रविवार, 16 नवंबर 2008

राजनीतिक दलों का विघटन

समय के साथ मनुष्य की परिस्थितियों में परिवर्तन होता रहता है। इसके पीछे वर्त्तमान में आर्थिक, सामाजिक, स्वास्थ्य , समाज को प्रभावित करने वाले कारण रहे हैं । इन्ही से सभी समस्या जुड़ी हुयी है जिनका समाधान न होने पर जन में रोष पनपता है। यह हमारे समाज का बड़ा दुर्भाग्य है के राजनीतिक दल समस्या से समझोता कर अपने लाभ के लिए भुनाते रहते है। कम से कम हमारे जनता के उन समस्याओ का समाधान तो कारगर ढंग से होना चाहिए जिनका वास्ता मूलभूत जरूरतों से है। आज भी भारत की एक बड़ी आबादी गाव में रह रही है जिसके पास आय २० रुपैया से कम है । उसकी मूलभूत जरूरतों का समाधान कर पाने में नेतागण सफल नहीं हुए है। विकास जैसे कई मुद्दे आज गौण हो गए है जबकि होना यह चाहिए राजनीतिक दलों का मुख्य मुद्दा विकास होना चाहिए लेकिन दल जब विघटन पर हो तो निराशा होती है ।

आज के दलों का चेहरा अलग हो गया है। देश में जो समस्या पुराने दौर में थी वही आज भी है। कुर्सी से प्यार करने वाले नेताकैसे भी सरकार चाहते है। दलों के भीतर के कुछ नेता तो फतवा लेने करने से पीछे नही रहतेसब का लाभ अपने तक होता है। आज दलों में बात में एकता नही है जिस कारण देश में कई स्थानीय दल हो गए है। साझा सरकार का दौर चल पड़ा है। हाल ऐसा है एक के मन के नही हुए तो सरकार को टाटा बोलना पड़ता हैफिर वही नयी सरकार लाओ लोग क्या करे ? सरकार नयी लाओ ।

फिर मौसम गरम हो गया है। नेता घर पर आने लगे है । जीना जो है । जन को कोई आशा नही है। नेता से अब जमाना वैसा नही रहा जब लोहिया कहा करते "भारत के लोगो की आमदनी ५ आना " प्यारे अब जमाना बदल गया है कोई आगे नही आता। नेता बनने के लिए आज सभी एक जैसे हैं । क्या बी जे पि ...क्या बी एस पि ।

मैं भी क्या क्या लिख देता रहता हूँ । जो मन में आते रहता है वही ब्लॉग में भी चलता रहता है। कल रात दोस्त से बात हो रहे थी। कह रहा है हर्ष बहुत लंबा लंबा लिख रहे हो ब्लॉग में ऐसे तो किताब ही बन जायेगी । लेकिन क्या करे ...दिल खुश नही होता..जब तक किसी की तह तक नही जाया जाता है। यही तो पत्रकारिता है। एक बार हम लिखने चल पड़े तो पता नही कलम कहा आकर रुक जाए। ब्लॉग में भी पूरा यही हो रहा है। मिली जुली हिंगलिश हो रही है। अभी ज्यादा समय नही हुआ है शुरू हुए ..मुश्किल से ६ दिन। आने वाले समय में यह भी ठीक कर दूंगा । लेकिन लंबा तो लिखूंगा ही जब तक पूरा मन न भर जाए । कंजूसी नहीं । आज पहली बार कम लिख दिया है। कोई बात नही कल आगे.................

1 टिप्पणी:

गजेन्द्र सिंह भाटी हाडलां (बीकानेर) ने कहा…

Hi Harsh.

you write well. selection of subjects is heartening.

Write easy.You'll do well.

gajendra singh bhati
god bless you.