारत की एक बड़ी आबादी जो गावों में रहती है उसकी एक झलक इस मुखोटा नृत्य में देखी जा सकती है... हिलजात्रा का यह उत्सव खरीफ की फसल की बुवाई की खुशी मनाने से सम्बन्धित है... इस उत्सव में जनपद के लोग अपनी भागीदारी करते है...
"हिल " शब्द का शाब्दिक अर्थ दलदल _ कीचड वाली भूमि से और "जात्रा" शब्द का अर्थ यात्रा से लगाया जाता है ... कहा जाता है मुखोटा नृत्य के इस पर्व को तिब्बत ,नेपाल , चीन में भी मनाया जाता है... उत्तराखंड का सीमान्त जनपद पिथौरागढ़ सोर घाटी के नाम से भी जाना जाता है ...यहाँ पर वर्षा के मौसम की समाप्ति पर "भादों" माह के आगमन पर मनाये जाने वाला यह उत्सव इस बार भी बीते दिनों कुमौड़ गाव में धूम धाम के साथ मनाया गया...इस उत्सव में ग्रामीण लोग बड़े बड़े मुखोटे पहनकर पात्रो के अनुरूप अभिनय करते है.....
कृषि परिवेश से जुड़े इस उत्सव में ग्रामीण परिवेश का सुंदर चित्रण होता है......इस उत्सव में मुख्य पात्र नंदी बैल , ढेला फोड़ने वाली महिलाए, हिरन, चीतल, हुक्का चिलम पीते लोग, धान की बुवाई करने वाली महिलाए है ....
कुमौड़ गाव की हिलजात्रा का मुख्य आकर्षण "लखिया भूत " होता है... इस भूत को "लटेश्वर महादेव" के नाम से भी जानते है॥ मान्यता है यह लखिया भूत भगवान् भोलेनाथ का १२वा गण है ... कहा जाता है इसको प्रसन्न करने से गाव में सुख समृधि आती है... हिलजात्रा का मुख्य आकर्षण लखिया भूत उत्सव में सबके सामने उत्सव के समापन में लाया जाता है... जिसको २ गण रस्सी से खीचते है...यह बहुत देर तक मैदान में घूमता है ..... माना जाता है यह लखिया भूत क्रोध का प्रतिरूप है...... जब यह मैदान में आता है तो सभी लोक इसकी फूलो और अक्षत की बौछारों से उसका हार्दिक अभिनन्दन करते है...इस दौरान सभी शिव जी के १२ वे गण से आर्शीवाद लेते है...कहते है इस भूत के प्रसन्न रहने से गाव में फसल का उत्पादन अधिक होता है ...
कुमौड़ वार्ड के पूर्व सभासद गोविन्द सिंह महर कहते है यह हिलजात्रा पर्व मुख्य रूप से नेपाल की देन है... जनश्रुतियों के अनुसारकुमौड़ गाव की "महर जातियों की बहादुरी के चर्चे प्राचीन काल में पड़ोसी नेपाल के दरबार में सर चदकर बोला करते थे ... इन वीरो की वीरता को सलाम करते हुए गाव वालो को यह उत्सव उपहार स्वरूप दिया गया..... तभी से इसको मनाने की परम्परा चली आ रही है ..... आज भी यह उत्सव उल्लास के साथ मनाया जाता है......