Tuesday, 14 December 2010

"दिग्गी" राजा का नया सियासी वार ............भाग १

चर्चा में बने रहना दिग्गी राजा का पुराना शगल रहा है......इस बार भी कांग्रेस के महासचिव "दिग्गी" राजा फिर सुर्खियों में है.....मुंबई हमले में शहीद हुए हेमंत करकरे की शहादत पर सवाल उठाकर उन्होंने एक बार फिर से अपनी अदा को सबके सामने ला दिया है..... हालाँकि उनकी पार्टी ने दिग्गी के बयानों से कन्नी काटने की कोशिश की है लेकिन दिग्गी राजा अपने कहे पर भी कायम है......इसने कांग्रेस पार्टी की मुश्किलों को बदा दिया है......

दिग्विजय सिंह के बयान
इस समय उफान पर है.... इस ने एक बहस को जन्म दे दिया है जिसके मुताबिक वोट बैंक की राजनीती करने के लिए कांग्रेस पार्टी किसी भी हद तक जाने को तैयार है चाहे उसे इसके खातिर शहीदों का ही अपमान क्यों न करना पड़े... कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी कुछ ऐसा ही किया है....बीते दिनों दिग्गी राजा ने इस बात का खुलासा दिल्ली में एक पुस्तक के विमोचन समारोह में किया जब उन्होंने कहा कि मुंबई पर हमला होने से ठीक पहले उनकी हेमंत करकरे से फ़ोन पर बात हुई थी जिसमे करकरे ने मौत की आशंका जताते हुए कहा था कुछ हिन्दू संगठनो से उनकी जान को खतरा है ......हालाँकि हेमंत की पत्नी कविता करकरे ने इन बातो को सिरे से नकार दिया है..... उन्होंने कहा कि उनके पति की मौत पर अब राजनीति नही की जानी चाहिए ...

यह बयान देश में सबसे लम्बे समय तक काम करने वाली सबसे बड़ी पार्टी के महासचिव के मुह से आया है लिहाजा इस पर शोर मचना तो आम बात बन चुकी है ......यह बयान शहीदों की शहादत का भी अपमान है .... दिग्गी भाजपा और दुसरे दलों के नेताओ को जुबान संभलकर बात करने की नसीहत तो समय समय पर देते रहते है लेकिन अपना खुद विवादों में फसकर अपनी छवि ख़राब करने में लगे है ......हेमंत करकरे का सवाल उठाकर दिग्गी राजा ने एक बार फिर वोट बैंक की राजनीती को गरमा दिया है.... यह बात इसका गवाह है कि किस तरह देश की सबसे बड़ी पार्टी से लोगो का अटूट भरोसा टूटता जा रहा है.........
( जारी रहेगा....)

3 comments:

prashant kr jha said...

harh aap blog ke madhyam se ham logo ko naye jankari ke saath ek topic pe sochane ke liye prarit karte hain...

P S Bhakuni said...

dukh hota hai jb koi jimmedaar vyakti is prkaar ke gair jimmedarana vyktvy deta hai .....

कविता रावत said...

हमारे ये राजनेता गढ़े मुर्दों को उखाड़ने से न जाने क्या सन्देश जनता को देना चाहते हैं, समझ से परे है ...... हर समय हर बात पर राजनीति जनता को अब समय से जागने की जरुरत है ....