पीएम नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और डॉ.मोहन यादव की संकल्पशील सरकार मध्य प्रदेश में सहकारिता का स्वर्णिम अध्याय लिख रही है। यह विकास का ऐसा मॉडल है जो समावेशी, टिकाऊ और किसान-केंद्रित है। मोहन सरकार की सहकारिता नीतियाँ विकास का प्रगतिशील मॉडल प्रस्तुत कर रही हैं, जहाँ तकनीक, पारदर्शिता और जन-भागीदारी एक साथ काम कर रही हैं।
भारत में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने एक नया इतिहास रचा है। “सहकार से समृद्धि” के मंत्र को साकार करते हुए केंद्र और राज्य की यह साझेदारी किसानों, ग्रामीणों, युवाओं और छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मध्य प्रदेश में सहकारिता क्षेत्र अब केवल ऋण और कृषि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बहु-उद्देशीय विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक समावेशन का प्रमुख माध्यम बन रहा है। यह मॉडल देश अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायी है।
मोदी सरकार का दूरदर्शी विजन सहकारिता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कर इस क्षेत्र को नई ऊर्जा दी। केन्द्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में चल रहे सुधारों ने सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाया है। देश भर में लगभग 70,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों का कंप्यूटरीकरण, बहु-राज्य सहकारी समितियों का गठन और निर्यात के नए प्लेटफॉर्म किसानों को उचित मूल्य दिला रहे हैं।
अप्रैल 2025 में भोपाल में आयोजित सहकारिता सम्मेलन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और मध्य प्रदेश सहकारी डेयरी फेडरेशन के बीच महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए जिससे राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में में सहकारी डेयरी को बढ़ावा मिल रहा है। वर्तमान में केवल 17% गांवों में दूध संग्रहण व्यवस्था है, जिसे 83% तक विस्तारित करने का लक्ष्य पर मोहन नजर आ रहे हैं। इससे किसानों को दूध का बेहतर मूल्य मिलेगा और प्रसंस्करण क्षमता कई गुना बढ़ेगी।
सहकारिता से समृद्धि” बना मोहन सरकार का मंत्र
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहकारिता को राज्य की समृद्धि का मुख्य आधार बना रहे हैं। मोहन सरकार ने सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए अभूतपूर्व प्रयास किए हैं।“सहकारिता से समृद्धि” के मंत्र को आत्मसात करते हुए मोहन सरकार ने सहकारी संस्थाओं को किसानों, ग्रामीणों और युवाओं की आर्थिक उन्नति का प्रमुख माध्यम बनाया है। इस क्षेत्र में हुई उपलब्धियाँ न केवल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत दे रही हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी मिसाल बन रही हैं।
दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार गांव-गांव में प्राथमिक दूध उत्पादक समितियां स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। पीएम मोदी के विजन के अनुरूप बहु-उद्देश्यीय सहकारी समितियों का गठन किया जा रहा है जिसमें कृषि, डेयरी, उद्योग और सेवाएं शामिल हुई हैं जिससे सहकारिता के माध्यम से युवाओं को उद्यमिता और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम होगा। जल्द ही मोबाइल ऐप के जरिए ट्रांजेक्शन भी किया जा सकेगा।
पैक्स का पूर्ण कंप्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण
मोहन सरकार की एक बड़ी उपलब्धि सभी 4,536 प्राथमिक कृषि साख समितियोंका कंप्यूटरीकरण पूरा करना है। इससे मध्य प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। किसान कल्याण वर्ष में पहली बार प्रदेश के किसानों के चेहरे पर ख़ुशी दिखाई दे रही है। आज किसानों को घर बैठे सेवाएँ मिल रही हैं। मोबाइल ऐप के माध्यम से खेती में नवाचार हो रहे हैं और फसल के बारे में कई जानकारी मिल रही है। एक वर्ष में सवा लाख नए किसान क्रेडिट कार्ड स्वीकृत करने का निर्देश दिया गया है। 1102 नई दुग्ध समितियों का गठन कर 5562 दुग्ध समितियों तथा वित्तीय समावेशन के लिए 76 हजार सदस्यों के खाते जिला सहकारी बैंक में खोले गए हैं जिससे किसान सहकारिता की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
इसी तरह कमजोर सहकारी बैंकों को कई करोड़ रुपये की सहायता देकर सशक्त बनाया गया है। ढाई वर्षों में 18 कमजोर जिला बैंकों में से 6 की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। प्रदेश की सभी 4536 पैक्स को केंद्र प्रायोजित कंप्यूटराइजेशन योजना अंतर्गत कंप्यूटरीकृत कराया गया है। शत-प्रतिशत कंप्यूटराइजेशन से योजना क्रियान्वयन में प्रदेश देश में अग्रणी है।
दुग्ध क्रांति 2.0 और पशुपालन को बढ़ावा
मोहन सरकार सांची ब्रांड को बड़ा ब्रांड बनाने की दिशा में काम कर रही है। नई दुग्ध क्रांति के तहत दुग्ध सहकारिता समितियों को लगातार मजबूत किया जा रहा है। 1,102 नई समितियाँ और 5,562 दुग्ध समितियाँ स्थापित की गई हैं। किसानों और गौपालकों को बोनस देकर लाभ पहुँचाने की योजना है। सहकारी समितियों को पेट्रोल पंप, एग्रो-स्टोर आदि विविध व्यवसायों से जोड़ा जा रहा है। सहकारी ऑडिट में मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड के साथ प्रदेश के सहकारी बीज संघ ने एमओयू किया है जिससे 17 करोड़ रूपये का व्यवसाय और 844 पैक्स द्वारा सदस्यता प्राप्त हुई है। बीज उत्पादक सहकारी संस्थाओं के माध्यम से गत 2 वर्षों में 14 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का उत्पादन एवं विपणन हुआ है ।
सहकारिता में ग्रामीणों की सशक्त भागीदारी
सहकारिता को जन-आंदोलन का स्वरूप देते हुए युवाओं को इसमें भागीदारी दी जा रही है। एक तरफ जहां प्रदेश में ‘सारथी दीदी’ जैसी सेवाएँ शुरू की गई हैं वहीं स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण संपत्ति अधिकारों को मजबूत किया जा रहा है। इन उपलब्धियों से किसानों की आय बढ़ रही है, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और पीएम मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को गति मिल रही है। मोहन सरकार का विजन सहकारिता को पारदर्शी, तकनीकी रूप से सक्षम और लाभकारी बनाकर हर गांव को समृद्ध बनाना है।
सहकारिता से समृद्धि की ओर
मध्यप्रदेश में सहकारिता अब “परस्पर स्वावलंबन” का प्रतीक बन गई है। मोदी सरकार के राष्ट्रीय ढांचे और मोहन यादव सरकार की राज्य-स्तरीय ऊर्जा से सहकारिता क्षेत्र का परिदृश्य अब तेजी से बदल रहा है। किसान अब मध्यस्थों के चंगुल से मुक्त होकर सीधे बाजार से जुड़ रहे हैं, छोटे उद्यमी नई संभावनाएं तलाश रहे हैं और गांव आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
मोहन सरकार “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के मंत्र को सहकारिता के क्षेत्र में जीवंत कर रही है। सहकारिता से समृद्ध मध्य प्रदेश की यह यात्रा सशक्त मध्यप्रदेश और पीएम नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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