Monday, 29 June 2026

मोहन के नेतृत्व में एमपी का धार्मिक और सांस्कृतिक अभ्युदय

 

देश का का हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, मंदिरों, नदियों और आध्यात्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्षों के सफल कार्यकाल में देश के भीतर धार्मिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की एक विशेष लहर देखने को मिली है। सही मायनों में कहा जाए तो मोदी सरकार के 12 साल मध्यप्रदेश के लिए भी धार्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का काल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में एमपी धार्मिक और सांस्कृतिक अभ्युदय का नया अध्याय लिख रहा है। उनकी सरकार ने “विरासत से विकास” के मंत्र को अपनाते हुए आस्था, संस्कृति और आर्थिक समृद्धि को एक सूत्र में पिरोया है। 'विरासत से विकास' के मंत्र के साथ मोहन सरकार सनातन संस्कृति को संरक्षित करते हुए धार्मिक पर्यटन को आर्थिक समृद्धि से जोड़ने का उल्लेखनीय कार्य कर रही है।  उज्जैन के महाकाल लोक से लेकर ओरछा के राम राजा लोक तक, श्री राम गमन पथ से श्री कृष्ण पाथेय से भोजशाला, चित्रकूट  से लेकर एकात्म धाम तक प्रदेश में आस्था,आधुनिकता और विकास  का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।  डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में धार्मिक स्थलों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। महाकाल लोक की सफलता के बाद कई अन्य स्थानों पर इसी तर्ज पर नए 'लोक' पूरे प्रदेश में विकसित किए जा रहे हैं। उज्जैन में महाकाल लोक परिसर का विकास एक मील का पत्थर साबित हुआ है। यहां वॉटर स्क्रीन, फाउंटेन शो, मिलेट से बने श्री अन्न लड्डू प्रसादम और महाकालेश्वर बैंड जैसी अनूठी सुविधाएं शुरू की गई हैं। महाकालेश्वर मंदिर के आसपास भक्त निवास, 11 प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार और अन्य सुविधाओं का विस्तार हो रहा है।

ओरछा में राम राजा लोक के द्वितीय चरण का निर्माण शुरू हो चुका है।  श्री राम राजा लोक, ओरछा, राम वन गमन मार्ग को भी  विकसित किया जा रहा है। मोहन सरकार के प्रयासों से ओरछा में 500 वर्ष पुराना श्रीराजा राम का वैभव एक बार फिर जीवंत हो रहा है। चित्रकूट को अयोध्या की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही, लगभग 1,450 किलोमीटर लंबे 'राम वन पथ गमन' मार्ग को एक भव्य धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने की पूरी कार्ययोजना लागू की गई है। इसी तरह से मोहन का बड़ा ड्रीम प्रोजेक्ट श्री कृष्ण पाथेय है। कृष्ण से जुड़े स्थानों को जोड़ने वाली योजना के तहत इसे भी भारी भरकम बजट आवंटित किया गया है और श्री कृष्ण पाथेय ट्रस्ट का गठन हुआ है। इसके साथ ही उज्जैन, जानापाव जैसे भगवान श्रीकृष्ण के लीला स्थलों को भी तीर्थ के रूप में विकसित करने की बड़ी कार्ययोजना पर काम चल रहा है। यूनेस्को के विश्व हेरिटेज सेंटर द्वारा प्रदेश की 6 धरोहरों को सम्मिलित किया गया है जिनमें ग्वालियर किला, धमनार का ऐतिहासिक समूह, भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर, चंबल घाटी के रॉक कला स्थल, खूनी भंडारा बुरहानपुर और रामनगर, मंडला का गौंड स्मारक शामिल है। लगभग 900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 20 से ज्यादा भव्य 'लोकों  का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। एमपी आने वाले पर्यटकों को हवाई यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराने के लिये पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा एवं पीएम श्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा से कई लोग लाभान्वित हुए हैं।

मोहन सरकार ने प्रदेश में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के विकास पर विशेष जोर दिया है और अब वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक अभ्युदय के संकल्प को मध्यप्रदेश में पूरा करने की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव प्रदेश के  सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सनातन परंपरा के गौरव को संरक्षित करने की दिशा में लगातार कई ठोस निर्णय ले रहे हैं जो भविष्य में  धार्मिक और सांस्कृतिक अभ्युदय की नई लकीर खींचेंगे। मोहन सरकार ने धार्मिक पर्यटन को आर्थिक विकास का इंजन बनाया है। हेलीकॉप्टर सेवाएं, एयर एंबुलेंस और बेहतर कनेक्टिविटी से श्रद्धालु अब अधिक आसानी से पहुंच रहे हैं। अयोध्या में आस्था भवन का निर्माण भी इस दिशा में महत्वपूर्ण है। ये प्रयास न केवल सनातन परंपराओं को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति दे रहे हैं। गौ-पालन को बढ़ावा, गौ-दुग्ध पर बोनस और गौशालाओं को समर्थन देकर सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित भी  भी दिया जा रहा है। वैष्णो देवी मॉडल अपनाते हुए प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। ओरछा में श्री राम राजा लोक का पुनर्विकास, चित्रकूट विकास प्राधिकरण की स्थापना और स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत कई केंद्रों की स्थापना की जा रही है। 

बीते दिनों  मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी उस समय बनी, जब सीएम डॉ. मोहन यादव मंदिर पहुंचे और मां वाग्देवी के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की। पद पर रहते हुए भोजशाला पहुंचने वाले डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने।15 मई को इंदौर खंडपीठ द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण निर्णय के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने हिंदू पक्ष को वर्षभर पूजा-अर्चना की अनुमति दी। इस फैसले के बाद पहली बार प्रदेश के किसी मुख्यमंत्री का भोजशाला पहुंचना राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। धार में माता सरस्वती लोक की बड़ी घोषणा हुई जिसके बाद धार पुरातत्व का पर्यटन का भी केन्द्र बनेगा। यहीं पर राजा भोज शोध संस्थान भी बनेगा। इन बड़ी घोषणाओँ को मोहन सरकार की गंभीरता और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 

​2028 में  उज्जैन सिंहस्थ आयोजन हेतु प्रदेश में  व्यापक तैयारी चल रही है। यहाँ पर राज्य सरकार व्यापक स्तर पर तीर्थयात्रियों के लिए विश्व-स्तरीय सुविधाएं और अधोसंरचना विकसित कर रही है। शिप्रा घाटों का विकास, आधारभूत संरचना मजबूत करना और आध्यात्मिक अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में तेजी से कार्य चल रहा है। सरकार ने धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के माध्यम से कई मंदिरों के जीर्णोद्धार, परिसर विकास और सुविधाओं के विस्तार का बड़ा रोडमैप तैयार किया है। यही नहीं  वैष्णो देवी यात्रा से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के धार्मिक स्थलों को और अधिक भव्य, आकर्षक तथा व्यवस्थित बनाने की दिशा में सतत रूप से प्रयत्नशील नजर आते हैं। डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से जागृत हो रहा है, बल्कि यह भारत की प्राचीन सनातन परंपरा का वैश्विक केंद्र बनने की राह पर है। विरासत को संजोते हुए विकास की यह यात्रा प्रदेशवासियों के लिए गर्व का विषय है। भविष्य में सिंहस्थ 2028 और अन्य बड़े आयोजन इस अभ्युदय को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।


No comments: