Friday, 3 July 2026

एमपी की राजनीति में ‘एम फैक्टर’ की छाया में सिमटते कैलाश विजयवर्गीय

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा सरकार की मजबूत पकड़, विकास परियोजनाओं पर उनका सीधा नियंत्रण और संगठनात्मक स्तर पर बढ़ती निर्णायक पकड़ ने भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के लिए मौजूदा दौर में चुनौती खड़ी कर दी है। इसी कड़ी में एक बार फिर प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का नाम जुड़ा है जो कई सार्वजनिक मंचों पर पार्टी के नेतृत्व को सार्वजनिक रूप से असहज करते जा रहे हैं।  

विजयवर्गीय का लैटर बम

हाल ही में कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने अपने गृह जिले इंदौर की उपेक्षा का सीधा आरोप लगाया। पत्र में उन्होंने दावा किया कि मोहन सरकार में पिछले ढाई वर्षों से उन्हें केवल असहयोग और उपेक्षा ही मिल रही है। कथित पत्र में मास्टर प्लान में देरी, मेट्रोपालिटन सिटी योजना में इंदौर का नाम पीछे किए जाने, एयरपोर्ट विस्तार के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराने, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विभाजन में इंदौर की अनदेखी, औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में सुविधाओं के अभाव और सिंहस्थ के कार्यों में इंदौर को शामिल नहीं किए जाने सहित कई मुद्दे उठाए जाने की बात कही है जिसके बाद पूरे प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज है। पत्र में कथित तौर पर कैलाश विजयवर्गीय ने यह भी लिखा है कि उन्हें ढाई वर्ष से सिर्फ असहयोग, उपेक्षा और विरोध ही मिला है और वह उपेक्षा से आहत हैं। यदि इन विषयों का समाधान नहीं हुआ तो इंदौर की जनता की आवाज को सार्वजनिक मंच पर उठाना उनकी विवशता होगी। इस लैटर बम ने सत्ता पक्ष के साथ ही विपक्ष में भी हड़कंप मचा दिया है।

‘कैलाश’ के तीर घाव करे गंभीर

कैलाश विजयवर्गीय का नाम भाजपा के उन वरिष्ठ नेताओं में शुमार है जो अपनी बात किसी भी सार्वजनिक मंच में आगे रखने से नहीं हिचकिचाते। अपनी ही सरकार पर नाराजगी जताने और सदन में अपने तीखे बयानों के लिए मशहूर कैलाश विजयवर्गीय  मध्यप्रदेश में मोहन सरकार के अब सबसे चर्चित चेहरे बन चुके हैं।  

जब भी कैलाश विजयवर्गीय बोलते हैं बिना लाग-लपेट के बोलते हैं। इंदौर के भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से मौतों के मामले में मीडिया के सवालों पर कैलाश ने गुस्से में आपा खो दिया और पत्रकार को ‘औकात’ में रहने को कहा था जिसके बाद सूबे की सियासत में बवाल मच गया। बाद में सफाई देते हुए उन्होंने माफी मांगी, लेकिन विपक्ष ने इसे लेकर मोहन सरकार की घेराबंदी करने में जुट गया और उनके इस्तीफे की मांग कर डाली। मजबूर होकर मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव को सदन में माफी मांगनी पड़ी।  

सदन में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार के साथ बहस में उन्होंने असंसदीय शब्दावली का इस्तेमाल किया, जिस पर फिर से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सदन में माफी मांगने पर मजबूर होना पड़ा। यही नहीं कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठकें छोड़ने में भी कैलाश विजयवर्गीय पीछे नहीं रहते। अभी कुछ समय पहले इंदौर में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की उपस्थिति में हुए एक लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंच पर बैठे थे लेकिन कैलाश विजयवर्गीय दूर कुर्सी पर बैठे थे। उनको इस तरह से अकेले बैठे देखकर मंत्री तुलसी सिलावट ने उनका हाथ पकड़कर कुर्सी से उठाया। तब भी विजयवर्गीय के इस व्यवहार ने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा था।

हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ सार्वजनिक मंच शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार आने के बाद कई अधिकारी खुलकर आरएसएस से जुड़ने का दावा करने लगे हैं। उन्होंने संगठन में अच्छे कार्यकर्ताओं की कमी का भी जिक्र किया जिसने आरएसएस समर्थकों और पार्टी के अंदरूनी हलकों में असहजता पैदा करने का काम किया है। यह सभी घटनाएं दिखाती हैं कि विजयवर्गीय की "मुंहफट "बोलने की आदत सरकार के लिए परेशानी का सबब बन रही है। एक तरफ यह सत्तारूढ़ पार्टी की परेशानियों को बढ़ाने का काम करती है वहीँ दूसरी तरफ विपक्ष को सरकार के प्रति हमलावर होने का मौका मिल जाता है।

एमपी की राजनीति के केंद्र में अब ‘एम’ फैक्टर

मध्यप्रदेश की राजनीति में पिछले कुछ समय से एक नए ‘एम फैक्टर’ यानी मोहन फैक्टर’ की बड़ी चर्चा है। दिसंबर 2023 मे मुख्यमंत्री बनने के बाद से डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश की राजनीति में छाए हुए हैं। उनकी छवि सरकार और संगठन में बेहतर तालमेल बनाने वाले,पारदर्शी प्रशासन देने वाले, त्वरित निर्णय लेने वाले आम जनता के मुख्यमंत्री की बनती जा रही है। देश के विभिन्न राज्यों के चुनाव प्रचार के दौरान उनकी निर्णायक भूमिका रही है। मध्यप्रदेश में उनकी विजनरी नेतृत्व और पीएम मोदी के मार्गदर्शन में विकास योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन हो रहा है। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में भाजपा की तीनों सीटों पर जीत ने उनके कद को पूरे देश में तेजी से बढ़ाने का काम किया है। इंदौर समेत मालवा-निमाड़ क्षेत्र में उनकी दिनों- दिन मजबूत होती पकड़ के साथ ही ‘मोहन फैक्टर’ एमपी में अब केवल विकास का पर्याय नहीं, बल्कि सत्ता के वितरण और ठोस निर्णय लेने वाली प्रक्रिया में केंद्रीकरण का प्रतीक भी बन गया है जिससे भाजपा के कई पुराने दिग्गज नेताओं की सरकार से लेकर संगठन में पकड़ कमजोर होती जा रही है। प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का लैटर बम भी आज इसकी बखूबी तस्दीक करता है। 

हिलोरें मारती सीएम बनने की हसरतें और बगावत की धमकी

भाजपा में उमा भारती के सत्ता से हटने के बाद कैलाश विजयवर्गीय मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बनना चाहते लेकिन शिवराज सिंह चौहान की दिल्ली से हुई ताजपोशी ने उनका खेल खराब कर दिया। शिवराज सरकार में उनकी गिनती एक दौर में नंबर दो के तौर पर होने लगी थी लेकिन शिवराज सिंह चौहान की कुर्सी को अस्थिर करने में भी उन्होनें कोई कसर नहीं छोड़ी। अपने पक्ष में तेजी से विधायकों की लाबिंग होते देख पार्टी आलाकमान ने उन्हें प्रदेश की राजनीति से केंद्र की राजनीति में भेज दिया  जिसके बाद उन्होनें हरियाणा में भाजपा के पक्ष में माहौल बनाया और वहाँ पहली बार भाजपा की सरकार बनाई। इसके बाद वह पश्चिम बंगाल भी भेजे गए लेकिन वहाँ भाजपा की सरकार बनाने में सफल नहीं हो सके जिसके बाद पार्टी आलाकमान ने उनकी घर वापसी कर दी और 2023 के विधानसभा चुनाव में इंदौर-1 सीट से प्रत्याशी बनाया। इंदौर-1 सीट से प्रत्याशी बनाए जाने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने ऐसे बयान दिए जो काफी चर्चा में रहे। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया था कि यदि वह चुनाव जीते तो सिर्फ एक विधायक नहीं रहेंगे, बल्कि पार्टी उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी देगी। प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद शिवराज सिंह चौहान को भाजपा ने जब मुख्यमंत्री नहीं बनाया तो कैलाश विजयवर्गीय खुद को सीएम के बड़े चेहरे के तौर पर देखने लगे। जब आलाकमान ने डॉ. मोहन यादव के नाम पर अंतिम मुहर लगाई तो सबसे अधिक इमोशनल अत्याचार कैलाश विजयवर्गीय पर हुआ और सीएम बनने की उनकी हसरतें ध्वस्त हो गई।   

मौजूदा दौर में मध्यप्रदेश के सबसे मजबूत चेहरे के रूप में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव  अपने विकास कार्यों से जन-जन में लोकप्रिय हो रहे हैं। पारदर्शी सरकार, त्वरित निर्णय, सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन से उनका कद न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी तेजी से बढ़ रहा है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व में न केवल मध्यप्रदेश का चहुमुंखी विकास हो रहा है बल्कि प्रदेश के हर तबके के लिए उनकी सरकार काम कर रही है।मध्यप्रदेश की राजनीति में डॉ. मोहन यादव एक पावरफुल केन्द्र  बन चुके हैं  जो सरकार और संगठन के साथ बेहतरीन ढंग से कदमताल करते नजर आते हैं। डॉ.मोहन यादव की बढ़ती लोकप्रियता मध्यप्रदेश के पुराने दिग्गज नेताओं को रास नहीं आ रही है। मोहन का बढ़ता कद भाजपा के कैलाश विजयवर्गीय जैसे पार्टी के कई पुरानी पीढ़ी के नेताओं को हजम नहीं हो रहा है और उनकी कुर्सी को अस्थिर करने के लिए ‘लैटर बम’ के सहारे वार किए जा रहे हैं।   

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