Thursday, April 23, 2015

चीन की शातिर चालबाजी और जिनपिंग की पाक यात्रा



जिस समय भारत के प्रधानसेवक कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर के साथ गलबहियां कर मेक इन इंडिया और स्किल्ड इंडिया बनाने की बातें कर रहे थे ठीक उसी समय चीन के राष्ट्रपति शी शिनपिंग अपनी पाकिस्तान की यात्रा का खाका खींचने में लगे हुए थे  और संयोग देखिये मोदी की कनाडा से वापसी के ठीक बाद शिनपिंग ने डेली टाइम्स को दिए गए  इंटरव्यू में पाकिस्तान को अपना भाई बताकर चीन पाकिस्तान की गहरी दोस्ती के निहितार्थो को एक बार फिर से उजागर कर दिया है | चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की दो दिवसीय पाकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच हुए समझौतों को महज आर्थिक हितों से जोड़ना सही नहीं है इसमें दक्षिण एशिया में चीन की बढ़ती सामरिक विस्तारवाद की मंशा भी साफ देखी जा सकती है। चीन और पाकिस्तान की यह दोस्ती नई नहीं है |  पुराने पन्नो को टटोलें तो दोस्ती का यह सिलसला उस दौर से चल रहा है जब नेहरु के  हिंदी चीनी भाई भाई के दावो की हवा निकालकर चीन ने भारत पर युद्ध कर दिया था और  पडोसी पकिस्तान को भारत के खिलाफ लड़ने के लिए ना केवल उकसाया बल्कि अपनी हर इमदाद से पाकिस्तान को ही लाभ पहुचाया और अब पाकिस्तान के हालिया दौरे में पाकिस्तान की ही  पीठ को फिर से  थपथपाकर जिनपिंग ने अपनी शातिर चालबाजियों से भारत को झटका देने का काम किया है | 

 चीन एक लम्बे अरसे से ही  पाकिस्तानी सरकार और सेना को को मदद करता आया है।  अपनी हाल की  यात्रा में जिनपिंग ने पाकिस्तान को चीन का भरोसेमंद दोस्त बताकर भारत की चिंताओं को बढाने के साथ ही उसकी अर्थव्यवस्था की माली हालत सुधारने के लिए कई दूरगामी परियोजनाओ का जो खाका खींचने का काम किया है उससे भारत चीन रिश्तों में तल्खी आने की संभावना बढ़ी है | पाक की संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पाक चीन के रिश्ते आपसी विश्वास  और सहयोग की बुनियाद पर टिके हुए हैं | इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच तकरीबन 50 से ज्यादा  समझौते हुए हैं जिनके तहत चीन वहां 46 अरब डॉलर का भारी भरकम निवेश करने वाला है। इनमें से अधिकांश समझौते दोनों देशों के बीच 3,000 किलोमीटर लंबा आर्थिक गलियारा बनाने से जुड़े हुए हैं  जो चीन के शिनजियांग प्रांत को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ेगा जिससे चीन की पहुँच सीधे अरब सागर तक हो जायेगी | यह आर्थिक गलियारा चीन के सुदूर पश्चिमी इलाके को अरब सागर में पाक के दक्षिण पश्चिमी ग्वादर बंदरगाह तक न केवल जोड़ेगा बल्कि इससे चीन की धमक पाक अधिकृत कश्मीर तक भी बढ़ने की प्रबल संभावनाएं दिखाई दे रही हैं जिसके तहत सड़क , रेल बिजली और पाइप लाइन  और उर्जा जैसे कई प्रोजेक्ट के चकाचौंध तले चीन अपनी विस्तारवादी नीति को अमली जामा पहनायेगा और उसके सीधे निशाने पर भारत होगा | इससे पश्चिम एशिया के तेल आपूर्तिकर्ता देशों से चीन की दूरी 12 हजार किलोमीटर तक कम हो जाएगी। लेकिन  भारत के लिए चिंता की बात यह है कि यह प्रस्तावित गलियारा भविष्य में पाकिस्तान के लिए फायदे का सौदा बन सकता है | इसके जरिये पाकिस्तान ना केवल भारत पर सीधे नजर रख सकता है बल्कि सीमा पार से अपनी आतंकी गतिविधियों को नया रंग भी दे सकता है लिहाजा भारत की चिंताएं बढ़नी लाजमी हैं | इससे सड़क, रेलवे व पाइप लाइन के जरिये चीन खनिज तेल और अन्य सामग्री सीधे चीन तक ले जा सकेगा |  

अब असल संकट तो ग्वादर बंदरगाह को लेकर उभर रहा है जिसका निर्माण करने के लिए चीन और पाकिस्तान  का याराना पूरी दुनिया के सामने उजागर हो गया है | चीन की योजना है कि मध्य पूर्व से आने वाला तेल पहले ग्वादर बंदरगाह तक और फिर वहां से प्रस्तावित रास्ते से सड़क और रेल मार्ग से  सीमा तक पहुंचाया जा सके |  चीनी पैसे से ग्वादर बंदरगाह का पहला चरण 2006 में पूरा हो गया था लेकिन चीन ने ग्वादर को फिर अपना तुरूप का इक्का विस्तारवादी रणनीति के लिए बनाने  का फ़ैसला किया है | इसका फायदा यह होगा कि चीन खाड़ी क्षेत्र, अफ़्रीका, यूरोप और दुनिया के हिस्सों से आसानी से जुड़ जाएगा और भविष्य में यहाँ पैर जमाने से यह  इलाका चीन की नौसेना के लिए एक अड्डा बन जाए और  चीन पाकिस्तानी नौसेना के साथ मिलकर यहाँ से भारत विरोधी गतिविधियों पर काम करे | 

भारत की घेराबंदी के लिए चीन  श्रीलंका में भी एक बंदरगाह की बड़ी परियोजना में निवेश कर हिंद महासागर में भारत की घेराबंदी की शातिर चालबाजी कर चुका है।   सिरिसेना सरकार के आने और प्रधानमंत्री मोदी की बीते कुछ समय पहले हुई लंका की यात्रा  के बाद से इस  योजना  की रफ़्तार सुस्त हो गई है  लेकिन  अरब सागर से लेकर हिंद महासागर तक भारत की घेराबंदी की हर चाल में भारत ही घिर रहा है |  चीन की मंशा अब पूरी दुनिया पर राज करने और अमरीकी वर्चस्व को तोड़कर पूरी दुनिया में चीन के उत्पाद को पहुचाने की है जिसके जरिये वह समुद्री मार्गो से लेकर पड़ोसियों को जल और थल जैसे स्थानों पर घेरकर अपना नया गलियारा पूरी दुनिया के लिए खोल रहा है और बाद दुनिया पर राज करने की उसकी मंशा अब किसी से छिपी नहीं है। इससे उसके आर्थिक हित तो जुड़े हैं साथ ही  वह इस क्षेत्र में अपना दबदबा आर्थिक  और सामरिक ताकत के जरिये भी भी कायम करना चाहता है। जिनपिंग ने अपनी पाकिस्तान यात्रा में इस बात को कहा चीनी गणराज्य की स्थापना के बाद से ही पाक उसके सुख दुःख का साथी रहा है | पाक ने उस समय भी चीन का साथ नहीं छोड़ा जब वह विश्व मंच पर अलग थलग हो गया था | उन्होंने मुस्लिम बाहुल्य अशांत शिजियांग प्रान्त में अलगाववादियों पर कारवाही करने के लिए पाकिस्तान की तारीफों के पुल बांधे हैं और इस बात को दोहराया है भविष्य में भी दोनों देशो को एक दूसरे के मूलभूत हितों को सहयोग देना चाहिए | 

पाक की संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लडाई में पाक के प्रयासों और कुर्बानियों  की सराहना कर भारत की चिंताओं को बढाने का काम किया है | यह  तारीफों  के पुल ऐसे समय में बांधे गए हैं जब भारत पाक  पर सीमा पार से आतंकी घटनाओं को रोकने के लिए दबाव डाल रहा है | पाक की तारीफों के पुल जिनपिंग ने ऐसे समय में बांधे हैं जब 2008 के मुंबई हमलों के मास्टर माइंड जकी उर रहमान लखवी को जमानत पर रिहा किये जाने को लेकर भारत पाकिस्तान संबंधो में गहरी नाराजगी  साफ़ देखी जा सकती है |   इस दौरे के बाद चीन ने निवेश और आर्थिक मदद के मामले में अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है |  चीन  पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर मूल्य की आठ पनडुब्बियां भी देगा और इसके बाद पाकिस्तान की पनडुब्बियों का बेड़ा दोगुना हो जाएगा |  चीन ने खैबर पख्तूनख्वा में एक पनबिजली परियोजना लगाने के लिए वित्तीय समझौते को अंतिम रूप दे दिया है और पाकिस्तान के नियंत्रण वाले जम्मू-कश्मीर में भी एक परियोजना लगाने पर विचार किया जा रहा है |  चीन की योजना है कि शिंजियांग से पाकिस्तान के नियंत्रण वाले जम्मू-कश्मीर होते हुए ग्वादर बंदरगाह तक एक  आर्थिक गलियारा तैयार किया जाए ताकि वह स्ट्रेट ऑफ मलक्का वाला समुद्री रास्ता लेने से बच जाये |  हिंद महासागर में भारत की बढ़ती भूमिका पर अंकुश लगाने और एशिया  में अपना वर्चस्व स्थापित करने की यह चीनी योजना निश्चय ही भारत के लिए काफी बड़ी चुनौती पेश कर सकती है | दोनों देशो के बीच द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब तक पहुचाने को लेकर सहमति बनी है |  मई माह  मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन की यात्रा पर जा रहे हैं |  वहां उन्हें चीन सरकार को भारत के  सीमा पार विवाद और चीन की शातिर चालबाजियों और घुसपैठ की आशंकाओं से अवगत कराना होगा | देखना होगा मोदी अपनी अपनी विदेश नीति की नई लीक पर चलते हुए किस तरह चीन को इस दौर में साधते हैं जहाँ सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे | बहुत हद तक मोदी के प्रस्तावित चीन दौरे का इंताजर हर किसी को है क्युकि इस दौरे के बाद ही भारत का चीन को लेकर रुख ना केवल साफ होगा | लेकिन जो भी हो हाल में अपने दौरे में पाकिस्तान के कसीदे पढ़कर शी जिनपिंग ने अपनी शातिर चालबाजियो को उजागर ही नहीं किया है बल्कि भारत को भी इस बात के लिए सचेत किया है कि पाकिस्तान के साथ उसके मजबूत रिश्ते  अतीत में भी थे आज भी हैं और शायद आने वाले कई वर्षों  तक बने रहे | भारत इन संकेतों को जितना जल्दी डिकोड कर ले उसी में इसकी भलाई है |