Wednesday, 25 March 2026

कुश्ती के अखाड़े से सूबे के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक… सब पर चला 'मोहन' का जादू !


मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 मार्च को अपना 61 वां जन्मदिन भी मना रहे हैं। जन्मदिन का त्यौहार न केवल उनके जीवन की उपलब्धियों को याद करने का अवसर देता हैबल्कि नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति उनके योगदान को भी उजागर करता है। विद्यार्थी परिषद और संघ के आदर्शों से राजनीति का ककहरा सीखने वाले डॉ.मोहन यादव मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी  संभालने के बाद से लगातार सक्रिय नजर आते हैं और प्रदेश में लगातार  विकास कार्यों को गति दे रहे हैं। बेहद कम समय में अपने सुशासन और त्वरित फैसलों के माध्यम से डॉ. मोहन यादव ने तेजी से  देश में सफल राजनेताओं में खुद को स्थापित लिया है। उनके कई फैसले और निर्णय अक्सर चर्चा में रहते हैं लेकिन डॉ. मोहन यादव का मुख्यमंत्री पद तक का  सफर हर किसी के लिए प्रेरणादाई रहा है।

संघ के सच्चे स्वयंसेवक मोहन यादव
 
डॉ. मोहन यादव छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे। उन्होंने विक्रम यूनिवर्सिटी से बीएससीएलएलबीएमएएमबीए और पीएचडी की डिग्री ली  है।  कॉलेज में रहते  मोहन यादव 1982 में छात्रसंघ के सह सचिव चुने गए थे। उनका आरएसएस  से गहरा राजनीतिक और वैचारिक जुड़ाव माना जाता है। आरएसएस में काम करते हुए ही उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से 1984 में की थी। विद्यार्थी परिषद से जुड़कर ही उनकी पहचान सड़क पर संघर्ष करने वाले नेता की बनी जिसके चलते उन्हें 1986 में ही विद्यार्थी परिषद का प्रमुख बना दिया गया। पार्टी की सभी जिम्मेदारियां उन्होनें बखूबी निभाई और एकाएक वह पार्टी संगठन की नजर में आ गए और देखते  विद्यार्थी परिषद के प्रदेश मंत्रीअध्यक्षराष्ट्रीय मंत्री जैसे अहम पदों की जिम्मेदारियां संभालते हुए डॉ. मोहन यादव उज्जैन समेत पूरे मालवा में अपनी अलहदा पहचान बनाने में कामयाब हुए। 
 
2003 में विधायक का टिकट लौटाया

2003 में पूरे सूबे  में जब भगवा लहर चरम पर चल रही थी तब भाजपा ने उन्हें उज्जैन जिले की बड़नगर विधानसभा सीट से विधायक का टिकट दिया लेकिन जब किसी दूसरे नेता का नाम सामने आया तो उन्होंने तत्काल संगठन की बात को मानकर अपना टिकट लौटा दिया। उनका यह फैसला उनके करियर का बड़ा टर्निंग पाइंट साबित हुआजिसके बाद संगठन में उनकी छवि एक ऐसे मजबूत नेता की बनी जिसके लिए पार्टी का हित सबसे पहले है। यह सब होने के बाद भी वह आम कार्यकर्ता बनकर पार्टी की नीतियों को जन -जन तक पहुंचाने का कार्य करते रहे। 2004 में उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने शहर की विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ आधुनिक विकास की नींव रखी।

2013 में पहली बार विधायक2020 में उच्च शिक्षा मंत्री

डॉ. मोहन यादव को पार्टी ने जो जिम्मेदारी सौंपी वह हर बार उस जिम्मेदारी पर खरे उतरे। 2011-13 में मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने उज्जैन को पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए। 2013 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारायहां भी सीएम मोहन सब पर भारी पड़े और उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की। 2013 से उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक चुने जाने के बाद, 2020 में उच्च शिक्षा मंत्री बने। यहां उन्होंने शिक्षा को भारतीय ज्ञान परंपरा को विरासत से जोड़ने का काम किया और नई शिक्षा नीति को सफलता के साथ लागू किया।

2023 में चुनाव जीते और सीएम बने

मध्यप्रदेश में 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की लेकिन इस बार केंद्रीय नेतृत्व ने नेतृत्व परिवर्तन का मन बना लिया। सीएम पद की कमान किसी नए चेहरे को देनी थी। ऐसे में दमाम दिग्गजों को दरकिनार करते हुए डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी। खास बात यह रही विधायक दल की बैठक से कुछ मिनट पहले विधायकों के फोटो सेशन में वह दिग्गजों से काफी दूर तीसरी लाइन में बैठे थे लेकिन जब मुख्यमंत्री पद के लिए उनका नाम का ऐलान हुआ तो एकाएक सब चौंक गए। जब उनके नाम की घोषणा हुए तो पहली बार तो उन्हें यकीन नहीं हुआ फिर दोबारा उनके नाम को दोहराया गया तब मोहन यादव उठकर सीधे  मंच पर पहुंचे। भाजपा विधायक दल ने सर्वसम्मति से उन्हें 2023 में अपना मुख्यमंत्री चुना जिसके बाद से अब तक का उनका सीएम पद का सफर एक सफल मुख्यमंत्री के तौर पर पहचान बना रहा है।

डॉ. मोहन यादव ने अपने राजनीतिक जीवन में शिक्षाविकास और सामाजिक समरसता को प्राथमिकता दी है। विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने जनता की समस्याओं को समझने और उन्हें हर संभव  दूर करने का प्रयास किया है। उनकी कार्यशैली और  तमाम निर्णयों  में पारदर्शिता और जवाबदेही स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

कुशल तलवारबाजयोग और कुश्ती के शौकीन डॉ. मोहन यादव

डॉ. मोहन यादव की  पारंपरिक भारतीय युद्ध-कलाखासकर तलवारबाजी में रुचि रही है। तलवारबाजी और कुश्ती जैसे पारंपरिक खेलों के प्रति उनका लगाव उन्हें एक अलग पहचान देता है जहां वे आधुनिक राजनीति के साथ-साथ भारतीय परंपराओं को भी जीवित रखने का प्रयास करते हैं। कई सार्वजनिक आयोजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उन्हें तलवार चलाते हुए देखा गया हैजो पारम्परिक परंपराओं से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।

वे कुश्ती के भी बड़े शौकीन माने जाते हैं। ग्रामीण और पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने में उनकी विशेष रुचि दिखाई देती है और वे अक्सर ऐसे आयोजनों में हिस्सा लेते नजर आते हैं। बाबा महाकाल के भक्त सीएम डॉ. मोहन यादव की गिनती देश के सबसे फिट राजनेताओं में होती है। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वह अपनी सेहत के प्रति हमेशा सजग नजर आते हैं। वह नियमित योग और ध्यान  भी करते हैं। 
 
सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे राजनेताओं में शुमार मोहन
 
डॉ.मोहन यादव की मजबूत अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें प्रशासन और नीतियों को समझने में बड़ी मदद की है। वे उन नेताओं में से एक हैं जिनकी पहचान  वैचारिक रूप से मजबूत राजनेता के रूप में होती है। डॉ. मोहन यादव का पढ़ाई का बैकग्राउंड भारतीय राजनीती में  अकादमिक रूप से बेहद मजबूत है। सीएम डॉ. मोहन यादव की गिनती आज  देश में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे राजनेताओं में होती है। उन्होंने  बी.एससी.एल.एल.बीएम.ए पॉलिटिकल साइंस के अलावा बिजनेस मैनेजमेंट में एमबीए पूर्ण करने के साथ ही  मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार के दौर पर अपनी पी.एचडी. भी पूर्ण की है। उनकी पी.एचडी. उन्हें भारतीय राजनीति के सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों पहलुओं की गहरी समझ देती है।

बाबा महाकाल के परम भक्त मोहन

उज्जैन की पावन धरा जहां काल का काल स्वयं विराजमान हैवहां की भक्ति की धारा में डॉ. मोहन यादव का  नाम बार-बार गूंजता है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव न केवल एक कुशल प्रशासक हैंबल्कि बाबा महाकाल के परम भक्त भी हैं। उनकी भक्ति पूरी तरह बाबा महाकाल को समर्पित है। डॉ. मोहन यादव की जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों महाकाल की नगरी से जुड़ी हुई हैं। बचपन से ही वे महाकाल मंदिर के दर्शन करते आ रहे हैं।

सीएम बनने के बाद डॉ. मोहन यादव ने कहा था कि वह पार्टी के छोटे से कार्यकर्ता हैं और उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई हैउसे वह पूरी सजगता के साथ निभाएंगे। आज  मुख्यमंत्री पद की  जिम्मेदारी को वह बड़ी कार्यकुशलता के साथ निभा रहे हैं। सूबे का मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने उस परंपरा को नहीं तोड़ाबल्कि उसे और मजबूत किया है। एक बार उन्होंने उज्जैन में रात बिताकर पुरानी अफवाह को भी तोड़ दिया कि कोई राजा या बड़ा नेता यहां रात नहीं गुजार सकता। उन्होंने साफ कहा महाकाल सबके राजा हैंहम सब उनके बच्चे हैं। यह बात उनकी भक्ति की गहराई को दर्शाता है। डॉ. मोहन यादव महाकाल में सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहते। वे महाकाल की नगरी को विश्व स्तर का आध्यात्मिक केंद्र बनाने में जुटे हैं। महाकाल लोक कॉरिडोरउज्जैन में उनके कार्यकाल में हो रहे ताबड़तोड़ विकास कार्यसिंहस्थ 2028 की तैयारियां सब उनके नेतृत्व में तेजी से हो रही हैं।

विक्रमादित्य के पग चिह्नों पर आगे बढ़ते मोहन

विक्रमादित्य का संदर्भ आम तौर पर एक आदर्शन्यायप्रिय और पराक्रमी राजा के रूप में लिया जाता है जिन्हें भारतीय परंपरा में सुशासनधर्म और लोककल्याण का प्रतीक माना जाता है। 

डॉ. मोहन यादव ने सम्राट विक्रमादित्य के ओजस्वी शासनउनके शौर्यसाहसपराक्रम एवं न्याय के प्रतिमानों को आत्मसात करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का प्रयास किया है। उनके कई निर्णयों में विक्रमादित्य की शासन प्रणाली की छाप स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। विक्रमोत्सववीर विक्रमादित्य शोधपीठ सहित वैदिक घड़ी की भी स्थापना, वैदिक घड़ी मोबाइल ऐप जैसे निर्णय उनकी आदर्श शासन प्रणाली को हिंदू पंचांग को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हैं। अप्रैल 2025 में दिल्ली के लाल किले पर 'विक्रमादित्य महानाट्यका मंचन कर उज्जैन की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय पटल पर उभारने का कार्य किया।

डॉ. मोहन यादव का जीवन संघर्षसमर्पण और सेवा की भावना का प्रतीक रहा है। एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने अपनी कार्यकुशलता,परिश्रम और लगन के बल पर भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है। वे जनता के बीच हर समय नजर जाते हैं जिससे आम जनता के बीच उनकी एक मजबूत पहचान बनी है। 

डॉ.मोहन यादव का व्यक्तित्व युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत है। वे यह संदेश देते हैं कि कड़ी मेहनतईमानदारी और सकारात्मक सोच के साथ कोई भी व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। उनके विचारों में राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा की गहरी जिजीविषा झलकती है। वे अपने मुख्यमंत्री पद के कार्यकाल में आगे भी अपने विकास कार्योंनिर्णयों से समाजप्रदेश और राष्ट्र को नई दिशा देते रहेंगे।