सोमवार, 8 अप्रैल 2013

अलविदा ....आयरन लेडी



“मुझे थैचर की मृत्यु से गहरा दुःख पहुंचा है | हमने एक दूर द्रष्टा नेता खो दिया है’’  | ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने कुछ इन्ही शब्दों के साथ अपने प्रधानमंत्री को आखरी विदाई दी | बीते सोमवार को ब्रिटेन के हर नागरिक की आँखें नम हो गई जब उन्होंने अपने प्रिय नेता की मौत का समाचार सुना | अपने प्रिय नेता को खोने का गम कैसा होता है यह ब्रिटेन की इकलौती महिला प्रधानमंत्री रही मार्गेट थैचर की मृत्यु से समझा जा सकता है | ब्रिटेन की राजनीती में आयरन लेडी का जो मकाम थैचर ने अपने आसरे गढा उसको छू पाना किसी भी नेता के लिए भविष्य में आसान नहीं लगता |

 आयरन लेडी के नाम से मशहूर थैचर की समकालीन विश्व राजनीती पर पकड़ कॉ अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीसवी सदी की सबसे सशक्त शख्सियतो में उनका नाम उस दौर में शुमार था | अपनी राजनीतिक पारी में तीन बार जीत की हेट्रिक लगाने वाली थैचर ने १९७९ से १९९० तक के दौर में ब्रिटेन को ना केवल कुशल नेतृत्व प्रदान किया बल्कि उस दौर में कंजरवेटिव पार्टी की बिसात को अपने करिश्मे से नया आयाम दिया और सबसे लंबे वक्त तक ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बन इतिहास के पन्नों में अपने को अमर कर दिया | थैचर ने अपने अंदाज में जहाँ राजनीतिक लीक पर चलने का साहस दिखाया वहीँ तमाम कयासो को धता बताते हुए अपने विचारों और समझ बूझ के साथ राजनीती की रपटीली राहों में अपना रास्ता खुदबखुद तैयार किया और शायद यही वजह रही उनके सिद्धांतों को उस दौर में थैचरिज्म नाम दे दिया गया |

शुरुवात में थैचर की राजनीती में रूचि नहीं थी लेकिन १९५९ में संसद बनकर उन्होंने राजनीति के मिजाज को अपने अंदाज में ना केवल जिया बल्कि समझ बूझ से राजनीती की बिसात को बिछाया | १९७५ में जब पूर्व प्रधानमंत्री एडवर्ड हीथ को उनकी ही पार्टी ने पद से बेदखल कर दिया तब वह मजबूत नेता के तौर पर कंजरवेटिव पार्टी में उभर कर सबके सामने आई और उनका लोहा हर किसी को मानना पड़ा | यही वजह थी १९७९, १९८३ और १९८७ के चुनाव में ताबड़तोड़ जीत की हैट्रिक  बनवाकर थैचर ने अपने को ब्रिटेन के साथ ही विश्व की राजनीती में मजबूत नेता के तौर पर उभारा | सत्तर के दशक को कोई नहीं भूल सकता जब रूस की व्यापक आलोचना के मसले पर उनके द्वारा एक शानदार भाषण दिया गया जिसके चलते रूस ने उनको आयरन लेडी का खिताब देना पड़ा |

शीत युद्ध का दौर भी हर किसी के जेहन में बना है | उस समय पूरा विश्व दो गुटों में बट गया था | एक गुट का नेतृत्व अमेरिका कर रहा था तो सोवियत संघ भी उस दौर में सुधारों की प्रक्रिया से गुजर रहा था | ब्रिटेन उस दौर में अमेरिका का साथी बना | उस दौर में रीगन और जार्ज एच  बुश के साथ उनकी खूब जमी | थैचर ने अपने लंबे कार्यकाल में ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था ने नयी जान फूंकी और कई सरकारी योजनाओं का निजीकरण किया | उस दौर में भारत में जहाँ आर्थिक सुधारों की शुरुवात नरसिंह राव शासन में शुरू हुई तो वित्त मंत्री की कमान मनमोहन सिंह ने थामी थी तो वहीँ थैचर  ने ब्रिटेन में आर्थिक सुधारों का झंडा उठाकर अर्थव्यवस्था को नया आयाम दिया | थैचर के शासन में सोवियत संघ का विभाजन हुआ तब पूँजीवाद हावी हो गया और साम्यवाद का ग्राफ गिरने लगा | थैचर ने अपनी नीतियों के आसरे आर्थिक सुधार मुक्त अर्थव्यवस्था की शक्ल में ढालकर किये  और ब्रिटेन में पूँजीवाद को प्रधानता देने का काम किया | 

अस्सी के दशक में अर्जेंटीना के फाकलैंड आयलैंड में दखल के बाद कई सलाहकारों ने थैचर से कहा आप इस समस्या पर हाथ ना डालिए लेकिन थैचर ने अपने दिल की सुनी और इस समस्या को सुलझा लिया  और द्वीप हासिल किया | थैचर की गिनती उस दौर में रीगन से लेकर गौर्वाचौव सरीखे नेताओ के साथ अगर होती थी तो इसके पीछे उनकी राजनीतिक सूझ बूझ जिम्मेदार थी और शायद इसी सूझबूझ ने उन्हें उस दौर में ताकतवर और कद्दावर महिला प्रधानमंत्री के रूप में विश्व की राजनीती में चर्चित कर दिया | उनकी मृत्यु से ब्रिटेन और विश्व ने एक ऐसा महान नेता खो दिया है  जिसके मन में कुछ अलग करने का जज्बा था जिसकी भरपाई करना आसान  भी नहीं रहेगा | राजनीती के अखाड़े में ऐसे मुकाम बहुत कम नेता पा पाते हैं | सच कहें तो कुशल राजनेता वह है जो भीड़ की नब्ज पकड़ना जानता है  और थैचर की गिनती इसी श्रेणी में होती थी और यही चीज राजनीती में उनको सही मायनों में आयरन लेडी बनाती थी |



1 टिप्पणी:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जो चाहा वो पाया हमने,
हृदय लौह सा पाया हमने।