Monday, July 10, 2017

भारत चीन सम्बन्धों में तनाव की छाया




भारत और चीन के बीच तनाव और टकराव की स्थिति अभी भी कायम है | 1962 की भारत-चीन लड़ाई के बाद यह पहला मौका है जब सिक्किम से लगी सीमा पर भारत और चीन के बीच गतिरोध अपने चरम पर है | यह भी तब है जब हैम्बर्ग मे जी 20 समिट में दोनों मुल्कों के ताकतवर नेता मोदी और शी मुस्कुराहट के बीच मिल चुके हैं |  इसके बाद भी रिश्तों मे तल्खी थमने का नाम नहीं ले रही है | बीजिंग की सरकारी मीडिया ने हाल के दौर में जिस तरह के बयान दिये हैं उससे फिलहाल भारत और चीन के बीच वाकयुद्ध थमने के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं | ग्लोबल टाईम्स ने अपने संपादकीय मे साफ लिखा भारतीय फौज के मुक़ाबिल चीनी सेना ज्यादा ताकतवर है | धमकी भरे अंदाज मे उसने लिखा यदि भारतीय सेना सम्मानपूर्वक वापिस नहीं गई तो चीनी सेना उसे खदेड़ आएगी | 

बीजिंग के विदेश मंत्रालय के ऐसे बयान काफी दुर्भाग्यपूर्ण हैं वह भी तब जब भारत के साथ चीन का व्यापार बरस दर बरस कुलांचे मार रहा है और चीन के उत्पादों के लिए भारत एक बड़ा बाजार बना हुआ है | चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गैंग शुआंग ने तो हद ही कर दी | उन्होने धमकी भरे अंदाज मे कहा भारत को डोकलाम इलाके से अपनी सेना हटाने के लिए अब कड़े कदम उठाने ही होंगे | दोनों देशों के सैनिको की आवाजाही पूरे इलाके मे नजर आ रही है | भारत ने डोकलाम में जो सैनिक भेजे हैं, उन्हें नॉन काम्बैटिव मोड में तैनात किया है वहीं चीनी सेना तो घात लगाकर पूरे इलाके की सघन घेराबंदी करने मे जुटी हुई है मानो यह नए युद्ध की आहट हो चली है | चीन के लाख दबाव के बाद भी भारतीय सैनिक वहाँ से हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं |

 सिक्किम की सीमा पर स्थित डोकलाम  एक ऐसा इलाका है, जहां चीन, भारत और भूटान तीनों की सीमा मिलती है| असल मे जिस इलाके मे चीन सड़क बना रहा है उसका तीनों देशों के लिए विशेष सामरिक महत्व है | भारत की बात करें तो यह इलाका भूटान मे बेशक है लेकिन सड़क अगर बन जाती है तो यह तिब्बत की चुंबी घाटी तक करीब आ जाएगी ऐसे मे चीन की भारत पर पकड़ मजबूत हो जाएगी |  

आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से भी देखें तो तो अगर ऐसा हो जाता है तो चीन भारत के बेहद करीब आ जाएगा और भविष्य मे उसके लिए भारत पर चढ़ाई करना बहुत आसान हो जाएगा | भारतीय सेना के जानकार भी मानते हैं हिमालय में यही एकमात्र ऐसी जगह है जिसे भौगोलिक तौर पर भारतीय सेना भलीभांति समझती है और इसका सामरिक फ़ायदा ले सकती है | ये वही इलाका है जो भारत को सेवन सिस्टर्स नाम से जानी जाने वाली उत्तर पूर्वी राज्यों से जोड़ता है और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है | भारत और चीन के बीच 2 अहम दर्रे नाथुला और जेलपा भी यही खुलते हैं और इसी घाटी के ठीक नीचे है है सिलीगुड़ी का गलियारा जो भारत को नॉर्थ स्टेट से सीधे जोड़ता है | शायद भारत इस दौर मे इस इलाके के महत्व को समझ रहा है तभी उसने 16 जून से मुखर होकर चीन को आईना दिखाते हुए इस मसले पर भूटान का साथ दिया है | चीन की भारत की सीमा पर सड़क निर्माण की योजना को उसकी विस्तारवादी नीति का एक हिस्सा माना जा सकता है जहां उसकी कोशिश भारत को घेरने की रही है |

असल मे आज के दौर मे भारत की विदेश नीति जिस मोदिनोमिक्स की छाँव तले आगे जा रही है और वैश्विक  स्तर पर नया आकार ले रही है उससे चीन बौखलाया हुआ है जिसकी काट के लिए वह सीमा विवाद को नए सिरे से हवा देने की कोशिश कर रहा है | चीन दुनिया में अपनी धौंस दिखाते हुए भारत को हमेशा नीचा दिखाने की कोशिशें अरसे से करता रहा है | बीते दिनों दलाई लामा के अरुणाचल दौरे को लेकर भी उसने सवाल उठाए | इससे पहले उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों पर भी उसके सैनिकों की आवाजाही देखी गई |  कुछ बरस पहले शी के भारत दौरे के समय भी सीमा विवाद चरम पर पहुँच गया था लेकिन शी की यात्रा पूरा होते ही सब पहले जैसा हो गया लेकिन इस बार का माजरा कुछ और है | 

भारत जिस तरह से अभी वैश्विक स्तर पर कदमताल मोदी की अगुवाई मे कर रहा है उससे चीन परेशान है | हाल के बरस मे भारत के पश्चिम के कई मुल्कों के साथ रिश्ते जहां मजबूत हुए हैं वही अरब देशों के साथ भी मोदी ने नई कदमताल कर विदेश नीति के मोर्चे पर नई इबारत गढ़ने का काम किया है | यही नहीं पीएम की लुक ईस्ट पॉलिसी ने भी चीन के नाक मे दम किया हुआ है जहां जापान , फिलपीन्स , इन्डोनेशिया , मलेशिया, सिंगापुर जैसे अहम चीन के विरोधी देशों को साधकर मोदी ने नया कूटनीतिक दांव खेला है जो अपना असर दिखा रहा है इससे चीन परेशान है क्युकि भारत आज एशिया मे बड़ी ताकत के तौर पर उभर रहा है और दुनिया के लिए बड़ा बाजार है इससे चीन की चिंता बढ़नी लाज़मी है |

मौजूदा दौर मे चीन भूटान और भारत से बहुत खफा है तो इसकी बड़ी वजह ओबीआर गलियारा है जिसमें दोनों देश शामिल नहीं हैं | चीन किसी तरह से भूटान को इस विशाल परियोजना मे शामिल करने पर ज़ोर दे रहा था जिसका भूटान ने मुखर होकर विरोध किया जबकि श्रीलंका , म्यांमार और नेपाल तक को इसमे शामिल कर चीन ने भारत की बड़ी घेराबंदी करने का प्लान तैयार किया है |  वह एशिया मे भारत को नीचा दिखाने के लिए भारत के सभी पड़ोसियो को अपने पाले मे लाने की कोशिश अरसे से करता रहा है जिसमे पाक उसका बड़ा सहयोगी है |

 पूरी दुनिया भले ही पाक प्रायोजित आतंकवाद की कड़े शब्दों मे निंदा करती हो लेकिन चीन पाक के प्रति हमदर्दी दिखाने से बाज नहीं आता | वह जैश , हिजबुल, लश्कर के आकाओं के खिलाफ एक शब्द भी नहीं उगलता और एन एस जी और सुरक्षा परिषद मे भारत की सदस्यता पर जबरन अड़ंगा लगाता रहता है | 

नेपाल , बांग्लादेश , म्यांमार , श्रीलंका की कई आर्थिक योजनाओं मे वह बड़ा साझीदार जहां है वहीं वियतनाम से लेकर फिलीपींस तक अपनी विस्तारवादी योजनाओं को नए पंख लगाने मे लगा हुआ है | जापान, ताइवान, भूटान , इन्डोनेशिया , वियतनाम , थाईलैंड सरीखे देशो के साथ चीन की तनातनी हाल के दौर मे काफी बढ़ी है | दक्षिणी चीन सागर पर तो चीन अपना मालिकाना हक जताता रहा है | वह भी तब जब अंतर्राष्ट्रीय अदालत का  फैसला उसके खिलाफ गया है | दुनिया की सुनने के बजाय वह दक्षिणी चीन सागर में कई आयलेन्ड्स भी बना रहा है जिसमें उसकी नजरें वहाँ की अकूत खनिज सम्पदा पर जा टिकी है |

 भारत की साख जिस तरह बीते कुछ बरस मे दुनिया मे बढ़ी है उससे चीन की चिंता बढ़नी लाज़मी ही है क्युकि मोदी की कूटनीति हर मोर्चे पर चीन के विरोधी देशों को जहां साध रही है वही अमरीका के साथ भारत के मजबूत होते रिश्तों को भी चीन नहीं पचा पा रहा और तो और अब भारत के रिश्ते इज़राइल के साथ दशकों के बाद जिस तरह से प्रगाढ़ हो रहे हैं और डिफेंस सेक्टर मे जिस तर्ज पर वह भारत के साथ सैनिक साजो सामान की बड़ी डील करने जा रहा है उससे ड्रैगन की चिंता और अधिक बढ़ गई है | 

इसी हफ्ते मालबार मे भारत, जापान और अमरीकी सेना का संयुक्त अभ्यास चल रहा है | यह भी चीन के लिए परेशानी की बड़ी वजह बन रहा है क्युकि चीन हिन्द महासागर मे भी अपने जहाज़ी बेड़े तैनात कर चुका है | अब इस संयुक्त युद्धाभ्यास से अमरीका और जापान भारत के करीब आ गए हैं तो चीन का नाराज होना लाज़मी है क्युकि एशिया मे वह खुद के अलावे किसी को बड़ी ताकत के रूप मे उभारते हुए नहीं देखना चाहता है |  इसी कड़ी में उसने हालिया दिनों मे भूटान के सड़क तीर के आसरे भारत को अपना निशाना बनाया है | भारत और भूटान के बीच गहरे संबंध रहे हैं जबकि चीन और भूटान के बीच कुछ खास राजनयिक संबंध नहीं हैं | 

विदेश नीति के हर मसले पर भूटान भारत से दिशा निर्देश लेता रहा है | दोनों देशों के बीच इस तरह की एक संधि भी है जिसके चलते भारत से भूटान ने मदद मांगी और भारत ने तत्काल अपने परम मित्र देश को सैनिको की मदद भेजी | चीन की कोशिश थी किसी भी तरह इस मसले पर भूटान पर हावी हुआ जाएँ लेकिन यहाँ पर उसका दांव उल्टा पड गया | भारत चीन की हालिया तनातनी 16 जून से शुरू हुई जब डोकलाम इलाके में चीन को भारत ने सड़क बनाने से रोक दिया जिससे उसकी परेशानी बढ़ गई |  इसके बाद चीनी सेना ने भारत के दो बंकर नष्ट कर दिए और इस घटना के बाद से बयानों का दौर जारी है | हालात कब तक सामान्य होंगे इस बारे में कुछ भी कहा नहीं जा सकता |

  इस मसले पर भूटान ने भारत की मदद से चीन के सामने अपनी चिंता ज़ाहिर की क्योंकि चीन और भूटान के बीच राजनयिक संबंध नहीं है | इस बीच चीन ने भी  भारत से सेना की गतिविधि को लेकर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई |  डोकलाम पठार से सिर्फ 10-12 किमी पर ही चीन का शहर याडोंग है, जो हर मौसम में चालू रहने वाली सड़क से जुड़ा है जबकि डोकाला पठार नाथूला से महज 15 किमी की दूरी पर है | 

भूटान सरकार भी डोकलाम इलाके में चीन की मौजूदगी का विरोध कर चुकी है, जो कि भूटान सेना के बेस से बेहद करीब है | चीन का आरोप है भारत की सेना इस इलाके मे दाखिल हुई लेकिन सच्चाई ये है कि 16 जून को चीनी सेना ने डोकलाम में सड़क बनाने की कोशिश की तो  भूटानी सेना के गश्ती दल ने उन्हें रोकने की कोशिश की जिसके बाद भूटान ने चीन से विरोध दर्ज कराया और कहा यह डोकलाम में सड़क निर्माण समझौते का उल्लंघन है | तब भूटानी सेना के साथ डोकाला में मौजूद भारतीय सेना के लोग वहां पहुंचे और इन सबके  बीच चीन अपनी  सरकारी मीडिया के जरिये आक्रामक बयान दे रहा है।

अब चीन ने कहा है कि चीन अपनी सीमा की संप्रभुता बरकरार रखने के लिए कटिबद्ध है और इसके लिए वह युद्ध भी कर सकता है | दोनों देशों की सेनाओं के बीच 1962 के बाद ये सबसे लंबा गतिरोध है। इस एपिसोड़ का और अधिक लंबा चलना दोनों देशों के लिए घातक होगा | देखना होगा रिश्तों में यह तल्खी कब तक जारी रहती है ?

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