Monday, January 20, 2014

लाइट , कैमरा, एक्शन और धरने पर 'आप '


आंदोलन चलाने  से लेकर  सरकार चलाने के चंद  दिन देखने के बाद अब आम आदमी पार्टी के भीतर के कुनबे से जिस तरह की विरोधी  आवाजें आयी हैं उससे आम आदमी  पार्टी की साख लोगो के बीच प्रभावित हो रही है । आप के विरोध में खड़े लक्ष्मी नगर से आप के विधायक  विनोद कुमार बिन्नी ने अब पैंतरा बदलते हुए केजरीवाल पर सीधा निशाना साधा है और कहा है केजरीवाल की  यह पार्टी अब आम आदमी की पार्टी नहीं बल्कि खास आदमी पार्टी बनकर  रह गई है, साथ ही उन्होंने कहा है आम आदमी पार्टी को सत्ता मिलने के बाद  आम जनता से जुड़े मुद्दे कहीं पीछे छूटते जा रहे हैं । बिन्नी  ने 15 जनवरी को एक बार फिर बगावत का झंडा बुलंद कर दिया। उन्होंने  केजरीवाल पर  जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया जिसके जवाब  में  केजरीवाल ने भी कहा कि पहले वह मंत्री पद मांग रहे थे और अब पूर्वी दिल्ली से लोकसभा का टिकट मांग रहे हैं। फिर क्या था  बिन्नी ने केजरीवाल को तानाशाह और धोखेबाज तक करार दे दिया।

 बिन्नी की यह बगावत आप के आतंरिक लोकतंत्र की पोल तो खोल रही है साथ में केजरीवाल को भी सीधे  निशाने पर ले रही है । बिन्नी ने केजरीवाल पर सबसे गम्भीर आरोप आप सरकार के  कांग्रेस के प्रति नरम रुख अपनाने को लेकर  लगाये है क्युक़ि  ध्यान दें तो  सत्ता में आने से  पहले  केजरीवाल ने  जहाँ भाजपा और कांग्रेस से समर्थन नहीं लेने ,ना किसी को समर्थन देने की बात दोहरायी थी  वहीँ उनके निशाने पर दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी  थी जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के कई बड़े सबूत होने की बात केजरीवाल ने ना  केवल दोहराई थी बल्कि उनके खिलाफ घोटालो की जांच करवाने की  बात भी  बड़े मंचो  से कही थी लेकिन  आज केजरीवाल अगर विपक्षियो से ठोस सबूत लाने  की बात कर  रहे हैं तो उनकी नेकनीयती पर तो सवाल उठने लाजमी ही हैं ।वहीँ दूसरी तरफ अरविन्द यह मानते रहे है राजनीती में शुचिता और ईमानदारी लाना उनके हर विधायक का मकसद ना केवल इस दौर में है बल्कि स्वराज को आम आदमी तक पहुचाने में उनका हर कार्यकर्ता कंधे  से कन्धा मिलाकर चलेगा । लेकिन हाल के समय में घटित हुआ  बिन्नी  प्रकरण उनके दावो की पोल खोलने के साथ ही बिन्नी की मंत्री पद पाने  की लालसा को भी उजागर करता है ।

  रामलीला  मैदान में शपथ  ग्रहण से ठीक पहले भले ही बिन्नी के साथ मान मनोव्वल के बाद मामला शांत हो गया था   लेकिन सरकार  बनने  के बीस दिन बाद फिर  उनके बगावती तेवर आप की साख पर तो असर छोड़ते है साथ ही लोगो में उसकी विश्वसनीयता  को लेकर  भी  गम्भीर  सवाल  उठाते हैं । हाल के दिनों में आप के कई निर्णयो में भारी अंतर्विरोध देखने को मिले हैं जिसके बाद से यह सवाल भी बड़ा हो चला  है आने वाले दिनों में यह पार्टी किस राह पर चलेगी  जिसमे देश की अर्थ नीति से लेकर  आंतरिक सुरक्षा सरीखे मसले शामिल हैं ही साथ ही कॉर्पोरेट घरानो को लेकर आप की  नीति क्या रहेगी यह भी  आप की बड़ी पहेली होगी  और इन  सबके बीच आप के हर विधायक और नेता आये दिन किसी न किसी मसले पर घिरते ही जा रहे हैं ।

 केजरीवाल सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री राखी बिड़ला एक कार्यक्रम में जब कुछ दिनों पहले पहुंची  तो वहां उनकी गाड़ी के शीशे पर बच्चे की गेंद लग गई जिससे कार का शीशा टूट गया ।  इस घटना को उन्होंने अपने ऊपर हमले के रूप में पेश किया और थाने में केस दर्ज करा दिया जबकि  बच्चे की गेंद उनकी कार के शीशे पर लगी थी । इस घटना में भी केजरीवाल ने राखी का खूब पक्ष लिया था ।  वहीँ  केजरीवाल मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्री  सत्येंद्र जैन ने सरकारी अस्पतालो के ताबड़तोड़ दौरे कर पहले मीडिया की खूब वाह वाही बटोरी लेकिन  जनकपुरी के एक अस्पताल के बाहर  एक नवजात को फेंकने का मामला सामने जब आया और मीडिया ने  कार्रवाई को लेकर सवाल पूछे  तो वह झल्ला गए और उन्होंने कहा कि यह मामला निजी अस्पताल का है,  इसके बाद भी  केजरीवाल ने उनका खूब बचाव किया । 

                     आम आदमी पार्टी में दिल्ली की सत्ता पाने के बाद एक  ख़ास बदलाव देखने को आया है । जहाँ पहले आप से जुड़ने वाले लोगो की संख्या कम थी वहीँ दिल्ली में चमत्कारिक जीत के बाद आप के कार्यकर्ता  तो उत्साहित हुए  ही पूरे देश और विदेश से उससे जुड़ने वाले सदस्य बढ़ते  गए शायद इसकी बड़ी वजह यह रही जनता केजरीवाल से बहुत उम्मीदें पालने लगी । इस  अति उत्साह में   आप ने जहाँ  लोक सभा की  सभी सीटो पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर डाला वहीँ आम जनता के लिए सचिवालय के दरवाजे इस तरह खोल दिए कि  कैबिनेट मंत्री सड़क पर जनता की समस्याएं सुनने बैठने लगा । खुद मुख्यमंत्री ने आनन फानन में जनता दरबार लगाने की घोषणा कर डाली लेकिन पहली बार जनता दरबार में  मची मारामारी के चलते जनता दरबार के अपने प्रोग्राम को ही अब  स्थगित करवा दिया । 

 दिल्ली में सरकार  बनाये जाने के बाद आप में  अलग अलग  विचारधारा से जुड़े लोगो का  संगम जुड़ना शुरू हुआ है। जहाँ भाजपा और कांग्रेस से नाराज एक बड़ा वोटर केजरीवाल में नायक -2  का अक्स देखने लगा वहीँ सामाजिक कार्यकर्ताओ से लेकर समाजवादी, कॉर्पोरेट से लेकर एक्टिविस्ट हर तरह का तबका केजरीवाल को  करिश्माई तुर्क मानने लगा ।  पार्टी में शामिल होने के बाद उनके सुर भी कई मौको पर बेमेल दिखायी दिए । मसलन प्रशांत भूषण को ही लें उन्होंने कई मौको पर कश्मीर को लेकर जनमत संग्रह कराने का पुराना मसला फिर से उठाया तो वहीँ मल्लिका साराभाई ने बड़बोले कुमार विश्वास को  अपरिपक्व  तक कह डाला  ।

 कुमार  विश्र्वास ने औरतों, अल्पसंख्यकों और समलैंगिक महिलाओं के लिए जिस तरह की शब्दावली  का प्रयोग किया उस पर  साराभाई ने कड़ा ऐतराज जताया ।  वहीँ  विश्‍वास की मलयाली नर्सों पर 6 साल पहले की गई अभद्र टिप्‍पणी पर  उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग  की गई है तो हाल ही में 'आप' के साथ जुड़ने वाली मलयाली लेखिका सारा जोसफ ने भी इस मुद्दे पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्‍व से जवाब माँगा है  । इसके अलावा हाल ही में पार्टी में शामिल हुए कैप्टन गोपीनाथ ने भी दिल्ली सरकार के उस फैसले पर सवाल उठाये जिसमे केजरीवाल ने खुदरा में शीला सरकार के निर्णय को  ही पलट दिया था । यह मामला अभी शांत ही हुआ था कि अब आप फिर से नई  मुश्किलो में घिर गई है ।  आम आदमी पार्टी और पुलिस अधिकारियो के बीच विवाद ने इन दिनों दिल्ली की राजनीती में भूचाल ला दिया है ।

 आम आदमी पार्टी  की सरकार और दिल्ली पुलिस में इस कदर ठनी हुई है अब दिल्ली में केजरीवाल अपने कैबिनेट मंत्रियो के लाव लश्कर के साथ रेल भवन के सामने  धरने पर बैठ   गए हैं । यह पहला मौका है जब पहली बार कोई मुख्यमंत्री इस तरह सरकार का मुखिया होने के बावजूद अपनी मांगें मनवाने के लिए अनशन पर बैठा है । सरकार बनने के बाद जिस तरह आप के दो कैबिनेट मंत्रियो की पुलिस अधिकारियो के साथ तकरार बढी उसने आप के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े किये हैं । सवाल उस पुलिस को लेकर भी है जिसकी कार्यशैली हमेशा से विवादो में रही है और जो केंद्र सरकार के अधीन रहकर काम करती आयी है । । कुछ दिनों पहले दिल्ली सरकार के कानून मंत्री सोमनाथ भारती,  महिला एवं बाल विकास मंत्री  राखी बिड़ला   और दिल्ली पुलिस के अधिकारियो की नोक  झोक हुई उसने आप की राजनीती को एक बार फिर लाइट , कैमरा  और एक्शन मॉड  में लाकर खड़ा कर दिया है ।

 दरअसल पूरे प्रकरण पर दो कैबिनेट मंत्री और पुलिस आमने सामने हैं । पेशे से वकील और केजरीवाल सरकार में कानून मंत्री सोमनाथ भारती पर सबूत से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने का एक आरोप तो पहले से ही लगा हुआ है  । अब  सोमनाथ भारती का एक नया मामला  मालवीय नगर के एस एच ओ से जुड़ गया है  ।  भारती पर आरोप है कि उनके नेतृत्व में कुछ लोगों के समूह ने अफ्रीकी महिलाओं के घर पर रात  में छापा मारा। भारती का आरोप था कि  यह महिलाएं वेश्यावृत्ति में लिप्त हैं ।दिल्ली के क़ानून मंत्री सोमनाथ भारती ने पिछले हफ्ते दिल्ली पुलिस से दक्षिणी दिल्ली के एक घर पर यह  कहकर छापा मारने की मांग की थी कि वहां वेश्यावृत्ति   ड्रग्स  का धंधा होता है।

  सोमनाथ भारती ने कहा था कि दक्षिण दिल्ली के  इलाक़े में लोग  सेक्स रैकेट चलने की शिकायत उनसे कई दिनों से कर रहे थे ।  जिसके बाद वह  अपने कुछ कार्यकर्ताओं के साथ वहां पहुंचे थे और उन्होंने कुछ ग़लत होते देखा।  बाद में उस घर में रहने वाली महिलाओं और दूसरे अफ़्रीकी मूल के उनके कई साथियों ने यह  आरोप लगाया कि मंत्री के साथियों ने औरतों के साथ अभद्र व्यवहार किया । भारती के अनुसार उनके बार-बार कहने के बाद भी दिल्ली पुलिस ने लोगों की तलाशी नहीं ली और उन्हें जाने दिया जिसके बाद से विवाद गरमाया  हुआ है  तो वहीँ राखी बिडला का मामला  एक विवाहिता को ससुराल में जलाकर  मारने की कोशिश का रहा जिसकी सूचना  उन्हें सम्बंधित इलाके के लोगो से मिली और  लाव लश्कर के साथ अपने कार्यकर्ताओ को साथ लेकर उन्होंने भी  सीधे पुलिस को कार्यवाही करने को कहा जिस पर पुलिस मूक दर्शक बनी रही ।

 अब  मौके की  नजाकत समझते हुए मुख्यमंत्री  केजरीवाल ने भी मोर्चा खोल दिया है ।  पूरी दिल्ली सरकार धरने पर बैठ गई है । दिल्ली पुलिस के पांच अधिकारियो के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग को लेकर सोमवार से धरने पर बैठे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि पुलिस की मिलीभगत  के बिना  दिल्ली  में कोई भी  बड़ा अपराध नहीं हो सकता । दिल्‍ली पुलिस को केंद्र के बजाय दिल्‍ली सरकार के अधीन किए जाने की मांग को लेकर दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा आंदोलन किए जाने से दिल्ली की सियासत का पारा ठण्ड में   भी सातवें आसमान पर इन दिनों चढ़ा हुआ है । 

भले ही  केजरीवाल इसे आजादी की दूसरी लड़ाई नाम दे रहे हो लेकिन इस घटना ने एक सरकार के आंदोलनकारी चेहरे को एक बार फिर ना केवल उजागर किया है बल्कि यह सवाल भी उठाया है सरकार और दिल्ली पुलिस के बीच खेले जा रहे इस टी ट्वेंटी मुकाबले में आम जनता ही पिस  रही है और अपराधो के ग्राफ में इजाफा हो रहा है । आने वाले दिनों में आप की यह आंदोलनकारी और एक्टिविस्ट शैली  उसे कहाँ तक ले जायेगी फिलहाल कह  पाना मुश्किल है ?

1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

गतिमय राजनैतिक घटनाक्रम।