Thursday, 19 February 2026

GYANII (ज्ञानी ) मिशन से सजा मोहन सरकार का बजट...

युवा, महिला, किसान , इंडस्ट्री ,इंफ्रा सबके लिए कुछ खास, जनता के विश्वास पर खरी उतरी मोहन  सरकार 

मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने 2026 -27  के लिए 4.38 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का  राज्य का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया है। इसमें सभी वर्गों - युवा, महिला, किसान और गरीब के लिए विशेष योजनाएं शामिल हैं। बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया और ना ही पुराने टैक्स में कोई बढ़ोतरी की गई है। 

GYAN मॉडल  से आगे अब GYANII मिशन पर फोकस
 
 देश के प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी  GYAN मॉडल पर  जोर देते रहे हैं  जिसमें गरीब कल्याण (G), युवा सशक्तिकरण (Y), आधुनिक कृषि (A) और नारी सम्मान (N) शामिल हैं लेकिन मध्यप्रदेश सरकार  द्वारा आज प्रस्तुत किये बजट में  GYAN मॉडल के साथ इंडस्ट्रीलाइजेशन और इंफ्रास्टक्चर पर भी विशेष जोर दिया गया है।  युवाओं के लिए रोजगार के अवसर,  गरीब कल्याण , युवा सशक्तिकरण,  कृषि  और महिला सशक्तिकरण  जैसे कदम इसकी मिसाल हैं।  

पहली बार एमपी  में पेश हुआ रोलिंग बजट 

रोलिंग बजट पारंपरिक वार्षिक बजट से अलग होता है। दरअसल इसमें सिर्फ वित्तीय वर्ष का लेखा-जोखा नहीं होता, बल्कि आने वाले 2 से 3 साल का अनुमान और लक्ष्य भी शामिल होते हैं। हर साल पुराने अनुमानों को अपडेट करते हुए नया वर्ष जोड़ दिया जाता है। यानी बजट एक स्थिर दस्तावेज नहीं, बल्कि गतिशील योजना बन जाता है। एमपी बजट 2026 में योजनाओं को बहुवर्षीय यानी 3 साल के लक्ष्य से जोड़ा गया है। 2026 से 2029 तक की कार्य योजनाएं शामिल की गई हैं।  

टैक्स नहीं बढ़ा, जनता को मिली राहत 

वित्त मंत्री ने कोई नया टैक्स नहीं लगाया, न ही पुराने टैक्स बढ़ाए। यह आम आदमी के लिए बड़ी राहत की बात है।  मोहन सरकार  बजट में साफ संकेत दिया गया कि सरकार का पूरा फोकस ग्रामीण, गरीब, किसान, महिलाएं और ,इंफ्रा पर रहा है । निवेश और स्वास्थ्य तक, यह बजट कई मायनों में दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। सरकार ने अपने खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा- लगभग 27%- सिर्फ दो चीजों पर केंद्रित किया है: शहरी-ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य। कुल बजट में 'शहरी एवं ग्रामीण विकास' को सर्वाधिक 14% और 'स्वास्थ्य' को 13% आवंटन मिला है।

 इंफ्रा से लेकर निवेश, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता पर जोर
 
सरकार ने अपने खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा- लगभग 27 प्रतिशत शहरी-ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य पर खर्च किया है । कुल बजट में 'शहरी एवं ग्रामीण विकास' को सर्वाधिक 14% और 'स्वास्थ्य' को 13% आवंटन मिला है। किसानों को 3000 करोड़ रुपए की लागत से किसानों को 1 लाख सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे। भावांतर योजना की सफलता से प्रभावित होकर अन्य राज्यों ने भी इसमें रुचि दिखाई है। कृषक उन्नति योजना की घोषणा की गई है, जिसके अंतर्गत किसानों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। वहीं, जैविक एवं प्राकृतिक खेती के लिए 21 लाख 42 हजार हेक्टेयर क्षेत्र पंजीकृत किया गया है।

बजट में 50,000 सरकारी पदों पर भर्ती का ऐलान हुआ है।कौशल विकास, रोजगार सृजन और "हर हाथ को काम" पर जोर दिया गया है । युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने की दिशा में सरकार अपने कदम तेजी से बढ़ा रही है।  यह युवाओं के कौशल विकास की दिशा में नए रास्ते खोलेगा ।इंडस्ट्री को मजबूत करने के लिए सरकार ने विशेष प्रावधान किये हैं । GIS-2025 के तहत कई लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स प्रदेश में लगाए जा चुके हैं । MSME, स्टार्टअप, सेमीकंडक्टर, ड्रोन जैसी नई पॉलिसी से रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया है।सड़क, आवास (10 लाख पीएम आवास), मेट्रो/शहरी विकास और बुनियादी ढांचे पर  निवेश पर जोर दिया गया है ।पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी से कनेक्टिविटी और विकास को गति मिलेगी जो विकसित मध्य प्रदेश @2047 की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। 

प्रदेश में औद्योगिक और आईटी पार्क विकसित करने के लिए 19,300 एकड़ जमीन आरक्षित की गई है। बीते 2 वर्षों राज्य को 33 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जो रोजगार सृजन में मील का पत्थर साबित होंगे।  8वीं क्लास तक के   बच्चों के पोषण के लिए  सरकारी स्कूलों में टेट्रा पैक में दूध उपलब्ध कराने का एलान इस बजट में किया गया है।  मख्यमंत्री लाडली बहना योजना' के लिए 23,883 करोड़ रुपये का विशाल प्रावधान महिलाओं की दैनिक जरूरतों को पूरा करने  का काम करेगा। जनजातीय विकास के लिए 11,277 गांवों के लिए 793 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यही नहीं सरकार ने गुणवत्ता सुधार के लिए सरकारी प्राथमिक शालाओं की स्थापना और उन्नयन के लिए 11,444 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। 

औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और इंफ्रा प्रोजेक्ट्स (रोड, मेट्रो जैसी मेट्रोपॉलिटन सिटी तैयारी) पर सरकार द्वारा  मजबूत फोकस किया गया है ।मोहन सरकार ने बीते 2-3 वर्षों  में नारी सशक्तिकरण (2024), उद्योग-रोजगार (2025) और अब किसान कल्याण (2026) को समर्पित कर विकसित भारत की दिशा में मजबूती के साथ अपने कदम बढ़ाये हैं।   

जनता के विश्वास पर खरा उतरने वाला बजट : मोहन 
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह बजट ''समृद्ध मध्‍यप्रदेश, सम्‍पन्‍न मध्‍यप्रदेश, सुखद मध्‍यप्रदेश, सांस्‍कृतिक मध्‍यप्रदेश'' के सपने को साकार करने वाला है।  सुशासन और सुप्रबंधन के लिए निरंतर नवाचार और विकास के सभी पैमानों को पूरा करता यह बजट अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय है।मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे प्रदेश के भविष्य का रोडमैप बताया है।

प्रदेश की "मोहन सरकार  ने वाकई युवा, महिला, किसान, इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करके जनता के विश्वास को साबित किया है। आज पेश हुए बजट को G (गरीब), Y (युवा), A (अन्नदाता/किसान), N (नारी शक्ति), और अब I (इंडस्ट्री) + I (इंफ्रास्ट्रक्चर) जोड़कर GYANII बजट कहा जा रहा है।  मोहन सरकार का यह बजट "समृद्ध मध्यप्रदेश" की दिशा में रोलिंग बजट के रूप में देखा जा रहा है, जो जनता के हर वर्ग—खासकर युवा, महिला और किसान के साथ इंडस्ट्री-इंफ्रा के विकास को जोड़कर विश्वास जीतने की कोशिश में कामयाब दिख रहा है। यह बजट संतुलित दिखता है। 'किसान कल्याण वर्ष' की घोषणा, महिला सशक्तिकरण और आधारभूत ढांचे को मजबूत कर विकास पर फोकस सरकार की मजबूत इच्छा शक्ति को दर्शाते हैं। 

मोहन सरकार का मनमोहनी बजट महिला, किसान, युवा से लेकर गरीब के कल्याण का वादा, सशक्तिकरण का संकल्प

मध्यप्रदेश में मोहन यादव का मनमोहक बजट आज विधानसभा में पेश किया गया है। यह बजट न केवल राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट है, बल्कि यह मोहन सरकार का मनमोहनी बजट इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसमें महिलाओं, किसानों, युवाओं और गरीब वर्गों के लिए आकर्षक घोषणाएँ  हुई हैं। इसमें विकास, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और कृषि पर विशेष फोकस दिखता है।

 
बजट का कुल आकार लगभग 4.38 लाख करोड़ से 4.65 लाख करोड़ रुपये के बीच है, जो 2025-26 के करीब 4.21 लाख करोड़ से काफी बड़ा है। यह राज्य का पहला पेपरलेस बजट भी है, जो डिजिटल और पारदर्शी शासन की दिशा में एक मजबूत कदम है। बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया और मौजूदा टैक्स में भी कोई वृद्धि नहीं की गई है।

 किसानों को विशेष प्रोत्साहन,  1 लाख सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे
 
3000 करोड़ रुपए की लागत से किसानों को 1 लाख सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे। कृषक उन्नति योजना की घोषणा की गई है, जिसके अंतर्गत किसानों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है वहीं पीएम फसल बीमा योजना के लिए 1,299 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सीएम कृषक उन्नति योजना के लिए 5,500 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। किसानों को 337 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया साथ ही कृषि क्षेत्र में भारी निवेश का प्रावधान किया गया है। कृषक उन्नति योजना की घोषणा की गई है, जिसके अंतर्गत किसानों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। भावांतर योजना की सफलता से प्रभावित होकर अन्य राज्यों ने भी इसमें रुचि दिखाई है।
 
श्रम विभाग के लिए 1 हजार 335 करोड़ का प्रावधान
 
वित्त मंत्री देवड़ा ने कहा- सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए श्रम विभाग के लिए 1335 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान प्रस्तावित किया है। इस बजट का उद्देश्य मजदूरों, असंगठित क्षेत्र के कामगारों और गरीब वर्ग को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत अब तक राज्य में 4 करोड़ 61 लाख से ज्यादा खाते खोले जा चुके हैं।इससे बड़ी संख्या में लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है। वहीं, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में अब तक 3 करोड़ 64 लाख लोगों का पंजीयन हो चुका है। इस योजना के तहत दुर्घटना की स्थिति में बीमा सुरक्षा दी जाती है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से भी बड़ी संख्या में लोग जुड़े हैं। इस योजना में अब तक 1 करोड़ 54 लाख से ज्यादा लोगों ने पंजीयन कराया है, जिससे उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है।

 
खेल के लिए 815 करोड़ रूपए का प्रावधान

बजट पेश करते हुए प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि युवाओं की खेल योजनाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्टेडियम निर्माण का कार्य शुरू किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में चार स्टेडियमों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके साथ ही खेल गतिविधियों के लिए 815 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।शिक्षा और खेल क्षेत्र में नए प्रावधान और निवेश बढ़ाने की बात खेल से जुड़ी योजनाएँ युवाओं को प्रोत्साहित करेंगी।
 
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत 50 करोड़  का प्रावधान 
 
धार्मिक और सामाजिक योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, ताकि वरिष्ठ नागरिकों और जरूरतमंद लोगों को धार्मिक स्थलों की यात्रा का लाभ मिल सके। वहीं, धर्म और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए सरकार ने 2 हजार 55 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया है।
 
सिंहस्थ निर्माण कार्यों को स्वीकृति, 3 हजार 60 करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान 
 
राज्य सरकार ने आगामी सिंहस्थ आयोजन की तैयारियों के लिए अब तक 13 हजार 851 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास और निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी है। इसके साथ ही वर्ष 2026-27 के बजट में सिंहस्थ के लिए 3 हजार 60 करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान प्रस्तावित किया गया है, जिससे अधोसंरचना, यातायात, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा।

पुलिस विभाग में 22 हजार 500 पदों पर भर्ती

वित्त मंत्री देवड़ा ने कहा कि पुलिस विभाग में 22 हजार 500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। पुलिसकर्मियों के लिए 11000 नए आवास बनाए गए हैं। 1 अप्रैल 2026 से परिवार पेंशन के अंतर्गत तलाक शुदा पुत्री को भी परिवार पेंशन देने का फैसला लिया गया है।
 
2 साल में 33 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले
 
बजट पेश करते हुए प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि 2 साल में 33 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। 19300 एकड़ जमीन पर इंडस्ट्रियल और आईटी पार्क विकसित किए जा रहे हैं। 7 लाख 95 हजार स्टूडेंट्स को आर्थिक सहायता राशि का प्रावधान किए जा रहे हैं। उद्यम क्रांति योजना में 16,451 युवाओं को लोन दिया गया है।
 
पीएम आवास के लिए 6 हजार 850 करोड़ का प्रावधान
 
बजट पेश करते हुए प्रदेश के वित्त मंत्री ने कहा- 6 हजार 850 करोड़ पीएम आवास के लिए प्रावधान है। पीएम जनमन के लिए 900 करोड़, जी रामजी के लिए 10428 करोड़ के प्रावधान किए गए हैं। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के लिए 40062 करोड रुपए का प्रावधान किया गया है।

 केंद्र में  महिला सशक्तिकरण
 
इस बजट में महिला सशक्तिकरण और नारी कल्याण को केंद्र में रखा गया है। बजट में महिलाओं और बालिकाओं से जुड़ी योजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर प्रावधान किए गए हैं। सरकार ने लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए 8,801 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। वहीं लाड़ली बहना योजना के लिए 23,882 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिससे प्रदेश की करोड़ों महिलाओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण अभियान को मजबूत करने के लिए 80 लाख दूध पैकेट वितरित किए जाएंगे। इस योजना के लिए 6,700 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। कामकाजी महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई जिलों में ‘सखी भवन’ का निर्माण किया जा रहा है, ताकि बाहर से आने वाली महिलाओं को सुरक्षित और किफायती आवास मिल सके। सरकार ने नारी कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के लिए कुल 1,27,555 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। सरकार का कहना है कि यह बजट महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
 
लोक निर्माण से लोक कल्याण  की राह
 
बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री देवड़ा ने कहा कि "लोक निर्माण से लोक कल्याण" की दिशा में प्रदेश निरंतर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में लगभग 1,500 किलोमीटर सड़क निर्माण और 7,000 किलोमीटर सड़क नवीनीकरण का लक्ष्य पूरा होगा।
                                                                                                         
सड़क और पुल निर्माण के लिए बजट प्रावधान
 
सड़कों और पुलों के निर्माण और संधारण के लिए वर्ष 2026-27 में कुल 12,690 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। यह राशि प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों को मुख्य सड़क मार्ग से जोड़ने, सुरक्षा और ग्रामीण कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए खर्च की जाएगी। वहीं, मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना के तहत मुख्य सड़क मार्ग से जुड़ी न होने वाली बसाहटों के लिए 30,900 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए स्वीकृति दी गई है। क्षतिग्रस्त पुलों के पुनर्निर्माण के तहत 1,766 पुल और पुलियों का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 4,572 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गई है, और वर्ष 2026-27 में 900 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास पर जोर
 
स्वास्थ्य क्षेत्र को 23,747 करोड़,ग्रामीण विकास के लिए 40,062 करोड़,जनजातीय क्षेत्रों के 11,277 गांवों के लिए 793 करोड़ का प्रावधान इस बजट में किया गया है। शिक्षा में छात्रवृत्ति और नए स्कूलकॉलेजों पर भी सरकार का फोकस नजर आता है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 1 लाख सोलर पंप, श्रम विभाग के लिए 1335 करोड़, 11,277 जनजातीय गांवों के विकास, ग्रामीण कनेक्टिविटी, छात्रवृत्ति योजनाओं और महिला कल्याण के लिए 1.27 लाख करोड़ से अधिक के प्रावधान की घोषणा की।
 
देश की मिल्क कैपिटल बनेगा एमपी
 
मध्यप्रदेश देश का तीसरा सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादन वाला प्रदेश है और सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 707 ग्राम है जो राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम से लगभग 46 प्रतिशत अधिक है।प्रदेश में संचालित 3 हजार गौशालाओं में 4 लाख 75 हजार गौवंश का पालन हो रहा है। प्रदेश में स्वावलम्बी गौशालाएं स्थापित करने के लिए बेहतर नीति तैयार की गई है जिसके अंतर्गत गौशालाएं आधुनिक पद्यति से संचालित होंगी जिनमें जैविक खाद, पंचगव्य तथा बायोगैस का उत्पादन होगा। पशुपालन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए रु 2 हजार 364 करोड़ का प्रावधान बजट में प्रस्तावित है। इसमें गौ संवर्धन एवं पशुओं का संवर्धन योजना के लिए रु 620 करोड़ 50 लाख एवं मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के लिए रु 250 करोड़ के प्रावधान शामिल हैं।

पर्यावरण क्षेत्र के लिए 6 हजार 151 करोड़ का प्रावधान

देवड़ा ने कहा कि कृषि वानिकी योजना शुरू की जाएगी इससे सरकार आमदनी बढ़ाने का काम करेगी। वन पर्यावरण क्षेत्र के लिए 6 हजार 151 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
 
पीएम मोदी के 'विकसित भारत' और आत्मनिर्भर भारत के सपनों को साकार करने वाला  ऐतिहासिक बजट : डॉ. यादव

 
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2026-27 के राज्य बजट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' और आत्मनिर्भर भारत के सपनों को साकार करने वाला एक दूरदर्शी और ऐतिहासिक बजट बताया है। यह बजट किसान, युवा, महिला और गरीबों के सशक्तीकरण तथा औद्योगिक विकास को समर्पित है, जो मध्यप्रदेश को एक नई ऊँचाई पर ले जाएगा। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह बजट समावेशी विकास पर आधारित है, जो समाज के हर वर्ग, विशेषकर महिलाओं, युवाओं और किसानों की आकांक्षाओं को पूरा करता है। यह बजट 2047 तक भारत को एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के पीएम मोदी के विजन की नींव को और मजबूत करता है।
 
कुल मिलाकर, डॉ. मोहन यादव का यह बजट मनमोहक इसलिए है क्योंकि  बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया  है। यह बजट किसान-महिला-युवा-गरीब केंद्रित है, जिसमें अधोसंरचना और रोजगार सृजन पर बल दिया गया है। यह महिला, किसान, युवा से लेकर गरीब के जीवन में बदलाव लाने का वादा करता है। बजट मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति और समाज के हर वर्ग को नई शक्ति देने वाला है।

Thursday, 12 February 2026

दीनदयाल उपाध्याय: राष्ट्रवादी चिंतक और सजग पत्रकार


  11 फरवरी पुण्यतिथि पर विशेष 

पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक भारतीय विचारक, अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री,लेखक, पत्रकार, संपादक थे। भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष भी एक दौर में रहे। ब्रिटिश शासन के दौरान इन्होंने भारत द्वारा पश्चिमी धर्म निरपेक्षता का विरोध किया। उन्होनें लोकतंत्र की अवधारणा को सरलता से स्वीकार किया लेकिन पश्चिमी कुलीनतंत्र, शोषण और पूंजीवादी मानने से साफ़ इंकार कर दिया। पंडित जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन जनता की सेवा में लगा दिया।  भारतीय पत्रकारिता ने सदैव राष्ट्रवाद को पल्लवित करने का निर्वहन किया है। पत्रकारिता में राष्ट्रवादी स्वर को गति देने वाले पत्रकारों में पं. दीनदयाल उपाध्याय का नाम आदर के साथ  लिया जाता है। स्वाधीनता आंदोलन के दौरान अनेक नेताओं ने पत्रकारिता के प्रभावों का उपयोग अपने देश को स्वतंत्रता दिलाकर राष्ट्र के पुनर्निमाण के लिए किया। विशेषकर हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषायी पत्रकारों में खोजने पर भी ऐसा सम्पादक शायद ही मिले जिसने अर्थोपार्जन के लिए पत्रकारिता का अवलम्बन किया हो।

दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर, 1916, नगला चन्द्रभान, मथुरा, उत्तर प्रदेश में एक मध्यम वर्गीय प्रतिष्ठित हिंदू परिवार में हुआ था। उनके परदादा का नाम पंडित हरिराम उपाध्याय था, जो एक प्रख्यात ज्योतिषी थे। उनके पिता का नाम श्री भगवती प्रसाद उपाध्याय तथा मां का नाम रामप्यारी था। उनके पिता जलेसर में सहायक स्टेशन मास्टर के रूप में कार्यरत थे। दीनदयाल ने कम उम्र में ही अनेक उतार-चढ़ाव देखा, परंतु अपने दृढ़ निश्चय से जिन्दगी में आगे बढ़े। उन्होंने सीकर से हाईस्कूल की परीक्षा पास की जन्म से बुद्धिमान और उज्ज्वल प्रतिभा के धनी दीनदयाल को स्कूल और कालेज में अध्ययन के दौरान कई स्वर्ण पदक और प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए। दीनदयाल इण्टरमीडिएट की पढ़ाई के लिए 1935 में पिलानी चले गए। 1937 में इण्टरमीडिएट बोर्ड के परीक्षा में बैठे और न केवल समस्त बोर्ड में सर्वप्रथम रहे वरन सब विषयों में विशेष योग्यता के अंक प्राप्त किए। बिडला कॉलेज का यह प्रथम छात्र था, जिसने इतने सम्मानजनक अंको से परीक्षा पास की थी। सीकर महाराजा के समान ही घनश्याम दास बिड़ला ने एक स्वर्ण पदक, 10रू मासिक छात्रवृत्ति तथा पुस्तकों आदि के खर्च के लिए 250 रू प्रदान किए। सन 1939 में सनातन धर्म कॉलेज, कानपुर से प्रथम श्रेणी में बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की। एम.ए. अंग्रेजी साहित्य में करने के लिए सेंट जॉन्स कॉलेज आगरा में प्रवेश लिया। इसके पश्चात उन्होंने सिविल सेवा की परीक्षा पास की लेकिन आम जनता की सेवा की खातिर उन्होंने इसका परित्याग कर दिया। 

 दीनदयाल उपाध्याय की पत्रकारिता में भी अग्रणी भूमिका रही है। अपने राष्ट्रवाद के विचारों को जनमानस तक प्रेषित करने के लिए दीनदयाल उपाध्याय ने पत्रकारिता को माध्यम बनाया था। पत्रकारिता किस प्रकार से जनमत निर्माण करने में सहायक होती है, यह दीनदयाल जी ने बखूबी समझा था। एकात्म मानववाद के प्रणेता दीनदयाल उपाध्याय ने गांधी के विचार को पुनःव्याख्यायित करते हुए अंत्योदय की बात की। दीनदयाल जी ने राष्ट्रहित व चिंतन के विचारों को पत्रकारिता के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया था। पंडित  दीनदयाल उपाध्याय एक कुशल पत्रकार और बेहतर संचारक थे। अपनी विचारधारा को पुष्ट करने के लिए पत्रों का संपादन, प्रकाशन, स्तंभ लेखन, पुस्तक लेखन उनकी रुचि का विषय था। उन्होंने लिखने के साथ-साथ बोलकर भी एक प्रभावी संचारक की भूमिका का निर्वहन किया है। पंडित  दीनदयाल उपाध्याय ने लोक कल्याण को ही पत्रकारिता का प्रमुख आधार माना। दीनदयाल के पास समाचारों का न्यायवादी एवं समन्वयवादी दृष्टिकोण था। उनके लेखों, उपन्यासों व नियमित कॉलमों में निष्पक्ष आलोचना, उचित शब्दों का प्रयोग और सत्यपरक खबरों को ही मानवता के अनुकूल मिलता है।  राष्ट्र भक्ति को पल्लवित करने की भावना को साकार स्वरूप देने का श्रेय उंनकी पत्रकारिता को भी जाता है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय को साहित्य से एक अलग ही लगाव था शायद इसलिए दीनदयाल उपाध्याय अपनी तमाम ज़िन्दगी साहित्य से जुड़े रहे। उनके हिंदी और अंग्रेजी के लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते थे। साहित्य से लगाव इतना की उन्होंने केवल एक बैठक में ही 'चंद्रगुप्त' नाटक लिख डाला था। भारत विभाजन के दौर में भयानक रक्तपात हुआ। देश, भारत को एक राष्ट्र मानने तथा भारत को द्विराष्ट्र मानने वाले में बंट गया। इसी हिंसाचार ने महात्मा गांधी को भी लील लिया। उनकी जघन्य हत्या हुई। देश के विभाजन की विभीषिका ने दीनदयाल जी को बहुत आहत किया। उन्होनें इस पर प्रखरतापूर्वक अपना पक्ष रखा। पंडित दीनदयाल के अनुसार अखण्ड भारत देश की भौगोलिक एकता का ही परिचायक नहीं अपितु जीवन के  भारतीय दृष्टिकोण का परिचायक  है जो अनेकता में एकता का दर्शन करता है। अतः हमारे लिए अखण्ड भारत राजनैतिक नारा नहीं है, बल्कि यह तो हमारे संपूर्ण जीवनदर्शन का मूलाधार है।  

अखंड भारत की अवधारणा से संबंधित ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का विश्लेषणार्थ उपाध्याय ने अखण्ड भारत क्यों? नाम की पुस्तिका लिखी, जिसमें उन्होंने प्राचीन भारत साहित्य के संदर्भित करते हुए भारत में युगों से चली आयी उस सांस्कृतिक एवं राजनैतिक परम्परा का उल्लेख किया है जो भौगोलिक भारत को एक एकात्म राष्ट्र के रूप में विकसित करने में समर्थ हुई थी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का स्पष्ट मत था कि भारत माता को खण्डित किये बिना भी भारत की आजादी प्राप्त की जा सकती थी और भारत माता को परम वैभव तक पहुँचाने में हम अधिक तीव्रगति से सफल हो सकते थे किंतु पंडित नेहरू और जिन्ना के सत्ता  के लालच  और अंग्रेजों  की चाल में आ जाने से भारतवासियों का यह सपना पूर्ण नहीं हुआ और खण्डित भारत को आजादी मिली। दीनदयाल उपाध्याय के अनुसार व्यक्तिवाद अधर्म है। राष्ट्र के लिए काम करना धर्म है। दीनदयाल उपाध्याय बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। उनमें एक कुशल शिक्षाविद, अर्थचिंतक, संगठनकर्ता, राजनीतिज्ञ, लेखक व पत्रकार सहित अनेक गुण थे। यह बात अलग है कि उन्हें लोग एकात्म मानववाद के प्रणेता के रूप और एक संगठन के कुशल सेवी के रूप में ज्यादा जाना जाता है। उनमें लेखन और संपादन का अद्भुत कौशल विद्यमान था। उनकी गणना उस दौर के प्रतिष्ठित पत्रकारों में भी जाती थी। उनके पत्रकारीय व्यक्तित्व में पत्रकारिता का आदर्शवाद समाहित था। आजादी के समय में अनेक नेताओं ने पत्रकारिता के प्रभावों का उपयोग अपने देश को आजादी दिलाकर राष्ट्र के पुनर्निर्माण और जनजागरण के लिए समर्पित किया। दीनदयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व में एक संपादक के सभी पत्रकारीय गुण  दिखाई पड़ते थे। दीनदयाल उपाध्याय मानते थे कि पत्रकारिता एक मिशनरी संकल्प है जिसे पूरी लगन एवं तल्लीनता से करनी चाहिए। समाजहित की पत्रकारिता में व्यावसायिक पत्रकार का कोई स्थान नहीं होता है।  पंडित दीनदयाल उपाध्याय अपने व्यस्त राजनीतिक जीवन से अनेक वर्षों तक आरगेनाइजर, राष्ट्रधर्म, पांचजन्य में ‘‘पॉलिटिकल डायरी’’ नामक स्तम्भ के अंतर्गत तत्कालीन राजनीतिक-आर्थिक घटनाक्रम पर गम्भीर विवेचनात्मक टिप्पणियां लिखते रहे।  दीनदयाल जी की टिप्पणी सामयिक और बहुत पते की होती थी। सन 1947 में पंडित  दीनदयाल ने राष्ट्रधर्म प्रकाशन लिमिटेड की स्थापना की जिसके अंतर्गत स्वदेश, राष्ट्रधर्म एवं पांचजन्य नामक पत्र प्रकाशित होते थे। दीनदयाल ने ‘पांचजन्य’, ‘राष्ट्रधर्म’ एवं ‘स्वदेश’ के माध्यम से राष्ट्रवादी जनमत निर्माण करने का महत्वपूर्ण कार्य किया था।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा एकात्म मानववाद का विकल्प एवं अंत्योदय का विचार उस कालखंड में दिया गया जब देश में समाजवाद, साम्यवाद जैसी आयातित विचारधाराओं का बोलबाला था। भारत में भारतीयता को पुनर्जीवित करने वाली विचारधारा की बजाय समाजवाद एवं साम्यवाद जैसी आयातित विचारधाराओं का बोलबाला होना भारतीयता के लिए अनुकूल नहीं था। पंडित जी ने भारत की समस्या को भारत के सन्दर्भों में समझकर उसका भारतीयता के अनुकूल समाधान देने की दिशा में एक युगानुकुल प्रयास किया। दीनदयाल जी ने अपने चिन्तन में आम मानव से जुड़ी जिन चिंताओं और समाधानों को समझाने का प्रयास आज से दशकों पहले किया था।  सही मायनों में पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने  पत्रकारिता को भी इसी दृष्टि से एक नई दिशा दी। वे स्वयं कभी संपादक या औपचारिक संवादाता नहीं रहे। उन्होंने संपादकों और संवाददाताओं का सुखद सानिध्य प्राप्त किया। तभी संपादक व पत्रकार उन्हें सहज ही अपना मित्र एवं मार्गदर्शक मानते थे। पत्रकार के नाते पंडित जी का योगदान अनुकरणीय था। दीनदयाल जी उस युग की पत्रकारिता का प्रतिनिधित्व करते थे जब पत्रकारिता एक मिशन होने के कारण आदर्श थी व्यवसाय नहीं थी। स्वाधीनता आंदोलन के दौरान अनेक नेताओं ने पत्रकारिता के प्रभावों का उपयोग अपने देश को स्वतंत्रता दिलाकर राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए किया। ऐसा सम्पादक शायद ही मिले जिसने अर्थोपार्जन के लिए पत्रकारिता का अवलंबन किया हो। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का मानना था कि पत्रकारिता करते समय राष्ट्र हित को सर्वोपरि मानना चाहिए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और स्वदेश के माध्यम से पत्रकारिता के क्षेत्र में जो मूल्य और मानदंड स्थापित किया उसकी दूसरी मिसाल देखने को नहीं मिलती। दीनदयाल उपाध्याय का पत्रकारीय चिंतन राष्ट्रवादी और भारतीय जीवन मूल्यों की विचारधारा से जुड़ता है। पत्रकारिता के आधार पर उन्होंने  राष्ट्र को समझने तथा भारतीय अस्मिता को लोगों तक पहुंचाने का गंभीर प्रयास किया है।