पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद पूरी दुनिया जिस समय पाक को घेरने की तरह एकजुटता दिखा रही थी उस समय चीन ने भी दबाव में आतंकवाद के विरोध का दिखावा तो किया लेकिन बहुत जल्द ही वह अपने करीबी अजीज पाकिस्तान का बचाव करने में जुट गया | सीआरपीएफ जवानों पर हुए हमले की चीन ने निंदा की लेकिन इस हमले के मास्टरमाइंड सरगना मसूद अजहर का साथ नहीं छोड़ा । चीन ने एक बार फिर से अपना असली चेहरा भारत को दिखा दिया है | एक बार फिर से मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने की भारत की कोशिश नाकाम साबित हुई हैं । चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर को ब्लैकलिस्टेड करने से बचा लिया। बीते 10 बरस में यह चौथा मौका है जब चीन ने इसके लिए अपने वीटो पावर का इस्तेमाल किया। फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका जहाँ अजहर के खिलाफ प्रस्ताव लाए थे वही अंतिम समय में चीन ने इस पर अड़ंगा लगा दिया, जबकि 14 देश इस प्रस्ताव के समर्थन में खड़े रहे |
चीन और पाकिस्तान की यह दोस्ती नई नहीं है | पुराने पन्नो को टटोलें तो दोस्ती का यह सिलसला उस दौर से चल रहा है जब नेहरु के हिंदी चीनी भाई भाई के दावो की हवा निकालकर चीन ने भारत पर युद्ध कर दिया था और पडोसी पकिस्तान को भारत के खिलाफ लड़ने के लिए ना केवल उकसाया बल्कि अपनी हर इमदाद से पाकिस्तान को ही लाभ पहुचाया और अब पाकिस्तान की ही पीठ को फिर से थपथपाकर जिनपिंग ने अपनी शातिर चालबाजियों से भारत को झटका देने का काम किया है | चीन एक लम्बे अरसे से ही पाकिस्तानी सरकार और सेना को को मदद करता आया है। चीन के सुरक्षा परिषद में वीटो के बाद अब भारत चीन रिश्तों में तल्खी आने की संभावना बढ़ी है | भारत जहाँ आतंकवाद के खिलाफ अपनी रण्नीति के तहत पाकिस्तान और अजहर पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की कोशिश में जोर शोर से लगा है वहीँ पीाओके से संचालित आतंकी संगठनों को भी प्रतिबंधित करने की मांग कर रहा है लेकिन चीन ने भारत की इस मांग को समर्थन देने से इंकार कर साफ संदेश दिया है कि वह पाक केसाथ ढाल बनकर ही खड़ा रहेगा । चीन ने कहा है वह बिना सबूतों के कार्रवाई के पक्ष में नहीं है । यही बात वह पहले भी दोहराता रहा है । अब यूएनएचसी के सदस्यों ने चीन को चेतावनी दी है। चीन से कहा गया है कि अगर वह मसूद अजहर को लेकर अपने रुख को नहीं बदलेगा तो दूसरी कार्रवाई के विकल्प खुले हैं। इस बीच मसूद अजहर के मसले पर भारत को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है | फ्रांस की सरकार ने अपने देश में मौजूद जैश-ए-मोहम्मद की संपत्तियों को फ्रीज करने का फैसला किया है | फ्रांस की सरकार ने मौद्रिक और वित्तीय संहिता के तहत राष्ट्रीय स्तर पर मसूद अजहर की संपत्ति का फ्रीज करने की मंजूरी दी है |
असल में चीन के पाक में कई आर्थिक हित जुड़े हुए हैं | वह वहां 46 अरब डॉलर का भारी भरकम निवेश कर चुका है। इनमें से अधिकांश समझौते दोनों देशों के बीच 3,000 किलोमीटर लंबा आर्थिक गलियारा बनाने से जुड़े हुए हैं जो चीन के शिनजियांग प्रांत को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ेगा जिससे चीन की पहुँच सीधे अरब सागर तक हो जायेगी | यह आर्थिक गलियारा चीन के सुदूर पश्चिमी इलाके को अरब सागर में पाक के दक्षिण पश्चिमी ग्वादर बंदरगाह तक न केवल जोड़ेगा बल्कि इससे चीन की धमक पाक अधिकृत कश्मीर तक भी बढ़ने की प्रबल संभावनाएं दिखाई दे रही हैं जिसके तहत सड़क , रेल बिजली और पाइप लाइन और उर्जा जैसे कई प्रोजेक्ट के चकाचौंध तले चीन अपनी विस्तारवादी नीति को अमली जामा पहनायेगा और उसके सीधे निशाने पर भारत होगा | इससे पश्चिम एशिया के तेल आपूर्तिकर्ता देशों से चीन की दूरी 12 हजार किलोमीटर तक कम हो जाएगी। लेकिन भारत के लिए चिंता की बात यह है कि यह प्रस्तावित गलियारा भविष्य में पाकिस्तान के लिए फायदे का सौदा बन सकता है | इसके जरिये पाकिस्तान ना केवल भारत पर सीधे नजर रख सकता है बल्कि सीमा पार से अपनी आतंकी गतिविधियों को नया रंग भी दे सकता है लिहाजा भारत की चिंताएं बढ़नी लाजमी हैं | इससे सड़क, रेलवे व पाइप लाइन के जरिये चीन खनिज तेल और अन्य सामग्री सीधे चीन तक ले जा सकेगा | चीन का पाकिस्तान का साथ देने की एक वजह कि पाक में चीन सीपैक में 55 बिलियन डॉलर का निवेश करने जा रहा है । चीन भारत को अपना सबसे बड़ा आर्थिक प्रतिद्वंद्वी मानता है। वह मसूद के खिलाफ जाता तो भारत मजबूत दिखता। 2016 - 2017 में संयुक्त राष्ट्र में मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए प्रस्ताव दिया था तब भी चीन ने अड़ंगा लगाया था।
अब असल संकट तो ग्वादर बंदरगाह को लेकर उभर रहा है जिसका निर्माण करने के लिए चीन और पाकिस्तान का याराना पूरी दुनिया के सामने उजागर हो गया है | चीन की योजना है कि मध्य पूर्व से आने वाला तेल पहले ग्वादर बंदरगाह तक और फिर वहां से प्रस्तावित रास्ते से सड़क और रेल मार्ग से सीमा तक पहुंचाया जा सके | चीनी पैसे से ग्वादर बंदरगाह का पहला चरण 2006 में पूरा हो गया था लेकिन चीन ने ग्वादर को फिर अपना तुरूप का इक्का विस्तारवादी रणनीति के लिए बनाने का फ़ैसला किया है | इसका फायदा यह होगा कि चीन खाड़ी क्षेत्र, अफ़्रीका, यूरोप और दुनिया के हिस्सों से आसानी से जुड़ जाएगा और भविष्य में यहाँ पैर जमाने से यह इलाका चीन की नौसेना के लिए एक अड्डा बन जाए और चीन पाकिस्तानी नौसेना के साथ मिलकर यहाँ से भारत विरोधी गतिविधियों पर काम करे | भारत की घेराबंदी के लिए चीन श्रीलंका में भी एक बंदरगाह की बड़ी परियोजना में निवेश कर हिंद महासागर में भारत की घेराबंदी की शातिर चालबाजी कर चुका है। अरब सागर से लेकर हिंद महासागर तक भारत की घेराबंदी की हर चाल में भारत ही घिर रहा है | चीन की मंशा अब पूरी दुनिया पर राज करने और अमरीकी वर्चस्व को तोड़कर पूरी दुनिया में चीन के उत्पाद को पहुचाने की है जिसके जरिये वह समुद्री मार्गो से लेकर पड़ोसियों को जल और थल जैसे स्थानों पर घेरकर अपना नया गलियारा पूरी दुनिया के लिए खोल रहा है और बाद दुनिया पर राज करने की उसकी मंशा अब किसी से छिपी नहीं है। इससे उसके आर्थिक हित तो जुड़े हैं साथ ही वह इस क्षेत्र में अपना दबदबा आर्थिक और सामरिक ताकत के जरिये भी भी कायम करना चाहता है। | जब भारत पाक पर सीमा पार से आतंकी घटनाओं को रोकने के लिए दबाव डाल रहा हो और मसूद अजहर के खिलाफ पूरी दुनिया एकजुट है तब चीन पाक के साथ ढाल बनकर खड़ा है क्युकि मसूद अजहर पाकिस्तानी सेना और आईएसआई का चहेता है जबकि एशिया में पाकिस्तान चीन का सबसे करीबी मित्र है। साथ ही चीन को पाकिस्तान की अपने महत्वाकांक्षी ओबीओआर प्रोजेक्ट के लिए जरूरत है। इसलिए वह मसूद को बार-बार बचा रहा है और पकिस्तान के साथ अपने सम्बन्ध ख़राब करने का रिस्क किसी कीमत पर नहीं लेना चाहता | चीन की योजना है कि शिंजियांग से पाकिस्तान के नियंत्रण वाले जम्मू-कश्मीर होते हुए ग्वादर बंदरगाह तक एक आर्थिक गलियारा तैयार किया जाए ताकि वह स्ट्रेट ऑफ मलक्का वाला समुद्री रास्ता लेने से बच जाये | हिंद महासागर में भारत की बढ़ती भूमिका पर अंकुश लगाने और एशिया में अपना वर्चस्व स्थापित करने की यह चीनी योजना निश्चय ही भारत के लिए काफी बड़ी चुनौती पेश कर सकती है |
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