मंगलवार, 14 अप्रैल 2009

बनारस के पड़ाव पर कठिन होती डॉ जोशी की जीत की डगर (लोक सभा का महासमर )......














दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है.... इस बार उत्तर प्रदेश पर सभी की नजरे लगी है... राज्य में पहले चरण के मतदान की सभी तैयारिया पूरी हो गई है .... आगामी १६ अप्रैल को यहाँ पर मतदानहोने जा रहा है.... इस बार उत्तर प्रदेश की पहले चरण की कुछ सीटो पर कई दिग्गज नेताओ की प्रतिष्ठा दाव परलगी है.... पहले चरण की जिन सीट पर यहाँ पर मतदान हो रहा है उसमे सबसे " हॉट सीट" अगर कोई है तो वह " वाराणसी " है..... यहाँ पर १६ तारीख को वोट पड़ने जा रहे है.... पूर्व केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री "डॉ। मुरली मनोहरजोशी" इस बार यहाँ से बीजेपी के प्रत्याशी के तौर पर दंगल में है..... पिछली बार इलाहाबाद से हार जाने के कारण१५ वी लोक सभा में उन्होंने काशी को अपनी रणभूमि बनाया है .... लेकिन इस बार यहाँ पर भी जोशी का रास्ताआसान नही है... वैसे ,डॉ जोशी ने इस बार पहले से ही यह तय कर लिया था की वह वाराणसी से ही बीजेपी के प्रत्याशी होंगे... इसकारण उनका नाम बीजेपी ने बहुत पहले अपनी पहली लिस्ट में ही घोषित कर दिया था.... उस समय जोशी काआकलन यह था इलाहाबाद के मुकाबले वाराणसी उनके लिए ज्यादा सुरक्षित है... लेकिन अब चुनावी बेला में यह आंकलन उनका ख़ुद का गणित गडबडा रहा है ... आज आलम यह है भाजपा की चुनावी कमानसँभालने वाले जोशी के रणनीतिकार अब यह कहने लगे है जोशी ने यहाँ आकर भारी गलती कर दी है... संभवतया इसका खामियाजा उनको चुनावो के बाद हार के रूप में भुगतना पड़ सकता है॥पूर्वांचल के सदर मुकाम माने जाने वाले बनारस का इस बार का मुकाबला चतुस्कोनीय हो गया है... जोशी केमुकाबले के लिए बीएसपी की बहनजी ने "माफिया डॉन" मुख्तार अंसारी को उतारा है तो वही सपा ने बीजेपी सेपाला बदले दबंग विधायक अजय राय पर अपना दाव खेला है.... कांग्रेस ने यहाँ इन सब की काट के लिए अपनेसीटिंग सांसद डॉ राजेश मिश्रा को दंगल में उतारा है॥ इस लिहाज से देखे तो सारे मत बटते दिख रहे है... कोई यहकह पाने की स्थिति में नही है काउंटिंग में कौन सा प्रत्याशी बदत बनाकर जीत के द्वारे पहुचता है... बताया जाता है की यहाँ पर पहले सपा के मौजूदा उम्मीद वार अजय राय बीजेपी के टिकेट से चुनाव लड़ने केइच्छुक थे... लेकिन हाई कमान के द्वारा डॉ जोशी को पहले से ही प्रत्याशी घोषित कर देने से उनकी संभावनाओ पर पलीता लग गया.... जिस कारण उनको सपा की ओर रुख करना पड़ा ... अब डॉ जोशी केगले की हड्डी अजय राय बन गए है... बताया जाता है अजय अभी सपा के टिकेट से चुनाव लड़ रहे है लेकिनउनके पहले बीजेपी से जुड़े होने के कारण इस चुनाव में उनको भाजपा के तमाम आनुषांगिक संगठनो का सहयोगमिल रहा है... यहाँ यह बताते चले विद्यार्थी परिसद जैसे संगठन भी अब अजय के साथ अंदरखाने से जोशी केविरोध में प्रचार कर रहे है ... अजय की पकड़ इलाके में सही है ओर उनको लोगो का अच्छा समर्थन मिल सकताहै॥ हालाँकि उनकी गिनती भी एक बाहुबली विधायक के तौर पर की जाती रही है॥ वह राजनीती में कोई नोसेखियेनही है... ३ बार गोल्साल से विधायक रह चुके है॥ इस लिहाज से उनको कम आंकना डॉ जोशी की बड़ी भूलहोगी... अगर ऐसा हो जाता है तो डॉ जोशी के बहुत सारे वोट उनसे दूर हो जायेंगे जो बीजेपी के सॉलिड वोट माने जासकते है.... डॉ जोशी की मुस्किले बदती जा रही है... उनकी राह में दूसरा रोड़ा " मुख्तार अंसारी " बने है... हालाँकि मुख्तारअभी जेल में बंद है लेकिन उनके भाई यहाँ पर भाई की जीत के लिए दिन रात एक किए हुए है.... मुख्तार कीगिनती बाहुबलियों में की जाती है... उनके साथ मुसलमानों का एक बड़ा वोट बैंक जा सकता है... कांग्रेस की ओरसे निवर्तमान सांसद राजेश मिश्रा जोशी की नई परेशानी बने हुए है ... मिश्रा के फिर से मैदान में आने और अजय के ताल ठोकने के चलते जोशी का गणित गडबडा गया है... हिन्दुओ के वोट तीनो में बट जायेंगे.... जिससे तीनो केसामने मुस्किले बढ गई है... खास तौर से जोशी के लिए नई मुश्किल यह है चुनावो की बेला में उनके खिलाफविरोधी " बाहरी" होने का आरोप लगा रहे है ... अगर इसने चुनाव में रंग दिखाना शुरू कर दिया तो डॉ जोशी केलोक सभा पहुचने की सम्भावनाये धरी की धरी रह जायेंगी... हालाँकि जोशी बाहरी होने पर अपना बचाव करतेहुए पुराने ज़माने के मदन मोहन मालवीय जैसे कई नामो को गिना रहे है.... लेकिन बाहरी भीतरी होने का मुद्दायहाँ के चुनाव में अपना असर दिखा रहा है.....अब देखना होगा हिंदू वोटरों के आसरे काशी में अपनी राजनीती के अन्तिम पड़ाव पर जोशी क्या गुल खिलाते है...? विरोधियो का दुष्प्रचार जारी है.... उनकी माने तो इलाहाबाद में जिस तरीके से उनको मुह की खानी पड़ी थी ऐसा ही हाल डॉ जोशी का यहाँ भी हो गया है ..... मुख्तार अंसारी भले ही गाजीपुर की जेल के अन्दर से ही अपनी रणनीतियों को बना रहे है लेकिन उनको कम आंकना भी भारी भूल होगी..... मुस्लिम तबके का एक बड़ा वोट उनके साथ जा सकता है लेकिन यहाँ यह भी बताते चले की समाजवादी पार्टी के पाले में भी कई मुस्लिम वोट आते दिखाई दे रहे है.... मतदाताओ की खामोशी यहाँ इस बार की अलग कहानी बता रही है... मुस्लिम वोटर दुविधा में है उनके यह समझ में नही आ रहा है की वह कहा जाए.....? अभी कांग्रेस के वर्त्तमान सांसद मिश्रा भी एक प्रत्याशी है... उनके साथ भी हिन्दुओ का बड़ा वोट जायेगा... साथ में कांग्रेस का पुराना वोट बैंक भी पाले में आएगा ..... चार लोगो को जबरदस्त लड़ाई ने इस बार वाराणसी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है... पिछले चुनाव की बात करे तो यह सीट कांग्रेस के खाते में गई थी ... राजेश मिश्रा ने बीजेपी के शंकर जायसवाल को तकरीबन ९०००० के अन्तर से
हराया था लेकिन इस बार कहानी अलग हो गई है... चारो मैदान में होने से एक दूसरे के वोट काटने से सारे समीकरण गडबडा गए है.... अपने विरोधी प्रत्याशियों के नाम घोषित होने से पहले तक डॉ जोशी फ्रंट फ़ुट पर खेल रहे थे सपा , बसपा , कांग्रेस की गुगली ने उनको चुनाव से पहले "बेक फ़ुट" पर ला दिया है ...... उनके चहरे पर चा रही चिंता की लकीरे बनारस की मौजूदा कहानी ख़ुद बयां कर रही है............. उनको यह सीट निकलने के लिए तगड़ा जोर लगाना पड़ेगा
कल मतदान है देखना होगा बनारस की जनता किसको वोट करती है.....? कल उत्तर प्रदेश की १६ सीट पर पहले चरण में वोट पड़ रहे है.... पिछली बार इन १६ सीटो में ७ बसपा, ५ सपा , २- २ कांग्रेस , बीजेपी के पाले में गई थी... जो भी हो डॉ जोशी के साथ इस समय कुछ भी सही नही चल रहा है .... देखना होगा इस बार ऊट किस करवट बैठता है? बदले समीकरणों के चलते सबसे बड़ी चुनोती सपा , बसपा जैसे दलो के पास इस चुनाव में यह है वह अपने प्रत्याशियों के पक्ष में काशी की हवा का रुख कर इस चुनाव में कोई बड़ा उलट फेर करे....|
आपको लोक सभा चुनावो पर लिखी जा रही "लोक सभा का महासमर" यात्रा कैसी लग रही है? इस पर अपनी बेबाक राय अपने कमेन्ट के माध्यम से मुझको जरूर पहुचाये ...आपके कमेन्ट की मुझको प्रतीक्षा रहेगी.........

14 टिप्‍पणियां:

अल्पना वर्मा ने कहा…

गहन विश्लेषण..न केवल डॉ.मनोहर जोशी को बनारस में मेरे ख्याल से इस बार भी बी जे पी को मुश्किल ही रहेगी हर जगह..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ये राजनीती का खेल है
किसी को जीत किसी को हार है
जो भी जीते.....देश का बँटा धार है

meetu ने कहा…

harsh ji lok sabha ka mahasamar achcha lag raha hai... aapki aane wali posto ka intajaar rahega... varansi par bahut achcha visleshan kiya hai.. aapko shukria... murli ki varanshi ki is baar ki raah aasaan nahi hai.. is seat par unke paseene choot rahe hai..

हर्षवर्धन ने कहा…

डॉक्टर जोशी बहुत अच्छे नेता साबित होते अगर इलाहाबाद में ही रहते। 3 बार लगातार जीत और सिर्फ 1 बार हारने से जोशीजी का इलाहाबाद छोड़कर बनारस चले जाना कहीं से सही नहीं है। अब वो जीतेंगे तो, एक सीट बचा पाएंगे 2 नुकसान करेंगे। हारेंगे तो, बनारस, इलाहाबाद और फूलपुर तीनों सीटों का नुकसान करेंगे। जबकि, इलाहाबाद अगर वो रहते तो, इलाहाबाद फूलपूर दोनों सीटें बीजेपी जीतती

mark rai ने कहा…

kaaphi achchhe tarike se prastut kiya gaya lekh....aap ki baat sahi jaan padti hai

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

sankat to hai pr jeet ho bhee saktee hai .

hem pandey ने कहा…

अजय राय के कारण जोशी जी का गणित गड़बड़ाया है. जीत सुनिश्चित नहीं दिखती. वैसे विगत अनुभव बताते हैं की चुनावी भविष्यवाणियाँ अक्सर विफल हो जाती हैं.

naresh ने कहा…

very good obsevation.

darshan ने कहा…

banaras me joshi ki muskile bad gayi hai yah sahi hai harsh ji lekin yah tay karna janata ka kaaam hai ki kaun uska pratinidhitv kare . janta ko is baar yah sabak sikhaane ka sahi mauka hai ki wah ek bahubli ko lok sabha bheje ya ek anubhavi dr ko .
aapki reporting ka andaaj mujhko bahut bhata hai. vishleshan aap achcha kar lete hai. aane wali report ka intjaar rahega.

शरद कुमार ने कहा…

Aap ka lekh bhut srahniy hai.

RD ने कहा…

Good analysis
also right approach of present.

Science Bloggers Association ने कहा…

सब रह की मर्जी।

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खुशियों का विज्ञान-3
एक साइंटिस्‍ट का दुखद अंत

mark rai ने कहा…

kaaphi achchhi post..mahasamar ka badhiya vishleshan...

Babli ने कहा…

बहुत ही शानदार लिखा है आपने !