भारत की आध्यात्मिक भूमि पर ऐसे अनेक तीर्थ स्थल हैं, जहाँ
प्राचीन ज्ञान और आधुनिक संकल्प एक साथ जुड़कर मानवता को नई दिशा देते हैं। इन्हीं
में से एक है एकात्म धाम, जो मध्यप्रदेश के पावन ओंकारेश्वर में
स्थित है। यह धाम आदि गुरु शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत दर्शन और “एकात्मता”
के
सार्वभौमिक संदेश को समर्पित है। नर्मदा नदी के किनारे मांधाता पर्वत पर स्थित यह
स्थल न केवल एक तीर्थ है, बल्कि सांस्कृतिक एकता, आध्यात्मिक
जागरण और वैश्विक सद्भाव का प्रतीक भी बन रहा है।
ओंकारेश्वर का ऐतिहासिक महत्व
ओंकारेश्वर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ओमकारेश्वर
ज्योतिर्लिंग का स्थान है। नर्मदा नदी के बीच स्थित यह “ओम” आकार
का द्वीप प्राचीन काल से ही तीर्थयात्रियों का प्रमुख केंद्र रहा है। किंवदंती है
कि विन्ध्य पर्वत ने यहां शिव की आराधना की और शिव स्वयं ओमकारेश्वर रूप में प्रकट
हुए। 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य का जीवन से इस स्थल का गहरा
संबंध है। यहीं उनकी गुरु गोविंद भगवत्पाद से दीक्षा पाने के साथ ही उन्होंने
अद्वैत दर्शन की गहराई प्राप्त की। शंकराचार्य ने पूरे भारत में चार मठों की
स्थापना कर सनातन धर्म का पुनरुत्थान किया और “ब्रह्म सत्यं
जगन्मिथ्या” जैसे महान सिद्धांत दिए। एकात्म धाम इसी योगदान को याद दिलाता
है और उनके दर्शन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है।
एकात्म धाम की संकल्पना
मध्यप्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना के रूप में
आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के तहत एकात्म धाम का विकास किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य अद्वैत वेदांत को वैश्विक स्तर पर प्रसारित करना, सांस्कृतिक
एकता को मजबूत करना और मानवता में एकत्व का
भाव जगाना है।
आचार्य शंकर ने भारतवर्ष का भ्रमण कर सम्पूर्ण राष्ट्र को
सार्वभौमिक एकात्मता से आलोकित किया। आचार्य शंकर की एकात्मता की प्रतिमा
108
फीट ऊंची भव्य प्रतिमा बहुधातु से निर्मित है। यह आदि शंकराचार्य को समर्पित है और
“एकात्मता”
का
सन्देश दे रही है। 21 सितंबर 2023 को इसका अनावरण हुआ था। नर्मदा नदी और
मांधाता पर्वत के सुरम्य वातावरण में यह प्रतिमा दूर से ही दर्शन देती है। यहाँ
स्थित अद्वैत लोक एक आधुनिक संग्रहालय है, जिसमें आचार्य शंकर के जीवन,
उनके
दर्शन, शास्त्रार्थ और सनातन धर्म की विभिन्न वीथिकाएं, लेजर-लाइट
शो, फिल्म
और प्रदर्शनियां होंगी। यहां सृष्टि की एकता को समझाने वाले केंद्र भी बनाए जा रहे
हैं।
आचार्य शंकर अंतर्राष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान में वेदांत
दर्शन, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और कला पर शोध केंद्र,
शंकर
कलाग्राम, नर्मदा विहार,ध्यान केंद्र, ग्रंथालय,
गुरुकुल
और विस्तार केंद्र शामिल हैं। मोहन सरकार द्वारा इसे महाकाल लोक की तर्ज पर
विकसित किया जा रहा है।परियोजना में संग्रहालय, शोध-केंद्र,
शैक्षिक
सुविधाएँ तथा तीर्थ और सांस्कृतिक पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे का विकास शामिल
करने की रूपरेखा रखी गयी है जिससे न केवल आध्यात्मिक-अध्ययन को बल मिलेगा बल्कि
स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
एकात्मधाम के अंतर्गत दूसरे चरण में 2195 करोड़ रूपये
की लागत से आचार्य शंकर के जीवन और दर्शन पर केंद्रित अद्वैत लोक संग्रहालय का
निर्माण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आचार्य शंकर के जीवन, उनके
भाष्यों, पांडुलिपियों, दर्शन एवं सांस्कृतिक विरासत को
संरक्षित व प्रदर्शित करना है।
2028
तक मुख्य निर्माण कार्य पूरे होने की उम्मीद है।
700 से अधिक युवा शंकरदूतों ने ली दीक्षा
इस वर्ष आयोजित हुए पांच दिवसीय अनुष्ठान में भारत की दिव्य
संन्यास परंपरा के अनेक शीर्ष संत, आर्ष चिंतक और विशिष्टजन सहभागिता कर
एकात्मता के वैश्विक संदेश को रेखांकित किया। इस आयोजन में देश-विदेश के 700 से
अधिक युवाओं
ने ‘शंकरदूत’ के रूप में
दीक्षा ली।
मौजूदा दौर में जब पूरी दुनिया में भेदभाव, संघर्ष
और अलगाव बढ़ रहा है ऐसे में एकात्म धाम यह बताता है कि आत्मा की एकता से ही समाज,
राष्ट्र
और विश्व की एकता संभव है। मोहन सरकार
'एकात्म
धाम' के
माध्यम से आचार्य शंकर के दर्शन को वैश्विक फलक पर स्थापित करने के प्रयासों में
जुटी हुई है।‘एकात्म पर्व’ जैसे आयोजन संतों, विद्वानों
और आमजन को एक मंच पर लाने का अनुपम कार्य कर रहे हैं। एमपी की मोहन सरकार के
प्रयासों से यह धाम जल्द ही सनातन धर्म की अमर विरासत को संजोते हुए एक दिन
वैश्विक एकता का बड़ा केंद्र बनेगा।
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