रविवार, 4 अक्तूबर 2009

चुफाल के हाथ उत्तराखंड भाजपा की कमान .........



लम्बी जद्दोजहद के बाद उत्तराखंड के नये प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर बिशन सिंह चुफाल की ताजपोशी कर दी गई ..वर्तमान में वह निशंक की सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद को संभाले हुए थे..जून में पांचो लोक सभा सीट गवाने के बाद जहाँ पार्टी हाई कमान ने खंडूरी की छुट्टी करवा दी थी वही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बची सिंह रावत को विकास नगर के उपचुनाव तक अभय दान दे दिया था ॥


अब विकास नगर के चुनाव परिणामो के आने के बाद बची सिंह रावत की भी कुर्सी सलामत नही रह पायी और उनको अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा...उत्तराखंड में इस बार के लोक सभा चुनावो में भाजपा का राज्य से पूरी तरह से सूपड़ा साफ़ हो गया था ... यहाँ तक की भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बची सिंह रावत भी अपनी नैनीताल सीट नही जीत पाये थे जिसके चलते उन पर भी इस्तीफे का दबाव लोक सभा चुनावो के ठीक बाद बनना शुरू हो गया था... पर उस समय पार्टी हाई कमान ने इस्तीफे के लिए कोई जल्दी नही दिखाई ...लेकिन विकास नगर के उप चुनाव के बाद पार्टी हाई कमान बची सिंह रावत की विदाई को लेकर आश्वस्त हो गया...




दरअसल उत्तराखंड के भाजपा के कई बड़े नेता खंडूरी के साथ बचदा से भी बुरी तरह से खार खाए हुए थे॥इसका कारण दोनों की घनिष्ट निकटता थी... यहाँ बताते चले दोनों वाजपेयी जी की सरकार में मंत्री रहे थे... जहाँ खंडूरी केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री थे वही बचदा विज्ञान प्रोद्योगिकी राज्य मंत्री ... उत्तराखंड में तिवारी सरकार के कार्यकाल के पूरा होने के बाद भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की पहली पसंद के रूप में जनरल खंडूरी उभरे थे...इसी कारण २००७ में उनके सर राज्य के मुख्यमंत्री पद का सेहरा बधा था.... उस समय विधायको का बहुमत भगत सिंह कोश्यारी के साथ होने के बाद भी खंडूरी को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिल गई..तभी से खंडूरी कोश्यारी की नजरो में खटकने लगे थे... खंडूरी की मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी के बाद पार्टी हाई कमान ने कोश्यारी के स्थान पर नये अध्यक्ष की खोज शुरू कर दी ...कोश्यारी इस पद पर अपने आदमी को बैठाना चाहते थे पर खंडूरी की आडवानी कैंप में मजबूत पकड़ के चलते कोश्यारी हाथ मलते रह गए॥


आखिरकार राज्य के अध्यक्ष पद पर खंडूरी बची सिंह रावत को ले आए... इसका एक कारण उनके साथ खंडूरी की अच्छी ट्यूनिंग तो था ही साथ ही दोनों केन्द्रीय स्तर के नेता थे॥ दूसरा लंबे समय से जिस संसदीय इलाके का बचदा प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे वह रिज़र्व हो गया था लिहाजा पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी बचदा के अनुभव का लाभ लेना चाहता था अतः उसने खंडूरी के कहने पर बचदा को राज्य की बागडोर सौप दी.........


बचदा के नेतृत्व में राज्य में भाजपा की गाडी सही से बडी ... इस दौरान पार्टी ने राज्य में एक के बाद एक चुनाव जीते... खंडूरी और बचदा के समय में सरकार और संगठन में बेहतर समन्वय देखा गया... पर दोनों की कार्य शैली को भगत सिंह कोश्यारी नही पचा पाये और दिल्ली जाकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने खंडूरी के बारे में दुष्प्रचार फैलाते रहे... पार्टी हाई कमान भी कभी निकाय चुनाव तो कभी पंचायत चुनावो का हवाला देकर अक्सर उनकी मांग को ठुकराता रहा.. दरअसल देहरादून की कोश्यारी वाली विधायको की एक लाबी ने खंडूरी को चलने ही नही दिया ... क्युकि कोश्यारी के विधायको के समर्थन को नजरअंदाज करते हुए खंडूरी राज्य के मुख्यमंत्री बना दिए गए...


साथ में जनरल ने कई भारी भरकम मंत्रालय अपने पास रखे जिस कारन राज्य के मंत्रियो की मन माकिफ मंत्रालय पाने की उम्मीद धराशायी हो गई.. राज्य के एक नए विधायक की माने तो राज्य की भाजपा सरकार में गुट बाजी बढाने में कोश्यारी जैसे नेताओ का हाथ रहा ... वह अपने को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते थे जिस कारन बार बार वह खंडूरी जी की सरकार को अस्थिर करते रहे...


कोश्यारी ने जब जब विधायको को लामबंद कर अपने पाले में लेकर हाई कमान के सामने खंडूरी हटाओ की मांगे रखी तब तब जनरल और ज्यादा मजबूत होते गए... इसी के चलते राज्य में निकाय ,पंचायत चुनावो में भाजपा ने खंडूरी के नेत्तृत्व में धमाकेदार जीते दर्ज की ....पर इन सब के बाद भी कोश्यारी के चेहरे पर खुशी नाम की चीज नही रही॥ भला रहती भी क्यों नही? राज्य में खंडूरी को सी ऍम बना दिया गया....


पहली बार राज्य में ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया गया जिसकी इमानदारी के चर्चे अटल बिहारी की सरकार के समय जोर शोर से हुआ करते थे...पर कोश्यारी के कुछ विधायको के पर खंडूरी ने छोटे मंत्रालय देकर कतर दिए..... यह सब उनको नागवार गुजरा और वह न्याय की फरियाद पाने कोश्यारी के पास पहुच जाया करते थे...


कोश्यारी कई बार राजनाथ और आडवाणी के यहाँ खंडूरी को हटाने की परेड विधायको को साथ लेकर किया करते थे ... पर हर बार पार्टी हाई कमान उनको आश्वाशन देकर मतभेदों को आपस में बैठकर सुलझाने की सलाह देता रहता था..बाद में जब बहुत हद हो गई तो पार्टी ने एक फोर्मुले के तहत कोश्यारी की राज्य की राजनीति से छुट्टी कर दी ..... इसी कारन पार्टी ने उनको उत्तराखंड की सक्रिय राजनीती से केन्द्र की राजनीती करने राज्य सभा भेज दिया पर इसके बाद भी कोश्यारी के बगावती तेवरों में कमी नही आई....


लोक सभा चुनाव में ५ सीट गवाने के बाद कोश्यारी ने फिर खंडूरी के ख़िलाफ़ अपना मोर्चा खोल दिया..इस बार तीर निशाने पर लग गया .... खंडूरी की ५ सीटो पर हार ने उनकी सी ऍम की कुर्सी से विदाई करवा दी....खंडूरी की विदाई के बाद कोश्यारी को आस थी वह राज्य के मुख्यमंत्री बन जायेंगे पर हाई कमान ने उनको इस बार लंगडी दे दी... ख़ुद खंडूरी ने इस बात को बताया कोश्यारी ने लोक सभा चुनावो में पार्टी के लिए काम नही किया जिस कारन विरोधियो को पुरस्कृत नही किया जाना चाहिए॥


कोश्यारी अपनी पसंद के प्रकाश पन्त को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे पर खंडूरी ने निशंक को आगे कर कोश्यारी को पस्त कर दिया ॥इसके बाद बची सिंह रावत की छुट्टी का माहौल बनना शुरू हो गया.... वह भी नैनीताल सीट नही जीत सके शायद पार्टी हाई कमान उनकी कपकोट के बाद विदाई का इच्छुक था ... पर कपकोट जीतने के बाद भी बचदा की विदाई नही हो पायी .... शायद उनके संभावित उत्तराधिकारी के नाम पर मुहर नही लग पायी ... तभी उनकी कुर्सी विकासनगर के चुनाव परिणाम आने के कुछ दिन तक सलामत रह गई....अब विकास नगर चुनाव जीतने के साथ ही खंडूरी के बाद लोक सभा में हार की गाज बचदा पर गिरी है ...


पार्टी ने उनके स्थान पर निशंक सरकार में केबिनेट मंत्री रहे बिशन सिंह चुफाल को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाया है...चुफाल के अध्यक्ष बनने के साथ ही पार्टी हाई कमान ने यह संदेश देने की कोशिश की है हार की जिम्मेदारी सामूहिक है ..गौरतलब है की कुछ दिनों पहले भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री खंडूरी ने जसवंत और शौरी के सुर में सुर मिलाते हुए यह बात कही थी की पार्टी में हार के लिए जिम्मेदारी तय नही की जाती ॥ यही नही खंडूरी द्बारा राजनाथ को लिखे गए उस पत्र की मीडिया में बड़ी चर्चा हुई थी जिसमे उन्होंने कहा था मुझसे हार के बाद जबरन इस्तीफा लिया गया ...


अब कम से कम चुफाल की ताजपोशी से यह साफ हुआ है पार्टी राज्य में 5 सीट हारने के बाद गंभीर है .... जिस तरीके से चुफाल की ताजपोशी हुई है उससे कोश्यारी कैंप को फिर से करारी हार मिली है ..यहाँ यह बताते चले कभी कोश्यारी के करीबी रहे चुफाल राज्य में खंडूरी की सरकार बन्ने वाले समय से खंडूरी के खासमखास रहे है ....इसकी एक बानगी उस समय देखने को मिली थी जब खंडूरी और कोश्यारी को मुख्यमंत्री बनाये जाने को लेकर २००७ में देहरादून के एक होटल में सिग्नेचर अभियान चला था तब बिशन सिंह चुफाल ने निशंक का साथ देकर खंडूरी को मुख्यमंत्री बनाये जाने की मांग रखी थी....


जब चुफाल के हाथ बागडोर सौपे जाने का समाचार मैंने सुना तो अपनी देहरादून वाली २ साल की याद ताजा हो गई तब हम भी देहरादून में सत्ता के लटके झटके देख रहे थे ..आज सोच रहा हूँ खंडूरी से यह गहरी निकटता बिशन सिंह चुफाल के लिए फायदे का सौदा बनकर उभरी है ..खंडूरी ने अपने मंत्रिमंडल विस्तार में चुफाल का हमेशा ध्यान रखा ॥ उनको हमेशा मलाईदार मंत्रालय दिए... चुफाल ने भी अपने कामो को बखूबी अंजाम दिया...खंडूरी के जाने के बाद भी निशंक ने चुफाल का ध्यान रखा ... तभी वन, पर्यावरण ,सहकारिता , ग्रामीण अभियंत्रण परिवहन जैसे मंत्रालय देकर चुफाल को अपना करीबी बनाये रखा ...इस बार पार्टी राज्य में ५ सीट बुरी तरह हार गई... हार का पोस्ट मार्टम तक नही किया गया .... हार का दोष खंडूरी को दे दिया गया ...किसी ने इस बात पर मंथन नही किया इस लोक सभा चुनाव में खंडूरी की केबिनेट के सारे मंत्रियो की विधान सभा में भाजपा बुरी तरह हारी ...सिवाय बिशन सिंह चुफाल की विधान सभा को छोड़कर अन्य जगह भाजपा को कांग्रेस के हाथो पटखनी मिली....हार के लिए जब जवाबदेही तय होती तो पार्टी आलाकमान ने खंडूरी, बचदा के साथ सारे मंत्रियो की भी क्लास लेनी चाहिए थी पर उन्होंने खंडूरी और बचदा को बलि का बकरा बना दिया...


चुफाल को बागडोर सोपने के पीछे हाई कमान की एक मंशा लोक सभा चुनावो में उनकी अपनी विधान सभा में भाजपा को मिली बम्पर बदत भी रही है......बिशन सिंह चुफाल की छवि सीधे सादे नेता की रही है ... चुफाल के राजनीतिक जीवन की शुरुवात ८० के जनान्दोलनों से हुई ॥ १९८३ में ग्राम प्रधान बने चुफाल 19८६ में डी डी हट के ब्लोक प्रमुख निर्वाचित हुए..इसके बाद १९८४ से १९९२ तक पिथोरागढ़ जिले में भाजपा जिला अध्यक्ष रहे ..१९९६ में पहली बार अविभाजित उत्तर प्रदेश में विधायक चुने गए... राज्य की नित्यानंद स्वामी सरकार में चुफाल कबीना मंत्री रहे ... यह सिलसिला २००२ में भी जारी रहा ... हाँ ,यह अलग बात है उस समय राज्य में पहले विधान सभा चुनावो में कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत से सत्ता हासिल की... जिसके चलते भाजपा को विपक्ष में बैठना पड़ा था....२००७ के चुनावो में कांग्रेस के नए चेहरे हेम पन्त को पटखनी देने के बाद चुफाल फिर से विधायक चुने गए...सरल स्वभाव के धनी चुफाल में सीधे आदमी के दर्शन होते है ..आधुनिक राजनीतिक तड़क भड़क और दिखावे से कोसो दूर रहने वाले चुफाल उत्तराखंड में भाजपा के युवा पोस्टर बॉय है.. शालीनता ,सरलता, सादगी ही शायद उनकी राजनीती का मूल मन्त्र है ॥


चुफाल की राजनीती को करीब से देखने का सौभाग्य मुझे मिला है...२००७ के चुनावो की याद आज भी जेहन में बनी है तब चुफाल गाव गाव वोट मांगने जाया करते थे ...तब उनकी विधान सभा से ताल्लुक रखने वाले बरला के अनिल कहा करते थे चुफाल की पकड़ गावो के चूल्हों तक है ... अभी जैसे ही उनके अध्यक्ष के रूप में शपथ ग्रहण करने की ख़बर आई तो अनिल की बात सोलह आने सच हो गई ....


कम से कम पार्टी हाई कमान को भी इस बात का एहसास हो गया चुफाल में लम्बी रेस का घोड़ा बन्ने की काबिलियत है ॥चुफाल को राज्य में कमान सौपकर भाजपा ने एक तीर से कई निशाने खेल दिए है ॥ इससे भगत सिंह कोश्यारी के समर्थको को जहाँ फिर से ठिकाने लगाने की कोशिस की गई है वही कुमाऊ गडवाल में संतुलन कायम करने की कोशिस की गई है ..पिछली बार खंडूरी जब सी ऍम थे तो ब्राह्मणहोने के साथ वह गडवाल से थे वही दूसरी तरफ़ बची सिंह रावत राजपूत थे जो कुमाऊ से ताल्लुक रखते थे .... इस बार भी ऐसा कुछ किया गया है .. निशंक गडवाल से है तो चुफाल कुमाऊ से ..भाजपा ने २०१२ के चुनावो की तैयारी शुरू कर दी है ॥


चुफाल के हाथ भाजपा की बागडोर है....उनको सभी को साथ लेकर चलना है .... साथ ही गुटों में विभाजित भाजपा को एकजुट करना है ... खंडूरी की कुर्सी खाली होने के बाद भी कोश्यारी के समर्थक चुप बैठ जायेंगे ऐसी उम्मीद करना बेमानी है ...क्युकि कोश्यारी की मुख्यमंत्री बन्ने की लालसा कब जाग जाए यह कह पाना मुश्किल है ? साथ ही विकासनगर में भाजपा के जीत जाने के बाद खंडूरी चुप बैठ जायेंगे ऐसी उम्मीद करना भी बेमानी होगी...ऐसे में चुफाल को फूक फूक कर अभी से कदम रखने होंगे....चुफाल के सामने जनता तक पहुचने की भी चुनोती है ...


मुख्यमंत्री आम कार्यकर्त्ता और मंत्रियो के लिए उपलब्ध रहे इसका उनको ध्यान रखना होगा....साथ ही सरकार और संगठन को साथ लेकर चलना होगा तभी उत्तराखंड में २०१२ में कमल खिल सकता है..नही तो अभी के हालत देखकर नही लगता पार्टी खंडूरी के जाने के बाद बहुत अच्छी स्थिति में है...निशंक ने विकास नगर सीट भाजपा प्रत्याशी कुलदीप को जीता तो दी है लेकिन जीत का अन्तर बहुत मामूली रहा ..लोक सभा की पाँच सीट गवाने के बाद भाजपा ने यह सीट जीतकर निशंक सरकार की नाक बचाई है ...


रही बात चुफाल की तो उनको निशंक के साथ मिलकर काम करना होगा....राज्य की जनता में इस समय भाजपा सरकार को लेकर आक्रोश चरम पर है ॥ जनता आए दिन हड़ताल कर रही है ॥ सड़क , बिजली, पानी जैसी बुनियादी समस्यायें जस की तस है.... जिन उद्देश्यों को लेकर राज्य की लड़ाई लड़ी गई थी वह पूरे नही हो पाये है.... खंडूरी के जाने के बाद कानून व्यवस्था की स्थिति ख़राब हो गई है... भू माफियाओ की सक्रियता पैर पसार रही है॥ करप्शन चरम पर है ...


बिना रिश्वत के कोई काम नही बनता ... पहाड़ से पलायन थमने का नाम नही ले रहा ..ऐसे विषम हालातो में भाजपा की हालत अच्छी नही कही जा सकती ..चुफाल को इन सब विषम परिस्थितियों से जूझना है ...उनको अगर २०१२ में फतह हासिल करनी है तो निशंक के साथ कदम से कदम मिलकर चलना होगा...नही तो राज्य में भाजपा की दुर्गति को कोई नही रोक पायेगा ...देखना होगा चुफाल इस बार केन्द्रीय नेतृत्व की उम्मीदों में कितना खरा उतर पाते है ?



12 टिप्‍पणियां:

गजेन्द्र सिंह भाटी (बीकानेर) ने कहा…

good goos.
keep it up..

send it for some newspaper so that more and more people can read it.


your
Gajendra Singh Bhati

Amit K Sagar ने कहा…

बहुत अच्छा लिखा है आपने जारे रहें.

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मैं चाहता हूँ कि लायक लोग अपनी शक्ति को अलग अलग रखकर प्रयोग न करके अगर इक जगह संगठित हो जाएँ तो हम यकीनन सब कुछ कर सकते हैं!
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हिंदी ब्लोग्स में पहली बार Friends With Benefits - रिश्तों की एक नई तान (FWB) [बहस] [उल्टा तीर]

Babli ने कहा…

वाह बहुत बढ़िया लिखा है आपने! आपकी लेखनी को सलाम! इस बेहतरीन पोस्ट के लिए बधाई!

meetu ने कहा…

आपकी लिखने की यह अदा मुझको खासी भाति है .... खबर को जिस साफगोई के साथ आप प्रस्तुत करते है वह वाकई काबीले तारीफ़ है .....| सच कहू तो राजनीती की मुझको उतनी समझ नहीं थी पर आपसे जुड़ने के बाद आपके ब्लॉग से भरपूर जानकारी मिल जाती है ...आपसे निवेदन है हर माह अधिक से अधिक पोस्ट लिखने की कोशिस करे जिसमे देश विदेश से सारे महत्वपूर्ण विषय मिल जाए .... जिससे प्रतियोगी परीक्षाओ की तैयारी करने वाले लोगो को घर बैठे जानकारी और विषय की गहरी समझ हो जाए.......................

akash kumar singh ने कहा…

उतरखंड की राजनीती को करीब से जानने का मौका मुझे आपकी कलम ने ही दिया.......इसके लिए मैं आपका शुक्रगुजार हूं.. आप यूं ही सफर जारी रखे ऐसी मेरी कामना है।

anubhav ने कहा…

hiiiiiiiii
thatz a nice article as ever !

I think you've good command over politics then why don't you try in this field ?

nice keep it up !

--Anubhav--

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

विस्तृत विवेचना.
तथ्यात्मक विश्लेषण.
इतनी विस्तृत रिपोर्ट तो समाचार पत्र भी हम तक नहीं पहुंचा पाते.
आपका हार्दिक आभार.

चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
www.cmgupta.blogspot.com

sandhyagupta ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
sandhyagupta ने कहा…

विस्तृत विवेचना.
तथ्यात्मक विश्लेषण.
इतनी विस्तृत रिपोर्ट तो समाचार पत्र भी हम तक नहीं पहुंचा पाते.

Chandra Mohan ji ki baat se sahmat hoon.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

उत्तराखंड की राजनीति हमेशा गरमा गरम रहती है ........ अच्छा लगा पढ़ कर आपका पोस्ट ........

अल्पना वर्मा ने कहा…

rajnitik vishyon पर aapki kalam बहुत khoob likhti है.

Babli ने कहा…

आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें!