Thursday, July 31, 2014

बूँद - बूँद पानी को मोहताज उत्तराखंड का कुमांऊ मंडल






पंकज चौहान दिल्ली के जनकपुरी में रहते हैं | दिल्ली की भीषण चिलचिलाती गर्मी से निजात पाने के लिए वह पिछले एक महीने से अपने सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के तिलदुकरी स्थित आवास  में  रह  रहे हैं लेकिन पेयजल संकट ने उनका अमन चैन छीना हुआ है | वह कहते हैं पहाड़ो में अब हर दिन पानी मिल जायेगा इसकी कोई गारंटी नहीं है लिहाजा टैंकर और अन्य वैकल्पिक साधनों से  वह अपने घर परिवार के लिए पानी का इंतजाम खुद करने में सुबह से लग जाते हैं | दिल्ली से पहाड़ की चदाई  चढ़ते हुए उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा  जिन पहाड़ो को पानी का बड़ा वाटर टैंक कहा जाता रहा है वहां के बाशिंदे पानी की बूँद बूँद के लिए मोहताज हो सकते हैं |

      चंद्रभागा के प्रकाश की कहानी भी पंकज चौहान जैसी ही है | सेना में काम करने वाले प्रकाश यूँ अपने परिवार के साथ छुट्टियाँ बिताने आये हैं लेकिन जिले के पानी के संकट ने उनकी दिनचर्या को  भी गड़बड़ा दिया है  | प्रकाश के दिन की शुरुवात  पानी के इंतजाम से शुरू हो जाती है | वह हर सुबह ऐंचोली से कही दूर सुकौली के धारे में जाकर अपने घर के लिए पानी का इंतजाम करने में लग जाते हैं क्युकि उनके नलो में पिछले कुछ समय से पानी की बूंद के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं | पिछले कुछ समय से पिथौरागढ़ शहर में पानी का बेतरतीब  संकट छाया हुआ है | यह कहानी पिथौरागढ़ शहर की नहीं पूरे कुमाऊ अंचल की है | कुमाऊ के विभिन्न गाँवों में आज भीषण पेयजल संकट छाया हुआ है | चढ़ते पारे के साथ ही पूरे अंचल का जल संकट दिनों दिन  गहराता जा रहा  है |

बात पिथौरागढ़ की करें तो यहाँ के लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए प्राकृतिक जल स्रोतों और हैण्डपम्पो पर अब ज्यादा निर्भर होते जा रहे हैं | जिन लोगो की पहुँच से यह सब दूर है वह सभी मीलो दूर चलकर किसी तरह अपना काम चलाने को मजबूर हो गए हैं |  आलम यह है प्रशासन और जल संस्थान के आला अधिकारियो को वस्तुस्थिति का पता है लेकिन इसके बाद भी वह समस्या के निराकरण में कोई रूचि नहीं दिखा रहे हैं | उधर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता और राजनीती के चलते पिथौरागढ़वासी  पानी की समस्या  से जूझने को मजबूर हैं |  

            सीमान्त जनपद पिथौरागढ़ बड़े राजनीतिक दिग्गजों का आशियाना रहा है |  सांसद  भगत सिंह कोश्यारी,  महेंद्र सिंह महरा , उक्रांद के दिग्गज नेता काशी सिह ऐरी , भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष  बिशन सिंह चुफाल , विधायक मयूख महर , भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोशी सरीखे लोगो की कर्मभूमि यह सीमान्त जनपद रहा है | वहीँ मुख्यमंत्री हरीश रावत की  विधान सभा  धारचूला भी इसी पिथौरागढ़ सीमान्त जनपद में सम्मिलित रही है |    बीते दौर में भाजपा सरकार में प्रकाश पन्त सरीखे बड़े दिग्गज नेता ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर राज्य में  ना केवल अपनी पहचान बनाई बल्कि पेयजल मंत्री की जिम्मेदारी को निभाया लेकिन खुद  उनके पेयजल मंत्री रहते ही उनके विधान सभा की जनता पानी की बूँद बूँद के लिए तरसती रही | वर्तमान में राज्य में कांग्रेस सरकार ने  आधे से ज्यादा कार्यकाल पूरा कर लिया है लेकिन इसके बाद भी पिथौरागढ़ का पेयजल संकट जस का तस बना हुआ है | सरयू .रामगंगा ,काली सरीखी नदियो के कारण जिस जगह को वाटर डैम कहा जाता हो वहां पर पानी की बूंद के लिए लोगो के तरसने की बात हजम नहीं होती | आम आदमी को साफ़ पेयजल तो दूर अपनी जरुरत का भी पानी इस समय उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा जिसके चलते लोगो में आक्रोश साफ़ देखा जा सकता है | शहर निवासी हरीश पाण्डे कहते हैं “पानी की इलाके में सप्लाई समय पर नहीं होती | किसी दिन आधे घंटे तो कई दिन दस से पंद्रह मिनट पानी मिलता है | कई बार तो दो दो दिन छोड़कर नगर में पानी की सप्लाई होती है जिस कारण मुश्किलों का सामना करने को  मजबूर होना पड़ता है "


वर्तमान में जनपद की पेयजल सप्लाई  घाट , ठुलीगाड ,रई परियोजनाओ के जिम्मे है लेकिन यह सब बदती आबादी के लिहाज से सफेद हाथी साबित हो रही हैं | जल संस्थान से जुड़े लोगो की मानें तो इन तीन परियोजनाओ से प्रतिदिन साढे तीन सौ से चार सौ एमएलडी पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है जिसके चलते पूरे जिले में पानी का संकट गहराता जा रहा है | स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है जब पिथौरागढ़ के शहर वासियों को प्रति दिन पानी नहीं मिल पा रहा तो ग्रामीण इलाको की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है | पानी को लेकर आये दिन ज्ञापन और धरनों का दौर भी इस जनपद में हर इलाके में देखा जा सकता है लेकिन इन सबके बाद भी अधिकारियो के कान में जू तक नहीं रेंगती |
 

कुछ समय से पिथौरागढ़ की जनता पानी के गंभीर संकट से परेशान है | नगर के सामाजिक कार्यकर्ता और कुमौड़ वार्ड के एक दौर में सभासद रहे गोविन्द सिंह महर कहते हैं “ पहले पेयजल को लेकर इतनी खराब स्थति नहीं थी | जनप्रतिनिधियों की उदासीनता और अधिकारियों की मिलीभगत और वर्तमान में जनता की बुनियादी समस्याओ से जुड़ाव ना हो पाने के चलते यहाँ पानी को लेकर एक  गंभीर स्थिति  बन गयी है ”|   पिथौरागढ़ शहर में घाट पेयजल योजना  शुरू की गयी लेकिन बढती आबादी का भारी दबाव इस पर इतना पड़ा कि अब यह वेंटिलेटर पर चल रही है वहीँ ठुलीगाड तो रमगाड़ बन चुकी है जहाँ का पेयजल बुरी तरह प्रदूषित हो चला है | इस बार बरसात उम्मीद के अनुरूप ना हो पाने के चलते प्राकृतिक जल स्रोत भी सूख गए हैं वहीँ हैंडपंप भी पहाड़ो में फेल नजर आ रहे हैं |  राज्य सरकार के पेयजल मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी कहते हैं “ पेयजल संकट से निजात दिलवाने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है |  शासन से बाईस करोड़ रुपये की लागत से आंवला घाट से नई पेयजल लाइन को मंजूरी  मिल गयी है जिसके बाद बहुत हद तक जनपद का पानी का  संकट सुलझ जायेगा ”| लेकिन प्रगति का आलम यह है इस योजना में एक इंच भर  का काम शुरू नहीं हो पाया है | इतना जरुर है कागजो में और  राजनीतिक बयानों में यह योजना ऊँची उड़ान खूब भर चुकी है और सत्ता धारी दलों के नेता इसको अपनी बड़ी उपलब्धि बताने से पीछे भी नहीं हटते | 

जनपद के गंगोलीहाट , बेरीनाग और धारचूला , डीडीहाट में भी लोगो को पिथौरागढ़ सरीखी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है | दिनों दिन पानी का संकट यहाँ के गाँवों में गहराता जा रहा है | गंगोलीहाट निवासी जीतेश कहते हैं “पानी को लेकर गंगोलीहाट की जनता लम्बे समय से परेशान है लेकिन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते लोगो को  जरुरत का पानी भी नहीं मिल पा रहा”| त्रिपुरादेवी स्थित स्वयं सेवी संस्था में काम करने वाले बना निवासी डी के पन्त  बताते हैं “बेरीनाग में भी पानी की भीषण किल्लत हो रही है | गाँवो के लोग दूर दराज के इलाको से पानी ढोकर किसी तरह अपना  काम चला रहे हैं” |
धारचूला में भी कमोवेश बेरीनाग सरीखा  हाल है | राकेश तिवारी बताते हैं “कई इलाको में पेयजल आपूर्ति ठप्प पड़ी हुई है | पेयजल संकट की असल मार गाँव वाले झेल रहे हैं ”| वैसे भी प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से यहाँ के कई इलाके संवेदनशील हैं और इन इलाको में प्रतिदिन पानी नहीं पहुचने से लोगो को मुश्किलात पेश आ रहे हैं |
                                                                                                                 
   नेपाल सीमा से सटे चम्पावत के कई गाँवों में पानी का संकट गहराया हुआ है | यूँ तो गर्मियों में हर साल यहाँ समस्या रहती है लेकिन इस  बार हालत बहुत ख़राब  हो चले हैं | विद्युत कटौती  से भी कई ग्रामीण इलाके परेशान हैं वही प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि बढती आबादी के मुताबिक पानी की कमी का रोना रो रहे हैं | लोहाघाट में कई लोग टैंकरों से पानी लेने को जहाँ मजबूर हैं वहीँ बाराकोट में सबसे खराब स्थिति है | मल्ली लमाई निवासी एमसीपी एसोसियेट के मालिक मुकेश चन्द्र पांडे कहते हैं “ उत्तराखंड के घर घर में छुट भैय्ये नेताओ की भरमार इतनी ज्यादा हो गयी है कि यहाँ की इस राजनीती से जनता को सबसे ज्यादा नुक्सान झेलने को मजबूर होना पड रहा है | यही वजह है यहाँ के जनप्रतिनिधि अपने अपने इलाके में पेयजल भी उपलब्ध नहीं करवा पा रहे  जबकि सत्ता में आने से पहले यह तरह तरह के सब्जबाग लोगो को दिखाते आये हैं” |

               बाराकोट के नदेडा गाँव के निवासी चंद्रशेखर जोशी कहते हैं “नदेडा के साथ ही भनार , पेठलती के किसानो को सबसे ज्यादा इस पेयजल संकट से परेशानियों का सामना करना पड रहा है |  पानी के बिना उनकी खेती जहाँ चौपट होने के कगार पर है वहीं मवेशियों को पालने वाले परिवारों को मुश्किलों का सामना करना पड रहा है ”|   


कुमाऊ के प्रवेश द्वार माने जाने वाले हल्द्वानी में इस मौसम में लोग बूँद बूँद पानी के लिए तरसते नजर आ रहे हैं | कठघरिया, बमोरी , मानपुर पश्चिम, देवालचौड , तीनपानी सरीखे दर्जन भर से ज्यादा इलाको में गंभीर संकट खड़ा है | समय पर पेयजल आपूर्ति  नहीं हो पाने से यहाँ रहने वाले लोगो को  आये दिन कई मुश्किलों का सामना करने को मजबूर होना पड  रहा है | यहाँ के कई इलाको में पानी को लेकर लम्बी  लम्बी लाइनें  सुबह से ही लगनी शुरू हो जाती हैं जिसको लेकर लोगो में कहा सुनी होना भी अब आम बात हो चुकी है | लामाचौड, कुसुमखेडा , ऊंचा पुल के कई इलाके ऐसे हैं जहाँ पर बिजली की कटौती  होने से आये दिन परेशानियाँ झेलनी पड  रही हैं |

नैनीताल जनपद में भी ओखलकांडा , रामगढ़ , भीमताल, भवाली , बेतालघाट विकासखंडो के कई गाँवों में पानी की समस्या बनी हुई है | पिछले कुछ वर्षो से इन इलाको में भी पानी की समय पर सप्लाई ना होने से संकट गहरा गया है | बदती गर्मी से पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है | पहाड़ो का मौसम चक्र  भी तेजी से बदल रहा है | पहले कभी पहाड़ो में इतनी गर्मी नहीं पड़ी जितनी हाल के वर्षो में पड़ी है जिसके चलते उमस बढने से लोगो की मुश्किलें बढ़  रही हैं | रही सही कसर लो वोल्टेज और बिजली की कटौती  ने पूरी  कर डाली है | ट्यूबवेल और हैंडपंप भी अब गर्मी में पानी नहीं उठा पा रहे हैं | अल्मोड़ा जिले में भी कमोवेश यही हाल है | पानी का संकट अब गहराता ही जा रहा है | प्रशासन द्वारा लोगो को प्रतिदिन पानी उपलब्ध करवाए जाने के निर्देशों के बाद भी विभागीय अधिकारी हालत ठीक करने में रूचि नहीं ले रहे हैं | जल संस्थान और जल निगम पानी की कमी और मानसून ठीक ना रहने का हवाला देकर अपने काम से पल्ला झाड रहे हैं | 

अल्मोड़ा में लोधिया , पाली, ल्वाली. हवालबाग ,नादुली  सरीखे दर्जन भर से ज्यादा इलाके पानी की समस्या से परेशान हैं | अल्मोड़ा निवासी शंकर कहते हैं “अब समय आ गया है जब पानी के संकट से निजात दिलवाने के लिए लोगो को अपने स्तर पर नए रास्ते खोजने होंगे | वाटर शेड मैनेजमेंट सरीखे कार्यक्रम इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं | वर्षा के जल के संग्रहण से भी बहुत हद तक यह समस्या दूर हो सकती है | बागेश्वर में भी पानी की भारी किल्लत चल रही है | पेयजल आपूर्ति ठप्प पड़ने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है | कई स्थानों में पानी की आपूर्ति समय पर नहीं होती | गरुण , भराडी, काफलीगैर , कपकोट से सटे कई इलाको के लोगो के सामने पेयजल की विकट समस्या बनी हुई है |  

बहरहाल  जो भी हो गर्मी के इस मौसम में उत्तराखंड का  पूरा  कुमाऊ मंडल  प्यासा नजर आ रहा है | उत्तराखंड में पिछले कुछ समय से मौसम में नए तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं | पहले जहाँ  इतनी प्रचंड गर्मी नहीं पड़ती थी वहीँ हाल के समय में चिलचिलाती गर्मी में सारे रिकार्डो को तोड़ डाला है | गाँवों में एक समय पंखे तक नहीं चला करते थे और वातावरण भी काफी ठंडा  रहता था लेकिन आज पहाड़ के  गाँवों में भी लोगो को शिलिंग फैन लगाने को अगर मजबूर होना  पड रहा है तो स्थिति की गंभीरता को समझा जा  सकता है | पहाड़ो में ग्लेशियर लगातार पिघल रहे हैं | नदियों के जल में जहा गिरावट देखी  जा रही है वहीँ समय पर वर्षा ना होने से प्राकृतिक जल स्रोत भी अब जवाब देने लगे हैं | पानी के संरक्षण के लिए कोई आने वाले दिनों में  कारगर उपाय अगर पहाड़ो में नहीं खोजे गए  तो वह दिन दूर नहीं जब पानी की बूँद बूँद के लिए लोगो को तरसना पड  सकता है | सामाजिक कार्यकर्ता गोविन्द सिंह महर कहते हैं “ आज पहाड़ो की नदियों को बचाने की जरुरत है” |हिमालय के लिए अलग से एक मंत्रालय बनाये जाने की वकालत करते हुए वह कहते हैं अगर पहाड़ की नदियों को नहीं बचाया गया तो आने वाले दिनों में भयावह संकट खड़ा हो सकता है | सरकार को पानी की समस्या सुलझाने के लिए काम करने की इच्छाशक्ति दिखाने की जरुरत है |  जो भी हो पहाड़ो का इस संकट को देखकर इस बात का तो आभास हमें हो ही गया है कि समय रहते अगर पानी को लेकर कोई नई लकीर नहीं खिंची तो आने वाले दिनों में यह एक गंभीर समस्या बन सकती है |


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