Sunday, 29 March 2026

मोहन के नेतृत्व में जल गंगा संवर्धन अभियान से मध्यप्रदेश में जल संरक्षण की नई क्रांति

 

19 मार्च से 30 जून तक चलेगा जल गंगा संवर्धन अभियान का तीसरा चरण

मध्यप्रदेश सरकार का जल गंगा संवर्धन अभियान जल संरक्षण और जल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वाकांक्षी पहल है। 30 मार्च 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए इस अभियान ने न केवल सूखती नदियों को नया जीवन दिया है, बल्कि प्रदेश में जल संसाधनों के संरक्षण के लिए जनसहभागिता की एक अनूठी मिसाल पूरे देश के सामने पेश की है। मध्य प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान का तीसरा चरण गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर 19 मार्च 2026 से शुरू होने जा रहा है। यह अभियान जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और जनभागीदारी से प्रदेश को जल-संपन्न बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पीएम मोदी के जल संरक्षण के संकल्पों से प्रेरित अभियान

यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल संरक्षण के संकल्पों से प्रेरित है और प्रदेश में जल संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य रखता है। यह अभियान न केवल जल संरक्षण की दिशा में एक ठोस पहल है, बल्कि यह सामाजिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है। जनभागीदारी, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नीति-निर्माण के सामूहिक प्रयासों के साथ जनभागीदारी से मध्यप्रदेश अब जल संसाधनों के संरक्षण में एक नई मिसाल देश के सामने पेश करता जा रहा है।

जल संसाधनों को पुनर्जीवित करने की दिशा में निर्णायक कदम

जल गंगा संवर्धन अभियान भावी पीढ़ियों के लिए जल, जीवन और प्रकृति की इस अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखने का संकल्प है। इस अभियान का पहला चरण वर्ष 2024 से शुरू हुआ जिसमें कुएं, बावड़ी, तालाब, चेक डैम आदि का निर्माण, पुनर्जीवन और संरक्षण किया गया। पहले वर्ष सफलता मिलने के बाद 2025 में अभियान का दूसरा चरण 30 मार्च से 30 जून तक चला, जिसमें यह विशाल जनआंदोलन के रूप में विकसित हुआ।  

यह अभियान केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बहाल करने पर भी  इसका विशेष फोकस है। इस अभियान का उद्देश्य न केवल नदी, तालाब, कुएं और पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरोद्धार है बल्कि  प्रदूषित जल स्रोतों की सफाई को गति देने की दिशा में भी यह मजबूती के साथ पिछले दो चरणों में आगे बढ़ चुका है। खास बात यह है कि इसमें सामुदायिक भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है, जिससे यह पर्यावरण के साथ-साथ सामाजिक सशक्तिकरण का भी प्रेरक उदाहरण बन गया है। पिछले चरणों में हुए कार्यों से जहाँ लाखों जल संरचनाओं का संरक्षण और निर्माण हुआ है, वहीँ कई भू जल स्त्रोतों ,नदियों को पुनर्जीवन मिला है जिससे मध्यप्रदेश को जल संरक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।

उज्जैन के क्षिप्रा नदी तट से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे तीसरे चरण की शुरुआत

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल गंगा संवर्धन अभियान के तीसरे चरण का 19 मार्च 2026 गुड़ी पड़वा, को उज्जैन के क्षिप्रा नदी तट से शुभारंभ किया जाएगा। तीसरा चरण 19 मार्च से 30 जून गंगा दशहरा तक चलेगा।

मुख्यमंत्री  मोहन यादव ने कहा है कि जल प्रकृति का अनमोल उपहार है और इसे बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि 'जल है तो कल है' का कोई विकल्प नहीं है, इसलिए प्रदेश में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की जरूरत है।तीसरे चरण में भी प्रदेशभर में नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण, पुनरुद्धार और निर्माण पर विशेष फोकस रहेगा। अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए ग्रामीण-शहरी निकायों, स्थानीय समुदायों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

भू-जल संवर्धन और नदी शुद्धिकरण पर फोकस

राज्य में भू-जल स्तर सुधारने के लिए एक लाख से अधिक कुओं का पुनर्भरण कार्य शुरू किया गया है। साथ ही 57 प्रमुख नदियों और 194 प्रदूषण स्रोतों की पहचान कर उनके शोधन की पहल की गई है। इसके अलावा 145 नदियों के उद्गम क्षेत्रों में हरित विकास के लिए गंगोत्री हरित योजनाभी लागू की गई है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है ने कहा कि कुओं, बावड़ियों और नदियों के पुनरुद्धार के इस अभियान को जन-जन से जोड़कर जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा प्रदेश में अब तक 3000 से अधिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन किया जा चुका है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 86 हजार से अधिक खेत तालाब और 550 से ज्यादा अमृत सरोवर बनाए गए हैं।

पहले चरण में बनीं 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाएं

जल संरक्षण को लेकर मध्यप्रदेश सरकार द्वारा शुरू किया गया जल गंगा संवर्धन अभियानअब उल्लेखनीय परिणाम दिखाई देने लगे है। 2024 में राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का पहला चरण प्रारंभ किया गया जिसमें जल संरक्षण के क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक कार्य राज्य में किए गए। पहले चरण में कुल 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया। इनमें प्रमुख रूप से तालाब निर्माण एवं पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत नहर निर्माण, सूखी नदियों का पुनर्जीवन एवं जल संरक्षण से जुड़ी अन्य संरचनाएं शामिल हैं। इन कार्यों से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल भी उपलब्ध हुआ है।

खंडवा जिले नर्मदा नदी की सहायक घोड़ा पछाड़ नदी जो अत्यधिक भूमिगत जल दोहन के कारण सूख गई थी  रिज टू वैलीसिद्धांत पर आधारित जल संरचनाओं के निर्माण से नदी के 33 किमी क्षेत्र में जल संचयन संभव हुआ है। स्थानीय नागरिकों की भागीदारी और वैज्ञानिक तरीके से किए गए जल प्रबंधन ने इस नदी को फिर से बहने योग्य बना दिया। अब इस क्षेत्र की अन्य नदियों में भी बारहमासी प्रवाह की संभावना बन रही है। ऐसा बदलाव प्रदेश के हर जिले में महसूस किया जा रहा है। गंगा दशहरा जैसे उत्सव, वृक्षारोपण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों ने जल संरक्षण अभियानों में अपनी सक्रिय भागीदारी की है। इस अभियान ने जन –जन को जल संरचनाओं के भावनात्मक जुड़ाव से भी जोड़ने का कार्य भी किया है।

दूसरे चरण में प्रगति पर 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य 

2025 में चलाए गए जल गंगा संवर्धन अभियान के दूसरे चरण में भी व्यापक स्तर पर कार्य हुए। इस चरण में प्रदेश में 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य अभी भी प्रगति पर है। इन कार्यों में खेत तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नहर, कुएं, बावड़ियां तथा अन्य जल संचयन संरचनाएं बनाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल उपलब्धता को स्थायी रूप से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

जनभागीदारी अभियान की सबसे बड़ी शक्ति : डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश नदियों का मायका माना जाता है और जल आत्मनिर्भरता से ही प्रदेश समृद्ध बन सकता है। उन्होंने बताया कि इस 100 दिवसीय अभियान में तालाब, कुएं, बावड़ियां और अन्य जल स्रोतों के निर्माण व पुनर्जीवन का काम किया जाएगा साथ ही वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल स्रोतों की साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता का सबसे बड़ा आधार जनभागीदारी है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के इस महाअभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करेंगे, तो प्रदेश जल समृद्ध राज्य बन सकता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जनभागीदारी और संस्थाओं के सहयोग से जल गंगा संवर्धन अभियान को सफल बनाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और भविष्य की जल सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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