Saturday, 9 April 2011

भोपाल नगर निगम से रूठे शनि देव ......




शनि देव इस समय पूरे देश में "ग्लोबल" हो गए है.... साईं के बाद अगर कोई देव हाल के वर्षो में "ग्लोबल " हुआ है तो बेशक वह देव शनि देव ही है...देश में हर जगह उनको पूजने वाले भक्तो की संख्या में इजाफा होता जा रहा है.....लेकिन भोपाल के शनि देव इनदिनों नगर निगम से रूठ गए है....भोपाल के शनि देव की परेशानी को नगर निगम के एक फैसले ने बदा दिया है.....


शनि देव ने कभी सपने में भी नही सोचा होगा कि भोपाल नगर निगम को उनकी नजरे इतनी नागवार गुजरेंगी कि उनकी आँखों के ठीक सामने एक काला सा बोर्ड लगा दिया जायेगा....चौकिये नही भोपाल के बड़े तालाब को सूखे के प्रकोप से बचाने के लिए नगर निगम ने एक तुगलकी फरमान इनदिनों जारी किया है.... आलम ये है कि नगर निगम स्थानीय लोगो और मंदिर कमेटी के विरोध के बावजूद इस बोर्ड को ना हटा पाने की अपनी जिद पर कायम है ......


शनि देव से भले ही पूरी दुनिया खौफ खाती हो लेकिन भोपाल के कमला पार्क के शनि मदिर इनदिनों नगर निगम भोपाल से खौफजादा है .... दरअसल शनि देव की दृष्टी तालाब में ना पड़े इसलिए नगर निगम ने उनकी आँखों के सामने एक काला सा बोर्ड लगा दिया है.... नगर निगम का तर्क है कि पिछले साल बड़ा तालाब सूख गया था जिसके पीछे शनि देव की कोप दृष्टी जिम्मेदार है ...


बीते दिनों एक खबर के सिलसिले में शनि महाराज के दर्शन करने की इच्छा हुई .... मंदिर के दर्शन कर प्रसाद लिया और वहाँ पर मौजूद कुंजबिहारी नाम के पुजारी से मेरी मुलाक़ात हुई...... पहला सवाल यही पूछ डाला महाराज शनि देव भोपाल के बड़े तालाब को क्यों सुखा रहे है.?.. ऐसा पूछते ही पुजारी हस पड़े ...उनको देखकर मै भी अपनी हसी नही रोक सका ....उन्होंने कहा यह तर्क बिलकुल गलत है.... शनि महाराज इस बड़े तालाब को क्यों सुखायेंगे ?


भोपाल नगर निगम से पूरी मंदिर कमेटी परेशान हो चुकी है.... लिहाजा वह शनि देव को कमरे में कैद करने की योजना बना रही है....स्थानीय लोगो में नगर निगम के पार्टी आक्रोश है....उनका भी यही कहना है यह आस्था के साथ खिलवाड़ है......


भले ही नगर निगम अपने फैसले पर कायम हो लेकिन ये वाकया यह बताने के लिए काफी है आज भी हम २१ वी सदी में अंधविश्वास के सहारे जी रहे है जहाँ हम ऐसी बातो पर यकीन कर रहे है जो आज के वैज्ञानिक युग में कही से कही तक संभव ही नही हो सकती...... इस बारे में बातचीत के लिए मैं नगर निगम भी गया लेकिन नगर निगम के आला अधिकारियो ने कुछ भी कहने से साफ़ इंकार कर दिया......मामले से ही कन्नी काट ली...................


Saturday, 12 March 2011

सूखे की चपेट में भोपाल का बड़ा तालाब.........


भोपाल की पहचान झीलों के शहर के रूप में रही है ... इसकी खूबसूरती में भोपाल की बड़ी झील चार चाँद तो लगाती ही है साथ ही इस झील को शहर की लाइफ लाइन भी कहा जाता है ... परन्तु पिछले कुछ समय से बड़ी झील में पानी का स्तर तेजी से गिरने लगा है जिस के चलते गर्मी के मौसम में यहाँ के लोगो को पानी की समस्या से जूझना पढ़ सकता है......
"तालो में भोपाल की ताल बाकी सब तलैया ".... भोपाल की पहचान इस बड़े तालाब ने झीलों के शहर के रूप में बनायीं है .... यहाँ के लोगो को पानी की सप्लाई इसी बड़ी झील से होती रही है.... परन्तु पिछले कुछ समय से इसका जल स्तर तेजी से घटने लगा है ... यदि पेयजल के लिए यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में जल स्तर में कमी आने की सम्भावना है .......
बड़ी झील में पानी का स्तर नीचे चले जाने से जहाँ भोपाल के लोगो को पानी की सप्लाई प्रभावित हो सकती है वही झील में मछली पकड़कर रोजी रोटी कमाने वाले मछुवारो के सामने अभी से रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है .....
अमित जहांगीराबाद के इलाके में ही रहते है... पिछले दिनों रिपोर्टिंग के दौरान उनसे मुलाकात का मौका मिला....पहले तो उन्होंने बोलने से मना किया .... आख़िरकार मैंने कैमरे के सामने बाईट के लिए उन्हें मना ही लिया ... अमित ने कहा पिछले साल इसी झील से पानी लोगो को मिला था वह भी एक एक दिन छोड़कर... इस बार ऐसे हालत ऐसे नजर नही आते .....इसका एक बढ़ा कारन झील बचाव अभियान भी थे .... इस बार तो झील का बढ़ा हिस्सा सूख चूका है...अभियान भी नही चल रहे है......
कल्लू नाम के मछवारे से मिला तो वह भी खासा परेशान दिखा ....आप बीती सुनाते हुए उसने कहा साहब नवाबी दौर से मछली पकड़ने के काम में लगा हुआ हूँ... पूरा परिवार इन्ही मछलियों के सहारे पलता है ... आज आलम ये है कि तालाब में मछलिया मुश्किल से मिल पाती है ... ऐसे में गुजर बसर कर पाना मुश्किल है.....
गर्मी ने अभी से अपने तेवर दिखने शुरू कर दिए है ....इस समय झील में पानी का स्तर न्यूनतम जल स्तर से मात्र 2 फीट ज्यादा है...जबकि अभी गर्मी की शुरुवात ही हुई है ....नगर निगम भोपाल की माने तो इस समय झील से २ ऍम जी दी पानी हर दिन निकाला जा रहा है... अगर यही सिलसिला जारी रहा तो जल्द ही यह झील सूख जायेगी....
इस बारे में जब मैंने उपनेता महापौर परिसद जल कार्य अशोक पांडे से बात की तो उन्होंने कहा मेरी चिंता जायज है...इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार बड़े तालाब के बजाए नगर निगम कोलार और केरवा डेम से पानी की ज्यादा सप्लाई करने की दिशा में विचार कर रहा है....
पिछले साल भोपाल की बड़ी झील ने राजधानी भोपाल के लोगो की प्यास बुझाई थी परन्तु इस बार उम्मीद कम है ... बेहतर होगा नगर निगम जल्द से जल्द बड़ी झील के पानी को बचाने की दिशा में गंभीरता से विचार करे...

Tuesday, 1 March 2011

मजबूरी का नाम मनमोहन...............




दिल्ली से ताल्लुक रखने वाले मेरे एक करीबी मित्र देश के मौजूदा हालातो को लेकर खासे चिंतित है.... बीते दिनों फ़ोन पर बतियाते हुए उन्होंने अपने देश में बढ रहे भ्रष्टाचार की पीड़ा को मेरे सामने उजागर किया... उन्होंने इस बात को दोहराया कि आज हमारे देश को भी एक तहरीर चौक की आवश्यकता है... मौजूदा दौर में बढ़ते भ्रष्टाचार के प्रति मेरे मित्र की पीड़ा को बखूबी समझा जा सकता है... आज हमारे देश के आम जनमानस इसको लेकर खासा व्यथित है... इस पीड़ा का एहसास शायद हमारे प्रधान मंत्री मनमोहन को भी है ....तभी बीते दिनों अपने आवास पर मनमोहन ने पत्रकार वार्ता बुलाई और भ्रष्टाचार को लेकर हमेशा की तरह अपना दुखड़ा सुनाया......

मनमोहन सिंह ने पत्रकारों से कहा वह गठबंधन धर्म के आगे लाचार है ..... इस दरमियाँ प्रधान मंत्री ने गठबंधन धर्म की तमाम मजबूरियां भी गिना डाली....साथ ही वह यह कहने से नही चुके कि वह इस बार का कार्यकाल भी सफलता पूर्वक पूरा कर लेंगे....... राजनीती संभावनाओ का खेल है ... यहाँ समीकरण बन्ने और बिगड़ने में देरी नही लगती.... ऐसे में पूर्वानुमान लगा पाना मुश्किल है क्या यू पी ऐ २ अपना कार्यकाल सफलता पूर्वक पूरा कर पायेगी....?

यू पी ऐ १ से ज्यादा भ्रष्ट्र यू पी ऐ २ नजर आता है ....एक से बढकर एक मंत्रियो की टोली मनमोहन सिंह की कबिनेट को सुशोभित कर रही है.... यू पी ऐ २ ने तो भ्रष्ट्राचार के कई कीर्तिमानो को ध्वस्त कर दिया है..... पी ऍम की छवि भी इससे ख़राब हो रही है....इसके अलावा सी वी सी पर थोमस की नियुक्ति से लेकर बोफोर्स में "क्वात्रोची " को क्लीन चित देने और महंगाई के डायन बन्ने तक की कहानी यू पीए २ की विफलता को उजागर कर रही है..... आदर्श सोसाइटी से लेकर कोमन वेल्थ , २ जी स्पेक्ट्रुम से लेकर इसरो में एस बैंड आवंटन तक के घोटाले केंद्र की सरकार की सेहत के लिए कतई अच्छे नही है .....

एक मछली पूरे तालाब को गन्दा कर देती है .... फिर भी हमारे देश के मुखिया मनमोहन अपनी लाचारी जताने में लगे हुए है...जबकि इस समय कोशिश इस बात की होनी चाहिए यू पी ऐ को कैसे मौजूदा चुनोती के दौर से बाहर निकाला जाए ....? मनमोहन भले ही अच्छे अर्थशास्त्री हो.....परन्तु वह एक कुशल राजनेता की केटेगरी में तो कतई नही रखे जा सकते ...... मैं तो उन्हें जननेता भी नही मानता .... ना ही वह भीड़ को खींचने वाले नेता है.....१५ वी लोक सभा चुनावो से पहले भाजपा के पी ऍम इन वेटिंग आडवानी ने मनमोहन के बारे में कहा था वह देश के सबसे कमजोर प्रधान मंत्री है.....उस समय कई लोगो ने आडवानी की बात को हलके में लिया था , आज मनमोहन सिंह पर यह बात सोलह आने सच साबित हो रही है ....

मनमोहन सारे फैसले खुद से नही लेते है....सत्ता का केंद्र दस जनपद बना रहता है .... मनमोहन को अगर मैं सोनिया का "यस बॉस" कहू तो गलत कुछ भी नही होगा..... व्यक्तिगत तौर पर भले ही मनमोहन की छवि इमानदार रही है परन्तु दिन पर दिन ख़राब हो रहे हालातो पर प्रधान मंत्री की चुप्पी से जनता में सही सन्देश नही जा पाटा ... "इकोनोमिक्स की तमाम खूबियाँ भले ही मनमोहन सिंह में रही हो पर सरकार चलाने की खूबियाँ तो उनमे कतई नही है.....

कुछ समय पहले उन्होंने अपना मंत्री मंडल विस्तार भी कर डाला.... उम्मीद थी भ्रष्ट नेताओ के पर कतरे जायेंगे.... पर ऐसा कुछ भी नही हुआ.... कई मंत्रियो को भारी भरकम मंत्रालय दे दिए गए ....नयी बोतल में पुराणी शराब दिखाई दी....इस पर सोनिया गाँधी ने भी अपनी कोई प्रतिक्रिया नही दी..... इसी तरह काला धन एक बदा मुद्दा है.... सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद भी हमारे प्रधानमंत्री इसे वापस लाने की दिशा में कोई प्रयास करते दिखाई दे रहे है..... उल्टा नाम सार्वजनिक किये जाने की बात पर " प्रणव बाबू " खासे नाराज हो जाते है.......

यू पी ऐ २ पर इस समय पूरी तरह से दस जनपद का नियंत्रण बना है.... मनमोहन को भले
ही सोनिया का "फ्री हैण्ड" मिला हो पर उन्हें अपने हर फैसले पर सोनिया की सहमती लेनी जरुरी हो जाती है.... दस जनपद में भी सोनिया के सिपैहसलार पूरी व्यवस्था को चला रहे है.... मनमोहन की साफ़ छवि घोटालो से ख़राब हो रही है ... साथ ही कांग्रेस को भी इससे बड़ा नुकसान झेलना पद रहा है...

मनमोहन की साफ़ छवि घोटालो से ख़राब हो रही है.....साथ ही कांग्रेस को भी इससे नुकसान पहुच रहा है.....बेहतर होता अगर हमारे प्रधान मंत्री गठबंधन धर्म पालन के बजाए राजधर्म का पालन बखूबी से करते.... हमारे प्रधानमंत्री को अटल बिहारी की सरकार से सीख लेनी चाहिए जिन्होंने १९९८ से २००४ तक २४ दलों की गठबंधन सरकार का नेतृत्व कुशलता पूर्वक किया..... बल्कि कभी किसी के दवाब में काम नही किया.....

मुझे याद है एक बार जयललिता ने उस दौर में अटल आडवानी से उस दौर में करूणानिधि सरकार को भंग करने का दवाब डाला था ... परन्तु वाजपेयी जयललिता की मांग के आगे बेबस नही हुए थे .... अटल की सरकार भले ही एक बोट से गिर गयी परन्तु अगले चुनाव में वह भारी सीट लेकर आये .....

यही नही तहलका जैसे प्रकरण के बाद उन्होंने जॉर्ज को कुछ समय रक्षा मंत्री के पद से मुक्त रखा था...परन्तु यहाँ तो मजबूरी का नाम मनमोहन बन गए है... वह न तो बदती कीमतों पर अंकुश ला सकते है और ना ही भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे मंत्रियो से इस्तीफ़ा दिलवा सकते है.... उनके सामने गठबंधन धरम पालन की सबसे बड़ी मजबूरी है .....और मनमोहन की इसी अदा का फायदा ऐ राजा जैसे लोग उठा जाते है.....और मनमोहन धृत राष्ट्र की भांति आँखों में पट्टी बांधे रह जाते है..... ऐसी सूरत में देश का आम आदमी निराश और हताश नही हो तो क्या करे........?
"दुष्यंत " के शब्दों में कहू तो --------------

"कैसे कैसे मंजर सामने आने लगे है
गाते गाते लोग अब चिल्लाने लगे है
अब तो इस तालाब का पानी बदल दौ
यह कवल के फूल कुम्हलाने लगे है "

Wednesday, 16 February 2011

वैलेंटाइन डे के बहाने .................


हर जगह विदेशी संस्कृति पूत की भांति पाव पसारती जा रही है ..... हमारे युवाओ को लगा वैलेंटाइन का चस्का भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है... विदेशी संस्कृति की गिरफ्त में आज हम पूरी तरह से नजर आते है ... तभी तो शहरों से लेकर कस्बो तक वैलेंटाइन का जलवा देखते ही बनता है...आज आलम यह है यह त्यौहार भारतीयों में तेजी से अपनी पकड़ बना रहा है... वैलेंटाइन के चकाचौंध पर अगर दृष्टी डाले तो इस सम्बन्ध में कई किस्से प्रचलित है...


रोमन कैथोलिक चर्च की माने तो यह "वैलेंटाइन "अथवा "वलेंतिनस " नाम के तीन लोगो को मान्यता देता है ....जिसमे से दो के सम्बन्ध वैलेंटाइन डे से जोड़े जाते है....लेकिन बताया जाता है इन दो में से भी संत " वैलेंटाइन " खास चर्चा में रहे ...कहा जाता है संत वैलेंटाइन प्राचीन रोम में एक धर्म गुरू थे .... उन दिनों वहाँपर "कलाउ डीयस" दो का शासन था .... उसका मानना था अविवाहित युवक बेहतर सेनिक हो सकते है क्युकियुद्ध के मैदान में उन्हें अपनी पत्नी या बच्चों की चिंता नही सताती ...


अपनी इस मान्यता के कारण उसने तत्कालीन रोम में युवको के विवाह पर प्रतिबंध लगा दिया... किन्दवंतियो की माने तो संत वैलेंटाइन के क्लाऊ दियस के इस फेसले का विरोध करने का फेसला किया ... बताया जाता वैलेंटाइन ने इस दौरान कई युवक युवतियों का प्रेम विवाह करा दिया... यह बात जब राजा को पता चली तो उसने संत वैलेंटाइन को १४ फरवरी को फासी की सजा दे दी....कहा जाता है की संत के इस त्याग के कारण हर साल १४ फरवरी को उनकी याद में युवा "वैलेंटाइन डे " मनाते है... कैथोलिक चर्च की एक अन्य मान्यता के अनुसार एक दूसरे संत वैलेंटाइन की मौत प्राचीन रोम में ईसाईयों पर हो रहे अत्याचारों से उन्हें बचाने के दरमियान हो गई ....



यहाँ इस पर नई मान्यता यह है की ईसाईयों के प्रेम का प्रतीक माने जाने वाले इस संत की याद में ही वैलेंटाइन डे मनाया जाता है...एक अन्य किंदवंती के अनुसार वैलेंटाइन नाम के एक शख्स ने अपनी मौत से पहले अपनी प्रेमिका को पहला वैलेंटाइन संदेश भेजा जो एक प्रेम पत्र था .... उसकी प्रेमिका उसी जेल के जेलर की पुत्री थी जहाँ उसको बंद किया गया था...उस वैलेंटाइन नाम के शख्स ने प्रेम पत्र के अन्त में लिखा" फ्रॉम युअर वैलेंटाइन" .... आज भी यह वैलेंटाइन पर लिखे जाने वाले हर पत्र के नीचे लिखा रहता है ...


यही नही वैलेंटाइन के बारे में कुछ अन्य किन्दवंतिया भी है ... इसके अनुसार तर्क यह दिए जाते है प्राचीन रोम के प्रसिद्व पर्व "ल्युपर केलिया " के ईसाईकरण की याद में मनाया जाता है ....यह पर्व रोमन साम्राज्य के संस्थापक रोम्योलुयास और रीमस की याद में मनाया जाता है ... इस आयोजन पर रोमन धर्मगुरु उस गुफा में एकत्रित होते थे जहाँ एक मादा भेडिये ने रोम्योलुयास और रीमस को पाला था इस भेडिये को ल्युपा कहते थे... और इसी के नाम पर उस त्यौहार का नाम ल्युपर केलिया पड़ गया...

इस अवसर पर वहां बड़ा आयोजन होता था ॥ लोग अपने घरो की सफाई करते थे साथ ही अच्छी फसल की कामना के लिए बकरी की बलि देते थे.... कहा जाता है प्राचीन समय में यह परम्परा खासी लोक प्रिय हो गई... एक अन्य किंदवंती यह कहती है १४ फरवरी को फ्रांस में चिडियों के प्रजनन की शुरूवात मानी जाती थी.... जिस कारण खुशी में यह त्यौहार वहा प्रेम पर्व के रूप में मनाया जाने लगा ....प्रेम के तार रोम से सीधे जुड़े नजर आते है ... वहा पर क्यूपिड को प्रेम की देवी के रूप में पूजा जाने लगा ...



जबकि यूनान में इसको इरोशके नाम से जाना जाता था... प्राचीन वैलेंटाइन संदेश के बारे में भी एक नजर नही आता ॥ कुछ ने माना है यह इंग्लैंड के राजा ड्यूक के लिखा जो आज भी वहां के म्यूजियम में रखा हुआ है.... ब्रिटेन की यह आग आज भारत में भी लग चुकी है... प्रेमी इसको प्यार का इजहार करने का दिन बताते है... यूँ तो प्यार करना कोई गुनाह नही है लेकिन जब प्यार किया ही है तो इजहार करने मे देर नही होनी चाहिए... लेकिन अभी का समय ऐसा है जहाँ युवक युवतिया प्यार की सही परिभाषा नही जान पाये है... वह इस बात को नही समझ पा रहे है की प्यार को आप एक दिन के लिए नही बाध सकते... वह प्यार को हसी मजाक का खेल समझ रहे है....


सच्चे प्रेमी के लिए तो पूरा साल प्रेम का प्रतीक बना रहता है ... लेकिन आज के समय में प्यार की परिभाषा बदल चुकी है ... इसका प्रभाव यह है आज १४ फरवरी को प्रेम दिवस का रूप दे दिया गया है... इस कारण संसार भर के "कपल "प्यार का इजहार करने को उत्सुक रहते है... आज १४ फरवरी का कितना महत्त्व बढ गया है इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है इस अवसर पर बाजारों में खासी रोनक छा जाती है ....



गिफ्ट सेंटर में उमड़ने वाला सैलाब , चहल पहल इस बात को बताने के लिए काफी है यह किस प्रकार आम आदमी के दिलो में एक बड़े पर्व की भांति अपनी पहचान बनने में कामयाब हुआ है... इस अवसर पर प्रेमी होटलों , रेस्ताराओ में देखे जा सकते है... प्रेम मनाने का यह चलन भारतीय संस्कृति को चोट पहुचाने का काम कर रहा है... यूं तो हमारी संस्कृति में प्रेम को परमात्मा का दूसरा रूप बताया गया है ॥ अतः प्रेम करना गुनाह और प्रेम का विरोधी होना सही नही होगा लेकिन वैलेंटाइन के नाम पर जिस तरह का भोड़ापन , पश्चिमी परस्त विस्तार हो रहा है वह विरोध करने लायक ही है ....वैसे भी यह प्रेम की स्टाइल भारतीय जीवन मूल्यों से किसी तरह मेल नही खाती.....

आज का वैलेंटाइन डे भारतीय काव्य शास्र में बताये गए मदनोत्सव का पश्चिमी संस्करण प्रतीत होता है... लेकिन बड़ा सवाल जेहन में हमारे यह आ रहा है क्या आप प्रेम जैसे चीज को एक दिन के लिए बाध सकते है? शायद नही... पर हमारे अपने देश में वैलेंटाइन के नाम का दुरूपयोग किया जा रहा है ...


वैलेंटाइन के फेर में आने वाले प्रेमी भटकाव की राह में अग्रसर हो रहे है.... एक समय ऐसा था जब राधा कृष्ण , मीरा वाला प्रेम हुआ करता था जो आज के वैलेंटाइन प्रेमियों का जैसा नही होता था... आज लोग प्यार के चक्कर में बरबाद हो रहे है... हीर_रांझा, लैला_ मजनू के प्रसंगों का हवाला देने वाले हमारे आज के प्रेमी यह भूल जाते है मीरा वाला प्रेम सच्ची आत्मा से सम्बन्ध रखता था ... आज प्यार बाहरी आकर्षण की चीज बनती जा रही है.... प्यार को गिफ्ट में तोला जाने लगा है... वैलेंटाइन के प्रेम में फसने वाले कुछ युवा सफल तो कुछ असफल साबित होते है .... जो असफल हो गए तो समझ लो बरबाद हो गए... क्युकि यह प्रेम रुपी "बग" बड़ा खतरनाक है .... एक बार अगर इसकी जकड में आप आ गए तो यह फिर भविष्य में भी पीछा नही छोडेगा....




असफल लोगो के तबाह होने के कारण यह वैलेंटाइन डे घातक बन जाता है... वैलेंटाइन के नाम पर जिस तरह की उद्दंडता हो रही है वह चिंतनीय ही है... ..संपन्न तबके साथ आज का मध्यम वर्ग और अब निम्न तबका भी इसके मकड़ जाल में फसकर अपना पैसा और समय दोनों ख़राब करते जा रहे है... वैलेंटाइन की स्टाइल बदल गई है ... गुलाब गिफ्ट दिए ,पार्टी में थिरके बिना काम नही चलता .... यह मनाने के लिए आपकी जेब गर्म होनी चाहिए... यह भी कोई बात हुई क्या जहाँ प्यार को अभिव्यक्त करने के लिए जेब की बोली लगानी पड़ती है....? कभी कभार तो अपने साथी के साथ घर से दूर जाकर इसको मनाने की नौबत आ जाती है... डी जे की थाप पर थिरकते रात बीत जाती है... प्यार की खुमारी में शाम ढलने का पता भी नही चलता .... आज के समय में वैलेंटाइन प्रेमियों की तादात बढ रही है .... साल दर साल ...


इस बार भी प्रेम का सेंसेक्स पहले से ही कुलाचे मार रहा है.... वैलेंटाइन ने एक बड़े उत्सव का रूप ले लिया है... मॉल , गिफ्ट, आर्चीस , डिस्को थेक, मक डोनाल्ड का आज इससे चोली दामन का साथ बन गया है... अगर आप में यह सब कर सकने की सामर्थ्य नही है तो आपका प्रेमी ॥


वैलेंटाइन का चस्का हमारे युवाओ में तो सर चदकर बोल रहा है , लेकिन उनका प्रेम आज आत्मिक नही होकर छणिक बन गया है... उनका प्यार पैसो में तोला जाने लगा है .... आज की युवा पीड़ी को न तो प्रेम की गहराई का अहसास है न ही वह सच्चे प्रेम को परिभाषित कर सकती है... उनके लिए प्यार मौज मस्ती का खेल बन गया है .......


Saturday, 12 February 2011

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सेना भी अब पर्यावरण बचाने में मदद करने लगी है ... मंदिरों में इसकी गूंज सुनाई दे रही है......शायद घंटियों की आवाजो से ऊपर वाले को संचार किया जा रहा हो..... पत्रकारिता की भाषा में कहू तो यह भी जनसंचार का ही एक रूप है.....
संस्कृत हमारी सबसे पुरानी भाषा है ......भले ही अंग्रेजी मैया हमारी हिंदी और अन्य भाषाओ को निगल रही हो परन्तु भोपाल में ऐसे नज़ारे देखे जा सकते है..... मामा जी लक्ष्मी कान्त जी के साथ "अपना मध्य प्रदेश" बनाने में लगे है ...............
हम भले ही कहते रहे हम सब आपस में भाई भाई है........परन्तु हकीकत में शायद ऐसा नही है... तभी मोटर वाले ने सर्व धरम का आईडिया ले लिया है ......
अंग्रेजी मैया का नया अवतार हुआ है ...... अभी तक जेम्स कैमरून की अवतार देखी थी ......अब हावर्ड वालो ने सीधे भोपालियो को अपने मोह पाश में बाँध दिया है .................हावर्ड ग्लोबल हो गया है......

Tuesday, 8 February 2011

उफ़ ... ये बढता भ्रष्टाचार .....................


आज भारतीय समाज अपनी संस्कृति से दूर हो चूका है.... प्रत्येक व्यक्ति के मनमें घोर निराशा का भाव है ....जहाँ एक ओर हमारा देश उभरती ताकत बनकर उभरा है वही हमारे देश में भ्रष्टाचार का ग्राफ भी तेजी के साथ बढता जा रहा है ...भारत में भ्रष्टाचार की जड़े कितनी गहरी हो गई है इसका पूर्वानुमान देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गाँधी ने लगाते हुए कहा था जब केंद्र से एक रूपया भेजा जाता है तो जनता के पास केवल पन्द्रह पैसे ही पहुचते है ... शेष पिचासी पैसे बिचौलियों के पास चले जाते है ......

बिचौलियों से उनका आशय नेता, नौकरशाहों , कॉरपोरेट के गठबंधन से था ..जब उस समय हालत ऐसे थे तो आज कैसे होंगे इसकी कल्पना स्वर्गीय राजीव गाँधी के इस कथन के आसरे बखूबी की जा सकती है.....बोफोर्स से लेकर हवाला ,हर्षद मेहता से लेकर चारा, तहलका से लेकर कॉमन वेल्थ , आदर्श सोसाईटी से लेकर 2 जी स्पेक्ट्रम यह कुछ चर्चित घोटाले रहे है ....इनके बीच हुए घोटालो की फेहिरस्त लम्बी है .... कई घोटालो की परते आज तक नही खुली ........

अगर सभी को देख लिया जाए तो भ्रष्ट्राचार के विकराल रूप की लकीर खींची जा सकती है ......विडम्बना है हमारे राजनेता भी भ्रष्टाचार को समाप्त करने के बजाए उसकी गंगा में दुबकी लगाकर उसे सामान्य बात मानने लगे है .... वह भी परोक्ष रूप से किसी न किसी घोटालो में लिप्त है क्युकि घोटालो का सीधा सम्बन्ध सत्ता से होता है .... यहाँ लोकतंत्र है जिसकी लाठी उसकी भैस होती है .......

भ्रष्टाचार की व्यापकता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है आज गरीबो तक सरकारी इमदाद नही पहुच पा रही है ....विदेशो में भारत का ७० करोड़ रुपये से अधिक का काला धन जमा है ... अगर यह धन वापस आ जाये तो देश कि गरीबी मिट जाएगी... साथ ही चारो तरफ खुशहाली आ जाएगी .....परन्तु हमारे राजनेता इसे वापस लाने में कोई दिलचस्पी नही दिखा रहे है ......


ऐसा हमारे देश में ही संभव है अनाज गोदामों में सड़ता है और हमारे कृषि मंत्री कहते है महंगाई कम करने के लिए मेरे पास कोई जादू की छड़ी नही है .....साथ ही वित्त मंत्री कहते है दिसम्बर तक सब ठीक हो जायेगा लेकिन महंगाई डायन विकराल रूप धारण करती जा रही है.....
मुझे अपना देश कई मायनों में महान लगता है ....यहाँ पर इन्द्रा आवास , मनेरेगा जैसी योजनाओ में धांधली होना कोई नयी बात नही है...केंद्र सरकार जो पैसा गरीबो को दे रही है उसका बहुत कम भाग जरुरतमंदो को मिलता है ...हर विभाग में भ्रष्टाचार का खुला खेल चलता है बिना रिश्वत दिए आपका काम नही बनता ....


सरकारी विभागों में तो आज आलम यह है यहाँ पर "बाबुओ" ने हर चीज में अपना कमीशन फिक्स कर लिया है... उनकी सैलरी से ज्यादा की कमाई कमीशन से होती है ...यही हाल ऊपर बैठे अधिकारियो का है... वह भी किसी काम को करने से पहले सामने वाले से यह जरुर पूछते है इस काम में मुझे कितना परसेंट मिलेगा ?


कुल मिलाकर तस्वीर सामने आ ही जाती है....एक स्थान्तरण करवाने से लेकर एक नल का कनेक्शन लगवाने के लिए आम आदमी को खासे पापड़ बेलने पड़ते है .... बिना रिश्वत दिए उसका काम नही बनता .....
आज के दौर में हमारा पूरा सिस्टम रिश्वत पर निर्भर हो गया है .....बिना सेवा मेवा नही मिलता.... नेताओं के टाल मटोल रवैये के चलते इस बात की उम्मीद कम है क्या मौजूदा सिस्टम में सुधार आ पायेगा?
ऐसे में आम आदमी परेशान है क्युकि उसकी गाडी कमाई कॉमन वेल्थ , २ जी स्पेक्ट्रम जैसे घोटालो में लुटती जा रही है....घोटाले बाज जेल की सलाखों के बजाय खुले आम घूम रहे है ....भ्रष्टाचार को रोकने के लिए जो जांच एजेंसिया बनायी गई है वह भी सरकार के हाथ की कठपुतली बन गई है .....


२ जी स्पेक्ट्रम जैसा घोटाला प्रधान मंत्री की नाक के नीचे होता है परन्तु हमारे पी ऍम साहब को इसकी भनक तक नही लगती....ऐ राजा की करतूतों से पी ऍम पी ऐ सी के सामने पेश होने को तो तैयार है परन्तु उनको जेपीसी किसी कीमत पर मंजूर नही है.....


शायद मनमोहन को इस बात की चिंता सता रही है अगर जेपीसी हुई तो उनकी पोल खुल जायेगी.....बेहतर होता अगर मनमोहन अपनी नेकनीयती का सबूत सबके सामने पेश कर देते............

२०१० को घोटालो के साल के रूप में याद किया जायेगा ... मधु कोड़ा जैसे नेता का बस अगर इस देश में चले तो वह इसे बेच डाले.... भ्रष्टाचार के मुकाबले के लिए भाजपा और कांग्रेस की स्थिति एक जैसी है.... जहाँ कांग्रेस अपने लोगो को बचने का प्रयास कर रही है वही भाजपा बिहार की जीत से इतना गदगद है की वह येदियुरप्पा को हटाने के बजाए उन्हें अभयदान देने से परहेज नही करती ........

उदारीकरण के बाद देश में घोटालो के ग्राफ में तेजी आई है ..... नेताओं में भ्रस्ताचार से लड़ने की इच्छा शक्ति नही है.... वह इसे बड़ी समस्या तो मानते है परन्तु उन भ्रष्टाचारियो पर नकेल कसने से डरते है क्युकि वह भी सत्ता की मलाई साथ साथ चाटते है....यह हमारे सिस्टम का एक दोष है यहाँ अपराधी को सबूत मिटाने का पर्याप्त समय मिल जाता है.......कलमाड़ी के घर छापा पड़ने से पहले उसके घर से सबूत मिटने की कोशिसे होना आम बात है....... अब समय आ गया है भ्रष्टाचार के उन्मूलन के लिए "लोक पल "जैसी स्वतन्त्र संस्था गठित की जाए.......जिसके काम में किसी का कोई दखल नही हो........साथ ही भ्रष्टाचारियो के लिए कठोर सजा का प्रावधान होना भी जरुरी है ...........

पिछले दिनों नीतीश कुमार ने इस दिशा में अच्छी पहल करते हुए विधायक निधि को समाप्त किया......साथ ही उन्होंने भ्रष्टाचारियो की संपत्ति जप्त करने के आदेश भी दे दिए.....बिहार का यह फैसला ऐतिहासिक लगा.... राष्ट्रीय स्तर पर कुछ ऐसी ही पहल होनी चाहिए..... सूरत बदलनी चाहिए......

साल की विदाई में जिस खबर ने मुझको सबसे ज्यादा आहत किया वह थी नेता, कोर्पोराते और मीडिया का कोकटेल...... चौथे स्तम्भ से लोगो को बहुत उम्मीदे थी वह नीरा प्रकरण ने धूमिल कर दी .... किस तरीके से नीरा और पत्रकारों के गठजोड़ ने राजा को यू पी ऐ २ में संचार मंत्री बनाया यह सबके सामने उजागर हुआ ....

अभी तक मीडिया पैड न्यूज़ के बारे में बदनाम था ... अब नीरा के कारनामे ने पत्रकारों की साख गिरा दी है.... कारगिल रिपोर्टिंग से रातो रात शौहरत कमाने वाली " बरखा दत्त" को कई लडकिया अपना रोल मोडल मानती है परन्तु बरखा के कारनामे ने पत्रकारों को शर्मसार कर दिया है .... आज अगर प्रभाष जोशी होते तो वह बहुत दुखी होते ...