Wednesday 4 January 2023

कर्मयोगी के लिए ‘ हीरा बा ’ से पहले भारत माता का कर्तव्यपथ


 


बचपन में एक समाज सुधारक के बारे में कहानी पढ़ी थी। ठीक से ध्यान नहीं आ रहा है। यह कहानी मैंने अपने स्वार्गीय मामा के यहाँ शायद पढ़ी थी। एक परिचित को कचहरी में किसी दस्तावेज पर एक सज्जन के हस्ताक्षर की जरूरत थी। इसके लिए अगली सुबह मिलना तय हुआ लेकिन वह सज्जन नहीं पहुँच पाए। वह परिचित बहुत परेशान रहा। दोपहर बाद सज्जन भीषण बरसात में भीगते हुए उनके घर आये. बोले 'क्षमा कीजिएगा। अल -सुबह मेरी अर्द्धांगिनी का देवलोकगमन हो गया था। उनके अंतिम संस्कार में समय लग गया जिसके चलते नहीं पहुँच पाया'।

इस वाकये का जिक्र आज इसलिए करना पड़ रहा है क्योंकि बीते दिनों देश के प्रधानसेवक नरेंद्र दामोदरदास मोदी की मां हीरा बा के निधन ने इस घटना की याद दिला दी। 2022 की अंतिम बेला में इस खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी की मां बीमार थी। वो कुछ समय पहले उनको देखने भी गए थे। उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा था और डाक्टरों की टीम उनकी निगरानी भी कर रही थी लेकिन अचानक उनका 100 वर्ष की उम्र में निधन हो जाएगा, इसका किसी को अंदाजा नहीं था। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां के निधन होने के बाद बेहद सादगी से शवयात्रा निकल सकती है इसे पूरे भारत ने अपनी आँखों से देखा है, जिसने एक चाय वाले को 2014 में देश का प्रधान सेवक बनाया है। आज जब शवयात्राएं भी मेगा इंवेट में तब्दील हो चुकी हैं तो ऐसे माहौल के बीच इस सादगीपूर्ण शवयात्रा में बेहद सामान्य बेटे नजर आते रहे नरेन्द्र मोदी ने एक तरह से जननी और जन्मभूमि दोनों के लिए अपने कर्तव्यों का अनुकरणीय आदर्श प्रस्तुत किया है। देश का प्रधानसेवक बिना तामझाम के सादगी के साथ अपनी मां को श्मशान घाट तक ले गया और उसे मुखाग्नि दी। जिसने भी सुबह टेलीविजन पर इस यात्रा को देखा इसे देखकर वो विस्मय से भर गया।

इससे पहले शुक्रवार सुबह पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, ''शानदार शताब्दी का ईश्वर चरणों में विराम...मां में मैंने हमेशा उस त्रिमूर्ति की अनुभूति की है, जिसमें एक तपस्वी की यात्रा, निष्काम कर्मयोगी का प्रतीक और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध जीवन समाहित रहा है। मैं जब उनसे 100वें जन्मदिन पर मिला तो उन्होंने एक बात कही थी, जो हमेशा याद रहती है कि काम करो बुद्धि से और जीवन जियो शुद्धि से।''

देश के प्रधानमंत्री मोदी बेहद सादगी के साथ अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल हुए । हमारे देश के टीवी न्यूज़ चैनलों के लिए यह एक बड़ा इवेंट बन सकता था। मां-बेटे की वो अंतिम बेला कई हफ़्तों तक टीआरपी के लिए भी बलशाली बन सकती थी। प्रधानमंत्री की मां का निधन कब हुआ, यह निधन की खबर भी देर रात 3.30 बजे जारी हुई। अंतिम यात्रा को देखने के लिए लोग खबरिया चैनलों टीवी स्क्रीन पर टकटकी भी नहीं गड़ा पाए, उससे पहले सुबह हीरा बा की अंतिम विदाई की यात्रा प्रधानसेवक ने बिना तामझाम के पूरी कर ली और उसके 2 घंटे बाद बाद नरेन्द्र मोदी वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के साथ रूटीन काम करने लग गए । उनकी इस कर्म-निष्ठा और कर्तव्यपरायणता ने एक बार फिर साबित किया है कि नरेन्द्र मोदी दुनिया के नेताओं में क्यों सर्वश्रेष्ठ हैं ? आखिर क्यों मोदी को सच्चा कर्मयोगी कहा जाता है और वे अपने हर फैसलों में न केवल चौंकाते हैं बल्कि लीक से अलग हटकर चलते हैं ? राज्यों के मुख्यमंत्रियों और तमाम नेताओं और कार्यकर्ताओं को यह कहकर गुजरात आने से मन कर दिया गया कि वे अपने काम पर ध्यान दें और जहाँ हैं वहीँ से उनकी मां को श्रद्धांजलि दें । प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसा कहा नहीं ,बल्कि खुद किया भी। वह माँ के अंतिम संस्कार में रोये भी नहीं। अंतिम समय में पीएम मोदी ने अपनी मां को मुखाग्नि दी, तब सिर्फ उनके भाई, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और कुछ दूसरे बेहद करीबी लोग ही शामिल हुए। इसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी अपने कर्तव्यपथ पर लौट गए। उस दिन प्रधानसेवक मोदी वन्दे भारत ट्रेन के उदघाटन के कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से शामिल हुए और उन्होंने निजी कारणों के चलते कार्यक्रम में शामिल न हो पाने के लिए लोगों से खेद भी प्रकट किया । इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी ने उसी दिन दुनिया के महान फ़ुटबाल के खिलाड़ी पेले के निधन पर ट्वीट के जरिये अपना शोक भी प्रकट किया। यहीं नहीं रूड़की में शुक्रवार की सुबह टीम इंडिया के विकेटकीपर ऋषभ पंत के साथ हुए सड़क हादसे पर अपनी संवेदना व्यक्त की और उनकी मां से बात भी की।

दरअसल विपरीत परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से मुँह न मोड़ना हमारे देश की महान परम्पराओं में शामिल रहा है। इसे आदर्श जीवन शैली का एक प्रमुख हिस्सा माना गया है लेकिन आज के दौर में ये सभी परंपराएं पीछे छूटती जा रही हैं। प्रधानसेवक नरेन्द्र मोदी ने इसे आगे बढ़ाने का एक बेहतर उदाहरण प्रस्तुत किया है। हीरा बा के बारे में पढ़िए। बेटे के देश के प्रधानमंत्री होने के बाद भी वो मां होने के आभामंडल से हमेेशा दूर रही। आसपास के पड़ोसी बताते हैं उनसे मिलकर कभी लगता ही नहीं था वो नरेंद्र मोदी की मां हैं। धन्य है ऐसी मां जिसने नरेंद्र को प्रधानसेवक के पद तक पहुंचाया। उनकी मां कहा भी करती थी एक साधु ने एक बार उनसे कहा भी था आपका बेटा एक दिन बहुत ऊंचाई पर पहुंचेगा। उसे बहुत आगे जाना है। उन्होंने अपनी माँ के आशीर्वाद से इसे साकार कर दिखाया।

सभी के साथ सहज व्यवहार और अपनेपन से हीरा बा ने विशेष पहचान बनाई थी। ऐसे विलक्षण उदाहरण देखने हो नहीं मिलते हैं। हीरा बा की सादगी और उनके बेटे के कर्तव्यपरायण आचरण ने देश और दुनिया को बहुत कुछ सीख देते हैं। बेटा चाहे जितना बड़ा हो जाए, लेकिन मां के लिए वह सिर्फ बेटा ही रहता है यह संदेश हमारे प्रधानसेवक नरेन्द्र मोदी ने पूरे विश्व को दिया है। आज भी प्रधानमंत्री पद पर पहुंचने के बाद भी वो अपने संस्कार नहीं भूले हैं । यह भी याद दिलाया है कि मां को अंतिम विदाई देने का वक्त कठिनतम होता है किंतु ऐसे समय भी धैर्य और संयम जरूरी है। उनकी इस सादगी ने अपरोक्ष रूप से यह संदेश भी दिया है कि दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना के साथ अपने कर्मपथ पर चलना भी जरूरी है। मां के प्रति स्नेह-समर्पण के साथ हमेशा उन्होनें देश के प्रति अपना कर्तव्य भी हमेशा याद रखा है।

हीरा बा के संघर्ष के बारे में प्रधानमंत्री मोदी कई बार भावुक अंदाज में जिक्र कर चुके हैं। साल 2015 में फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग के साथ बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने अपनी मां के संघर्षों को याद करते हुए कहा था 'मेरे पिताजी के निधन के बाद मां हमारा गुजारा करने और पेट भरने के लिए दूसरों के घरों में जाकर बर्तन साफ करती थीं और पानी भरती थीं।' इस दौरान पीएम मोदी भावुक होकर रो पड़े थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी मां हीरा बा के 100वें जन्मदिन पर लिखे ब्लॉग में कहा था कि उनकी मां हीराबेन को सुबह 4 बजे ही उठने की आदत हमेशा रही है । सुबह-सुबह ही वो बहुत सारे काम निपटाती थीं। गेहूं पीसना हो, बाजरा पीसना हो, चावल या दाल बीनना हो, सारे काम वो खुद करती थीं। इसके साथ ही वे अपनी पसंद के भजन भी गुनगुनाती रहती थीं। पीएम मोदी ने तब कहा था कि मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि मेरे जीवन में जो कुछ भी अच्छा है और मेरे चरित्र में जो कुछ भी अच्छा है, उसका श्रेय मेरे माता-पिता को जाता है। पीएम मोदी ने अपनी मां के जन्मदिन के मौके पर कहा कि कैसे उनकी मां नारीत्व और सशक्तिकरण की सच्ची प्रतीक रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बचपन के किस्सों की मदद से अपनी मां के हर गुण को बताया है, जो उनके जीवन को हर काम से जुड़ा हुआ है। पीएम मोदी ने ब्लॉग में कहा था कि उनकी मां एक ‘आदर्श जीवन’ जीने के लिए एक मार्गदर्शक की तरह हैं। कैसे उनकी मां ने उन्हें सिखाया कि औपचारिक शिक्षा के बिना भी अच्छी बातों को सीखना संभव है। ऐसा पहली बार हुआ था कि पीएम मोदी ने सार्वजनिक मंच पर निजी भावनाओं को व्यक्त किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था मां कभी यह नहीं चाहती थीं कि हम भाई-बहन अपनी पढ़ाई छोड़कर उनकी मदद करें।

हिन्दू संस्कृति में मृत्यु के 12 दिनों के बाद तेरहवीं का नियम है। इसी दिन पीपलपानी भी होता है। अंत्येष्टि के कम से कम तीन दिन तो सूतककाल होता है लेकिन प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी जो हैं जिनके लिए देश सब कुछ है। वो दो घंटे बाद ही अपने दैनिक कार्यों को करने में जुट गए। आज तक बीते 8 वर्षों में प्रधानसेवक मोदी ने एक दिन का अवकाश भी नहीं लिया। कहा जाता है जीवन में एक बार उनको दंतपीड़ा हुई जिसका उन्होनें इलाज करवाया था । जिस नरेंद्र को हीरा बा ने गढ़ा हो उस बेटे को संस्कार भी उसके जैसे ही मिलेंगे। बा के दिए संस्कारों का ही प्रताप है कि दु:ख की बेला में भी कर्म को प्रधान मानने वाले नरेंद्र मोदी की चमक एक बार सोने जैसी तो हो ही गई है । ये समाचार छपकर जब आप तक पहुंचेगा तो तय मानिए सोशल मीडिया में प्रधानसेवक नरेन्द्र मोदी की मां के देवलोकगमन की तस्वीरें और वीडियो करोड़ों बार देखे जा चुके होंगे। बड़ा प्रधान नरेन्द्र दामोदर दास मोदी ने अपने इस पुण्यकार्य से समाज के सामने एक अनुकरणीय मिसाल भी पेश की है। हीरा बा को सादर अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि ! ईश्वर हीरा बा को अपने श्री चरणों में स्थान दे और उनकी दिवंगत आत्मा को शांति मिले।

No comments: