सोमवार, 10 अक्तूबर 2016

मैथ्यू का कहर




कैरिबियाई देश हैती इस समय मैथ्यू के कहर से परेशान है । मैथ्यू बीते 50 बरस का अब तक का सबसे ताकतवर समुद्री तूफान है जिसने लोगों को यह बताया है प्रकृति की मार के आगे  इन्सान कितना बेबस है | इस तूफान से सबसे ज्यादा नुकसान हैती के ग्रामीण इलाकों में हुआ है जिनका संपर्क लगभग कट चुका है और तूफान की  वजह से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर हजार पार हो गई है। तूफ़ान की भयावहता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है अब तक कई लोग इस तूफ़ान से अकाल मौत को प्राप्त हुए हैं तो बड़ी संख्या में पशु पक्षी भी मारे गए हैं।  हैती का जेरेमे शहर पूरी तरह तबाह हो चुका है तो वहीँ सूद में 30000 घर प्रभावित हुए हैं | पोर्ट-ओ-प्रिंस बहुत अधिक प्रभावित हुआ वहीं दक्षिणी हिस्से मे बड़े पैमाने में  तबाही हुई है ।

आर्थिक तंगी से जूझ रहा हैती मानो मैथ्यू की मार से  ठहर-सा गया है। स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और दुकानें सबका नामोनिशान मिट चुका है | लोगों के पास खाने के लाले पड़े हैं तो लोग आसमान की तरफ ताक रहे हैं किसी तरह बरसात और तेज हवाएं रुक जाए और उनको इमदाद मिल जाए | छोटे से इस कैरिबियाई देश की विभीषिका इतनी भीषण है कि पहली बार हैती में राष्ट्रपति के चुनाव स्थगित करने को मजबूर होना पड़ रहा है | अंदाजा नहीं लग पा रहा है  मलबे में सड़क है या सडकों में मलबा | इतिहास में पहला मौका है कि कुदरती तूफ़ान ने पूरे कैरिबियाई शहर पर मानो आपातकाल लगा दिया है |  संयुक्त राष्ट्र के उप महासचिव और हैती के प्रमुख प्रतिनिधि मोराड वहबा ने इसे साल 2010 के भूकंप के बाद सबसे बड़ी आपदा बताया है ।  जनता आज दो जून की रोटी के लिए तरस रही है और लोग आसमान की तरफ ताक रहे हैं किसी तरह बरसात रुक जाए ताकि उन्हें  खाने की रसद मिल सके | अपने लोगों के बीच फंसे लोगों का रो रोकर बुरा हाल है | जिधर दूर दूर तक नजर जाते है वहां पानी पानी ही नजर आता है | बस राहत और बचाव कार्यों में कोई नजर  नही आ रहा है क्युकि ऐसे माहौल में आपरेशन हेलिकोप्टर से ही चलाये जा सकते हैं लेकिन यह भी तभी संभव  है जब मौसम साफ़ हो | 

 हैती से पहले तूफान ने जमैका, क्यूबा, बहामा और डोमिनिक रिपब्लिकन में भी भारी तबाही मचाई थी लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान हैती में हुआ है जहां हजारों लोग बेघर हो गए और  जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया । कैरेबियाई देश हैती में भारी तबाही मचाने के बाद चक्रवाती तूफान 'मैथ्यू' अमेरिका पहुंच गया । इसके चलते अमेरिका में 3,800 से ज्यादा उड़ानों को रद्द करने पर मजबूर होना पड़ा है।  तूफान के कारण फ्लोरिडा में तेज  हवाएं चल रही हैं और भारी बारिश हो रही है। यही हाल जार्जिया और साउथ कैरोलिना प्रांत का भी है जहाँ हवाओं ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है | घरों में बिजली नहीं है तो पानी का भीषण संकट खड़ा हो गया है |  ऐसा मौका पहली बार आया है जब फोर्ट लाउडर्डेल हॉलीवुड एयरपोर्ट को 2005 के बाद पहली बार बंद किया गया है। । फ्लोरिडा में आपात स्थिति घोषित कर दी गई है।  छह लाख से ज्यादा घरों में लोग बिना बिजली के रह रहे हैं। तूफान के चलते 130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं और तेज बारिश हो रही है। जार्जिया और साउथ कैरोलिना में भी तेज आंधी चल रही है। फ्लोरिडा में आपात स्थिति की घोषणा की गई है।सरकारें मुआवजे और पुनर्वास की व्यवस्था में लगी है तो वहीँ चारों तरफ पानी पानी होने से राहत और बचाव कार्यों  में गति नहीं आ पा रही है वही मुश्किल हालातों में आपदा प्रबंधन भी सही तरीके से नहीं हो पा रहा | सड़कें पानी से लबालब भरी पड़ी  हैं तो शहर का भी पानी से बुरा हाल है | बिजली नहीं है तो लोग खाने के लिए परेशान हैं | मोबाइल टावरों में पानी भर गया है जिससे लोग अपने नाते रिश्तेदारों से सीधे कट गए हैं | हजारों लोगों का आशियाना छिन चुका है और उनका जीवन पटरी पर आना अभी थोडा मुश्किल लगता है क्युकि इस आपदा से वह शायद ही उबर पाएं | तूफान से हैती में बुरी तरह से बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया है और हजारों की संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं । असल में प्राकृतिक आपदाओं के आगे हम हर बार बेबस हो जाते हैं और इससे निपटने की हमारे पास कोई कारगर तैयारिया  नहीं होती है |  हमें यह भी मानना पड़ेगा विकास की चकाचौध तले हमने  पिछले कई बरसों से प्रकृति का जिस गलत तरीके से विदोहन किया है आज हम उसी की मार झेलने पर मजबूर हैं जो हमें विनाश की तरफ ले जा रहा है |पूरे विश्व में कमोवेश एक जैसे हालत हैं जिसमे प्रकृति से जुड़े मुद्दों की अनदेखी हो रही है और हर जगह को औने पौने दामों पर खुर्द बुर्द करने का खुला खेल चल रहा है और कंक्रीट का जंगल बनाने की तैयारियां हो रही है |  पिछले कुछ वर्षो से मौसम का मिजाज लगातार बदलता ही जा रहा है जिस कारण पूरी दुनिया में अप्रत्याशित परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं |  यह स्पष्ट हो जाता है कि यह  सब जलवायु परिवर्तन की वजह से हो रहा है ।  ठण्ड का मौसम शुरू होने को है लेकिन कहीं बेमौसम फल और फूल उग आये हैं तो कहीं भीषण बरसात ने कहर बरपाया हुआ है | मौसम किस करवट पूरे विश्व में बैठ रहा है यह इस बात से समझा जा सकता है कि मौसम चक्र के बदलते रूप से दुनिया के कई देश इस समय प्रभावित हैं | सुनामी, कैटरीना, रीटा, नरगिस, हुदहुद और अब मैथ्यू आदि परिवर्तन की इस बयार को पिछले कुछ वर्षो से ना केवल बखूबी बतला रहे है बल्कि  गौमुख , ग्रीनलैंड, आयरलैंड और अन्टार्कटिका में लगातार पिघल रहे ग्लेशियर भी ग्लोबल वार्निंग की आहट को करीब से  महसूस भी कर रहे हैं । आज पूरे विश्व में वन लगातार सिकुड़ रहे हैं तो वहीँ किसानो का भी इस दौर में खेतीबाड़ी से सीधा मोहभंग हो गया है । अधिकांश जगह पर जंगलो को काटकर जैव ईधन जैट्रोफा के उत्पादन के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है तो वहीँ पहली बार जंगलो की कमी से वन्य जीवो के आशियाने भी सिकुड़ रहे हैं जो  वन्य जीवो की संख्या में आ रही गिरावट के जरिये महसूस की जा सकती है वहीँ औद्योगीकरण की आंधी में कार्बन के कण वैश्विक स्तर पर तबाही का कारण बन रहे हैं तो इससे प्रकृति में एक बड़ा  प्राकृतिक असंतुलन पैदा हो गया है और इन सबके मद्देनजर हमको यह तो मानना ही पड़ेगा जलवायु परिवर्तन निश्चित रूप से हो रहा है और यह सब ग्लोबल वार्मिंग की आहट है ।वैज्ञानिको का मानना है कि कार्बन डाई आक्साइड के उत्सर्जन को कम करने के लिए विकसित देशो को किसी भी तरह फौजी राहत दिलाने के लिए कुछ उपाय तो अब करने ही होंगे नहीं तो दुनिया के सामने एक बड़ा भीषण संकट पैदा हो सकता है और यकीन जान लीजिये अगर विकसित देश अपनी पुरानी जिद पर अड़े रहते हैं तो तापमान में भारी वृद्धि दर्ज होनी शुरू हो जायेगी ।
वैसे इस बढ़ते तापमान का शुरुवाती असर हमें अभी से ही दिखाई देने लगा है । आज दुनिया में जो जलवायु परिवर्तन हुआ है उसमे बड़े देशों की हिस्सेदारी कुछ ज्यादा है । जिस तकनीक के आसरे विकसित देशों ने ताकत हासिल की आज उसी के चलते दुनिया में संकट मडरा रहा है | आज जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव को हर देश भुगत रहा है | कई देशों के सामने खाद्यान का संकट खड़ा है वहीँ सूखा , बाढ़ और अतिवृष्टि ने इस दौर में समूची ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था वाले देशों  का तो बंटाधार कर दिया है | आर्थिक सुधार और  औद्योगीकरण को गति देने के साथ ही ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा बढ़ी है जिसके चलते पूरे विश्व के मौसम में परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं । कही भीषण बरसात से लोगों का जीना  मुश्किल होता जा रहा है तो कहीं सूखा , अकाल और भुखमरी  बढ़ रही है । असल में इसके पीछे अंधाधुंध विकास जिम्मेदार है ।  आज के दौर में विकास की अन्धाधुंध दौड़ में अपने स्वार्थ के लिए क्रोनी कैपिटलिज्म के इस दौर में मुनाफे का खुला खेल  विश्व में बेख़ौफ़ चल रहा है  लेकिन उचित प्रबंधन के चलते  हम उस समय बेबस हो जा रहे है  जब आपदाएं आती हैं  |हाल के वर्षों में पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुक्सान मानव ने ही पहुंचाया है ।  उसने  प्राकृतिक संसाधनों का जमकर विदोहन  किया  | आज आलम यह है कि याराना पूँजी का  खुला खेल  विश्व  के हर शहर में सरकारों को भरोसे में लेकर खेला जा रहा है जहाँ तमाम पर्यावरणीय मानकों को ताक पर रखते हुए विकास की चकाचौध तले खुशहाली लाने के शिगूफे छोड़े जा रहे हैं लेकिन यह सब हमारे लिए आने वाले दिनों में बड़ी विभीषिका का कारण बन सकता है |

  पिछले कुछ समय से  दशकों से मौसम में तरह तरह के बदलाव हमें देखने को मिल रहे हैं और इसी जलवायु परिवर्तन के असर का परिणाम हमें पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है जहाँ वह समय समय पर  रीटा, कैटरीना , नरगिस की मार झेलती है तो कहीं हुदहुद और मैथ्यू सरीखे चक्रवाती तूफान और भीषण बरसात ने शहर की रफ़्तार थाम देती है | मौजूदा दौर में विकास की अवधारणा शहरीकरण पर टिकी है और आने वाले बरसों में विश्व  की  आबादी की  जरूरतें बढेंगी लिहाजा  पर्यावरण की इसी तरह अनदेखी होती रही तो रीटा ,सैंडी  कैटरीना , हुदहुद , मैथ्यू  सरीखी आपदाओं की पुनरावृति दुनिया में होनी तय है | अगर अभी भी हम नहीं चेते तो ऐसे हादसे बार बार होते रहेगे जिनमे हजारों लोग काल के गाल में समाते रहेगे और सरकारें मुआवजे बांटकर अपने हित साधते रहेगी | अब समय आ गया है जब सरकारों को समझना होगा वह किस तरह का विकास चाहते हैं ? ऐसा विकास जहाँ प्रकृति का जमकर दोहन किया जाए या फिर ऐसा जहाँ पर्यावरण की भी फिक्र करते हुए विकास की बयार बहाई जाए  । इस मसले पर अब कोई नई लकीर हमें खींचनी ही होगी क्युकि मानव सभ्यता प्रकृति पर ही टिकी हुई है अगर प्राकृतिक संसाधनों का यूँ ही विदोहन होता रहा तो मानव के सामने खुद बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा | मैथ्यू इस दिशा में छिपा एक बड़ा सन्देश है ।

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