Sunday, 19 April 2026

एकात्म धाम बन रहा है एकात्मता का दिव्य केंद्र

भारत की आध्यात्मिक भूमि पर ऐसे अनेक तीर्थ स्थल हैं, जहाँ प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संकल्प एक साथ जुड़कर मानवता को नई दिशा देते हैं। इन्हीं में से एक है एकात्म धाम, जो मध्यप्रदेश के पावन ओंकारेश्वर में स्थित है। यह धाम आदि गुरु शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत दर्शन और “एकात्मता” के सार्वभौमिक संदेश को समर्पित है। नर्मदा नदी के किनारे मांधाता पर्वत पर स्थित यह स्थल न केवल एक तीर्थ है, बल्कि सांस्कृतिक एकता, आध्यात्मिक जागरण और वैश्विक सद्भाव का प्रतीक भी बन रहा है।

12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का विशेष स्थान है। नर्मदा नदी के बीच स्थित यह ओमआकार का द्वीप प्राचीन काल से ही तीर्थयात्रियों का प्रमुख केन्द्र रहा है। किंवदंती है कि विन्ध्य पर्वत ने यहां शिव की आराधना की और शिव स्वयं ओमकारेश्वर रूप में प्रकट हुए। 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य का जीवन से इस स्थल का गहरा संबंध है। यहीं गुरु गोविंद भगवत्पाद से दीक्षा पाने के साथ ही उन्होंने अद्वैत दर्शन की गहराई प्राप्त की। शंकराचार्य ने पूरे भारत में चार मठों की स्थापना कर सनातन धर्म का पुनरुत्थान किया और “ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या” जैसे महान सिद्धांत दिए। एकात्म धाम इसी योगदान को याद दिलाता है और इन दिनों उनके दर्शन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है।

मध्यप्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना के रूप में आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के तहत एकात्म धाम का इन दिनों विकास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य अद्वैत वेदांत को वैश्विक स्तर पर प्रसारित करना, सांस्कृतिक एकता को मजबूत करना और मानवता में एकत्व का भाव जगाना है।

आचार्य शंकर ने भारतवर्ष का भ्रमण कर सम्पूर्ण राष्ट्र को सार्वभौमिक एकात्मता से आलोकित किया। आचार्य शंकर की एकात्मता की प्रतिमा 108 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा बहुधातु से निर्मित है। यह आदि शंकराचार्य को समर्पित है और एकात्मता का सन्देश दे रही है। 21 सितंबर 2023 को इसका अनावरण हुआ था। नर्मदा नदी और मांधाता पर्वत के सुरम्य वातावरण में यह प्रतिमा दूर से ही दर्शन देती है। यहाँ स्थित अद्वैत लोक एक आधुनिक संग्रहालय है, जिसमें आचार्य शंकर के जीवन, उनके दर्शन, शास्त्रार्थ और सनातन धर्म की विभिन्न वीथिकाएं, लेजर-लाइट शो, फिल्म और प्रदर्शनियां होंगी। यहां सृष्टि की एकता को समझाने वाले केंद्र भी बनाए जा रहे हैं। आचार्य शंकर अंतर्राष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान में वेदांत दर्शन, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और कला पर शोध केंद्र, शंकर कलाग्राम, नर्मदा विहार,ध्यान केंद्र, ग्रंथालय, गुरुकुल और विस्तार केंद्र शामिल हैं। मोहन सरकार द्वारा इसे महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। 2028 तक मुख्य निर्माण कार्य पूरे होने की उम्मीद है।

एकात्मधाम के अंतर्गत दूसरे चरण में 2195 करोड़ रूपये की लागत से आचार्य शंकर के जीवन और दर्शन पर केंद्रित अद्वैत लोक संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आचार्य शंकर के जीवन, उनके भाष्यों, पांडुलिपियों, दर्शन एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित व प्रदर्शित करना है। परियोजना में संग्रहालय, शोध-केंद्र, शैक्षिक सुविधाएँ तथा तीर्थ और सांस्कृतिक पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे का विकास शामिल करने की रूपरेखा रखी गयी है जिससे न केवल आध्यात्मिक-अध्ययन को बल मिलेगा बल्कि स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। 17 अप्रैल से 21 अप्रैल तक  यहां पांच दिवसीय अनुष्ठान का बड़ा आयोजन हो रहा है जहां 700 से अधिक शंकर दूत के रूप में दीक्षा लेकर एकात्मता के संदेश को रेखांकित कर रहे हैं। इस अनुष्ठान में भारत की दिव्य संन्यास परंपरा के अनेक शीर्ष संत, आर्ष चिंतक और विशिष्टजन की विशेष सहभागिता हो रही है। 

मौजूदा दौर में जब पूरी दुनिया में भेदभाव, संघर्ष और अलगाव बढ़ रहा है ऐसे में एकात्म धाम यह बताता है कि आत्मा की एकता से ही समाज, राष्ट्र और विश्व की एकता संभव है। मोहन सरकार एकात्म धाम के माध्यम से आचार्य शंकर के दर्शन को वैश्विक फलक पर स्थापित करने के प्रयासों में जुटी हुई है। एकात्म धाम के माध्यम से एमपी सरकार संतों, विद्वानों और आमजन को एक मंच पर लाने का अनुपम कार्य कर रही है जहां युवाओं की बड़ी संख्या में सहभागिता हो रही है। एमपी की मोहन सरकार के प्रयासों से यह धाम जल्द ही सनातन धर्म की अमर विरासत को संजोते हुए वैश्विक एकता का बड़ा केन्द्र बनेगा।

Friday, 10 April 2026

मोहन के विजन से अब एमपी-यूपी सहयोग को मिलेगी बूस्टर डोज

 एमपी यूपी महासम्मेलन ने लिखी विकास की नई इबारत 

डॉ. मोहन यादव के विजन से एमपी-यूपी के बीच औद्योगिक, पर्यटन और ऊर्जा सहयोग को नई रफ्तार मिल रही है। 2026 को वाराणसी में आयोजित ‘एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026’ ने अंतरराज्यीय साझेदारी को विकास, निवेश, पर्यटन, कृषि, ऊर्जा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का कार्य किया है। यह सम्मेलन मात्र दो राज्यों के साझा संकल्प नहीं बल्कि ‘विकसित भारत’ का जीवंत प्रतीक बना है।

साझा विरासत और सहयोग का मिलेगा  लाभ

मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश सहयोग सम्मेलन 2026 में दोनों राज्यों ने विकास, निवेश, लघु उद्योग और धार्मिक पर्यटन को लेकर नई दिशा तय की। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक, ऐतिहासिक तथा भौगोलिक रूप से गहराई से जुड़े हुए हैं। काशी और उज्जैन जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र दोनों राज्यों को जोड़ते हैं।  दोनों राज्यों में  समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं और विशाल श्रम शक्ति मौजूद है। डॉ. मोहन यादव ने इस सम्मेलन में जोर दिया कि दोनों राज्य मिलकर आर्थिक प्रगति के नए मॉडल की गौरवगाथा लिख सकते  हैं। सम्मेलन में काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल कॉरिडोर के बीच एमओयू का आदान-प्रदान हुआ, जो धार्मिक पर्यटन को नई गति देगा।

वन-टू-वन बैठकें, अनेक समझौतों से आकर्षित होगा निवेश और रोजगार सृजन 

दोनों राज्यों के स्थानीय शिल्प, जीआई  टैग उत्पादों और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए सहयोग का ढांचा तैयार किया गया। इससे कारीगरों को नई बाजार पहुंच मिलेगी, निर्यात बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। उज्जैन में 284 करोड़ रुपये के निवेश से यूनिटी मॉल बनाने की घोषणा की गई, जो ओ ओडीओपी  उत्पादों का प्रमुख प्रदर्शन केंद्र बनेगा। एमपी यूपी महासम्मेलन में तमाम उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें हुईं। दोनों राज्यों की औद्योगिक क्षमताओं का साझा उपयोग कर निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन पर जोर दिया गया। मुरैना में 2000 मेगावाट की संयुक्त सोलर परियोजना पर काम आगे बढ़ रहा है, जिससे किसानों को सस्ती और हरित ऊर्जा उपलब्ध होगी। केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र के किसानों की किस्मत बदलेगी। धार्मिक स्थलों के विकास, पर्यटकों की सुविधा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों राज्यों के बीच पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। ध्यप्रदेश में भी चंदेरी और महेश्वरी साड़ियों सहित पारंपरिक लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है।प्रयागराज कुंभ के बाद उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ को देखते हुए व्यवस्थाओं को और ज्यादा सुगम बनाने पर फोकस रहेगा। मध्यप्रदेश में सिंहस्थ के आयोजन के लिए बेहतर प्रबंधन की तैयारियां जोर शोर से  चल रही है। प्रयागराज में ऐतिहासिक महाकुंभ के आयोजन की व्यवस्थाओं के अध्ययन से अब  सिंहस्थ के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी।

रोजगार और समृद्धि की दिशा में बढे कदम 

सीएम डॉ. यादव ने बताया कि इस दौरे का उद्देश्य युवाओं को रोजगार, गरीबों को बेहतर जीवन और उत्पादों को सही मूल्य दिलाने के प्रयासों को आगे बढ़ाना भी है। इसके लिए लघु उद्योगों के बीच समन्वय और साझा रोड शो की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों के बीच टकराव का दौर खत्म हो चुका है और अब सहयोग के जरिए विकास की नई इबारत लिखी जा रही है।

‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन को मिलेगी मजबूती 

डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में यह सम्मेलन अंतरराज्यीय सहयोग को नई दिशा देने वाला साबित हुआ है जिससे छोटे उद्यमियों, कारीगरों और किसानों को भी सीधा लाभ पहुंचेगा। इस बार ओडीओपी , जीआई टैग, सोलर ऊर्जा, धार्मिक पर्यटन और औद्योगिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों पर ठोस कार्य होने की बड़ी पहल शुरू हुई है। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट कहा कि यूपी और एमपी अब  मिलकर विकास के नए आयाम स्थापित करेंगे, जिसमें निवेश, रोजगार, निर्यात और सांस्कृतिक समृद्धि शामिल हैं। यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में आयोजित  इस सम्मेलन निवेश आकर्षण, निर्यात संवर्धन, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए क्षेत्रीय विकास का एक सशक्त मॉडल प्रस्तुत किया है। “एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026” के माध्यम से मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच सहयोग को एक स्थायी, व्यावहारिक और परिणामदायी स्वरूप मिलेगा, जो दोनों राज्यों की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगा। डॉ. मोहन यादव के विजन के तहत दोनों राज्य अब न केवल सांस्कृतिक रूप से जुड़ेंगे, बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से भी एक-दूसरे के पूरक बनेंगे। मोहन यादव के नेतृत्व में  दो राज्य, विकसित भारत का संकल्प अब  साकार होता दिख रहा है।  मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच यह सहयोग पूरे देश के लिए प्रेरणादायी उदाहरण साबित होगा।

Thursday, 9 April 2026

मोहन का मिशन किसान कल्याण, एमपी के किसानों की आय होगी दूनी


मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के उत्थान को अपनी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है। 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित कर उन्होंने न केवल किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प लिया है, बल्कि कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए धरातल पर कई ठोस कदम उठाए हैं। डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से वर्ष 2026 मध्यप्रदेश के लाखों किसानों के लिए एक नई उम्मीद की किरण साबित हो रहा है, जहां राज्य सरकार की अनेक योजनाएं धरातल पर उतर रही हैं। 

‘मोहन ’ ने किसानों का मन मोहा 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसान-केंद्रित नीतियां व्यावहारिक और दूरदर्शी हैं। भावांतर योजना का विस्तार कर सोयाबीन के बाद सरसों को शामिल किया गया, जबकि उड़द और मूंगफली पर समर्थन मूल्य के साथ बोनस की घोषणा हुई। फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स पर सब्सिडी और पार्क स्थापना से किसानों को मूल्य संवर्धन का अवसर मिलेगा। खेती का रकबा 2.50 लाख हेक्टेयर बढ़ाने, तीन नदी जोड़ो परियोजना से 16 लाख हेक्टेयर सिंचाई, माइक्रो इरीगेशन विस्तार, आधुनिक मंडियां, बीज परीक्षण लैब और फसल नुकसान सर्वे के लिए तहसील-स्तरीय मौसम केंद्र जैसी रोडमैप ने किसानों का मन मोह लिया है। 

किसान परिवारों तक सीधे पहुँच रहा है लाभ 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों के हितों के प्रति संवेदनशील हैं। किसानों के हितों में लिए जा रहे अनेक निर्णय न केवल किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, बल्कि प्रदेश सरकार की किसान कल्याण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का भी प्रतीक भी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन से मध्यप्रदेश में कृषि विकास योजनाएं तेजी से लागू हो रही हैं। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार योजनाओं की पहुँच परिवारों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। मध्यप्रदेश को देश का इकलौता राज्य है जहां किसानों को 5 रुपये में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली और भूसे की मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। पिछले डेढ़ वर्ष में प्रदेश में दूध संग्रहण भी काफी बढ़ चुका है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की भावांतर राशि की घोषणा से किसानों के चेहरे पर नई आशा, उत्साह और विश्वास का संचार हुआ है। 

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी शुरू होगी 

प्रदेश में तय वक्त पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी प्रारंभ कर दी जाएगी। उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराने वाले सभी किसानों का गेहूं खरीदा जायेगा। उपार्जन प्रक्रिया में पहले छोटे किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा। इसके बाद मध्यम एवं बड़े किसानों के गेहूं की खरीदी की जाएगी। स्लॉट बुकिंग वाले सभी किसानों का गेहूं चरणबद्ध रूप से खरीदा जाएगा। 

मिशन मोड में होगा किसान कल्याण

गेहूं उपार्जन में बारदान की उपलब्धता निरंतर बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास  सरकार द्वारा किए जा रहे हैं। केन्द्र सरकार, जूट कमिश्नर सहित अन्य बारदान प्रदाय एजेंसियों से बारदान आपूर्ति के लिए राज्य सरकार लगातार सम्पर्क बनाए हुए है। कमिश्नर्स और कलेक्टर्स को मिशन मोड में काम करने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समग्र किसान कल्याण पर जोर दिया है। पशुपालन, मत्स्य विकास और ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में मोहन सरकार तेजी से अपने कदम बढ़ा रही है। 

उपार्जन शुरू होने से पहले कराएं तौल केन्द्रों का निरीक्षण

मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन व्यवस्था को सरल, सहज और सुविधाजनक बनाया जाये। किसानों को उपार्जन केन्द्र तक आने और गेहूं बेचने में किसी भी तरह की कठिनाई न होने पाये। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने उपार्जन व्यवस्था पर नियमित रूप से निगरानी के लिए एक राज्य स्तरीय एवं कृषि उपज मंडियों में भी कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दिए हैं।

10 अप्रैल से प्रारंभ होगी गेहूं की खरीदी, 3627 उपार्जन केंद्र बने 

मध्यप्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल से एवं अन्य सभी संभागों में 15 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं का उपार्जन प्रारंभ होने जा रहा है। जिन संभागों में 10 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू होनी है, उनके लिए 7 अप्रैल से पंजीकृत किसानों की स्लॉट बुकिंग प्रारंभ हो जायेगी। 10 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी प्रारंभ कर दी जाएगी। 

वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन के लिए प्रदेश के 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। गेहूं उपार्जन के लिए इस वर्ष प्रदेश में कुल 3627 उपार्जन केंद्र बनाये गये हैं। बीते उपार्जन वर्ष 2025-26 में 15 लाख 44 हजार 55 किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया था। इस उपार्जन वर्ष के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,625 रूपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 40 रूपए प्रति क्विंटल बोनस का लाभ भी इस वर्ष देने जा रही है।

कृषि वर्ष की कार्ययोजना पर होगा अमल

किसानों का जीवन संवारने और इनकी बेहतरी के लिए पूर्ण समर्पित भाव से मिशन मोड में कृषि वर्ष का बेहद प्रभावकारी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश की सभी कृषि उपज मंडियों के वर्तमान ढांचे में क्रमबद्ध सुधार होना जरूरी है। सभी मंडियों को वैश्विक वर्ल्ड क्लास मंडी की तर्ज पर अपग्रेड किया जाना चाहिए।मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन केंद्रों में आने वाले किसानों को सभी प्रकार की बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली, पीने का पानी, बैठक, छाया, प्रसाधन एवं पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराई जाये। किसी को भी किसी भी प्रकार की प्रक्रियागत या व्यवस्थागत असुविधा का सामना न करना पड़े। सभी किसानों का सहजता से गेहूं तुल जाये, ऐसी व्यवस्थाएं की जाएं। जिन किसानों से गेहूं खरीदा जाये, कम से कम समय में उनके खातों में भुगतान कर देने की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाएं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह दृष्टिकोण न केवल मध्यप्रदेश को कृषि प्रधान राज्य के रूप में स्थापित करेगा, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाकर देश के विकास में योगदान देगा। 2026 किसान कल्याण की नई इबारत लिखने वाला साबित होगा।