सोमवार, 17 नवंबर 2008

ऐसी गारंटी के क्या मायने ... जहा हो छलावा................

अपने देश की बड़ी आबादी गावो में निवास करती है इस कारन भारत को गावो का देश भी कहा जाता है परन्तु इस सच्चाई से भी नही मुकरा जा सकता आज भी अपने देश की करोडो की आबादी प्रतिदिन २० रुपया डोलर से भी कम पर जीवन यापन करती है इस आबादी की एक बहुत बड़ी संख्या परंपरागत रूप से कृषि पर निर्भर है जो अनाज उगाकर अपना भरण पोसन करती है पिचले कुछ अरसे से गाव की जनता का कृषि कार्य से मोहभंग होता जा रहा है जिस कारन वह कम छोड़कर शहरकी और रुख कर रहे है ग्रामीणों की पलायन दर को रोकने के लिए संप्रग सरकार ने २००६ में रोजगार गारंटी योजना की शुरूवात की ,जो शुरू में देश के २०० जिलो में लागू की गयी वर्त्तमान में देश के सभी जिलो में यह लागू की गयी है इस योजना में एक परिवार के एक सदस्य को १०० दिन के काम का वादा किया गया है जिसमे न्यूनतम मजदूरी की दर ७० रूपया निर्धारित की गयी है
" नाम बड़े और दर्शन छोटे" जी हाँ ,यही है संप्रग सरकार की रोजगार गारंटी योजना का हाल यह कोई ख्याली पुलाव नही संप्रग सरकार के ग्रामीण विकास के दावो की हवा निकालने के लिए काफी है जिस उत्साह के साथ देश के ग्रामीण विकास मंत्री और सोनिया ,मनमोहन ने इसको लागू किया था वह उत्साह अब ठंडा पड़ गया है बड़े पैमाने पर पिछले कुछ समय से इसमे बड़ी धांधली हुई है उसको देखते हुए सरकारकी इस योजना को सफलता नही मिल पा रही है




संप्रग सरकार द्वारा इसको लागू करने के पीछे का कारन यह था ,गाव की जनता की दशा सही की जाए यह एक तरह से अपने साथ गाव के लोग को अपने और लुभाने का संप्रग का एक प्रयोग था लेकिन सरकार को सच का पता नही है हो भी क्यों नही? पैसा खाना हमारे जीवन का अंग बन गया है" कांग्रेस के युवराज " राहुल बाबा "के "पापा" कहते १ रूपया में 1५ पैसा गाव तक पहुचता हैआज उनके पुत्र अगर यह कहते है की ५ पैसा ही जा रहा है तो ग़लत क्या है यह कहने में ?कही न कही यह हमारे देश के हाल को बताता है रोजगार गारंटी के भी यही हाल है गाव और पंचायत में काम करने वाले कर्मचारियों की कमी के चलते यह योजना साकार रूप नही ले पा रही है साथ में राज्य सरकार भी गाव तक धन पहुचाने के लिए कोई नियम कानून नही बना पा रहे है ग्राम पधान जमकर पैसा कमा रहे है.... लूट मची है चारू तरफ.... जितना खा सको खा लो .... अभी मौका अच्छा है... साथ में लोगो को न फॉर्म ही मिलपा रहे है है न जॉब कार्ड यहाँ तक की गाव में लोगो को यह पता नही की इस योजना में ७० रूपया सरकार दे रही है अभी पिछले महीने उत्तराखंड के कई गाव से लौटा तो यह जानकर दुःख हुआ की लोग इस पर कुछ भी नही जानते॥ अमीर को गरीब बनाकर रोजगार दिया जा रहा है इसमे....अपने अधिकारी भी जमकर पैसा बना रहे है उत्तराखंड के एक युवक ने मुझसे यह कहा की हमारे यहाँ के एक अधिकारी और बाबु ने इसके पैसे से कार खरीद ली है २ बरस हो जाने के बाद भी योजना के हाल ख़राब हो चले हैपिछले वर्ष एक बहुत बड़ी रकम वापस गयी..... ऐसे में "क्या और कैसा भारत" ..." कैसा रोजगार.".... आम लोग के पास आज खाने के लिए पैसे नही है........ महंगाई आसमान छु रही है.... गरीब की थाली महंगी हो गयी है २ बार का खाना नसीब नही हो पा रहा है ऐसे में १०० दिन के काम से क्या होगा.....? आम लोगो की थाली के बारे में कोई नही सोच रहा है मनमोहन, मोंटेक, चिदंबरम तमाशा देख रहे है कांग्रेस ने देश में लंबा सासन कर लिया है पर भारत वही का वही खड़ा है.... मेरे दिल्ली के दोस्त सही कहते है हर्ष "हमाम में सभी नंगे है" .... आब क्या वाम पंथी क्या दक्सिनापंथी क्या कांग्रेसी ?.......
अपने delhi के dosto से ajkal बात हो rahee है ब्लॉग पर लिखने के कारन wah

2 टिप्‍पणियां:

govind ने कहा…

Hi bro...It was nice to read ur blog.really One day u will break all the limits.my best wishes always with u....Bhula khub mehnat kariye, ek din uttranchal nam roshan kariye,jab lai laikhle sachhai lekhiye,patrakarita kai business jin banaye.kabhai kabhai hamar zikar lai kar diye......
Good luck.....

RD ने कहा…

Harshu, all the blogs are really wonderful. I got extreme happiness , when saw your precious article in google blog.I really impressed that you can put live on stone by your words. One day you will shine in print as well as electronic media, as i hope and wish. Keep it up and work hard more . As you know there is no limit of sky . Keep one thing in mind
" Great minds have purpose, others have wish". Iam happy that , you have purpose. You will definitely win the race.
Your big bro
RAM