Wednesday, 20 May 2026

यूसीसी की दिशा में आगे बढ़ते मोहन सरकार के कदम

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता को एक नीति  निर्देशक सिद्धांत के रूप में शामिल किया गया है, जो भारत के समस्त राज्य क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश देता है। इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना और संपत्ति जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करना है, चाहे उनकी धार्मिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो। यह “एक देश, एक कानून” की अवधारणा को मजबूत करता है और लिंग समानता, राष्ट्रीय एकता तथा सामाजिक सुधार को बढ़ावा देता है।

मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने हाल ही में यूसीसी लागू करने की दिशा में आगे कदम बढ़ाये हैं। सरकार ने इसके लिए 5 सदस्यीय हाईलेवल कमेटी का गठन किया है जिसमें रिटायर्ड जस्टिस रंजना देसाई को अध्यक्ष, सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघन सिंह, कानूनविद अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता बुधपाल सिह को सदस्य बनाया गया है। वहीं अपर सचिव अजय कटेसरिया इस कमेटी के सदस्य सचिव रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली यह समिति विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे कानूनों की समीक्षा करेगी। कमेटी को 60 दिन के अंदर विस्तृत रिपोर्ट और ड्राफ्ट बिल सरकार को सौंपेगी।  

विधि व विधायी कार्य विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि वर्तमान परिस्थितियों में नागरिकों के बीच समानता, न्याय, सामाजिक समरसता और विधिक स्पष्टता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों से जुड़े कानूनों की समीक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी के मद्देनजर यह समिति गठित की गई है। समिति को राज्य में लागू विभिन्न व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विधियों का परीक्षण करने की जिम्मेदारी दी गई है। 

उत्तराखंड और गुजरात में अपनाए गए मॉडल और प्रक्रियाओं का अध्ययन, मध्यप्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित कानूनी ढांचा सुझाना, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से सुझाव लना, जनसुनवाई और परामर्श बैठकें आयोजित करना, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों पर विचार करना, लिव-इन संबंधों के पंजीयन और उससे जुड़े अधिकारों पर सुझाव देना और प्रस्तावित कानून के विधिक और प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा करना शामिल हैं। समिति मध्यप्रदेश की स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुझाव देगी। यूसीसी के प्रावधानों का अध्ययन करने और संभावित चुनौतियों पर सुझाव देने को भी कहा गया है। मोहन सरकार ने इस प्रक्रिया को ज्यादा समावेशी बनाने के संकेत दिए हैं। समिति आम लोगों, धार्मिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के विशेषज्ञों से सुझाव लेगी, ताकि प्रस्तावित कानून व्यावहारिक और संतुलित हो सके। इसके लिए प्रदेशभर में परामर्श बैठकों की भी कार्ययोजना  तैयार की जा आ रही है। 

अप्रैल 2026 में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गृह विभाग को निर्देश दिए कि उत्तराखंड और गुजरात में लागू यूसीसी मॉडल का अध्ययन कर राज्य के लिए ड्राफ्ट तैयार किया जाए। मुख्यमंत्री के सीधे निर्देश पर गृह विभाग ड्राफ्ट बिल तैयार करने में जुट गया है। सरकार का लक्ष्य है कि दिवाली 2026 या वर्ष के अंत तक यूसीसी को लागू कर दिया जाए।

मोहन सरकार यूसीसी को लिंग न्याय, सामाजिक समानता और प्रशासनिक सुव्यवस्था से जोड़ रही है। इसमें बहुविवाह पर रोक, लड़कियों-बेटों को समान उत्तराधिकार, विवाह एवं लिव-इन संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण, तलाक की प्रक्रिया को सरल और निष्पक्ष बनाना जैसी बातें शामिल हो सकती हैं। इससे महिलाओं को व्यक्तिगत कानूनों की जटिलताओं से मुक्ति मिलेगी और कानूनी विवादों में कमी आएगी। सरकार इसे राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने का कदम मान रही है। यूसीसी पर मोहन सरकार की सक्रियता से लगता है कि मध्यप्रदेश सबके लिए एक कानून की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में आदिवासी आबादी है इसलिए कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों ने चिंता जताई है कि यूसीसी आदिवासी रीति-रिवाजों और पहचान पर असर डाल सकता है। सरकार को इन संवेदनशील मुद्दों पर विशेष छूट या संतुलित प्रावधान रखने की जरूरत होगी। 

यूसीसी पर मोहन सरकार की बढ़ती सक्रियता निश्चित ही उत्तराखंड और गुजरात के बाद मध्यप्रदेश को यूसीसी लागू करने वाले तीसरे बड़े राज्य के रूप में स्थापित कर सकते हैं। एमपी की मोहन सरकार के ये कदम यूसीसी को मात्र चुनावी वादे से आगे ले जाकर व्यावहारिक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। यह कदम न केवल कानूनी समानता सुनिश्चित करेगा, बल्कि सामाजिक सुधार और महिला सशक्तिकरण को भी नई गति देगा। 

Thursday, 14 May 2026

प्रोजेक्ट चीता की नई उड़ान, कूनो बन रहा है चीतों का नया किंगडम


भारत में विलुप्त हो चुकी चीता प्रजाति को वापस लाने की महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चीता के तहत मध्यप्रदेश का कूनो नेशनल पार्क की आबोहवा अब चीतों को रास आने लगी है। 1952 में भारत से चीतों के विलुप्त होने के बाद सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो में छोड़कर इस ऐतिहासिक परियोजना की शुरुआत की। आज कूनो न केवल आयातित चीतों का आश्रय स्थल है, बल्कि दूसरी पीढ़ी के भारतीय चीतों के जन्म और प्राकृतिक प्रजनन का साक्षी भी बन गया है।

कूनो नेशनल पार्क श्योपुर जिला मध्यप्रदेश लगभग 74,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। कूनो अभयारण्य श्योपुर जिले के विन्ध्याचल पर्वत श्रेणी के उत्तरी भाग में स्थित है। इसमें विविध शुष्क पर्णपाती वन, घास के मैदान और प्रचुर शिकार चितल, सांभर, नीलगाय, चिंकारा आदि भी उपलब्ध हैं। चीतों के लिए उपयुक्त खुले मैदान और कम मानवीय हस्तक्षेप इसे आदर्श स्थल बनाते हैं। सितम्बर 2022 में दक्षिण अफ्रीका से चीता प्रोजेक्ट के तहत नामीबिया से 9 चीते जहाँ एमपी में लाये गए वहीँ फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते आये। बोत्सवाना से लाये गए नौ चीतों में 6 मादा और 3 नर शामिल हैं। कूनो में कई मादा गामिनी, ज्वाला आदि के शावकों को जन्म दिया और अब तक दर्जनों शावक यहाँ पैदा हो चुके हैं। यह ‘प्रोजेक्ट चीता’ के अंतर्गत तीसरा बड़ा अंतर्राष्ट्रीय चरण है। इस वर्ष बोत्सवाना से अतिरिक्त चीते आने से अब इनकी आबादी में इजाफे के आसार दिखाई दे रहे हैं। मोहन सरकार की वन्य जीव संरक्षण की मजबूत इच्छाशक्ति का परिणाम है कूनो की इस परियोजना ने मध्यप्रदेश में तेजी से प्रगति की है जिसके परिणाम अब धरातल पर दिखाई दे रहे हैं। 

अप्रैल 2026 में कूनो ने वन्य जीव संरक्षण में इतिहास रचा। गामिनी की बेटी केजीपी-2 ने खुले जंगल में चार शावकों को जन्म दिया। यह पहला मामला है जब भारत में जन्मी चीता ने जंगली परिवेश में संतान दी। इससे पहले शावक मुख्यतः बाड़े वाले क्षेत्रों में पैदा होते थे। इस सफलता के साथ भारत में चीतों की कुल संख्या 57 पहुंच गई है जिनमें से लगभग 37 भारत में जन्मे हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि परियोजना अब पुनर्वास से आगे बढ़कर स्थायी प्रजनन की ओर अग्रसर हो रही है। कूनो नेशनल पार्क देश में वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिकी पुनर्स्थापना का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।कूनो में हिरण, चीतल, सांभर, नीलगाय और जंगली सुअरों की पर्याप्त संख्या चीतों  के लिए अनुकूल साबित हो रही है। यही वजह है कि  चीते  यहां आराम से रह रहे हैं। 

दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से एमपी के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन्यजीव संरक्षण को सांस्कृतिक विरासत, जैव विविधता, पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने का कार्य किया है जिसके चलते मध्यप्रदेश में वन्य जीव संरक्षण और संवर्धन की दिशा में कई अभूतपूर्व निर्णय लिए गए। रातापानी टाइगर रिजर्व को देश का 8वां और प्रदेश का नया टाइगर रिजर्व घोषित करना मोहन का सबसे बड़ा मास्टर स्ट्रोक रहा। 2008 में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी से अनुमति मिलने के बावजूद यह प्रस्ताव दशकों से लटका रहा लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में इसे मंजूरी मिली। इतना ही नहीं पुरातत्वविद् विष्णु श्रीधर वाकणकर के नाम पर इसका नामकरण कर उन्होनें इसे सांस्कृतिक गौरव से भी जोड़ा। मार्च-2025 में माधव टाइगर रिजर्व को प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया।

 चीतों का पुनर्वास घास के मैदानों के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करता है, शिकार प्रबंधन में मदद करता है और अन्य वन्यजीवों के लिए भी लाभ पैदा करता है। कूनो में चीतों की आमद बढ़ने के साथ ही इसे अब  पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। प्रोजेक्ट चीता’ की अपार सफलता के बाद भारत में दशकों बाद चीतों की वापसी ने यह संदेश दिया है कि यदि सही वैज्ञानिक प्रबंधन और राजनीतिक प्रतिबद्धता हो तो विलुप्त प्रजातियों का पुनर्वास संभव है। चीतों को क्वारंटीन एवं अनुकूलन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद गांधी सागर एवं नौरादेही जैसे अन्य अभयारण्यों में भी बसाने की भी सरकार ने पूरी तैयारी की जा रही है। अब कूनो को ग्लोबल ब्रीडिंग सेंटर के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य चल रहा है। इसके साथ ही गांधी सागर वाइल्डलाइफ सेंचुरी को चीतों के दूसरे आवास और नौरादेही वाइल्डलाइफ सेंचुरी को तीसरे बड़े चीता लैंडस्केप के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। बीते दिनों श्योपुर में कूनो नेशनल पार्क के क्वारंटीन बाड़े से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने दो मादा चीतों को कूनो नदी के समीप स्थित साइट से खुले जंगल में मुक्त किया जिसने मध्यप्रदेश के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने का काम किया है। ये चीते भी अब कूनो के वातावरण में तेजी से घुल-मिल जाएंगे।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की धरती ने चीतों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराकर उन्हें पुनर्स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर अपने परिवार का हिस्सा बनाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगभग साढ़े तीन वर्ष पहले कूनो में चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना से लाए गए चीतों के पुनर्स्थापन को निरंतर सफलता मिल रही हैं और आज प्रदेश ने देशभर में चीता स्टेट के रूप में पहचान बनाई है। कूनो में इन चीतों के सफल प्रजनन से भरोसा बढ़ा है कि यह परियोजना न केवल वन्यजीव संरक्षण का प्रतीक है, बल्कि भारत की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता और वैश्विक सहयोग का उदाहरण अनुपम उदाहरण भी पूरे देश के सामने प्रस्तुत करता है। कूनो में प्रोजेक्ट चीता की सफलता हर नए शावक के जन्म के साथ मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और पर्यटन को नई गति देगी।