Saturday, 23 January 2010

विकास की गति अपेक्षा से कम हुई है------- ऐरी



उत्तराखंड क्रांति दल उत्तराखंड का एक मात्र रीजनल दल है.......वह निशंक सरकार को अपना समर्थन दे रहा है...... उसके शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की विधान सभा में चार बार प्रतिनिधित्व कर चुके है..... राज्य निर्माण आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ऐरी राज्य में उत्तराखंड क्रांति दल का बड़ा संगठन खड़ा नही कर पाए..... अपनी साफ और ईमानदार छवि को वह पार्टी के वोट बैंक को बढाने में इस्तेमाल नही कर पाए.....पृथक राज्य के लिए चले जन आन्दोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है.....परन्तु इसके बाद भी उनका दल लोगो का विश्वास जीतने में कामयाब नही हो पाया है..उक्रांद के कमजोर सांगठनिक ढांचे का फायदा राज्य में भाजपा और कांग्रेस ने उठाया...



उत्तराखंड के वरिष्ट नेता काशी सिंह ऐरी मानते है उत्तराखंड राज्य आन्दोलन के प्रमुख मुद्दे रसातल में है.....९ वर्ष बीतने के बाद भी राज्य की स्थितिया अच्छी नही कही जा सकती...पहाड़ो से पलायन बदस्तूर जारी है..जल ,जमीन, जंगल जैसे मुद्दे हाशिये पर है.....जिसके चलते जनता अपने को ठगा महसूस कर रही है...


राज्य गठन के ९ वर्ष पूरे होने के मौके पर ऐरी से मैंने विशेष संवाद अभी कुछ समय पहले किया ........ उसी के कुछ मुख्य अंश आपके सामने प्रस्तुत हैं..........




राज्य गठन के ९ साल पूरे हो चुके है? राज्य निर्माण आन्दोलन में भागीदार के तौर पर इन ९ सालो को आप कैसे देखते है?

--- देखिये हर्ष जी, राज्य बन गया है और ९ वर्ष का समय भी बीत गया है.....लेकिन राज्य में जैसी स्थितिया आज है वह बहुत अच्छी नही कही जा सकती ... जिस आशाओ और आकांशा को लेकर यह राज्य बना था वह पूरी नही हुई है ....पर्वतीय इलाकों से पलायन आज भी जारी है ... हमने पिछली सरकार से भी कहा
वर्तमान सरकार से भी कह रहे है पर्वतीय इलाकों के विकास के लिए एक विशेष ओद्योगिक नीति बनाये.....जिससे पहाड़ो से पलायन कम हो पर इस दिशा में गंभीरता से विचार नही हुआ है......


कांग्रेस का कहना है वर्तमान भाजपा की सरकार विकास के मोर्चे पर पूरी तरह से विफल साबित हुई है? इस बाबत आपका क्या कहना है?
-----कांग्रेस क्या कहती है मैं उस पर नही जाऊँगा, लेकिन इतना जरुर है विकास की गति अपेक्षा से कम हुई है......जिस तेजी से विकास होना चाहिए था वह नही हुआ है.......


तिवारी जी का शासन हमने देखा ....फिर खंडूरी जी आये.... दोनों की काम करने की जो बुनियादी शैली थी उसमे क्या फर्क नजर आता है आपको ?
----तिवारी जी का अपना अलग अनुभव था....उनकी काम करने की अलग शैली थी....देश की राजनीति पर उनकी जो पकड़ थी उसकी वजह से जैसा भी था विकास योजनाये आगे बड़ी........ खंडूरी जी के शासन में विकास को गति नही मिली.... खंडूरी जी विकास का पैसा सही जगह लगाना चाहते थे ताकि करप्शन न हो.....अभी नए मुख्य मंत्री निशंक आये है लोगो को उनसे काफी उम्मीदें है......


स्थायी राजधानी के मुद्दे पर दीक्षित आयोग की रिपोर्ट आ चुकी है ....आपकी पार्टी गैरसैण को नए राज्य की राजधानी बनाने की बात करती है..... मुझको याद है एक बार १५ जनवरी १९९२ को आपने बागेश्वर में सरयू नदी के तट पर गैरसैण को नए राज्य की राजधानी बनाने का संकल्प लिया था.......लेकिन दीक्षित आयोग की रिपोर्ट देखकर ऐसा लगता है राजधानी को देहरादून से हटाना संभव नही है....उक्रांद का गैरसैण पर क्या स्टैंड है ?उक्रांद पर अपने मूल मुद्दों से भटकने के आरोप भी लगते रहे है ?
----गैरसैण को राजधानी बनाना आज भी हमारे एजेंडे में है ....हम वहां राजधानी बनाकर दिखायेंगे....गैरसैण से पूरे राज्य का कांसेप्ट लगा हुआ है.....चाहे वह पहाड़ हो या मैदान राजधानी तो ऐसी जगह पर होनी चाहिए जो बीच में हो और हर जगह से उसका लिंक हो......गैरसैण हमारी जिद नही है ॥ गैरसैण हमारे लिए राज्य की मूल अवधारणा का केंद्र बिंदु है ॥ हमारा दल इससे नही भटका है......


कभी तीसरा मोर्चा बनाने की बात करने वाला आपका दल आज प्रदेश की भाजपा सरकार में खुद सत्ता की मलाई चाट रहा है ....ऐसे में तीसरे मोर्चे के कांसेप्ट का क्या होगा ऐरी जी?
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ऐसा नही है...तत्कालीन समय की राजनीतिक आवश्यकताएं अलग थी ......कोई सरकार नही बन रही थी.....प्रदेश में दुसरे चुनाव होने की आशंका भी बन रही थी ... कुछ विधायको की खरीद फरोख्त का भी मामला चल रहा था....ऐसे में अस्थिरता को समाप्त करने के लिए हमने अपने संवेधानिक कर्तव्यों का पालन किया .....और भाजपा को अपना समर्थन दिया... तीसरा मोर्चा ख़त्म हो गया है यह कहना सही नही है ......हम जनता के मुद्दों को उठाते रहते है ..आगे भी उठाएंगे.....


राज्य में कांग्रेस के शासन में उद्योगों में सत्तर फीसदी रोजगार स्थानीय लोगो को दिए जाने का शासनादेश जारी हुआ था॥ उस समय जितने भी मजदूर रखे गए उनका न्यूनतम मजदूरी देकर शोषण किया गया ... आज भी भाजपा के शासन में कमोवेश यही स्थितिया है?
------निश्चित तौर पर यह शासनादेश जारी है कि राज्य में लगने वाले उद्योगों में सत्तर फीसदी रोजगार स्थानीय लोगो को मिलना चाहिए लेकिन जहाँ तक इसके अनुपालन का सवाल है तो स्थिति बड़ी ख़राब है ॥ सत्तर फीसदी रोजगार सीधे डायरेक्ट होना चाहिए......हम इस मांग को सरकार के सामने रखेंगे......

विकास का प्रथम सोपान रेल यातायात है ... पहाड़ो में रेल चलने से विकास कार्य तेजी से हो सकते है .....राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री तिवारी ने तो एक बार कह दिया था पहाड़ो में रेल की कोई आवश्यकता नही है ....आपका इस सम्बन्ध में क्या कहना है ?
----जहाँ तक रेल की बात है तो पूरे विश्व में रेल कि महत्ता बनी हुई है ....पहाड़ के पिछड़ेपन को दूर किया जाना चाहिए.....इस सम्बन्ध में कई आन्दोलन भी चले....टनकपुर से पंचेश्वर, धारचुला, बागेश्वर , कर्णप्रयाग,तक तीन चार लाइन बिछाई जानी चाहिए......रेल सेवा महत्वपूर्ण है इसलिए यह कहना पहाड़ में रेल की कोई जरुरत नही है यह उचित नही है.......


ऐरी जी अगर आपकी पार्टी भविष्य में सत्ता में आती है तो आपकी प्राथमिकता क्या होगी?
----विकास का ढर्रा बदलना ,रोजगार के अधिकाधिक अवसर देना , राज्य के संसाधनों का अधिकाधिक उपयोगकरना और करप्सन दूर करना हमारी प्राथमिकता में रहेगा..... पानी का सवाल हो या फिर जल जमीन जंगल का इन सभी मुद्दों पर जनता को केंद्र में रखकर नीतिया लागू की जायेंगी......

ऐरी जी अंतिम प्रश्न , जनता से आप क्या उम्मीद रखते है ?
---जनता ने उत्तराखंड के अलग राज्य के कांसेप्ट को स्वीकारा ...जनता हर आन्दोलन में हमारे साथ थी और आगे भी रहेगी.....राज्य के नव निर्माण में वह फिर हमारा साथ देगी .... ऐसी आशा करता हूँ ........

Tuesday, 19 January 2010

महिला सशक्तिकरण............


वीमेन इम्पावरमेंट ..... भैया इसको देखकर क्या सोचेंगे लोग.......? हम तो यही सोच रहे है........ पत्रकारिता करते करते कल जब खबरों की खोज खबर कर रहा था..... तो अचानक मेरी नजर इस बोर्ड पर पड़ी......झीलों के शहर भोपाल में अब महिलाओं का इम्पावरमेंट होना शुरू हो गया है ..... आपको बता दू अभी महीने पहले भोपाल नगर निगम की महापौर की कुर्सी पर कृष्णा गौर काबिज हुई है ...... कृष्णा गौर नगरीय प्रशासन मंत्री बाबू लाल गौर की बहू है...... देखा इसे कहते है महिला हित के प्रति संवेदनशीलता......... कुर्सी मिलते ही भोपाल में महिलाओं के लिए एक अलग से पार्क बना डाला.......... पार्क भी ऐसा जहाँ पुरुष भी ना फटक सकते ....और तो और ३ साल से ज्यादा उम्र के बच्चो के घुसने पर भी पाबन्दी है.........

Friday, 8 January 2010

मध्य प्रदेश भाजपा का नया "गडकरी" कौन?



मध्य प्रदेश भाजपा में इन दिनों नए भाजपा के गडकरी के लिए मंथन चल रहा है...... हालाँकि वर्तमान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर को पंचायत चुनाव निपटने तक अभयदान दे दिया गया है परन्तु राज्य में नए "गडकरी" की खोज के लिए जोर आजमाईश शुरू हो चुकी है......


सूत्रों की माने तो नए अध्यक्ष के चयन में शीर्ष नेतृत्व "शिव" की राय पर अपनी मुहर लगा सकता है..... पार्टी के हबीबगंज मुख्यालय से आ रही खबरों के अनुसार पार्टी की मौजूदा हालत पर मंथन किया जा चूका है... गौरतलब है अभी कुछ समय पहले विदिशा से सांसद और लोक सभा में विपक्ष कि नेता सुषमा स्वराज का भोपाल में आगमन हुआ था... वह कृष्णा गौर की महापौर की कुर्सी जीतने के बाद भोपाल पधारी थी.....तभी से नए नेता के चयन को लेकर पार्टी में चर्चा चल रही है... इसी दरमियान उनके सामने नए "गडकरी" कि खोज के मिशन पर खासी चर्चा भी हुई है... अगर इन खबरों पर यकीन करे तो इस बात को भी नजरअंदाज नही किया जा सकता है कि नए "गडकरी " के चयन में उनकी राय की इस बार अनदेखी की जायेगी...


बताया जाता है दिल्ली में नए नेता कि खोजबीन जारी है॥ इस समय कई नाम हवा में तैर रहे है जिनका दावा नरेन्द्र सिंह तोमर की जगह पर पुख्ता है.... इस सूची में सबसे आगे जिनका नाम चल रहा है वह है भाजपा के राष्ट्रीय सचिव प्रभात झा का... पर बताया जाता है वह शिवराज की पहली पसंद नही है॥ हाँ, इतना जरुर है उनकी संघ के अन्दर मजबूत पकड़ है...संघ के सर कार्यवाह सुरेश सोनी का उन पर खासा वरदहस्त भी रहा है ...पिछले कुछ समय से मध्य प्रदेश में उनकी सक्रियता भी बनी हुई है जो यह बताती है वह मध्य प्रदेश की "पिच" पर बैटिंग करने को बड़े उतावले है.... ब्राहमण होना उनके लिए फायदे का सौदा बन सकता है...


अनूप मिश्र के समर्थक भी अब प्रभात झा को अध्यक्ष की दोड से बाहर करने की कोशिसो में लग गये है॥ बताया जाता है वह अपना दावा दिल्ली में मजबूती से रख रहे है॥ साथ में उन्हें अपने समर्थको का समर्थन मिलने के साथ ही खुद शिव राज का भी बराबर समर्थन हासिल है.... खुद शिव राज चाहते है वह ऐसे व्यक्ति को अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाना चाहते है जिसकी ट्यूनिंग तोमर जैसी मैच करे... ऐसे हालातो में अनूप मिश्रा का दावा मजबूत नजर आ रहा है ... बताया जाता है उनके नाम पर सुषमा भी मुहर लगा देंगी...


कप्तान सिंह सोलंकी का नाम भी प्रदेश भाजपा के नए गडकरी के रूप में सामने आ रहा है॥ अगर ऊपर के किसी नाम पर सहमती नही बन पाती है तो "शिव " अपनी पसंद के "सोलंकी " का दाव खेल सकते है...सोलंकी की मराठा लोबी से खासी निकटता रही है॥ अभी भाजपा में मराठा लोबी का "सेंसेक्स" चरम पर है... गडकरी जैसे कई लोगो की इस समय पार्टी में खूब चल रही है ..ऐसे हालातो में सोलंकी की अध्यक्ष की डगर आसान लग रही है॥

अगर सोलंकी पर सहमती नही बन पाती है तो शिव अपनी पसंद के "लक्ष्मी कान्त शर्मा" का नाम आगे कर सकते है...वैसे हाल के मंत्रिमंडल विस्तार में लक्ष्मी कान्त को वजनदार मंत्रालय शिव के द्वारा आवंटित किये गए...जिससे यह अनुमान लगाया जा सकता है शिव के दरबार में उनकी क्या पकड़ है...?बताया जाता है इस समय लक्ष्मी कान्त कि गिनती शिव के सबसे विश्वास पात्रो में की जाती है....संगठन के महत्वपूर्ण कामो में शिव लक्ष्मी कान्त की राय लिया करते है॥ ऐसे में उनका दावा भी कमजोर नही है.... विदिशा से होना उनके लिए माईनस पॉइंट साबित हो सकता है....

इन सबसे इतर इंदौर से सांसद सुमित्रा महाजन का नाम भी भावी अध्यक्ष के लिए सामने आ रहा है ..."शिव राज" मामा बनकर महिला सशक्तिकरण के नारे जोर शोर से लगाते रहते है ...पर महत्वपूर्ण पद पर महिलाओं को उचित सम्मान नही दिया गया है...सुमित्रा को आगे कर शिवराज एक तीर से कई निशाने साध सकते है॥ उनके नाम का चयन होने से यह सन्देश जाएगा कि महत्वपूर्ण पद पर भाजपा में महिलाओं को उचित सम्मान मिलता है.... वैसे अभी सुषमा स्वराज के नेता प्रतिपक्ष पद पर होने से सुमित्रा के नाम पर गौर किया जा सकता है.... शिव राज के द्वारा हाल में किये गए मंत्रिमंडल विस्तार में अर्चना चिटनिस से कई मलाईदार मंत्रालय ले लिए गए जिससे यह सन्देश गया है कि राज्य कि भाजपा सरकार महिलाओं कि सच्ची हितेषी नही है... इंदौर में कैलाश विजय वर्गीज और सुमित्रा के बीच का ३६ का आंकड़ा जगजाहिर है... इस बार शिव राज ने अपने मंत्रिमंडल विस्तार में सुमित्रा के चहेते हार्डिया को अपने मंत्रिमंडल में जगह डी है... राजनीतिक विश्लेषको का मानना है इससे कैलाश विजय वर्गीज का कद कम हो गया है... यह घटना बताती है कि आज पार्टी में सुमित्रा कि राय कि अनदेखी नही की जा सकती है... इससे सुमित्रा की अध्यक्ष पद कि संभावनाओं को भी बल मिल रहा है ....

अध्यक्ष पद के लिए कोशिसे जारी है....मध्य प्रदेश भाजपा को भी नए अध्यक्ष पद का बेसब्री से इन्तजार है .....नए अध्यक्ष के सामने सत्ता और संगठन को साथ लेकर चलने की चुनौती है....अब देखना है इस पद पर किसकी ताजपोशी हो पाती है.....? वैसे सूत्रों से मिले रही खबरे बता रही है के नए अध्यक्ष का नाम अभी से तय किया जा रहा है ... इंदौर में पार्टी की १७ फरवरी को हो रही रास्ट्रीय कार्यकारणी कि बैठक के समापन के मौके पर नए अध्यक्ष की घोषणा की जायेगी....इंदौर में बैठक होने के कारण सुमित्रा का दावा भी कमजोर नजर नही आ रहा है...अब देखते है इन नामो में से किसका चयन किया जाता है या फिर कोई नया " डार्क होर्स " बेक डोर से इंट्री मारेगा .......... तो कीजिये कुछ इन्तजार फिल्म अभी बाकी है दोस्त.........



Friday, 1 January 2010

निकाय चुनावो में भी दिखा "शिव" का दम.........,.


मध्य प्रदेश में नगर निगम चुनावो के परिणाम सामने आ गए.... इन चुनावो में भाजपा ने एक बार फिर से बाजी मार ली.... लोक सभा चुनावो में भाजपा की घटी सीटो ने "शिव राज" की चिंताओं को बदा दिया था....पर इन चुनावो के परिणामो के बाद मुख्य मंत्री शिवराज चैन की बंसी बजा सकते है॥ आज के वोटर के मिजाज को परखना बड़ा मुश्किल है लिहाजा शिव राज को भी बचे चार साल के कार्यकाल में फूक फूक कर कदम रखने की जरुरत है ... राज्य के वोटरों का यही साफ़ सन्देश है ....


भोपाल नगर निगम पर कृष्णा गौर ने आभा सिंह को १५००० से अधिक वोटो से पराजित किया .... भोपाल नगर निगम पर पिछले दस वर्षो से कांग्रेस का कब्ज़ा था... भोपाल में महापौर की कुर्सी तो गौर को मिल गयी पर परिसद में कांग्रेस की धमक रहेगी... भाजपा की राजधानी में घटी सीटें "शिव" महाराज के लिए खतरे की घंटी बजा रही है.....


"मिनी मुंबई" के नाम से जाने जाने वाले इंदौर में भाजपा के कृष्ण मुरारी मोघे ने सफलता कायम की.....यहाँ पर कांग्रेस के पंकज संघवी को हार का मुह देखना पड़ा... संघवी ने इस चुनाव में पैसा पानी की तरह बहा दिया था पर इसके बाद भी वह नही जीत सके.... ग्वालियर, रीवा , खंडवा, जबलपुर, बुरहानपुर के नगर निगम पर भाजपा काबिज हुई.... खंडवा में भावना शाह की जीत हुई ॥ उनके पति देव विजय शाह राज्य की भाजपा सरकार में मंत्री है.....जबलपुर में भी भाजपा के प्रभात साहू ने भाजपा का झंडा फहरा दिया..... रीवा में शिवेंद्र पटेल की जीत हुई..... रतलाम में भाजपा के आगन में किल्कारिया गूंजी....बुरहानपुर में माधुरी का जलवा चला.... सबसे चौकाने वाला परिणाम सागर में रहा जहाँ किन्नर कमला की बम्पर वोट से जीत हुई .... यहाँ पर भाजपा शुरू से मजबूत रही है ....


बसपा का हाथी भले ही पूरे देश में अपनी चदायी नही कर पा रहा हो पर इस बार सिगरोली ,सतना के नगर निगम बसपा के खाते में गए... वही कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी बज गयी है ... लोक सभा चुनाव में अच्छी सीट जीतने के बाद जहाँ वह उत्साहित नजर आ रही थी वही इस बार उसके दिग्गज नेताओं के गद खुद सलामत नही रहे... कमलनाथ, ज्योतिरादित्य , अरुण यादव, सईद अहमद के इलाको में कांग्रेस के हाथ सत्ता फिसल गयी.... कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पचौरी के लिए खतरे की घंटी बज गयी है ... इन चुनावो के बाद उनका सिंहासन खतरे में पड़ता नजर आ रहा है ... कांग्रेस के साथ एक बड़ी बीमारी गुटबाजी की लग गयी है जो हर चुनाव में उसका खेल ख़राब कर देती है ... इस बार भी ऐसा ही हुआ है...


८ सीट जीतने के बाद शिव राज ने साबित कर दिया है मध्य प्रदेश में उनका राज किसलिए चलता है.....इस जीत के बाद केन्द्रीय स्तर पर उनका कद एक बार फिर बद गया है ... प्रदेश में अब नरेन्द्र सिंह तोमर का नया उत्तराधिकारी खोजा जाना है .... संभवतया केन्द्रीय नेतृत्व अब ऐसे व्यक्ति को कुर्सी सोपे जो शिव की पसंद का हो...... कांग्रेस को चाहिए वह बचे पांच सालो में मजबूती से विपक्ष की भूमिका निभाए....अन्यथा शिवराज अकेले उनकी लुटिया डुबोने की " कैपेसिटी " रखते है..... इस बात पर कांग्रेस को गंभीरता से विचार करना चाहिए.......

Sunday, 13 December 2009

डाक-डिब्बे का शव ..


लिखा है...पिनकोड उपयोग किजिए।
उपयोग तो हो रहा है, मगर पिनकोड के लिए नहीं बल्कि पत्थरों के लिए। क्या ट्विटर वाले तो ये पत्थर नहीं फैंक गए हैं? या फिर ई-मेल या एसएमएस वाले? ये लाल-काला डिब्बा कितनी जिंदगियों के बिछोह और मिलन के संदेश अपने में समेटे रहता था, ये बात आज कुछ के लिए समझना असंभव है। जिस दिन से यहां पिनकोड और चिट्ठी-पत्री की जगह पत्थर पड़ने लगे उसी दिन से हम जुड़कर भी अलग हैं, मिलन में भी बिछड़े हुए हैं, खुश होकर भी दुखी हैं, मैसेज पाकर भी संदेश हीन हैं, अपनों के होते हुए भी बिना अपनत्व के हैं।

बड़ा दुख होता है यह सोचकर ही कि वह वक्त यूं ही भूला दिया गया। वो चिट्ठियां भेजने का सिलसिला यूं ही खत्म कर दिया गया। हमारे अपने पास होकर भी कितने दूर हो गए। सभी हमारी जेब के जरिए हमसे संपर्क में हैं फिर भी हम अपनों का हाल नहीं जान पा रहे हैं।

बचे अवशेष ...


लिखा है...
सिर्फ़ एक रुपये में नव दुनिया .. मिडिया प्रा. लि. इंदौर का प्रकाशन ।

Sunday, 6 December 2009

मध्य प्रदेश में अब निकाय चुनावो का संग्राम...............







मध्य प्रदेश का चुनावी पारा सातवे आसमान पर है .... राज्य में होने जा रहे नगर निगम चुनावो में सत्तारुद भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस एक बार फिर आमने सामने है ... लोक सभा चुनावो में भाजपा की घटी सीटो ने जहाँ मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मुसीबतों को बदा दिया है ,वही गुटबाजी की शिकार कांग्रेस कि सीटो में इजाफा होने से कार्यकर्ताओ की बाछें खिल गई है ...


इस बार भी दोनों के बीच मुकाबला रोमांचक होने के आसार दिखाई दे रहे है..... राज्य में तीसरी ताकतों के कोई प्रभाव नही होने से असली जंग इन दोनों राष्ट्रीय दलों के बीच होने जा रही है ....

भाजपा की उम्मीद शिवराज बने हुए है....."एक भरोसे एक आस अपने तो शिव राज" यह गाना प्रदेश की पूरी भाजपा इन दिनों गा रही है ..पार्टी को आस है विधान सभा ,लोक सभा चुनावो की तरह नगर निगम चुनाव में उसके मुखिया शिव तारणहार बनेंगे......शिवराज की साफ़ और स्वच्छ छवि का लाभ लेने की कोशिश भाजपा कर रही है ...ख़ुद "शिव " नगर निगम की "पिच " पर अपनी सरकार के एक साल की उपलब्धियों जनता के बीच ले जा कर बैटिंग कर रहे है....

पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है अगर इन चुनावो में भाजपा का प्रदर्शन ख़राब रहता है तो जनता के बीच अच्छा संदेश नही जाएगा..... राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी में बद रही कलह बाजी भी राज्य में लोगो के बीच पार्टी कि अलोकप्रियता को उजागर कर रही है.... निकाय चुनावो की घोषणा से पहले जिस तरह से शिव राज ने ताबड़तोड़ घोषणा की है उससे तो यही लगता है पार्टी इस चुनाव को गंभीरता से ले रही है......

पिछले दिनों शिवराज के द्वारा किया गया मंत्री मंडल विस्तार भी निकाय चुनाव में लाभ लेने की मंशा से किया गया.... यही नही सतना में एक समारोह में उन्होंने यहाँ तक कह डाला प्रदेश में लगने वाले उद्योगों में स्थानीय लोगो को रोजगार दिया जाएगा...इस बयान ने राष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी..... जिसके बाद सफाई में उन्हें यह कहना पड़ा मीडिया ने उनके बयान को ग़लत ढंग से पेश किया ..... शिव ने अपने "ब्रह्मास्त्र " निकाय चुनावो से ठीक पहले फैक दिए जिसका लाभ उठाने की कोशिश वह करेंगे......

१९९९ के नगर निगम चुनावो पर नजर डाले तो भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला पाँच पाँच की बराबरी पर रहा था ... उस समय तीन सीट निर्दलीय के पाले में गई थी ....वही २००४ के नगर निगम चुनावो में भाजपा कांग्रेस पर पूरी तरह भारी पड़ी.... उस समय पार्टी के मुखिया बाबू लाल गौर थे ....तब पार्टी ने 13 नगर निगम सीटो में से १० सीटो पर भगवा लहराया था.... बाद में कटनी के निर्दलीय प्रत्याशी संदीप जायसवाल के भाजपा के पाले में आ जाने से उसकी संख्या ११ पहुच गई ... कांग्रेस की नाक राजधानी भोपाल में सुनील सूद ने भोपाल की महापौर की कुर्सी जीत कर बचाई ....


इस बार भाजपा के सामने जहाँ उसकी ११ सीट बचाने की चुनोती है वही भोपाल की बड़ी झील में कमल खिलवाने की भी... भाजपा को इस बात का मलाल है वह यहाँ पिछले दो चुनाव नही जीत पायी है..... लिहाजा इस बार उसको अपना महापौर जितवाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगवाना पड़ेगा...

हालाँकि इस बार के विधान सभा चुनावो में सात विधान सभा सीटो में से ६ सीटो पर भाजपा का कब्ज़ा बना है ....भाजपा के सभी बड़े नेता इस चुनाव में कांग्रेस के वर्चस्व को तोड़ने की जुगत में लगे हुए है ... भोअप्ल नगर निगम में महापौर की सीट इस बार महिला प्रत्याशी के लिए रिजर्व हो गई है ॥ नगरीय प्रशाशन मंत्री बाबू लाल गौर की बहू कृष्णा गौर के भाजपा प्रत्याशी के रूप में उतरने से यहाँ मुकाबला इस बार रोचक बन गया है ......


पिछले दो चुनावो में इंदौर , ग्वालियर , खंडवा , सागर, रीवा, जबलपुर लगातार भाजपा के खाते में गए है ....इस बार इन सीटो पर पार्टी के उपर बेहतर प्रदर्शन करने का भारी दबाव है ... शिव राज की प्रतिष्टा भी इस चुनाव में सीधे दाव पर लगी है..... अगर भाजपा उनके नेतृत्व में नगर निगम चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करती है तो केंद्रीय स्तर पर पार्टी में उनका कद बदना तय है ...

संभवतया नरेन्द्र सिंह तोमर के संभावित उत्तराधिकारी के नाम पर शीर्ष नेतृत्व "शिव" की राय पर अपनी मुहर लगा सकता है ...निकाय चुनाव के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद से नरेन्द्र सिंह तोमर की विदाई हो जायेगी...

वही दूसरी तरफ़ मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी भाजपा को इस बार के चुनावो में पटखनी देने की तैयारी कर ली है ॥ टिकटों के चयन में इस बार उसके द्वारा हुई देरी नुकसानदेह साबित हो सकती है .... बीते दिनों टिकटों को लेकर जिस तरह की खीचतान मची उसे देखते हुए यह नही कहा जा सकता की कांग्रेस भाजपा से पूरी ताकत से मुकाबला करने की स्थिति में है...

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी के सामने गुटबाजी से त्रस्त्र पार्टी के नेताओं ,कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने की बड़ी चुनोती है ...लोक सभा , विधान सभा चुनावो में पार्टी की घटी सीटो का एक बड़ा कारण खेमेबाजी रही जिसका नुक्सान पार्टी को बड़े पैमाने पर उठाना पड़ा था .....पिछली बार ज्योतिरादित्य,कमलनाथ ,दिग्गी राजा, अजय सिंह, सुभाष यादव जैसे कई गुटों में पार्टी गई जिसका व्यापक नुकसान उठाना पड़ा था ....पर इन सबके बाद भी इस बार कांग्रेस पार्टी के पास लोक सबह में बड़ी सीटो का अस्त्र है ...

साथ में भाजपा को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ सकता है ....कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पचौरी की माने तो भाजपा की नाकामियों को जनता के बीच ले जाने का काम कांग्रेस इस बार कर रही है ...यह चुनाव पचौरी की भावी राजनीती की दिशा को भी तय करेगा.....अगर कांग्रेस का प्रदर्शन निखारा तो उनका कद सोनिया गाँधी के दरबार में बदना तय है ...नही तो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से उनकी विदाई भी तय है.....


वोट के मौसम में जनता ने दोनों पार्टियों को लुभाने के लिए वादों की झड़ी लगा दी है... भाजपा ने अपना घोषणा पत्र कांग्रेस से पहले घोषित कर दिया.... जिसमे स्थानीय समस्याओ के समाधान की बात दोहराई गई है.... कांग्रेस के पिटारे में भी कुछ इसी तरह की योजनाओं का खाका देखा जा सकता है ....


भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने तो कांग्रेस के घोषणा पत्र को भाजपा की नक़ल बता दिया है ... खैर जनता जनार्दन तो दोनों की कार्य प्रणालियों से तंग आ चुकी है ... सीहोर जिले के बिलकीसगंज निवासी राजकुमार कहते है "घोसना पत्र तो चुनाव जीतने का स्तुंत है ॥ चुनावी वादे वादे बनकर रह जाते है" ......

राजधानी में टिकट बटने के बाद बड़े पैमाने पर विरोध के स्वर मुखरित हुए है ....भाजपा और कांग्रेस दोनों की कहानी एक जैसी ही है ..... असंतुस्ट की नाराजगी किसी भी दल की हार जीत की संभावनाओं पर अपना असर छोड़ सकती है...भाजपा को अपने पुराने किले बचाने में पसीने छूट सकते है... इंदौर, सतना, जबलपुर सीट भी इसके प्रभाव से अछूती नही है .... कांग्रेस के हालात भी भाजपा से जुदा नही है ...

टिकटों के चयन में इस बार भी पचौरी की जमकर चली है..वैसे राज्य के कई कांग्रेसी नेता पचौरी को राज्य की राजनीती में नही पचा पाये है ..पार्टी के अधिकांश नेता उनको थोपा हुआ प्रदेश अध्यक्ष मानते है ॥ "सोनिया" के वरदहस्त के चलते उनको राज्य की राजनीती में लाया गया पर अपनी ताजपोशी के बाद से वह पार्टी में नई जान नही फूक पाये.....

बहरहाल जो भी हो , नगर निगम चुनावो की चुनावी चौसर तैयार हो चुकी है ....भाजपा और कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्टा इस चुनाव में सीधे दाव पर है ... अब देखना है नगर निगम चुनाव का मैदान अपने बूते कौन मारता है ?