Monday, January 5, 2009

तस्करों के निशाने पर हिमालय के वन्य जीव .......

देव भूमि के नाम से जानी जाने वाली उत्तराखंड की भूमि पर किसी समय देवताओ का वास था , जहाँ की वादियों में महात्माओ, साधुओ का वास होता था जिसका जिक्र पुरानो में भी मिलता है| परन्तु वर्त्तमान में यहाँ के जंगलो में रहने वाले वन्य जीवो के शिकार के चलते इनके विलुप्त होने का खतरा मडरा रहा है| उत्तराखंड के जंगलो और माफियो का चोली दामन का साथ रहा है, इसका कारन यहाँ पर पाई जाने वाली दुर्लभ वन सम्पदा रही है जिसको सोने की कोलार की खान कह सकते है| यहाँ पर कई दुर्लभ ओसधियो की अधिकता पाई जाती है जिस कारन यहाँ पर तस्करों के बड़े बड़े गिरोह यहाँ पर हमेशा सक्रिय रहते है| वन सम्पदा की इस लूट के खिलाफ यहाँ पर समय समय पर आवाजे उटती रही है लेकिन इसके सकारात्मक परिणाम सामने नही आए है|दुर्लभ वन ओसधियो की तस्करी के बाद अब इन तस्करों के निशाने पर हिमालय के मासूम वन्य जीव लगे हुए है| माफियाओ के इस गिरोह पर लगाम लगाने में उत्तराखंड की खंडूरी सरकार अभी तक विफल साबित हुई है| कोई कारगर नीति और कानून न हो पाने के कारन उत्तराखंड की वादियों में इन दिनों तस्करों की पौ बारह हो रही है | सरकार इस पूरे वाकये से बेखबर है |
उत्तराखंड का राज्य पक्षी मोनाल तस्करों के निशाने पर है| मोनाल उत्तरखंड का राज्य पक्षी है जो बहुत ही मनभावन है | ५००० मीटर तक की ऊँचाई पर पाया जाने वाला यह पक्षी नीले और भूरे रंग में पाया जाता है जो कीडे और मकोडों , फल फूल को अपना आहार बनाता है | निर्जन वनों में एकान्तप्रिय इस पक्षी की जान के पीछे तस्कर हाथ धोकर पड़े हुए है | इसके पंखो की सुन्दरता भी तस्करों का मन मोह लेती है| राज्य पशु कस्तूरी मृग भी सिकरियो के तांडव से अछुता नही है| अब यह केदारनाथ और फूलो की घाटी तक सीमित रह गया है| इसकी नाभि में पाई जाने वाली कस्तूरी की अंतरास्ट्रीय बाज़ार में बड़ी डिमांड है| इसका बहुत से कार्यो और दवाई बनने में उपयोग होता है| कस्तूरी के साथ हिमालय के अन्य वन्य जीव जैसे बटेर , काकड़, भालू , दाफिया, भी संकटग्रस्त जीवो की सूची में शामिल हो गए है| सूत्र बताते है इनपर तस्करों का साया हर समय मडराता रहता है लेकिन शासन और प्रशासन इन सब से बेखबर बना बैठा है | कस्तूरी मृग, मोनाल के अलावा हिम बाघ , जंगली बिल्ली, लाल लोमडी, काकड़, फकता लुप्त होने के कगार पर है| इस पर रोक लगाने के लिए कोई पहल न होने से इन वन्य जीवो के भविष्य पर संकट मडराने लगा है|इनका शिकार कर तस्कर इनकी खाल को ऊँचे दामो में विश्व बाज़ार में बेचते है जो उनकी कमाई का इक बड़ा जरिया बनती है | चीन और तिब्बत की सीमा नजदीक होने के कारण तस्करों के लिए उत्तराखंड की वाडिया सबसे जयादा मुफीद नज़र आती है |
उत्तरखंड से लगे उत्तर प्रदेश के इलाको से भी बड़े पैमाने पर वन्य जीवो की संख्या दिनों दिन घटती जा रही है|यहाँ पर भी चीतल, घुरड़, जैसे मासूम जीव बेरहमी से मार डाले जाते है| यहाँ पर पाए जाने वाले जीव यहाँ के वनों की शोभा बढाते रहे है जिस प्रकार से इनको बेरहमी से मारा जा रहा है और प्रशासन तस्करों के सामने नतमस्तक बना है उसको देखते हुए यह कहा जा सकता है आने वाले समय में अगर यही स्थिति रही तो पारियावरण के लिए यह खतरे की घंटी है| अभी भी जरूरत हैं सरकार चेत जाए अन्यथा वह दिन दूर नही जब इनकी दशा भी " गिद्धों" जैसे हो जायेगी| वन्य जीवो के विषय में बात करने पर उत्तराखंड के चीफ फॉरेस्ट ऑफिसर बी एस बरफाल कहते है" सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है| वन विभाग के सभी लोगो को इस बाबत निर्देशित किया गया है | विभिन्न स्थानों में लगी टीम अपने कामो को बखूबी अंजाम दे रही है"| अब सरकार के आला अधिकारी चाहे जो भी सफाई दे यह हकीकत है कि हिमालय के वन्य जीवो पर तस्करों की "गिद्ध दृष्टी" लगी है जिससे पार पाने में वन विभाग अब तक निकम्मा साबित हुआ है ...........|

1 comment:

सागर नाहर said...

बहुत ही चिन्ताजनक बात है। इस तरह एक एक कर सारि नस्लें खत्म हो जायेगी फिर क्या होगा?