Tuesday, August 16, 2016

जनता को निराश किया पीएम ने





आज से ठीक दो बरस पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने जब लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश के नाम अपना पहला संबोधन दिया था तो हर किसी ने मुक्त कंठ से उनकी प्रशंसा की थी | हर कोई उनकी तारीफों के कसीदे न केवल पढ़ रहा था बल्कि उन्हें लीक से अलग हटकर चलने वाला प्रधानमंत्री भी बता रहा था | वैसे भी इससे पूर्व जितने भी प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से बोले वह कमोवेश बिजली , पानी और शिक्षा , गरीबी जैसे मुद्दों पर ही बात करते नजर आये | यही नहीं मोदी ने नई लीक पर चलने का साहस ना केवल बीते बरस दिखाया बल्कि अपने भाषण से लोगों में  लाल किले  में  उत्साह और उमंग का संचार किया |

मोदी ने ना केवल जोशीले भाषण से सभी का दिल जीतने की कोशिश की बल्कि स्वच्छ भारत , निर्मल भारत और आदर्श ग्राम योजना  और सबका साथ सबका  विकास सरीखे वायदों से राजनीती में आदर्श लकीर खींचने  की कोशिशें तेज की लेकिन  इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले में  पी एम बदले बदले से नजर आये | इसका एक कारण यह हो सकता है पिछली बार वह दिल्ली के लिए नए थे और उनकी सरकार का हनीमून पीरियड  चल रहा था लेकिन ठीक दो साल के बाद अब सिस्टम के अन्दर काम करने पर उन्हें इस बात का भान हो चला है कथनी और करनी को अमली जामा पहनना इतना आसान नहीं है और वह भी उस देश में जहाँ पर नौकरशाही का दौर हावी हो और हवाई घोषणाओं का पिटारा खुलता आ रहा हो  शायद यही वजह रही प्रधानमंत्री के भाषण में वह तेज गायब था जो पिछली दफा हमें देखने को मिला |

लाल किले से मोदी पहली बार जहाँ 75 मिनट बोले  और दूसरी बार मोदी 86 मिनट बोले वहीँ लाल किले से लगातार तीसरी बार 95 मिनट बोलकर उन्होंने खुद अपना रिकॉर्ड तोड़ डाला | आज़ादी के दौर को याद करें तो उस दौर में नेहरु ने 72 मिनट का भाषण दिया था | इस तरह से मोदी का स्वतंत्रता दिवस पर दिया गया  अब तक का यह सबसे लम्बा  भाषण रहा  |  देशवासियों को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बार अपनी सरकार के कामकाज के बखान करने का कोई मौका नहीं छोड़ा संभवतया इसका कारण आने वाले समय में चार राज्यों में होने जा रहे विधान सभा चुनाव हों जहाँ आकंड़ों की बाजीगरी कर पी एम ने जनता को उलझाना मुनासिब समझा हो| 

 लाल किले से दिए गए अपने भाषण में पी एम मोदी ने स्वराज को सुराज में बदलने का संकल्प जताया और सुराज को आम आदमी के प्रति संवेदनशीलता के रूप में परिभाषित किया। अपने भाषण में मोदी सिर्फ और सिर्फ अपनी सरकार के सारे काम ही गिनाये। अस्पतालों में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन से लेकर पासपोर्ट बनाने में तेजी तक के मसलों को उन्होंने उठाया | कारोबारी माहौल बनाने से लेकर 21 करोड़ लोगों को जनधन योजना से सीधे जोड़ने के मसले पर संवाद स्थापित किया | महंगाई को छह फीसद से नीचे रखने और सस्ते एल ई डी बल्ब दिए जाने को उन्होंने सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया | दालों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने से लेकर नेताजी सुभाषचंद्र बोस से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करने और बीपीएल परिवारों के लिए स्वास्थ्य बीमा, वन रैंक वन पेंशन, उज्ज्वला योजना, बिजली से वंचित अठारह हजार गांवों में से दस हजार गांवों का विद्युतीकरण, जीएसटी विधेयक को संसद की मंजूरी और स्वतंत्रता सेनानियों की पेंशन में बीस फीसद की बढ़ोतरी का जिक्र कर उन्होंने भरोसा दिलाना चाहा कि सरकार लोगों से किए वादे के अनुरूप ही आगे बढ रही है| उन्होंने कहा इस सरकार से लोगों की अपेक्षाएं बढ़ी हैं | उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के बकाए के भुगतान और गुरु गोबिंद सिंह की तीन सौ पचासवीं जयंती का जिक्र कर उन्होंने उत्तर प्रदेश और पंजाब का दिल जीतने की कोशिश की, जहां कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं।

उन्होंने यह जताने से भी परहेज नहीं किया कि उनकी नीतियों में आदिवासी से लेकर गरीब और शोषित वंचित तबके तक शामिल हैं | गांधी और अम्बेडकर को साधकर उन्होने एक तीर से कई निशाने खेलने की कोशिश की |  पहली बार उनके भाषण में कॉरपरेट और नॉर्थ ईस्ट, टीम इंडिया शब्द गायब दिखा | मोदी ने अपने इस भाषण में  सिर्फ और सिर्फ अपनी सरकार की अब तक की उपलब्धियों का पिटारा ही खोला  |  मोदी ने पिछली बार गाँवों में शौचालय बनाने की बात की थी इस बार भी उन्होंने ढाई करोड़ शौचालय बनाने का काम पूरा होने की बात कही | मोदी के इस बार के भाषण में जहाँ कालाधन  गायब था वहीँ धरती के स्वर्ग कश्मीर के बिगड़ते हालातों और  दलित उत्पीडन की बढती घटनाओंपर कुछ नहीं कहा |   सांसद  आदर्श ग्राम  योजना  की प्रगति , स्वच्छ  भारत , पर भी वह ख़ामोशी की चादर ओढ़ लिए ।   ऐसे मसलों पर देश को पी एम की चुप्पी खूब खली | वह भी स्वतंत्रता दिवस का मौका जब पी एम लाल किले से देश के नाम अपना तीसरा संबोधन कर रहे थे और पिछले दोनों संबोधनों में उन्होंने इस मसले को पूरे देश के सामने उठाया था । 

इस बार पीएम ने पूरे विश्व के सामने पाक को बेनकाब कर दिया | प्रधानमंत्री ने बलूचिस्तान ,गिलगित  ,  पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तानी सेना के हाथों हो रहे मानवाधिकार हनन का मुद्दा उठा कर पाकिस्तान के प्रति सरकार के रुख में बदलाव के कड़े संकेत पहली बार लाल किले से दिए। लाल किले से यह किसी पीएम का पडोसी पर यह पहला सीधा वार रहा |  प्रधानमंत्री ने कहा जब पेशावर के एक स्कूल में आतंकी हमले में बच्चे मारे गए थे तो हमारी संसद में आंसू थे ।  भारतीय बच्चे आतंकित थे । यह हमारी मानवीयता का उदाहरण है लेकिन दूसरी तरफ देखिए जहां आतंकवाद को महिमामंडित किया जाता है ।  पाकिस्तान में बुरहान वानी का  जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह किस तरह की नीति है,जिसमें आतंकवादियों के साथ खुशी मनाई जाती है । 

वैसे प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत ईमानदारी और प्रशासनिक योग्यताओ और बेहतर कप्तान की योग्यताओं  पर शायद ही किसी को संदेह हो क्युकि मोदी एक मंझे  हुए राजनेता हैं और जनता के मूड को बखूबी पढने वाले राजनेता भी जो ऑडियंस देखकर भाषण देते हैं लेकिन लाल किले का इस बार का पूरा भाषण उन्होने न केवल बीच बीच में पर्ची देखकर  पढ़ा बल्कि वह  पानी पीकर धाराप्रवाह बोलते रहे और चुनावी बरस में महज सरकार की उपलब्धियों का ही जिक्र कर वाहवाही लेने की कोशिश की जिसने उस आम आदमी को लाल किले में निराश किया जिसके मन में मोदी ने बीते दो बरस में लाल किले की प्राचीर  से दिए अपने दो भाषणों में  नए  सपने जगाये थे । 

कुल मिलाकर स्वतंत्रता दिवस के अपने तीसरे भाषण में पी एम मोदी का पिछले बरस वाला जोश गायब दिखा | गुजराती दहाड़ भाषण से गायब ही रही शायद पी एम अपनी कैबिनेट इंडिया की फिरकी में उलझकर रह गए जिस कारण कश्मीर के हालातों , दलित उत्पीड़न की बढ़ रही घटनाओं पर  पी एम को न कुछ उगलते बन रहा था और ना ही कुछ निगलते | 

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