Sunday, 29 March 2026

मोहन के नेतृत्व में जल गंगा संवर्धन अभियान से मध्यप्रदेश में जल संरक्षण की नई क्रांति

 

19 मार्च से 30 जून तक चलेगा जल गंगा संवर्धन अभियान का तीसरा चरण

मध्यप्रदेश सरकार का जल गंगा संवर्धन अभियान जल संरक्षण और जल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वाकांक्षी पहल है। 30 मार्च 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए इस अभियान ने न केवल सूखती नदियों को नया जीवन दिया है, बल्कि प्रदेश में जल संसाधनों के संरक्षण के लिए जनसहभागिता की एक अनूठी मिसाल पूरे देश के सामने पेश की है। मध्य प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान का तीसरा चरण गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर 19 मार्च 2026 से शुरू होने जा रहा है। यह अभियान जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और जनभागीदारी से प्रदेश को जल-संपन्न बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पीएम मोदी के जल संरक्षण के संकल्पों से प्रेरित अभियान

यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल संरक्षण के संकल्पों से प्रेरित है और प्रदेश में जल संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य रखता है। यह अभियान न केवल जल संरक्षण की दिशा में एक ठोस पहल है, बल्कि यह सामाजिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है। जनभागीदारी, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नीति-निर्माण के सामूहिक प्रयासों के साथ जनभागीदारी से मध्यप्रदेश अब जल संसाधनों के संरक्षण में एक नई मिसाल देश के सामने पेश करता जा रहा है।

जल संसाधनों को पुनर्जीवित करने की दिशा में निर्णायक कदम

जल गंगा संवर्धन अभियान भावी पीढ़ियों के लिए जल, जीवन और प्रकृति की इस अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखने का संकल्प है। इस अभियान का पहला चरण वर्ष 2024 से शुरू हुआ जिसमें कुएं, बावड़ी, तालाब, चेक डैम आदि का निर्माण, पुनर्जीवन और संरक्षण किया गया। पहले वर्ष सफलता मिलने के बाद 2025 में अभियान का दूसरा चरण 30 मार्च से 30 जून तक चला, जिसमें यह विशाल जनआंदोलन के रूप में विकसित हुआ।  

यह अभियान केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बहाल करने पर भी  इसका विशेष फोकस है। इस अभियान का उद्देश्य न केवल नदी, तालाब, कुएं और पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरोद्धार है बल्कि  प्रदूषित जल स्रोतों की सफाई को गति देने की दिशा में भी यह मजबूती के साथ पिछले दो चरणों में आगे बढ़ चुका है। खास बात यह है कि इसमें सामुदायिक भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है, जिससे यह पर्यावरण के साथ-साथ सामाजिक सशक्तिकरण का भी प्रेरक उदाहरण बन गया है। पिछले चरणों में हुए कार्यों से जहाँ लाखों जल संरचनाओं का संरक्षण और निर्माण हुआ है, वहीँ कई भू जल स्त्रोतों ,नदियों को पुनर्जीवन मिला है जिससे मध्यप्रदेश को जल संरक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।

उज्जैन के क्षिप्रा नदी तट से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे तीसरे चरण की शुरुआत

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल गंगा संवर्धन अभियान के तीसरे चरण का 19 मार्च 2026 गुड़ी पड़वा, को उज्जैन के क्षिप्रा नदी तट से शुभारंभ किया जाएगा। तीसरा चरण 19 मार्च से 30 जून गंगा दशहरा तक चलेगा।

मुख्यमंत्री  मोहन यादव ने कहा है कि जल प्रकृति का अनमोल उपहार है और इसे बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि 'जल है तो कल है' का कोई विकल्प नहीं है, इसलिए प्रदेश में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की जरूरत है।तीसरे चरण में भी प्रदेशभर में नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण, पुनरुद्धार और निर्माण पर विशेष फोकस रहेगा। अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए ग्रामीण-शहरी निकायों, स्थानीय समुदायों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

भू-जल संवर्धन और नदी शुद्धिकरण पर फोकस

राज्य में भू-जल स्तर सुधारने के लिए एक लाख से अधिक कुओं का पुनर्भरण कार्य शुरू किया गया है। साथ ही 57 प्रमुख नदियों और 194 प्रदूषण स्रोतों की पहचान कर उनके शोधन की पहल की गई है। इसके अलावा 145 नदियों के उद्गम क्षेत्रों में हरित विकास के लिए गंगोत्री हरित योजनाभी लागू की गई है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है ने कहा कि कुओं, बावड़ियों और नदियों के पुनरुद्धार के इस अभियान को जन-जन से जोड़कर जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा प्रदेश में अब तक 3000 से अधिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन किया जा चुका है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 86 हजार से अधिक खेत तालाब और 550 से ज्यादा अमृत सरोवर बनाए गए हैं।

पहले चरण में बनीं 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाएं

जल संरक्षण को लेकर मध्यप्रदेश सरकार द्वारा शुरू किया गया जल गंगा संवर्धन अभियानअब उल्लेखनीय परिणाम दिखाई देने लगे है। 2024 में राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का पहला चरण प्रारंभ किया गया जिसमें जल संरक्षण के क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक कार्य राज्य में किए गए। पहले चरण में कुल 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया। इनमें प्रमुख रूप से तालाब निर्माण एवं पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत नहर निर्माण, सूखी नदियों का पुनर्जीवन एवं जल संरक्षण से जुड़ी अन्य संरचनाएं शामिल हैं। इन कार्यों से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल भी उपलब्ध हुआ है।

खंडवा जिले नर्मदा नदी की सहायक घोड़ा पछाड़ नदी जो अत्यधिक भूमिगत जल दोहन के कारण सूख गई थी  रिज टू वैलीसिद्धांत पर आधारित जल संरचनाओं के निर्माण से नदी के 33 किमी क्षेत्र में जल संचयन संभव हुआ है। स्थानीय नागरिकों की भागीदारी और वैज्ञानिक तरीके से किए गए जल प्रबंधन ने इस नदी को फिर से बहने योग्य बना दिया। अब इस क्षेत्र की अन्य नदियों में भी बारहमासी प्रवाह की संभावना बन रही है। ऐसा बदलाव प्रदेश के हर जिले में महसूस किया जा रहा है। गंगा दशहरा जैसे उत्सव, वृक्षारोपण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों ने जल संरक्षण अभियानों में अपनी सक्रिय भागीदारी की है। इस अभियान ने जन –जन को जल संरचनाओं के भावनात्मक जुड़ाव से भी जोड़ने का कार्य भी किया है।

दूसरे चरण में प्रगति पर 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य 

2025 में चलाए गए जल गंगा संवर्धन अभियान के दूसरे चरण में भी व्यापक स्तर पर कार्य हुए। इस चरण में प्रदेश में 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य अभी भी प्रगति पर है। इन कार्यों में खेत तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नहर, कुएं, बावड़ियां तथा अन्य जल संचयन संरचनाएं बनाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल उपलब्धता को स्थायी रूप से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

जनभागीदारी अभियान की सबसे बड़ी शक्ति : डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश नदियों का मायका माना जाता है और जल आत्मनिर्भरता से ही प्रदेश समृद्ध बन सकता है। उन्होंने बताया कि इस 100 दिवसीय अभियान में तालाब, कुएं, बावड़ियां और अन्य जल स्रोतों के निर्माण व पुनर्जीवन का काम किया जाएगा साथ ही वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल स्रोतों की साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता का सबसे बड़ा आधार जनभागीदारी है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के इस महाअभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करेंगे, तो प्रदेश जल समृद्ध राज्य बन सकता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जनभागीदारी और संस्थाओं के सहयोग से जल गंगा संवर्धन अभियान को सफल बनाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और भविष्य की जल सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

Friday, 27 March 2026

मोहन के नेतृत्व में हर क्षेत्र में एमपी लिख रहा है विकास का सुनहरा अध्याय


मध्यप्रदेश के लोकप्रिय सीएम डॉ. मोहन यादव अपने जीवन काल के  61वें  वर्ष में आज प्रवेश करने जा रहे हैं। 25 मार्च 1965 को उज्जैन में जन्मे डॉ. यादव न केवल एक शिक्षाविद् और राजनेता हैं, बल्कि एक ऐसे दूरदर्शी नेता भी हैं  जिनके नेतृत्व में पिछले ढाई वर्षों में मध्य प्रदेश ने विकास की नई ऊँचाइयाँ छुई हैं। 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से उन्होंने “विकास और सेवा” के मंत्र को मध्यप्रदेश में पहनाया है।

निवेश क्रांति में एमपी के सफल मॉडल की ग्लोबल धूम

2025 को “उद्योग वर्ष” घोषित कर डॉ. यादव ने प्रदेश को निवेश का हब बनाया। भोपाल में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों करोड़ के प्रस्ताव आए। छह क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और विदेशी रोड शो (यूके, जर्मनी) से 4 लाख करोड़ रु से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे 3 लाख से ज्यादा रोजगार सृजित होने की संभावना है। इंदौर में एमपी तक ग्रोथ कॉन्क्लेव और स्टार्टअप समिट 2026 ने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में मध्यप्रदेश को नई उड़ान दी है। एआई-आधारित शासन और सौर ऊर्जा पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने दावोस में भी मध्यप्रदेश की  वैश्विक पटल पर ब्रांडिंग की जिससे एमपी के प्रति निवेशकों का भरोसा तेजी से बढ़ता जा रहा है।  

नक्सलवाद को जड़ से मिटाया

डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित समय-सीमा से पहले ही प्रदेश को नक्सलवाद से मुक्त कर दिया है। बालाघाट समेत प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस अधिकारियों ने  सघनता से इस अभियान को सफल बनाया है।  यह उपलब्धि न केवल कानून-व्यवस्था की मजबूती दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शांति और समृद्धि का आधार भी तैयार कर रही है।

किसान कल्याण और कृषि क्रांति पर जोर

मोहन के विजनरी नेतृत्व में आज किसानों को न केवल ऊर्जादाता बनाया जा रहा है बल्कि भावान्तर योजना, दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन, कोदो-कुटकी की खरीदी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। दुग्ध उत्पादन के लिए गौ-वंश आहार राशि दोगुनी कर दी गई है जिससे पशुपालन के प्रति लोग आकर्षित हो रहे हैं। डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनू योजना और मध्यप्रदेश कृषक कल्याण मिशन ने एमपी की  ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का काम किया है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल उत्पादन के साथ गौपालन, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी एवं कृषि आधारित उद्योगों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मोहन के कार्यकाल में केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ परियोजनाओं की नींव रखी गई है जिससे बुंदेलखंड समेत सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सूखा ख़त्म होगा। वहीँ प्रदेश में नदी जोड़ो अभियान एवं नई सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से कार्य हो रहा है।

 महिला सशक्तिकरण में आदर्श प्रस्तुत करता एमपी

 डॉ.मोहन यादव का नेतृत्व महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक आदर्श बनकर उभरा है। महिलाओं के सशक्तिकरण में लाड़ली बहना योजना और महिला स्वावलंबन मिशन जैसी योजनाएँ आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। मोहन के कार्यकाल में लाड़ली बहना योजना में मासिक सहायता 1250 रु से बढ़ाकर 1500 रु हो गई है। सरकारी भर्ती में महिलाओं को 35 फीसदी आरक्षण, लखपति दीदी मिशन ने महिलाओं को आज समाज की मुख्यधारा में लाने का कार्य किया है। डॉ. मोहन यादव ने महिला सशक्तिकरण को राष्ट्रीय मॉडल बनाने की ठानी है। उनकी महिला केंद्रित तमाम योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा रहा है। मध्यप्रदेश आज विकास की नई उड़ान भर रहा है। यह उड़ान केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि महिलाओं की आकांक्षाओं को नए पंख दे रही है।

स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे का हुआ विस्तार

मोहन युग में आज का मध्यप्रदेश विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है। प्रदेश में विकास के सभी क्षेत्रों में हर दिन नवाचार हो रहे हैं। राज्य ने बुनियादी ढाँचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। सड़क, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार ने न केवल उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है, बल्कि गाँव-गाँव तक विकास की रोशनी पहुँचाई है। स्मार्ट सिटीज़ मिशन के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहर आधुनिक शहरी प्रबंधन और स्वच्छता के मॉडल बनकर उभरे हैं वहीं नर्मदा घाटी विकास परियोजनाओं ने सिंचाई और जल संरक्षण में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। 

शिक्षा में सांदीपनि विद्यालयों  और पीएम एक्सीलेंस कॉलेज ने शैक्षिक परिदृश्य को बदल दिया है। इंदौर, भोपाल में मेट्रो शुरू होने से भोपाल-इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र भी विकसित हो रहा है। पीएम आवास योजना 2.0 के तहत 10 लाख घर बन रहे हैं। अस्पतालों में जन औषधि केंद्र और आयुष आरोग्य मंदिर शुरू होने से बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हुई हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर विस्तार, शिक्षा में नवाचार से मध्यप्रदेश का चहुंमुखी विकास हो रहा है।

हवाई सेवाओं का हुआ विस्तार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में राज्य सरकार ने धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए हवाई सेवाओं का व्यापक विस्तार शुरू किया है। मार्च 2024 में प्रधानमंत्री (पीएमश्री) पर्यटन वायु सेवा और पीएमश्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा का शुभारंभ हुआ जो लोक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर आधारित है। यह योजना भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, रीवा, सिंगरौली और खजुराहो जैसे आठ प्रमुख शहरों को जोड़ती है। यह विस्तार न केवल तीर्थयात्रियों की सुविधा बढ़ा रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दे रहा है। मोहन के दौर का मध्यप्रदेश अब 'आकाशमार्ग से तीर्थयात्रा' का नया अध्याय लिख रहा है जो आस्था और आधुनिकता का अनूठा संगम है।

सांस्कृतिक अभ्युदय से निकली नई राह

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में देश में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के तौर पर उभर रहा है। डॉ. मोहन यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक अभ्युदय के संकल्प को मध्यप्रदेश में पूरा करने की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रही है। प्रदेश में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये मोहन सरकार राम गमन पथ विकसित कर रही है वहीँ चित्रकूट को भी अयोध्या की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। राम वन पथ गमन मार्ग के सभी प्रमुख स्थलों को विकसित करने के लिये पूरी कार्य-योजना बनाकर उसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। राम वन पथ गमन के लिये तैयार की गई कार्य-योजना में 23 प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल  हैं जिनमें सतना, पन्ना, कटनी, अमरकंटक, शहडोल, उमरिया आदि जिलों को भी शामिल किया गया है।

कृष्ण पाथेय दिशा में बढ़े मोहन के कदम

मध्यप्रदेश में भगवान कृष्ण की लीलाओं से जुड़े अनेक पवित्र स्थल यहां बिखरे हुए हैं जो वैष्णव भक्ति और आध्यात्मिकता के प्रतीक हैं। डॉ. मोहन यादव ने भगवान कृष्ण से जुड़े इन स्थलों को विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है जिसे  'कृष्ण पाथेय' के रूप में जाना जा रहा है। इस योजना के तहत, राज्य में कृष्ण से जुड़े प्रमुख स्थलों का चयन किया गया है। अमझेरा में प्राचीन शैव-वैष्णव मंदिर, सीधी जिले का नारायण धाम, बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जैसे जनजातीय क्षेत्रों में कृष्ण की लोककथाएं प्रचलित हैं जहां गोप-गोपी नृत्य और भजन परंपराएं जीवित हैं। मोहन सरकार इन स्थलों के विकास हेतु वृहत कार्ययोजना पर कार्य कर रही है।

जल गंगा संवर्धन से खींची नई लकीर 

जल गंगा संवर्धन अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भावी पीढ़ियों के लिए जल, जीवन और प्रकृति की इस अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखने का संकल्प है। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल संरक्षण के संकल्पों से प्रेरित है।  इस अभियान का पहला चरण वर्ष 2024 से शुरू हुआ जिसमें कुएं, बावड़ी, तालाब, चेक डैम आदि का निर्माण, पुनर्जीवन और संरक्षण किया गया। पहले वर्ष में ही सफलता मिलने के बाद 2025 में अभियान का दूसरा चरण 30 मार्च से 30 जून तक चला जिसमें यह विशाल जनआंदोलन के रूप में विकसित हुआ। जल गंगा संवर्धन अभियान के तीसरे चरण का 19 मार्च 2026 गुड़ी पड़वा, को उज्जैन के क्षिप्रा नदी तट से शुरू हुआ जो  30 जून गंगा दशहरा तक चलेगा।  यह अभियान केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बहाल करने पर भी  इसका विशेष फोकस है। इस अभियान का उद्देश्य न केवल नदी, तालाब, कुएं और पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरोद्धार है बल्कि  प्रदूषित जल स्रोतों की सफाई को गति देने की दिशा में भी यह मजबूती के साथ पिछले दो चरणों में आगे बढ़ चुका है। खास बात यह है कि इसमें सामुदायिक भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है, जिससे यह पर्यावरण के साथ-साथ सामाजिक सशक्तिकरण का भी प्रेरक उदाहरण बन गया है। पिछले चरणों में हुए कार्यों से जहाँ लाखों जल संरचनाओं का संरक्षण और निर्माण हुआ है, वहीँ कई भू जल स्त्रोतों ,नदियों को पुनर्जीवन मिला है जिससे मध्यप्रदेश को जल संरक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।

सिंहस्थ 2028 की तैयारी में जुटी मोहन सरकार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंहस्थ कुंभ 2028 को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए कमर कस चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन को देश की पहली स्थायी कुंभ नगरी के रूप में विकसित करने की घोषणा कर चुके हैं। इसके लिए 2372 हेक्टेयर भूमि पर 5000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है जिसमें अत्याधुनिक सुविधाएं जैसे 60 से 200 फीट चौड़ी सड़कें, घाट और बैराज शामिल हैं। प्रयागराज महाकुंभ 2025 और हरिद्वार कुंभ 2021 के मॉडल का अध्ययन कर सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाया जा रहा है। यात्रा सुगम बनाने के लिए हेलीपेड, एयरपोर्ट विस्तार और सैटेलाइट रेलवे स्टेशन बनाए जा रहे हैं। शिप्रा नदी को साफ़ किया जा रहा है और 29 किलोमीटर लंबा घाट 779 करोड़ से निर्मित हो रहा है जहां श्रद्धालु नौका विहार का भी आनंद ले सकेंगे। साधु-संतों के ठहरने, कथा-भागवत आयोजनों के लिए विशेष व्यवस्था हो रही है।

अपने कार्यकाल के सफल दो वर्ष पूर्ण करने के बाद ही सीएम डॉ. यादव ने अगले तीन वर्ष का रोडमैप बना लिया था। 2026 में युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार देना, स्वास्थ्य, शिक्षा,  टूरिज्म और नदी जोड़ परियोजनाओं में तेजी लाना,  ड्रग्स पर अंकुश उनकी प्रमुख प्राथमिकता बनी है। डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से मध्यप्रदेश आज हर क्षेत्र में संवर रहा है। आने वाले वर्षों में एमपी देश का 'मॉडल स्टेट'  बनेगा और डॉ. यादव का विजनरी संकल्प 'विकसित मध्यप्रदेश से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विकसित भारत' को भी मूर्त रूप देगा।

Wednesday, 25 March 2026

कुश्ती के अखाड़े से सूबे के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक… सब पर चला 'मोहन' का जादू !


मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 मार्च को अपना 61 वां जन्मदिन भी मना रहे हैं। जन्मदिन का त्यौहार न केवल उनके जीवन की उपलब्धियों को याद करने का अवसर देता हैबल्कि नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति उनके योगदान को भी उजागर करता है। विद्यार्थी परिषद और संघ के आदर्शों से राजनीति का ककहरा सीखने वाले डॉ.मोहन यादव मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी  संभालने के बाद से लगातार सक्रिय नजर आते हैं और प्रदेश में लगातार विकास कार्यों को गति दे रहे हैं। बेहद कम समय में अपने सुशासन और त्वरित फैसलों के माध्यम से डॉ. मोहन यादव ने तेजी से  देश में सफल राजनेताओं में खुद को स्थापित लिया है। उनके कई फैसले और निर्णय अक्सर चर्चा में रहते हैं लेकिन डॉ. मोहन यादव का मुख्यमंत्री पद तक का  सफर हर किसी के लिए प्रेरणादाई रहा है।

संघ के सच्चे स्वयंसेवक मोहन यादव
 
डॉ. मोहन यादव छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे। उन्होंने विक्रम यूनिवर्सिटी से बीएससीएलएलबीएमएएमबीए और पीएचडी की डिग्री ली  है।  कॉलेज में रहते  मोहन यादव 1982 में छात्रसंघ के सह सचिव चुने गए थे। उनका आरएसएस  से गहरा राजनीतिक और वैचारिक जुड़ाव माना जाता है। आरएसएस में काम करते हुए ही उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से 1984 में की थी। विद्यार्थी परिषद से जुड़कर ही उनकी पहचान सड़क पर संघर्ष करने वाले नेता की बनी जिसके चलते उन्हें 1986 में ही विद्यार्थी परिषद का प्रमुख बना दिया गया। पार्टी की सभी जिम्मेदारियां उन्होनें बखूबी निभाई और एकाएक वह पार्टी संगठन की नजर में आ गए और देखते  विद्यार्थी परिषद के प्रदेश मंत्रीअध्यक्षराष्ट्रीय मंत्री जैसे अहम पदों की जिम्मेदारियां संभालते हुए डॉ. मोहन यादव उज्जैन समेत पूरे मालवा में अपनी अलहदा पहचान बनाने में कामयाब हुए। 
 
2003 में विधायक का टिकट लौटाया

2003 में पूरे सूबे में जब भगवा लहर चरम पर चल रही थी तब भाजपा ने उन्हें उज्जैन जिले की बड़नगर विधानसभा सीट से विधायक का टिकट दिया लेकिन जब किसी दूसरे नेता का नाम सामने आया तो उन्होंने तत्काल संगठन की बात को मानकर अपना टिकट लौटा दिया। उनका यह फैसला उनके करियर का बड़ा टर्निंग पाइंट साबित हुआजिसके बाद संगठन में उनकी छवि एक ऐसे मजबूत नेता की बनी जिसके लिए पार्टी का हित सबसे पहले है। यह सब होने के बाद भी वह आम कार्यकर्ता बनकर पार्टी की नीतियों को जन -जन तक पहुंचाने का कार्य करते रहे। 2004 में उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने शहर की विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ आधुनिक विकास की नींव रखी।

2013 में पहली बार विधायक2020 में उच्च शिक्षा मंत्री

डॉ. मोहन यादव को पार्टी ने जो जिम्मेदारी सौंपी वह हर बार उस जिम्मेदारी पर खरे उतरे। 2011-13 में मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने उज्जैन को पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए। 2013 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारायहां भी सीएम मोहन सब पर भारी पड़े और उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की। 2013 से उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक चुने जाने के बाद, 2020 में उच्च शिक्षा मंत्री बने। यहां उन्होंने शिक्षा को भारतीय ज्ञान परंपरा को विरासत से जोड़ने का काम किया और नई शिक्षा नीति को सफलता के साथ लागू किया।

2023 में चुनाव जीते और सीएम बने

मध्यप्रदेश में 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की लेकिन इस बार केंद्रीय नेतृत्व ने नेतृत्व परिवर्तन का मन बना लिया। सीएम पद की कमान किसी नए चेहरे को देनी थी। ऐसे में दमाम दिग्गजों को दरकिनार करते हुए डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी। खास बात यह रही विधायक दल की बैठक से कुछ मिनट पहले विधायकों के फोटो सेशन में वह दिग्गजों से काफी दूर तीसरी लाइन में बैठे थे लेकिन जब मुख्यमंत्री पद के लिए उनका नाम का ऐलान हुआ तो एकाएक सब चौंक गए। जब उनके नाम की घोषणा हुए तो पहली बार तो उन्हें यकीन नहीं हुआ फिर दोबारा उनके नाम को दोहराया गया तब मोहन यादव उठकर सीधे  मंच पर पहुंचे। भाजपा विधायक दल ने सर्वसम्मति से उन्हें 2023 में अपना मुख्यमंत्री चुना जिसके बाद से अब तक का उनका सीएम पद का सफर एक सफल मुख्यमंत्री के तौर पर पहचान बना रहा है।

डॉ. मोहन यादव ने अपने राजनीतिक जीवन में शिक्षाविकास और सामाजिक समरसता को प्राथमिकता दी है। विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने जनता की समस्याओं को समझने और उन्हें हर संभव  दूर करने का प्रयास किया है। उनकी कार्यशैली और  तमाम निर्णयों  में पारदर्शिता और जवाबदेही स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

कुशल तलवारबाजयोग और कुश्ती के शौकीन डॉ. मोहन यादव

डॉ. मोहन यादव की  पारंपरिक भारतीय युद्ध-कलाखासकर तलवारबाजी में रुचि रही है। तलवारबाजी और कुश्ती जैसे पारंपरिक खेलों के प्रति उनका लगाव उन्हें एक अलग पहचान देता है जहां वे आधुनिक राजनीति के साथ-साथ भारतीय परंपराओं को भी जीवित रखने का प्रयास करते हैं। कई सार्वजनिक आयोजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उन्हें तलवार चलाते हुए देखा गया हैजो पारम्परिक परंपराओं से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।

वे कुश्ती के भी बड़े शौकीन माने जाते हैं। ग्रामीण और पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने में उनकी विशेष रुचि दिखाई देती है और वे अक्सर ऐसे आयोजनों में हिस्सा लेते नजर आते हैं। बाबा महाकाल के भक्त सीएम डॉ. मोहन यादव की गिनती देश के सबसे फिट राजनेताओं में होती है। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वह अपनी सेहत के प्रति हमेशा सजग नजर आते हैं। वह नियमित योग और ध्यान  भी करते हैं। 
 
सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे राजनेताओं में शुमार मोहन
 
डॉ.मोहन यादव की मजबूत अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें प्रशासन और नीतियों को समझने में बड़ी मदद की है। वे उन नेताओं में से एक हैं जिनकी पहचान  वैचारिक रूप से मजबूत राजनेता के रूप में होती है। डॉ. मोहन यादव का पढ़ाई का बैकग्राउंड भारतीय राजनीती में  अकादमिक रूप से बेहद मजबूत है। सीएम डॉ. मोहन यादव की गिनती आज  देश में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे राजनेताओं में होती है। उन्होंने  बी.एससी.एल.एल.बीएम.ए पॉलिटिकल साइंस के अलावा बिजनेस मैनेजमेंट में एमबीए पूर्ण करने के साथ ही  मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार के दौर पर अपनी पी.एचडी. भी पूर्ण की है। उनकी पी.एचडी. उन्हें भारतीय राजनीति के सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों पहलुओं की गहरी समझ देती है।

बाबा महाकाल के परम भक्त मोहन

उज्जैन की पावन धरा जहां काल का काल स्वयं विराजमान हैवहां की भक्ति की धारा में डॉ. मोहन यादव का  नाम बार-बार गूंजता है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव न केवल एक कुशल प्रशासक हैंबल्कि बाबा महाकाल के परम भक्त भी हैं। उनकी भक्ति पूरी तरह बाबा महाकाल को समर्पित है। डॉ. मोहन यादव की जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों महाकाल की नगरी से जुड़ी हुई हैं। बचपन से ही वे महाकाल मंदिर के दर्शन करते आ रहे हैं।

सीएम बनने के बाद डॉ. मोहन यादव ने कहा था कि वह पार्टी के छोटे से कार्यकर्ता हैं और उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई हैउसे वह पूरी सजगता के साथ निभाएंगे। आज  मुख्यमंत्री पद की  जिम्मेदारी को वह बड़ी कार्यकुशलता के साथ निभा रहे हैं। सूबे का मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने उस परंपरा को नहीं तोड़ाबल्कि उसे और मजबूत किया है। एक बार उन्होंने उज्जैन में रात बिताकर पुरानी अफवाह को भी तोड़ दिया कि कोई राजा या बड़ा नेता यहां रात नहीं गुजार सकता। उन्होंने साफ कहा महाकाल सबके राजा हैंहम सब उनके बच्चे हैं। यह बात उनकी भक्ति की गहराई को दर्शाता है। डॉ. मोहन यादव महाकाल में सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहते। वे महाकाल की नगरी को विश्व स्तर का आध्यात्मिक केंद्र बनाने में जुटे हैं। महाकाल लोक कॉरिडोरउज्जैन में उनके कार्यकाल में हो रहे ताबड़तोड़ विकास कार्यसिंहस्थ 2028 की तैयारियां सब उनके नेतृत्व में तेजी से हो रही हैं।

विक्रमादित्य के पग चिह्नों पर आगे बढ़ते मोहन

विक्रमादित्य का संदर्भ आम तौर पर एक आदर्शन्यायप्रिय और पराक्रमी राजा के रूप में लिया जाता है जिन्हें भारतीय परंपरा में सुशासनधर्म और लोककल्याण का प्रतीक माना जाता है। 

डॉ. मोहन यादव ने सम्राट विक्रमादित्य के ओजस्वी शासनउनके शौर्यसाहसपराक्रम एवं न्याय के प्रतिमानों को आत्मसात करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का प्रयास किया है। उनके कई निर्णयों में विक्रमादित्य की शासन प्रणाली की छाप स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। विक्रमोत्सववीर विक्रमादित्य शोधपीठ सहित वैदिक घड़ी की भी स्थापना, वैदिक घड़ी मोबाइल ऐप जैसे निर्णय उनकी आदर्श शासन प्रणाली को हिंदू पंचांग को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हैं। अप्रैल 2025 में दिल्ली के लाल किले पर 'विक्रमादित्य महानाट्यका मंचन कर उज्जैन की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय पटल पर उभारने का कार्य किया।

डॉ. मोहन यादव का जीवन संघर्षसमर्पण और सेवा की भावना का प्रतीक रहा है। एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने अपनी कार्यकुशलता,परिश्रम और लगन के बल पर भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है। वे जनता के बीच हर समय नजर जाते हैं जिससे आम जनता के बीच उनकी एक मजबूत पहचान बनी है। 

डॉ.मोहन यादव का व्यक्तित्व युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत है। वे यह संदेश देते हैं कि कड़ी मेहनतईमानदारी और सकारात्मक सोच के साथ कोई भी व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। उनके विचारों में राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा की गहरी जिजीविषा झलकती है। वे अपने मुख्यमंत्री पद के कार्यकाल में आगे भी अपने विकास कार्योंनिर्णयों से समाजप्रदेश और राष्ट्र को नई दिशा देते रहेंगे।