

आखिरकार उत्तराखंड से मुख्यमंत्री बी सी खंडूरी की विदाई हो गई... लंबे समय से उनको हटाने की सुगबुगाहट यू तो बहुत पहले से चल रही थी परन्तु हाई कमान उनको हटाये जाने के सम्बन्ध में पशोपेश में था ... इस बार लोक सभा की पाँच सीट गवाने के बाद उत्तराखंड में खंडूरी के ख़िलाफ़ माहौल तैयार हो गया था परन्तु भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बैठक का हवाला देकर हाई कमान इस मसले को लगातार टालता रहा ... भुवन चंद्र खंडूरी के इस्तीफे के बाद उत्तराखंड में नए मुख्यमंत्री के तौर पर स्वास्थ्य मंत्री "रमेश पोखरियाल "निशंक" की ताजपोशी कर दी गई है ... दिल्ली में काफ़ी माथा पच्चीसी के बाद आला कमान ने खंडूरी के चहेते "निशंक "का दाव खेलकर खंडूरी के धुर विरोधी भगत सिंह कोश्यारी को पस्त कर दिया ... राज्य गठन के सादे आठ वर्ष से अधिक के कार्यकाल में भाजपा के तीन मुख्यमंत्री सी ऍम की कुर्सी संभाल चुके है ॥ "निशंक "इस कुर्सी को संभालने वाले प्रदेश के पाँचवे और भाजपा के चौथे मुख्यमंत्री है...
"निशंक" की ताजपोशी के बाद भाजपा हाई कमान ने निश्चित ही चैन की साँस ली है ......उत्तराखंड में खंडूरी को मुख्यमंत्री बनाने की माग को वहां के विधायक और कुछ स्थानीय नेता नही पचा पा रहे थे... इस कारण खंडूरी की ताज पोशी पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी सरीखे नेताओ को कड़ी आपत्ति होने लगी थी जिस कारण दो दर्जन विधायको को उन्होंने अपने पाले में लाने की कोशिसो को शुरू कर दिया था...
यह विधायक उस समय कोश्यारी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे थे परन्तु भाजपा का शीर्ष नेतृत्व खंडूरी को राज्य का सी ऍम बनाने का मन चुनावो से पहले ही बना चुका था.... इसी कारण तत्कालीन समय में कोश्यारी के पास बड़े पैमाने पर विधायको के समर्थन के बावजूद खंडूरी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया.... उस समय से लग गया था खंडूरी को कोश्यारी नही पचा पायेंगे और भविष्य में उनके लिए बहुत मुश्किल खड़ी करेंगे .... राजनीतिक प्रेक्षकों का यह अनुमान आज सोलह आने सच साबित हुआ है.....बीते ढाई सालो में कोश्यारी की सी ऍम बनने की चाहत कम नही हुई जिसके चलते खंडूरी की राज्य में कम दिलचस्पी रही...
दरअसल उत्तराखंड जैसे राज्य में खंडूरी को कमान सोपने की मुख्य वजह उनकी ईमानदार और कुशल प्रशासक की छवि रही ॥ साथ में एन डी ऐ सरकार के दौर में केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री के तौर पर खंडूरी ने अपने कार्यो के द्बारा खासी वाह वाही बटोरी थी जिस कारण उन पर अटल , मुरली मनोहर , आडवानी जैसे नेताओ का शुरू से वरदहस्त रहा...... उनकी बेहतर प्रशासकीय एबिलिटी के चलते उनको केन्द्र की राजनीती से राज्य में लाया गया...इसके चलते तिवारी सरकार के बाद राज्य के दूसरे आम चुनाव में खंडूरी को चुनाव प्रचार के दौरान निकाले जाने वाली परिवर्तन यात्राओ में आगे किया जाने लगा.... पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निशाने पर राज्य में फौजियों की बड़ी तादात भी थी जिस कारण खंडूरी को आगे कर राज्य के फौजी वोटरों के वोट अपने पाले में लाये जा सकते थे ...भाजपा को इस चुनाव में सफलता मिली... कांग्रेस की करारी हार हुई॥ भाजपा ने कुछ निर्दलियों और यू के डी को अपने साथ लेकर एक बडा संख्या बल अपने साथ कर लिया ... मुख्यमंत्री पद पर खंडूरी की ताजपोशी हाई कमान के वरदहस्त के चलते की गई जिसको उनके विरोधी शुरू से नही पचा पाये...इसी कारण वह खंडूरी की कार्य शेली पर नजर रखते रहे..
मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने के बाद खंडूरी के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह हुई ६ महीने के अन्दर कहाँ से चुनाव जाए...खंडूरी ने ऐसा दाव चल दिया विरोधी चारो खाने चित हो गए... जनरल खंडूरी ने कांग्रेस के रावत से हाथ मिला कर उनकी सीट धुमाकोट से चुनाव लड़ा वहां जीत दर्ज की... इसके बाद खंडूरी ने अपने दौरे शुरू किए ॥ सरकार आपके द्वार शुरू हुआ .... पहली बार कोई मुख्यमंत्री जनता के द्वारे आया॥ इससे लोगो में आस जगी ... पर विरोधी खंडूरी को नही जान पाये ॥ खंडूरी ने सभी मलाईदार मंत्रालय अपने पास रखे और कांग्रेस के पूर्व मुखिया तिवारी की तरह लाल बत्तिया बाटने में कंजूसी दिखाई....
भाजपा के एक विधायक की माने तो खंडूरी कोई भी काम इमानदारी से किया करते थे ... फाईलो में विधायको की सहमती के बाद भी उनका दखल बना रहता था जिस कारण भाजपा के तमाम मंत्री संतरी उनके आस पास फटकने से कतराया करते थे...आलम यह था खंडूरी के राज में अफसरशाही खौफ खाती थी ... खंडूरी के विरोधी गुट की अगुवाई कर रहे भगत सिंह कोश्यारी को उनके विरोध के लिए कोई न कोई ठोस बहाना तो चाहिय्रे था लिहाजा वह अपने साथ विधायको की एक बड़ी टोली साथ लेकर दिल्ली के बार बार चक्कर काटने लगे ॥ कोश्यारी ने अपने समर्थको को साथ लेकर ऐसा माहौल बनाया खंडूरी राज्य में ताना शाही दिखा रहे है.... मंत्रियो से मिलने का कोई समय खंडूरी के पास नही है ...मुख्यमंत्री से मिलने को जब मंत्री को कई बार अनुनय विनय करनी पड़ती है तो आम आदमी का क्या हाल होगा ऐसा समझा जा सकता है? अगर यही हाल रहा तो राज्य में भाजपा के विधायक मुह दिखाने लायक नही रह जायेंगे............

उस समय हाई कमान ने विधायको को समझ बूझ के साथ मन लिया॥ खंडूरी से भी कहा आप सभी को साथ लेकर चले..पर असंतोष का लावा जो मार्च २००७ के समय खंडूरी की ताजपोशी के समय बनकर तैयार हुआ था वह तो सुलगता ही रहा ॥ खंडूरी राज्य का विकास अपने विजन के अनुसार चाहते थे अतः उन्होंने अपने हिसाब से चलना उचित समझा .. खंडूरी के विरोधी उनके हर फेसले पर अंगुली उठाया करते थे ॥ खंडूरी के करीबी "प्रभात कुमार सारंगी" भाजपा के कुछ विधायको की गले की फाँस बन गए..हर काम में सारंगी के अनावश्यक दखल को यह विधायक पसंद नही करते थे जिस कारण सारंगी को बहाना बनाकर कुछ लोगो ने खंडूरी पर निशाना साधने की कोशिसे हाई कमान के सामने की ॥ पर हाई कमान ने इस पर खंडूरी की अच्छी से क्लास ले डाली...जिसके बाद खंडूरी ने सारंगी के अधिकारों में कटौती शुरू कर दी ॥ इसके बाद भी कोश्यारी समर्थक चुप नही बैठे ॥ मानो उन्होंने खंडूरी को सबक सिखाने की पूरी तैयारिया ही कर ली थी....

फिर क्या था अगस्त २००८ में कोश्यारी के साथ उनके समर्थक फिर दिल्ली आ पहुचे... दो दर्जन विधायको ने यहाँ खंडूरी के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया..कोश्यारी विधायक दिल्ली में बड़ा चदाकर बातें पेश किया करते थे..एक सूत्र की माने दिल्ली में खंडूरी को किसी तानाशाह की तरह से पेश किया जाता था...परन्तु हाई कमान को खंडूरी पर पूरा भरोसा था लिहाजा उसने पंचायत चुनाव और लोक सभा चुनाव तक मामला शांत करने की बात की..हाई कमान के फिर से दखल के बाद सभी एकजुट होकर इन चुनावो की तैयारी में जुट गए..इन चुनावो में खंडूरी के नेतृत्व में पार्टी ने धमाकेदार जीत दर्ज की..पार्टी का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा...खंडूरी के नेतृत्व में पार्टी एक के बाद एक चुनाव जीतती रही ॥
इस जीत के बाद खंडूरी मजबूत हो गए...पर विरोधी कहाँ मानने वाले थे वह तो मानो खंडूरी को नेश्तानाबूद करने की ठान ही चुके थे..निकाय चुनाव के बाद फिर से खंडूरी समर्थक विधायको ने दिल्ली में खंडूरी हटाओ का मोर्चा खोल दिया..इस बार जनरल की फौजी स्टाइल निशाने पर रही..खंडूरी विरोधियो ने कहा जनरल सबको समय नही दे पाते है ..उससे मिलने के लिए बड़ी मिन्नत करनी पड़ती है..हाई कमान इस बार सही नब्ज पकड़ने में कामयाब हुआ ..उसने राज्य की राजनीति से "कोश्यारी" की छुट्टी करवा दी और उनको राज्य सभा भेज दिया..उनसे "कपकोट" का इस्तीफा दिलवाया गया॥ कोश्यारी के राज्य सभा में जाने के बाद खंडूरी ने रहत की साँस ली..लेकिन उसके कुछ समय बाद खंडूरी की असली परीक्षा शुरू हुई ...वह थी १५ वी लोक सभा का चुनाव जहाँ पर उनकी प्रतिष्ठा दाव पर लगी थी..इस बार खंडूरी की किस्मत साथ नही रही.....इस बार जैसे ही चुनाव परिणाम सामने आए वैसे ही दून में खंडूरी हटाओ मुहीम फिर से कुलाचे मारने लगी.....
१५ वी लोक सभा में तो पानी पूरी तरह से सर के ऊपर बह गया... भाजपा की पूरी ५ सीट पर करारी हार हो गई... भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बची सिंह रावत जहाँ नैनीताल सीट हार गए वही पौडी संसदीय सीट से खंडूरी हार गए..यहाँ यह बताते चले पौडी गडवाल खंडूरी का गड़ रहा है॥ उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनने से पहले वह इस सीट का प्रतिनिधित्व करते आ रहे है..सी ऍम बनने के बाद १४ वी लोक सभा में यह सीट खली हो गई थी जिसे जीतने में टी पी एस रावात कामयाब हुए थे... लेकिन इस बार यह सीट कांग्रेस के खाते में गई है ॥ सतपाल महाराज यहाँ से सांसद निर्वाचित हुए है..वह पूर्व में केन्द्रीय रेल राज्य मंत्री रह चुके है॥
इस हार ने खंडूरी हटाओ आंधी को हवा देनी शुरू कर दी... चुनाव परिणामो के बाद खंडूरी ने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेने की बात कही और राजनाथ को अपना इस्तीफा भी भेज दिया..पर राजनाथ ने इसको मंजूर नही किया..इसी समय से राज्य में उनके विरोधी कोश्यारी फिर से सक्रिय हो गए..उनको यकीन हो गया इस बार खंडूरी का सिंहासन खतरे में है॥ इसी बीच यशवंत सिन्हा की ख़बर आई.... इसी तर्ज पर कोश्यारी ने अपना ब्रह्मास्त्र चला दिया ॥ उन्होंने राज्य सभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया..कोश्यारी ने अपने इस्तीफे में कहा अब वह राज्य में पार्टी संगठन के लिए काम करेंगे जिससे २०१२ के चुनाव में पार्टी मजबूत हो सकेगी..कोश्यारी के इस कदम की भनक लगते ही हाई कमान के हाथ पाँव फूल गए..सरकार पर खतरा मडराने लगा... बताया जाता है इस बार भी कोश्यारी के साथ ८ विधायको ने दिल्ली में डेरा डाल दिया॥
आनन फानन में राजनाथ ने कोश्यारी को समझा लिया..उनसे कहा गया उत्तराखंड पर बात रास्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक के बाद बात होगी..कोश्यारी की सी ऍम बनने की लालसा फिर से जग गई...रास्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक के बाद खंडूरी से इस्तीफा ले लिया गया..नए नेता की ताजपोशी के लिए माथा पच्चीसी शुरू हो गई.. हाई कमान ने इस मसले पर खंडूरी की राय को भी सुना..अपने इस्तीफे के बाद खंडूरी ने इस बात को उठाया कोश्यारी ने अपने दायित्वों का निर्वहन सही से नही किया... उनके पास चुनाव संचालन समिति की कमान थी लेकिन उन्होंने पार्टी प्रत्याशियों के लिए काम नही किया..अतः विरोधियो को किसी भी सूरत में पुरस्कृत नही किया जाना चाहिए॥
हाई कमान के दिमाग में यह सभी बातें थी अतः उसने इस बार पहले से ही यह तय कर लिया राज्य में किसी को जबरन मुख्यमंत्री के रूप में नही थोपा जाना चाहिए....अतः यह तय हुआ विधायक अपनी सहमती के आधार पर अपने नेता का चयन करे....खंडूरी ,कोश्यारी भले ही मुख्यमंत्री की कुर्सी से बाहर हो गए लेकिन अपने नेता की ताजपोशी के लिए दोनों ने जोर आजमाईश शुरू कर दी ... जहाँ निशंक खंडूरी के चहेते थे वही कोश्यारी के चहेते प्रकाश पन्त का नाम मुख्यमत्री पद के लिए आगे किया गया..खंडूरी के साथी सभी २४ विध्यको ने गुप्त मतदान में निशंक का समर्थन किया.. प्रकाश पन्त सी ऍम बनने से रह गए॥
यहाँ यह बता दे इस कहानी में क्लाइमेक्स उस समय आया जब २४ विधायक खंडूरी को फिर से मुख्यमंत्री बनाने की बात करने लगे जिसे हाई कमान ने खारिज कर दिया..हाई कमान ने साफ़ कहा इस बार ना खंडूरी ना कोश्यारी .....
रही बात निशंक की तो उनकी राह भी आसान नही लगती..उत्तराखंड में निशंक के मुख्यमंत्री के रूप में कांटो का ताज पहना है॥ वह भी ऐसे दौर में जब राज्य में भाजपा विरोधी लहर परवान चढ़ रही है...उनकी राह में तमाम शूल है जिनसे निपटने की बड़ी चुनोती निशंक के सामने है...सभी को साथ लेकर चलना होगा ॥ अभी पार्टी दो खेमो में बट चुकी है.. डोरी में अगर एक बार गाँठ पड जाए तो विशवास की डोर को बरकरार रख पाना मुश्किल होता है ॥ उत्तराखंड में आजकल हर नेता अपने को पार्टी से ऊपर समझने लग गया है... अनुशासन रद्दी की टोकरी में चले गया है ..कोश्यारी की सी ऍम बनने की लालसा अभी भी खत्म नही हुई है॥
राज्य सभा से उनके इस्तीफे का ब्रह्मास्त्र खंडूरी की सी ऍम पद से भले ही विदाई करवा गया है परन्तु इस खेल में कोश्यारी की हार हुई है...खंडूरी के मुख्यमंत्री बनने से जो उमीदे यहाँ के जनमानस में बधी थी वह खत्म हो गई है..उत्तराखंड में आज नारायण दत्त तिवारी और खंडूरी जैसे विराट व्यक्तित्व का कोई नेता नही होने से राज्य में नेतृत्व का संकट उत्पन्न हो गया है ... राज्य में हड़तालों का दौर चल रहा है॥ बिजली पानी की बुनियादी सुविधा से लोग वंचित है ..साथ में सूखे की चपेट में पूरा राज्य इन दिनों है ॥ ऐसे विषम हालातो का सामना निशंक को करना है ॥
निशंक का मतलब होता है किसी से ना डरने वाला ॥ उनकी अग्नि परीक्षा तो अब है ...सभी विधायको को खुश करना है ... साथ में कई विधायको को लाल बत्ती भी देनी है ....संगठन को मजबूत करने की भी चुनोती है..जहाँ खंडूरी के राज्य में माफियाओ ,भ्रष्ट लोगो पर अंकुश लगा था वही देखना होगा क्या निशांत अपनी सरकार की पाक साफ़ छवि को बरकरार रख पाते है ..परिसीमन स्थायी राजधानी, विकल्प धारियों वाले मुद्दे आज भी जस के तस है..इन पर भाजपा का स्टैंड साफ़ नही है ॥ ऐसे में यू के डी के साथ चलना खतरे से कम नही है॥
निशंक को यह समझना होगा उनसे पहले कोश्यारी ,नित्यानंद स्वामी ने भी मझधार में सी ऍम रुपी कांटो का ताज पहना था॥ परन्तु जब वह चुनावो में उतरी तो जनता जनार्दन ने उनको किक आउट कर डाला था॥ ऐसे हालातो में निशंक को फूक फूक कर कदम रखने होंगे...निशंक के साथ प्लस पॉइंट यह है वह युवा है और पहले राज्य के वित्त मंत्री भी रह चुके है ॥ लेकिन यह नही भूलना चाहिए युवा होने के साथ अनुभव भी जरूरी है .... स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर निशंक का अब तक का रिपोर्ट कार्ड सामान्य ही रहा है ॥
कमान सँभालने के बाद निशंक के कहा है राज्य का चहुमुखी विकास करना उनकी प्राथमिकता में है ..उनको खंडूरी के "मोडल स्टेट " के सपने को पूरा करना है.. हाई प्रोफाइल ड्रामा ख़त्म हो गया है पर अभी यह कहना मुश्किल है सरकानिशंक र राज्य में अपना कार्यकाल पूरा कर लेगी....कोश्यारी समर्थक अभी निशंक की ताज पोशी के बाद चुप बैठ जायेंगे ऐसा कहना मुश्किल है...कोश्यारी आगे भी निशंक को घेरने में पीछे नही रहेंगे॥ उनका फंडा है" मत चूको चौहान"
राज्य में भाजपा अपने को बड़ा अनुशासित बताते नही थकती है लेकिन पिछले दिनों जिस तरह हर विधायक की सी ऍम और मंत्री पद की लालसा उजागर हुई उसने पार्टी की कमजोरियों को राज्य की जनता के सामने उजागर कर दिया है॥
निशंक की ताजपोशी के बाद जो लोग यह सोच रहे है उनके सी ऍम बनने के बाद जनरल खंडूरी चुप बैठेंगे तो वह ग़लत सोच रहे है... खंडूरी अब कोश्यारी को ठिकाने लगाकर ही दम लेंगे..बचे ढाई साल जनरल "फ्रंट फ़ुट" पर खेलेंगे॥ राजपाट जाने के बाद जनरल खामोश नही बैठेगा॥
असली खेल तो अब शुरू होगा जब "मनमोहन देसाई" के "देहरादून " वाले सेट पर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी की "एंट्री" "एन्ग्री यंग मैन" के तौर पर होगी...
जनरल जब मीडिया से मुखातिब हो रहे थे तो मुझे यह अक्स दिखाई दिया..कोश्यारी पर वार करते हुए जनरल ने कहा जहाँ लोक सभा चुनाव में कपकोट विधान सभा में भाजपा २००० वोट से आगे थी वही उप चुनाव में ७००० वोटो से जीती ... आख़िर ऐसा क्यों? यहाँ यह बता दे कपकोट कोश्यारी का इलाका है ..... बात साफ है इशारो इशारो में जनरल ने यह कह दिया हार के बाद उनको जबरन "बलि का बकरा" बनाया गया जबकि जनता में कोई नाराजगी नही थी तभी कपकोट में भाजपा उपचुनाव जीती अगर नाराजगी होती तो पार्टी यह चुनाव हार जाती...साफ है पार्टी के नेताओ ने खंडूरी को लोक सभा चुनावो में अंधेरे में रखा............