
Saturday, 31 October 2009
......... मान गई महारानी.....................

Monday, 26 October 2009
इस चित्र पर गौर फरमाए.........
Sunday, 4 October 2009
चुफाल के हाथ उत्तराखंड भाजपा की कमान .........

Sunday, 27 September 2009
रहस्य बनी रूसिया की मौत

शान ऐ भोपाल कही जाने वाली भोपाल एक्सप्रेस ट्रेन में पिछले दिनों एक बड़ी घटना घटी ..... इसको कोई मामूली घटना नही कह सकते... ट्रेन में भोपाल विकास प्राधिकरण के सीईओ मदन गोपाल रूसिया गायब हो गए ... उनकी लाश १ दिन बाद आगरा में मिली ... १० सितम्बर की रात को रूसिया दिल्ली से भोपाल लौट रहे थे ॥इस दौरान उनके साथ विधायक डागा भी इसी ट्रेन में एसी कोच में साथ सवार थे..मामला चौकाने वाला है क्युकि पुलिस को दिए बयान में डागा ने इस बात को स्वीकार किया वह ट्रेन में पूरी रात सोये थे जिस कारण उनको रूसिया के लापता होने का पता नही चला ... रूसिया और डागा ट्रेन में साथ साथ आ रहे थे और अगली सुबह रूसिया की फ़िक्र छोड़कर डागा भोपाल पहुचकर उतरने की तैयारी कर रहे थे....
यहाँ यह बताते चले की रूसिया और डागा विद्या नगर की विकास योजना को अमली जामा पहनाने के लिए भूमि अधिग्रहण सम्बन्धी कुछ कागजातों के साथ दिल्ली रवाना हुए थे... यह जमीन जिसके अधिग्रहण की कार्यवाही चल रही है वह २६ एकड़ है जिसमे ८ एकड़ जमीन सरकारी है बाकी जमीन डागा की है...इसी सिलसिले में बात करने के लिए डागा अपने साथ रूसिया को सुप्रीम कोर्ट के वकील के घर ले गए थे॥ रूसिया के परिजनों का कहना है इस मौत के लिए डागा जिम्मेदार है ... बताया जाता है इस जमीन के नियम शिथिल करने के लिए डागा रूसिया पर दबाव बनाये हुए थे..वह इस जमीन का ज्यादा मुआवजा चाहते थे .....रूसिया नियमो को तोड़कर कोई काम नही करना चाहते थे जिस कारण डागा ने रूसिया को रास्ते से हटा दिया हो ऐसी आशंका से इनकार नही किया जा सकता .... जिस समय रूसिया ट्रेन से लापता हुए उस समय तकरीबन ११ बजकर ५५ मिनट का समय हुआ था... इस समय यह ट्रेन आगरा के पास पहुचती है ..ख़ुद डागा ने यह बयान दिया है.... विधायक जीतेन्द्र की माने तो आगरा में दोनों ने साथ साथ भोजन किया था भोजन के बाद उनकी आँख लग गई और उनकी नीद भोपाल में खुली ...भोपाल पहुचकर जब उनकी सीट पर नजर गई तो वह खाली थी उसमे रूसिया के जूते और सामान रखा था ...
यही पर से रहस्य गहरा गया है...बड़ा सवाल यह है रूसिया की आँखे सुबह ट्रेन के भोपाल पहुचने में ही क्यों खुली ? रूसिया के फ़ोन कॉल की डिटेल कह रही है सुबह ६ बजने के बाद उनके द्बारा सुनील नाम के किसी व्यक्ति से बात की गई है ... अगर डागा सो रहे थे तो सुनील से उनकी बात पहले ही कैसे हो गई जबकि यह ट्रेन आमतौर पर ७ बजे भोपाल पहुचती है ... अगर वह सो रहे थे फ़ोन पर कोई भी बात ७ बजे के बाद ही होनी चाहिए थी......साथ ही ऐसा भी कहा जा रहा है रूसिया जिस बर्थ में सवार थे वहां पर कोल ड्रिंक के साथ मदिरा पान भी किया गया था ऐसे में इस घटना को सोच समझकर अंजाम दिए जाने की बात कही जा सकती है...इस मामले में शक की सुइया रेलवे पर भी है ॥ रूसिया के सहायक ने उनके सीट के नीचे रखी शराब की बोतल को क्यों फैक दिया यह बात भी किसी को समझ नही आ रही है ... पता चला है की रेलवे की जांच में अभी कुछ दिनों बाद इस बात का खुलासा होना है की रूसिया की सीट के नीचे शराब की बोतल के सबूत को कोच के २ सहायको ने जान बुझकर मिटाने का प्रयास किया है... साथ ही इस मामले से एक बात और निकलकर सामने आ रही है ...ट्रेन के भोपाल पहुचने के ३ घंटे बाद रूसिया की गुमशुदगी की रिपोर्ट क्यों लिखाई गई ? कहा जा रहा है किसी ने कोच के सहायक को मोटी रकम देकर मामले को बड़ी सूझ बूझ से अंजाम दिया है
Monday, 21 September 2009
तस्करों के निशाने पर यारसा गम्बू ............
बुग्यालों के बीच १३००० फीट की ऊँचाई पर पाई जाने वाली इस औषधि को स्थानीय भाषा में कीडा जडी नाम से जाना जाता है..... वैसे यह "यारसा गम्बू " नाम से लोकप्रिय है..... अन्तराष्ट्रीय बाज़ार में जडी की जबर्दस्त मांग के चलते जिस तरीके से तस्कर इसका अंधाधुन्द दोहन करने में लगे हुए है उसको देखते हुए इसके अस्तित्व के नाम पर सवाल उठ रहे है....... लेकिन राज्य सरकार और वन विभाग तस्करों के सामने नतमस्तक नजर आते है .....
उच्च हिमालयी इलाकों में पाई जाने वाली यह जडी एक ऐसा कवक है जो तितली की प्रजाति "माथ" के लार्वा में पलता है ....... दिलचस्प बात यह है बर्फ़बारी के साथ ही इसका विकास शुरू होता है और बर्फ पिघलने पर तस्कर इसका दोहन करने पहाडियों पर चल निकलते है...... यही वह समय होता है जब कीडा जडी के गुलाबी रंग का निचला हिस्सा भोजन के लिए हिलता डुलता है.....
तस्कर इसका दोहन कर इसको पीसते है और कैप्सूलों में भरकर इंटरनेशनल मार्केट में पहुचाते है...... यौन शक्ति वर्धक होने के साथ ही यह कीडा जडी बाँझपन , दमा , केन्सर, किडनी , हृदय और फेफडो के रोगों के लिए रामबाण समझी जाती है .....इसके अलावा इसमे कई तरह के विटामिन और खनिज पाए जाते है जो लाभकारी साबित होते है..........
९० के दशक में इसकी विशेषता तिब्बत के व्यापारियों ने भारतीय व्यापारियों को बताई .........तभी से इसके दोहन की शुरूवात हो गई...... इंटरनेशनल मार्केट में इसकी तस्करों को मुहमांगी कीमते मिल जाती है जिसके चलते इसके दोहन की रफ़्तार नही थम रही है...... एक मोटे अनुमान के अनुसार इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमत १.५० लाख से २ लाख रुपए तक है ....... दिल्ली में ५० से ७५ लाख तो चाइना में पूरे २ लाख तक की कमाई हो जाती है .......इसकी डिमांड बीजिंग, ताइवान, हांगकांग जैसे शहरों में ज्यादा है .......कई बार तो इन शहरों में मनचाही कीमते मिल जाती है .....
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बाज़ार में इसकी बड़ी मांग है और मांग के अनुरूप उतार चदाव आता रहता है .....वन विभाग के पास तस्करों को पकड़ने के लिए इंतजामों की कमी के चलते उत्तराखंड के बुग्यालों में कीडा जडी का अवेध कारोबार हर वर्ष साल के अंत में धड़ल्ले से चलता है ..... जनवरी के हिमपात के बाद तस्करों की सक्रियता इलाके में बढ जाती है...... तस्करों के रास्तो की खोज करना वन विभाग के लिए हमेशा टेडी खीर साबित होता है....
सीमान्त जनपद पिथोरागढ़ की चिप्लाकेदार की पहाडिया यारसा की तस्करी के लिए कोलार की खाने है...... एक किलो ग्राम यारसा गम्बू में १००० कीडे आते है...... एक कीडे की कीमत १०० से १५० रुपये तक होती है....... बाजार में इसके दामो में उतार चदाव आता रहता है....... धन के मोह में सीमान्त के उच्च हिमालयी इलाकों में प्रवास के लिए जाने वाले लोग इसको खोजने महीनो तक जुटे रहते है ...... प्रतिबन्ध की तलवार लटकने का डर ग्रामीणों को सताता रहता है जिस कारन वह इसको हिमालयी इलाकों में ही औने पौने दामो में तस्करों को बेचकर चले आते है .......फिर इसको तस्कर गुप्त मार्गो के द्वारा इंटरनेशनल मार्केट में पहुचाते है...............
जडी के अवेध दोहन से उत्तराखंड सरकार को वर्षो से करोडो के राजस्व का चूना लग रहा है.... इस बाबत पूछने पर वन विभाग के आला अधिकारियो का कहना है वर्षो से इसकी तस्करी को देखकर विभाग खासा मुस्तैद है..... जिसके चलते संभावित इलाकों में हथियारों से लेस टीम का गटन हर वर्ष किया जाता है ......
रक्षा अनुसन्धान केन्द्र पिथोरागढ़ के वैज्ञानिको का कहना है उच्च हिमालयी इलाको में पाई जाने वाली जिन जडी बूटियों का उनके द्वारा गहन अध्ययन किया गया उसमे यारसा गम्बू भी शामिल थी ..... वैज्ञानिको ने पाया इसको छोटे आकर के चलते ढूँढ पाना दुष्कर होता है .......यह छोटे आकर में मिलती है ....... उन्होंने इसको न केवल यौन बताया गया बल्कि कई बीमारियों की रामबाण दवा से भी नवाजा .....
वैज्ञानिको ने पाया अत्यंत शक्ति वर्धक होने के कारण इसके सेवन से तुंरत फुर्ती आ जाती है जिस कारन बड़े पैमाने पर एथलीट इसको लेते है .......दिलचस्प बात तो यह है इसको लेने के बाद डोपिंग में यह बात पता नही चलती एथलीट ने कीडा जडी युक्त कैप्सूल का सेवन किया है ......इस लिहाज से देखे तो कई असाध्य बीमारियों का तोड यारसा में है जिस कारन तस्कर चाहकर भी इसके दोहन से पीछे नही हट पाते......
Monday, 7 September 2009
वर्षा ऋतु का त्यौहार है हिलजात्रा............
लोकसंस्कृति का सीधा जुडाव मानव जीवन से होता है..... उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुषमा और सौन्दर्य का धनी रहा है ..... यहाँ पर मनाये जाने वाले कई त्योहारों में अपनी संस्कृति की झलक दिखाई देती है... राज्य के सीमान्त जनपद पिथौरागढ़ में मनाये जाने वाले उत्सव हिलजात्रा में भी हमारे स्थानीय परिवेश की एक झलक दिखाई देती है...हिलजात्रा एक तरह का मुखोटा नृत्य है .... यह ग्रामीण जीवन की पूरी झलक हमको दिखलाता है... भारत की एक बड़ी आबादी जो गावों में रहती है उसकी एक झलक इस मुखोटा नृत्य में देखी जा सकती है... हिलजात्रा का यह उत्सव खरीफ की फसल की बुवाई की खुशी मनाने से सम्बन्धित है... इस उत्सव में जनपद के लोग अपनी भागीदारी करते है...
कृषि परिवेश से जुड़े इस उत्सव में ग्रामीण परिवेश का सुंदर चित्रण होता है......इस उत्सव में मुख्य पात्र नंदी बैल , ढेला फोड़ने वाली महिलाए, हिरन, चीतल, हुक्का चिलम पीते लोग, धान की बुवाई करने वाली महिलाए है .... कुमौड़ गाव की हिलजात्रा का मुख्य आकर्षण "लखिया भूत " होता है... इस भूत को "लटेश्वर महादेव" के नाम से भी जानते है॥ मान्यता है यह लखिया भूत भगवान् भोलेनाथ का १२वा गण है ... कहा जाता है इसको प्रसन्न करने से गाव में सुख समृधि आती है... हिलजात्रा का मुख्य आकर्षण लखिया भूत उत्सव में सबके सामने उत्सव के समापन में लाया जाता है... जिसको २ गण रस्सी से खीचते है...यह बहुत देर तक मैदान में घूमता है ..... माना जाता है यह लखिया भूत क्रोध का प्रतिरूप है...... जब यह मैदान में आता है तो सभी लोक इसकी फूलो और अक्षत की बौछारों से उसका हार्दिक अभिनन्दन करते है...इस दौरान सभी शिव जी के १२ वे गण से आर्शीवाद लेते है...कहते है इस भूत के प्रसन्न रहने से गाव में फसल का उत्पादन अधिक होता है ...
Sunday, 30 August 2009
फिर आई मिस्टर भरोसेमंद की याद.............

"बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले......." यह जुमला टीम इंडिया में अगर किसी खिलाड़ी पर लागू होता है तो वह भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान "मिस्टर भरोसेमंद " कहे जाने वाले राहुल द्रविड़ है...... लंबे समय से अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहने वाले राहुल द्रविड़ पर भारतीय चयनकर्ताओ ने एक बार फिर से भरोसा जताया है...
उनकी भारतीय टीम में वापसी के बाद निश्चित ही भारत का मध्य क्रम मजबूत होगा ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए.... राहुल द्रविड़ की प्रतिभा के सभी कायल है ..... उन्होंने खेल के हर डिपार्टमेन्ट में अपनी उपयोगिता को बखूबी साबित कर दिखाया है....... जब भी भारत को उनकी जरूरत हुई है तब तब अपने प्रदर्शन से उन्होंने करोडो खेलप्रेमियों का दिल जीत लिया ...
राहुल को अगर मैच विजेता खिलाड़ी कहा जाए तो कोई गलती नही होगी..... राहुल भारतीय टीम की वाल रहे है..... टेस्ट में भी उनका खेल अच्छा रहा है....लेकिन एक दिवसीय मैचो में चयनकर्ताओ द्वारा उनकी उपेक्षा बीते कुछ सालो से हो रही थी..... दिलीप वेंगसरकर सरीखे चयनकर्ता उनके चयन पर अपनी आँख की भोहें टेडी कर लिया करते थे ... पर इस बार चयनकर्ता उनकी अनदेखी नही कर सकते थे... बताया जाता है इस बार राहुल के चयन में के श्रीकांत (चीका ) की महत्वपूरण भूमिका है ...
श्रीकांत को उन पर पूरा भरोसा है यही कारण है २ साल खेल से दूर रहने के बाद भी राहुल का दाव टीम इंडिया में खेला गया है... देखते है इस बार श्रीलंका में त्रिकोणीय सीरीज़ और साउथ अफ्रीका में चैम्पियंस ट्राफी में भारत की यह दीवार कैसा प्रदर्शन करती है? वैसे इस बार आई पी अल के मैचो में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा था .....देखते है अब क्या होता है???
विलक्षण प्रतिभा के धनी थे पर्वत पुत्र.........
भारत रत्न पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त का नाम आज भी राष्ट्रीय राजनीती में बड़े गर्व के साथ लिया जाता है..... पन्त जी के योगदान के कारण वह पूरे राष्ट्र के लिए एक युगपुरुष के समान थे जिसने अपने ओजस्वी विचारो के द्वारा राष्ट्रीय राजनीती में हलचल ला दी... उनके व्यक्तित्व में समाज सेवा , त्याग, दूरदर्शिता का बेजोड़ मिश्रण था.... पूरा देश १० सितम्बर को उनकी १२२ वी जयंती पर याद करेगा...पन्त जी का जन्म १० सितम्बर १८८७ को उत्तराखंड के अल्मोडा जनपद से ३० किलोमीटर दूर हवालबाग विकासखंड के खूंट नमक गाव में हुआ था... प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा अपने जिले में पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा प्राप्ति हेतु पन्त जी इलाहाबाद गए... जनमुद्दों की वकालत करने में अग्रणी रहने के कारणइन्होने इलाहाबाद से एल एल बी की डिग्री ली.... १९०५ में इन्होने अपना पूरा जीवन न्यायिककार्यो में समर्पित कर दिया.....पन्त जी के जीवन पर महात्मा गाँधी का खासा प्रभाव पड़ा..... गाँधी जी के कहने पर वकालत को छोड़कर राजनीती में कूद पड़े... तत्कालीन समय में कुमाऊ में दो तरह प्रकार की विचारधाराये प्रचलित थी ... पहली विचारधारा में प्रतिष्ठित लोग हुआ करते थे , जो उस समय अपने को प्रगतिशील मानते थे , वही दूसरी विचारधारा स्वदेश प्रेम सम्बन्धी विचारो से भरी थी... पन्त जी ने अपनी सूझ बूझ द्वारा दोनों विचारधाराओ में सामंजस्य कायम कर कुमाऊ में राष्ट्रीय चेतना फैलाने में अपनी भागीदारी निभाई.... पन्त जी ने गरीबो के शोषण के विरूद्व आवाज उठाते हुए कुली बेगार के खिलाफ विशाल आन्दोलन चलाया...... १९१६ में अपने प्रयासों से कुमाऊ परिसद की स्थापना की और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य चुने गए......१९१६ का वर्ष पन्त जी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण रहा.... इस वर्ष पन्त जी अपने असाधारण कार्यो के कारण किसी के परिचय के मोहताज नही रहे... इस वर्ष राष्ट्रीय राजनीती में वह धूम केतु की तरह चमके... १९२० में गाँधी के साथ असहयोग आन्दोलन में भी इनके द्वारा सक्रिय सहयोग दिया गया..... १९२७ में सर्वसम्मति से कांग्रेस के प्रेजिडेंट चुन लिए गए... १९ नवंबर १९२८ को लखनऊ में जब साईमन कमीशन आया तो नेहरू जी के साथ इन्होने भी इसका पुरजोर विरोध किया... देश की आज़ादी में पन्त जी के योगदान को नही भुलाया जा सकता है... जंगे आज़ादी के दौर में हिमालय पुत्र द्वारा हर आन्दोलन चाहे वह सत्याग्रह हो या असहयोग आन्दोलन हो , अपना पूरा योगदान दिया... इसी कारण आज़ादी के दौर में अपनी सक्रिय भूमिका के चलते पन्त जी को कई वर्षो तक जेल की यात्रा भी करनी पड़ी...१५ अगस्त १९४७ को वह आजाद भारत में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाये गए... इस पद पर वह १९५२ तक कार्य करते रहे... १९५२ में देश का संविधान बनने के बाद प्रथम आम चुनाव हुए जिनका संचालन पन्त जी के प्रयासों से हुआ था ... इन चुनावो में कांग्रेस सरकार ने विजय हासिल की....... १९५४ में जवाहर लाल नेहरू के आग्रह पर केन्द्रीय मंत्रिमंडल में होम मिनिस्टर का ताज पन्त जी ने पहना.... अपने कार्यकाल में पन्त जी ने विभिन्न कार्यो को पूरा करने का भरसक प्रयत्न किया... २६ जनवरी १९५७ का दिन कुमाऊ के इतिहास में बड़ा महत्वपूर्ण रहा... इस तिथि को भारत सरकार द्वारा उन्हें "भारत रत्न" की उपाधि से विभूषित किया गया... ७ मार्च १९६१ को ह्रदय गति रुकने से उनकी मौत हो गई... पन्त जी ने अपने प्रयासों से राष्ट्रीय हित के जितने कार्य किए उनके चलते भारतीय इतिहास में योगदान को नही भुलाया जा सकता ....
