रविवार, 16 मई 2010

"स्वर्णिम मध्य प्रदेश "और रोने की राजनीती........


११ से १४ मई तक चले मध्य प्रदेश विधान सभा के चार दिवसीय विशेष सत्र का समापन बीते दिनों मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान के भाषणों के साथ समाप्त हो गया... यू तो शिवराज सिंह जी ने ये विशेष सत्र "स्वर्णिम मध्य प्रदेश" बनाने के लिए बुलवाया था लेकिन विपक्ष की गैर मौजूदगी में ये सत्र फीका रहा.....इस विशेष सत्र को इतिहास के पन्नो में एक कलंक के रूप में याद किया जायेगा...


इस विशेष सत्र में कवरेज के दौरान मुझे जाना पड़ा.... इस दरमियान मुझे जनप्रतिनिधियों के रंग ढंग सदन में देखने का अवसर मिला... कांग्रेस के नेताओं ने पूरे सत्र में अपनी नौटंकिया की... शिवराज इस सत्र में प्रतिभा देवी सिंह पाटिल को बुलाना चाहते थे जिसके लिए प्रतिभा ताई ने दिल्ली में शिवराज के साथ मुलाकात में अपनी हामी भी भर दी थी लेकिन कांग्रेसी विधायको के दबाव में राष्ट्रपति को अपना निर्णय बदलना पड़ा...


अब इसे क्या कहा जाए ? शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के विधायको को इस बात के लिए आश्वस्त किया था कि इस विशेष सत्र में उनकी बातें सुनी जायेगी.... किसी भी मुद्दे पर चर्चा अगर विपक्ष करना चाहता है तो उसका भाजपा सदन में स्वागत करेगी.....


यही नही मुख्यमंत्री के स्वर्णिम मध्य प्रदेश को साकार करने के लिए कांग्रेस के विधायक अपने सुझाव भी दे सकते थे लेकिन विपक्ष अपने निर्णय से नही मुकरा ....सड़को के बाहर नौटंकियो को करने वाले इन कांग्रेसी नेताओ के लिए इस बार सरकार की कारगुजारियो को सदन में रखने का सुनहरा मौका था लेकिन विपक्षी नेता कहाँ मानने वाले थे..... उन्होंने मानो भाजपा के विशेष सत्र में न जाने का संकल्प ही कर रखा था...


कांग्रेस विधायको ने चार दिवसीय विशेष सत्र का पूरी तरह से बहिस्कार किया...इस दौरान विधायको ने विधान सभा के द्वार पर धरना दिया और अपनी बाहों में काली पट्टी बाधकर जहाँ अपना रोष जाहिर किया वही भोपाल के "इकबाल" मैदान में "समानांतर विधान सभा चलाकर नयी नौटंकिया की...
हालाँकि इस विशेष सत्र में कई भाजपा विधायको ने शिवराज सिंह चौहान को स्वर्णिम मध्य प्रदेश बनाने के लिए अपने सुझाव दिए जिस पर सी ऍम ने अमल करने का भरोसा दिलाया है लेकिन मध्य प्रदेश के कांग्रेसियों ने इस सत्र में शालीन आचरण की तमाम सीमाओं को लांघ दिया..

इस आचरण पर पिछले कई दिनों से सभी खबरिया चैनलों में खबरे चल रही है जिनको आप सभी ने देखा भी होगा... इस के चलते मध्य प्रदेश की छवि पूरे देश में बदनाम हो रही है... जनप्रतिनिधियों के इस आचरण पर सवाल उठने लाजमी है.... आखिर हम जिस कामो को पूरा करने के लिए इन्हें सदन में भेजते है क्या वे उनको सदन में उठा पाते है...


दरअसल मामला ये है कि कांग्रेस विधायक कल्पना परुलेकर द्वारा भाजपा विधायक ललिता यादव पर टिप्पणियों के बाद सदन की गरिमा तार तार हो गयी... ललिता यादव को सदन में घुसते समय मैंने देखा था.... जब वे घुस रही थी तो सदन के प्रवेश द्वार पर कांग्रेसी विधायको ने उन पर फब्तियां कसते हुए ये कहा वे देर से इसलिए और रही है क्युकि वे ब्यूटी पार्लर से होकर आ रही है ....


इस घटना से ललिता इतना आहत हुई वह अपने आसुओ को सदन में नही रोक पायी जिसके बाद विधान सभा अध्यक्ष इश्वर दास रोहानी इतना आहत हो गए कि उनकी आँखों से भी आंसू निकल आये... शाम के समय अपने चेंबर में रोहानी को रोते देख मुझे यकीन ही नही हुआ क्या ये विधान सभा अध्यक्ष रोहानी ही है जिनको सख्त प्रशासक माना जाता है...

इसके बाद अगले दिन भाजपा ने इन कांग्रेसी विधायको के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया जिसका कांग्रेसियों ने जमकर विरोध किया... इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी कांग्रेसी विधायको ने अपने किये गुनाह पर माफ़ी नही मांगी और इश्वर दास रोहानी के आंसुओ को "घडियाली " करार दिया...

भाजपा विधायको ने राज्यपाल के साथ ही सोनिया गाँधी को पत्र लिख डाला...इसके बाद मध्य प्रदेश की सियासत में एक नया तूफान आ गया..."रोने " को एक बड़ा सियासी मुद्दा बना दिया गया॥ जब भाजपा इसे भुनाने में पीछे नही रहती तो भला कांग्रेस कैसे पीछे रहती ॥

मौके की नजाकत भापते हुए अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह ने भी इकबाल मैदान में आंसू छलकाने का नाटक कर दिया... अब इसे सियासी चाल कहे या भाजपा के " डिफेंस" की काट ...आंसुओ के जरिये मध्य प्रदेश में एक नयी राजनीती की शुरुवात इस विधान सभा के सत्र में हुई...

सत्तादल भाजपा को सदन के बाहर कोसने वाली कांग्रेसियों की बौखलाहट इस सत्र में सामने आ गयी...अब तक के सभी सत्रों में भाजपा विधायको को घेरने में पीछे रहने वाले कांग्रेसी इस बार भी शिवराज को घेरने में विफल रहे॥ जबकि इस बार प्रदेश के विकास के लिए अमूल्य सुझाव देने का उनकेपास सुनहरा अवसर था ....


सत्र के अंतिम दिन पत्रकारों से शिवराज सीधे मुखातिब हुए ... एक पत्रकार ने सवाल पुछा आपका स्वर्णिम मध्य प्रदेश क्या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गटबंधन के " भारत उदय " से कितना अलग रहेगा तो उनका कहना था ये आम आदमी का विजन है...

स्वर्णिम मध्य प्रदेश अकेला शिवराज नही बना सकता ... इसके लिए हर व्यक्ति को आगे आना होगा... देखना होगा अपने शिव जी क्या इस विजन को पूरा कर पाते है ?


बहरहाल जो भी हो इस सत्र में कई भाजपा विधायको ने पहली बार सदन में प्रदेश के विकास के बारे में अपने अमूल्य सुझाव सदन में रखे... जिस पर उन्होंने खुद सी ऍम की वाह वाही बटोरी...लेकिन महिला विधायक ललिता यादव के साथ की गयी अश्लील टिप्पणियों से सदन को जो आघात पहुचा उसकी भरपाई होनी मुश्किल दिखाई देती है....

9 टिप्‍पणियां:

गजेन्द्र सिंह भाटी ने कहा…

good, though I was expecting something on Bhairon Singh Bhati.


bye..

Lalit Kuchalia ने कहा…

lalita yadav par ki tipnni vakye sharmnak hai.

Rajat ने कहा…

कांग्रेस को इस विशेष सत्र में भाग लेना चाहिए था. कांग्रेस के पास मौका था एक जिम्मेदार विपक्ष की महती भूमिका निभाने का,पर कांग्रेस ने साबित कर दिया कि उसे सिर्फ विरोध के नाम पर विरोध करना है.

ये विशेष सत्र पार्टी लाइन से ऊपर प्रदेश के विकास के लिए अपने-अपने सुझाव देने के लिए बुलाया गया था.

कांग्रेस के पास एक अच्छा मौका था कि वह प्रदेश के भावी विकास के लिए अपने सुझाव देती,जिससे लोगों को पता चलता कि कांग्रेस के पास प्रदेश के विकास के लिए सुझाव और नीतियों कि कमी नहीं है.

यदि कांग्रेस इस सत्र में हिस्सेदार बनती तो बीजेपी पर एक दबाव बनता कि वह कांग्रेस विधायकों द्वार सुझाए गए उपायों को कब और कैसे लागू करती है.

पर ऐसा हो न सका,कांग्रेस ने निहायत ही गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनाया जिसका बचाव कांग्रेस शायद ही कर पाए.

दूसरा जिस तरह से कांग्रेस विधायकों ने भाजश विधायक ललिता यादव पर अशोभनीय टिपण्णी कि,वह घोर निंदा के लायक है ,साथ ही यह आश्चर्यचकित करने वाला भी है.

जब हमारे विधायक ही ऐसी हरकत करने से बाज नहीं आते तो वह किस तरह महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर पाएंगें?

इस घटना से यह भी पता चलता है कि समाज में महिलाओं के प्रति दिनप्रति दिन सम्मान घटता जा रहा है जो चिंता का विषय है.

कविता रावत ने कहा…

स्वर्णिम मध्य प्रदेश अकेला शिवराज नही बना सकता ... इसके लिए हर व्यक्ति को आगे आना होगा... देखना होगा अपने शिव जी क्या इस विजन को पूरा कर पाते है ?
...samsamyik lekh ke liye dhanyavad.
...sahi sawal kiya hai aapne... dekhte hai vision ......

अरुणेश मिश्र ने कहा…

प्रशंसनीय ।

hem pandey ने कहा…

इन रोतले नेताओं को जनता के वास्तविक आंसू नहीं दिख रहे हैं. स्वर्णिम मध्य प्रदेश की एक झलक राजधानी भोपाल की चरमराई ट्रेफिक व्यवस्था, लूट की वारदातें, प्रदेश में पानी के लिए हत्याएं और बिजली के बिना जी रहे प्रदेश में मिलती है .

meetu ने कहा…

harsh babu bahut achcha likhe ho...... tv par ye story sabhi channelo me chali hai......... well done.....

Babli ने कहा…

बहुत ही सुन्दरता से आपने सही मुद्दे को लेकर प्रस्तुत किया है जो सराहनीय है! उम्दा पोस्ट!

स्वाति ने कहा…

सराहनीय पोस्ट.कम कम सदन के अन्दर की वास्तविक स्थिथि तो निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने प्रस्तुत तो की गयी ..प्रशंसनीय ।

कृपया वर्ड verification हटा दीजिये , टिपण्णी देने में परेशानी होती है