सोमवार, 17 नवंबर 2008

भारत में रेडियो प्रसारण

भारत में रेडियो प्रसारण का श्रीगणेश जून 1923 में हुआ जब बम्बई क्लब ने अपने कार्यक्रम प्रसारित किये |  कलकत्ता रेडियो क्लब द्वारा नवम्बर 1923 में कार्यक्रमों का प्रसारण किया गया लेकिन सुव्यवस्थित रूप से नियमित प्रसारण का प्रयास मद्रास रेडियो क्लब द्वारा 31  जुलाई 1924 में  किया गया इसके पास आरम्भ में एक 40 वाट का ट्रांसमीटर था बाद में इस क्लब ने 40 वाट के ट्रांसमीटर को हटाकर 200 वाट के ट्रांसमीटर पर प्रसारण करना शुरू कर दिया | 1922 में ब्रिटेन में बीबीसी का स्थापना के बाद 1923 में कलकत्ता मेंजून 1924 में मुम्बई और  फिर अगस्त 1924 में मद्रास में रेडियो क्लब के द्वारा भारत में आकाशवाणी का शौकिया प्रसारण शुरू हुआ परन्तु व्यवसायिक स्तर पर पहला प्रसारण इंडियन ब्राडकास्टिंग कम्पनी के मुम्बई केन्द्र से 23 जुलाई 1927 दूसरा कलकत्ता में महीने भर बाद 26 अगस्त 1927 को शरू हुआ  जिसका उदघाटन भारत के तत्कालीन वायसराय लार्ड इरविन ने किया था। सन 1927 में भारतीय प्रसारण ने क्लबों और शौकिया गतिविधियों से निकलकर निजी क्षेत्र में व्यावसायिक प्रसारण के दौर में प्रवेश किया |   इंडियन ब्राड कास्टिंग कम्पनी मूल से एक व्यवसायिक संगठन के रूप में आयी मगर इसके कार्यकलापों पर ब्रितानी छाप देखी जा सकती  थी |  कलकत्ता और बम्बई के स्टेशनों ने संगीत और नाटकों को प्रोत्साहन देने में अच्छी भूमिका निभाई लेकिन  आर्थिक संकट ने इसे तोड़ दिया |

1 मार्च  1930 को कम्पनी बंद हो गई और  इसी के साथ आने वाले कई दशकों के लिए रेडियो के निजी क्षेत्र का पटाक्षेप हो गया इंडियन ब्राडकास्टिंग कम्पनी पर ताला लग जाने के बाद सरकार सामने आ गई |  प्रसारण चालू रखने के लिए और इसे बनाये रखने के लिए सरकार को लोगों की तरफ से ज्ञापन मिलने लगे |  सरकार ने कलकत्ता और बम्बई के स्टेशनों का अधिग्रहण कर लिया और “इंडियन ब्राड कास्टिंग” कम्पनी का नाम बदलकर “इन्डियन ब्राड कास्टिंग सर्विस” रखा गया  और इस सबके बीच 10 अक्टूबर, 1931 को सरकार ने घोषणा की कि आर्थिक मंदी की वजह से रेडियो प्रसारण सेवा जारी नहीं रखी जा सकती है |  सरकार के इस फैसले पर भारी नाराजगी हुई और खासकर बंगाल में छोटे-मोटे आन्दोलन का दौर भी खूब चला |  अंततः सरकार ने अपना निर्णय 23 नवम्बर 1931 को वापस ले लिया और यह सुनिश्चित हो गया कि भारत में प्रसारण कार्य सरकार की जिम्मेदारी है |  सरकार को प्रसारण तंत्र की उपयोगिता भी समझ में आने लगी मैसूर विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर डॉ. गोपाल स्वामी ने अपने घर में एक 30 वाट का ट्रांसमीटर लगाया और सितम्बर  1935 में प्रसारण कार्य शुरू किया अपनी इस सेवा को उन्होंने “आकाशवाणी” नाम दिया |

   



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